चुदक्कड़ अम्मी ने बेटियों को लण्ड की शौकीन बना दिया

मेरा नाम शकीरा बेगम है दोस्तो.
मैं इस समय 44 साल की एक खूबसूरत मस्त जवान औरत हूँ। मैं अपने तन बदन का बहुत ख्याल रखती हूँ।

मेरा रंग गोरा है, मेरा कद 5′ 4″ है और चेहरा गोल है।
मेरी आँखें बड़ी बड़ी हैं, मेरे मम्मे भी बड़े बड़े हैं और मेरी बांहें एकदम खुली हुई हैं, मतलब मेरा सीना चौड़ा है।

मैं आज के परिवेश में रहती हूँ, पढ़ी लिखी हूँ, बिंदास हूँ और एक बड़े खानदान से तालुक रखती हूँ।

मेरी दो बेटियां हैं जिनके घरेलू नाम हैं शन्नो और बन्नो।

मेरी शादी को जब 10 साल हुए थे तब एक छोटी सी बात पर शौहर से कुछ ‘तू तू मैं मैं’ हो गयी तो उसने मुझे तलाक दे दिया।
मैं उसके घर रुकी नहीं बल्कि अपने अब्बू के घर आ गई।

मैंने उसकी झांट परवाह नहीं की, मैंने कहा- तू भोसड़ी का मेरा क्या उखाड़ लेगा? मेरी एक झांट भी टेढ़ी नहीं कर पायेगा तू … तेरे पास है ही क्या? तूने तो दहेज़ के बल पर मुझसे शादी की थी। तेरे पास जितना पैसा है उतना तो मैं अपनी चूत के रख रखाव में खर्च कर देती हूँ। तेरी माँ का भोसड़ा! तू समझता है कि तूने मेरी जवानी बरबाद कर दी? तो तू बहुत बड़ा चूतिया है … तू नहीं तो क्या मुझे चोदने वाले सैकड़ों हैं। बड़े बड़े लण्ड वाले मुझे चोदने के लिए लाइन में खड़े रहतें हैं। तेरा पिद्दी भर का लण्ड साला ठीक से फुद्दी चोद भी नहीं पाता। मैंने तो ग़ैरों से चुदवाकर दो बेटियां पैदा की हैं. तेरे सहारे रहती तो अब तक कुछ भी नहीं होता. मैं जा रही हूँ, अब लौट कर वापस नहीं आऊंगी।

मैं सच में बड़ी सेक्सी और हॉट औरत हूँ दोस्तो!
मेरी उम्र जरूर 44 साल की है पर मैं 30 / 32 साल से ज्यादा की नहीं लगती हूँ।
ऐसा लोग कहते हैं।

मुझे लण्ड पकड़ने का और चुदवाने का जबरदस्त शौक है।
मैं आज की औरत हूँ, मॉडर्न ज़माने की औरत हूँ और खुल्लम खुल्ला सेक्स एन्जॉय करने वाली औरत हूँ। मैं खुल कर गन्दी गन्दी बातें भी करती हूँ और प्यार से गालियां भी देती हूँ।

प्यार मोहब्बत से चोदा चोदी करते हुए ज़िन्दगी गुजारना ही मेरा मकसद है।

मैं अपने अम्मी और अब्बू के साथ बेटियों के सहित रहने लगी.

कुछ दिन बाद मेरे अब्बू भी चल बसे और मेरी अम्मी जान भी!
अब पूरे घर में मेरा ही कब्जा हो गया।

उधर मेरी बेटियां भी बड़ी होने लगीं। मैं अपनी जिस्म की आग बुझाने के लिए बाहर से चुदवा कर आने लगी।

कभी अपने नाते रिश्तेदारों से चुदवा लेती, कभी अपने गली मोहल्ले वालों से या पास पड़ोसियों से चुदवा लेती, कभी किसी पार्टी में कोई लण्ड मिल जाता तो उसे चूत में पेलवा लेती, कभी अपने सहेलियों के शौहरों से चुदवा कर आ जाती।

बस ऐसे ही काम चलता रहा।

हां एक बात और है कभी जब मेरी बेटियां कॉलेज में होती तो मैं अपने यारों को बुलाकर उनसे घर में ही चुदवा लेती।
मुझे कभी लण्ड की कमी महसूस नहीं हुई।

और जब मेरी दोनों बेटियां जवान हो गईं तो मैं सोचने लगी कि अब क्या किया जाए?
कहाँ तक मैं छुपछुप कर चुदवाती रहूंगी?



एक न एक दिन मेरी बेटियों को पता चल ही जाएगा।
तो फिर क्यों न अब उनसे खुल कर बात की जाए!

एक दिन मैंने दोनों बेटियों को बुलाया और कहा- देखो शन्नो और बन्नो, अब तुम जवान हो गई हो. इसलिए मैं तुमसे कुछ भी छुपाना नहीं चाहती। तुमसे खुल कर बात करना चाहती हूँ। मैं भी अभी जवान हूँ। सच्चाई यह है कि हम तीनों को चाहिए लण्ड, लण्ड और लण्ड. तुम लोग भी लण्ड का मज़ा लेना सीखो। लण्ड चूमना, चाटना और चूसना सीखो। लण्ड पेलवाना सीखो। माँ चुदाना सीखो।

मैंने आगे कहा- अब देखो घर में तो कोई लण्ड है नहीं, बाहर वालों के लण्ड का ही भरोसा है। ऐसे में क्यों न हम तीनों मिलकर लण्ड का जुगाड़ करें और मिलकर लण्ड का मज़ा लूटें! एक लण्ड मिले चाहे दो … अब आज के बाद हम तीनों मिलकर उसका मज़ा लेंगी।

मैं उनसे बात करती रही- देखो बेटी, मैं मादरचोद बड़ी चुदक्कड़ औरत हूँ। मैं लण्ड के बिना एक दिन भी नहीं रह सकती। मैं जानती हूँ कि तुम लोग भी लण्ड के बिना नहीं रह सकती। तो फिर आज से ही शुरू हो जाओ। आज से हम तीनों दोस्त हैं और एक दूसरे की चूत का ख्याल रखने वाली सहेलियां हैं। खुल कर गन्दी गन्दी बातें करो, हंसी मजाक करो और खूब प्यार से गालियां दे दे कर जवानी का मज़ा लूटो। जवानी का हर एक दिन बड़ा कीमती होता है। इसे बर्बाद न करो।

फिर मैं गाली देकर बोली- समझ में आया बुरचोदियों शन्नो और बन्नो? तेरी माँ का भोसड़ा!
दोनों एक स्वर में बोली- हां समझ में आ गया मेरी हरामजादी अम्मी जान!
फिर हम तीनों खिलखिलाकर हंस पड़ीं।

मेरे मन में ख्याल आया कि ये दोनों मस्त जवान लड़कियां है तो लण्ड अभी तक पकड़ा जरूर होगा. हो सकता है कि पेलवाया भी हो. पर बताया नहीं मुझे.
बताती भी कैसे … अभी आज ही ये मेरे सामने खुली हैं। अब आगे सब कुछ मालूम होगा।

मैं यही सब सोच ही रही थी कि किसी ने डोरबेल बजा दी।

मैंने दरवाजा खोला तो सामने असद खड़ा था।
वह मेरी ननद का बेटा है।

उसके पीछे एक और लड़का था।

असद बोला- मामी जान, ये मेरा दोस्त अमन है।

मुझे दोनों लड़के एक ही नज़र में भा गए। मैंने मन में कहा कि मैं अभी लण्ड की बातें कर ही रही थी कि ऊपर वाले ने मेरे पास दो दो लण्ड भेज दिये।

आज तो मैं बिना इनके लण्ड अपनी जवान बेटियों की बुर में पेलकर मानूंगी. चाहे उनकी माँ चुद जाए भोसड़ी वाली।

मैं दोनों को बैठा कर बातें करने लगी।

मैंने कहा- असद, तू तो बहुत बड़ा हो गया है. मरद बन गया है तू!
वह बोला- हां मामी जान, मरद तो मैं वाकई बन गया हूँ.

“तो फिर तेरी शादी कब हो रही है?”
“बस एक महीने के बाद हो जाएगी।”

“अरे वाह! तो फिर सुहागरात में क्या करोगे?”
“वही करूँगा जो सब करते हैं!”

“आजकल तो लोग तो सुहागरात में अपनी बीवी दूसरों से चुदवाते हैं, क्या तुम भी चुदवाओगे?”
“अगर मेरी बीवी मान गयी तो दूसरों से चुदवा लूंगा, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं क्योंकि मैंने अमन की बीवी उसकी सुहागरात में चोदी थी।”

“तो इसका मतलब तुमको बुर चोदना आता है।”
“हां चोदना तो जरूर आता है मामीजान!”
“तो फिर मुझे चोद कर दिखाओ।”

इतने में मेरी दोनों बेटियां आ गयीं।
शन्नो बोली- अरे असद भाई जान, आदाब।
बन्नो ने भी आदाब बोला।

फिर उसने बताया कि ये मेरा दोस्त अमन है.
तो दोनों ने अमन को भी विश किया।

असद बोला- अरे यार शन्नो, तुम तो लाजवाब हो गयी हो। एकदम मस्त जवान हो गई हो तुम. बड़ी अच्छी लग रही हो तुम. तेरी बहन बन्नो भी बहुत हॉट लग रही है। मैं सच कह रहा हूँ कि मेरी नियत ख़राब हो रही है तुम दोनों पर! इतना बढ़िया माल दिखाओगी तो फिर मेरे हथियार का क्या होगा?

मैंने कहा- हथियार नहीं लण्ड बोलो बेटा लण्ड! मेरी बेटियां एडल्ट हो गईं हैं, बोल्ड और बेशरम गई हैं। सब कुछ जानती हैं। एकदम खुल कर बातें करती हैं।

फिर मैंने कहा- शन्नो और बन्नो, तुम लोग इन दोनों के लिए आमलेट का नाश्ता बनाकर ले आओ।

वो दोनों आमलेट बनाने किचन में चली गयी और मैंने दोनों को सोफे पर बैठा दिया।
मैंने हंसकर कहा- भोसड़ी के असद, लगता है कि मेरी बेटियां देख कर तेरी लार टपकने लगी है।

वह बोला- हां लार तो सच में टपकने लगी है मेरी! बड़ी मस्त जवान हैं तेरी बेटियां मामी जान।

मैंने असद के पाजामे का नाड़ा खोला और उसके अंदर अपना हाथ घुसेड़ते हुए कहा- अच्छा तो मैं देखती हूँ कि तेरे लण्ड की लार टपक रही है या नहीं?
इसी तरह मैंने अमन के पाजामे के अंदर भी हाथ घुसेड़ दिया।

मैं अंदर ही अंदर दोनों लण्ड सहलाने लगी।
मुझे लगा कि लण्ड की लार लण्ड के टोपे से निकल रही है।

टोपा दोनों लण्ड का बड़ा आलिशान लग रहा था।

फिर वो दोनों भी मूड में आ गए तो मेरे मम्मे खोल डाले, मेरे बड़े बड़े स्तन सहलाने लगे।

असद बोला- मामी जान, तेरे तो बहुत ज्यादा बड़े बड़े हैं मम्मे! मज़ा आ गया इन्हें देख कर। इन्हें मसलने में बड़ा मज़ा आ रहा है.

उधर मुझे अहसास हो गया कि दोनों के लण्ड भी माशाल्ला बड़े मोटे तगड़े हैं।

फिर मैंने दोनों लण्ड पाजामे से बाहर निकाल लिये और लण्ड देखकर बोली- असद एक बात बताऊँ … तेरा लण्ड तो तेरे बाप के लण्ड से बड़ा हो गया है! बेटा असद, तेरा बाप मेरा ननदोई है। मेरे साथ उसके चुदाई के रिश्ते हैं। उसने कई बार पेला है अपना लण्ड मेरी चूत में। आज मैं तेरे साथ भी चुदाई के रिश्ते बना लूंगी।

इतने में शन्नो और बन्नो नाश्ता लेकर आ गईं.

शन्नो बोली- वाओ कितने बड़े बड़े लण्ड हैं यार शकीरा इन लोगों के? तूने तो इन्हें नंगा करके कमाल कर दिया?
बन्नो ने कहा- हां यार, लण्ड बड़े प्यारे लग रहे हैं। कितने खूबसूरत हैं दोनों लण्ड … मेरी तो चूत में पानी आ गया।

तब मैंने कहा- ले बुर चोदी शन्नो, पकड़ असद का लण्ड और ले ले पूरा मज़ा! और तू बन्नो माँ की लौड़ी पकड़ ले अमन का लण्ड तू भी मौज़ कर ले।

वो दोनों एक एक लण्ड पकड़ कर मस्ती करने लगीं।

मैं अपनी दोनों बेटियों के हाथ में एक एक खड़ा लण्ड देख कर बड़ी खुश हुई।
मैंने पहली बार अपने हाथ से अपनी दोनों बेटियों को लण्ड पकड़ाया। मुझे अपनी बेटियों पर गुमान हो रहा था।

बेटियां जब जवानी में नंगी नंगी लण्ड से खेलती हैं तो उन्हें बड़ा मज़ा आता है।

फिर मैंने अपना घाघरा खोल डाला तो मेरा भोसड़ा सबकी आँखों के सामने मचल उठा।
मैंने घूम कर शन्नो के सारे कपड़े उतार दिये, बोली- बेटी जब लौड़ा हाथ में होता है तो बदन पर कपड़े अच्छे नहीं लगते।

फिर मैंने बन्नो के भी कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह नंगी कर दिया।

मेरी दोनों मस्त जवान बेटियां जब नंगी हो गईं तो उन्हें देख कर लण्ड साले और ज्यादा टनटनाने लगे।
मैं भी उन दोनों के साथ लण्ड चाटने और चूसने लगी।

असद एक हाथ से बन्नो के मम्मे दबाने लगा और अमन एक हाथ से शन्नो की चूत सहलाने लगा।

इतने में मुझे लगा कि कोई ऊपर से उतर रहा है; कोई छत के रास्ते से आहिस्ते आहिस्ते अंदर आ रहा है।

मेरा अनुमान सही था।
वह मेरे पड़ोस का लड़का शेखू था।

वह हमारे सामने आ गया और हम सबको नंगी देख कर भौचक्का रह गया।
मैंने कहा- शेखू तू यहाँ कैसे आ गया?
वह बोला- अरे आंटी, छत का दरवाजा खुला था तो मैं अंदर आ गया।

मैंने कहा- अच्छा, तू इधर मेरे सामने आ!

जैसे ही वह आया तो मैंने उसके भी कपड़े उतार दिये और उसका लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी।
लण्ड साला पूरी तरह से खड़ा हो गया। लण्ड का साइज पूरा मर्दों वाला था।

मैंने यूँ ही पूछ लिया- कल तूने किसकी चूत में लण्ड पेला था?
वह बोला- कल रात को मैंने जोश में आकर अपनी अम्मी की चूत में लण्ड पेल दिया था।

मैंने कहा- अच्छा ऐसे कैसे हुआ?
उसने कहा- क्या करता … मेरी अम्मी जान पहले मेरे सामने मेरे जीजू से चुदवा रही थी। मेरे जीजू ने जब अपना लण्ड अम्मी की चूत से निकाल कर मेरी खाला की चूत में पेल दिया तो मैंने लण्ड अम्मी की चूत में पेल दिया। वह भी मस्ती से चुदवाने लगीं।

मैंने कहा- तो तुम अपनी माँ चोद कर आ रहे हो? मज़ा तो खूब आया होगा?
वह बोला- हां मज़ा तो सच में खूब आया।

शन्नो ने पूछा- तुम्हें अपनी माँ चोदते हुए शर्म नहीं आई?
वह बोला- मेरा दोस्त भी अपनी माँ चोदता है। मैंने उसे अपनी माँ चोदते हुए देखा था। मेरा जीजू भी अपनी माँ चोदता है इसलिए तो मुझे शर्म नहीं आई। और फिर मेरी अम्मी ने एक दिन मुझसे खुद कहा था कि बेटा चुदाई में सबकी चूत में लण्ड पेलना जायज़ होता है, इसमें कोई शर्म नहीं करनी चाहिए। चाहे माँ का भोसड़ा चोदो चाहे बेटी की बुर!

मैं शेखू का लण्ड नंगी नंगी अपनी बेटियों के सामने चूसने लगी।
फिर क्या? पूरा माहौल गर्म हो गया।

फिर असद ने शन्नो को अपनी तरफ खींचा, उसकी टांगें फैला दी और रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!
असद ने एक ही धक्के में पूरा पेल दिया लण्ड।

शन्नो चिल्ला पड़ी- हाय अम्मी जान, मर गई मैं! फट गयी मेरी बुर … इतना मोटा लण्ड पेल दिया भाई जान ने! बड़ा दर्द हो रहा है। मैं लुट गयी बहनचोद, मेरी इज़्ज़त चली गयी।

उधर इतने में अमन ने भी लण्ड बन्नो की चूत में घुसेड़ दिया।

वह भी चिल्ला उठी- हायल्ला, बड़ा मोटा है तेरा लण्ड भोसड़ी के अमन। फाड़ डाली तूने मेरी बुर … ले ली मेरी इज़्ज़त,! साले तू बड़ा हरामी है तेरी माँ की चूत … तेरी बहन की बुर।

इस तरह मेरी दोनों बेटियां बड़ी मस्ती से चुदने लगीं।
मैं ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी; मैं इसी दिन का इंतज़ार कर रही थी।

तब तक शेखू ने भी घुसा दिया लण्ड मेरे भोसड़े में।
वह भी घपाघप चोदने लगा मुझे।

मैंने कहा- माँ के लौड़े शेखू, ये तेरी माँ की चूत नहीं है, मेरी चूत है, ज़रा लौड़ा पूरा पेल पेल के चोदो।

फिर मैं भी अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी।
आज पहली बार मैं अपनी बेटियों की चुदती हुई बुर देख देख कर अपना भोसड़ा चुदवा रही थी।

मुझे बड़ा फ़ख्र महसूस हो रहा था।

शन्नो बोली- बुर चोदी शकीरा, तेरी बिटिया की बुर! तू ससुरी बड़ी हरामी औरत है। अपने सामने अपनी बेटियां चुदवा रही है।
मैंने कहा- मुझसे ज्यादा तो तू हरामजादी है शन्नो! तू मादरचोद अपने आगे अपनी माँ चुदा रही है, अपनी बहन की बुर में लण्ड पेलवा रही है। तेरी चूत की माँ की चूत!

तब तक बन्नो भी मस्ती में बोली- हाय मेरी चुदक्कड़ शकीरा, तेरी बुर की बिटिया की बुर … तुझे बेटियां चुदाने का बड़ा शौक है न … मैं किसी दिन तेरी गांड में ठोक दूँगी लण्ड!

इस तरह हम तीनों एक दूसरे को प्यार से गालियां देती हुई बड़ी मस्ती से लण्ड का मज़ा लूटने लगीं।

बन्नो फिर बोली- शन्नो, तू बहुत बड़ी बुर चोदी है, तेरी माँ भी बुर चोदी है!
मैंने कहा- बन्नो, तेरी भी बहन की बुर, तेरी भी माँ का भोसड़ा!

जानते हो दोस्तो, मैं जब बेटियों के साथ हिंदी में गालियों से बात करती हूँ तो मन खिल जाता है।
उनसे मिलकर चुदाई करती हूँ तो मैं अपने आपको उनकी जैसी ही महसूस करने लगती हूँ।

मुझे लगता है कि मैं उनकी ही उम्र की हूँ, उनकी दोस्त हूँ, उनके साथ लण्ड चाटने वाली सहेली हूँ।
ऐसे में मुझे भी जवानी का मज़ा उतना ही मिलने लगता है जितना की उनको मिलता है।

हम तीनों की चूत एक साथ एक ही कमरे में चुद रही थी। हम सब एक दूसरी की चुदती हुई चूत देख देख कर उत्तेजित हो रहीं थीं।
तीनों चूत का बाजा एक साथ बज रहा था।
मस्त मस्त चुदाई की आवाज़ और चुदाई की महक चारों तरफ फ़ैल रही थी।

इस सामूहिक चुदाई का सबको बड़ा आनंद आ रहा था।
उसके साथ गन्दी गन्दी बातों का सिलसिला भी ज़ारी था।
मैं यही माहौल बनाना चाहती थी।

शन्नो और बन्नो तो बिलकुल रंडियों की तरह चुदवा रहीं थीं और मैं तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हूँ ही!

फिर अचानक असद ने लण्ड शन्नो की बुर से निकाल कर बन्नो की बुर में घुसा दिया तो अमन ने बन्नो की बुर से लण्ड निकाल कर मेरी बुर में खोंस दिया।
इधर शेखू ने अपना टन्नाता हुआ लण्ड शन्नो की चूत में घुसेड़ दिया।

हम तीनों के लण्ड बदल गए तो एक अलग तरह का मज़ा आने लगा।

शन्नो बोली- यार शेखू, तेरा भी लण्ड बड़ा गज़ब का है. किस किस की बुर में पेलते हो अपना लण्ड?
उसने कहा- रात में जिसकी बुर खाली होती है उसी की बुर में घुसा देता हूँ लण्ड!

शेखू ऐसा कह कर शन्नो की चूत की धज्जियाँ उड़ाने लगा।

सबके मुंह से मस्ती में कुछ न कुछ निकलने लगा।
जैसे कि- हाय रब्बा बड़ा मज़ा आ रहा है .. चोद डालो मेरी बुर चोदी बुर … पूरा लौड़ा पेल दो अंदर … जल्दी जल्दी चोदो यार … अपनी बीवी समझ कर चोदो मेरी चूत … ये भोसड़ी वाली शकीरा आज मेरी चूत फड़वा कर ही मानेगी … हाय रे चीर डालो मेरी चूत … गांड़ में भी ठोक दो लण्ड … तुझे भी चोदूंगा तेरी माँ भी चोदूंगा … मैं बहुत दिनों से तुझे अपना लण्ड पकड़ाना चाहता था शन्नो … बन्नो की बुर चोदने की इच्छा बहुत दिनों से थी आज पूरी हुई … हाय रे ये बुर चोदी मेरी बेटियां देखो कितनी मस्ती से मेरा भोसड़ा चुदवा रहीं हैं … बड़ी बेशरम और बेहया हो गई हैं दोनों बेटियां … इनकी माँ का भोसड़ा … अब मैं हर रोज़ बजाऊंगी इनकी चूत का बाज़ा … तेरा साला माँ चोदने वाला लण्ड बड़ा खूंखार हो गया है … तेरा अब्बा भी बहन चोद ऐसे ही चोदता है मुझे … तुम्हें बड़ा मज़ा आ रहा है न मेरी बिटिया की बुर लेने में … ले लो खूब तबियत से ले लो उसकी बुर!

इन सब सेक्सी बातों से सबका जोश बढ़ता जा रहा था; सबकी उत्तेजना बढती जा रही थी, चुदाई की रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी।
नौजवान लड़के भी खूब जोर लगा लगा कर चोद रहे थे।
लड़कियां भी चुदवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं थीं।

कोई पीछे से चोद रहा था तो कोई आगे से … कोई लण्ड पर बैठा कर चोद रहा था तो कोई चूचियाँ चोदने में लगा था। कोई लण्ड बार बार मुंह में डालता और फिर बुर में घुसेड़ देता।
सबको अपने अपने हिसाब से चोदने की आज़ादी थी और अपने अपने हिसाब से चुदवाने की भी आज़ादी थी।

कुछ देर बाद एक एक करके सबकी चूत खलास होने लगी और लण्ड भी झड़ने लगे।
सबने झड़ते हुए लण्ड खूब मजे से चाटे।

चुदाई रुकी तो फिर नंगे नंगे ही खाना वगैरह हुआ और आपस में खूब हंसी मजाक भी हुई।

करीब एक घंटा के बाद लण्ड फिर खड़े होने लगे।
इस बार मैंने असद का लण्ड पकड़ लिया, शन्नो ने अमन का लण्ड पकड़ा और बन्नो ने शेखू का लण्ड।
उसके बाद जो घमासान चुदाई हुई वह मुझे आज भी याद है।

गाण्ड मारने की विधि २

गाण्ड की तैयारी

क्योंकि भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिए नहीं बनाया है तो यह आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उसे इस काम के लिए तैयार करें। यह तैयारी तुरन्त नहीं हो सकती। इसमें 2-3 दिन से लेकर 6-7 दिन तक लग सकते हैं। जितनी आराम से तैयारी करेंगे, लड़की को आप पर उतना ही भरोसा बढ़ेगा और आपको भी उतना ही सुख गाण्ड मारने में मिलेगा। इसलिए जल्दबाज़ी मत करें।
गाण्ड की सफाई

अगर लड़की ने मंज़ूरी दे दी है और वो गाण्ड मरवाने का अनुभव करना चाहती है तो अपने आप वो अपनी गाण्ड को अच्छी तरह से साफ करके आएगी। गाण्ड अगर गंदी होगी तो सारा मज़ा खराब हो जाएगा। सबसे मज़ेदार तरीक़ा है जब आप दोनों एक साथ स्नान करो और इस दौरान एक दूसरे के गुप्तांगों को सहलाओ और साफ करो।
ज़रूरी सामान

साफ बिस्तर
1-2 सख़्त तकिये
1-2 छोटे तौलिए
1 मोटी मोमबत्ती (1.5 – 2.0 इंच चौड़ी, 6-8 इंच लंबी)
1 ट्यूब के-वाइ जेली / नारियल तेल (तेल से जेली बेहतर है)

के वाइ जेली की ट्यूब रु 90/- किसी भी केमिस्ट की दुकान पर मिल जाएगी।
शुरुआत

ध्यान रखो कि आपकी उंगली के नाख़ून बढ़े हुए नहीं हैं और ठीक तरह से कटे हुए हैं। नाख़ून के किनारे तेज़ नहीं होने चाहिए, उन्हें ठीक से फ़ाइल कर लो। अगर नाख़ून बढ़े होंगे तो जब उंगली लड़की की गाण्ड में डालोगे तो उसे लग सकता है।

लड़की को गाण्ड की बनावट के बारे में और रिंग मसल्स को किस तरह से ढीला या टाइट कर सकते हैं, के बारे में बताओ।

अब प्यार से लड़की के कपड़े उतारो और एक साफ बिस्तर पर पीठ के बाल लिटा दो। उसकी टाँगों को मोड़ दो और थोड़ा खोल दो। अब उसके चूतड़ों के नीचे 1-2 सख़्त तकिये रख कर उसके चूतड़ उपर की तरफ उठा दो जिससे उसकी चूत और गाण्ड साफ दिखाई दे। खुद भी पूरी तरह नंगे हो जाओ। अब उससे प्यार भारी बातें करो और पूरे शरीर को सहलाओ, खास तौर से उसके गाल, गर्दन, स्तन, चूचुक, पेट, जांघें और टाँगें !

कुछ देर तक उसकी चूत और गाण्ड को हाथ ना लगाएँ। थोड़ी देर में लड़की की चूची सख़्त हो जाएगी और वो अपनी टाँगें और खोल देगी। अब उसकी चूत को प्यार से सहलाना शुरू करो जिससे वो उत्तेजित हो जाए और चूत में से पानी का रिसाव होने लगे।

अब लड़की चुदाई के लिए तैयार है पर हमारा इरादा उसकी गाण्ड मारने का है। अपनी एक उंगली पर अच्छी तरह से के-वाइ जेली (या नारियल तेल) लगा कर लड़की की गाण्ड के मुँह पर सहलाओ। अभी उंगली अंदर डालने की कोशिश ना करो। उसे अपनी मांसपेशियाँ बारी बारी ढीली और टाइट करने को कहो। आप अपनी उंगली पर उसकी रिंग मसल्स को महसूस कर सकोगे। लड़की से प्यारी प्यारी बातें करो और उसको रिलॅक्स होने को कहो। थोड़ी देर में जब लड़की रिलॅक्स होने लगेगी तो उसकी गाण्ड भी थोड़ी ढीली हो जाएगी।

अब अपनी उंगली पर थोड़ी और जेली लगा कर धीरे धीरे उसकी गाण्ड के अंदर धकेलो। अगर लड़की गाण्ड को टाइट कर ले तो फिर उसे विश्वास दिलाओ कि उसे दर्द नहीं होने दोगे। ज़रूरत हो तो उंगली बाहर निकल लो और उसकी चूत, जांघें और बूब्स को प्यार से सहलाओ। जब लड़की दोबारा रिलॅक्स हो जाए तो उंगली पर जेली लगा कर एक बार और गाण्ड में डालने की कोशिश करो, जल्दबाज़ी नहीं करना। गाण्ड की बाहरी रिंग मसल को धीरे धीरे ढीला कर के उंगली को करीब आधा इंच अंदर डाल दो। अब धीरे धीरे उंगली को आधा इंच तक अंदर बाहर करो। देखो कि लड़की को दर्द नहीं हो रहा है। अगर लड़की खुश नहीं है तो उंगली अंदर रख कर रुक जाओ और थोड़ी देर बाद फिर शुरू करो।

अगर लड़की खुश है तो धीरे धीरे उंगली को और अंदर करो। कुछ दूर तक तो उंगली अंदर चली जाएगी पर फिर ऐसा लगेगा जैसे आगे कोई रुकावट है। यह उसकी गाण्ड की दूसरी रिंग मसल है। इसको पार करने की लिए एक बार फिर लड़की को रिंग मसल ढीला करने के लिए बोलो। (इस वक़्त लड़की को अपनी गाण्ड पर नीचे के तरफ ज़ोर लगाना चाहिए जैसा कि पॉटी करते वक़्त लगाते हैं, ऐसा करने से रिंग मसल खुल जाएगी और आप अपनी उंगली उसके पार ले जा सकते हैं). अगर लड़की रिलॅक्स नहीं करती है तो आपको धीरज रख कर धीरे धीरे उंगली से उसकी रिंग मसल को खोलने की कोशिश करनी होगी। याद रहे, कोई काम जल्दबाज़ी में ना करो। देखा जाए तो इस क्रिया में भी आप काफ़ी मज़ा ले सकते हो।

किसी भी वक़्त अगर लड़की को तकलीफ़ होने लगे तो उंगली तुरंत बाहर निकाल लो और उसको प्यार करो। उसे यह पूरा विश्वास होना चाहिए कि गाण्ड मारने के वक़्त आप उसे तकलीफ़ नहीं दोगे।

जब उंगली दूसरी रिंग मसल को पार कर जाए तो आपकी उंगली ने फ़तेह पा ली है। अब आप आराम से उंगली को जितना अंदर डालना चाहो डाल सकते हो। ध्यान रहे कि उंगली पर जेली या तेल अच्छी तरह लगा हो। अगर सूख गया है तो उंगली बाहर निकल कर दोबारा लगा लो और फिर से धीरे धीरे अंदर डालो। अगर एक बार उंगली अंदर चली गई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब हमेशा आसानी से चली जाएगी। गाण्ड की मसल्स तो फिर से बंद हो गई होंगी, इसलिए हर बार गाण्ड में धीरे धीरे और प्यार के साथ ही प्रवेश करना है।

जब आपकी एक उंगली गाण्ड के अंदर बाहर जाने लगे और लड़की को तकलीफ़ नहीं हो रही हो तो आप यही प्रक्रिया दो उंगलियों पर जेली लगा कर कोशिश करो। इसमें शुरू में थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि गाण्ड का छेद छोटा होता है। एक उंगली तो चली जाती है पर दो उंगलियाँ मोटी होती हैं. लेकिन यह काम भी प्यार से और धीरज से हो जाएगा। आप महसूस करोगे कि जैसे जैसे लड़की को आप पर भरोसा बढ़ेगा वो इस काम में आपको सहयोग देगी और थोड़ा बहुत दर्द भी सहन करने लगेगी।

जब आपकी दो उंगलियाँ पूरी तरह अंदर चली जाएँ तो धीरे धीरे उंगलियों को दोनो तरफ घुमाना शुरू करो, इससे गाण्ड का पूरा छेद ढीला होगा। साथ ही साथ उंगलियों को अंदर बाहर भी करो।

हो सकता है इतना सब कुछ करने के बाद आप दोनों थक गये हों। अगर ऐसा है तो उंगलियाँ बाहर निकाल लो और आप दोनों कुछ और कार्यवाही कर सकते हो। अगर लड़की खुश है तो वो आपके लंड को मुँह में ले कर चूस सकती है जिससे आपके तने हुए लंड को आराम मिलेगा। यह मैं इस लिए कह रहा हूं क्योंकि उंगली करने के चक्कर में आप का लंड ज़रूर तैयार हो गया होगा। पर अभी मंज़िल बहुत दूर है और आप को धीरज से काम करना होगा। दूसरी बात यह है कि जो लड़की गाण्ड मरवाने के लिए तैयार होगी वो लंड तो चूस ही लेती होगी। अगर नहीं करती है तो उसे मेरी “लंड चूसने की विधि” पढ़नी चाहिए।

चलिए, आप दोनों ने आराम कर लिया। अब आगे बढ़ते हैं !

अब एक मोटी मोमबत्ती लो जिसका घेरा आपके तने हुए लंड के बराबर हो। इसकी लंबाई 6 इंच से कम नहीं होनी चाहिए। मोमबत्ती को अच्छी तरह चिकना कर लो। मोमबत्ती का सिरा पैना (शार्प) नहीं होना चाहिए। उसे चाकू से छील करके लंड-नुमा शेप दे दो। अब आगे के 3-4 इंच पर अच्छी तरह से जेली लगा लो।

एक बार फिर लड़की को रिलॅक्स होने के लिए बोलो और उसकी गाण्ड के अंदर और बाहर भी अच्छी तरह से जेली लगा दो। कभी भी जेली लगाने में कंजूसी ना करो।

अब मोमबत्ती का सिरा गाण्ड के मुँह पर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने की कोशिश करो। शुरू में मुश्किल होगी। अगर ज़रूरत हो तो गाण्ड में एक उंगली डाल कर उसकी दोनों रिंग मसल्स को ढीला कर लो। लड़की को भी गाण्ड ढीली करने को कहो। जब मोमबत्ती करीब आधा इंच अंदर चली जाए तो एक दो बार उतना ही अंदर बाहर करो। लड़की के इशारों का ध्यान रखो कि उसे कोई तकलीफ़ तो नहीं हो रही। उससे बातें करते रहो। जब लड़की आधा इंच तक अंदर बाहर को सहन करने लगे तो आप मोमबत्ती को घुमाते हुए और अंदर डालने की कोशिश करो। (यकीन करो कि जेली सूख ना गई हो. ज़रूरत हो तो और लगा लो).

मोमबत्ती थोड़ा और अंदर जाएगी और फिर रुक जाएगी। अब तो आपको मालूम है यह क्यों रुकी है, दूसरी रिंग मसल सामने है। लड़की के स्तनों को चूमो और उसकी चूत को सहलाओ। साथ ही उसे रिलॅक्स करने और गाण्ड को ढीला करने को कहो। जैसे ही वो गाण्ड को रिलॅक्स करेगी, मोमबत्ती आराम से अंदर चली जाएगी।

अब थोड़ा इंतज़ार करो जिससे लड़की मोमबत्ती की मोटाई को अपनी गाण्ड में महसूस कर सके और उसका शरीर इस नई फीलिंग को समझ सके। थोड़ी देर के बाद मोमबत्ती को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू करो। बाहर करते वक़्त लड़की को कोई तकलीफ़ नहीं होगी पर अंदर करते वक़्त आप को ध्यान रखना होगा कि जल्दबाज़ी ना हो। अगर जेली कम हो गई हो या सूख गई हो तो और लगा लो। इस तरह मोमबत्ती से आप उसकी गाण्ड को चोदना शुरू करो।

धीरे धीरे लड़की की तकलीफ़ कम हो कर ख़तम हो जाएगी और वो आनंद महसूस करने लगेगी। अब आप ४-५ इंच तक मोमबत्ती अन्दर बाहर कर सकते हो। जब तक लड़की चाहे उसे मोमबत्ती से चोदते रहो और फिर धीरे धीरे मोमबत्ती को बाहर निकाल लो। यह काम भी धीरे धीरे ही करना चाहिए।

मेरी राय में आपको यह उंगली और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया दो तीन दिन तक करनी चाहिए। वैसे भी अब तक आप दोनों थक गये होंगे और इंतज़ार का फल हमेशा मीठा होता है।

उम्मीद है आपने दो तीन दिन तक बताई हुई प्रक्रिया कर ली है और अब लड़की अपनी गाण्ड की मसल्स को ढीला और टाइट करना सीख गई है।

गाण्ड मारने की विधि १

मैने गाण्ड मारने पर बहुत कहानियाँ पढ़ी हैं, कुछ अच्छी होती हैं लेकिन ज़्यादातर झूठ होती हैं। ऐसा लगता है यह कहानी नहीं बल्कि लेखक की कल्पना है। जिन लोगों को सेक्स नहीं मिलता या जो अपनी ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाते वो कल्पना से कहानियाँ लिखते हैं।

अगर इन कहानियों को सच समझा जाए तो गाण्ड मारना बहुत आसान लगता है। बस, लंड के सुपारे को गाण्ड के मुँह पर रखो और ज़ोर से धक्का लगाओ- हो गया… लड़की ज़ोर से चिल्लाएगी…” ऊऊउउइ मर गयी…… मेरी गाण्ड फाड़ दी……”

और थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगेगा !! असलियत में ऐसा नहीं होता है।

आप लोगों ने भी ऐसी बहुत कहानियाँ पढ़ी होंगी।

मैने बहुत गाण्ड मारी है और मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि गाण्ड मारना इतना आसान नहीं है। मेरे अनुभव में तो चूत लेना भी इतना आसान नहीं होता जितना यह लोग गाण्ड मारना समझते हैं।

अगर आप सचमुच में गाण्ड मारना चाहते हो और आप चाहते हो कि लड़की को भी उतना ही मज़ा आए जितना आपको आता है और वो बार बार आपसे गाण्ड मरवाने की चाहत रखे तो आपको मैं सही विधि बताता हूँ। ध्यान से पढ़िए आपकी मनोकामना पूरी होगी…



इस विधि में लड़की की गाण्ड की बात की गई है लेकिन अगर आप लड़के की गाण्ड मारना चाहते हैं तो भी यही विधि लागू होगी क्योंकि गाण्ड दोनों की एक जैसी होती है।
ज़रूरी बातें :

गाण्ड मारने से पहले कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान रखा गया तो लड़की को भी उतना ही मज़ा आएगा जितना आपको और वो आपसे बार बार गाण्ड मरवाने की कोशिश करेगी। अगर इन ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया तो हो सकता है आप गाण्ड कभी मार ही नहीं पाएँगे !
लड़की की मंज़ूरी

सबसे पहले यह बहुत ज़रूरी है कि लड़की गाण्ड मरवाने के लिए राज़ी हो। इसके लिए आपको उसे यह भरोसा दिलाना होगा कि आप ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और अगर किसी भी वक़्त वो मना करती है तो आप रुक जएँगे। लड़की को ज़्यादा दर्द नहीं होना चाहिए। दर्द को कम करने का तरीक़ा इस विधि में आगे बताया गया है।
गाण्ड की बनावट

भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिया नहीं बनाया इसलिए इसकी बनावट, पोज़िशन और प्रक्रिया ऐसी है कि आदमी का लिंग आसानी से उस में प्रवेश नहीं कर सकता (जैसा की चूत में कर सकता है)। इसके लिए आप को गाण्ड की बनावट के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

गाण्ड का काम शरीर से मल बाहर निकलना है। इसके मुँह की तरफ दो छल्लेदार मांसपेशियाँ (रिंग मसल्स) होते हैं जो कि अपनी इच्छा से खोले या बंद किए जा सकते हैं। एक छल्ला बिल्कुल मुँह पर होता है और दूसरा करीब पौन इंच अंदर की तरफ होता है। इन मांसपेशियों को आप अपनी गाण्ड में महसूस कर सकते हैं।
अपनी बीच की उंगली पर तेल या क्रीम लगा कर अपनी गाण्ड में डालने की कोशिश करें। जो बाहर की मांसपेशी है वो अपने आप सिमट कर सिकुड़ जाएगी क्योंकि उसका काम है बाहर की चीज़ को अंदर जाने से रोकना !
अपने आप को थोड़ा रिलॅक्स करो और गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करो तो आपकी उंगली थोड़ा अंदर चली जाएगी। अब आप दूसरी मांसपेशी को महसूस कर सकेंगे जो कि आपकी उंगली को और अंदर नहीं जाने देगी। इस मांसपेशी को भी आप ढीला कर सकते हैं और थोड़ी कोशिश के बाद आपकी उंगली इसके भी पार हो जाएगी। जब दूसरी मांसपेशी पार कर ली तो फिर कोई और रुकावट नहीं होगी और आपकी उंगली आसानी से अंदर जा सकती है।

गाण्ड की ये मान्सपेशियाँ काफ़ी मज़बूत होती हैं और इनको आसानी से पार नहीं किया जा सकता। ख़ास तौर से अगर लड़की की मर्ज़ी ना हो तो। दूसरी बात यह भी है कि उंगली के मुक़ाबले में लंड का घेरा (साइज़) ज़्यादा होता है, इस कारण भी गाण्ड के अंदर डालना मुश्किल होता है।

गाण्ड की एक ख़ासियत है कि चूत की तरह इसमें कोई तरल (लिक्विड) चीज़ का प्रवाह नहीं होता। जब लड़की सेक्स की लिए उत्सुक होती है तो उसकी चूत में अपने आप गीलापन होता है जिससे लंड का प्रवेश आसान हो जाता है। यह प्रकृति का तरीक़ा है क्योंकि चूत को बनाया ही इस काम के लिए है। गाण्ड में कोई प्राकृतिक चिकनाहट नहीं होती इसलिए वो हमेशा सूखी सी रहती है। ऐसी हालत में लंड के प्रवेश से ना केवल लड़की को दर्द होगा बल्कि पुरुष को भी मज़ा नहीं आएगा। कुछ देर के बाद लंड में भी दर्द हो सकता है तो चुदाई का मज़ा किरकिरा हो सकता है।

गाण्ड की इन मांसपेशियों के इर्द गिर्द बहुत सी चेतना-नसें(नर्व-एंडिंग्स) होती हैं जिनमें रक्त संचार होता है। इस कारण गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को भी बहुत मज़ा आता है, शर्त यह है कि उसे दर्द ना हो।

गाण्ड ठीक से ना मारी जाए तो लड़की को बहुत दर्द होता है।

गाण्ड की बनावट से यह साफ हो गया है कि:
1) गाण्ड में कोई बाहर की चीज़ आसानी से अंदर नहीं जा सकती।
2) गाण्ड के अंदर कुछ भी डालने के लिए गाण्ड की मांसपेशियाँ को ढीला करना ज़रूरी है।
3) गाण्ड की मांसपेशियों को लड़की अपनी मर्ज़ी से ढीली या टाइट कर सकती है।
4) गाण्ड को बाहरी चिकनाहट की ज़रूरत होती है।
5) गाण्ड में नर्व एंडिंग्स होती हैं जिससे लड़की को गाण्ड मरवाने मैं मज़ा आता है। (यही कारण है कि दुनिया में इतने पुरुष समलिंगी होते हैं और खुशी खुशी गाण्ड मरवाते हैं)

शादी के बाद भी बॉयफ्रेंड प्रकाश का लंड लिया!

हैलो फ्रेंड्स, मैं जानकी एक बार फिर से उपस्थित हूँ अपनी नई सेक्स कहानी के साथ. मेरी उम्र 25 साल है, नवम्बर में ही मेरी शादी हुई है, मेरे पति अमेरिकन हैं. शादी के बाद ही मैं अमेरिका चली गई थी.

अब मैं मुख्य घटना पर आती हूँ, मेरी शादी को 20 दिन ही हुए थे और हम दोनों हर रात चुदाई का मज़ा भी ले रहे थे. उसी समय मेरे पति को सर्दी और बुखार हो गया, इस वजह से उन्होंने और मैंने सेक्स से थोड़ा दूरी बना ली. पर उनकी तबियत थोड़ी और बिगड़ गई.

लगभग एक महीने में उनकी तबियत ठीक हुई, पर बुखार की वजह से उनमें थोड़ी कमजोरी आ गई थी. हालांकि इस दौरान इन्होंने काम पर जाना बन्द नहीं किया था क्योंकि वो भी बहुत जरूरी है.

इधर दो महीने से हम दोनों ने भी सेक्स नहीं किया था. मैं भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरे हस्बैंड भी. लेकिन अभी पूरी तरह से स्वास्थ्य ठीक न हो पाने के कारण हम दोनों ने अभी सेक्स करना ठीक नहीं समझा.

इस तरह कुछ दिन और निकल गए, अब मुझे भी अपने देश वापस आना था. पर कुछ डाक्यूमेंट्स की प्रॉब्लम हो गई थी, इसलिए वापस आने में समय लग गया. जब डाक्यूमेंट्स प्रॉब्लम सॉल्व हो गई तो उसके बाद मैं इंडिया आ गई.

अभी कुछ ही दिन पहले मैं इंडिया आई हूँ और सबसे पहले मैं अपने पेरेंट्स के पास आई, जहाँ वो रहते हैं.

कुछ दिन बाद मेरे दूसरे घर जहाँ मैं रहती हूँ, वहां गई. घर पर पहुँचते ही मुझे मेरी किरायदार मिली, जो अकेले ही रहती हैं. वो उस वक्त कहीं पर जा रही थी.

उसके बाद मैंने कुछ देर रेस्ट किया और रात प्रकाश के पास गई.. चिंटू भी उनके साथ ही बैठे थे. उन्हें देखते ही मेरे पूरे बदन में आग लग गई, पर खुद को मैंने सम्भाला. प्रकाश भी बहुत हट्टे कट्टे दिख रहे थे. मुझे भी चुदाई की इच्छा हो रही थी. मैंने उनसे चुदाई की बात भी की, पर उन्होंने अगले दिन बताया कि वो 4-5 दिन के लिए गोवा जा रहे हैं, चिंटू का कोई काम है.

मैंने भी साथ चलने के लिए थोड़ी ज़िद की और थोड़ा मनाया भी, उन्होंने भी हाँ कह दिया. चिंटू ने जल्दी ही फोन लगाकर तैयार होने के लिए बोल दिया. उन्हें कोई जल्दी वाला काम था.

मैंने सामान की पैकिंग तो ही कर ली थी, उसके बाद हम घर से गोवा के लिए चल दिए. हमें शाम को ट्रेन से जाना था तो हमने खाने का पूरा बंदोबस्त कर रखा था. ट्रेन में कुछ देर बाद टीसी भी आ गया, टिकट देखने के बाद टीसी चला गया और चिंटू और प्रकाश थकान की वजह से जल्दी सो गए.

मैं भी प्रकाश के ऊपर ही सो गई क्योंकि मेरा लगाव भी प्रकाश से भी ज्यादा है. लेकिन बर्थ छोटी थी, जिस वजह से प्रकाश को थोड़ी सी समस्या हो रही थी. चिंटू ऊपर की बर्थ पर सो रहा था, जो मुझे मिली थी, क्योंकि और कोई भी आने वाला नहीं था तो नीचे की बर्थ मैंने ले ली. पर मुझे अभी नींद नहीं आ रही थी और प्रकाश भी मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी नंगी पीठ को सहला रहे थे. पता नहीं कब प्रकाश को नींद आ गई, जब वो सो गए तो मैं भी मेरी बर्थ पर जाकर सो गई.

सुबह जल्दी ही हमारी नींद खुल गई, जब हम गोवा पहुंचे, उस समय सुबह 6:00 बज रहे थे. सबसे पहले हम रूम पर पहुंचे जो चिंटू के ही दोस्त का था और जहाँ मैं पहले भी बहुत बार आई हूँ और चुदी भी हूँ.

फ्रेश होने, नहाने और नाश्ता करने के बाद हम तीनों ही चिंटू के काम के लिए निकल पड़े. चिंटू का काम होने के बाद होटल में हम खाना खाने के लिए रुके. खाना खाने के बाद हम तीनों फिर से रूम में पहुंचे. पर सुबह उठने से लेकर ही मुझे तो सिर्फ चुदाई की ही याद आ रही थी, पता नहीं ये दोनों मेरी चुदाई कब करेंगे.

जैसे ही हम रूम में पहुँचे मैं कपड़े बदलने लगी, जब कपड़े बदल लिए तो उन्होंने मुझसे दरवाजा लगाने के लिए बोला. जैसे ही मैं दरवाजा लगाकर आई तो तुरन्त ही प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ा और किस करने लगे.

मैं यह हमला सम्भाल नहीं पाई, तभी चिंटू ने भी मेरी लोअर और पेंटी नीचे कर मेरी गांड को चाटना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मैं भी नॉर्मल हो गई और मैंने खुद ही मेरी टी-शर्ट और ब्रा निकाल दी. चिंटू को, जो मेरी गांड को चाट रहा था. उनको खड़ा किया और किस करने लगी. इस दौरान मैंने प्रकाश से अपनी चुदासी चूत चटवाई. मैं ये सब खड़े खड़े ही कर रही थी.

मैं कुछ देर में ही बहुत गर्म हो गई, तभी उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया और दोनों मेरे मम्मों को चूसने लगे.

तभी मैंने दोनों की टी-शर्ट को निकाल दिया और पेंट उन दोनों ने खुद ही निकाल दी.

उन दोनों के लंड को एक साथ मैंने हाथ में ले लिया. लगभग 4 महीने बाद उन दोनों के लंड को देखा और छुआ, जिससे मुझे एक अलग ही सुकून मिल रहा था.

पहले तो मैंने इन दोनों के लंड को चूमा और तुरन्त ही लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी क्योंकि मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था. एक तरफ मैं दोनों के लंड चूस रही थी, तो दूसरी तरफ ये दोनों मेरे दोनों मम्मों को मसल रहे थे. उन्होंने मेरे दोनों मम्मों मसल मसल कर एकदम लाल कर दिए. जब उनके लंड बिल्कुल सख्त हो गए तो उन्होंने खुद ही एक साथ मेरी चूत और गांड में लंड डाल दिया.

प्रकाश ने कहा- आज 4 महीनों की कमी एक बार में ही पूरी करेंगें.

मैं कुछ नहीं बोली और उन्होंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. दो महीने बाद मेरी चुदाई हो रही थी तो मेरी चूत और गांड भी थोड़ी सिकुड़ गई थी और थोड़ा दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था.

मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सीत्कार कर रही थी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह आहह्ह्ह चोदो मुझे.. और चोदो फाड़ दो.. मेरी चूत और गांड को.. चार महीने से तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ.. आहह्ह्ह यईआह.. उह्ह्म्म्माआ..

धीरे धीरे उन्होंने धक्के लगाने तेज कर दिए. तेज धक्कों के साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था, तो मैंने चिंटू के सीने को बिल्कुल मम्मों की तरह कसकर पकड़ लिया.

उसके मुँह से सीईईईईई की आवाज निकली तो मैंने उन्होंने और भी तेज मसलना शुरू कर दिया.

अब उसने भी तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए. मेरा दर्द और मजा दोनों बढ़ रहे थे, पर दर्द होने की वजह से आँसू भी निकल रहे थे.

मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि थोड़ी देर में ही झड़ गई, मेरे झड़ते ही चिंटू ने प्रकाश से जगह बदलने के लिए बोला.

उन दोनों ने मेरी चूत से और गांड से लंड को बाहर निकाला और दोनों ने ही एक एक करके मेरे मुँह को चोदा. पहले प्रकाश ने मेरे मुँह को चोदा और उसके बाद चिंटू ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. चिंटू का लंड मेरी चूत के रस से गीला हो रहा था तो उसके लंड को चूसने में अलग ही स्वाद आ रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था.

कुछ देर बाद प्रकाश ने अपने लंड को मेरी चूत में डाला और फिर चिंटू ने गांड में पेल दिया.

अब एक बार फिर से मेरी चूत और गांड एक साथ चुदने के लिए तैयार थी और दोनों ने ही धक्के लगाने शुरू कर दिए.

मैं एक बार फिर से सीत्कारने लगी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह.. आआ आअह्हह्ह ह्ह चोद दो.. मेरी चूत.. मेरी दो महीनों की प्यास भी बुझा दो, बहुत तड़पी थी तुम दोनों के लंड के लिए.. आअह्ह्ह आहह्ह्ह..

तभी कुछ देर बाद प्रकाश ने चिंटू से धक्के बन्द करने के लिए कहा. चिंटू ने भी वैसा ही किया. तभी प्रकाश और चिंटू ने मुझे कसकर पकड़ लिया और प्रकाश अचानक तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदने लगे. मेरी जैसे ही दर्द से चीख निकली, चिंटू ने तुरन्त मेरे मुँह को बन्द कर दिया, जिससे मेरी चीख ज्यादा नहीं निकल पाई.

कुछ देर ऐसे ही मुझे बहुत स्पीड के साथ चोदते रहे, बीच बीच में उनका लंड भी फिसला, पर उन्होंने फिर से मेरी चूत में डालकर मेरी चूत को चोदा.

जब तक मैं दूसरी बार नहीं झड़ी, तब तक प्रकाश मुझे ऐसे ही चोदते रहे. बीच बीच में चिंटू भी मेरी गांड को चोद रहा था.

जब मेरी चूत ने दूसरी बार पानी छोड़ा उसके बाद दोनों ने ही उनके लंड को बाहर निकाल लिया.. अब मुझे भी ठंडक मिल रही थी. उसके बाद प्रकाश मेरी चूत को चाटने लगे, जो मेरी चूत से रस निकल रहा था, इन्होंने उसे भी चाट लिया.

चिंटू मुझे किस करने लगा. पता नहीं क्यों जब भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते हैं, मुझे तो जैसे जन्नत मिल जाती है. उनके चूत चाटने के साथ साथ मैं भी एक हाथ से चिंटू के बदन को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी चूत को ऊपर से ही मसल रही थी. साथ ही ये दोनों मेरे एक एक चूचे को भी मसल रहे थे.

तभी चिंटू ने मेरे हाथ से अपने लंड को अलग किया और मेरे जिस दूध को वो मसल रहा था, उसे पीना शुरू किया और फिर मुझे किस करने लगा.

तभी अचानक ही मेरी कमर अपने आप ऊपर हो गई और मेरी चूत ने पानी निकाल दिया. मैं सिसकारी भी नहीं निकाल पाई क्योंकि चिंटू ने मुझे और मेरे होंठों को उनके होंठों से अलग ही नहीं होने दिया. मेरे झड़ने के बाद भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते रहे और फिर से मेरी चूत का पानी भी पी गए.

उसके बाद चिंटू ने प्रकाश को धक्का देकर अलग किया, यह देखकर मुझे हँसी आ गई और प्रकाश भी मुस्कुरा दिए.

तभी मैंने प्रकाश को मेरी तरफ खींचकर उन्हें किस करने लगी और चिंटू से मेरी चूत को चटवाने लगी.

पर चिंटू मेरी चूत को चूसने और चाटने के साथ साथ अपनी उंगली से मेरी चुत को चोद भी रहा था. चिंटू भी आज मेरी चूत के साथ खेल ज्यादा रहा था.

कुछ ही देर में मैं एक बार और झड़ गई और इस बार चिंटू भी मेरी चूत का सारा रस पी गया. दोनों ही चूत का रस आसानी से पी जाते हैं, ये उनके लिए कोई नई बात नहीं है.

तभी चिंटू ने मेरी चूत को चाटना छोड़ दी और अपने लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया. मैं उसके लंड को सहला रही थी.

तभी मैंने प्रकाश को भी, जो मुझे किस कर रहे थे, उन्हें अपने से अलग किया और उनके भी लंड को सहलाने लगी. उन दोनों के लंड अभी आधे ही खड़े हुए थे तो मैं उनके लंड को बारी बारी मुँह में लेकर चूस रही थी.

तभी चिंटू मेरा मुँह पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगा. उसने अपने लंड से 20-25 धक्के लगाए होंगे कि अपना लंड मेरे मुँह से खींच लिया. इसके बाद प्रकाश भी मेरे मुँह को चोदने लगे.

बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा. पहले 20-25 धक्के लगाकर चिंटू मेरे मुँह को चोदता, उसके बाद प्रकाश 20-25 धक्के लगाकर मेरे मुँह को चोदने लगते.

बहुत देर तक उनके इस तरह चोदने से मेरा मुँह भी दुखने लगा. मैंने उन्हें लंड को चूत में डालने के लिए कहा, तो उसके बाद वो फिर से मुझे गर्म करने में लग गए और 5 मिनट में ही मेरी चूत में और ज्यादा आग लगने लगी.

उसके बाद मैंने फिर से उनके कहने पर थोड़ी देर उनके लंड को चूसा. फिर उन्होंने भी देर नहीं की और चिंटू ने मुझे उनकी गोदी में उठा कर अपने लंड को मेरी चूत में फंसाने लगा. पर उसका लंड बार बार मेरी चूत से फिसल रहा था, तो फिर मैंने ही उसके लंड को पकड़कर मेरी चूत में डाला और फिर धीरे धीरे पूरे लंड को अपनी चूत के अन्दर तक डाल लिया.

जब चिंटू का लंड मेरी चूत के अन्दर पहुँच गया, उसके बाद प्रकाश ने भी अपने मोटे लंड को मेरी गांड में अन्दर तक पेल दिया और अब दोनों मुझे पकड़कर मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.

यह पहली बार था कि जब इस तरह से दो लंड मेरी चूत और गांड को चोद रहे थे. इस पोजीशन में उनके पूरे लंड भी मेरी चूत और गांड में अन्दर तक जा रहे थे. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

कभी वो दोनों मुझे उछाल उछाल कर मेरी चूत और गांड की चुदाई करते, तो कभी मुझे कसकर पकड़कर खुद धक्के लगा कर मेरे दोनों छेदों को ठोकते.

अब मैं भी थोड़ी थक चुकी थी और थोड़ी ही देर में झड़ने वाली भी थी. कुछ पलों बाद मैं झड़ भी गई और मेरी पकड़ भी ढीली हो गई.

तभी चिंटू ने प्रकाश से कहा- मुझे भी तो इसकी गांड का मजा लेने दो, तुम अकेले ही इसकी गांड का मजा ले रहे हो.. जरा तुम भी इसकी चूत को छोड़ कर मजा ले लो.
तभी मैंने भी कहा- हाँ चिंटू सही बोल रहा है. मेरी चूत भी तुम्हारे लंड की प्यासी हो रही है, प्लीज इसकी आप भी प्यास बुझा दो न..!

प्रकाश ने भी बिना कुछ बोले मुझे चिंटू की गोद से उनकी गोद में ले लिया और उनके लंड को मेरी चूत में डाल दिया. मेरी चुत तो भरपूर गीली थी, इस वजह से उनका लंड आसानी से मेरी चूत में अन्दर तक चला गया.

वहीं चिंटू ने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाते ही दो करारे धक्कों में मेरी गांड में पूरा उतार दिया. उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला होने की वजह से इतनी जल्दी मेरी गांड की दीवार को चीरता हुआ अन्दर तक पहुंच गया कि मुझे समझ ही नहीं आया.. बस यूं लगा कि कोई गरम सरिया मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया. मैं भी दर्द से चीखने ही वाली थी कि प्रकाश ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने भी शुरू कर दिए.

इस बार दोनों लंड मेरी चूत और गांड में थे, पर जब एक मेरी चूत में धक्का लगाता, तब दूसरा रुक जाता और उसके बाद दूसरा लंड धक्का मेरी गांड में लगाता. फिर कुछ देर बाद दोनों एक साथ ही धक्का लगा देते. मेरे सुख की सीमा नहीं थी.

अब मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी और मेरी पकड़ लगभग ढीली ही हो चुकी थी, पर चिंटू और प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ रखा था.

जब मैं एक बार और झड़ी, तब मैंने प्रकाश और चिंटू दोनों से उनके रस को बाहर निकालने के लिए बोली, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और बिना लंड को मेरी चूत और गांड से बाहर निकाले, मुझे बेड पर ले गए. जैसे तैसे मुझे बेड पर लेटाकर फिर से मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.

पर अब मुझे मजा कम और दर्द ज्यादा हो रहा था और उनसे छोड़ने के लिए बोल रही थी.

अचानक उन्होंने धक्के लगाने की स्पीड बहुत तेज कर दी और प्रकाश ने चिंटू से कहा कि वो अब अपना लंड निकालेंगे तो चिंटू ने भी धक्के लगाना रोक दिया. प्रकाश ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर अपने लंड को निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया.

जैसे ही उन्होंने लंड को मेरे मुँह में डाला, तुरन्त ही उन्होंने सारा रस मेरे मुँह में ही निकाल दिया. मैंने भी उनका सारा रस निगल लिया.

तभी चिंटू जो अपना वीर्य मेरे मम्मों पर गिराने को तैयार दिख रहा था, मैंने भी उसके लंड के रस को मुँह में निकालने के लिए कहा.

उसने भी मेरे मुँह में उनका वीर्य निकाल दिया. वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा तो मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक हल्की सी चपत जड़ दी. फिर मैं गांड हिलाते हुए बाथरूम में चली गई.

उसके कुछ देर बाद हमारी चुदाई का दूसरा राउंड शुरू हुआ. यह खेल 4 दिन तक चला.

चार दिन तक तो उन्होंने मेरी चूत और गांड की तो चटनी बना कर रख दी. एक दिन तो दोनों ने सिर्फ मेरी गांड चुदाई का ही मजा लिया. इन 4 दिनों में चिंटू ने भी उनका काम पूरा किया और मेरी चुदाई भी जमकर की.

उसके बाद हम घर पर आ गए. पर 4 दिन की चुदाई ने मेरी चूत और गांड की 2 महीने की प्यास नहीं बुझा पाई थी. अगले 3 दिन रेस्ट करने के बाद मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी.

मायके से आई सेक्सी मुस्लिम भाभी को पति ने जल्दी से पेल दिया

हेल्लो दोस्तों, मैं आप सभी का sexystory.art.blog में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ. मेरा नाम शबनम है. मैं पिछले कई सालों से सेक्सी स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ. आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ. मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी.

मैं २ महीने के लिए अपने मायके गयी थी. साल के १० महीने मैं अपनी ससुराल में ही रहती थी. गर्मी में २ महीने के लिए गर्मी की छुट्टियाँ हो जाती थी. तब मुझे मायके जाने का मौक़ा मिलता था. मैं अपने मायके चली गयी थी और २० दिन बीत चुके थे. फिर पति का फोन आया.



“शबनम जान….जल्दी से घर आ जाओ. २० दिन से मुझे चूत मारने को नही मिली है!!” पति बोले

“सुनिए जी!! मैं कम से कम २ महीने माँ के पास रहूंगी. तब तक आप हाथ से मुठ मारकर काम चला लीजिये!!” मैंने कहा

“अरे …जान तुम जानती हो की मुठ मारने में वो मजा कहाँ आता है तो चूत मारने में आता है. प्लीस जल्दी से लौट आओ!!” पति बोले पर मैंने उनकी सब बातें काट दी और अपनी माँ के पास मायके में ही रहने लगी. क्यूंकि मुझे घर की बहुत याद आती थी और ससुराल में जरा भी अच्छा नही लगता था. दोस्तों मेरे पति बहुत ही सेक्सी आदमी थे और इकदम जवान थे. वो दिन में २ बार और रात में ३ बार मेरी चूत मारते थे. उनको सेक्स करना बहुत पसंद था और इधर मैं भी कुछ इसी तरह की औरत थी की मुझे रोज मोटा मोटा लंड खाना बहुत पसंद था.

अब मुझे मायके आये १ महिना बीत चुका था इसलिए मैं भी लंड खाने को तरस रही थी. मैं अपनी चूत में डिलडो डाल के मजा ले लेती थी. इसके अलावा मैं अपनी उँगलियों से भी काम चला लेती थी. उधर मेरे पति आजकल अपने हाथ से काम चला रहे थे. पर उनको वो चूत वाला मजा नही मिल पा रहा था. धीरे धीरे २ महीने कट गये और मेरे बच्चों का स्कूल खुल गया. माँ के घर से आने का दिल तो नही कर रहा था पर क्या कर सकते है. हर शादीशुदा लड़की को एक दिन अपनी ससुराल तो आना ही पड़ता है. इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे अपने पति के पास लौटना पड़ा.

बच्चों को लेकर मैंने ट्रेन पकड़ ली और फिर ससुराल आ गयी. जैसे ही मैं घर में घुसी मेरी सास, नन्द, देवर और ससुर मुझसे बात करने लगे और पूछने लगे की ट्रेन से आने में कोई दिक्कत तो नही है. मेरी सास ने मेरे लिए तुरंत चाय बनाई. मैंने चाय पी ली और सबके साथ बैठकर मैं बात कर रही थी. मेरे बच्चे अपने दादा के पास खेलने चले गये थे. मैंने अभी कपड़े भी नहीं बदले थे की पति ने आवाज लगाई.

“शबनम ….इधर आना!!” पति जोर से बोले तो मैं सास और नन्द के पास से उठकर पीछे पति के कमरे में चली गयी. उन्होंने तुरंत मुझे पकड़ लिया और किस करने लगे.
“शबनम!! मुझे अभी चूत दे. तू नही जानती की मैंने २ महीने कैसे गुजारे है बिना तेरी गदराई चूत के!!” पति बोले

“अभी मैं सास और नन्द से बात कर रही हूँ. अभी कुछ देर में आती हूँ!” मैंने कहा तो पति ने मेरा हाथ पकड़ लिए और दरवाजा बंद कर लिया.

“देख शबनम…नाटक मत कर. मैं ६० दिन बिना तेरी चूत मारे गुजारे है. अब मेरा काम नही चल रहा है. पहले मुझे चूत दे दे फिर घर में सबसे बात कर लेना!!” पति गुस्साकर बोले

“अरे यार….ऐसे दिन में नही अच्छा लगता है. सब लोग घर में क्या सोचेंगे!!” मैंने झल्लाते हुए कहा पर पति ने मेरी एक बात नही सुनी और मेरी साड़ी निकाल दी. फिर जबरदस्ती मुझे बिस्तर पर लिटा लिया और मेरा ब्लाउस खोल दिया, फिर मेरी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी. अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी. पति कपड़े निकाल कर मेरे उपर लेट गये थे और मेरे दूध मुंह में लेकर पी रहे थे. मुझे चुदाई बहुत पसंद है. पति का मोटा लंड खाना बहुत पसंद है पर अभी सुबह के ११ बजे थे और घर में सब लोग मुझसे बात करने के लिए मेरा इन्तजार कर रहे थे. इधर पति को मेरी चूत मारने की तलब लगी थी. वो मेरे दूध पीने लगे.

“सुनिए जी, घर में सब लोग मेरा इन्तजार कर रहे है. प्लीस मुझे छोड़ दीजिये और जाने दीजिये!!” मैंने कहा

“बस २ मिनट रुक जा. मैं तेरी चूत मार लू. बस २ मिनट लगेगा!!” पति देव बोले

सुबह सुबह मुझे चुदाई बड़ी अजीब लग रही थी. अभी मुझे मायके से आये ५ १० मिनट भी नही हुए और पति मुझे चोदने लगे. पर वो मेरे पति थे, मैं कैसे उनको मना कर सकती थी. इसलिए मैं खुलकर दोनों टांग फैलाकर लेट गयी.

“अच्छा ठीक है—आप चोद लीजिये पर जल्दी करिये. उधर घर में सब लोग मेरा इंतजार कर रहे है!!” मैंने कहा
खूबसूरत थी. उनके चारो ओर बड़े बड़े डार्क काले घेरे थे जो बहुत सेक्सी और कामुक लग रहे थे. पति देव तो आज ऐसे मेरी चूचियां पी रहे थे जैसे आज जन्मो बाद मैंने उसको मिली थी. वो मेरी निपल्स को कामुक तरह से काट लेते थे. मैं “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” बोलकर अपनी कमर उठा देती थी. पति ने मुझे नही छोड़ा और मेरे मम्मे पीते रहे. उधर मेरी सास मुझे आवाज दे देकर थक गयी. इधर मेरे पति मुझे बजा रहे थे.

पति मेरी दोनों रसीली चूचियों को पी रहे थे. मजा आ रहा था. मुझे भी दूध पिलाने में खूब मजा आ रहा था. फिर पति ने मेरी दोनों टांगो को खोल दिया और मेरी चूत में २ उँगलियाँ डाल दी और जल्दी जल्दी मेरे भोसड़े को फेटने लगे. मैं पागल हो रही थी. मुझे बहुत जादा उतेज्जना हो रही थी. पति आज तो कामदेव की तरह लग रहे थे. आज मुझे चोदकर वो भरपूर मजा लेना चाहते थे. वो जल्दी जल्दी मेरी रसीली और नम बुर को अपनी उगंलियों से फेटे जा रहे थे. मैं पागल हो रही थी. मैंने पति के हाथ को पकड़कर रोकने लगी पर वो नही रुके और अपनी २ उँगलियाँ अंदर गहराई तक मेरी चूत में उतार दी थी. मैं बार बार अपनी गांड उठा देती थी. पति तो जैसे आज मेरे गुलाबी भोसड़े को फाड़ ही देना चाहते थे. मेरी तो यौन उतेज्जना से जान जा रही थी.

मैं मजा मार रही थी. पति ने आधे घंटे मेरी बुर फेटी तो मेरी चूत से उसका सफ़ेद मक्खन निकलने लगा जो पति के हाथ में चुपड़ गया. पति मेरे भोसड़े का पूरा माल पी गये. वो अपनी उँगलियों को मुंह में लेकर मेरा सारा मक्खन चाट गये और पी गये. फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मैं उलटी घूमकर अपने घुटनों को मोड़कर घोड़ी बन गयी और मैंने अपना पिछवाड़ा माउंट एवरेस्ट पहाड़ की तरह उचा उठा दिया. पतिदेव मेरे पिछवाड़े पर आ गये और मेरे ३४” के चिकने गोल पुट्ठे सहलाने लगा और चूमने लगा. मैं  “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी. आज पुरे ६० दिन बाद मुझे भी सेक्स करने का मौका मिला था इसलिए मुझे भी काफी खुशी मिल रही थी और मजा मिल रहा था. पति बड़े प्यार से मेरे गोल मटोल पुट्ठों को हाथ से सहला रहे थे और दबा रहे थे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

“शबनम….जान बाय गॉड!! तुमसी हसीन औरत मैंने आजतक नही देखी!!” पति बोले और मेरी तारीफ़ करने लगे. मैंने खुश हो गयी. बड़ी देर तक वो मुझे घोड़ी बनाए रहे और मेरे मुलायम पुट्ठों को सहलाते और चूमते चाटते रहे. फिर वो पीछे से मुंह लगाकर मेरे फटे भोसड़े को पीने लगे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मुझे फुल मजा मिल रहा था. पति अपने होठो से मेरी रसीली चूत की एक एक कली को चाट और पी रहे थे. मैं अपने पिछवाड़े को उपर उठाये हुए थी और फुल मजा ले रही थी. पतिदेव मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डाल रहे थे. मैं सिसक रही थी और मोन कर रही थी. कुछ देर बाद पति ने मेरे फटे और चिरे भोसड़े में अपना मोटा खूटे जैसा लंड डाल दिया और किसी कुत्ते की तरह मुझे चोदने लगे और मेरी चूत मारने लगे.

मुझे बहुत मजा मिल रहा था. कामवासना में आकर मैं अपने रसीले होठो को अपने दांत से काट रही थी और होठ चबा रही थी. मेरा पूरा शरीर जल रहा हो. पति पीछे से दनादन मुझे चोद रहे थे. मैं घोड़ी बनी हुई थी. दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगी की मेरे पति को मुझे घोड़ी बनाकर चोदना बेहद प्रिय था. हर रात वो मुझे घोड़ी जरुर बनाते थे और इस तरह खूब जी भरकर मेरी चूत बजाते थे. मुझे भी इस पोज में सेक्स करना बेहद पसंद था. पति ने मेरे चिकने और सफ़ेद पुट्ठों को हाथ में कसकर पकड़ रखा था और किसी कुत्ते की तरह मुझे पीछे से पेल रहे थे. मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हहसी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” कह कहकर चिल्ला रही थी. इस तरह पति ने मुझे ३५ मिनट चोदा फिर भी उनका माल नही गिरा. फिर वो सीधा बिस्तर पर लेट गये और मुझे अपनी कमर पर लौड़े पर बिठा लिया.

“जान….अब तुम मेरे लौड़े की सवारी करो!!” पति बोले. धीरे धीरे मैं उनकी कमर पर बैठकर उनके लौड़े की सवारी करने लगी और कुछ ही देर में मैं तेज तेज अपनी कमर को चलाने लगी. मैं अच्छे से चुद रही थी. पति के ८” लौड़े को मैंने अपने रसीले भोसड़े में ले रखा था. फिर वो भी नीचे से मुझे धक्के मारने लगे. और आधे घंटे बाद वो मेरी चूत में ही शहीद हो गये. जब मैं कपड़े पहनकर सास के पास पहुची तो वो सो चुकी थी और नन्द भी कॉलेज पढने चली गयी थी. ये कहानी आप sexystory.art.blog पर पढ़ रहे है.

पडोसी अंकल ने मेरी चूत फाड़ दी

मैं ललिता जोशी एक नियमित पाठिका हूँ.
लॉकडाउन में जब मैं फ्री हुई, तो मुझे लगा मुझे भी अपने जीवन की रसीली कहानियां लिखनी चाहिए क्योंकि मेरा जीवन सेक्सी कहानियों से भरा हुआ है.

मेरा शुरू से ही भरपूर सेक्स में बहुत इंटरेस्ट था.
मेरी सहेलियां मुझे अपने अपने बॉयफ्रेंड के साथ किए हुए सेक्स के अनुभव सुनाया करती थीं, इसी वजह से सेक्स में मेरी रुचि और बढ़ती चली गयी. मैं सेक्स क्रेजी गर्ल बन गयी.

जवानी में कदम रखते ही, मतलब 19 वर्ष की उम्र में मेरे साथ पहली बार सेक्स हुआ.
आज मैं 38 वर्ष की हूँ और अब तक मैंने 64 लंडों का स्वाद चख लिया है.



मेरे पहले लंड से लेकर 64 लंड तक की सभी कहानियां मैं आपको क्रमवार सुनाना चाहती हूं. यह एक ही कहानी में संभव नहीं है, इसीलिए मैंने इन कहानियों के अलग-अलग भाग बनाए हैं.

आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देना चाहती हूँ. मैं 38 वर्ष की भरी पूरी एक कामुक और सुंदर महिला हूँ.
मुझे देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाता है.
आज भी 25-30 साल के लड़के मुझे जब देखते हैं, तो उनको लगता ही नहीं कि मैं उनके बराबर की नहीं हूँ इसीलिए वह मेरे आगे पीछे मंडराते रहते हैं.

मेरा फिगर 36-28-38 का है. वैसे तो मैं 12 साल के एक बेटे की मां हूँ लेकिन मुझे देखकर कोई भी कह नहीं सकता कि मैं शादीशुदा हूँ.
आप यूं भी कह सकते हैं अलग-अलग लंड खाने की आस में मैंने अपने आपको काफी मेंटेन कर रखा है.

मेरी शादी जयपुर में एक व्यापारी जय जोशी (बदला हुआ नाम) से हुई. वे भी बहुत स्मार्ट और जोशीले हैं.
उनकी भी सेक्स में उतनी ही रुचि है, जितनी मेरी है.

खैर … मैं अपनी पहली चुदाई की कहानी पर आती हूँ.
जवानी के दिनों में मेरे पड़ोस में शर्मा अंकल और आंटी रहते थे, जिनकी उम्र लगभग उस समय 35-36 वर्ष होगी.
उन लोगों से हमारा पारिवारिक मेलजोल था अक्सर वह या तो हमारे घर या हम उनके घर होते थे.

एक दिन शर्मा आंटी अपने मायके में भाई की शादी का न्यौता देने हमारे घर आईं.
उन्होंने मेरी मम्मी को सपरिवार आने का न्यौता दिया और कहा कि आपके भाई साहब (शर्मा अंकल) शादी में एक-दो दिन पहले ही आएंगे. आप लोग भी उनके साथ आ जाना.
मेरी मम्मी ने शर्मा आंटी से कहा- हां भाभी जी, आप बिल्कुल आप निश्चिंत होकर जाइए. भाई साहब के खाने-पीने का पूरा ध्यान हम लोग रख लेंगे.

यह सुनकर शर्मा आंटी मन में निश्चिंत भाव लेकर अपने मायके चली गईं.

अब शर्मा अंकल को सुबह की चाय, दिन का खाना, रात का खाना देने जाने की जिम्मेदारी मेरी हो गई.
जब तक वह खाना खाते, मेरी उनसे खूब बातें होतीं.

धीरे-धीरे मैं और शर्मा अंकल खुलकर हर तरह की बातें करने लगे.

एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- ललिता तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- नहीं.

तो उन्होंने बड़े आश्चर्य से मुझसे कहा- तुम इतनी बड़ी हो गई हो और अभी तक तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है. तुम तो इतनी सुंदर हो कि तुम्हारे पीछे तो हजारों लड़के पड़ते होंगे, फिर भी तुमने आज तक किसी को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया. तुम्हारा कोई भी बॉयफ्रेंड क्यों नहीं है?
मैंने उनसे कहा- मुझे डर लगता है.

उन्होंने मुझसे कहा- इसमें डरने की क्या बात है. आजकल तो सभी लड़कियों के बॉयफ्रेंड होते हैं.
मैंने कहा- हां पर मेरी सहेलियां बताती हैं कि बॉयफ्रेंड बनने के बाद लड़के अजीब-अजीब हरकतें करते हैं.

अंकल ने कहा- अरे पागल, उसे अजीब हरकतें नहीं … सेक्स कहते हैं. फिर आजकल सभी लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड के साथ ये सब बड़े मजे से करती हैं. यह तो जीवन का एक परम सत्य है.
मैंने अंकल से कहा- पर मुझे तो डर लगता है.
अंकल ने कहा- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा डर भगा सकता हूं क्योंकि मुझे सेक्स का भरपूर अनुभव है.

यह कहते हुए अचानक अंकल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया.
अंकल की इस हरकत से मैं कुछ देर के लिए दंग रह गई.
फिर मैंने अपने आपको संभाला और अंकल की बांहों से छूटने की कोशिश करती हुई मैंने उनसे कहा- आप कहां और मैं कहां … आप मुझसे कितने बड़े हो.

अंकल ने मुझे बड़े प्यार से समझाया- इसमें बड़ा छोटा क्या होता है. सेक्स तो एन्जॉय करने की चीज है, जिसे एक अनुभवी आदमी किसी लड़की को ज्यादा अच्छे से एन्जॉय करा सकता. किसी नौसिखए के साथ सेक्स करने से ज्यादा अच्छा है कि तुम मेरे साथ सेक्स करो. मैं तुम्हें स्वर्ग का अहसास करा दूंगा.

यह कहते हुए उन्होंने मुझे छोड़ दिया और कहा- सोच कर बताना कि क्या तुम अपने डर पर काबू करना चाहती हो … या खुल कर मस्ती करना चाहती हो. क्योंकि डर के आगे ही जीत होती है.

फिर मैं भागकर अपने घर आ गई.
घर आकर मैंने किसी को कुछ नहीं कहा क्योंकि कहीं ना कहीं मैं भी शर्मा अंकल को पसंद करने लगी थी और उनकी इस हरकत पर मुझे किसी भी प्रकार का गुस्सा नहीं आ रहा था.

रात भर मैं अपने कमरे में लेटे-लेटे सोच रही थी कि जो वह कह रहे हैं, क्या वह सही है.
वही सब सोचते-सोचते मैं सो गई.

अगले दिन जब मैं उन्हें खाना देने गई तो अब उनके और मेरे बीच में पहले जैसी बात नहीं रही.
अब मैं उनसे आंखें नहीं मिला पा रही थी और वह मुझे देखकर हल्के से मुस्कुरा रहे थे.

उन्होंने मुझसे पूछा- ललिता क्या सोचा तुमने?
मैंने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया तो उन्होंने अचानक बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर एक चुंबन जड़ दिया.

मैं अभी कुछ कहती कि वह मेरे होंठों को चूसने में लग गए और लगातार मुझे चूसे जा रहे थे.

मैंने उनसे अपने आपको अलग करने की कोशिश की.

मैंने कहा- यह आप क्या कर रहे हो?
उन्होंने मेरी एक भी बात नहीं सुनी और मुझे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गए.

मैंने उनसे कहा- मैंने आपको हां नहीं बोला है.
उन्होंने कहा- तुम्हारी चुप्पी ही तुम्हारी हां है. मेरी जान अब तुम्हें कुछ और बोलने की जरूरत भी नहीं है.

यह कहते हुए अंकल ने मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरे मम्मे दबाने शुरू कर दिए.
पहली बार किसी ने मेरे मम्मे दबाए थे.
उनके मम्मे दबाने से मुझे एक नशा सा छाने लगा.
अपने आप ही मेरे मुँह से ‘आह ह ह उम ह ह …’ की आवाजें निकलने लगीं.

मौका पाकर धीरे से उन्होंने मेरे कुर्ते को उतार दिया.
अब मैं उनके सामने केवल ब्रा में थी.

अंकल ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को खूब अच्छे से सहला रहे थे.
फिर मेरे दूध सहलाते-सहलाते उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार दी.

मैं आपको यह बताना चाहती हूं कि जब अंकल ये सब कर रहे थे तो मैं उन्हें बार-बार रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

आखिरकार उन्होंने मेरे मम्मों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया और अपने मुँह से मेरी चूचियां चूसने लगे.
पहली बार किसी मर्द का अहसास अपने मम्मों पर पाकर मैं एक अलग ही दुनिया में जा पहुंची थी.

अंकल मम्मों को दबाए और चूसे जा रहे और साथ ही कहते जा रहे थे- ललिता, कितने हसीन मम्मे हैं तेरे, तेरा बदन कितना सेक्सी है ललिता … तेरी जवानी आज तक अनछुई कैसे रह गई … आज तेरी अनछुई जवानी को छूकर मैं निहाल हो गया. अब तू चिंता मत कर, आज के बाद तुझे किसी भी तरह का कोई डर नहीं लगेगा क्योंकि तेरी हसीन चूत में मैं अपना लंड डाल कर तुझे कली से फूल बना दूंगा.

मैंने आज तक इस तरह के शब्द सुने नहीं थे.
उनके मुँह से इस तरह के शब्द सुनने से मैं और रोमांचित होती जा रही थी.
मेरा पूरा शरीर कांप रहा था और मुझमें अब विरोध करने की ताकत नहीं बची थी.

फिर उन्होंने मेरी सलवार भी उतार दी अब मैं केवल उनके सामने पैंटी में थी वह मुझे बेहताशा चूमे जा रहे थे.
चूमते चूमते वह मेरे मम्मों से पेट पर … और पेट से मेरी चूत तक पहुंच गए.

पैंटी के ऊपर से काफी देर तक चूमने के बाद अचानक उन्होंने मेरी पैंटी भी मेरे जिस्म से अलग कर दी.
मैं आपको बता नहीं सकती यह पहला अहसास मेरी जिंदगी का कितना मीठा अहसास था.

उन्होंने मेरी दोनों टांगें चौड़ी की और मेरी चूत अपनी जुबान चाटने लगे.
मैं सिहर उठी और मेरे मुँह से आह उन्ह की मादक आवाजें निकलने लगीं.

दस मिनट तक चूत चटवाने का आनन्द लेने के बाद अचानक से मुझे अपनी चूत से कुछ गर्म-गर्म सा लावा बाहर निकलता हुआ महसूस हुआ.
यह मेरा पहला स्खलन था, मगर कितना अद्भुत था … सच में ये मेरी कल्पना से परे सुख का अहसास था.

अब उन्होंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.
मैंने अपने सामने पहली बार किसी नंगे मर्द को देखा था.
उनका लंड देखकर मैं घबरा गई.

अंकल का लंड लगभग साढ़े सात इंच लंबा रहा होगा.
मैं सोच रही थी कि मेरी छोटी सी चूत में अगर यह लंड घुस गया तो मेरा क्या हाल होगा.

तभी अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह के पास लाकर रख दिया.
मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं.

अंकल ने कहा- चूसो इसे!
मैंने कहा कि यह तो गंदा है.
अंकल ने कहा- पागल, गंदा नहीं बहुत टेस्टी है. एक बार टेस्ट तो करके देख.

उनके बार-बार कहने और जोर देने पर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया.
अंकल की बात सच निकली, लंड बहुत टेस्टी लग रहा था.
मैं पहली बार किसी का लंड चूस रही थी लेकिन इतने अच्छे से चूस रही थी कि मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि मैं पहली बार लंड चूस रही हूं.

कुछ देर लंड चूसते के बाद अंकल ने मुझसे कहा- मेरी रानी अब तू तैयार हो जा … कली से फूल बनने के लिए मन बना ले. अब तू अपनी चूत में लंड ले ले.
मैंने कहा- नहीं अंकल, आप ऐसा मत करो. बाकी का काम हम फिर कभी कर लेंगे.

लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद अंकल कहां मानने वाले थे, वे मेरे ऊपर आ गए और मेरी दोनों टांगें चौड़ी करके अपने लंड के सुपारे को मेरी चूत के मुँह पर रख दिया.
साथ ही अंकल ने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा लिए और एक जोरदार झटका मेरी चूत में लगाकर अपना लंड आधा अन्दर उतार दिया.

दर्द के मारे मेरी आंखों से आंसू निकल आए. मैं चिल्लाना चाहती थी मगर उन्होंने अपने होंठों से मेरे होंठों को बंद कर रखा था.
मैं खूब कसमसाई मगर उनके मजबूत शरीर ने मेरे शरीर को जकड़ रखा था.

वे मुझे हिलने डुलने नहीं दे रहे थे.

फिर उन्होंने दोबारा से एक जोरदार झटका मारा और बचा हुआ आधा लंड भी मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक जा घुसा.
मुझे इतनी जोर का दर्द हुआ कि मैंने पूरी ताकत लगा कर धक्के से अंकल को अपने आपसे दूर कर दिया और जोर से चिल्लाई- हट जाओ साले अंकल.

तभी मेरी नज़र अंकल के लंड पर पड़ी तो देखा कि लंड चूत के लाल खून से भरा हुआ है.
मैं डर गई और रोने लगी.

तभी अंकल मेरे पास आए और मुझे प्यार से बोले- शुरू शुरू में थोड़ा सा दर्द होता है ललिता, एक-दो बार अन्दर बाहर करने पर यह दर्द मजे में बदल जाएगा … और आज अगर तुमने यह हिम्मत नहीं दिखाई, तो तुम अपनी पूरी जिंदगी इस बात को लेकर डरती रहोगी.

उनके समझाने से मैं समझ गई.
मेरे पास समझने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था.

फिर उन्होंने दोबारा से अपने लंड को मेरी चूत के मुँह पर रखा और अब की बार धीरे धीरे अपना अपना लंड मेरी चूत में उतार दिया.
इस बार मुझे थोड़ा कम दर्द हुआ.

थोड़ी देर तक उन्होंने अपना लंड अन्दर ही बिना हिलाए-डुलाए घुसाए रखा और मेरे मम्मों को चूसने लगे.
धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और वापस से मुझमें उत्तेजना होने लगी.

अब मुझे चूत में लंड का अहसास अच्छा लग रहा था.
कुछ देर रुकने के बाद अंकल धीरे-धीरे हिलने लगे और मुझे भी अब मजा आने लगा.
धीरे-धीरे करते-करते मेरे मुँह से ‘हुम्म्म आहहह …’ की आवाज़ बराबर निकल रही थी.
अंकल अब मुझे धीरे-धीरे चोद रहे थे.

काफी देर तक वह मुझे धीरे धीरे चोदते रहे. इस बीच मेरी चूत दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी.

अचानक अंकल उठ कर मेरे मुँह के पास अपना लंड ले आए और बोले- मुँह खोलो.
इससे पहले मैं कुछ समझ पाती, उनके लंड ने गर्म गर्म वीर्य मेरे चेहरे पर गिरा दिया.

मैं ‘छी … छी …’ करती हुई बाथरूम में भागी.
मैंने अपने चेहरे और चूत को अच्छे से धोया और कपड़े पहन कर बाहर वाले रूम आकर बैठ गई.

कुछ देर बाद अंकल भी कपड़े पहन कर बाहर आ गए और मुस्कुराकर बोले- कैसा लगा ललिता?
मैंने कहा- बहुत दर्द हुआ.
उन्होंने कहा- आज पहली बार था इसलिए ऐसा लगा. बाद में धीरे-धीरे दर्द खत्म हो जाएगा और मजा आने लगेगा.

उसके बाद अंकल ने प्यार से मुझे अपने गले लगाया और मैं अपने घर आ गई.

उस दिन के बाद तो अंकल दिन में तीन-तीन बार मुझे अलग-अलग आसन में चोदने लगे थे.
मुझे भी अपनी चूत चुदवाने में मजा आने लगा था.

अंकल ने शायद ही ऐसा कोई आसन छोड़ा होगा, जिसमें उन्होंने मुझे नहीं चोदा होगा.
अंकल ने 15 से 20 ही दिनों में मुझे लगभग 50 बार चोद दिया होगा और मैं भी इन 15 से 20 ही दिनों में चुद-चुद कर एकदम जबरदस्त चुदाई की खिलाड़ी बन चुकी थी.

दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई की कहानी थी.
अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि किस तरह मैं अपनी फैमिली के साथ शर्मा आंटी के भाई की शादी में गई, जहां शर्मा आंटी के भाई ने और उसके तीन दोस्तों ने मिलकर मुझे चोद

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कुंवारी बहन की जवान चूत मारी

दोस्तो, नमस्कार. मैं मानसी एक और नई सेक्स कहानी लेकर आई हूँ. मैं उम्मीद करती हूँ कि यह वर्जिन बहन की सेक्स कहानी आपको पसंद आएगी. इस सेक्स कहानी के पात्र बहन भाई हैं. बहन का नाम शीना है. वो 22 साल की उम्र की दिल्ली की रहने वाली मस्त माल है.
दूसरा पात्र पीयूष है, जो कि शीना का भाई है. वो 25 साल का है.
शीना की फिगर 36-30-38 का है, जो कि नॉर्मल से ज्यादा है बहुत ही सेक्सी दिखने वाली लौंडिया है.
उसकी आंखें तो ऐसी हैं कि एक बार नजरें मिला कर बात कर ले, तो कोई भी मर्द उसका दीवाना हो जाए.
उसकी उभरी हुई गांड देखकर किसी बूढ़े व्यक्ति का भी लंड खड़ा हो जाए.

ऐसी हॉट बहन हो तो कौन नही चोदेगा।

इन दोनों के पापा का अपना बिजनेस होने के कारण पैसे की कोई कमी नहीं है. दिल्ली में बहुत बड़ा बांग्ला है, पूरा परिवार ऐश की ज़िंदगी जी रहा है.

शीना बैंगलोर में आइआइटी की पढ़ाई कर रही है और पीयूष भी बैंगलोर में ही रह कर किसी बड़ी कंपनी में बिजनेस की इंटर्नशिप कर रहा है.

दोनों भाई बहन में बहुत प्यार है, दोनों ही खुले विचारों वाले हैं. इन्होंने बैंगलोर में एक फ्लैट ले रखा है.
क्योंकि हॉस्टल में रोका-टोकी बहुत होने के कारण इतनी आज़ादी नहीं है इसलिए फ्लैट लेना ज्यादा बेहतर लगा.

अपने इस फ्लैट में शीना बहुत ही सेक्सी कपड़ों में रहती है. वो ज्यादातर शॉर्ट्स और स्कर्ट में ही होती है, जिसमें जरा सी झुकने पर उसकी पैंटी भी साफ दिखाई देती है.
लेकिन पीयूष ने कभी शीना को सेक्स की नजरों से नहीं देखा था.

एक दिन शीना किसी पान की दुकान से सिगरेट खरीद रही थी तो पीयूष भी वहीं आ गया.
शीना अपने भाई को मिली और जाने लगी.

जाते टाइम पान वाला आदमी शीना की हिलती हुई गांड देख कर ललचा रहा था.
जिस पर पीयूष को थोड़ा गुस्सा भी आया.
लेकिन वो ऐसे ही उससे उलझना नहीं चाहता था.

पीयूष ने पान वाले को बोला- क्या देख रहे हो भाई?
तो पान वाला बोला- भैया आपकी गर्लफ्रेंडवा बहुतेई सेक्सी है. सच में अगर मेरी ऐसी होती, तो मैं तो पूरी रात नंगी करके पेलता, साली को कपड़े भी न पहनने देता.

यह बात सुन कर पीयूष के शरीर में झनझनाहट पैदा हो गई लेकिन अगले ही पल उसने सोचा कि यह तो मेरी सगी बहन है इसके लिए मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए.
वो वहां से चल पड़ा.

अब पीयूष की रात की नींद उड़ गई थी. उसको बार बार शीना की गांड और बूब्स याद आ रहे थे.
तब भी उसने कोई भी ऐसा काम करने का नहीं सोचा, जिससे उसकी बहन उसके नीचे आ जाए.

एक दिन पीयूष ऐसे ही फ्री बैठा शीना के लैपटॉप में काम कर रहा था.

उस दिन इंटरनेट कुछ स्लो चल रहा था. वो हिस्टरी चैक करने लगा, तो हक्का बक्का रह गया.

शीना ज्यादातर बार हॉट कहानियां ही पढ़ती थी. उसमें भी वो ज्यादातर सेक्स कहानी भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ना पसंद करती थी.
यह देखकर पीयूष शॉक हो गया.

अब उसे लगा कि उसकी बहन भी सेक्स के प्रति बहुत गर्म है. क्यों ना मैं भी एक बार कोशिश कर ही लेता हूँ.

अपनी इस वासना को और अधिक मजबूत करने के लिए उसने भी अन्तर्वासना पर भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ना शुरु कर दीं.
इससे उसके लंड में तनाव आ गया और उसने अपनी बहन शीना की चूचियों और गांड को याद करके मुठ मार ली.

अब पीयूष बार बार शीना से टकरा जाता और शीना की गांड और चूचों को दबा देता.
वो शीना के साथ और भी बहुत कुछ करने की कोशिश करता लेकिन वो अभी उससे सीधा सेक्स के लिए बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था.

शाम को शीना को कुछ शॉपिंग करनी थी, तो उसने पीयूष को भी साथ ले लिया. वहां पर शीना को ब्रा पैंटी लेनी थी.

उसने अपने भैया से पूछा कि कौन सी लूँ?
तो पीयूष बोला- ये सब बकवास देख रही हो, तुम थोंग वाली पैंटी ले लो.

यह सुनकर शीना हैरान रह गई कि यह क्या हो गया भाई को.
वो हैरानी से अपने भाई को देखने लगी.

इस तरह से अपनी तरफ देख कर पीयूष ने हंस कर कहा- तूने पूछा तो मैंने बता दिया. ले लो ना, पहनने में भी मजा आएगा.

शीना ने भी मुस्कुरा कर एक थोंग पैंटी उठाई और पूछा- अच्छा ठीक है, कलर बताओ कौन सी ले लूं?
पीयूष ने उंगली रखते हुए एक लाल रंग कि पैंटी लेने के लिए कह दिया.

शीना ने लाल और काली दो कलर की थोंग पैंटी ले लीं.

फिर घर आकर जब शीना ने वो पैंटी पहनी, तो उसको अपनी गांड में अजीब सा लगा. वो चेंज करने जा ही रही थी.
तभी पीयूष ने कमरे में आकर उसे देखा और बोला- मस्त लग रही है.

शीना बोली- मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है.
पीयूष- कोई बात नहीं, यही पहन कर रखो, धीरे धीरे तुमको मजा आने लगेगा.
शीना भी मुस्करा दी.

अगले दिन पीयूष ने शीना की पैंटी पर खुजली की दवाई लगा दी, जिससे शीना की बुर में बार बार खुजली हो रही थी. उसका हाथ बार बार चुत पर जा रहा था.

उसे चुत खुजाते देखकर पीयूष बोला- क्या हुआ शीना … उधर खुजा क्यों रही हो?
शीना चुत खुजलाते हुए बोली- भैया लगता है मेरी सुसु में एलर्जी हो गई है.

पीयूष बोला- दिखाओ जरा!
शीना बोली- नो भैया, वो दिखाने वाली जगह नहीं है.

पीयूष बोला- कोई बात नहीं तुम मेरी बहन हो, मुझे दिखा सकती हो.
इस पर शीना ने एक कातिलाना मुस्कराहट दे दी और बोली- नहीं भैया, ऐसा कुछ नहीं है. मगर पता नहीं क्यों … खुजली बहुत ज्यादा हो रही है.

अब पीयूष ने अपने प्लान के मुताबिक उसको एक लोशन दे दिया और लगाने के लिए कह दी. खाने के लिए एक कामवर्धक गोली दे दी यह कह कर कि इससे एलर्जी ठीक हो जाएगी.
शीना को क्या पता था कि वो एलर्जी की नहीं सेक्स की गोली खा रही है.

शीना दवा खाकर सोने के लिए बेड गई.
कुछ 15-20 मिनट में गोली ने असर दिखाना शुरू कर दिया. शीना की चुत में एलर्जी की खुजली तो ठीक हो गई थी, लेकिन लंड लेने के लिए खुजली शुरू हो गई थी.

अब उसको नींद भी नहीं आ रही थी.
वो भाई को कुछ बता भी नहीं सकती थी कि क्या हो रहा है.

तभी पीयूष बोला- क्या हुआ ठीक तो हो?
तो शीना बोली- पता नहीं भाई, बड़ी बेचैनी सी हो रही है.

अपने प्लान के मुताबिक पीयूष ने शीना को पीछे से हग कर लिया और ये कहते हुए लेट गया- मेरे साथ लेट जाओ, सब बेचैनी दूर हो जाएगी.

उसने पानी बहन को से तरह पहले भी हज़ारों हग बार किया था, इसलिए ये बात उन दोनों के लिए एक सामान्य सी बात थी.

लेकिन आज गोली के असर के कारण जैसे ही पीयूष ने शीना को अपनी बांहों में लिया तो उसके तन बदन में एक अलग ही चिंगारी पैदा हो गई.

फिर आज पीयूष का लंड भी कुछ अकड़ा हुआ था.
थोड़ी देर में पीयूष का 8 इंच का लौड़ा शीना की गांड में गड़ने लगा था, जिससे शीना की सांसें तेज़ हो रही थीं.

पीयूष ने अपना एक हाथ शीना के कंधे पर रख दिया था और वो उसे सहला रहा था.
धीरे धीरे पीयूष ने अपना हाथ नीचे को लाना शुरू किया और उसके मम्मों के क्लीवेज में टच करने लगा.

शीना की सांस और तेज़ होने लगीं.

तभी अचानक शीना बोली- भैया लगता है बिस्तर में चूहा आ गया, मुझे वो मेरे पीछे चुभ रहा है.
पीयूष बोला- अरे नहीं वो चूहा नहीं है, तुम्हारा वहम है, ऐसा कुछ भी नहीं है.

थोड़ी देर बाद शीना अपना एक हाथ पीछे करके पीयूष के लौड़े को, जिसको वो चूहा समझ रही थी … हटाने लगी, तो उसका हाथ सीधा अपने भाई के लौड़े से टकरा गया.

वो हैरान हो गई और शर्मा गई. वो धीरे से बोली- भैया यह चूहा नहीं है, यह तो आपका वो है.
पीयूष बोला- मेरा क्या है?

वो बोली- मुझे नहीं बताना कि आप कितने बेशर्म हो.
पीयूष बोला- मैं क्या बेशर्म हूँ … बताओ न, किसकी बात कर रही हो?

शीना बोली- मुझे शर्म आ रही है.
पीयूष उसके मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- अरे शर्माओ नहीं बताओ प्लीज.

शीना बोली- अरे वही है यार … जो आपका पर्सनल बॉडी पार्ट है.

लेकिन पीयूष कहां मानने वाला था, ऊपर से वायग्रा का असर भी अब उसकी बहन पर चरम पर था.

शीना धीरे से बोली- आपका लौड़ा कितना बड़ा है.
उसने ये कह कर अपने हाथों से अपनी आंखें बंद कर लीं.

पीयूष उसे अपनी बांहों में भरता हुआ बोला- मुझे सुनाई नहीं दिया, थोड़ा ऊंचा बोलो.
तभी शीना बोली- आपका लौड़ा.

पीयूष बोला- और ऊंचा बोलो.

तो शीना ने पूरा जोर लगाकर तीन बार बोला- आपका लौड़ा … आपका लौड़ा … आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.
ये कह कर वो शर्माने लगी.

पीयूष बोला- हां यह हुई न बात.

अब पीयूष का हाथ शीना के मम्मों को जोर से दबाने लगे थे और शीना न चाहते हुए भी उसको मना नहीं कर पा रही थी.

पीयूष बोला- मेरे लौड़े को हाथ में लेकर कैसा लगा?
शीना बोली- बहुत अच्छा.
पीयूष बोला- तुमने तो मेरा लौड़ा हाथ में ले ही लिया है. अब तुम भी मुझे अपनी चुत को हाथ लगाने दो.

थोड़ी नानुकर करते करते शीना ने हां कर दी. तभी पीयूष ने बैठ कर अपनी बहन शीना की स्कर्ट के नीचे से उसकी पैंटी उतार दी और उसकी स्कर्ट उठा दी.

शीना नीचे से नंगी हो गई थी.
उसकी सफाचट चुत देख कर पीयूष एक पल के लिए भी न रुक सका. उसने सीधे ही अपनी बहन की बुर पर अपनी जीभ रख दी और जोर जोर से चाटने लगा.

शीना को इस हमले की उम्मीद न थी, वो मचल उठी. शीना मस्ताते हुए बोली- आह भैया यह क्या कर रहे हो … आह हटो न … वो गंदी जगह है आप अपना मुँह वहां से हटाओ.

लेकिन पीयूष कहां रुकने वाला था. ऐसी अनछुई बुर को वो किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने वाला था.
धीरे धीरे शीना का विरोध भी खत्म हो गया और वो अब जोर जोर से मादक सिसकारियां ले रही थी जो पूरे कमरे में गूंज रही थीं.

पीयूष ने अपनी पूरी जीभ वर्जिन बहन की बुर में डाल दी.
कुछ ही देर में शीना कि चुत का माल निकाल गया और वो भी बहुत ज्यादा निकला था.
पीयूष अपनी बहन की चुत का पूरा रस पी गया.

अब शीना भी बहुत ही तरोताज़ा महसूस कर रही थी.

पीयूष ने पूछा- मजा आया?
तो वो बोली- बहुत ज्यादा … बता नहीं सकती कि कितना मजा आया.

पीयूष बोला- तो अब मेरा भी मुँह में लेकर चूस दो.
शीना बोली- छी: … गंदा काम मैं नहीं करूंगी.

पीयूष बोला- अपना काम निलवा कर अब मना कर रही हो.
वो हंसने लगी.

तभी पीयूष ने अपना बीवी मुँह शीना के बूब्स पर रख कर उसके निप्पल चूसने लगा.

बहन पर गोली का असर तो अभी भी था. कुछ ही सेकंड में शीना फिर से गर्म हो गई. अब पीयूष ने धीरे से अपना लौड़ा निकाल कर उसके मुँह पर रख दिया तथा उसके होंठों पर झटके देने लगा, जिससे शीना और ज्यादा गर्म हो रही थी.

दोनों ही भाई बहन का रिश्ता भूल चुके थे.

लंड देख कर बहन भाई से बोली- भाई, आपका इतना बड़ा लंड मेरे मुँह में नहीं आएगा.

वो अपनी जीभ निकाल कर अपने भाई के लौड़े के टोपे पर जीभ चलाने लगी जिससे भाई का लौड़ा और ज्यादा टाइट हो गया.

शीना अपने भाई का लौड़ा थोड़ा थोड़ा करके अपने मुँह में लेने लगी थी.
पीयूष अपनी बहन के मुँह को बड़ी मस्ती में चोद रहा था और उसके मम्मों को दबा रहा था.

कुछ ही देर में मस्ती छा गई और अब शीना अपने भाई का लौड़ा ऐसे चूस रही थी जैसे वो कोई लॉलीपॉप चूस रही हो.

फिर पीयूष ने अपना लौड़ा शीना के मुँह से निकाल लिया और अब वो अपनी बहा की चुत की फांकों पर घिसने लगा.
बहन ने अपनी कुंवारी बुर का मुँह खोल दिया.
भाई अपनी बहन की चुत पर लंड टिका कर और ज्यादा रगड़ने लगा.

अचानक शीना को कुछ याद आ गया और वो बोली- नहीं भैया, यह सब नहीं … आपका लौड़ा बहुत बड़ा है और मेरी चुत अभी तक कुंवारी है. प्लीज़ नहीं … बहुत दर्द होगा.

पीयूष मदहोशी में था; वो बोला- कभी ना कभी तो लंड को अपनी बुर में लेना ही पड़ेगा … क्यों ना आज तुम अपने भाई का लंड ही ले लो. मैं भी अभी कुंवारा ही हूँ. हम दोनों की सील एक साथ टूटेगी … मजा आएगा.

शीना मन होते हुए भी मना करती रही.
मगर पीयूष ने अपना लौड़ा वर्जिन बहन की बुर की दरार में फंसा कर एक झटका दे मारा.

भाई का लंड चुत में घुसा तो बहन की चीख निकल गई- आह मर गई भैया … आह प्लीज छोड़ दो … मैं मर गई मम्मी रे … हाय मेरी चुत फाड़ दी … मेरी चुत फट गई.

लेकिन अब कहां कुछ होने वाला था.
पीयूष रुक गया और अपनी बहन के मम्मों को चूसने लगा. वो उसके होंठों को चूसने लगा.

धीरे धीरे बहन का दर्द कम हुआ, तो अचानक से भाई ने दूसरा झटका और दे मारा. इस बार भाई का आधा लौड़ा बहन की बुर में चला गया था.

शीना दर्द से छटपटाने लगी.

पीयूष रुका नहीं, उसने एक और झटका दे दिया और उसका पूरा लंड उसकी बहन की बुर के अन्दर चला गया.

शीना की जान निकल गयी वो लगभग बेहोश सी हो गई.
ये देखकर पीयूष थोड़े समय के लिए रुक गया.

एक दो पल बाद शीना के जिस्म में हरकत होने लगी और अब धीरे धीरे उसकी चीखें मादक सिसकारियों में बदल गईं.

अब वो खुद अपनी गांड उठा उठा कर अपने भाई के लंड से चुद रही थी.

पूरे कमरे में एसी की ठण्डक के बावजूद दोनों पसीने से लथपथ थे.
पीयूष जोरों से शीना की चुत को चोद रहा था.
शीना इस बीच दो बार झड़ गयी थी.

अब पीयूष के लंड का भी माल निकलने वाला था. उसने अपने धक्के तेज कर दिए और शीना की बुर में अपना वीर्य भर दिया.

लंड खाली करने के बाद पीयूष अपनी बहन के ऊपर ही लेट गया.
आधे घंटे तक दोनों को दीन दुनिया का कोई होश ही न रहा.
भाई का लंड बहन की चुत में ही घुसा रहा.

होश में आने के बाद शीना ने बोला- भैया मेरी जांघें दुख रही हैं … प्लीज़ अब अपना लंड बाहर निकाल लो.

जैसे ही पीयूष ने अपनी सगी बहन की बुर से लंड बाहर खींचा, तो पटाके चलने जैसी आवाज आयी. इस आवाज से दोनों हंस पड़े.

जब शीना ने अपनी बुर की तरफ देखा तो उसमें से भाई का वीर्य और खून की धारा बह कर सूख चुकी थी.
पूरी चादर खून से लथपथ हो चुकी थी

और उसकी टांगें हिल ही नहीं रही थीं.

पीयूष ने अपनी बहन को अपनी गोद में उठा लिया और उसे बाथरूम में लेकर आ गया.
गीजर चालू करके गर्म पानी से पीयूष ने बहन की बुर को साफ किया.

बहन बड़े प्यार से अपने भाई के हाथों से अपनी चुत साफ़ करवाती हुई देखती रही.

बाद में दोनों बिस्तर पर आकर नंगे ही चिपक कर सो गए.

चुदाई के तीन दिन तक शीना लंगड़ा कर चलती रही थी. ठीक होने के बाद चुदाई का सिलसिला चालू हो गया.

अब तो वो दोनों अपने फ्लैट में नंगी हालत में ही रहते. जब उन दोनों का दिल करता, चुदाई का मजा ले लेते.

बेटा ही बना माँ का पति

ये कहानी मेरी बुवाजी की है, और कहानी को बुवाजी ने ही लिखी है। मेरी बुवाजी के क्या ही बताइये वह दिखाने मे एक कामसीन औरत है..कहानी..

मैं कौशल्या देवी उम्र ३९ साल, चंडीगढ़ के रहने बाली हु, पति मेरे कनाडा में रहते है, एक बेटा है जो मेरे साथ रहता है, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी कह रही हु, जिसको मैं आज 6 महीने से छुपा के राखी थी, पर आज मैंने सुबह ही तय कर लिया था की आपलोग के सामने अपनी इस कहानी को लेकर आई ताकि थोड़ा हल्का महसूस कर सकु.

ऐसी माँ रहे तो कौन नहीं चाहेगा…

ज़िंदगी कई सारे सुख और दुःख का मेल है, कई बार इंसान के साथ अच्छा होता है तो ख़ुशी होगी है और कभी कुछ गलत होता है तो दिल के कोने में एक राज होता है जिको सदा के लिए दफ़न हो जाता है और मरते दम तक इस बोझ को सहना पड़ता है, अब तो माध्यम है इंटरनेट का जिसपे हम अपनी बात को खोल सकते है, ना तो आपको पता है की मैं कौन हु, ना मुझे पता है की आप कौन है, इसलिए आज डर भी नहीं है की लोग और पडोसी क्या कहेंगे, मैंने अपना असली नाम नहीं बताया है इसलिए लिए माफ़ी चाहती हु, पर कहानी 100 % सच है.

मैं कई दिनों से चुदाई की कहानी प्यासी मालती भाभी के वेबसाइट पे पढ़ रही थी, तभी लगा की मुझे भी बतानी चाहिए, मैं ३९ साल की हु, और एक बैंक में जॉब करती हु, ज़िंदगी काफी अच्छी चल रही है, पति के पास नहीं जा पाती हु, क्यों की आपको पता है की वो विदेश में है, वो दो साल में एक बार आते है, सब सुख है पर सिर्फ सेक्स से बंचित थी, क्यों की दो साल में सिर्फ १ महीने के लिए ही मैं रंगरेलियां मना पाती थी, बाकी ज़िंदगी तो सुखाड़ थी, किसी और से भी अगर सेक्स सम्बन्ध बना लू तो सकाज का डर फिर बाद में वो इंसान मुझे किस तरह से उसे करेगा, ये सब सोच के मैं बहकते बहकते बची, पर मेरा जिस्म मुझे बहका रहा था, जब भी रात को सोती थी तो मुझे दूसरे मर्दो का ख्याल आता था, और मेरे तन बदन में आग लग जाती थी, कभी कभी तो सेक्स की जवाला ऐसे धधकती थी, मैं बाथरूम में जाके ठन्डे पानी का सहारा लेना पड़ता था चूचियाँ तन जाती थी, चूत गरम हो के पिघलने लगती थी, और सच तो ये था की ये चार साल जब से मैं 35 की उम्र पार की, मेरे शरीर का बनावट और अच्छा हो गया था, गांड गोल गोल चूचियाँ बड़ी पर सुडौल, पेट और कमर सुराही की तरह, गोरी तो हु ही, अपने आप की मेंटेन करती थी किसी चीज की कमी नहीं थी, स्पा और बिउटी पारलर हमेशा जाती हु, सच पूछिये तो आजकल मैं सेक्स बम हो गई थी.
मेरा बेटा जो २१ साल का है, अभी कॉलेज में जाता है, रणवीर कपूर से काम नहीं लगता है, जब वो सोलह साल का हुआ था तभी से मैंने उससे अपने साथ सुलाना बंद कर दिया था पर जब उसका बर्थडे अप्रैल 2015 में हुआ तो मैंने उसे गिफ्ट मांगने के लिए बोली, मैंने कहा मनपसंद गिफ्ट दूंगी इस बार तुझे, मैंने सोचा वो जो भी गाडी, मांगेगा मैं दूंगी, पर उसने मुझे इमोशनल कर दिया था. उसने कहा माँ मैं आपके साथ सोना काफी मिस कर रहा हु, मुझे आप अपने आप से अलग मत करो मेरा आपके सिवा और कौन है, मैं आपके साथ ज़िंदगी में कभी भी साथ नहीं छोड़ना चाहता, मैं रो पड़ी और कह दी ठीक है बेटा तू जो कहेगा होगा, उसके बाद से वो मेरे साथ ही सोने लगा, मेरे मन में कभी भी कोई ख्याल नहीं आया था, बस वो मेरे साथ सोने लगा था, देर रात तक बात करते और फिर दोनों एक दूसरे को गुड नाईट कहके सो जाते, पर एक दिन सब कुछ बदल गया था, रात के करीब २ बजे मेरी नींद खुली, मैंने देखा वो मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था, और मेरी चूचियाँ दबा रहा था, मेरे होठ को चूस रहा था, मैं जैसे ही जगी उसको धक्के दे के नीच की, और मैंने दो तीन गालियां दे दी, और कहा मैं अभी फ़ोन करते हु तेरे डेड को, तुमने क्या किया है मेरे साथ, माँ बेटे के रिश्ते को तार तार कर दिया है, तुम्हे पता भी है की तुम क्या कर रहा था, माँ बेटा का एक रिश्ता होता है.

तो बेटा कहने लगा, माँ तुम मुझे मत रोको, मैं जवान हु, घर से बाहर मुह मारूं इससे बढ़िया है की आपको भी खुश कर दू और मैं खुद भी एन्जॉय करूँ, मैंने कहा हरामी है तुम, मैं सोची थी की तुम अच्छा इंसान बनेगा पर तू तो हरामी निकला, तो कहने लगा, मैंने क्या किया क्या मैं ही ऐसा करता हु, मेरे दोस्त बंटी, मेरा दोस्त रणवीर, उन दोनों के पापा भी कनाडा में रहते है, और वो दोनों भी अपने माँ की चुदाई करता है, बंटी तो अपने बहन को भी नहीं छोड़ता, तो बुराई क्या है, घर की बात घर में ही तो है.
एक मिनट के लिए तो ऐसा लगा की मैं कोमा में चली गई, फिर अपने आप को सम्हालते हुए बोली की पर मैं ऐसा नहीं कर सकती, तभी मेरा बेटा बोला अगर तुम ऐसा नहीं कर सकती तो आज से मैं आपका बेटा नहीं, सुबह ही मैं कही और चला जाऊंगा, मैं डर गई, मैंने उसको गले से लगा लिया और बोली बेटा तू जो कहेगा वैसा ही मैं करुँगी, मैं अपने बेटे को खोना नहीं चाहती थी, ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, मैं इसको बर्बाद नहीं करना चाहती थी, मैं सोची अगर मैं इसके साथ सेक्स नहीं करती हु तो मेरा बेटा मेरे हाथ से चला जायेगा और अगर राजी हो जाती हु तो बेटा तो बेटा रहेगा ही, पति भी बन जायेगा.

फिर मैंने उसको गले से लगा ली पर वो हैवान हो गया था, वो मेरी चूचियाँ पे टूट पड़ा और मेरे होठ को चूसने लगा, मैंने भी उसी नदी की धरा में बह गयी मैं भी उसको हेल्प करने लगी, और हम दोनों अपने अपने जिस्म पर के कपडे कब निकाल दिए पता ही नहीं चला, आज मेरे सामने एक जवान लण्ड मुझे सलामी दे रहा था, मेरे तन बदन में आग लग गई थी, मैंने झट से उसके लण्ड के अपने मुह में ले ली, और चूसने लगा वो मेरे सर के बाल को पकड़ के लण्ड को अंदर बाहर कर रहा था और कह रहा था आज से तू मेरी माँ नहीं बल्कि रंडी माँ है तू मेरी रखैल है, आज तो तुम्हे चोद के तेरे चूत फाड़ दूंगा, मैं भी कहा काम थी मैंने भी दो तीन गलियां दे दी, मैंने कहा तेरे लण्ड में इतनी ताकत है तो मुझे आज संतुष्ट कर के देख, अगर तू सच में मादरचोद है तो आज मैं देखना चाहती हु तेरे में कितना दम है.

इतना कहते ही हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए, और वो मेरा चूत चाट रहा था और मैंने उसका लण्ड, लण्ड भी क्या था मोटा और करीब नौ इंच का, मेरे मुह में पूरा लण्ड नहीं आ रहा था, मैं उसके बदन को महसूस कर रही थी, उसके बाद वो फिर मेरे ऊपर आके मेरी चुचिया से अठखेलियां करने लगा, पर मैं और ज्यादा बर्दास्त नहीं कर सकती थी मुझे जल्द से जल्द लण्ड चाहिए था, मैंने कहा देर मत कर आज तू इस रखैल को खुश कर दे. वो मेरे पैर को अपने कंधे पर रखके अपना मोटा लण्ड मेरे चूत के बीच में रखा और एक ही धक्के में पूरा नौ इंच का लण्ड मेरे चूत में डाल दिया, मैं कराह उठी, आज तक मैं इतना मोटा लण्ड कभी भी नहीं ली थी, फिर क्या था, लैपटॉप ओन कर दिया और एक रसियन एडल्ट फिल्म लगा दिया, और मुझे उसकी स्टाइल में चोदने लगा, रात में करीब ६ बार उसने मुझे चोदा, और मैं भी चुदवाई, आज सुहागरात के बात पहली बार था जब ६ बार मैं चुदी. अब तो बेटा बेटा ना रहा, अब तो समझ ही नहीं आ रहा है क्या कहूँ, रोज चुदती हु, अपनी वासना की आग को शांत करती हु, पर ज़िंदगी बहुत ही अच्छी चल रही है.

सहेली के पति से चुदवाई

हेलो दोस्त मेरा नाम मालती है, मैं अपने पति को बहुत प्यार करती हु पर आज कल मुझे अपने सहेली के पति के साथ सेक्स सम्बन्ध बन गए है, क्या करू मेरा चूत आजकल मुझे दो लंड से चुदवाने की आदत सी हो गयी है, मैं बहुत ही सेक्सी औरत हु, मेरी उम्र २९ साल है, हॉट हु मेरी ब्रा की साइज ३६ है, आप सोच रहे होंगे की चूच बहुत बड़ा बड़ा होगा पर ऐसा नहीं है मेरा शरीर काफी सुन्दर है, निचे से ऊपर तक सेक्सी दिखती हु.

आज मैं आपको एक कहानी जो की बिलकुल सच्ची है मैं शेयर कर रही हु, ये सेक्स का रिश्ता जो नया नया बना वो मेरे सहेली का पति मनोज है, काफी सेक्सी इंसान है, गजब का सुन्दर है, मैं जब भी उसके घर जाती थी तो मेरा चूच मचलता था की कास ये चूचियाँ मनोज के हाथ से दबे जब भी मैं मनोज को देखती मेरी चूत में खुजली होने लगी, चुदवाने का मन करने लगता पर क्या करती मैं कामयाब नहीं हो पा रही थी, मैं चुदवाने के लिए तैयार थी पर मनोज मुझे उस निग़ाह से नहीं देखता था, पर मैं भी बहुत ही चुदक्कड़ हु, मैंने भी सोच लिया की लंड का मज़ा लेके ही रहूगी,

एक दिन मैं ऑफिस नहीं गयी थी मेरा पति भी पुणे गया था किसी काम से तो मैं सोची की आज मनोज को फ़ोन करती हु, क्यों की मेरी सहेली गाँव गयी थी क्यों की बच्चों की छुटियाँ थी, मनोज भी ५ दिन बाद जाने बल था ये बात मुझे पता था, तो मैं जानबूझ कर मैंने मनोज को फ़ोन किया और बोली मनोज जी, मुझे अर्जेंट बैंक का अकाउंट खुलवाना है, मैं फॉर्म भी ले आयी पर बैंक में किसी का खता हो उसका परिचय चाहिए, आपका तो अकाउंट उसी बैंक में है क्या आप परिचय दे देंगे बहुत भी जरूरी है, तो मनोज बोले हां हां क्यों नहीं मैं शाम को आपके घर के तरफ आऊंगा तो मैं फॉर्म में परिचय दे दूंगा. तो मैं बोल पड़ी नहीं नहीं मैं तो आपके अपार्टमेंट के पास ही हु, किसी काम से आई थी, आप कहे तो मैं आ जाती हु पांच मिनट के लिए, तो मनोज बोले ये तो और भी अच्छी बात है,
मैं तो सोच ली की आज मैं माँ को पिघला के ही रहूगी जब आग सामने होगी तो पिघलना पड़ेगा ही. मैं ५ मिनट में ही पहुंच गयी उन्होंने दरवाजा खोला और मैं अंदर आ गयी बहार बहुत गर्मी थी इस वजह से मेरे माथे पे पसीना था तो मनोज बोले अरे इतनी गर्मी में, मैंने कहा हां जरूरी था इस वजह से, मनोज के यहाँ बैडरूम में ही ऐ सी था तो बोले आप १० मिनट ऐ सी में ही बैठ जाओ, तो मैं बैडरूम में ही बैठ गयी वो फ्रीज़ से पानी निकलने गए, मैंने अपना दुपटा उतार के बगल में ही रख दी थी, मेरा जो सूट था उसमे से मेरी चूची आराम से दिख रही थी, दोनों गोल गोल चूचियाँ बाहर झांक रहा था, मनोज जैसे ही अंदर आया मैंने देखा की वो मेरी चूची को घूर रहा है मैंने भी थोड़ा और झुक गयी पानी लेने के बहाने की मनोज को चूचियाँ और ज्यादा दिखे, मैं समझ गयी, वो देख रहा था.

फिर वो मेरे सामने ही प्लास्टिक का चेयर लगा के बैठ गया मैंने पेट के बल लेट गयी और मुह उसके तरफ था, अब तो आप भी कल्पना कीजिये की मैं किस तरह दिख रही हूँगी, फिर मनोज ने कहा आज आप बड़े ही अच्छे लग रही हो, मैंने कहा आप भी तो आज सेक्सी लग रहे हो, और मैं मुस्करा दी, वो भी मुस्कुराया, फिर मैंने फॉर्म पे साइन करवाई, और बोली कैसा चल रहा तो मनोज ने कहा बीवी के वगैर क्या चलेगा, तो मैं बोल दी कहो तो मैं आज खाना बना देती हु, तो मनोज ने कहा नहीं खाना की चिंता नहीं है खाना के अलावा भी कुछ होता है खाना तो सब जगह मिल जाता है पर हरेक कुछ सब जगह नहीं मिलता, मैं समझ गयी वो क्या चाह रहा है, आज पहली बार वो थोड़ा लाइन दे रहा था मैं भी मौके का इंतज़ार कर रही थी, तो मैं ही बोल पड़ी अगर कुछ ऐसा है मेरे पास तो मैं दे सकती हु, तो मनोज बोल पड़ा, उसपे तो आपके पति का हक़ है, तो मैंने कहा की पति को क्या पता, इतना कह कर मैंने एक सेक्सी मुस्कान दी, वो मेरे पास खींचा चला आया और अपना होठ मेरे होठ पे रख के मुझे अपनी बाहों में भर लिया.
मैंने भी भरपूर मदद की होठ चुस्वाने में धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चूची पे गया और कस कस के दबाने लगा, मैं भी उसको चूमने लगी, बेड पे पैर फैलाकर लेट गयी वो मेरे ऊपर चढ़ गया, और कपडे के ऊपर से ही धक्क्के लगाने लगा और होठ चूस रहा था, फिर उसने मेरे एक एक कर के कपडे खोलने सुरु किया मैं उस दिन बड़ी भी जालीदार सेक्सी ब्रा और पेंटी पहनी थी, वो ब्रा का हुक खोलते ही, मुह से मेरे चूच की निपल को चूसने लगा फिर वो पुरे चूच पे जीभ फेरने लगा, मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था फिर मैंने कहा मनोज ऊपर का कर रहे हो असल मज़ा तो निचे है देखो, मनोज तुरंत ही मेरे पेंटी को निकाल दिया और दोनों पैर के बीच में बैठ के मेरा पैर फैला दिया और मेरे चूत को चाटने लगा, मैं मदहोश होने लगी, वो दोनों हाथ से चूच पकडे था और मुह कभी चूत के कभी नाभि पे, फिर मैं सेक्सी आवाज़ निकलने लगी, उसका लंड खड़ा हो गया था और काफी टाइट था, मैं भी पुरे लंड को अपने चूत में लेने के लिए बेक़रार थी.

आखिर वो समय आ गया जब वो पूरा लंड मेरा चूत में पेल दिया मैं कराह उठी, उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था, उसके मसल को मैं अपने चूच से सटाये थी, और जोर जोर से गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, वो भी मुझे चोदता रहा कभी उठा के कभी बैठा के कभी ऊपर चढ़ा के, कभी पैर ऊपर कर के, फिर मुझे पेट के बल लिटा दिया और अपने लंड पे थूक लगाया और मेरे गांड में एक से दो झटके में में पूरा लंड मेरे गांड में दाल दिया, फिर मुझे काफी देर गांड मरने के बाद फिर से चूत चोदा फिर सारा का सारा वीर्य मेरे मुह में डायल दिया, मैं उसके नमकीन वीर्य को चाट रही थी, उस रात को भी हम वही रुके और रात भर रंगरेलियां मनाई, आपको ये कहानी कैसी लगी जरूर रेट करे और फेस बुक पे शेयर करे आपको मेरी कसम आपको अपने लंड की कसम प्लीज.

चलती हुई बस में लंड का लोलीपोप कर के चूसा


हाय, मेरा नाम मालती है, मुझे लगा कि मुझे यहां अपना अनुभव लिखना चाहिए. कुछ कहने से पहले मैं आप सभी को खुद के बारे में थोड़ा सा बता देती हूँ.

मैं 27 साल की हूँ, मेरे मॉम डैड दोनों जॉब करते हैं, मैं अपने मॉम डैड की एकलौती पुत्री हूँ. हमारे घर पर सर्वेन्ट्स के अलावा सिर्फ मैं ही रहती हूँ.

फ्रेंड्स, मुझे लंड चूसना बहुत पसंद है … इतना ज्यादा पसंद है कि मैं हमेशा उसी के बारे में सोचती रहती हूँ.

हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है, पर मुझे अकेलापन बहुत महसूस होता था. मेरे दिमाग में हर वक्त सेक्सी बातें ही घूमती रहती हैं.

ये सब कैसे शुरू हुआ था, वो मैं आपको किसी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी, पर अभी मैं बस वो सेक्स कहानी लिख रही हूँ कि मैंने अपनी इस लंड चूसने की कामना को पूरा करने के लिए क्या किया था.

मुझे हमेशा जान पहचान का कोई न मिल जाए, इसका डर रहता था; तो मैं अपने शहर में ऐसा कभी कुछ नहीं करती थी.

इसके लिए मैं अक्सर दूसरे शहर में कुछ दिन के लिए चली जाती थी.
किसी होटल में रुक कर मैं अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए हर सम्भव प्रयास करती और एन्जॉय भी कर लेती थी.

लंड चूसने से लेकर कभी कभी चुदाई करने तक की सारी हसरतों को पूरा करने के बाद मैं अपने शहर वापस आ जाती थी.

वैसे तो अकेली लड़की देख कर लड़के तो हमेश रेडी ही रहते हैं. लड़कों को पटाने के लिए तो मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती थी.

हालांकि मुझे चुदाई में इतना इंटरेस्ट नहीं था जितना लंड चूसने में मजा आता था.
मुझे जब भी कोई मस्त लौंडा दिखाई दे जाता था तो बस यही मन करता था कि उसे रोककर अपने घुटनों पर बैठ जाऊं; फिर उसकी पैंट खोल कर उसका लंड हाथों में लेकर अपनी जीभ से पूरी उसकी लम्बाई चौड़ाई नाप लूं.

जब मर्दाना लंड का सुपारा मेरी जीभ के पिछले हिस्से और मेरे गले को रगड़ता है तो मैं बता नहीं सकती कि कितना मजा आता है.

लंड रगड़ते रगड़ते उसका गर्म गर्म लावा मेरे गले में धार बनकर निकलता है, तो मेरी पूरी बॉडी ख़ुशी से मचल जाती है.

आज मैं आपको अपना एक छोटा सा किस्सा सुना रही हूँ.

एक बार मुझे जब किसी अनजान आदमी का लंड चूसने का बहुत मन कर रहा था तो मैंने एक लग्जरी ट्रेवल्स की बस में टिकट बुक किया.
लेकिन मैंने फ़ार्म में फीमेल ही जगह मेल भर दिया.

वो बस सेमी स्लीपर थी, उसमें सीट को पीछे फैला कर बैठने की व्यवस्था थी. मतलब आप बस की सीट को पीछे झुका कर पैर पसार सकते थे मगर बर्थ जैसी व्यवस्था नहीं थी कि लेट सकें.

चूंकि मुझे किसी के साथ सेक्स नहीं करना था. बस लंड ही चूसना मेरा मकसद था, तो मेरे लिए बस की इस तरह की सीट्स मुफीद थीं.

मैंने उस दिन घुटनों तक की स्कर्ट पहनी और ऊपर टी-शर्ट पहन कर रेडी हो गई.
अपने साथ एक छोटे बैग में एक चादर ले लिया जिसका फायदा मैं सेक्स कहानी में आगे बताउंगी.

रात को दस बजे की बस थी. रात का भी फायदा था कि ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ता था.

मैं बस में चढ़ी और अपनी सीट पर बैठ गयी.
मेरे साथ वाली सीट अभी खाली ही थी.

मैंने विंडो साइड बुक की थी ताकि मैं थोड़ी छिपी रहूँ और लाइट ऑफ होने के बाद किसी को कुछ पता न चले.

बस चल पड़ी थी … एक घंटे बीत जाने के बाद भी कोई नहीं आया तो मैं थोड़ी मायूस हो गयी.

फिर बस एक जगह रुकी खाने के लिए.

आधे घंटे के बाद बस वापस चली और लाइट्स वगैरह फिर से बंद हो गईं.

मुझे लगा कि मेरा आज का प्लान फेल हो गया.

पर दस मिनट आगे जाने के बाद बस रुक गई और एक लड़का बस में चढ़ गया.
उसकी सीट वही मेरे पास वाली थी.

पहले मुझे देखकर वो थोड़ा रुक गया … और उसने फिर से अपनी सीट चैक की.

वो मुझसे बोला- आपकी सीट यही है क्या?
मैंने कहा- हां, गलती से ये मैंने बुक कर ली थी और जेंडर सिलेक्ट नहीं किया था. मुझे कोई दिक्कत नहीं है, आप बैठ जाइए.

अब वो बैठ गया और उसने बैग रख कर खुद को सीट पर एडजस्ट किया.

उसने सीट को थोड़ा पीछे पुश कर दिया.

इससे मुझे लगा कि क्या करना चाहिए, ये तो सोने की जुगाड़ बना रहा है.

मैंने उससे बातें करना शुरू कर दीं.
फिर उसे ऐसा दिखाया कि मुझे थोड़ी ठंड लग रही है. मैंने अपने बैग से चादर निकाल कर ओढ़ ली.

बस की लाइट्स पूरी ऑफ थीं, तो मैंने अपना स्कर्ट घुटने से थोड़ा ऊपर किया और उसके घुटने को टच कर लिया.

अब लड़के तो लड़के होते हैं, उसने जैसे ही मेरा घुटना देखा … तो बस देखने लगा.
वो मुझे देखने लगा तो मैं सोने का नाटक करने लगी.

उसने मेरे घुटने को अपने पैर से छुआ और हाथ से थोड़ा सहलाया.
मैं समझ गई कि मेरा काम हो गया.

वो मेरे पैर पर ऊपर को आने लगा.
मेरी जांघ एकदम गर्म थी. मेरे दिमाग में सेक्स जो घूम रहा था.

वो ऊपर जाने लगा.

दो मिनट के बाद मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे रोक दिया.
वो घबरा गया.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने सॉरी बोला.
मैंने कहा- सॉरी मतलब?

वो बोला- व्वो म…मैं अपनी टांग खुजा रहा था, इसलिए मेरा हाथ आपकी टांग को लग गया.
मैंने कहा- बहुत खुजली हो रही है क्या?

वो मेरी बात से डर गया और बोला- सॉरी मेम … मैं सच कह रहा हूँ.
तभी मैंने उससे कहा कि चलो मान लेती हूँ कि तुम खुजली मिटा रहे थे. अब अपनी खुजली मिटा रहे हो, तो मेरे पैर को भी खुजला दो.

उसने मेरी बात सुनी तो मेरी तरफ अपलक देखने लगा.

मैंने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो … अब खुजाओ भी!
वो कुछ नहीं बोला और सीधा बैठ गया. उसे लगा कि मैं उसको धमकी दे रही हूँ.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी जांघ पर रख कर कहा- खुजाओ न … रुक क्यों गए?

वो मेरी तरफ फिर से देखने लगा. शायद उसे भरोसा ही नहीं हो रहा था कि मैं उससे ये सब करने के लिए कह रही हूँ.

वो मेरी जांघ पर हाथ चलाने लगा और धीरे से बोला- आप वास्तव में ऐसा करवाना चाहती हैं?
मैंने कहा- कैसा?

वो फिर से सकपका गया मगर इस बार उसने कुछ साहस दिखाया और अपनी उंगली को मेरी पैंटी के किनारे से रगड़ते हुए कहा.

वो- अन्दर की खुजली भी शांत करवाना चाहती हो?
मैं हंस कर बोली- तुम सिर्फ उतना करो, जितना कहा है.

वो मेरी जांघ पर हाथ फेरने लगा.

उसके हाथ मेरी चुत तक जाने लगे थे.
तो मैंने उससे कहा- ज्यादा अन्दर मत जाओ … पर मैं तुम्हें थोड़ा एन्जॉय करा सकती हूँ.

वो मेरी बात से खुश हो गया.

मैंने अपनी चादर उसके पैर पर फैला कर उसके लंड को पैंट के ऊपर से ही छुआ. उसका लंड थोड़ा हार्ड हो गया था.

मैं उसके लंड को सहलाने लगी.

फिर जब लंड टाइट हो गया तो मैंने उसकी ज़िप खोली.
इधर इसके हाथ मेरे बूब्स को सहलाने दबाने लगे थे

उसके बैठने की वजह से मैं उसका लंड बाहर नहीं निकाल पा रही थी.

उसने अपनी कमर को कुछ ऊपर किया तो लंड बाहर निकल आया.
मैं उसके लंड को हिलाने लगी और चादर के अन्दर मेरे हाथ चलने लगी.

बस में अंधेरा बहुत था, तो ये सब आराम से हो रहा था. रात के बारह बज चुके थे तो सब सोये पड़े थे.

मैंने उससे कहा कि तुम बाहर देखते रहना … कोई देख तो नहीं रहा.

इतना कह कर मैं उसकी गोद में झुक गयी और लंड को मुँह में ले लिया.
वो बहुत ही उत्तेजित हो गया था तो बीस चुप्पे लगाने में ही उसके लंड ने लावा उगल दिया.
मैं पूरा लंड रस पी गयी.

पर अभी मेरा मन नहीं भरा था.
मैं उसके लंड को झड़ जाने के बाद भी लगातार चूसती ही रही.

उसका लंड ढीला पड़ गया था मगर कुछ मिनट चूसने के बाद उसमें फिर से तनाव आने लगा.

मैंने उसका लंड पूरा मुँह में भर लिया और गले और जीभ से उसका सुपारा ऐसे दबाने लगी, जैसे मैं लंड निगलना चाहती हूँ.

उसे तो जन्नत का मजा आ रहा था.

इस बार उसे झड़ने में पांच मिनट लगे और मुझे वो मजा मिला जो पिछली बार में नहीं मिला था.
उसके वीर्य की धार मेरे गले में आने लगी थी.

अब मुझे मजा आ गया था और मैं उसके लंड को तब तक चूसती रही, जब तक वो दोबारा छोटा नहीं हो गया.

फिर मैंने कहा- अब बस मुझे सोना है.

मैं खिड़की से सर टिका कर सोने लगी लेकिन वो बस कभी मेरी जांघों पर, तो कभी मेरे मम्मों को दबाता रहा.
मगर जैसे ही वो चूत के पास जाने की कोशिश करता, मैं उसका हाथ रोक देती क्योंकि मुझे वो सब नहीं करना था.

फिर रात को तीन बजे उसने मुझे जगाया और बोला- तुम मेरी गोद में बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- यार मेरा लंड खड़ा हो गया है और मेरा चुदाई करने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने उसके लौड़े को हाथ लगाया तो सच में खड़ा था.

मैंने उससे कहा- मैं फिर से चूस देती हूँ … मगर उससे ज्यादा कुछ नहीं.
उसने कहा- ओके.

मैंने इस बार उसके लौड़े और अच्छे से चूसा.
इस बार उसे और मुझे बहुत मजा आया.

उसने मेरे मुँह को थोड़ा ऐसे चोदना शुरू कर दिया था जैसे चूत चोदते हैं.
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

इस बार उसे लंड का लावा निकालने में देर भी लगी.

मैंने उसका लंड पूरा मुँह में भरकर जीभर के चूसा. उसके झड़ने पर मैंने उसका पूरा रस भी पिया.

अब तक सड़क पर थोड़ा थोड़ा उजाला दिखने लगा था. हम दोनों ठीक होकर बैठ गए.

सुबह उसका स्टॉप जल्दी आ गया और वो उतरने से पहले मुझसे मेरा मोबाइल नंबर मांगने लगा दोबारा मिलने के लिए और अपने साथ चलने के लिए बोलने लगा.

मैंने उससे कहा- बस नमस्ते … ये हमारी पहली और आखिरी मुलाकात है. मुझे तुमसे अब कभी नहीं मिलना है. यही तुम्हारे और मेरे लिए ठीक है.

वो बहुत देर तक रिक्वेस्ट करता रहा.
फिर उसका स्टॉप आने पर वो उतर गया.
उसे लगा कि मैं उसकी बात नहीं सुनूंगी.

वो मायूस होकर नीचे उतर गया और बाय बोल कर चल दिया.

दोस्तो, चलती बस में मेरा लंड चुसाई का अनुभव यही था. आप सबको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. ईमेल से बताना.

आप नीचे मुझे कमेंट्स लिख सकते हैं. अगर आपका अच्छा रिस्पोंस मिला, तो मैं अपनी वो कहानी लिखूंगी कि ये मेरा जुनून कैसे शुरू हुआ.
तब तक के लिए बाय.