सहेली के ससुर से चुद गई मैं – 1

Saheli Ke Sasur Se Chud Gayi Main- Part 1

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम मालती है. मेरी पिछली सेक्स कहानी
कुंवारी चूत प्यार में चुद गई
आप सबको बहुत पसंद भी आई थी, जिसको लेकर मुझे बहुत से ईमेल भी मिले थे. मैं किसी को ज़्यादा जवाब नहीं दे पाई, इसलिए आपसे माफी चाहूँगी.

मैं एक छोटे से गांव की हूँ. ससुराल वालों की खेती है, पर सभी लोग शहर में रहते हैं. कभी कभी हमारे परिवार के लोग अपने गांव में आते हैं. खेती का कुछ काम होता है. गांव की भी एक सेक्स कहानी है, उसे मैं आपको बाद में बताऊंगी.

वैसे तो मेरा फिगर साइज़ आपको पहले भी मैं बता चुकी हूँ. नए दोस्तों के लिए मैं अपने 34-28-36 के फिगर को फिर से बता रही हूँ. मैं देखने में बहुत खूबसूरत हूँ.

शादी के कुछ दिनों बाद ही हम लोगों ने शहर में ही एक किराये का अलग मकान लिया. हमारे घर में कुछ दिक्कत चल रही थी. उधर जगह कम थी, इस वजह से भी दूसरा घर लेना पड़ा. इस नए घर से मेरे पति को ऑफिस जाने आने में जरा नज़दीक भी पड़ता था. मेरे पति काम से ज़्यादा बाहर ही रहते थे.

इस नए घर में जाने के कुछ दिन बाद मेरी मुलाकात मेरे बाजू में रहने वाली पड़ोसन वनिता से हुई. कुछ ही दिनों में हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए.

मेरे घर में मैं और मेरे पति ही रहते थे. वनिता के घर में उसके पति और ससुर के अलावा एक लड़का भी था. वनिता की सास अब इस दुनिया में नहीं थीं.

वनिता की उम्र 26 साल की है और उसकी फिगर भी मेरे जैसे ही 34-26-36 की है. उसका वजन 54 किलोग्राम के लगभग होगा व हाइट 5 फिट 3 इंच की है. वो देखने में खूबसूरत थी.

दोपहर में हम घर में ही रहते थे, तो वनिता मेरे घर आ जाती थी या मैं उसके घर चली जाती थी. हम दोनों धीरे धीरे खुल कर बातें करने लगे. हमारी बातों में सेक्स का रंग जमने लगा था. चुदाई के बारे में हम दोनों आपस में बड़े खुल कर चर्चा करती थीं. शादी से पहले क्या हुआ और शादी के बाद भी किसका किससे चक्कर रहा. आस पास के इलाके में कौन सी लड़की का किसके साथ चक्कर चल रहा है … वगैरह वगैरह.

फिर वनिता के ससुर जी से भी मुलाकात हुई. उसने मेरी थोड़ी बहुत बातें होती रहती थीं. जैसे वो पूछते कि कैसी हो, खाना खाया या नहीं … वगैरह.

फिर वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार से मेरे पति की पहचान भी अच्छे हो गई. राजेन्द्र कुमार भी मेरे घर आने लगे. ख़ास बात यह कि वनिता के ससुर राजेन्द्र बहुत हंसमुख इंसान थे. वे हमेशा मजाक के मूड में ही रहते थे. अपने इसी स्वभाव के चलते वो मेरे साथ और मेरे पति के साथ भी मजाक करने लगे.

एक दिन मैं घर में थी और वनिता कुछ काम से बाहर गई हुई थी. उसके ससुर राजेन्द्र कुमार जी बाहर गए हुए थे. तो उसके घर की चाभी मेरे पास थी.

वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार करीब 12:30 बजे मेरे घर पर आए. उन्होंने दरवाजे की बेल बजाई, मैं उस वक्त कपड़े धो रही थी. मेरी सलवार आधी गीली थी. तब मैंने बिना ओढ़नी के ही जल्दी से जाकर दरवाजा खोल दिया.

सामने राजेन्द्र कुमार थे. वे मुस्कुरा कर मेरे घर में अन्दर आ गए.
उन्होंने पूछा- क्या कर रही थी मालू?
मैं बोली- जी कपड़े धो रही थी. आप बैठें, मैं अभी आती हूँ.

मुझे ख्याल ही नहीं था कि वो मेरे मम्मों को देख रहे हैं. मैं कपड़े साफ़ करने लगी और बातें भी करने लगी.
तभी मेरा ख्याल गया कि वो मेरे मम्मों को हिलते हुए देख रहे हैं.
तब तक मेरा काम हो गया था, तो मैं हाथ साफ करके उनको पानी देने लगी.

पानी लेने के बहाने उनके हाथ मेरे हाथ को टच हो गए. राजेन्द्र जी ने मेरे हाथ से पानी का गिलास लिया और पानी पीने लगे. तब तक वनिता भी आ गई. वे दोनों अपने घर चले गए. मैं भी अपना सब काम करके हॉल में आ गई और टीवी ऑन करके सीरियल देखने लगी.

कुछ टाइम बाद दरवाजे की बेल फिर से बजी. मैंने दरवाजा खोला, तो सामने वनिता थी. वो अन्दर आई और मेरे पास बैठ कर टीवी देखने लगी. टीवी देखते हुए हम दोनों बात करने लगे.

बातों बातों में मैंने पूछ लिया- यार वनिता, तेरी सास को गुज़रे हुए कितना टाइम हुआ?
तो वो बोली- करीब 3 साल हो गए … क्यों पूछ रही हो?
मैं बोली- बस ऐसे ही पूछ रही हूँ, वैसे तुम ससुर राजेन्द्र जी का ख्याल बहुत अच्छे से रखती हो ना.
वो बोली- हां यार, रखना पड़ता है.

मैं चुप हो गई.

फिर वो बोली- यार एक बात पूछना चाह रही थी.
मैंने कहा- हां पूछो न!
तो बोली- यार मुझे लगता है कि मेरे ससुर जी को तुम कुछ ज्यादा ही देख रही थीं.
मैं बोली- नहीं यार … ऐसा कुछ भी नहीं था.
वनिता बोली- हम्म झूठ मत बोलो यार … एक बात कहूँ, मेरे ससुर जी तुम पर फ़िदा हैं.
मैं बोली- वो कैसे?
तो बोली- यार तुम जवान हो, खूबसूरत हो … और जब मैं चाभी लेने आई, तो दरवाजा खुला था, ससुर जी पानी का गिलास हाथ में ले रहे थे. उस वक्त उनकी नजरें तेरे मिल्की मम्मों पर थीं.
मैं बोली- नहीं यार.
तो वो बोली- ओके तो चल ट्राय करके देखते हैं कि क्या होता है.

मैं हंसी मजाक में उसकी बात मान गई. फिर वो कुछ देर बैठ कर अपने घर चली गई.

इसके बाद मैंने राजेन्द्र जी के सामने इस बात को चैक करना शुरू कर दिया. वे मेरे घर आते, तो मैं कभी उनके सामने झुक कर झाड़ू लगाने लगती, कभी पौंछा लगाने लगती. साथ ही मैं चुपके से उनके सामने देखती, तो वो हमेशा ही मेरे चूचों और गांड को ही देखते रहते.

इस तरह दो महीने हो गए.

फिर एक बार पति को रात में अपने काम से तीन हफ़्तों के लिए बाहर जाना था. तब वनिता के बेटे का बर्थडे भी था. उसने हम दोनों को भी बुलाया था.

उसी दिन पति को बाहर जाना था तो वे बोले- तुम होटल चली जाना, मैं कुछ गिफ्ट लेकर वहां दे जाऊंगा.
पति करीब छह बजे चले गए.

बर्थडे की पार्टी रात में एक होटल में थी, उसमें खाना भी रखा गया था. पार्टी में बहुत सारे लोगों को आना था, तो मैं सज धज कर जाने के लिए तैयार होने लगी. मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी और ससुर जी को याद करते हुए मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना, ये ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ था, जिसमें से मेरी पीठ एकदम नंगी दिख रही थी. मैं खुद को आईने में देखती रही और मुस्कुरा दी. इस ब्लाउज में से मेरे मम्मे बाहर आने को मचल रहे थे.

तभी वनिता मुझे बुलाने आई और मुझे देख कर बोली- वाओ … बड़ी मस्त लग रही हो … लगता है आज ससुर जी को दीवाना बना ही दोगी.
उसकी इस बात पर मैं भी मुस्कुरा दी.

उसके बाद मैं घर को ताला मार कर निकल गई.
हम सभी शाम को 7:30 को बाहर निकले थे. मैं, वनिता और वनिता के पति व राजेन्द्र जी और एक अन्य मेहमान स्विफ्ट कार से निकल पड़े. मेहमान कार में आगे बैठ गए. वनिता, मैं और राजेन्द्र जी पीछे की सीट पर थे. वनिता खिड़की वाली सीट पर थी. ससुर जी मेरे बाजू में बैठ गए थे. कार हाइवे पर आई, तो राजेन्द्र जी की कोहनी मेरे मम्मों को टच होने लगी भी. वनिता जानबूझ कर अपनी टांगें फैला कर बैठी थी. जिससे मैं और भी ज़्यादा वनिता के ससुर जी से चिपक गई थी. इसलिए उनको और भी मौका मिल गया था.

मैं उनकी कोहनी लगने से कुछ नहीं बोली. तो वो और हिम्मत करते हुए मेरे मम्मों को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मुझे भी मजा आने लगा था.
कुछ ही देर में हम लोग होटल पहुंच गए थे.

तभी मेरे पति का फोन आया, वो बोले- आप लोग कहां पर हो?
मैंने उन्हें बताया- हम लोग मोनार्क होटल में हैं.
वे बोले- ओके मैं भी आ रहा हूँ.

कुछ देर बाद पति गिफ्ट लेकर पहुंच गए. उसके बाद हम सबने केक काटा और छोटी सी पार्टी की. पार्टी के बाद हम सभी रात में घर पहुंचे. तब 10:30 बज गए थे.
कार में पहले से ही जगह नहीं थी. इसलिए पति बोले- आप लोग निकलो, मैं आता हूँ.

फिर वैसे ही कार में बैठे और घर को आने लगे. तो इस बार कार में बैठते ही राजेन्द्र जी ने अपना काम शुरू कर दिया और मेरी नाभि पर हाथ घुमाने लगे. मैंने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें देखा, तो वे थोड़ा रूक गए. फिर एक दो मिनट बाद वे मेरे मम्मों को छूने लगे. मेरी चुत का हाल बुरा हो चला था.

मैं हाथ से उनके हाथ को दबाने लगी. तभी वनिता की नज़र मुझ पर पड़ी, तो वो मुस्कुरा दी.

कुछ टाइम में हम लोग घर आ गए. मैं सबसे बाद में उतरी.

राजेन्द्र जी ने सबसे कहा- आप लोग चलो, मैं कुछ सामान लेकर आता हूँ.

उन्होंने मुझे भी रुकने को बोला. अपना मोबाइल फोन मेरे हाथ में धीरे से देते हुए बोले- ज़रा बैटरी देखना.

सब लोग बिना कुछ सोचे घर पर चले गए. तब राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और किस करके बोले- बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हो.
मैं शर्मा कर बोली- जी छोड़ दीजिएगा. कोई देख लेगा.

मैं घर पर आ गई. घर पर आते ही पति भी घर पहुंच गए. मैंने साड़ी उतारी और नाइटी पहन ली. उस रात पति ने मुझे एक बार चोदा और बाहर चले गए.

मैं वनिता के ससुर राजेन्द्र जी के बारे में सोचने लगी और अपनी प्यासी चुत में उंगली करने लगी.

एक बार चुदने के बाद भी मेरी चुत से ढेर सारा जूस निकल गया. फिर मैं सो गई.

सुबह पति का फोन आया कि वो आज ही वापस आ जाएंगे. उनका काम नहीं हुआ था और तीन हफ्ते तक रुकने का कार्यक्रम निरस्त हो गया था.

पति से बात करने के बाद मैंने फ्रेश होकर अपना देखा. करीब 12:00 बजे तक मैं अपने सब काम निपटा चुकी थी. तभी किसी ने दरवाजे की बेल बजाई. मैंने दरवाजा खोला तो सामने राजेन्द्र जी थे. वे मुस्कुरा कर अन्दर आ गए और मेरे पति के बारे में पूछने लगे.
मैं बोली- जी वो तो रात को ही बाहर चले गए थे. लेकिन आज शाम तक आ जाएंगे.

अब तक मैं दरवाजा बंद कर चुकी थी. मैं बोली- आपके लिए चाय बना कर लाती हूँ.

मैं किचन में चली गई. उस दिन मैं लैगी पहनी थी और फिट टॉप पहना हुआ था. इस ड्रेस में मेरा फिगर साफ़ दिख रहा था. मैं चाय बना कर लाई और उन्हें दी.
वो चाय पीते हुए बोले- अगर दूध पिलाती, तो और मजा आता.
मैं बोली- ओके अभी लाती हूँ.

तो राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- मुझे वो दूध नहीं पीना, तुम अपना दूध पिलाओ मेरी रानी.
राजेन्द्र जी ने मुझे अपनी गोद में खींच कर मेरे गालों पर एक किस कर दिया.

मैंने उन्हें किस करने दिया. वो और भी आगे बढ़ने वाले थे कि मैंने उन्हें रोक दिया.

मैं बोली- अंकल जी, अभी नहीं … मुझे कुछ टाइम और दो … उसके बाद हम सब करेंगे.
वे भी मान गए और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- ओके … पर मैं रोज किस करूंगा.
मैंने हमे भर दी- जी ओके.

वे कुछ टाइम बाद चले गए.

उसके एक घंटे बाद वनिता आ गई. वो कार वाली बात पूछने लगी.

तब मैं बोली- हां मजा तो आ रहा था.
वो बोली- ओके फिर आज क्या हुआ?

मैंने उसे सब बता दिया कि अंकल ने किस किया, मम्मों को दबाया … वगैरह वगैरह.

तो वनिता बोली- ओह गॉड … अब कल मेरे बाहर जाने पर तू उन्हें अपने घर बुला लेना और आगे वो क्या करते हैं, मुझे सब बताना.
मैं हंस कर आंख मारते हुए बोली- ओके.

फिर दूसरे दिन वनिता सुबह काम से बाहर चली गई. उस दिन 12 बजे से 2 बजे तक मैं भी अकेली थी. पति सुबह ही ऑफिस निकल गए थे.

वनिता के जाते ही उसके ससुर जी मेरे पास आ गए. मैंने दरवाजा खुला ही रखा था. मुझे पता था कि वनिता के जाते ही राजेन्द्र जी मेरे पास आ जाएंगे.

यही हुआ … वो वनिता के जाते ही मेरे घर आ गए. उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.

मैं किचन में थी, वो वहीं आ गए और मुझे पीछे से पकड़ कर किस करने लगे.
तब मैं बोली- अंकल, हॉल में चलो, मैं वहीं आती हूँ.

ससुर जी हॉल में आ गए.
कहानी में सेक्स का रंग चढ़ने लगा था. मेरी चुदाई की घड़ियां समाप्त होने को थीं.
आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

कुंवारी चूत प्यार में चुद गई

(First Love Virgin Sex Kahani)

सभी को नमस्कार, मेरा नाम अनुक्ति है मुझे घर पर सभी अनु नाम से ही बुलाते हैं.
मैं मध्य प्रदेश से हूँ.

मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.

दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं दो साल से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
मुझे sexystory.art.blog के बारे में मेरी सहेली ने बताया था, तभी से मैं यहां पर कहानिया पढ़ती आई हूँ.

यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.

शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.

इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.

कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मेरी क्लास में ही संजय भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती संजय से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.

संजय और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.

छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.

मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.

संजय देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.

उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स संजय के बर्थडे पर उसके घर गए थे.

संजय के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर संजय ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.

संजय और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.

उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.

कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.

उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.

वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.

फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.

संजय चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.

बस इसी तरह चल रहा था.

संजय सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.

कुछ दिन बाद संजय ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.

मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.

मैं छवि को बोल कर आई थी कि संजय के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.

मैंने संजय से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.

वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.

तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.

संजय ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.

वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.

वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.

थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.

भीड़ कम होती गयी.

संजय ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?

पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.

थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.

फिर संजय ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.

मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.

वहां जाने के बाद संजय मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.

इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.

मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.

संजय की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.

उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.

उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.

वह मुझे चूमने लगा.

करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.

तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.

उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.

उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.

मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो संजय बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.

मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.

वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.

मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.

फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.

उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.

मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.

अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.

संजय ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.

मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.

उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.

उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.

उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.

उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.

मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.

फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.

पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.

वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.

मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.

उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.

उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.

उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.

इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और संजय ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.

फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.

अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय संजय ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.

संजय अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.

मैंने संजय से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.

उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.

दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.

संजय ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.

ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.

उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.

वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.

फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.

वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.

मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.

मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.

उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.

वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.

मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और संजय के लंड को पहना दिया.

बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.

फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.

मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.

उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.

उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.

उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.

उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.

उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!

फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.

वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.

वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.

कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.

मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.

तभी संजय आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.

मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा संजय मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.

उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.

मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
संजय बोला- अनु मजा आया?

मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.

मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
संजय ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?

उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.

उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.

वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.

दोस्तो, आपको मेरी फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ बताएं.

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मेरी मम्मी को स्पोर्ट्स कोच ने चोद दिया

हाय दोस्तो, मैं कुलदीप, उम्र 19 साल, गोवा से हूं।
यह मेरी पहली कहानी है।

घर में मैं और मेरी मम्मी ही हैं। उनका नाम अनीता है।

पापा का देहांत होने के कारण सारा बोझ मम्मी के सर पर आ गया था।

मम्मी ने एक योग अकादमी में योग सिखाना शुरू कर दिया था।
घर में बहुत तंगी थी तो मुझ पर भी बहुत दबाव था।

मेरी मम्मी की उम्र 40, रंग गोरा और हाईट 5.6 इंच है। बेटा होने के नाते मैंने कभी मम्मी को उस नज़र से तो नहीं देखा परंतु आप सबके लिए बता दूं कि मम्मी की चूचियों का साइज़ 36 है, कमर 30 है और भरी हुई गांड 40 की है। इसीलिए मम्मी 30 साल की माल औरत लगती हैं।

मैं एक नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी हूं जिसके पीछे मेरी मम्मी का बहुत बड़ा हाथ है।

वो योगा टीचर हैं। उन्होंने अपने आपको फिट रखा हुआ है, इसी कारण मेरे आस-पड़ोस का हर नौजवान मम्मी की बड़ी गान्ड को चोदने का सपना देखता रहता है।

मम्मी ज्यादातर जींस या लेगिंग्स ही पहनती हैं, साड़ी और सूट-सलवार तो कभी कभी ही चलता है।

उन्होंने पापा के गुजर जाने के बाद शादी तो नहीं कि परंतु उनके संबंध 4 या 5 लोगों से ज़रूर रहे हैं।
इनमें 4 मेरे से उम्र में थोड़े बड़े थे।

मम्मी की उम्र का एक आदमी जो अकादमी का मालिक भी है, उसके साथ मम्मी के संबंध अभी भी हैं।
वो अंकल मम्मी को छोड़ने भी आते हैं और कभी कभी लेने भी आते हैं।

मम्मी कभी-कभी उनके साथ पार्टियों में भी जाती है।
मम्मी को कई बार अंकल ने हमारे घर पर ही चोदा है और मैंने उनकी चुदाई अपनी आंखों से देखी है।

मुझे बुरा तो लगता था परंतु मम्मी की खुशी इसी में ही थी तो कुछ नहीं कर पाता था।

आज जो कहानी मैं बताने जा रहा हूं ये कहानी दो साल पहले की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में स्टेट के सिलेक्शन के लिए काफ़ी मेहनत कर रहा था।
जब सिलेक्शन का वक्त आया तो मुझे मेरे कोच ने ट्रायल्स में बाहर कर दिया।

इस बात का मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर पर आकर रोने लगा।
मॉम ने पूछा तो मैंने उनको सारी बात बताई।
वो कहने लगी कि वो कोच से खुद बात करके सब सही कर देगी।

फिर सुबह होते ही मैंने और मम्मी ने नाश्ता किया और मम्मी ने अपनी जॉब से छुट्टी ले ली और कहा- बेटा आज मैं तेरे साथ स्कूल चलूंगी।
मैंने भी हां कह दिया।

मैं स्कूल के लिए तैयार होने लगा तो मम्मी तैयार हो चुकी थीं।
उस दिन मम्मी कुछ अलग रही थीं।
उन्होंने लाल रंग की चमकदार साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उनका जिस्म उभर कर बाहर आ रहा था।

उनके चूचे एकदम मिसाइल की तरह तने हुए थे और गांड एकदम बम लग रही थी।

हम घर से निकले और फिर थोड़ी देर बाद हम स्कूल चल दिए।
स्कूल के अंदर हम घुसे ही थे कि मेरी मम्मी को सब बड़े बच्चे और पुरुष टीचर हवस भरी निगाहों से देखने लगे।

फिर हम जैसे ही ग्राउंड में कोच के पास पहुंचे तो स्पोर्ट्स वाले बच्चों और कोच की आंखें फटी की फटी रह गईं।

कोच से मैंने मम्मी का परिचय कराया तो दोनों ने अपने नाम बताए और दोनों के बीच कुछ बातें हुईं।

मेरे कोच का नाम अभिषेक था।
अभिषेक की उम्र 28 साल, रंग गोरा और हाईट पूरी 6 फिट थी।

मुझे अपनी मम्मी को देखकर ऐसा लगा जैसे मेरी मम्मी को कोच पसंद आ गया हो।
फिर कोच ने कहा- चलो अनिता जी, स्पोर्ट्स रूम में जाकर बात करते हैं।

फिर हम तीनों स्पोर्ट्स रूम में चल दिए।
स्पोर्ट्स रूम में घुसते ही कोच ने मम्मी को कुर्सी पर बैठाया और मैं खड़ा रहा।

मम्मी और कोच आपस में बात करने लगे।

कोच ने मम्मी से कहा- आपका बेटा स्टेट लेवल तक खेलने लायक प्लेयर नहीं है इसीलिए हम इसको नहीं ले सकते।
मम्मी ने कहा– अभिषेक जी, मुझे अपने बेटे से बहुत उम्मीदें हैं, देख लो कुछ हो जाए तो!

मम्मी ने थोड़ा कुर्सी पर झुक कर कोच सर को अपनी छाती के दर्शन करवा दिए जिससे कोच के चेहरे पर एक हवस भरी मुस्कान तैर गई।
फिर कोच ने कहा- अनिता जी, अब मैं कुछ नहीं कर सकता, अब लिस्ट जा चुकी है।
तभी मम्मी ने कहा– मैं अपने बेटे को टीम में लाने के लिए कुछ भी कर सकती हूं, कृपया करके एक मौका तो दें?

इस बात पर कोच मेरी मॉम की क्लीवेज में घूरने लगा और मॉम थोड़ा और नीचे झुक गई।
मुझे समझ आ गया कि सर के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे, जरूर मम्मी की चुदाई होने वाली है।

फिर मम्मी ने मुझसे कहा– बेटा तुम बाहर जाकर प्रैक्टिस करो, मैं इनसे अकेले में कुछ बातें करना चाहती हूं।
मैं रूम से बाहर निकल गया।

कुछ देर तो मैं वहीं पर खड़ा रहा।
मैंने सोचा कि अंदर झांक कर देखता हूं कि मम्मी अभी तक क्यों नहीं आई।

जब मैंने देखा तो दरवाजा अंदर से लॉक हो चुका था।
अब तो मेरा शक पक्का हो गया था।

पीछे की ओर एक खिड़की थी।
मैं चुपके से पीछे गया और खिड़की के नीचे बैठ गया।

फिर धीरे धीरे नजर उठाते हुए मैंने कमरे में अंदर झांक कर देखा।
कोच ने मम्मी को टेबल पर बिठाया हुआ था और उनकी साड़ी कमर तक खुली हुई थी, उनका ब्लाउज उतर चुका था और वो नारंगी कलर की ब्रा में थी।

कोच मेरी मम्मी की चूचियों को दबाते हुए उनके होंठों को चूम रहा था और मम्मी भी उसके गले में बाहें डाले हुए उसका साथ दे रही थी।
इतने में मम्मी ने अपनी ब्रा खोल दी।

मम्मी की चूचियां कोच के सामने हवा में आजाद हो गईं।
मैं मम्मी की गोरी और मोटी रसीली चूचियों को देखकर हैरान रह गया।
ऐसी ही हैरानी शायद कोच को भी हुई होगी।

उसने मम्मी को टेबल पर गिराया और बुरी तरह से उसकी चूचियों को भींच भींचकर पीने लगा।

मम्मी के चूचों को चूसते हुए कोच ने कहा– अनीता जी, जब से आपको देखा है तब से ही इन चूचों को चूसने के लिए दिल मचल रहा था।
मम्मी बोली- मेरे बेटे को टीम में जगह दोगे तो मैं आपको स्वर्ग की सैर करवा सकती हूं।

कोच- तो करवाइये ना अनीता जी, मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूं। आपके बेटे की टीम में जगह पक्की करवाना मेरे हाथ में है।

इतने में ही मम्मी ने कोच की लोअर के ऊपर से उसके लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया और कोच के मुंह से कामुक बातें निकलने लगीं- आह्ह … स्स … अनीता जी … आप तो बहुत रोमांटिक हैं … ऐसी लेडी तो मुझे पहली बार मिली है।

अब कोच काफी उत्तेजित हो गया और उसने मेरी मम्मी के बदन से साड़ी को बिल्कुल अलग कर दिया। जल्दी से उसने पेटीकोट उतारा और मम्मी की पैंटी के ऊपर से चूत को रगड़ने लगा। मम्मी भी सिसकारने लगी।

फिर उसने पैंटी में हाथ देकर चूत को अच्छे से रगड़ना शुरू कर दिया।
अब मम्मी भी अपनी चूचियों को दबाते हुए आह्ह … स्स … आह्ह … स्स्स … करने लगी।

कोच ने मम्मी की चूत में उंगली डाल दी और वो एकदम से उचक सी गई।
वो मेरी मॉम की चूत में उंगली चलाने लगा तो मम्मी बहुत गर्म हो गई।
उसने कोच की लोअर नीचे खींच दी और उसे नंगा कर लिया।

जल्दी से मॉम ने उसके लंड को मुंह में भरा और तेजी से चूसने लगी।

कोच जोर जोर से सिसकारने लगा- आह्ह … स्स्स … हाय … साली रंडी … आह्ह … क्या मस्त चूसती है तू … आह्ह … खा जा मेरे लंड को रांड … स्स … हाय … चूस जा पूरा!
वो दोनों हवस में जैसे पागल हो चुके थे।

फिर कोच ने मेरी मम्मी की पैंटी को उतार दिया और खुद भी नंगा हो गया।
उसने मम्मी को पलटा लिया और मॉम की मोटी गांड उसके सामने थी।
उसने मॉम की गांड पर चांटे लगाने शुरू किए।

कई चांटे मारने के बाद मॉम की गांड लाल हो गई।
फिर उसने मम्मी की गांड में मुंह लगा दिया और उसको चाटने लगा।
मॉम भी पागल होने लगी।

टेबल पर झुकी हुई मॉम की चूचियां आगे पीछे हिल रही थीं और वो आगे पीछे होते हुए अपनी गांड को कोच के मुंह पर रगड़ रही थी।

मुझे यह सब देखकर गुस्सा तो आ रहा था लेकिन अंदर ही अंदर मज़ा भी बराबर आ रहा था।
मैंने मम्मी को पहले भी नंगी देखा था लेकिन इस बार और ज़्यादा मज़ा आ रहा था।

फिर कोच ने मम्मी की चूत में थूक दिया। उसने अपने लंड पर भी थूक लगा लिया।

उसने मॉम को सीधी किया और अपना लन्ड मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी एकदम से सिहर सी गई।

फिर कोच ने मम्मी की दोनों टांग पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया।
कुछ देर में मॉम को भी मजा आने लगा।
मम्मी की चुदाई कोच बहुत बेरहमी से कर रहा था।

अब मॉम अपनी चूत को खुद कोच के लौड़े की तरफ धकेल रही थी।

थोड़ी देर बाद कोच ने मम्मी को टेबल पर बैठा दिया और खुद भी बैठ गया।
फिर उसने मम्मी को लिटा कर मम्मी की चूचियों में लन्ड फंसा कर चूचियों को चोदना शुरू किया।
मॉम की मोटी चूचियों के बीच लंड अच्छे से रगड़ खा रहा था।

लन्ड मम्मी के मुंह तक टच हो रहा था।
मम्मी और कोच ने फिर एक ज़ोरदार किस की।

अब मॉम कोच को लिटा कर उनके ऊपर बैठ गई और कोच ने मम्मी की चूत के बजाय गांड में लन्ड पेल दिया।

मम्मी उचक गई और फिर आराम से लंड को धीरे धीरे करके पूरा उतरवा लिया।
लंड को गांड में लेकर वो आराम से चुदने लगी।

धीरे धीरे दोनों का जोश बढ़ने लगा और कोच अब तेजी से जोर लगाते हुए नीचे से मॉम की गांड में लंड को पेलने लगा।

ये सब देखकर मेरे लंड का भी बुरा हाल हो गया था।

मैं मुठ मारना चाहता था लेकिन वहां पर खतरा था।
कुछ देर चोदने के बाद कोच ने मम्मी को टेबल से नीचे उतार दिया।

मम्मी को कुर्सी पर घोड़ी बना कर कोच ने उनकी चूत में लन्ड डाल दिया। मम्मी को चूत चुदवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था।

15 मिनट चूत मारने के बाद फिर कोच ने फुर्ती से मम्मी को घुटनों पर बिठाया और मम्मी के मुंह में लन्ड डाल दिया और मुख चोदन करने लगा।

वो मॉम का सिर पकड़ कर मुंह को चोद रहा था।
मम्मी को सांस नहीं आ रही थी तो मम्मी की आंखों में आंसू आने लगे।

कुछ देर मुंह चुदाई करने के बाद कोच ने मम्मी को उल्टा किया और मम्मी की गांड पर माल झाड़ दिया।
अब दोनों थक चुके थे।

उनकी चुदाई खत्म होते ही मैं भी वहां से सरक लिया लेकिन मेरे लंड का बुरा हाल था।
मैं सीधा टॉयलेट में गया और मुठ मारने लगा।

मेरे ख्यालों में मम्मी की चुदाई और सिसकारियां चल रही थीं।

फिर झड़ने के बाद मैं स्पोर्ट्स रूम के पास गया।
अभी भी दरवाजा बंद ही था।

मैंने खिड़की से झांक कर देखा कि मम्मी कोच की गोदी में बैठी थी।
मम्मी और कोच ने कपड़े पहन रखे थे।

फिर दूसरी तरफ जाकर मैंने रूम का गेट खटखटाया तो सर ने आ कर गेट खोला और मम्मी मुझे देखकर अपने कपड़े ठीक करने लगीं।

इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मम्मी बोली- चल कुलदीप, सर से बात हो गई है। तुझे टीम में लेने के लिए सर मान गए हैं।
मॉम फिर से कोच सर के पास गई और उनसे हाथ मिलाकर धन्यवाद करने लगी।

कोच ने मॉम को मेरे सामने ही गले लगा लिया।
मॉम भी अच्छी तरह से चिपक कर उनसे गले मिली।

मैंने देखा कि कोच ने धीरे से मेरी सेक्सी मॉम की गांड पर हाथ फेरते हुए कहा- दर्शन करवाते रहिएगा अनीता जी!
मॉम ने भी शरारती स्माइल दी और वहां से आ गई।

फिर मम्मी ने रूम से बाहर आकर अपने पुराने यार को कॉल लगाकर कहा- मिश्रा जी, जल्दी हमको लेने के लिए कुलदीप के स्कूल आ जाओ।
यह कहकर मम्मी ने फोन रख दिया।

थोड़ी देर स्कूल के बाहर इंतजार करने के बाद मिश्रा जी अपनी गाड़ी लेकर आ गए।

मम्मी मिश्रा जी के साथ आगे बैठ गईं और मैं पीछे वाली सीट पर बैठ गया।
हम तीनों घर पहुंच गए तो मम्मी ने मुझे बोला– बेटा तुम घर में जाकर पढ़ाई करो, मैं मिश्रा जी के साथ दोबारा हाफ डे जॉब जा रही हूं।

मैं समझ गया कि मम्मी जॉब तो जा रहीं हैं लेकिन साथ साथ मिश्राजी ने उनको चोदने का प्लान बनाए रखा होगा इसीलिए जल्दी है।
मैंने मम्मी और अंकल को बाय कहा और घर में आ गया।

तो दोस्तो, मेरी सेक्सी मॉम की स्टोरी कैसी लगी? ईमेल के ज़रिए अपनी राय मुझे ज़रूर दें।
मेरा ईमेल आईडी है- rpatilemail@gmail.com

बदनाम गली में नए बॉयफ्रेंड से चूत चुदवाई

गंदा सेक्स का मजा लिया मैंने अपने मायके में आकर. मेरी दोस्ती मेरी सहेली ने एक सड़क छाप लड़के से करवा दी. उसने मुझे चुदाई के लिए एक बदनाम गली में बुलाया.

दोस्तो, मेरा नाम नीलिमा है. पर लोग मुझे नीलू कहते हैं और मैं 25 साल की हूँ.

दिखने में मैं गोरी-चिट्टी, सुडौल फिगर वाली लड़की हूँ.
मेरी फिगर की साइज 34-30-38 की है और कद 5 फिट 7 इंच का है.

मेरी पिछली सेक्स कहानी
बदमाश स्टूडेंट्स ने विधवा टीचर को चोदा
को आपने खूब सराहा था. उसके लिए आप सबका दिल से धन्यवाद.

यह बात पिछले साल अक्टूबर की है, जब मैं दशहरा में दिल्ली से अपने घर छत्तीसगढ़ आ गई थी. इस बार मैं इधर लंबे समय तक रहने के लिए आई थी.

मैं दशहरा के दिनों में अपनी पड़ोस की बस्ती की एक सहेली काजल के घर कुछ ज्यादा ही आना-जाना करने लगी थी.

तब से उसी बस्ती का एक लड़का मुझे लाइन मारने लगा था.
उसका नाम विलास है और वह उम्र में भी मुझसे बड़ा था.

वैसे तो विलास दिखने में उतना हैंडसम बंदा नहीं है पर विलास और काजल एक ही बस्ती के थे और एक दूसरे को जानते भी थे.

काजल ने ही मेरी सैटिंग विलास से करवा दी थी.

मैं कुछ दिनों तब विलास से कॉल पर बात करती रही.
विलास मेरे साथ सेक्सी बातें ही किया करता था.
मुझे भी उस तरह की गंदा सेक्स करने की बात करने में बड़ा मज़ा आता था.

मैं इतना तो समझ गई थी कि विलास मुझे चोदना चहता था.
पर मैं खुद ही विलास को मना कर देती थी.

विलास अक्सर मुझे सार्वजनिक स्थान पर आने के लिए कहता था जो मुझे सुरक्षित नहीं लगता था.

फिर विलास ने एक दिन मुझे एक वीडियो भेजा.
उस वीडियो में विलास अपने काले लंड से खेल रहा था.

विलास का लंड भी कोई सामान्य आकार का नहीं था, एकदम मस्त मोटा–लंबा लंड था.

ऐसा लंड तो मेरे दिल्ली वाले बॉयफ्रेंड का भी नहीं था इसलिए अब मैं भी विलास से चुदवाने के लिए कहीं भी आने के लिए तैयार हो गई थी.

लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे घरवालों ने नवंबर में गोवा जाने की बात छेड़ दी और मैंने विलास को कुछ दिन इंतज़ार करने के लिए कहा.
लेकिन विलास था कि मान ही नहीं रहा था.

दीवाली की शाम विलास मुझे मेरे घर के पीछे वाली कंडोम गली में बुलाया जिस गली में लोग चोदा–चोदी करते थे और अपना इस्तेमाल किया हुआ कंडोम फेंक देते थे.
इसीलिए उस गली का नाम कंडोम गली पड़ गया था.

सच कहूँ तो मैं उस गली से कभी गुज़री भी नहीं थी.
लेकिन गंदा सेक्स करने, लंड खाने के लिए मैं उस बदनाम गली में जाने के लिए तैयार थी.

उस दिन मैं घर से यह बोल कर निकली थी कि मैं सहेली के घर जा रही हूँ और इसीलिए मैं हीरोइन बन के घर से निकली थी.

मैंने एक टाइट फिटिंग वाला टॉप और स्कर्ट पहनी थी.

जब मैं उस कंडोम गली में पहुंची तो विलास पहले से मेरा इंतज़ार कर रहा था.

विलास मुझे देख मुस्कुराते हुए बोला- एकदम माल लग रही हो नीलू रानी!
मैं भी मुस्कुराती हुई विलास से बोली- अच्छा, मैं तुम्हें माल लगती हूँ क्या?

विलास ने कोई जबाव न देते हुए सीधा मुझे अपनी बांहों में खींच लिया, जिससे मेरी चूचियां विलास के सीने से लग कर दब गईं और विलास मेरे रसीली होंठों को चूमने लगा.

विलास मुझसे बोला- माल तो तुम हो ही नीलू … इसी लिए तो तुम्हारे पीछे पड़ा हुआ हूँ.
मैं भी मुस्कुराती हुई बोली- वैसे यहां कोई आएगा तो नहीं?

अब मेरे बदमाश विलास ने मुझसे कहा- कोई आएगा तो उसे भी शामिल कर लेंगे.

मैं विलास की बात को सुन कर उसके छाती पर अपने हाथों से मारने लगी.
विलास ने हंस कर मुझे रोक लिया और मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपनी पतलून में खड़े लंड पर रखवा दिया.

उफ्फ्फ … विलास के लंड को पकड़ते ही मेरी उत्तेजना जग गई थी.
मैं विलास की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी.

तभी विलास ने अपना मुँह आगे बढ़ा दिया.
मैंने भी अपना मुँह आगे बढ़ाया और हमारे होंठ एक दूसरे से सट गए.

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.
उफ्फ्फ … विलास तो मुझे चूमते हुए मेरे चूतड़ों को दबाए जा रहा था.

अब तक जितनी बार भी मैंने चूमाचाटी की है, मुझे हर बार पहली बार जैसा अहसास होने लगता है.
इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाती हूँ और शर्म लाज भुला कर मैं बिंदास रंडी सी हो जाती हूँ.

उधर विलास भी मेरे होंठों को चूमते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ को भी डालने लगा था.
उसने मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मेरी स्कर्ट को पीछे से उठा रखा था.

वह मेरी पैंटी में हाथ डाल कर मेरे चूतड़ों की दरार में अपनी उंगली से सहला रहा था.

‘ईईस्स्स … उउह्ह्ह’ मुझे बेहद मज़ा आ रहा था.
मैंने भी विलास की पतलून से उसके लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी.

विलास ने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग कर दिए और मुझे नीचे झुकाने लगा.
मैं झुक गई और तब विलास का बौखलाया हुआ लंड मेरे मुँह के सामने था.

विलास मुझसे कहने लगा- लो अब चूसो नीलू … जैसे तुम मुझसे बोला करती थीं!
मैं मुस्कुराती हुई विलास से बोली- लंड चूसना तो ठीक है … पर चुसवाने के चक्कर में कहीं तुम्हारा रस निकल न जाए!

विलास खुद भी बौखलाया हुआ था इसलिए उसने मेरी मुंडी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना तनतनाता हुए लंड ठूंस दिया.
मैं भी मस्ती से विलास के लंड को चूसने लगी.

‘ईईस्स्स …’ मन तो कर रहा था कि लंड चूसती ही रहूँ.

विलास भी मेरी चोटी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना लंड आगे-पीछे करते हुए पेल रहा था और सिसक भी रहा था.

मैं ‘गल्प गल्प आहहह …’ करती हुई लंड चूस रही थी.

जल्द ही मैंने विलास के लंड को चूस चूस कर अपनी लार से लथपथ कर दिया.

विलास बोलने लगा- ईईस्स्स … नीलू, लंड तो तू बहुत मस्त चूसती है रे … चल अब मेरे आंड भी चाट ले साली रांड.

तो मैं मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा, मैं रांड भी हो गई हूँ साले कमीने … लंड चुसवाने का मजा ले रहा है … चल अब अपना लंड ऊपर उठा … मैं तेरे आंड भी चाट लेती हूँ.

विलास ने अपना लंड पकड़ कर ऊपर उठा दिया.
उसके चिकने आंड मेरे सामने आ गए थे.
बड़े बड़े आंवले से आंड थे जो मस्त झूल रहे थे.

मैं उसके झूलते हुए आंडों में से एक आंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
विलास मज़े लेता हुआ ‘ईईस्स्स्स … आहहह … करने लगा था.

जितना मज़ा विलास को आ रहा था, उतना ही मज़ा मुझे विलास के आंडों को चूसने चाटने में आ रहा था.

यह सब मैंने विलास से कॉल पर बोला था इसीलिए विलास मुझसे ये सब करवा रहा था.

मुझे भी विलास के आंड को चूस चाट कर बहुत मज़ा आ रहा था.

करीब पाँच मिनट तक मैं विलास के आंडों को चूसती रही और अपनी लार से उसके आंडों को चिपचिपा कर दिया था.

अब विलास ने मुझे ड्यूरेक्स का कंडोम पकड़ा दिया.
मैंने विलास के खड़े लंड में कंडोम पहना दिया.

विलास ने मुझे खड़ा करते हुए सामने दीवार की तरफ झुकाया और मेरी स्कर्ट ऊपर करते हुए मेरी पैंटी को पूरा उतार दिया.

विलास पीछे से मेरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से फैलाए हुए था तो उसको मेरी गांड का खुला हुआ छेद दिख गया था.

विलास- ईईस्स्स्स … साली रंडी तू तो अपनी गांड भी मरवा चुकी है … तभी मैं सोचूँ कि तेरी गांड इतनी गदराई हुई क्यों है!
मैं मुस्कुराती हुई बोली- तो क्या तुम्हें गदराई गांड वाली पसंद नहीं है क्या?

विलास- तेरी गांड जितनी बड़ी है न … उतना ही मस्त है. आज गांड चाटे बिना मज़ा नहीं आएगा.

ये बोलते ही विलास ने अपना मुँह मेरी गांड में लगा दिया.
मेरी आह निकल गई ईईस्स्स्स … उउह्ह्ह!

वह एकदम से छेद में जीभ की नोक लगा कर चाटने लगा.

विलास मेरी गांड चाटते हुए बोला- ईईस्स्स्स … लगता है गांड के छेद में लक्स साबुन रगड़ रगड़ कर लगाती हो!
मैं अपनी गांड चटवाती हुई बोली- ईईस्स … उउह्ह्ह … तुम गांड चाट रहे हो या साबुन सूंघ रहे हो?

विलास गांड चाटते हुए बोला- तेरी गांड की खुशबू सूंघ कर चाट रहा हूँ … ईईस्स … बहनचोदी.

वह मेरी गांड चाटने के साथ मेरी बुर को भी चाटने लगा.
उफ्फ … आहहह …
मेरी गांड के साथ उसने मेरी फुदी को भी गीला कर दिया था.

फिर विलास ने मेरी बुर में थूका और खड़ा हो गया.
उसने मेरी बुर में अपना मोटा लंड रगड़ते हुए उसे मेरी बुर में एक झटके से पेल दिया.

मेरी चीख निकली- आह्ह … आह मर गई.
उसने बिना कुछ सुने मुझे चोदना शुरू कर दिया.

विलास का लंड मोटा था, इसलिए मेरी बुर को वह पूरी खोल कर चोद रहा था.
मैं बस जकड़ी हुई कुतिया की तरह ‘आह्ह … आह्ह …’ करती हुई कराह रही थी.

विलास मुझे चोदते हुए बोला- आहह … नीलू मेरी जान तुझको मज़ा आ रहा न?
मैं भी विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … ईईस्स … बहुत मज़ा आ रहा है आह्ह.

विलास मेरी बुर चोदते हुए मस्ती करने लगा. उसने उसी दौरान मेरी गांड के छेद में अपना अंगूठा घुसा दिया. उसने दूसरे हाथ से मेरी चोटी को खींच कर पकड़ रखा था.

अब विलास मुझे ज़ोर ज़ोर से ताबड़तोड़ धक्के भी लगा रहा था और मैं बस बिलबिलाती हुई मादक आवाजें निकाल रही थी- आह्ह्ह … आह्ह … ईईस्स्स!

मैं चुदते हुए कराह रही थी और सिसक भी रही थी.
विलास मुझे चोदते हुए रुका और उसने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया.

उसने मेरे टॉप को ऊपर उठाया और मेरी ब्रा से मेरी चूचियों को बाहर निकाल कर मेरे मम्मों को चूसने चाटने लगा.

ईईस्स्स … उफ्फ … अब तो और ज्यादा मजा आने लगा था. विलास मेरी चूचियों को चूस भी रहा था.
वह पूरा मुँह खोल कर मेरी चूचियों को अपनी लार से गीला करते हुए लथपथ कर रहा था.

कुछ देर बाद विलास ने मेरी एक टांग को उठाया और फिर से मेरी फुदी में लंड घुसेड़ा और ज़ोर ज़ोर से नीचे से ऊपर धक्के देते हुए चोदने लगा.

मैं फिर से ‘आह्ह … आह्ह …’ करने लगी.
विलास को और मज़ा आने लगा.

इसी लिए विलास ने मेरी दूसरी टांग को भी उठा लिया और अपने ऊपर झूला झुलाने लगा.

मैं विलास को अपनी बांहों में भर कर पकड़े हुई थी.

विलास मुझे नीचे से ऊपर चोदने लगा.
आह्ह … आह्ह … ईईस्स …

विलास हट्टा कट्टा था और कद में भी लंबा मर्द था. इसलिए वह मुझे उठा कर चोद रहा था.

उफ्फ्फ … ईईस्स …

विलास तो मेरी हालत ही ख़राब किए दे रहा था.

कुछ देर बाद विलास ने मुझसे दोनों पैरों को अपनी कमर से लपेटने के लिए कहा.
मैंने अपने पैरों से विलास की कमर को जकड़ लिया.

अब मैं भी विलास के लंड पर उछल उछल कर चुदवाने लगी.

ईईस्स्स … उफ्फ्फ … पूरा मज़ा आ रहा था.

ऊपर से विलास मेरे चूतड़ों को थप्पड़ पर थप्पड़ मारे जा रहा था.
चट …चट …

मैं आह्ह्ह … आह्ह … किए जा रही थी.
फिर विलास मुझे अपनी बाइक केटीएम के पास लेकर गया.

वह मुझे अपनी केटीएम बाइक की सीट पर लेटा कर मेरी दोनों टांगों को फैला कर पूरा जड़ तक लंड पेल कर धक्के देते हुए मुझे चोदने लगा.

मैं बस ‘आई ईई … आह्ह्ह … आह्ह्ह …’ करती हुई कराहने लगी थी.

कुछ ही देर बाद रफ्तार बढ़ गई और विलास के आंड मेरी गांड से लग कर थप … थप … की आवाज़ करने लगे थे.

मैं विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … आह्ह्ह … बस विलास अब बस करो.
विलास- आह रुक जा बस थोड़ी देर और थोड़ी देर आह मजा आ रहा है रंडी तुझे चोदने में ईईस्स्स!

तभी विलास ने मेरी एक टांग छोड़ते हुए अपने लंड को मेरी फुदी से निकाला और उसने झटके से कंडोम को निकाल कर मेरी एक चूची पर लगा दिया.
उसी वक्त उसने अपने गर्म लच्छेदार मुठ से मेरी चूत और झाँटों को नहला दिया.

उफ्फ … ईईस्स्स …

ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ था बल्कि उसके बाद मैंने विलास से दो बार और चुत चुदवाई थी.
वह भी उसी कंडोम गली में.

आप लोगों को मेरी यह गन्दा सेक्स कहानी पसंद आई होगी.
मैं आगे की कहानी भी बताऊंगी.

मेरी ये गन्दा सेक्स का मजा कहानी आप लोगों को कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं.

मेरी गांड का कांड हो गया

(Hot Ladki Gand Fuck Kahani)

दोस्तो, मेरा नाम मालती है. मेरी हाइट 5 फिट 2 इंच है और रंग मीडियम गोरा है.
मेरी फिगर साइज कुछ इस तरह से है. सीना 32 इंच, कमर 26 इंच और गांड 36 इंच की है जो कि बहुत बाहर निकली हुई है.
जब मैं गांड मटका कर चलती हूँ, तब जवान लड़कों की बात तो छोड़िए, बूढ़े आदमी भी चश्मा लगा कर गांड की थिरकन देखते हैं.

और आजकल तो दिन पर दिन मेरी गांड का साइज बढ़ता जा रहा है.

अभी मेरी उम्र 26 साल की है, पर मैंने आपको जहां सन 2017 में छोड़ा था, आज की सेक्स कहानी को मैं वहीं से शुरू करूंगी क्योंकि इन 6 सालों में मेरी लाइफ में अनेकों सेक्सी घटनाएं घटी हैं.

उन सभी को मैं एक एक करके सेक्स कहानी के रूप में आपके सम्मुख पेश करूंगी.

दोस्तो, आपने मेरी 6 साल पहले लिखी हुई कहानियां पढ़ी होंगी!
अगर नहीं पढ़ी हैं, तो प्लीज पहले पढ़ लो क्योंकि मेरी कहानियों से सिर्फ लड़कों के लंड ही खड़े नहीं होते, उनके लंड के नीचे के पहरेदार यानि टट्टों में भी नए खून का संचार होने लगता है.

लड़कियों की चूत की गहराई में बच्चेदानी तक में झनझनाहट होने लगती है और उनकी चूत का पानी टपकने लगता है.
ऐसा मेरे पाठक पाठिकाएं मेल द्वारा बताते हैं.

इसी लिए कह रही हूँ दोस्तों कि यदि आपने मेरी कहानियां नहीं पढ़ीं, तो प्लीज जरूर पढ़ें.

मेरा दावा है कि आपके लंड या चूत में पानी ना आ जाए, तो आप इस मालती को भूल जाना … और यदि आपने पढ़ी हैं … तो भी मेरे प्यारे दोस्तो प्लीज़ फिर से पढ़ो, जिससे पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी.

मेरी सहेली ने मुझे बिगाड़ा … और गर्म कर खोल दिया नाड़ा
भोला भाई और चुदक्कड़ बहन
चूत चुदाई का चस्का, चलती बस में चुदाई.
छोटी बहन की कामुकता जगाकर बुर चोदन करवाया
गांड बची तो लाखों पाये
कामवासना से बेबस मैं क्या करती

दोस्तो, मैंने कितने दर्द सहे हैं, यह मैं आपको लिख कर तो बता सकती हूं … पर महसूस नहीं करा सकती.
मालती का दर्द मालतीही जाने.

जब पापा ने मुझे फिर से चुदवाते हुए रंगे हाथ अपने ही घर में देख लिया, तो वे भड़क गए.
उसके बाद तो मेरी जो पिटाई हुई, वह मैं कभी भूल ही नहीं सकती.
बाप ने डंडों से ऐसी गांड बजाई और पीटी कि वैसी हालत कभी मेरे दुश्मन की भी ना हो.

पापा की पिटाई से सारी रात मेरी सूजी हुई गांड ने दर्द दिया और मुझे सोने ही नहीं दिया.
मैं उल्टी सोती, तो मुझे नींद नहीं आती. पर मैं क्या करती.

इस पिटाई के बाद मैंने पक्का ठान लिया था कि अब मैं खुद को काबू में रखूंगी, चाहे कुछ भी हो.
मेरी खुद की चूत मेरा नहीं मानेगी, तो मैं साली को चाकू से काट कर कुत्तों को डाल दूंगी.

यह मैं स्टाम्प पेपर में लिखकर देती हूं.

मैंने फिर से ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया कि मैं सुधर जाऊंगी और जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, तब तक मैं लंड का मुँह तक नहीं देखूँगी.
कम से कम ऐसे दिन तो देखने ना पड़ेंगे.

मुझे ठीक होने में बीस दिन लगे.
वह बीस दिन का दर्द मैं कभी नहीं भूल सकती.

चार दिन तक में चल बैठ नहीं सकी, सात दिन तक मेरी प्यारी बाहर निकली मक्खन जैसी गांड ने खूब दर्द किया.

दोस्तो, दिन बीतते गए.
मैंने अपनी चूत चुदाई पर कंट्रोल करना सीख लिया था.

परंतु हमारे अड़ोस पड़ोस वाले मुझे ऐसे घूरते मानो मैंने कोई बड़ा कांड कर दिया हो … जैसे किसी आंतकवादी संगठन से मेरा नाता हो और ग्यारह मुल्क की पुलिस मुझे ढूंढ रही हो.

उन्हीं दिनों पड़ोस में एक शादी थी.
उधर जाने का न्योता आया तो मैं और मेरे परिवार के लोग वहां डिनर करने गए.

वहां मुझे मेरी कई सहेलियां मिलीं परन्तु कई सहेलियों ने मुँह फेर लिया तो कई मुझसे डरते डरते बात कर रही थीं.
बात करते समय उनकी आंखें इधर उधर देख रही थीं मानो उन्हें डर हो कि कोई देख ना ले!

मेरी एक पुरानी और पक्की सहेली भी वहीं आई थी.
वह मेरे साथ पहली क्लास से बारहवीं कक्षा तक मेरे साथ रही थी.
उसका नाम नेहा था, वह मुझ से बात कर रही थी.

तभी उसके पापा और मम्मी आए और मेरी तरफ घूरकर नेहा से बोले- घर चलो नेहा बेटी. कैसे कैसे बेशर्म लोगों को शादी में बुलाया है.
यह कहकर कुछ कुछ बड़बड़ाते हुए वे लोग नेहा को लेकर चले गए.

इस घटना ने मुझे अन्दर से हिला डाला.

मेरी सब पुरानी सहेलियां मुझसे दूर हो गईं और लोग मुझे देखकर आपस में खुशफुस करते हुए हंसने लगे.

मुझे खुद को भी ऐसा लगने लगा कि मैं कोई बहुत बड़ी वाली छिनाल हूं.

शादी से लौटकर हम सब घर आए तो मेरा चेहरा उतरा हुआ था.

मैं अपने कमरे में जाकर रोने लगी.
मेरा रोना बन्द ही नहीं हो रहा था.

तभी वर्षा कमरे में सोने आई और मुझे देखकर बोली- क्या हुआ मालती दीदी?
मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी

वह समझ गई और बोली- मालती दीदी, यह दुनिया खराब है, जो पकड़ा जाए वह चोर है … बाकी सब साधु हैं. तुम जरा सा भी टेंशन ना लो. थोड़े समय बाद सब भूल जाएंगे, सब सामान्य हो जाएगा. दुनिया में ऐसा ही चलता रहता है.

ऐसी घड़ी में मेरी छोटी बहन वर्षा ने मुझे हमेशा सहारा दिया है.

उसने हंसते हुए यह भी कहा- दीदी, लड़कियों की चूत चुदाई के लिए ही बनी है और लड़कों का लौड़ा चूत चुदाई के लिए ही बना होता है. कोई गड्डा खुदाई के लिए नहीं होता है.

अपनी छोटी बहन वर्षा की इस तरह की खुली बातें सुनकर मुझे बड़ा सुकून मिला और हम दोनों बहनें सो गईं.

अब एक महीने से ज्यादा हो गया था.
इस दरमियान मेरे मन में चुदाई का एक भी विचार नहीं आया था.

एक रात मुझे अचानक सपना आया.
सपने में डोरबेल बजी.

मैं घर में अकेली थी.
मैंने दरवाजा खोला तो किशोर आया था.
किशोर के बारे में जानने के लिए मेरी कहानी
कामवासना से बेबस मैं क्या करती
पढ़ें.
उसे देख कर मैंने जैसे ही दरवाजा बंद करना चाहा तो वह मुझे धक्का देकर घर के अन्दर आ गया.

मैं कुछ करती … तब तक वह दरवाजा बंद भी कर चुका था.

वह मुझे अपनी बांहों में भरकर बोला- मेरी प्यारी मालती डार्लिंग, मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता. मुझे माफ कर दो.
इतना कह कर वह अपनी पैंट की जिप खोलकर मुझे अपना लंड दिखाने लगा.

उसको पता था कि मेरी मजबूरी क्या है.
मैं जब भी लंड देख लेती हूं, फिर मुझसे रहा नहीं जाता.

मैं उसका लंड देखना नहीं चाहती थी इसलिए मैं दूसरी तरफ घूम गई.
मैंने गुस्से से किशोर से कहा- कितने बेशर्म हो तुम … मेरे घर से बाहर निकलो विश्वासघाती कुत्ते कहीं के … नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी!

किशोर बोला- माया, तुम्हारी भरी भरी बाहर निकली गांड को मैं कभी भूल नहीं सकता. प्लीज़ मुझे एक और आखिरी बार माफ कर दो!
मैं बोली- जब मेरी इस गांड पर लाठियां बरसाई गईं, तब तुम तो मुझे अकेला मार खाने के लिए छोड़कर भाग गए थे. तुम मेरे पापा के सामने नहीं बोल सके कि तुम मुझसे प्यार करते हो … उल्टा तुमने मेरे पापा को बुड्ढा बोला और सब आरोप मुझ पर ही लगा दिए … और तुमने न जाने क्या क्या बोला था कि तुम्हारी बेटी को मेरा लंड पसंद है … मुझे उसकी शक्ल तक पसंद नहीं है! वह सब मैं कैसे भूल सकती हूं? तुमने मेरे दिल को तोड़ दिया था!

किशोर बोला- सॉरी मालती मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी थी सॉरी … सॉरी हजार बार सॉरी!
यह कहकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरा मुँह अपने हाथ से दबा दिया.

वह जबरन मुझे गले में किस करने लगा और अपना लंड मेरी गांड में बिना सलवार खोले दबाने लगा.
मैंने काफी कोशिशें की उससे छूटने की, पर सब नाकाम रहीं.

फिर वह अपना एक हाथ मेरी सलवार में डालकर चूत पर रगड़ने लगा.
मैं बहुत छटपटाई, पर उसके ताकतवर हाथों से छूट ना सकी.

उस वक्त मैं उन्नीस साल की कमसिन कली. वह पच्चीस साल का गबरू पत्थर उठाने वाला लोहे जैसा सख्त हाथ वाला मर्द था.
वह कोई कप्यूटर की-बोर्ड चलाने वाले लड़कियों जैसे मखमली हाथ वाला झण्डू नहीं था.

उसने करीबन दस मिनट तक बिना कुछ बोले मेरी चूत को रगड़ा.
इससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मेरी सांसें तेज होने लगीं.

उसने अपना हाथ मेरे मुँह से हटा लिया.
पर मेरे मुँह से आह आहहह की आवाज निकलने लगी थी.

मैं इतनी मदहोश हो गई थी कि उसके हाथ को अपनी चूत पर दबाने लगी- आहह आह ओहह करते रहो … आह!

अब किशोर का दूसरा हाथ मेरे स्तन दबाने लगा.
मैं गर्मा गई और कहने लगी- आह और दबाओ … दबाते रहो आह हह आह … मसल डालो मुझे … आह!

वह और जोर जोर से मेरे स्तन मसलने लगा.
मेरे स्तन लाल हो चुके थे.
मुझे काफी दर्द हो रहा था और मेरी आंखों से पानी भी निकल रहा था.

पर दोस्तो, मुझे यह दर्द फिर भी मीठा लग रहा था.
मैं जोरों से चिल्ला रही थी- और जोर से दबाओ किशोर आह हह!

किशोर ने मुझे पीछे से पकड़ा हुआ था.
उसने मुझे घुमा कर अपनी तरफ कर लिया.

मेरी आंखें बंद थीं.
वह मेरी तरफ देखने लगा.
मेरी आंखों से आंसुओं की धाराएं बह रही थीं.

मैं आंखें बंद किए हुई जोरों से चिल्ला रही थी- आह किशोर … और दबाओ मेरे स्तनों को निचोड़ दो … आहह!

तभी उसने मेरे स्तनों को दबाना रोक दिया.
मेरी आंखें खुल गईं.

मैंने गहरी सांस लेते हुए, कांपते लबों से उससे पूछा- क्या हुआ किशोर … रुक क्यों गए?
वह बोला- तेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं और तेरे चूचे भी लाल होकर सूज गए हैं. तुझे दर्द हो रहा है क्या?

मैं मदहोशी में बोली- दर्द होने दो ऐसे दर्द से मुझे खुशी मिलती है … कुछ नहीं होगा यार … दो चार दिन मेरे चूचे दर्द करेंगे और ज्यादा से ज्यादा दो दिन बुखार हो जाएगा, पर तुम अपनी हसरत पूरी करो!

उसने मेरे स्तनों को छोड़ दिया और घुटनों के बल बैठकर मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मेरी चूत चाटने लगा.

मेरी आंखें फिर से बंद हो गईं और अपने आप मेरे मुँह से आह की आवाज निकलने लगी.
पूरे रूम में मेरी आहह आह की आवाज ही गूंज रही थी.

किशोर को भी चूत चाटने का गजब का अनुभव था.
वह अपनी जीभ को मेरी चूत की गहराई तक अन्दर बाहर करता और बीच बीच में मेरी चूत की बाहर निकली हुई पंखुड़ियों को अपने दांतों से हल्का सा काटता तो मुझे स्वर्ग सी अनुभूति होती.
मेरे मुँह से आह निकल जाती और मैं उसका सिर अपनी चूत पर दबा देती.

करीब दस मिनट तक उसने मेरी चूत को चाटा.
फिर उसने मुझे जमीन पर ही उल्टा लिटा कर मेरे दोनों चूतड़ों को अपने ताकतवर हाथों से फैलाया और अपनी जीभ मेरी गांड की रिंग पर फेरने लगा.

वह बोला- कितने दिनों से तेरी गांड नहीं मारी मालती… तेरी गांड पर तो मैं सारी दुनिया कुर्बान कर दूं माया!
फिर उसने मेरी गांड में ऐसी जीभ लपलपाई कि मैं निहाल हो गई. हॉट लड़की गांड फक के लिए बेचैन हो गयी.
उसकी जीभ की रगड़ का सुख कह ही नहीं सकती.

मैंने कई दिनों से गांड नहीं मरायी थी, इस वजह से मेरी गांड सिकुड़ चुकी थी.
उसकी जीभ और थूक की लार ने मेरी गांड के छेद को काफी बड़ा बना दिया था.

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था.
मैंने किशोर से कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो … तड़पाओ मत मेरी जान … आह अब रहा नहीं जाता!

यह सुनते ही किशोर अचानक से रुक गया.
मैंने पूछा- क्यों रुक गए. मेरी गांड में अपना लंड डाल दो और मेरी गांड को अपने गर्म वीर्य से भर दो आह मेरी गांड को ठंडी कर दो. फिर मेरी चूत को इतना चोदो कि आज वह भोसड़ा बन जाए.

मेरे प्यारे दोस्तो, इधर मैं आपको एक ज्ञान की बात बता दूँ. चूत वह चीज होती है, जिसमें थूक अथवा तेल-वेल कुछ लगाए बिना उंगली ही नहीं घुसती है.

इसके इतर जिन जिन लड़कियों की चूत चुद चुदकर भोसड़ा बन गई हो, वह हमेशा के लिए चाहे लड़की खड़ी हो, चाहे बैठी हो चाहे चल रही हो … और चाहे बिस्तर पर सोई हो … उसके भोसड़े के अन्दर उंगली जितना छेद खुला ही रह जाता है.
मतलब पूरी तरह से छेद बंद नहीं होता है. इस तरह की चूत को चूत नहीं, बल्कि भोसड़ा कहा जाता है.

वह बोला- तू अकेले ही मजा लेगी साली. पहले मेरा लंड चूस भोसड़ी की कुतिया … फिर देख आज तेरी गांड और चूत का कैसा मस्त फालूदा बनाऊंगा अपने इस फौलादी लंड से!

उसका लंड ज्यादा बड़ा नहीं था, बस 6 इंच का ही था. पर सख्त इतना कि लोहे की रॉड हो.

मैंने झट से उसका लंड अपने हाथों से पकड़ा.
उसके लंड में से भी चिपचिपा पानी निकल रहा था.

मैंने लंड पर निकले उस पानी को चाट लिया और एक सांस में लंड अपने मुँह में पूरा ले लिया.
किशोर के मुँह से आह हह निकल गई.

दोस्तो, मुझे भी लंड चूसने का अनुभव हो चुका है.
पहले पहले तो मुझे पूरा लंड मुँह में निगलना नहीं आता था … उल्टी या खाँसी हो जाती थी.
पर दोस्तो अब मैं पूरे लंड को अन्दर निगल कर देर तक सांस रोक कर मौत को छूकर वापस आ सकती हूं.

वाह क्या डायलॉग मार दिया शाबाश मालती डार्लिंग …

फिर मैंने उसके लंड को ऐसा चूसा कि लंड का ऊपर का भाग लाल हो गया.

किशोर का अब वीर्य निकलने वाला ही था, तब उसने कहा- मालती आह … मेरा पानी निकलने वाला है!
मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और जल्दी से उल्टी हो गई. 

मैंने कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो. मैं वीर्य की एक भी बूंद वेस्ट जाने नहीं दे सकती!

उसने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ा और गांड के छेद पर सैट कर दिया.
मुझे उसके लंड का अग्र भाग गर्म गर्म महसूस हो रहा था.

वह बोला- डालता हूं माया!
मैंने कहा- अब पूछना कैसा … जल्दी डालो मेरी गांड की गर्मी शांत करो और भूलना नहीं साले … सारा वीर्य मेरी गांड में ही जाना चाहिए समझे, नहीं तो चूची से तेरी गांड मार दूँगी.

उसने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड मेरी गांड पर सैट करके जोर लगाकर फच से मेरी गांड में उतार दिया.

मेरी ना चाहते हुए भी चीख निकल गई- उई ईईई माँ!

मैं ऐसी छटपटाई और बोली- प्लीज निकालो अभी … फिर थोड़ी देर बाद में डाल लेना.

उस कमीन ने मेरी एक नहीं सुनी, उल्टा मेरा मुँह दबा दिया और मेरी गांड मारता रहा.

फिर अचानक से मेरा सपना टूट गया.
सुबह हो गई थी … मेरी नींद खुल चुकी थी.

मैं बिस्तर पर पड़ी पड़ी मन ही मन में किशोर को गालियां देने लगी थी ‘कुत्ता कहीं का …’

इस सपने का अर्थ यह था कि मैं अब भी उसे नहीं भूल पा रही थी.

पहले वह मुझे वास्तव में चोदता था … अब भोसड़ी का मेरे सपनों में भी मेरी गांड मार जाता है.

मैं बिस्तर से उठ कर बैठी तो मेरा शरीर भारी भारी लग रहा था.
सिर दर्द भी था.

कमरे में मैं और मेरी छोटी बहन वर्षा एक ही बेड पर सोती हैं. वह स्कूल में बारहवीं में है.
वह रोज सुबह 6 बजे उठकर नहाकर नाश्ता करके 7 बजे स्कूल चली जाती है.
आज वह जा चुकी थी.

मैं मुँह धोने के लिए बिस्तर से उठी तो मेरी गांड और मेरे चूचे बहुत दर्द कर रहे थे.

मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.
मेरे कमरे में ही ड्रेसिंग टेबल है, उसमें एक बड़ा सा आईना लगा है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बारीकी से अपने जिस्म को देखने लगी.

मेरे स्तन एकदम लाल और सूज चुके थे और मैंने घूमकर अपनी गांड को आईने में देखा, तो उसमें चिपचिपा सफेद पानी बह रहा था और मेरी गांड का छेद लाल लाल टमाटर सा हो गया था.

मैंने अपनी गांड में एक उंगली डाली, तो वह आराम से चली गयी.
मैंने दो उंगलियां डालीं, वे भी चली गईं.

मैं स्तब्ध रह गयी कि मुझे सपना आया था कि हकीकत में कोई भोसड़ी का मेरी गांड मार गया?

दोस्तो, बाकी की घटना अगली कहानी में लिखूँगी.

आपको यह हॉट लड़की गांड फक कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर ईमेल के माध्यम से बताएं.
आपके मेल से मुझे और कहानियां लिखने की प्रेरणा मिलेगी. 

maltipatil97@gmail.com

अंकल से मैं जी भर कर चुदी (Garam Choot Me Old Lund)

गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.

मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.

वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।

मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।

ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।



मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।

मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।

शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!

मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।

मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.

लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।

उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।

वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।

बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।

तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।

बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।

मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.

फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।

जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!

मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।

मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।

मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।

मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।

मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।

मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।

एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।

अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।

मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।

वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!

फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।

फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।

मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।

मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।

मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।

मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।

इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।

मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.

वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।

उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।

दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!

मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।

आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।

अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।

इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।

फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।

उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.

फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।

मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।

मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.

मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।

उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।

वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।

वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!

वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।

फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।

मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।

मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।

उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।

वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।

मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।

फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।

मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।

सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।

मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!

तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।

मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.

मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।

बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।

मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।

उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।

मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।

मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!

वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।

अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।

सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।

मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।

इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।

सुबह उठ कर वे चले गये।

उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
गरम चूत में ओल्ड लंड कहानी पर अपने विचार मुझे बताएं

चाची की हवस मिटाई गरम लंड से

दोस्तो, आज मैं आप को एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूं. यह मेरी जिन्दगी की आपबीती है. इसे केवल सेक्स कहानी के रूप में न देखें. चूंकि यह घटना मेरे परिवार से जुड़ी है इसलिए मैं पात्रों के नाम बदल कर लिख रहा हूं. मेरा नाम कपिल (बदला हुआ) है. यह घटना मेरे और मेरी चाची कल्पना (बदला हुआ नाम) के बीच में हुई थी. मेरी सगी चाची और मेरे बीच में हुई इस घटना को काफी समय हो गया है. इसलिए मैंने सोचा कि आप लोगों के साथ अपने अनुभव को शेयर करूं.

मेरी चाची का फीगर 35-28-32 है. वो एक सेक्सी बदन वाली महिला है. उनके बड़े बड़े बोबे देख कर किसी का भी मन डोल सकता है. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था.



उस वक्त मैं भी नया-नया जवान हुआ था. हर तरफ मुझे चूत ही चूत दिखाई देती थी. किसी भी लड़की के बदन पर नजर जाती थी तो सबसे पहले उसकी चूचियों को नापने लगता था. सेक्स का नया-नया खुमार था.

रोज रात को मैं लंड की मुठ मार कर सोता था. मगर फिर भी मुझे संतुष्टि नहीं मिल पाती थी. मुझे चूत चाहिए थी हर कीमत पर. फिर मेरा ध्यान मेरी चाची की तरफ गया.

इससे पहले भी मैं चाची को देखा करता था लेकिन अब उन पर ज्यादा ही ध्यान देने लगा था. मैंने देखा कि चाची की गांड काफी शानदार थी. उनकी चूचियां देख कर मेरा लंड टाइट हो जाता था.

कहानी को आगे बढ़ाने से पहले मैं अपने शरीर के बारे में भी बता देता हूं. मेरे लंड का साइज 6 इंच है. मेरा लंड औसत साइज का है लेकिन एक औरत को संतुष्ट करने के लिए काफी है. मेरी बॉडी भी अच्छी है. मैं रोज जिम में जाता हूं. इसलिए बॉडी की शेप काफी अच्छी बनी हुई है.

अब मैं असली कहानी पर आता हूं.

तो हुआ यूं कि उन दिनों में मैंने अपने बाहरवीं के एग्जाम खत्म किये थे. घर पर खाली ही रहता था. एक दो पड़ोस की लड़की पर लाइन भी मारता रहता था लेकिन कोई भी पटती हुई दिखाई नहीं पड़ रही थी.

उसके बाद मैंने जिम जाना शुरू कर दिया था. मुझे लगता था कि लड़कियां अच्छी बॉडी वाले लड़कों की तरफ आकर्षित होती हैं. मगर बाद में पता चला कि लड़की को पटाने के लिए एक अलग ही काबिलियत की जरूरत होती है. जो मेरे अंदर बाद में आई.

मेरी चाची की शादी को उस वक्त 3 साल का समय हो गया था. अभी तक मेरे चाचा-चाची के यहां कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ था. चाची देखने में किसी पोर्न स्टार जैसी लगती थी.

फिर मैं सोचा करता था कि चाची को अभी तक बच्चा पैदा नहीं हुआ है. कोई तो बात होगी इसके पीछे. मगर मैं पूछता भी तो किससे. बस अपने ही मन में सोचता रहता था.

चाची को देख कर मेरा लंड जरूर खड़ा हो जाता था. फिर मुझे रात को सोते हुए मुठ मारनी पड़ जाती थी. इसी तरह से मेरे दिन कट रहे थे. लेकिन चूत का जुगाड़ होता नहीं दिख रहा था.

मेरी मां ने एक दिन मुझे चाची के घर काम से भेजा. मैं चाची के घर गया. चाचा उस समय काम पर चले गये थे. उनका घर कुछ ऐसा बना हुआ है कि घर की लम्बाई या यूं कहें कि गहराई बहुत ज्यादा है. अगर बाहर से कोई आवाज दे तो अन्दर के इन्सान को कई बार सुनाई नहीं देता है.

मैंने घर जाने के बाद चाची को आवाज दी लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं आया. फिर मैं और अन्दर गया. मैंने सब कमरों में देखा. वो कहीं पर दिखाई नहीं दे रही थी.

उनको देखते हुए मैं पीछे तक पहुंच गया. पीछे की तरफ उन्होंने खुला एरिया छोड़ा हुआ था. वहां पर उनका बाथरूम बना हुआ था. बाथरूम के बाहर ही नल लगा हुआ था. कई बार मैं उनके घर पर चला जाता था. जब मैं छोटा था तो वहीं पर नहाता था. मगर बड़ा होने के बाद मैंने उनके घर में जाना कम कर दिया था क्योंकि हम दोनों परिवार अलग हो गये थे.

तो जब मैं पहुंचा तो मैंने देखा कि चाची नंगी ही बाथरूम के बाहर नहा रही थी. मैं तो उनको देख कर सन्न रह गया. मैं आवाज करके उनको चेताना चाहता था लेकिन तुरंत ही मेरी हवस ने कहा कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता.

मैं वहीं पर खड़ा होकर चाची को नहाते हुए देखने लगा. वो अपनी ही धुन में थी. गुनगुनाते हुए नहा रही थी. दरअसल उनके घर के आसपास भी कोई ऐसा घर नहीं था कि किसी को कुछ दिखायी दे जाये क्योंकि पीछे वाली दीवार काफी ऊंची बनी हुई थी. आसपास के सारे मकान एक मंजिला ही थे.

चाची को नहाते हुए देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. उनका गोरा संगमरमर के जैसे गीला बदन, उनकी मोटी मोटी चूचियों से उछलता हुआ पानी देख कर मेरी हालत खराब होने लगी. उनकी निप्पलों के पास के एरोला भी काफी बड़े आकार के थे.

फिर मैंने उनकी चूत की तरफ ध्यान से देखा. उनकी चूत पर काफी घने बाल थे जो घुंघराले से थे. एकदम से काले रंग के बालों के नीचे उनकी चूत छिपी हुई थी. उस पर से पानी गिर रहा था. वो अपने बदन को सहला सहला कर नहा रही थी.

मैं तो वहीं पर खड़ा होकर लंड को मसलने लगा. मुठ तो नहीं मार सकता था क्योंकि किसी के आ जाने का डर था. मैंने चाची के पूरे बदन को निहारा. मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मन तो कर रहा था कि मुठ मार कर यहीं वीर्य निकाल दूं लेकिन अभी बहुत खतरा था.

फिर वो नहाकर अपने बदन पर कपड़ा लपेटने लगी. मैं वहां से सरक लिया. मैं आगे की तरफ आ गया. मेरा लंड अभी खड़ा हुआ था. मैंने लंड को पैंट के नीचे दबा लिया ताकि चाची को शक न हो जाये कि मैं उनको देख रहा था.

उसके बाद मैं दोबारा से आवाज लगाते हुए अन्दर की तरफ आया. चाची तब तक बाहर की तरफ आ रही थी. उन्होंने अपने कपड़े भी पहन लिये थे.

मुझे आता देख कर चाची बोली- अरे, तू कब आया!
मैंने कहा- बस अभी, वो … मां ने आपको घर बुलाया है. आपसे कुछ काम था उनको.
वो बोली- ठीक है. मैं पांच मिनट में आती हूं.
फिर मैं चुपचाप वहां से चला गया.

घर जाते ही मैं भी सीधा बाथरूम में गया और लंड निकाल कर मुठ मारने लगा. ख्यालों में ही चाची की चूचियों को पीने लगा. उनकी चूत को चोदने लगा. दो मिनट में ही मेरे लंड से वीर्य छूट गया. फिर मैं शांत हो गया.

तब तक चाची भी घर आ गयी. वो मां के साथ कुछ बात करने लगी और मैं टीवी देखने लगा. फिर वो अपने घर चली गयी. उस दिन रात को भी मैंने चाची के नंगे बदन के बारे में सोच कर एक बार फिर से मुठ मारी.

अब मैं चाची की चुदाई के लिए तड़प गया था. बस मुझे सही मौका नहीं मिल रहा था.

एक दिन वो मौका भी मुझे मिल ही गया.

एक बार हम लोग शादी में गये हुए थे. पूरा परिवार साथ में था. फिर जब वापस आने लगे तो मां और पापा को वहीं रुकना पड़ा. चाचा भी उनके साथ ही रुक गये.

मैं चाची को लेकर घर आ गया. उस दिन मैं अपने घर में अकेला था और चाची अपने घर में अकेली थी.
चाची बोली- तुम्हारे यहां कोई नहीं है तो तुम भी मेरे वहां पर ही सो जाना. मुझे भी डर नहीं लगेगा रात को अकेले में.

उन्होंने जैसे ही उनके घर में सोने की बात कही मेरे अन्दर चाची की चुदाई के खयाल आने लगे. मैंने झट से हां कर दी.
उसके बाद मैं जल्दी से घर को लॉक करके चाचा के घर में ही चला गया.

कुछ देर तो हम दोनों उनके बेडरूम में ही टीवी देखते रहे. फिर टीवी देखते हुए ही चाची को नींद आ गयी. मैंने टीवी बंद कर दिया. अब मेरे लिए रुकना बहुत मुश्किल हो रहा था.

थोड़ी घबराहट भी हो रही थी लेकिन हाथ अपने आप ही चाची के बदन को छूने के लिए मचल गये थे. चाची ने नाइटी पहनी हुई थी. उसकी चूचियां उठी हुई थीं.

मैंने चाची की चूचियों पर धीरे से रख दिया. उनको छूकर देखा. काफी गद्देदार चूचियां थीं, बेहद मुलायम लग रही थीं छूने में उनकी चूचियां. मेरा लंड एकदम से कड़क हो गया. फिर मैंने आहिस्ता से उनको दबाना भी शुरू कर दिया.

मगर मैं हैरान था कि चाची अभी भी आंखें बंद किये हुए थी. मैंने चाची की चूचियों को दबाना जारी रखा. अब मैं बेकाबू होने लगा तो मैंने उनकी चूचियों को जोर से भींच दिया.
एकदम से चाची की आह्ह निकल गयी.

मैं जान गया कि चाची सोने का नाटक कर रही थी. मगर जैसे ही उनको दर्द हुआ तो उन्होंने मेरे हाथ को हटा दिया.
अगले ही पल आंखें खोल कर वो मेरी तरफ देखते हुए बोली- आराम से कर लो अगर करना ही है तो.
बस इतना सुनना था कि मैं चाची पर टूट पड़ा.

मैं उनके ऊपर आ गया और उनके होंठों को चूसने लगा. चाची भी मुझे बांहों में भर कर प्यार करने लगी. मैंने पांच मिनट तक चाची के होंठों का रस पीया और उसके बाद उनकी नाइटी को उतरवा दिया.

नीचे से चाची ने ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी. चाची का नंगा बदन तो मैंने पहले से ही देखा हुआ था. इसलिए मैंने उनकी ब्रा को भी उतरवा दिया और उनकी पैंटी को खींच कर एकदम से उनको नंगी कर दिया.

अब मैंने चाची की चूचियों पर अपने होंठ रख दिये और उनके दूधों को बारी बारी से पीने लगा. चाची के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.
मैं जोर से उसकी चूचियों को दबाते हुए उसके निप्पलों को चूसने लगा. काफी देर तक मैंने चाची का स्तनपान किया.

उसके बाद मैं नीचे की तरफ चला जहां पर चाची की बालों वाली चूत थी. मुझे चाची की चूत के बाल बहुत आकर्षित कर रहे थे. मैंने उनकी बालों वाली चूत को सूंघा और उसको चाटने लगा.

मैं अन्दर तक जीभ डालकर चाची की चूत को चाटने लगा. चाची के मुंह से निकलने वाली सिसकारियां अब पहले से और तेज हो गयी थीं. उनकी चूत ने अब कामरस छोड़ना शुरू कर दिया.

चाची की चूत से निकलने वाले रस को मैं साथ ही साथ चाटता जा रहा था. उसके बाद मैंने चाची की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया. मैं तेजी के साथ चाची की चूत में उंगली करने लगा.

चाची तड़पने लगी, वो बोली- बस… अब जान निकालेगा क्या?
मैंने कहा- नहीं चाची, आप तो मेरी जान हो. आपकी जान नहीं निकालूंगा. आपकी चूत का रस निकालूंगा.

वो बोली- तो फिर अपने हथियार से निकाल, उंगली से नहीं.
मैंने कहा- पहले हथियार को तैयार तो कर दो.
वो बोली- क्यूं, अभी तक खड़ा नहीं हुआ क्या तेरा?
मैंने कहा- खड़ा तो आपको देखते ही हो जाता है. किंतु आप उसको प्यार करोगी तो वो आपकी चूत को भी उतना ही प्यार देगा.

चाची मेरा इशारा समझ गयी. उसने मेरी निक्कर को उतार दिया. मैंने अपनी शर्ट खोल दी. अब मैं भी चाची के सामने नंगा हो चुका था. मैंने चाची की चूत की तरफ मुंह किया और लेट गया.

दूसरी तरफ से चाची के मुंह के पास मेरा लंड चला गया. मैं चाची की चूत को चूसने लगा और चाची ने मेरे लंड को मुंह में भर लिया. दोनों ही एक दूसरे के गुप्तांगों के रस का स्वाद लेने लगे.

दो मिनट के बाद ही मेरा लंड एकदम से फटने को हो गया. अब मैं और नहीं रुक सकता था. मैंने चाची के मुंह से लंड खींच लिया और उसकी टांगों को फैला दिया.

टांगों को फैलाने के बाद मैंने चाची की बालों वाली चूत के मुहाने पर अपने लंड का टोपा सेट कर दिया. फिर मैंने थोड़ा जोर लगाया. मेरे लंड का टोपा चाची की चूत में चला गया.

चाची की चूत में जैसे ही लंड घुसा उनके मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल गयी. मगर मैंने तभी एक और बार झटका दिया. मेरा लंड चाची की चूत में पूरा चला गया.

बस अब तो मैंने उनकी चूत की चुदाई शुरू कर दी. मैंने चाची की टांगों को पकड़ लिया और उनकी चूत में लंड के धक्के देने लगा. चाची भी अपनी चूचियों को अपने ही हाथों से दबाते हुए चुदने लगी.

नंगी चाची की चूत मारते हुए मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी. इसलिए मैं ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाया और 2-3 मिनट में ही मैंने उनकी चूत में वीर्य छोड़ दिया.
चाची बोली- बस?
मैंने कहा- अभी रुक जाओ चाची. थोड़ी देर के बाद आपको फिर से मजा आने वाला है.

चाची ने मेरे लंड को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगी. पांच मिनट तक वो मेरे लंड को जोर से चूसती रही. मेरे लंड में फिर से तनाव आने लगा.

एक बार फिर से मेरा लौड़ा उसकी चूत की चुदाई के तैयार हो गया. अबकी बार चाची ने खुद कमान संभाल ली और वो मेरे ऊपर आ गयी. मेरे लंड पर बैठ कर चाची ने चूत में लंड को ले लिया और मेरे लंड पर कूदने लगी.

मैंने चाची की मोटी गांड को थाम लिया और मैं नीचे से धक्के लगाने लगा. चाची की उछलती हुई चूचियां मुझे मेरे सामने ही दिखाई दे रही थीं. कुछ देर के बाद चाची थक गयी और उसके बाद मैंने चाची को नीचे लिटा दिया.

दो मिनट तक चाची की चूत की चुदाई की और फिर मैंने उनको घोड़ी बना दिया. पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया. चाची अब सिसकारियां लेते हुए चीखने लगी- और जोर से … आहह् … मजा आ रहा है. और चोद … आह्ह जोर से.. चोद कपिल… मुझे अपने बच्चे की मां बना दे आज!

मैं अब पूरी ताकत के साथ चाची की चूत में लंड को पेलने लगा. बीस मिनट तक मैंने चाची की चूत को चोदा और फिर उनकी चूत में ही झड़ गया. फिर मैं थक कर लेट गया. चाची भी हांफ रही थी.

वो मेरे सीने पर हाथ रख कर लेट गयी. मेरे लंड को सहलाने लगी. उसके थोड़ी देर के बाद चाची ने फिर से मेरे लंड को मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी.
काफी देर तक वो मेरे लंड को चूसती ही रही. अबकी बार मैंने भी लंड चुसवाने का पूरा मजा लिया और चाची के मुंह में ही झड़ गया.
चाची मेरा पूरा माल गटक गयी.

उसके बाद हम दोनों साथ में लेट कर चिपक कर सोने लगे.
मैंने कहा- एक बात पूछूं चाची?
वो बोली- हां पूछ.

मैंने कहा- अभी तक आपको कोई बच्चा क्यों नहीं हुआ है?
वो मेरा सवाल सुनकर उदास हो गयी और उसकी आंखें भर आईं.
वो बोली- इसीलिये तो मैंने तुझे ये सब करने दिया. तेरे चाचा में वो क्षमता नहीं है कि वो बच्चा पैदा कर सकें.

चाची की आंखों में आंसू आ गये. मैंने उनको अपने बदन से चिपका लिया. कुछ देर के बाद हम फिर से गर्म हो गये. एक बार फिर से रात में मैंने चाची की चूत को चोदा.

फिर चोरी-छिपे कई बार मैंने चाची की चूत मारी और वो गर्भवती हो गई.
उसके बाद चाची ने एक सुन्दर से बच्चे को जन्म दिया. मुझे हैरानी होती है कि वो मेरा बेटा है. मगर चाची की खुशी देख कर मैं भी खुश हो जाता हूं.

बेटा होने के बाद चाचा की नौकरी बाहर लग गयी. वो अब हमारे साथ नहीं रहते हैं. मगर मैं आज भी चाची को याद करता हूं. वो भी मुझे याद करती हैं.

जब भी चाची एक दो दिन के लिए हमारे पास आती है तो हम लोग जरूर एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं और चुदाई का मौका मिलता है तो वो भी करते हैं.

जवान भतीजे ने मिटाई चाची की प्यास

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सुनीता है, मेरी उम्र 45 वर्ष है, रंग गोरा और मेरा फिगर 36-32-40 है. मैं इंदौर में अपने पति के साथ रहती हूँ.
मेरे दो बच्चे हैं, दोनों दूसरे शहर में नौकरी करते हैं.

मेरे पति एक MNC में काम करते हैं. मेरे पति सुबह 8 बजे ऑफिस चले जाते हैं और शाम 7 बजे के बाद ही आते हैं. मैं पूरा दिन अकेली रहती हूँ या अपने कुछ सहेलियों के साथ कभी कभी पार्टी कर लिया करती थी.
मेरा दिन अच्छा कट रहा था.



एक दिन मेरे पति ने मुझे अचानक बताया कि उनके भाई का लड़का हमारे शहर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये आ रहा है और वो हमारे साथ हमारे ही घर में ही रहने वाला है.

मुझे यह सही नहीं लगा, उसके हमारे घर में रहने से मेरी पूरी आज़ादी छीन जाएगी.

पर बात घर की थी तो मजबूरन मुझे मानना पड़ा.

मैंने ऊपर के कमरे में उसके रहने का इंतजाम कर दिया.

अजय सीधा साधा लड़का था, पढ़ाई लिखाई में भी अच्छा था. मैं कई बार उससे मिली हूँ और वो मेरी काफी इज़्ज़त भी करता है लेकिन अभी मुझे उसका आना पसंद नहीं था.

कुछ ही दिनों में अजय घर आ गया.
वो 19 साल का बड़ा लड़का हो गया था, कद काठी भी अच्छी हो गई थी.

मैं तो पहले उसे देखती ही रह गई.
फिर मैंने उसे ऊपर का कमरा दिखा दिया.

अब अजय हमारे साथ हमारे घर में रहने लगा.
वो काफी शर्मीला लड़का था.

शुरू से ही कम उम्र के लड़के मुझे काफी पसंद हैं.
मेरे पति की उम्र 50 साल की हो गई है, अब उनमे पहले जैसे बात नहीं रही तो अब मेरी यह दबी हुई इच्छा अब अजय को देख के बाहर आने लगी थी.

एक दिने मैं सूखे कपड़े लेने छत पे जा रही थी. तभी मेरी नजर बाथरूम पे पड़ी जो अजय के रूम के बगल में था.
उसका दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर अजय नंगा नहा रहा था.

वो बिल्कुल दरवाजे के पास खड़ा शावर से नहा रहा था और खुले दरवाजे से झांटों के बीच लंड साफ़ दिख रहा था.
उसका 7 इंच का लंड बिल्कुल मेरे सामने था, मैं तो हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ भी सकती थी.

जवान लंड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गई, मैं तो बस खड़ी खड़ी देखती ही रह गई और दरवाजे के पीछे वो मजे से नहा रहा था.
थोड़ी देर बाद जब उसका लंड दरवाजे से छिप गया तब मैं किसी तरह खुद को मनाती हुई नीचे आ गई, कपड़े भी नहीं लाई.

अजय प्यारा तो था ही … पर अब मुझे वो और भी प्यारा लगने लगा था.
अब मैं उसका और भी ध्यान रखने लगी और धीरे धीरे उसके करीब आने की कोशिश करने लगी.

वो मेरे पास केवल 4 साल के लिये आया था और अब मैं बिना समाये गंवाये जल्द से जल्द उसका लंड लेने के लिये तड़प रही थी.
अब मुझे अपने पति में कोई इंटरेस्ट नहीं था, मुझे तो बस अजय ही चाहिये था.

मैं चाहती थी कि पहल अजय करे क्यूंकि घर की बात थी, कुछ गड़बड़ हुई तो पूरी उम्र सुनना पड़ेगा.
अपने पति, अपने बच्चों को मैं क्या मुँह दिखाऊंगी.

अजय जिस बाथरूम में नहाता था उस बाथरूम की कुण्डी थोड़ी मुश्किल से लगती थी, शायद इसलिए नहाते समय बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रखता था.

अब मैं हररोज अपने भतीजे के लंड का दीदार करती थी और कई बार जब वो कपड़े बदल रहा हो, उसी समय बहाने से उसके कमरे में चली जाती थी और वो मुझे देख के शर्मा जाता था.

धीरे धीरे कुछ महीने बीत गए, अब मैं और अजय काफी नजदीक आ गए थे.
अब अजय ऊपर से नंगे बदन केवल निक्कर में मेरे सामने आ जाता था, मैं भी उसे ऐसे दिखती जैसे कोई बात नहीं … लड़के घर में ऐसे ही रहते हैं.

पर मेरी चूत अब भी खाली थी और अजय के लंड के लिये तड़प रही थी.

मुझे अब ये समझ में आ गया था कि लंड लेना है तो अब बात मुझे खुद आगे बढ़ानी पड़ेगी.

मैं दिन के समय सलवार सूट या टॉप और लोअर पहनती हूँ. मैं इन कपड़ों में साधारण सी हाउसवाइफ दिखती हूँ और रात में नाइटी.

मेरी नाइटी स्लीवलेस और बड़े गले की है, इसमें मैं सेक्सी दिखती हूँ. ये नाइटी अब तक मैं अपने पति का सामने ही केवल पहना करती थी पर अब यह नाइटी मैंने अजय के सामने भी पहनना शुरु कर दी ताकि उसे अपने बड़े बड़े चूचों का अच्छे से दीदार करा पाऊं.

अब मैं उठते बैठते अजय को अपने स्तनों की दीदार करने लगी.
उसकी नजर तो मेरी चूचियों की घाटी में आकर मानो फंस ही जाती थी, जब भी हमारी नज़र मिलती तो वो झेम्प जाता और मैं मुस्कुरा देती.

एक दिन मैं नाइटी पहन के अपनी छत पे प्लांट लगा रही थी.
तभी वहाँ अजय भी आ गया.

मैं मौका देखते ही अपने नाइटी घुटनों तक मोड़ के कुछ इस तरह बैठ गई कि सामने आने से अजय को मेरी मोटी मोटी जाँघें और पैंटी साफ़ दिखे.

अजय पहले तो थोड़ी देर बड़े ध्यान से मेरी नाइटी के अंदर देखता रहा, मैं भी मजे से दिखाती रही.
पर थोड़ी ही देर में वो छत की दूसरी ओर जाने लगा.

मैंने उसे तुरंत बुलाया और उससे इधर उधर की बातें करने लगी ताकि मैं उसे ज्यादा समय तक मैं उसे अपने नंगे अंगों को दिखा पाऊं.

ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए पर बात अब भी बनती नज़र नहीं आ रही थी.
वो बड़ा सभ्य लड़का था.

अब मैं छत पे कपड़े सुखाने को अजय को भेज दिया करती थी जिसमे मेरी ब्रा और पैंटी भी होती थी.
वो भी बड़े प्यार से मेरे ब्रा पैंटी को सुखाता था.

एक दिन मुझे अपनी एक सहेली के यहाँ जाना था.
मैंने अजय को कहा- मुझे लेट हो रही है और मेरा सूट प्रेस नहीं है, प्लीज मेरा सूट प्रेस कर दो, नहीं तो मैं लेट हो जाऊंगी.

अजय मेरे कमरे में ही मेरा सूट प्रेस करने लगा और मैं अपने रूम के अटैच्ड बाथरूम में नहाने चली गई.

मैं जल्दी नहा कर अपने सफ़ेद पेटीकोट को अपने वक्ष के ऊपर बाँध कर बाहर आई और उसे जल्द प्रेस करने को बोलती हुई अपने बाल संवारने लगी.
सफेद पेटीकोट मेरे गीले बदन से पूरा चिपक गया था.

मैं चारों तरफ घूम घूम कर बाल संवार रही थी ताकि अजय को अपना बदन अच्छे से दिखा पाऊं.
अजय भी चोरी चोरी मुझे निहार रहा था.

सफेद पेटीकोट में मेरी 36 इंच की चूचियाँ जबरदस्त लग रही थी.
जब मैं झुक रही थी तो पीछे से मेरी नंगी चूत भी दिख रही थी.
यह सब देख कर अजय का बुरा हाल हो रहा था.

वो जल्दी से प्रेस करके बाहर जाने लगा तो मैंने उसे फिर रोक लिया और इधर उधर की बातें करने लगी.

फिर उसकी और पीठ करके पेटीकोट खोल के ब्रा पहनने लगी.
आईने में अजय की बैचनी मुझे साफ़ दिख रही थी.

मैंने अजय को अपनी ब्रा का हुक लगाने को कहा.
वो डरते डरते मेरे पास आया और हुक लगाया, उसके हाथ काम्प रहे थे.

मैंने उसे कहा- अब तुम्ही रोज मेरी ब्रा का हुक लगा दिया करना, मुझे हाथ पीछे जाने में प्रॉब्लम होती है.
वो हामी भर कर वहीं खड़ा रहा, जैसे वो बुत बन गया हो, जैसे उसे कुछ समझ ही ना आ रहा हो.

फिर मैंने वहीं उसके सामने ब्रा में कैद अपनी चूचियों को दिखाते हुए पेटीकोट नीचे कमर पर बाँधा.
वो मेरे बदन को निहार रहा था और मैं उससे इधर उधर की बातें कर रही थी जैसे यह सब नार्मल था.

फिर मैंने उसके सामने ही पैंटी पहनी.
अजय ऐसे व्यवहार कर रहा था जैसी मानो मैंने उसे सम्मोहित कर लिया हो.
वो चुपचाप मेरे अधनंगे बदन को देख रहा था और मुझसे आँखें बचा के अपने लंड को सहला रहा था.

उस दिन के बाद अजय हमेशा मेरी ब्रा का हुक खोला और लगाया करता था.
कई बार मैं उसे खोलने को बुला लेती थी.

मैं भी ब्रा पहनते और खोलते समय उसे अपने चूचों के दर्शन करवा देती थी.

अब अजय ज्यादा समय मेरे साथ बिताने लगा था और मेरी ध्यान भी रखने लगा जैसे मानो मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ.

खाना भी हम साथ बनाते थे और किचन में काम करते समय कई बार वो मेरे अंगों को छू देता था जिसके बदले मैं भी मौका देख के उसके अंगों को छू देती या अपने चूचियाँ या चूतड़ उसके बदन से रगड़ देती थी.

जब अजय कॉलेज जाता या अपने दोस्तों के पास जाता तो मेरा दिल करता था मैं भी उसके साथ चली जाऊं … पर मैं खुद को कंट्रोल करती.
अजय भी समझदार था, वो मेरे पति के सामने मुझे दूरियां बना के रखता था.

अजय के साथ मुझे मजा तो आ रहा था पर अब भी मेरी चूत अब भी खाली पड़ी थी, उसे अब तक अजय लंड का स्वाद नहीं मिला था.

अब हम दोनों एक दूसरे को गले लग के गुड मॉर्निंग विश किया करते थे.
अजय भी कई बार मुझे जोर से अपने बांहों में जकड़ लेता था और बहाने से मेरे कूल्हों से मुझे पकड़ के मुझे उठा लेता था.
कई बार अजय मुझे पीछे से पकड़ के मेरी गांड में अपने लंड फंसा देता था और कभी मेरे पेट को तो कभी मंगल सूत्र को देखने के बहाने मेरी चूचियों से खेलता रहता था.

मुझे भी बड़ा मजा आता था और मैं भी अपने चूतड़ों को मटका मटका करके अपनी गांड से उसके लंड को मसलने की कोशिश करती रहती थी.
एक दूसरे के अंगों को छूना, गाल और गले को चूमना अब हमारे लिए आम बात हो गई थी.

एक दिन मैं नहा रही थी और गलती से तौलिया ले जाना भूल गई क्योंकि तौलिया छत पे था.

पहले मैंने नंगी ही बाहर कमरे में आकर तौलिया ढूंढा पर नहीं मिलने पर अजय को तौलिया लाने को बोल के बाथरूम में वापस चली गई.

थोड़ी देर बाद अजय तौलिया लेकर आया और मुझे आवाज लगाई.
मैंने कहा- दरवाजा खुला है, अंदर आकर रख दो.

अजय अंदर मुझे शावर के नीचे नंगी नहाती हुई देखने लगा.
वो बिना पलक झपकाए अपनी चाची को देख रहा था.

मैंने पूछा- तुम्हें भी नहाना है क्या?
वो बोला- नहीं, ये बाथरूम काफी बड़ा और सुन्दर है.

मैं भी उसके हाथ से तौलिया लेती हुई अपने नंगे बदन को पौंछने लगी.
लेकिन मैं चाहती थी कि अजय तौलिया से मेरे गीले बदन का पानी सुखाये. पर वो चूतियों की तरह खड़ा रहा.

फिर हम बातें करते हुए बाहर आ गए और मैंने कपड़े पहन लिए.

उस दिन मुझे अजय पे काफी गुस्सा आ रहा था, इतनी सुन्दर औरत जिसकी दीदार को सारा मुहल्ला परेशान रहता है, वो नंगी खड़ी है और इस चूतिये को बाथरूम दिख रहा था.

अजय समझ गया कि मैं नाराज हूँ.
वो मुझे मेरी उदासी का कारण पूछने लगा और ज़िद करके सोफे पे मुझसे चिपक का बैठ गया.

जब उसकी जिद बढ़ गई तब मैंने बात पलटने को उससे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
उसने साफ़ मना कर दिया.

फिर मैंने बातों बातों में पूछा- पहले कभी किसी लड़की को नंगा देखा है क्या?
उसने धीरे से शरमाते हुए कहा- चाची जी, आपको कई बार देखा पर आज आपको देख के मजा आ गया.

फिर उसने धीरे से पूछा- आप अपने नीचे के बालों को क्यों नहीं साफ़ करती?
उसके मुँह से इस तरह की बात की मुझे उम्मीद न थी.

फिर भी मैं तपाक से बोली- किसके लिये साफ़ करूं?
उसने पूछा- क्यों चाचाजी कुछ बोलते नहीं?

मैंने कहा- उन्हें जैसे भी मिल जाये सब चलता है, वैसे तुम भी तो साफ़ नहीं करते.

यह सुनते ही वो सकपका गया और पूछा- आपको कैसे मालूम?
मैं बोली- दरवाज़ा खोल के नहाओगे तो सब मालूम चल ही जायेगा.

कुछ दिन और गुजर गए अब हम दोनों को एक दूसरे के सामने नंगा होने में कोई शर्म नहीं आती थी.
पर अब भी हमारे लंड और चूत का मिलन नहीं हुआ था.
आग दोनों और थी पर कोई पहल करने को तैयार नहीं था.

कपड़े के ऊपर से तो हम एक दूसरे के बदन को प्यार से सहला लेते थे पर हाथ अंदर ले जा कर सहलाना अभी बाकी था.

फिर एक दिन मैंने भी मन बना के बाथरूम में अपने झांटों को साफ़ किया और अपनी पीठ पर साबुन लगाने के बहाने अजय को अंदर बुलाया.
उस वक्त मैं अपनी पेटीकोट को चूचियों पे बंधी हुई थी और अजय अपनी निक्कर और टीशर्ट में था.

मैंने उसे कपड़े उतरने को कहा.
उसने अपनी टीशर्ट तो उतार दिया पर अपनी निक्कर नहीं उतरना चाहता था.
हम दोनों ने कई बार एक दूसरे को नंगा देखा था तो उसकी वो बात मुझे अच्छी नहीं लगी.

फिर भी मैंने अपनी पेटीकोट उठा के उसे अपनी बिना बालों वाली सुन्दर चूत का दर्शन करवाए.

अजय ने यह देख के तुरंत अपनी निक्कर उतार दी और अपना बिना बालों वाले 7 इंच के लंड दिखाया.
उसने भी अपने नीचे के बालों को मेरे कहने पे साफ़ कर लिया था.

यह देख के हम दोनों ने एक साथ वाओ बोले और नज़दीक आकर एक दूसरे के अंगों को छूने सहलाने लगे.
जल्द ही अजय का लंड खड़ा हो गया.

उसने मेरा पेटीकोट और अपनी निक्कर उतार दी और मेरे बदन को पागलों की तरह चूमने सहलाने लगा.
मैंने भी उसका लंड पकड़े हुए खुद को उसे सौंप दिया.

बाथरूम में ये सब करना असुविधाजनक लग रहा था तो मैं उसे उसके लंड से खींच के रूम में ले आई और वहाँ बेड पे लिटा के उसके उसके ऊपर चढ़ के चूमने लगी और अजय का लंड अपनी चूत में रगड़ने लगी.

अजय की सांसें तेज चल रही थी.
मैंने धीरे से पूछा- पहली बार क्या?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा.

मैं समझ गई थी कि अब सब मुझे ही करना है.

तो मैं अजय को लिटा के धीरे से अपनी चूत को उसके खड़े लंड पे सेट करके धीरे धीरे बैठने लगी और धीरे धीरे अजय का लंड मेरी चूत में समाता चला गया.
अजय लेटा हुआ अपनी गर्दन उठा के यह सब देख रहा था.

फिर मैंने अजय के लंड पे सवार होके जी भर के चुदवाया और फिर अजय ने मेरे साथ ही अपना पानी मेरे चूत की गहराई में छोड़ दिया.

हम दोनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे.

थोड़ी देर बाद जब आंख खुली तो मैं अब भी अजय के ऊपर और अजय का लण्ड मेरे अंदर था, जो धीरे धीरे अपना आकर ले रहा था.
मैंने पूछा- मजा आया?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा और मेरी चूचियों में अपना मुँह छिपा लिया.