नंदोई जी ने मनाई सुहागरात

दोस्तो, मेरा नाम मालती है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र इकीस साल है, एक बच्चे की माँ हूँ, शादी के ठीक ग्यारवें महीने मैंने लड़का जना है। आजकल घर में रहती हूँ, सासू माँ और मैं दोनों अकेली होती हैं।

एक साल पहले में बी.ए पहले साल में थी जब माँ-बापू ने लड़का ढूंढ कर मेरी शादी पक्की कर दी। हमारे समाज में छोटी उम्र में शादियाँ होती हैं। शादी से पहले मेरे ३ लड़कों के साथ चक्कर रहे थे और तीनों के साथ मेरे शारीरक संबंध बने और मुझे चुदाई का पूरा पूरा चस्का लगा।

पहली चुदाई सोनू नाम के लड़के के साथ हुई जब मैं अठरा साल की थी।
उसके बाद दो और एफेअर चले।

मुझे लड़के की फोटो दिखाई गई थी। शादी से बीस दिन पहले मेरा घर से आना जाना बंद हो गया था और चुदाई भी !

हालांकि एक चक्कर मेरा पड़ोसी के साथ था, वो मुझसे शादी करना चाहता था लेकिन हम मजबूर थे क्योंकि एक गाँव में शादी मुश्किल काम था।

शादी से तीन रात पहले उसने मुझे रात को कॉल कर छत पर बुलाया। उस वक्त रात के दो बजे थे। मिलते ही उसने मुझे दबोच लिया और मेरे होंठ चूसने लगा, साथ में उसने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल मेरी चूत को मसलना चालू कर दिया। मैं पूरी गर्म हो गई और उसके लौड़े को मसलने लगी। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल दिया और मैंने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

वो बोला- जान, कुर्ती उठा लो, आज
आखिरी बार इतने गोल मोल मम्मे चूसने हैं !

मैंने कहा- ऐसा मत कहो ! मैं आती रहूंगी मायके ! मिलकर जाया करुँगी !

उसके बाद मैंने सलवार खोल दी और उसने वहीं फर्श पर मुझे ढेर कर लिया और अपना लौड़ा चूत में डाल रफ़्तार पकड़ी। एक साथ ही हम शांत हुए और उसने मुँह में ठूंस दिया।

अगले दिन शगुन की रसम होनी थी। हमारे इधर सुबह पहले लड़की वाले लड़के को शगुन लगाने जाते हैं और साथ में दहेज़ का जो भी सामान देना, भेजना हो वो सब कुछ ले जाते हैं!

सभी शगुन लगाने चले गए, पीछे मैं और दादी माँ थी।

उसके बाद शाम को लड़के की बहनें, भाभियाँ और उनके पति लड़की को शगुन की चुन्नी, गहने, सिंगार के सामान साथ मेंहदी लगाने आई। उनमे से मेरी नज़र बार बार एक मर्द पर टिकने लगी वो भी मुझे देख वासना की ठंडी आहें भर रहे थे।

शगुन डालते वक्त फोटो होने लगी तो मालूम चला वो मेरे एक नंदोई सा हैं। क्या मर्द था ! मैं मर मिटी थी ! वो भी जानते थे, उन्होंने इधर उधर देख मुझे आंख मारी, मैं होंठ से चबाते हुए मुस्कुरा दी।

मैं अपने कमरे में कपड़े
बदलने चली गई, लहंगा भारी था, कमरा बंद किया पर अपने कमरे से बाथरूम की कुण्डी लगाना भूल गई। मैंने जल्दी से कुर्ती उतारी और लहंगा खोला। दरवाज़े की तरफ मेरी पीठ थी। जैसे ही मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में रह गई तो एक आवाज़ आई- क्या हुसन पाया है ! क़यामत !

मुड़ कर देखा तो सामने नंदोई जी थे, बोले- बाथरूम मेरे कमरे के साथ जुड़ा है। उसका एक दरवाज़ा लॉबी में भी खुलता है।

मैंने कमरे में नंदोई सा को देख झट से तौलिये से खुद को छुपाया। वो मेरी ओर बढ़े, मैं पीछे हटी, आखिर में बेड पर गिर गई। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे तपते होंठों से अपने होंठ मिला दिए। उन्होंने ड्रिंक की हुई थी।

प्लीज़ ! मुझे सबके बीच वापस लौटना है ! बाद में कभी

बोले- पहले गर्म करती हो ! फ़िर मना करती हो?

वो दोनों हाथों से मेरे मम्मे दबाने लगे, मुझे कुछ होने लगा, मेरी चूत मचल उठी और मैंने उनके लौड़े को पकड़ लिया। जब वो मेरा दाना मसल देते तो मैं मचल उठती !

थोड़ी देर में खुद ही वो अलग हो गए बोले- भाभी कल सही !

अगले दिन मैं दुल्हन बनी। पार्लर से दुल्हन बनकर पहुंची पैलेस !

पापा ने शहर का सबसे महंगा पैलेस बुक किया था।
हमारे इधर शादी दिन में होती है। बारह बजे बारात आई, मिलनी की रसम के बाद नाश्ता हुआ। फिर स्टेज पर जयमाला हुई। काफी देर वहीँ बैठे। सबने शगुन वगैरा डाला, फोटो खिंचवाई।

ऊपर मंडप तैयार था। आज नंदोई सा बहुत ज्यादा हैण्डसम लग रहे थे। बहुत बढ़िया डी.जे कार्यक्रम का प्रबन्ध किया था पापा ने ! एक तरफ दारु भी
चलवा दी ताकि जिसको मूड बनाना हो बना ले ! वैसे भी मेरे ससुराल में सभी शादी-बियाह में पीते ही थे।

खैर मंडप पर मुझे दीदी, भाभी, सहेलियाँ लेकर गईं और फेरों के बाद मंगल सूत्र पहनाया गया। दूल्हे के बराबर नंदोई सा उसकी हर रसम में मदद कर रहे थे ताकि उसको कोई घबराहट न हो ! इधर मुझे भाभी सब बताये जा रहीं थी। नंदोई सा मेरी भाभी पर भी लाइन मार लेते।

शाम पाँच बजे तक सब ख़त्म हुआ, उसके बाद मेरी डोली उठी और मैं गुलाबों से सजी कार में बैठ ससुराल आ गई। मांजी ने पानी वारने की रसम पूरी की। मुझे भाभी और इधर वाली दीदी अलग कमरे में ले गईं। मुझे कहा कि
कपड़े बदल कर फ्रेश हो जाओ।

बाहर लॉन में सब नशे में धुत हो नाच-गा रहे थे। शगुन मांगने वालो की लाइन लगी पड़ी थी, ससुरजी और नंदोई सा तो उनको ही सम्भाल रहे थे।

रात हुई, दीदी बोली- एक सरप्राईज़ बाकी है !

कुछ पल के लिए पतिदेव पास आये, बोले- बहुत आग लग रही हो !

उन्होंने पी रखी थी, नशा काफी था, होंठ चूसने लगे। बोले- बदल लो कपड़े !

उन्होंने मेरा लाचा खोला, फिर कुर्ती की डोरी खींची और अलग कर दी, पीठ पर चूम लिया।

मैं सिकुड़ सी गई।

अब दोनों आओ भी ! गाने की रसम पूरी करनी है !

पति ने मेरे मम्मे दबाये और मैंने भी सूट पहन लिया और बाहर गए। वहाँ पंरात में कच्ची लस्सी में सिक्का गिरा कर ढूंढने की रसम हुई। उसके बाद दीदी बोली- तेरे नंदोई सा ने तुम दोनों के लिए फाइव स्टार में स्वीट बुक
किया है !

पतिदेव को काफी नशा हो चुका था, दीदी ने नंदोई सा को उन्हें और पिलाने से रोका। कार में बैठ कर भी उनको काफी नशा था। नंदोई सा हमें छोड़ने आये। पहले नीचे पूरा डाइनिंग हॉल हम तीनों के लिए बुक था। मेरे लिए तब तक कोल्ड ड्रिंक आर्डर की, उन दोनों ने लिए मोटे पटियाला पैग ! दो पैग के बाद पतिदेव लुढ़क गए। मैं कुछ-कुछ समझ गई।

बस करिए न आप ! कितनी पिओगे ?

भाभी जान ! आज ही तो पीने का दिन है !

खाना खाया, नंदोई सा ने मुझे कमरे की चाभी गिफ्ट की और रूम सर्विस वाला मुझे कमरे तक लेकर गया। कमरा खोलते वक्त देखा- हाथ में दो चाभियाँ थीं- ४०५ और ४०७ वो दोनों भी आ गए !

जाओ भाई अपनी दुल्हन के पास ! सुहागरात मनाओ !

इनको बहुत ज्यादा पिला दी गई थी। कमरे तक आते वक्त तक दारू हाथ में थी। उतनी ही नंदोई सा ने पी लेकिन वो हट्टे-कट्टे थे।

ये तो बिस्तर पर लेटते सो गए। मैं वाशरूम गई। पहली रात के लिए सबसे महंगी
नाइटी खरीदी थी, उसी रंग की ब्रा और पैंटी ! बदल कर वापस आई ! लाल गुलाबों वाले बिस्तर पर में इनके साथ लिपटने लगी, सोचा कि इस से नशा कम होगा। शर्ट उतार दी लेकिन इन्हें कोई होश न था।

तभी मुझे मोबाइल पर कॉल आई- कैसी हो जान ? मुझे मालूम है कि क्या हो रहा होगा ! ऐसा करो, हाउस-कीपर ने दो चाभी दी थी ना ! इसकी सुबह से पहले नहीं उतरेगी। बाहर से लॉक करो और इधर आ जाओ !

लेकिन मैं नाइटी में हूँ !

कोई बात नहीं ! रात के बारह बज चुके हैं, इन कमरों में कम लोग ही आते हैं !

मैं उठी,
इनको हिलाया, कमरा लॉक किया और नंदोई सा के कमरे में चली गई।

वाह भाभी ! क्या खूबसूरती है ! मदहोश कर देने वाली !

यह आपने क्या किया? इनको इतनी पिला दी?

वो उठे, मुझे बाँहों में लेते हुए बोले- क्या करता कल से तूने होंठ चबा और बाद में कमरे में जवानी दिखाई !

आप बहुत खराब हो !

मेज़ पर शेम्पेन और बियर पड़ी थी, मुझे कह कुहा कर बियर पिला दी उसके बाद अपनी मर्ज़ी से मग भर पिया। वो मुझे सोफा पर बिठा बीच में बैठ मेरे स्तनपान करने लगे। सिसकियाँ फूटने लगी, मैंने पाँव से उनके लौड़े को मसल दिया।

इतने में दीदी की कॉल आई नंदोई सा को !

उस वक्त मैं उनकी गोदी में अधनंगी बैठी थी।

कहाँ रह गए आप? सब ठीक तो है?

हाँ, उन दोनों को भेज दिया जान कमरे में ! इसने ज्यादा पी ली है ! सहारा देकर छोड़ कर नीचे आया हूँ ! बेचारी जानकी घबरा गई है, इसलिए उन्हें कुछ बताये बिना मैं अपने दोस्त के साथ नीचे बार में हूँ, कहीं साला
साहिब कोई गलती ना कर दें !

दीदी बोली- कोई बात नहीं ! सही किया आपने ! खुद मत पीना !

और फ़ोन साइलेंट पर लगा दिया मेरी दोनों टांगें खोल मेरी चूत जो कि सुबह ही शेव करवाई थी, उसपे होंठ रख दिए। मैं भड़क उठी। सोफ़े पर कोहनियों के सहारे उठ कर चूत चुसवाने लगी। अह उह सी !

मेरी जान क्या चूत है तेरी ! क्या जवानी है ! बाग़ लगा है माली भी ज़रूर रखें होंगे !

मैं शरमा सी गई !

उठा मुझे बिस्तर पर लिटा दिया !

मेरे मम्मो पर बियर डाल डाल कर चाटने लगे।

वाह नंदोई सा ! और चाटो ! मसलो इनको !

भाभी, कसम से तेरे जैसी जवानी वाली लड़की नहीं चोदी !

दीदी भी सुन्दर हैं !

हैं, लेकिन मेरे इस चाँद के सामने उसका रंग भी फीका है !

बातें करते हुए मैंने उनको निर्वस्त्र कर दिया, उनको बेड पर धकेलते हुए उनके कच्छे को उतार उनके लौड़े पर एख दिए अपने कांपते होंठ !

इतना लम्बा लौड़ा नंदोई सा?

मैंने भी कसम से अभी तक इतना मोटा और लम्बा नहीं उतरवाया चूत में !

ओह मेरी रानी, दिलबर ! कस के चूस इसको !

मैं नशे में थी, कुछ भी बके जा रही थी,
मैंने ६९ में लेटते हुए उनके लौड़े को चूसा और अपनी चूत को खूब चुसवाया।

नंदोई सा ! अब रुका नहीं जा रहा ! आओ अपनी भाभी के पास और उतर जाओ गहराई में !

ओह बेबी !

मैंने टांगें खोल लीं, वो बीच में आये और मैंने अपने हाथ से पकड़ लौड़ा ठिकाने पर रख दिया। उन्होंने जोर लगाया और उसका सर अन्दर घुस गया। काफी मोटा था लेकिन बेडशीट को जोर से पकड़े मैंने उनका सारा अन्दर डलवा लिया।

ओह भाभी ! वाह, क्या चूत है तेरी साली ! कितनी चिकनी है ! तू देख तेरा नंदोई बहिन की लोड़ी आज रेल बनाता है तेरी !

आह ! रगड़ो ! और रगड़ो ! फाड़ दो मेरी ! हाय ! मेरे कुत्ते चोद अपनी कुतिया को !

मेरे मुँह से यह सुन उनमें जोश भर गया- बहनचोद ! देखती जा साली रांड कहीं की ! यह ले मादरचोद ! यह ले !

उई उई ई ई तू ही असली मर्द है कमीने ! तेरा
लौड़ा ही सबसे अच्छा है !

कुछ देर उसी आसन के बाद दोनों टाँगें कन्धों पर रखी, जिससे पूरा लौड़ा जाकर बच्चेदानी से रगड़ खाता तो मुझे स्वर्ग दिखता !

उसके बाद मुझे घोड़ी बना लिया और ज़बरदस्त झटके लगने लगे।

और तेज़ तेज़ !

साथ में खाली बियर की बोतल मेरी
गांड में घुसाने लगे।

हाय साले ! यह क्या करने लगा है !

चल साली कुतिया ! मेरे बाल खींच !

गांड पर थप्पड़ मारा और बोतल एक तरफ़ रख दी। एक पल में लौड़ा चूत से निकाला और गांड में डाल दिया !

ओह हा और और ! बहुत बढ़िया !

मेरी गांड मारने लगे, साथ में मेरे दाने को चुटकी से मसल रहे थे। एक साथ में मेरा मम्मा पकड़ रखा था।

फिर चूत में डाल लिया और तेज़ होने लगे।

मैं झड़ने वाली हूँ !

अह अह ऽऽ ले साली ! साली ले ! कहते कहते उन्होंने मेरी चूत में अपना पानी निकाल दिया, मेरी बच्चेदानी के पास गरम पानी छोड़ा, जिससे मुझे अता आनंद आया।

बाकी का मैंने मुँह में डाल साफ कर दिया।

साढ़े तीन के करीब दोनों बाथरूम गए, शॉवर लिया, मैंने कपड़े डाले और अपने कमरे में आई, पूरे बिस्तर पर सलवटें डाल दी और गुलाबों को बिखेर दिया। सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ पैंटी छोड़ कर ! पति को जाते वक्त ही मैंने अंडरवियर छोड़ निर्वस्त्र कर दिया था। उनके पास लेट गई, उनकी बाजू अपने ऊपर डाल दी, सो गई।

सुबह के सात बजे अपने ऊपर किसी को पाया- पतिदेव थे ! मैं सोने की एक्टिंग करने लगी, उन्होंने प्यार से मुझे उठाया, मैं चुपचाप बाथरूम गई रूठने की एक्टिंग करते हुए !

जान क्या हुआ?

इतनी पी ली थी? क्यूँ सोचा नहीं था कि मेरी बीवी के साथ पहली रात है ! नशे में रौंद दिया आपने मुझे ! अंग अंग हिला दिया !सॉरी ! आगे से ऐसा नहीं होगा ! आपने बिना प्रोटेक्शन के मेरे साथ सब कर दिया ! अभी हमने एन्जॉय करना है अगर अभी गर्भवती हो गई तो?

कल से हम बाहर निकाल लिया करेंगे, आज किस्मत पर छोड़ दो !

उसके बाद अगली रात पतिदेव ने चोदा। आज कम पी रखी थी, घर में थे, झड़ने के समय बाहर खींच मेरे मुँह में डाल दिया !

दोस्तो, यह थी मेरी मस्त चुदाई जो हर पल मेरी आँखों में रहती है !

उसके बाद मौका देखा एक बार और नंदोई सा ने चोदा ! शादी के अगले महीने ही मेरी माहवारी रुक गई, मुझे चक्कर आये, डॉक्टर ने खुशखबरी सुना दी।

रात को मैंने पति से ऊपर से खफा होते कहा- देख लिया उस रात का नतीजा ?

लेकिन चल छोड़ कोई बात ना ! किस चीज़ की कमी है हमें !

यह गर्भ नंदोई सा के कारण ठहरा था। पहली ही रात तीन बार अपना माल मेरी बच्चेएदानी के पास छोड़ा था ! था भी इतना लम्बा कि मानो अन्दर घुसकर बच्चा डाल आये !

उनको मैंने फ़ोन पर बताया कि इनका पानी मैंने कभी अन्दर नहीं डलवाया, हमेशा गांड में या मम्मों पर ! सिर्फ आपका पानी अन्दर डलवाया था।

नशे में वो बहुत खुश हुए।

अब जब मैंने लड़का जना है, सासु माँ बहुत खुश हैं, पति भी नंदोई सा ने बुआ की तरफ से मेरे बेटे को चार तोले सोने की चैन, कड़ा, डायमंड का लाकेट डाला !

सो कैसी लगी मेरी आप बीती ? लिखना ज़रूर !

फिर बताऊँगी आगे लाइफ में क्या हुआ !

बेटे को चोदना सिखाया फोटो के साथ

जब बेटे की शैतानी का पता चला कि, बेटा स्कूल में अपनी टीचर को देखते हुए मुठ मार रहा था। तो टीचर ने मुझे कॉल किया और उसे स्कूल से निकलने की बात कही। तो मैने उसकी घर पर क्लास लेनिकी डिसाइड किया । मगर जब वो घर पर आया तो मैने नोटिस किया कि उसके पेंट का उभार अभी भी है। तो मैने उसे डाट लगते हुए बेडरूम में खींचा और उसके कपड़े बदलने को कहा। और में भी अपने रूम में कपड़े बदलने चली गई।

मगर उसने कपड़े बदलना छोड़कर मुझे कपड़े बदलते देखने लगा। में कपड़े बदलने के लिए अपनी पेंट नीचे की तभी उसने उसने आव देखा न ताव और मुझे खींच लिया और अपनी बांहों में भरकर जबरदस्ती करने लगा। मैं उस से अलग होने लगी लेकिन उसने मुझे जकड़ लिया। और चाटने लगा और अपने हाथों से मेरी गांड को भी दबाने लगा।

मॉम की गांड़ में जीभ को घुमाते हुए।

हालांकि मुझे उसकी हरकतों में मजा आ रहा था पर फिर भी दिखाने के लिए मैं उससे अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। लेकिन वो फुल जोश में था। कभी वो मेरी गांड दबाता तो कभी बूब्स। जिससे मैं भी गर्म होने लगी थी और धीरे-धीरे मेरी वासना जागने लगी थी। फिर उसने अपनी पेंट नीचे खींच कर उसके लन्ड को आजाद कर दिया। तब में भी उसके लन्ड को देखकर चकित रह गयी। यह तो बिल्कुल तगड़े मर्द की तरह था। तकरीबन 7 इंच लम्बान और 3 इंच मोटा होगा। वो अपने हाथ में पकड़कर उसे गोल गोल हिलने लगा। में उसे ऐसे हिलाते देख बोली- ये क्या कर रहे हो, पागल हो गए हो क्या?

आज से पहले उसने ऐसी हरकत कभी भी नहीं की थी। आज तो उसने मुझे खींच लिया। और अपना लन्ड मेरे हाथ में रख दिया। में भी जोश में आकर उसके लन्ड को चूसने लगी।

अपने ही बेटे का लन्ड चूसते हुए.
बेटे के लन्ड को अपने बूब्स से मसलते हुए।
बेटे के रस को और गाढ़ा कर ने के लिए, उसकी गोटियों को चूसी…
हल्के से बेटे के लन्ड को अपने चूत मे लेते हुए।
बेटे का पूरा लन्ड अपने अंदर समा लिया।
बेटे ने गहराई तक पेला
लन्ड का पानी मुंह में लेते हुए
लन्ड का पानी पीने से तृप्ति का एहसास हुआ।

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कुंवारी चूत प्यार में चुद गई

(First Love Virgin Sex Kahani)

सभी को नमस्कार, मेरा नाम अनुक्ति है मुझे घर पर सभी अनु नाम से ही बुलाते हैं.
मैं मध्य प्रदेश से हूँ.

मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.

दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं दो साल से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
मुझे sexystory.art.blog के बारे में मेरी सहेली ने बताया था, तभी से मैं यहां पर कहानिया पढ़ती आई हूँ.

यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.

शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.

इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.

कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मेरी क्लास में ही संजय भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती संजय से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.

संजय और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.

छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.

मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.

संजय देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.

उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स संजय के बर्थडे पर उसके घर गए थे.

संजय के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर संजय ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.

संजय और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.

उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.

कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.

उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.

वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.

फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.

संजय चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.

बस इसी तरह चल रहा था.

संजय सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.

कुछ दिन बाद संजय ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.

मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.

मैं छवि को बोल कर आई थी कि संजय के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.

मैंने संजय से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.

वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.

तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.

संजय ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.

वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.

वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.

थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.

भीड़ कम होती गयी.

संजय ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?

पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.

थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.

फिर संजय ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.

मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.

वहां जाने के बाद संजय मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.

इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.

मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.

संजय की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.

उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.

उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.

वह मुझे चूमने लगा.

करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.

तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.

उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.

उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.

मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो संजय बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.

मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.

वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.

मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.

फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.

उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.

मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.

अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.

संजय ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.

मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.

उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.

उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.

उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.

उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.

मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.

फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.

पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.

वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.

मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.

उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.

उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.

उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.

इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और संजय ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.

फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.

अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय संजय ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.

संजय अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.

मैंने संजय से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.

उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.

दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.

संजय ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.

ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.

उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.

वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.

फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.

वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.

मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.

मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.

उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.

वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.

मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और संजय के लंड को पहना दिया.

बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.

फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.

मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.

उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.

उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.

उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.

उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.

उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!

फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.

वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.

वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.

कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.

मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.

तभी संजय आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.

मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा संजय मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.

उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.

मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
संजय बोला- अनु मजा आया?

मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.

मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
संजय ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?

उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.

उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.

वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.

दोस्तो, आपको मेरी फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ बताएं.

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बदमाश स्टूडेंट्स ने विधवा टीचर को चोदा

करीब तीन साल पहले मैं अठाइस साल की ही थी जब मेरे शौहर की सड़क हादसे में मौत हो गयी। तब हम दिल्ली में रहते थे। उसके दो-तीन महीने बाद दिल्ली का मकान किराये पे दे कर मैं मेरठ से थोड़ी दूर अपने पेरन्ट्स के साथ आकर रहने लगी। मैं अच्छे खानदान से हूँ और पैसे की कोई कमी नहीं है।

मेरे वालिद की शुगर-मिल है और वो मुक़ामी पॉलिटिशन भी हैं। मैं शुरू से ही ऐशो-आराम में पली बड़ी हुई हूँ… बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी और फिर दिल्ली के नामी कॉलेज से बी-ए और फिर बी-एड किया था। आज़ाद ख्यालात की की होने के बावजूद मैं काफी अच्छे इखलाक़ वाली तहज़ीब यफ़ता और परहेज़गार थी।

अपने पेरन्ट्स के यहाँ आकर मैंने वक़्त गुज़ारने के लिये अलीगढ़ युनिवर्सिटी से कॉरस्पान्डन्स से इंगलिश में एम-ए करना शुरू किया। मुझे यहाँ आये हुए दो-तीन महीने ही हुए थे कि मेरे अब्बा के एक दोस्त ने उनके स्कूल में इंगलिश पढ़ाने की ऑफर दी। मेरठ के पास उनका एक बड़ा प्राइवेट स्कूल था।

ये स्कूल बारहवीं क्लास तक था और मैं कम क्वालिफिकेशन होने पर भी बारहवीं क्लास तक इंगलिश पढ़ाने लगी। इसकी दो वजह थी। एक तो मैं शुरू से ही इंगलिश मीडियम में पढ़ी थी और बी-ए भी इंगलिश में ही किया था। दूसरी ये कि स्कूल भी मेरे अब्बा के दोस्त का था और उन्हें कोई और काबिल टीचर मिल भी नहीं रहा था।

स्कूल में तमाम स्टाफ़ को मालूम था कि मैं स्कूल के मालिक के करीबी पहचान की हूँ और मुक़ामी पॉलिटिशन की बेटी हूँ… जिस वजह से स्कूल में मेरा काफ़ी रुतबा था। मैं बहुत ही स्ट्रिक्ट टीचर थी और स्कूल के ज्यादा बिगड़े हुए और नालायक काम-चोर लड़कों की पिटायी भी कर देती थी।

इसलिये सब स्टूडेंट्स मुझसे डरते थे। कुछ ही हफ़्तों में मैं स्कूल की डिसप्लिन इंचार्ज और स्टूडेंट काउन्सलर भी बन गयी थी और मुझे अपना छोटा सा ऑफ़िस भी मिल गया था। प्रिंसपल मैडम स्कूल के तमाम इंतेज़ामी मुआमलातों में भी मुझे शामिल करने लगीं।

स्कूल मेरे घर से करीब पच्चीस किलोमिटर था। शुरू में दो-तीन हफ़्ते मैं खुद कार ड्राइव करके जाती थी लेकिन फिर मैं स्कूल की बस से ही जाने लगी। हमारे रूट की स्कूल की बस हमेशा खचाखच भरी होती थी लेकिन टीचरों को और छोटे बच्चों को हमेशा बैठने की जगह मिलती थी और बड़े स्टूडेंट्स खड़े होकर जाते थे।

सब कुछ बखूबी चल रहा था। पर एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते वक़्त मैंने देखा कि बारहवीं क्लॉस की एक लड़की रोने जैसा चेहरा लिये हुए बस से उतरी और उसकी सहेली उसके कान में कह रही थी, “सुहाना तू घबरा मत… कल हम इंगलिश वाली तबस्सुम मैम से बात करेंगे… वो उन्हें अच्छा सबक सिखायेंगी!”

मुझे बात कुछ समझ में नहीं आयी लेकिन मैंने सोचा कि अगले दिन जब ये मुझसे बात करेंगी तब खुद-ब-खुद पता चल जायेगा। स्कूल की सभी बड़ी लड़कियाँ कभी-कभी अकेले में अपने कईं मसले अक्सर मेरे साथ डिस्कस करती थीं। इसकी वजह शायद ये थी कि बाकी टीचरों के मुकाबले मैं काफी यंग थी।

बारहवीं क्लॉस की लड़के-लड़कियों से तो उम्र में मैं सिर्फ़ दस-ग्यारह साल ही बड़ी थी। इसके अलवा बारहवीं के कुछ चार-पाँच लड़कों और दो-तीन लड़कियों से तो मैं सिर्फ़ आठ-नौ साल ही बड़ी थी क्योंकि वो पहले किसी ना किसी क्लॉस में कमज़-कम दो-दो दफ़ा फेल हो चुके थे।

खैर अगले दिन मैं जब स्कूल पहुँची तो मैं इंतज़ार कर रही थी कि कब वो लड़कियाँ आ कर मुझे अपना मसला बतायें और मैं उसे हल कर सकूँ। वैसे वो दोनों लड़्कियाँ भी उन फेल होने वाले लडके-लड़कियों में से एक थीं और स्कूल की सबसे बड़ी लड़कियाँ थीं। उनकी उम्र करीब बीस-इक्कीस साल होगी।

एक दिन बीता… दो दिन बीते, फिर पूरा हफ़्ता बीत गया पर उन्होंने मुझसे कोई बात नहीं की और मैं भी उसे भूल गयी। फिर एक दिन अचानक उसी दिन की तरह वो लड़की इस दफ़ा रोते हुए बस से उतरी। बल्कि बाकी टीचरें भी उसकी सहेलियों से पूछने लगी कि इसे क्या हुआ। इस पर उसकी सहेली ने कहा, “मैम इसका सर बहुत ज़ोर से दर्द कर रहा है!”

उन टीचरों के लिये बात वहीं दब गयी लेकिन मुझे इस बात पर यकीन नहीं हुआ क्योंकि दोनों काफी दबंग किस्म की लड़कियाँ थीं थीं और इतनी ज़रा सी बात पे रोने वाली लड़कियाँ नहीं थीं। इसलिये मैंने अगले दिन खुद सुहाना और उसकी सहेली फ़ातिमा को खाली पीरियड में अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछा कि प्रॉब्लम क्या है।

वो बोली, “कुछ नहीं तबस़्सुम मैम… सब ठीक है!”

“मुझसे झूठ मत बोलो”, मैंने कहा, “उस दिन भी मैंने तुम्हें इसी तरह बस से रोते हुए उतरते देखा था और फ़ातिमा तुम्हें कह रही थी कि हम कल तबस़्सुम़ मैम को ये बात बतायेंगे और वो उनकी खबर लेंगी! मुझसे छुपाओ मत और खुल के बताओ कि प्रॉब्लम क्या है?”

इस पर सुहाना फूट-फूट कर रोने लगी। तब फ़ातिमा बोली, “त़बस्सुम मैम मैं आपको बताती हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी भीड़ होती है और हमें पीछे खड़े हो कर जाना पड़ता है!”

“हाँ! हाँ!” मैंने कहा।

“तो मैम प्रॉब्लम ये है कि पिछले एक महीने से वो हमारी क्लॉस के मुस्टंडे… वो बास्केटबॉल प्लेयर्स… वो फेल्यर्स… हमें बस में रोज़ तंग करते हैं। हम लड़कियों का उन्होंने बस में सफ़र करना मुश्किल कर दिया है! कभी तो वो हमारे लोअर बैक में उंगली डालते हैं तो कभी हमारी ब्रेस्ट पर चुँटी काटते हैं! कल तो उन्होंने हद ही कर दी। कल उन चारों ने हमें कस कर पीछे से पकड़ लिया और ज़ोर से हमारी ब्रेस्ट्स मसल दी!” वो बोली.

“क्या उनकी ये हिम्मत! मैं आज ही उनकी शिकायत प्रिंसपल से करती हूँ और खुद भी उनकी अच्छी पिटाई करुँगी… और ये सब तुमने पहले क्यों नहीं बताया… और बाकी लड़कियों ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?” मैं बोली।

“नहीं-नहीं त़बस्सुम मैम… आप प्लीज़ ये बात किसी से ना कहियेगा वरना सब हम पर हसेंगे और हमारी स्कूल में बदनामी होगी और मज़ाक बनेगा। आप चाहें तो उनकी पिटाई कर दीजिये पर ये बात आप उनसे भी ना कहियेगा कि हमने बताया है वरना वो हमें और तंग करेंगे या फिर बदनाम करेंगे!” वो बोली।

“ठीक है, मैं देख लूँगी!” मैंने कहा। उस दिन उस क्लॉस में जाते ही मैंने उन चारों को खड़ा कर लिया और बिना कुछ बताये उनको जमकर थप्पड़ लगाये कि मेरे हाथ दुखने लगे और उनके गालों पर मेरे थप्पड़ों की वजह से निशान पड़ गये। जब उन्होंने पूछा कि “अख़तर मैम आप हमें क्यों मार रही हैं?” तो मैंने कहा, “तुम्हें बस में सफ़र करने की तमीज़ सिखा रही हूँ!” और वो चारों सिर झुका कर खड़े हो गये।

उस वाकिये के बाद कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन फिर वो लड़कियाँ मेरे पास आयी तो मैंने उनसे पूछा, “अब क्या हुआ… अब तुम किस बात पर परेशान हो? क्या वो तुम्हें अभी भी तंग करते हैं?”

इस पर वो मुझे बोलीं, “त़बस्सूम मैम आपने जब उनकी पिटाई की थी तो कुछ दिन तक सब ठीक रहा लेकिन पिछले दो दिन से वो फिर से हमें तंग कर रहे हैं!”

“लगता है अब प्रिंसपल से बात करनी ही पड़ेगी।” मैं बोली।

“प्लीज़ प्लीज़ तबस्सुम मैम आप प्रिंसपल से कुछ मत कहियेगा… ये बात अगर फ़ैल गयी तो हमारा मज़ाक उड़ेगा! हमारा स्कूल आना मुश्किल हो जायेगा!” वो गिड़गिड़ायीं।

“तो ठीक है… आज मैं तुम लोगों के साथ बस में खड़ी रहुँगी। अगर उन्होंने कुछ किया तो में उनकी वहीं पिटाई करूँगी!” मैंने गुस्से में तमतमाते हुए कहा।

उस दिन मैंने क्लॉस में फिर उन चारों की पढ़ाई और होमवर्क ना करने के बहाने से पिटाई की और छुट्टी के बाद बस में लड़कियों के साथ पीछे खड़ी हो गयी। जब मेरी साथी टीचरों ने पूछा तो मैंने कहा कि मैं स्टूडेंट्स के साथ मिक्स-अप होने की कोशिश कर रही हूँ ताकि ये मुझसे इतना ज़्यादा ना डरें।

उस दिन सब ठीक रहा। मैं उनके साथ तीन-चार दिन बस में खड़े हो कर सफ़र करती रही। वो चार बदमाश हमारे पीछे ही खड़े रहते थे लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ कर सकें। फिर कुछ दिन बाद मैं फिर आगे बैठने लगी। दो ही दिन बाद वो लड़कियाँ फिर मेरे पास वही शिकायत ले कर आ गयीं। उस दिन मैं फिर पीछे खड़ी हो कर सफ़र करने लगी।

दो-एक दिन तक सब ठीक था लेकिन फिर एक दिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई चीज़ मेरे पीछे मेरे चूतड़ों के बीच घुसा दी हो। मैं एक दम काँप गयी। मेरा पूरा जिस्म ठंडा पड़ गया। मेरे शौहर को गुज़रे हुए सात-आठ महीने हुए थे और इस दौरान मैंने अपनी जिस्मनी ख्वाहिशों को बिल्कुल दबा कर रखा था।

कभी-कभार रात को अपनी उंगलियों से अगर खुद-लज़्ज़ती कर भी लेती थी तो तसव्वुर हमेशा अपने मरहूम शौहर का ही होता था। मैं बेहद पाक और नेक तरबियत वाली औरत थी। वैसे तो मैं गोरी-चिट्टी बेहद खूबसूरत और स्लिम और सैक्सी हूँ और अपने शौहर के साथ बेहद एक्टिव और अच्छी सैक्स लाईफ़ थी मेरी।

लेकिन मेरे शौहर के अलावा किसी गैर-मर्द ने मुझे कभी छुआ तक नहीं था और ना ही मैंने कभी उनके अलावा किसी को ऐसी नज़र से देखा था। लेकिन उस पल मुझे जैसे बिजली का झटका लगा। इतने महीनों में पहली मर्तबा मैंने किसी को अपने जिस्म के एक नाज़ुक हिस्से के अंदर शरारत करते हुए महसूस किया था।

मेरी टाँगें कमज़ोर हो गयीं और हाई हील सैंडल में मेरा बैलेंस बिगड़ने लगा। एक लम्हे के लिये मेरे होश उड़ गये… चेहरे का रंग एक दम फ़ीका पड़ गया… गला सूख गया… मैं लड़खड़ा कर गिरने लगी लेकिन फिर बस की सीट पर लगे हैंडल को पकड़ कर अपने आप को संभाला। मेरे हाथ काँप रहे थे। उन लड़कियों ने पूछा, “तवस्सुम मैम आप ठीक तो हैं?”

“हाँ मैं ठीक हूँ”, मैंने कहा लेकिन मेरे चेहरे के उतरे रंग को देख कर मेरी साथी टीचरों ने जब यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि शायद मुझे बुखार हो रहा है। उस दिन रात को देर तक मुझे नींद नहीं आयी। पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों के बीच वो चीज़ सरकती महसूस होती रही। उस एहसास ने मेरे अंदर दबी हुई चिंगारी को जैसे हवा दे दी थी। मैंने उस रात करीब तीन मर्तबा अपनी उंगलियों से मैस्टरबेशन किया।

मैं अगले दो दिन स्कूल भी नहीं गयी और बिमार होने का बहाना कर दिया। जिस दिन मैं स्कूल गयी भी तो उस दिन बस में मैं आगे अपनी सीट पर जा कर चुपचाप बैठ गयी। वो लड़कियाँ उतरे से चेहरे के साथ मेरी जानिब देखती रही। मुझे टीचरों ने भी पूछा, “आज आपने स्टूडेंट्स के साथ खड़े नहीं होना क्या? क्या बात है? सब ठीक तो है ना तब्बू मैम?” सब टीचर्स मुझे त़ब्बू कह कर बुलाती थीं।

“सब ठीक है… बस थोड़ी वीकनेस लग रही है”, मैंने बहाना किया। अगले दिन वो लड़कियाँ फिर मेरे पास आयी और मुझसे बोली, “तबस्सुम मैम आपको क्या हुआ? मैम जब आप हमारे साथ खड़ी नहीं होती हैं तो वो लोग हमें फिर तंग करना शुरू कर देते हैं! मैम आप प्लीज़ हमारे साथ पीछे खड़ी हो जाया कीजिये… प्लीज़!”

मैंने कहा, “अच्छा ठीक है!” और वो चली गयी लेकिन मैं पूरा दिन टेंशन में रही और उस दिन का वाक़या याद करती रही। छुट्टी के बाद किसी तरह हिम्मत जुटा कर मैं पीछे जा कर खड़ी हो गयी। तकरीबन पूरा सफ़र आराम से कट गया और मैं भी इत्मिनान से हो गयी थी.

लेकिन मेरा स्टॉप आने से तीन-चार मिनट पहले ही किसी ने फिर पीछे से मेरे चूतड़ों में हाथ दे दिया और इस दफ़ा अच्छी तरह एक झटके में मेरे चूतड़ों के बीचों-बीच नीचे से सरकाते हुए ऊपर तक ले गया। मैं एक दम से पीछे पलटी तो सभी लड़के इधर-उधर देख रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि ये किसने किया है।

सुहाना और फ़ातिमा भी मेरे साथ ही खड़ी थीं। उन्होंने पूछा, “तब़स्सुम़ मैम सब ठीक है ना?” उन लड़कियों के पूछने के अंदाज़ में मुझे फ़िक्र की बजाय तंज़ महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे कि उन्हें पता था कि मेरे साथ किसी ने क्या हरकत की है। “हाँ!” मैंने जवाब दिया।

उस रात भी मैं ठीक से सो नहीं पायी। आज भी उन लड़कों की हरकत ने मेरे अंदर दबी हुई जिस्मानी हसरतें भड़का दी थी जो मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी। ये मेरे तहज़िबे-इख्लाक़ के खिलाफ़ था लेकिन अपने जिस्म में उठती मीठी सी सनसनाहट मुझे कमज़ोर कर रही थी।

अपनी अजीब सी जिस्मानी और ज़हनी हालत के लिये मुझे उन लड़कों पे बेहद गुस्सा आ रहा था। अगले दिन क्लॉस में जाते ही मैंने जानबूझ कर उन चारों से इंगलिश के ऐसे मुश्किल सवाल पूछे जिनका मुझे पता था कि वो नालायक जवाब नहीं दे सकेंगे और इस बहाने से उनकी खूब पिटाई की।

उस दिन शाम को बस में चढ़ते ही जब लड़कियों ने मुझे पीछे बुलाया तो मैं कॉन्फिडेंस के साथ उन लड़कों को घूरती हुई पीछे जा कर खड़ी हो गयी। अब इतनी पिटाई होने के बाद भला वो क्यों नहीं सुधरेंगे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही किसी ने मेरे चूतड़ों में फिर हाथ दे दिया।

जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो इस बार चारों ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुरा पड़े। मैं आगे देखने लगी। उन चारों में से दो लड़कों की उम्र तो करीब बीस साल होगी और चारों थे भी हट्टे-कट्टे। मेरी हाइट पाँच फुट पाँच इंच है और ऊपर से मैं हमेशा चार से पाँच इंच ऊँची पेन्सिल हाई हील की सैंडल ही पहनती हूँ तो भी मैं उनमें से सबसे बिगड़े लड़के कुल्दीप के कंधे तक ही पहुँचती थी जबकी सैंडल पहन के बाकी तीनों के करीब-करीब बराबर पहुँचती थी।

खैर कुछ पल बाद उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों में हाथ दिया तो इस दफ़ा मैं थोड़ा सरक कर आगे हो गयी। उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों हाथ दिया तो मैं थोड़ा और आगे सरक गयी। ऐसा चार-पाँच दफ़ा हुआ। आज भी पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों में उनके हाथ ही महसूस होते रहे और मैंने तीन-चार मर्तबा मैस्टरबेट किया।

मुझे बेहद शर्मिंदगी और गुनाह का एहसास हो रहा था। फ्रस्ट्रेशन और गुस्से में अगले दिन मैंने फिर किसी बहाने से उनकी पिटाई कर दी और क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। शाम को बस में उस दिन उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं। मैं बहुत खुश थी लेकिन तीन दिन बाद ही फिर बस में उन्होंने अचानक मेरी गाँड में हाथ डाला तो मैं चिहुँक कर झटके से थोड़ा आगे सरक गयी.

जिस से बस के मटैलिक फर्श पे मेरे हील वाले सैंडल के ज़ोर से बजने की आवाज़ भी हुई। हर रोज़ की तरह सुह़ाना और फ़ातिमा बारहवी क्लास की कुछ और लड़कियों के साथ मेरे पास ही खड़ी थी। फ़ातिमा ने मुस्कुराते हुए पूछा कि मुझे क्या हुआ तो मैंने कहा कि “कुछ नहीं…

बस खड़े-खड़े पैर सो गया था!” लेकिन अब मुझे गुस्सा आ गया था और मैंने ठान लिया कि अबकी बार मैं आगे नहीं सरकुँगी और देखती हूँ इनमें कितनी हिम्मत है। आखिर कब तक ये ऐसे ही उंगली देते रहेंगे। इस मर्तबा जब फिर से मेरे चूतड़ों में किसी ने हाथ दिया तो मैं वहाँ से नहीं हिली।

उसने दो-तीन दफ़ा फिर हाथ दिया तो भी मैं नहीं हिली। इस बार उसने हाथ मेरे चूतड़ों के बीच डाल कर वहाँ टिका कर ही रख लिया। मैंने भी अपनी रानें जोड़ कर चूतड़ों के बीच उसके हाथ को दबा लिया। कुछ देर तक ना वो हिला और ना मैं। जब मैंने गर्दन घुमा कर पीछे देखा तो उनमें से सब से ज्यादा बिगड़ा लड़का मेरे पीछे खड़ा था।

मेरे पीछे गर्दन घुमाने पर भी उसने हाथ नहीं हटाया बल्कि उसे मेरी टाँगों के बीच सरकाता हुआ आगे मेरी चूत तक ले गया और सलवार के ऊपर से उसे मसलने लगा। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। मेरी तो हालत खराब हो गयी और मेरी टाँगें काँपने लगीं।

मेरी आँखें बंद हो गयीं और मेरे पेट में बल सा पड़ा और मेरी चूत ने धड़धड़ाते हुए पानी छोड़ दिया। बड़ी मुश्किल से अपने होंठ दबाते हुए मैंने अपने मुँह से सिसकारियाँ निकलने से रोकीं। पहली मर्तबा इस तरह मैं पब्लिक प्लेस में झड़ी थी और वो भी स्टूडेंट्स से भरी हुई बस में। सच कहुँ तो मुझे बेहद अच्छा लगा और मेरे चेहरे का रंग तो ठीक हो गया लेकिन मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा था कि मेरी रानों के गिर्द सलवार बिल्कुल गीली हो गयी थी।

घर पहुँच कर बार-बार बस का सीन मेरे ज़हन में घूमता रहा। रात को बेडरूम लॉक करके मैं सारे कपड़े उतार के बिल्कुल नंगी हो गयी और वही सीन याद करते हुए दो दफ़ा अपनी चूत को उंगलियों से सहलाते हुए झड़ी। फिर भी जब चैन नहीं पड़ा तो ज़िंदगी में पहली दफ़ा गाजर चूत में घुसेड़ कर मैस्टरबेट किया।

इससे पहले सिर्फ़ उंगलियों से ही मैस्टरबेट किया था। बाद में ऐसे ही नंगी सो गयी लेकिन ख्वाब में भी मुझे वही बस में उस लड़के का बार-बार मेरी चूत और गाँड को रगड़ना और सहलाना ही याद आया और मैं सोते हुए भी अपनी चूत सहलाती रही। सुबह जब उठी तो मेरे हाथ टाँगों के बीच में चूत पे ही मौजूद थे।

अगले दिन क्लास में जब वो लड़के फिर से होमवर्क करके नहीं लाये तो पहली दफ़ा ना चाहते हुए भी मैंने उनकी पिटाई की क्योंकि शायद मैं ये जताना चाहती थी कि पिछले दिन बस में हुए वाकिये के बावजूद मेरा इख़्तियार बरकरार है। टीचर हूँ इसलिये रौब रखना भी ज़रूरी है… लेकिन मुझे दिल में बेहद अफ़सोस महसूस हुआ।

उस दिन बस में उनके करीब खड़ी थी लेकिन जब उन्होंने मुझे नहीं छुआ तो थोड़ी मायूसी हुई। लेकिन पता नहीं क्यों अब पहली बार मैं चाहती थी कि वो मुझे छुयें… मेरे चूतड़ों के बीच में हाथ डालें… मेरी चूत को सहलायें। इसी उम्मीद में मैं बस में पीछे उनके पास जाकर खड़ी होती लेकिन अगले दो-तीन दिन भी मेरे साथ ऐसी कोई हरकत नहीं की और उसके बाद फिर चार-पाँच दिन तो वो स्कूल ही नहीं आये।

मैं तड़प कर रह जाती और मायूस हो कर अपने स्टॉप पे उतर जाती। वो लड़के मेरे दिलो-दिमाग में बस से गये थे और ये हालत हो गयी थी कि रोज़ रात को उनके बारे में सोच-सोच कर बार-बार अपनी चूत सहलाती और गाजर से मैस्टरबेट करती। स्कूल में भी कईं दफ़ा उनका ख्याल आ जाता तो चूत गीली हो जाती.

और फिर अपने ऑफिस या टॉयलेट में जा कर खुद-लज़्ज़ती करती। मुझे पोर्नोग्राफी से नफ़रत थी लेकिन एक रात को मैंने पहली दफ़ा अपने लैपटॉप पे पोर्न-वेबसाईट तक खोल ली। इससे पहले मैंने कभी गंदी तस्वीरें या ब्लू-फिल्म नहीं देखी थी लेकिन उस रात और फिर अगली दो-तीन रातें मैंने घंटों तक अलग-अलग तरह की चुदाई की क्लिप्स का मज़ा लिया।

मेरे जिस्म में हवस की आग इस कदर भड़क गयी थी कि मेरे सारे इख़लाक़ और नेक तर्बियत उसमें जल कर ख़ाक हो रहे थे और कुछ ही दिनों में मेरी फ़ितरत और चाल-चलन में किस कदर बेइंतेहा तब्दीली आ गयी थी। फिर एक दिन काफी बारिश हो रही थी और स्कूल में बच्चे भी कम आये थे तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गयी।

उस दिन बस में भीड़ नहीं थी। मैं आसानी से कहीं भी खड़ी हो सकती थी लेकिन खुश नसीबी से मुझे वो लड़के पीछे खड़े नज़र आये तो मैं पीछे उन ही लड़कों के पास जा कर खड़ी हो गयी क्योंकि मैं तो दिल में ये ही चाहती थी कि वो मुझे छुयें। हमेशा की तरह सुहाना और फ़ातिमा भी वहीं मौजूद थीं।

मुझे पूरा शक हो गया था कि वो दोनों भी जानती थी कि लड़के मेरे साथ क्या फ़ाहिश हरकतें करते हैं। बस में भीड़ ना होने की वजह से वो मुझसे थोड़ा पीछे खड़े थे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही वो मेरे नज़दीक आ गये। बारिश की वजह से हाईवे पे काफी ट्रैफिक था और बस धीरे-धीरे चल रही थी।

मैं मोबाइल फोन पे किसी से बात करने में मसरूफ थी कि अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई लड़का एक दम मेरे साथ चिपक कर खड़ा हो गया हो। मैंने फोन कॉल बंद करते हुए पीछे देखा तो वो बोला, “अखतर मैम आप ज्यादा पीछे आ गयी हैं… थोड़ा आगे सरक सकती हैं!”

उस लम्हे मैंने गौर किया कि दरअसल मैं ही फोन पे बात करते हुए पीछे उन लड़कों तक सरक गयी थी। इसके अलावा मैंने देखा कि सुहाना और फ़ातिमा भी उनमें से दो लडकों से बिल्कुल चिपक के खड़ी थीं। मैंने उन लड़कियों की जानिब देखा तो वो मेरी जानिब देखते हुए मुस्कुराने लगीं।

तब मुझे एहसास हुआ कि हक़िकत में वो दोनों भी इन लड़कों से मिली हुई हैं और खुद उनसे उंगली करवा के मज़े लेती हैं। मैं भी झेंप कर थोड़ा सा आगे सरक गयी तो वो सब भी आगे सरक आये और एक लड़के ने हल्के से मेरी गाँड में हाथ दे दिया। मैं तो खुद इसी इंतज़ार में थी इतने दिन से और इस बार मैं भी थोड़ा पीछे सरक गयी ताकि उसका हाथ अच्छी तरह से मेरी टाँगों के बीच में घुस जाये।

मैंने अपनी रानों को थोड़ा-थोड़ा खोला और फिर बंद किया तो उस लड़के ने एक हाथ मेरी टाँगों के बीच में घुसा दिया और दूसरा हाथ वो मेरे चूतड़ों पे फेरने लगा। मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। मेरी तरफ़ से कोई मुखालफ़त ना देख कर शायद मेरी नियत का भी अंदाज़ा हो गया था।

फिर उसने मेरे कान में कहा, “तब़्बू मैम अगले स्टॉप पर पीछे की सीट खाली हो रही है… आप मेरे और मेरे दोस्त के बीच मैं बैठ जायें… बाकी दोनों लड़के और ये लड़कियाँ आगे अपनी हो जायेंगे ताकि किसी को आगे से पता ना चले!”

मैं कुछ नहीं बोली। ये लड़के हमेशा मुझे अख़्तर या तबस़्सुम़ मैम कह कर बुलाते थे लेकिन आज बाकी स्टॉफ की तरह तब्बू मैम कह कर उस लड़के ने मुझसे बात करी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और चूत गिली हो चुकी थी। बारिश की हल्की सी ठंडक मेरे जिस्म की गर्मी में और इज़ाफ़ा कर रही थी।

हवस ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि अगर वो वहीं मुझे नंगी करके चोदना भी शुरू कर देते तो शायद मैं उन्हें मना नहीं करती। उस वक़्त मुझे अपनी इज़्ज़त-आबरू… हैसियत और सोसायटी में रुसवाई या बदनामी… किसी बात की ज़रा सी भी परवाह नहीं थी। मैंने देखा कि वो दोनों लड़कियाँ असल में मजे से दूसरे दो लड़कों का हाथ अपनी स्कूल युनीफॉर्म की ट्यूनिक के अंदर अपनी टाँगों के बीच में ले रही थी।

वो मेरी जानिब देख कर बेहयाई से मुस्कुराने लगीं। तब मेरे पीछे वाले लड़के ने मेरे कान में कहा, “ये दोनों तो अक्सर हम चारों चुदती हैं… तब्बु मैम आप इनकी परवाह ना कीजिये… इनका काम अब पूरा हो गया… अब इन्हें अगले संडे मजे से चोदेंगे… आज आपका नम्बर है!”

मैं उसकी हिम्मत पे हैरान थी कि किस तरह खुल कर गंदे लफ़्ज़ों में वो अपनी टीचर के साथ चुदाई की बातें कर रहा था। उसकी गंदी बातें सुनकर मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लगा। मैं कुछ नही बोली और चुप रही। मैं तो खुद अपनी हवस की आग में अंधी हो गयी थी और अपनी इज़्ज़त लुटाने के लिये खुद ही तड़प रही.

अगले स्टॉप पर पीछे वाली सीट खाली हुई तो मेरे पीछे वाला लड़का दायीं तरफ़ बैठ गया और मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गयी। दूसरा लड़का मेरी बांयी तरफ़ बैठ गया। बाकी दोनों लड़के और वो लड़कियाँ हमारे आगे खड़ी हो गयीं। बस चलने लगी तो मेरी बगल वाले लड़कों को जैसे खुली छूट मिल गयी मेरे साथ खेलने की… मेरे खज़ाने लूटने की।

दायीं तरफ़ वाले लड़के ने एक बाँह मेरे सर के पीछे सीट पर पसार दी और दूसरे हाथ को मेरी नरम और हवस की वजह से गरम दाहिनी रान पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। बांयी तरफ़ वाला लड़का मेरी बांयी रान को सहलाने लगा। मेरी साँसें एक दम से और तेज़ और गरम हो गयीं और मेरा सर हल्का-हल्का महसूस होने लगा।

मैं मदहोश सी हो गयी थी। मैंने आँखें बंद कर लीं। दोनों लड़कों ने अपने हाथ मेरी रानों पर ऊपर की जानिब सरकाये और मेरी कमीज़ के पल्ले के नीचे से सरकाते हुए मेरे पेट की तरफ़ बढ़ा दिये। तभी एक लड़के ने अपने हाथ को मेरी रानों के बीच मेरी चूत की जानिब सरकाने की कोशिश की तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकरी छूट गयी.

और मैंने अपनी दोनों टाँगों को ज़ोर से आपस में जोड़ लिया और अपने हाथों से उन लड़कों के हाथों को पकड़ लिया और मेरे मुँह से ज़ोर से एक साँस अटकती हुई निकली। इस पर मेरी दांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर ज़ोर से से चूम लिया और मेरे होंठ चूसने लगा।

मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी हो। मेरे होश उड़ गये और मेरा सर बिल्कुल हल्का हो गया। मेरा जिस्म काँपने लगा और वो मेरे होंठ चूसता रहा। मेरे शौहर ने भी कभी मेरे होंठों को चूमते हुए इस तरह नहीं चूसा था। ये मेरी ज़िंदगी का पहला माकूल फ्रेंच-किस था।

उसने मेरे सर के पीछे वाले अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ कर हमारे होंठों को कस कर सी लिया और उसी पल मेरी बांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने दूसरे हाथ से मेरी छाती पकड़ ली और कमीज़ के ऊपर से ही मेरे बूब्स मसलने लगा। मेरी साँसें फूलने लगी और मैं अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ कर रोकने लगी.

तो दोनों लड़कों ने मेरी रानों को सहला रहे दूसरे हाथों से हल्का सा ज़ोर लगा कर मेरी टाँगों को खोल दिया और दांयी तरफ़ वाले लड़के ने तपाक से अपना हाथ मेरी सलवार के ऊपर से मेरी चूत पे रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। कुछ ही देर में मेरे पेट में अकड़ाव पैदा हुआ और फिर एक ज़ोर का झटका लगा और मेरी चूत में फ़ुव्वारे फूटने लगे।

मैं झड़ चुकी थी और मेरी पैंटी और उसके आसपास की सलवार भी भीग गयी। मैं झड़ी तो उस लड़के ने मेरे होंठ चूसने बंद कर दिये और मेरी साँसें भी ठीक हो गयीं। फिर दूसरा लड़का मुझे फ्रेंच-किस करने लगा तो पहले वाला बोला, “वाह यार मज़ा आ गया… आज तो अंग्रेज़ी वाली को अच्छे से चूसा है और अब अच्छे से चोदेंगे भी! साली मारती बहुत ज़ोर से है… आज उतने ही ज़ोर से हम इसकी मारेंगे!” और फिर वो बारी-बारी मुझे चूमने लगे।

थोड़ी देर बाद जो लड़के हमारे सामने खड़ी उन लड़कियों की गाँड में उंगली कर रहे थे उन्होंने कहा, “चलो बहुत हुआ… अब हमें भी तो त़बस्सूम मैडम का थोड़ा मज़ा लेने दो… तुम इधर आ कर इन लड़कियों के मम्मों को थोड़ा मसल दो… ये भी बहुत गरम हैं आज बरिश की ठंडक में!”

फिर उन चारों ने जगह बदल ली। अब दूसरे दोनों लड़के मेरे अगल-बगल बैठ कर मुझे किस करने और मेरे मम्मे और चूत को सहलाने लगे। फिर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू किया तो मैंने अपने दोनों हाथों से नाड़ा पकड़ लिया। फिर दोनों लड़कों ने मेरे दुपट्टे के नीचे से मेरी कमीज़ के गले में से हाथ डाल कर मेरे एक-एक मम्मे को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगे।

मैं पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी और मैंने अपने हाथ दोनों की एक-एक रान पर रख दिये और उनके किस के बदले में उन्हें किस करने लगी। बेहद अजीब पर मजेदार चुंबन थे। बार-बार वो मेरे होंठ चूमते हुए अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल रहे थे। चारों लड़कों ने शायद पोलो-मिन्ट काफी खा रखी थी इसलिये उन्हें किस करते हुए मुझे मीठा-मीठा लग रहा था।

तभी मौका पाकर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल ही दिया और मेरी सलवार और भीगी पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने भी अपनी गाँड सीट से ऊपर उठा दी और उसे मेरी सलवार और पैंटी मेरे घुटनों के नीचे तक खींच दी।

फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डाल कर गीला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर-ऊपर घुमाने लगा। हाय अल्लाह! मैं तो पागल सी हो गयी और मेरे मुँह से तेज़-तेज़ आहें निकलने लगी। बच्चों से भरी स्कूल की बस में अपनी नंगी चूत खोले मैं अपने ही स्टूडेंट से उसमें उंगली करवा रही थी। इस एहसास ने मेरी गरमी और बढ़ा दी और मैं कुछ ही पलों में फिर झड़ गयी। मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी ओर सलवार को ऊपर कर दिया और मेरा नाड़ा दोबारा बाँध दिया।

फिर वो बोला, “तबस़्सुम़ मैम अगर आपको चुदाई का पूरा मज़ा लेना है तो आप घर फोन कर दीजिये कि आप अपनी किसी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जाओ! ये संजय पास ही अपने घर से कार ले आयेगा… हम इसके खेत पे चलते हैं ऐश करने के लिये…. बाद में शाम को हल्का सा अंधेरा होते ही अपको आपके घर के करीब छोड़ देंगे!”

मैंने थोड़ा शरमाते हुए गर्दन हिलाकर रज़ामंदी ज़ाहिर की। मेरे अब्बू और अम्मी एक हफ़्ते के लिये अजमेर गये हुए थे एक रिश्तेदार की शादी में लेकिन मैं इन लड़कों को ये ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी इसलिये अपने पर्स में से मोबाइल निकाल कर झूठमूठ एस-एम-एस करने का नाटक किया। इतने में जब उनका स्टॉप आ गया तो मैं उनके पीछे-पीछे वहीं उतर गयी। बस में आगे बैठी एक टीचर ने पूछा, “अरे तब़्बू… तुम कहाँ छुपी बैठी थी और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?”

मैंने कहा, “मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ… कई दिनों से मिली नही उससे और आज किस्मत से जल्दी छुट्टी हो गयी तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ…. और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा था… इसलिये पीछे की सीट पर लेट कर थोड़ा सो गयी थी!”

“अरे तू अभी कुछ दिन पहले भी तो बीमार हो गयी थी! तेरी अम्मी से बोलुँगी कि अपनी बेटी को कुछ अच्छा खिलाया करो… स्लिम और खूबसूरत दिखने के चक्कर में कैसे सूख के मरी जा रही है!” उनमें से सबसे उम्र-दराज़ टीचर जो मेरी अम्मी को जानती थी वो बोली।

“जी सकीना आँटी ज़रूर बता देना… पर मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हूँ… आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुस्टंडों की पिटाई करते देखना… फिर पता चलेगा आपको!” मैं हंसते हुए बोली और बस से उतर गयी।

बस से उतरी तो बारिश रुक गयी थी। मैं पीछे की जानिब चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गयी और एक तन्हा जगह पर जा कर खड़ी हो गयी। हवस में मैं इतनी बहक गयी थी कि उस वक़्त एक मर्तबा भी मुझे किसी तरह की शर्मिंदगी या बद-अखलाक़ी का एहसास नहीं हुआ।

मेरी शरमो-हया और सारी सक़ाफ़त और अखलाक़ियत हवस की आग में फ़ना हो गयी थी। धड़कते दिल के साथ मैं बेकरारी से उन लड़कों के आने का इंतज़ार कर रही थी। जिस्म की आग ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि एक दफ़ा भी ख्याल नहीं आया कि मैं कोई गुनाह करने जा रही हूँ और इस बदकारी का क्या नतीजा होगा।

मेरी टाँगें काँप रही थी और चूत गिली हो रही थी और इक्साइटमेम्ट में निप्पलों में भी सनसनाहट महसूस हो रही थी। कुछ ही देर में एक काले शीशों वाली टाटा सफ़ारी आ कर मेरे सामने रुकी और उसका पिछली सीट वाला दरवाजा खुला। उसमें से मेरा एक स्टूडेंट नीचे उतरा और बोला, “अंदर आ जाओ तब़्बु मैडम!”

अंदर पीछे की सीट पर एक लड़का बैठा था जबकि दो लड़के आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुसकर बैठने लगी तो अंदर बैठे दूसरे लड़के ने मुझे कमर से पकड़ कर ज़ोर से अपनी गोद में खींच लिया। दूसरे ने भी फ़ौरन अंदर बैठते ही गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया और गाड़ी चल पड़ी।

जिस लड़के की गोद में मैं बैठी थी उसने अपना एक हाथ मेरी बगल में से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया और मेरे मम्मे ज़ोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी रानों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा। दूसरे लड़के ने मेरे ऊँची पेन्सिल हील वाली सैंडल वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टाँगों को अपनी जानिब खींच लिया।

अब मेरी टाँगें उसके अगल बगल थीं और वो मेरी टाँगों के बीच। “साली रंडी! कुत्ती! क्लास में बहुत मारती है ना… आज तेरी गाँड ना फाड़ दी तो हमारे नाम बदल देना!” ये कहते ही वो मेरी चूत को ज़ोर से मसलने लगा। दूसरे वाले ने झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठों से सी लिया और मेरे निचले होंठ को काटने लगा और मेरे मम्मों को मसलने लगा।

तभी आगे बैठा लड़का बोला, “यार दारू के ठेके पे रोकना पहले… दारू पी के तब्बू मैडम जी को चोदने में और मज़ा आयेगा!”

“हाँ यार… इस साली तब़्बू को भी पिलायेंगे तो ये भी खुल के चुदवायेगी….!” दूसरा बोला। स्कू

ल की बस में तो चारों लड़के फिर भी मुझसे इज़्ज़त और अदब से बात कर रहे थे लेकिन अब उनका लहज़े में अचानक तब्दीली आ गयी थी और बेहद बद-तमीज़ी से पेश आ रहे थे। ‘मैम’ या ‘मैडम’ कहते हुए भी उनका लहज़ा तंज़िया था। इधर एक लड़के ने ज़ोर से अपने दाँत मेरी कमीज़ में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले हिस्से पर गड़ा दिये।

मेरे मुँह से चींख और सिसकरी एक साथ निकली। उस एक लम्हे में मुझे दर्द और मज़े का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मुझे लगा कि मैं उसी लम्हे झड़ जाऊँगी लेकिन झड़ी नहीं। वो दोनों मिल के मुझे मसल रहे थे…. चूम रहे थे… काट रहे थे और मेरे होंठों से मुसलसल सिसकारियाँ निकल रही थी। इतने में कार हाइ-वे पे एक शराब के ठेके पे रुकी तो उन्होंने मुझे अपने बीच में सीधी कर के बिठा लिया।

आगे ड्राइविंग सीट वाला संज़य उतर कर ठेके पे चला गया। इतनी देर मेरी अगल-बगल बैठे दोनों लड़के मुझे दोनों तरफ से चूमते रहे और मेरे मम्मे और रानें सहलाते रहे। मैं भी मस्त होकर उनकी युनिफॉर्म की ग्रे पैंट के ऊपर से उनके लंड मसलते हुए महसूस करने लगी।

इतने में संजय शराब की बोतल लेकर आ गया। आगे बैठा दूसरा लड़का बोला, “यार गिलास तो हैं नहीं कार में… खेत पे जा के ही दो-दो पैग खींचेंगे!”

ये सुनकर मेरी बगल में बैठा एक लड़का हंसते हुए बोला, “यार तब़्बु मैम को क्यो इंतज़ार करवा रहे हो… लाओ इन्हें तो बोतल से ही पिला दें थोड़ी… तो खेत पे पहुँचने तक इसकी शरम तो खुल जाये…!”

ये सुनकर मैं इंकार करते हुए बोली, “नहीं.. नहीं… मैं शराब नहीं पीती… तुम चारों को पीनी हो तो पियो… मैं नहीं पियुँगी!”

“अरे तब्बू मैम… पी कर तो देखो… जब थोड़ा नशा होगा तो चुदाई में खूब मज़ा आयेगा….!” मेरे बगल में बैठा एक लड़का बोतल खोलते हुए बोला और मेरे होंठों से लगाने लगा तो मैंने मुँह फेरते हुए फिर इंकार किया, “नहीं… मुझे नहीं पीनी… पहले कभी नही पी मैंने…!”

“अरे रंडी तब़्बू साली… पहले नहीं पी तो आज पी ले… अपने स्टूडेंट्स के साथ चुदाने भी तो पहली बार आयी है कि नहीं… या फिर और दूसरे स्टूडेंट्स से चुदवाया है पहले!” उनमें से एक लड़का बोला और सब हंसने लगे। “थोड़ी सी पी लो तबस़्सुम़ मैम… कुछ नहीं होगा… हम चारों के नाम के दो-दो घूँट भर लो बस… फिर अच्छी नहीं लगे तो और ज़ोर नहीं देंगे!” आगे ड्राइविंग सीट से संजय बोला।

वो लोग मानने वाले तो थे नहीं और जब फिर से उस लड़के ने बोतल मेरे मुँह से लगा दी तो पता नही क्यों मैंने और मुज़ाहमत नहीं की और एक बड़ा सा घूँट भर के हलक के नीचे उतार लिया। मेरे हलक और पेट में इस क़दर जलन हुई कि मेरा दम घुटने लगा और मैं खाँसने लगी। मेरी बगल में बैठा एक लड़का मेरी कमर सहलाते हुए बोला, “बस बस त़ब्बू मैडम जी… अभी ठीक हो जायेगा… पहली बार पी रही हो ना इसलिये…!”

फिर कुछ ही लम्हों में मेरी साँसें नॉर्मल हो गयीं और जलन भी खतम हो गयी तो उन्होंने ये कहते हुए फिर बोतल मेरे मुँह से लगा दी कि इस बार मुझे अच्छी लगेगी और तकलीफ भी नहीं होगी। जब मैंने दूसरा घूँट पिया तो उतनी जलन नहीं हुई और ऐसे ही उन्होंने इसरार करते हुए ज़बरदस्ती आठ-दस घूँट पिला दिये।

कुछ ही देर में मुझे बेहद खुशनुमा सुरूर महसूस होने लगा और मैं उन लड़कों के बीच में बैठी हुई झूमने लगी। इतने में उस लड़के का खेत आ गया जो ज्यादा दूर नहीं था। बारिश तो पहले ही बंद हो चुकी थी लेकिन काले बादल अभी भी छाये हुए थे।

काले बादलों के बीच में से सूरज की हल्की गुलाबी सी रोशनी क़ायनात को रंगीन बना रही थी। उनके खेत में पानी की मोटर के साथ एक छोटा सा कमरा था। उसके बाहर तीन-चार मजदूर बैठे थे। आगे वाले एक लड़के ने गाड़ी से उतरते ही उनसे कहा, “ओये! आज तुम सबकी छुट्टी है… तुम सब घर जाओ अभी!”

“जी बाबू जी!” ऐसा बोल कर वो सब मजदूर जाने के लिये उठे।

इतने में गाड़ी के पीछे वाली सीट का दरवाजा खोल कर एक लड़का मुझे गोद में उठाये बाहर निकला।

“अरे ये तो वो आपके स्कूल वाली मास्टरनी है ना! वो शुगर मिल वाले खुर्शीद साहब की लौंडी? इसको चोदने लगे हो बाबू…. आपने तो राम कसम हमारा दिल खुश कर दिया! ऐसी मक्खन जैसी चिकनी गोरी कहाँ मिलेगी और वो भी अपनी ही मास्टरनी! जियो बाबू जियो! और खूब जम कर चोदना! रंडी बना देना आज साली को! और तू घबरा मत मास्टरनी हम किसी से नहीं कहेंगे कि तू इस मोटर पर किनसे चुदी है!” एक मजदूर बोला।

“अच्छा अच्छा… अब तुम जल्दी जाओ यहाँ से!” एक लड़का बोला।

“जाते हैं बाबू जी! पर एक तकलीफ़ होगी आपको! मोटर पर जो चारपायी है ना वो टूट गयी थी इसलिये बनने के लिये गयी हुई है… आपको इसे अंदर कमरे में जो सूखे चारे का ढेर पड़ा है उसी पर चोदना पड़ेगा!” वो मजदूर जाता-जाता बोला।

उस एक लम्हे के लिये मुझे एहसास हुआ कि आज मैं कितनी बिगड़ गयी हूँ और मुझे अपने पर थोड़ी सी शरम भी आयी और थोड़ी घबराहट भी महसूस हुई। लेकिन अगले ही लम्हे चार-चार जवान लड़कों से एक ही साथ खेत में सूखे चारे के ढेर पर चुदने के खयाल से मेरी हवस और ज़्यादा बढ़ गयी।

इतने में वो लड़का मुझे गोद से नीचे उतार चुका था। मैं खुद ही मोटर के साथ बने कमरे की जानिब झूमती हुई चलने लगी। एक तो मैंने ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे और फिर शराब का सुरूर भी था तो ज़ाहिर है मेरे कदम ज़रा लड़खड़ा से रहे थे। कमरे के दरवाजे के पास पहुँच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो चारों लड़के मेरी जानिब देख कर हंस पड़े।

“बड़ी जल्दी है भई हमारी तब़स्सुम़ मैडम को चुदने की आज तो… फिर शुरू हो जाये!” एक ने कहा और सभी हंस पड़े।

“हाँ-हाँ जल्दी चलो!” दूसरा बोला।

“अरे पहले तब्बू मैम से तो पूछ लो के हम से चुदना है कि नहीं!” तीसरा बोला।

“क्यों त़बस्सूम मैडम चुदोगी हमसे?” एक ने सवाल किया।

अब तक शराब के सुरूर में मैं बिल्कुल बेशरम हो चुकी थी। मैंने मुस्कुराते हुए अपने टीचर वाले कड़क अंदाज़ में कहा, “तो अब क्या ये भी दो-दो थप्पड़ मार के तुम नालायकों को समझाना पड़ेगा…!”

उनमें से एक लड़के ने डॉयलॉग मारा, “हाय तब़स्सुम़ मैडम जी… मार लो थप्पड़ भी मार लो… हमें आपके थप्पड़ से डर नहीं लगता… आपकी सैक्सी अदाओं से लगता है!” और सब हंसने लगे और मुझे भी उसकी बात पे ज़ोर से हंस पड़ी।

“चलो यरों! हरी झंडी मिल गयी”, एक लड़का बोला।

फिर वो मुझे लेकर कमरे में घुस गये और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और एक मद्धम सी रोशनी वाला बल्ब चालू कर दिया। उनमें से एक लड़के ने आ कर पीछे से मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दबोच लिया और मेरे गाल और गर्दन को पीछे से चूमने लगा और मेरे चूतड़ दबाने लगा। मेरे होंठों से सिसकरी निकलने लगी। इतने में दूसरे लड़के ने आगे से मुझे दबोच लिया और मेरे मम्मे और तने हुए निप्पल मसलने लगा।

मुझे उसकी पैंट में से उसका तना हुआ लौड़ा अपनी नाफ़ के नीचे चुभता हुआ महसूस हुआ और वैसे ही अपनी कमर के नीचे चूतड़ों के बीच में भी पीछे वाले का लौड़ा महसूस हो रहा था। पीछे वाला लड़का कपड़ों के ऊपर से ही अपने लंड से मेरी गाँड में धक्के मारने लगा तो मैंने भी तड़पते हुए अपने चुतड़ उसके लौड़े पे दबा दिये।

“अरे देखो यार… साली तबस़्सुम मैडम को कितना मज़ा आ रहा है… क्यों री चूतमरानी… बोल मज़ा आ रहा है कि नहीं!” तीसरा लड़का बोला।

मैं कुछ नहीं बोली तो एक लड़का जोर से बोला, “बोल ना साली चूत… शरमा क्यों रही है… खुल के बता मज़ा आ रहा है कि नहीं…?”

मैंने गर्दन हिलाते हुए धीरे से कहा, “हाँ! हाँ! अच्छा लग रहा है!” और आगे वाले लड़के की गर्दन में बाँहें डाल दी।

फिर मेरे आगे खड़े लडके ने मेरी कमीज़ का दामन उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और बाकी दोनों लड़के बैठ कर मेरी पेंसिल हील वाले सैंडल खोलने लगे क्योंकि मेरी टाइट चुड़ीदार सलवार बिना सैंडल खोले उतारना मुमकिन नहीं होता। सैंडल खुलते ही उन्होंने मेरी सलवार पैरों तक खिसका दी और पहले एक ने मेरा पैर उठा कर सलवार मेरे पैर से निकाली और फिर दूसरे ने दूसरे पैर से मेरी सलवार निकाल दी।

उसके बाद दोनों ने फिर मेरे सैंडल दोबारा पहना कर स्ट्रैप के बकल लगा दिये। मेरे आगे और पीछे मुझसे से चिपक कर खड़े दोनों लड़के अभी भी मुझे चूमते हुए मेरे जिस्म पे हाथ फिरा रहे थे। मैं बिल्कुल मस्त होकर सिसकारियाँ भर रही थी और अपनी गाँड आगे पीछे हिलाते हुए उनकी युनिफॉर्म की पैंटों में तने हुए लौड़ों पर दबाने लगी।

फिर एक लड़का बोला, “अरे अखतर मैम… इतनी बेसब्री क्यों हो रही हो… बहुत टाईम है हमारे पास… हम कहीं भागे नहीं जा रहे… ज़रा ढंग से ऐश करेंगे…!” और अचानक दोनों लड़के मुझसे अलग हो गये।

एक लड़का भाग के गाड़ी में से शराब की बोतल ले आया और उन्होंने जल्दी से कमरे में पड़े गिलासों में शराब और पानी डाल कर पाँच पैग तैयार लिये। चारों ने एक-एक गिलास उठया और मुझे भी एक गिलास पकड़ा दिया और फिर चारों लड़के मेरे गिलास से अपने गिलास टकराते हुए ज़ोर से ‘चियर्स’ बोले।

मैं तो अब तक पुरी तरह मस्त हो चुकी थी और मैंने भी चियर्स कह के गिलास अपने होंठों से लगा लिया और पीने लगी। इस बार तो शराब में पानी मिला होने की वजह से उसका ज़ायका बिल्कुल बुरा नहीं लगा।

उनमें से एक लड़का बोला, “अरे यार सुरिंदर! अपने फोन पे कोई गरमा-गरम ऑइटम साँग तो बजा यार… आज तब्बू मैडम का मुजरा देखेंगे पहले!”

ये सुनकर मैं चौंकते हुए बोली, “नहीं… नहीं… पागल हो गये हो क्या…. मुझे नाचना नहीं आता!”

“अरे तब़्बू मैडम! क्यों नखरा कर रही हो! तुम क्या कटरीना या हिरोइन तब्बू से कम हो क्या… और गाने पे ठुमके लगाते हुए ज़रा अदा के साथ धीरे-धीरे नंगी ही तो होना है तुम्हें… वो क्या कहते हैं तुम्हरी अंग्रेज़ी में… स्ट्रिपटीज़!” उन्होंने कहा तो मैं उनकी बात मानने को राज़ी हो गयी।

चारों अपने-अपने गिलास लेकर ज़मीन पे बैठ गये और सुरिन्दर ने अपने स्मार्ट-फोन पे “चिकनी चमेली… छुप के अकेली… पव्वा चढ़ा के आयी…” लगा दिया। मैंने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और फिर बिना सलवार के सिर्फ़ कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील वाले सैंडल पहने एक आइटम-गर्ल की तरह अपने स्टूडेंट्स के बीच में नाचने लगी।

वो लोग “वाह-वाह” करने लगे। नाचते-नाचते मैं बारी- बारी से उनके करीब जाती और किसी को झुक कर चूम लेती तो किसी की टाँगों के बीच में पैर रख के लौड़े को सैंडल के पंजे से दबा देती। फिर एक लड़का खड़े हो कर मेरे साथ चिपक कर नाचने लगा और और मेरी कमीज़ की पीछे से ज़िप मेरी कमर तक खोल दी.

तो मैंने मुस्कुराते हुए उसे प्यार से धक्का मार के वापस बिठा दिया और नाचते हुए बड़ी शोख अदा से उन्हें तड़पाते हुए धीरे-धीरे अपनी कमीज़ उतारने लगी। कुछ ही लम्हों में मैं सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और हाई पेन्सिल हील के सैंडल पहने नशे में झूमती हुई अपने स्टूडेंट्स के सामने नाच रही थी।

चारों लड़के मस्त होकर पैंट के ऊपर से ही अपने लौड़े मसलने लगे। ये देख कर मैं भी और ज्यादा गरम हुई जा रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी ब्रा भी उतार के एक लड़के के चेहरे पर फेंक दी। इतने में गाना खतम हुआ तो सुरेंदर ने वही गाना फिर से चला दिया। मैंने अपने नंगे बूब्स उछालते हुए नाचना ज़ारी रखा।

उसके बाद मैंने अपनी गाँड मटकाते हुए धीरे-धीरे पैंटी अपनी टाँगों से नीचे खिसकानी शुरू की तो चारों लड़के आँखें फाड़े हवस-ज़दा नज़रों से मुझे देखने लगे। जब मैंने अपने पैरों से पैंटी निकाल के हवा में उछाली तो चारों उसे पकड़ने के लिये लपके लेकिन पैंटी उनमें से सबसे बिगड़े और बड़े लड़के कुलदीप के हाथ आयी।

वो फतेहाना अंदाज़ में इतराते हुए बैठ कर मेरी गीली पैंटी को सूँघने लगा। अब मैं सिर्फ़ ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल मादरजात नंगी उन लड़कों के बीच में नाच रही थी। मुझे अपने जिस्म पर बाल अच्छे नहीं लगते इसलिये मैं वैक्सिंग करके सिर के अलावा जिस्म के हर हिस्से को बालों से पाक रखती हूँ।

“अरे तबस़्सुम मैडम… साली तू तो मक्खन से भी ज्यादा चिकनी और गोरी है और तेरे गोल-गोल बूब्स कितने प्यारे हैं! इसकी चिकनी चूत भी कितनी गोरी है और गुलाबी है… आज तो मज़ा आ जायेगा इसे चोदने का! और गाँड भी कितनी सैक्सी है… आज साली रंडी की चूत फाड़ देंगे…! मैं तो रसीली गाँड भी मारुँगा साली तब़्बू मैडम की!”

ये सब तबसरे करते हुए चारों लड़के खुद भी अपनी स्कूल की युनिफॉर्म उतार के नंगे होने लगे। उनके नंगे जिस्म और खासतौर पे उनके तने हुए जवान लौड़े देख कर मेरी धड़कने तेज़ हो गयी और फरेफ्ता हो कर उनके लौड़े निहारने लगी। तने हुए चार नौजवान बे-खतना लौड़े मेरी हवस की आग बुझाने के लिये मौजूद थे।

चारों लौड़े मेरे मरहूम शौहर के लंड के मुकाबले काफी बड़े थे। उनमें से सबसे छोटा लंड कमज़ कम आठ इंच होगा और कुल्दीप का लंड तो दस-ग्यारह इंच से कम नहीं था। अचानक मुझे शराब का नशा पहले से बुलंद महसूस हो रहा था। ज़िंदगी में पहली दफ़ा जो शराब पी थी।

उनमें से एक लड़का बोला, “ऐसे आँखें फाड़े क्या देख रही हो त़ब्बू मैडम… ये चारों लौड़े आज तेरी जम के खूब चुदाई करेंगे कि तेरी सारी अकड़ निकल जायेगी… स्कूल में लड़कों की पिटाई करने का बहुत शौक है ना तुझे… आज इन लौड़ों से चुद के तेरी सारी फ्रस्ट्रेशन दूर हो जायेगी!”

“चल मैडम… पहले हमारे लौड़े तो चूस के चिकना कर…!” दूसरा लड़का मुझे नीचे बिठाने के मकसद से मेरे कंधे दबाते हुए बोला। चारों लड़के मुझे घेर के खड़े थे और जैसे ही मैं उनके बीच में उकड़ू बैठी तो एक लड़के ने अपना लंड मेरे चेहरे के आगे कर दिया। उसके लंड की चमड़ी में से बाहर झाँकती टोपी उसकी मज़ी से भीगी हुई थी।

मैं अपने शौहर का लंड कईं दफ़ा चूसती थी इसलिये मुझे इन लड़कों के लंड चूसने में कोई परहेज़ नहीं था। वैसे भी इस वक़्त मैं शराब और हवस के नशे में इस कदर मखमूर थी कि कुछ भी नागवार नहीं था। उस लड़के ने अपना लंड मेरे होंठों पे लगाया तो पेशाब और पसीने की तेज़ बू मेरी नाक में समा गयी लेकिन उस वक़्त मेरी कैफ़ियत ऐसी थी कि वो बू भी मेरे लिये शहवत-अंगेज़ थी।

उसके लंड में से चिकना सा मज़ी रिस रहा था। मैंने एक लम्हा भी ताखीर किये बिना अपने होंठ खोलकर उसके लंड की टोपी अपने मुँह में ले ली। उसका तीखा सा तल्ख ज़ायका भी वाकय में मुझे बेहद लज़ीज़ लगा। ठोस और सख्त होने के साथ-साथ उसका लौड़ा गुदगुदा और लचकदार भी था।

मेरे लरज़ते होंठों पे तपिश भरा मखसूस एहसास मेरी तिश्नगी बढ़ा रहा था। अपने मुँह के अंदर ही मैं अपनी ज़ुबान उसके लंड के सुपाड़े पे ज़ोर से चारों तरफ़ फिराने लगी जैसे कि वो कोई लज़ीज़ कुल्फ़ी हो। फिर अपने होंठ और ज्यादा खोल कर मैंने उसका लंड अपने मुँह में और अंदर तक ले लिया और बिल्कुल बेहयाई से मस्ती में अपने स्टूडेंट का लौड़ा चूसने लगी।

बदमाश स्टूडेंट्स ने विधवा टीचर को चोदा
अगस्त 24, 2024 by hamari Leave a Comment

Paki Horny Teacher
करीब तीन साल पहले मैं अठाइस साल की ही थी जब मेरे शौहर की सड़क हादसे में मौत हो गयी। तब हम दिल्ली में रहते थे। उसके दो-तीन महीने बाद दिल्ली का मकान किराये पे दे कर मैं मेरठ से थोड़ी दूर अपने पेरन्ट्स के साथ आकर रहने लगी। मैं अच्छे खानदान से हूँ और पैसे की कोई कमी नहीं है। Paki Horny Teacher

मेरे वालिद की शुगर-मिल है और वो मुक़ामी पॉलिटिशन भी हैं। मैं शुरू से ही ऐशो-आराम में पली बड़ी हुई हूँ… बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी और फिर दिल्ली के नामी कॉलेज से बी-ए और फिर बी-एड किया था। आज़ाद ख्यालात की की होने के बावजूद मैं काफी अच्छे इखलाक़ वाली तहज़ीब यफ़ता और परहेज़गार थी।

अपने पेरन्ट्स के यहाँ आकर मैंने वक़्त गुज़ारने के लिये अलीगढ़ युनिवर्सिटी से कॉरस्पान्डन्स से इंगलिश में एम-ए करना शुरू किया। मुझे यहाँ आये हुए दो-तीन महीने ही हुए थे कि मेरे अब्बा के एक दोस्त ने उनके स्कूल में इंगलिश पढ़ाने की ऑफर दी। मेरठ के पास उनका एक बड़ा प्राइवेट स्कूल था।

ये स्कूल बारहवीं क्लास तक था और मैं कम क्वालिफिकेशन होने पर भी बारहवीं क्लास तक इंगलिश पढ़ाने लगी। इसकी दो वजह थी। एक तो मैं शुरू से ही इंगलिश मीडियम में पढ़ी थी और बी-ए भी इंगलिश में ही किया था। दूसरी ये कि स्कूल भी मेरे अब्बा के दोस्त का था और उन्हें कोई और काबिल टीचर मिल भी नहीं रहा था।

स्कूल में तमाम स्टाफ़ को मालूम था कि मैं स्कूल के मालिक के करीबी पहचान की हूँ और मुक़ामी पॉलिटिशन की बेटी हूँ… जिस वजह से स्कूल में मेरा काफ़ी रुतबा था। मैं बहुत ही स्ट्रिक्ट टीचर थी और स्कूल के ज्यादा बिगड़े हुए और नालायक काम-चोर लड़कों की पिटायी भी कर देती थी।

इसलिये सब स्टूडेंट्स मुझसे डरते थे। कुछ ही हफ़्तों में मैं स्कूल की डिसप्लिन इंचार्ज और स्टूडेंट काउन्सलर भी बन गयी थी और मुझे अपना छोटा सा ऑफ़िस भी मिल गया था। प्रिंसपल मैडम स्कूल के तमाम इंतेज़ामी मुआमलातों में भी मुझे शामिल करने लगीं।

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स्कूल मेरे घर से करीब पच्चीस किलोमिटर था। शुरू में दो-तीन हफ़्ते मैं खुद कार ड्राइव करके जाती थी लेकिन फिर मैं स्कूल की बस से ही जाने लगी। हमारे रूट की स्कूल की बस हमेशा खचाखच भरी होती थी लेकिन टीचरों को और छोटे बच्चों को हमेशा बैठने की जगह मिलती थी और बड़े स्टूडेंट्स खड़े होकर जाते थे।

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सब कुछ बखूबी चल रहा था। पर एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते वक़्त मैंने देखा कि बारहवीं क्लॉस की एक लड़की रोने जैसा चेहरा लिये हुए बस से उतरी और उसकी सहेली उसके कान में कह रही थी, “सुहाना तू घबरा मत… कल हम इंगलिश वाली तबस्सुम मैम से बात करेंगे… वो उन्हें अच्छा सबक सिखायेंगी!”

मुझे बात कुछ समझ में नहीं आयी लेकिन मैंने सोचा कि अगले दिन जब ये मुझसे बात करेंगी तब खुद-ब-खुद पता चल जायेगा। स्कूल की सभी बड़ी लड़कियाँ कभी-कभी अकेले में अपने कईं मसले अक्सर मेरे साथ डिस्कस करती थीं। इसकी वजह शायद ये थी कि बाकी टीचरों के मुकाबले मैं काफी यंग थी।

बारहवीं क्लॉस की लड़के-लड़कियों से तो उम्र में मैं सिर्फ़ दस-ग्यारह साल ही बड़ी थी। इसके अलवा बारहवीं के कुछ चार-पाँच लड़कों और दो-तीन लड़कियों से तो मैं सिर्फ़ आठ-नौ साल ही बड़ी थी क्योंकि वो पहले किसी ना किसी क्लॉस में कमज़-कम दो-दो दफ़ा फेल हो चुके थे।

खैर अगले दिन मैं जब स्कूल पहुँची तो मैं इंतज़ार कर रही थी कि कब वो लड़कियाँ आ कर मुझे अपना मसला बतायें और मैं उसे हल कर सकूँ। वैसे वो दोनों लड़्कियाँ भी उन फेल होने वाले लडके-लड़कियों में से एक थीं और स्कूल की सबसे बड़ी लड़कियाँ थीं। उनकी उम्र करीब बीस-इक्कीस साल होगी।

एक दिन बीता… दो दिन बीते, फिर पूरा हफ़्ता बीत गया पर उन्होंने मुझसे कोई बात नहीं की और मैं भी उसे भूल गयी। फिर एक दिन अचानक उसी दिन की तरह वो लड़की इस दफ़ा रोते हुए बस से उतरी। बल्कि बाकी टीचरें भी उसकी सहेलियों से पूछने लगी कि इसे क्या हुआ। इस पर उसकी सहेली ने कहा, “मैम इसका सर बहुत ज़ोर से दर्द कर रहा है!”

उन टीचरों के लिये बात वहीं दब गयी लेकिन मुझे इस बात पर यकीन नहीं हुआ क्योंकि दोनों काफी दबंग किस्म की लड़कियाँ थीं थीं और इतनी ज़रा सी बात पे रोने वाली लड़कियाँ नहीं थीं। इसलिये मैंने अगले दिन खुद सुहाना और उसकी सहेली फ़ातिमा को खाली पीरियड में अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछा कि प्रॉब्लम क्या है।

वो बोली, “कुछ नहीं तबस़्सुम मैम… सब ठीक है!”

“मुझसे झूठ मत बोलो”, मैंने कहा, “उस दिन भी मैंने तुम्हें इसी तरह बस से रोते हुए उतरते देखा था और फ़ातिमा तुम्हें कह रही थी कि हम कल तबस़्सुम़ मैम को ये बात बतायेंगे और वो उनकी खबर लेंगी! मुझसे छुपाओ मत और खुल के बताओ कि प्रॉब्लम क्या है?”

इस पर सुहाना फूट-फूट कर रोने लगी। तब फ़ातिमा बोली, “त़बस्सुम मैम मैं आपको बताती हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी भीड़ होती है और हमें पीछे खड़े हो कर जाना पड़ता है!”

“हाँ! हाँ!” मैंने कहा।

“तो मैम प्रॉब्लम ये है कि पिछले एक महीने से वो हमारी क्लॉस के मुस्टंडे… वो बास्केटबॉल प्लेयर्स… वो फेल्यर्स… हमें बस में रोज़ तंग करते हैं। हम लड़कियों का उन्होंने बस में सफ़र करना मुश्किल कर दिया है! कभी तो वो हमारे लोअर बैक में उंगली डालते हैं तो कभी हमारी ब्रेस्ट पर चुँटी काटते हैं! कल तो उन्होंने हद ही कर दी। कल उन चारों ने हमें कस कर पीछे से पकड़ लिया और ज़ोर से हमारी ब्रेस्ट्स मसल दी!” वो बोली.

“क्या उनकी ये हिम्मत! मैं आज ही उनकी शिकायत प्रिंसपल से करती हूँ और खुद भी उनकी अच्छी पिटाई करुँगी… और ये सब तुमने पहले क्यों नहीं बताया… और बाकी लड़कियों ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?” मैं बोली।

“नहीं-नहीं त़बस्सुम मैम… आप प्लीज़ ये बात किसी से ना कहियेगा वरना सब हम पर हसेंगे और हमारी स्कूल में बदनामी होगी और मज़ाक बनेगा। आप चाहें तो उनकी पिटाई कर दीजिये पर ये बात आप उनसे भी ना कहियेगा कि हमने बताया है वरना वो हमें और तंग करेंगे या फिर बदनाम करेंगे!” वो बोली।

“ठीक है, मैं देख लूँगी!” मैंने कहा। उस दिन उस क्लॉस में जाते ही मैंने उन चारों को खड़ा कर लिया और बिना कुछ बताये उनको जमकर थप्पड़ लगाये कि मेरे हाथ दुखने लगे और उनके गालों पर मेरे थप्पड़ों की वजह से निशान पड़ गये। जब उन्होंने पूछा कि “अख़तर मैम आप हमें क्यों मार रही हैं?” तो मैंने कहा, “तुम्हें बस में सफ़र करने की तमीज़ सिखा रही हूँ!” और वो चारों सिर झुका कर खड़े हो गये।

उस वाकिये के बाद कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन फिर वो लड़कियाँ मेरे पास आयी तो मैंने उनसे पूछा, “अब क्या हुआ… अब तुम किस बात पर परेशान हो? क्या वो तुम्हें अभी भी तंग करते हैं?”

इस पर वो मुझे बोलीं, “त़बस्सूम मैम आपने जब उनकी पिटाई की थी तो कुछ दिन तक सब ठीक रहा लेकिन पिछले दो दिन से वो फिर से हमें तंग कर रहे हैं!”

“लगता है अब प्रिंसपल से बात करनी ही पड़ेगी।” मैं बोली।

“प्लीज़ प्लीज़ तबस्सुम मैम आप प्रिंसपल से कुछ मत कहियेगा… ये बात अगर फ़ैल गयी तो हमारा मज़ाक उड़ेगा! हमारा स्कूल आना मुश्किल हो जायेगा!” वो गिड़गिड़ायीं।

“तो ठीक है… आज मैं तुम लोगों के साथ बस में खड़ी रहुँगी। अगर उन्होंने कुछ किया तो में उनकी वहीं पिटाई करूँगी!” मैंने गुस्से में तमतमाते हुए कहा।

उस दिन मैंने क्लॉस में फिर उन चारों की पढ़ाई और होमवर्क ना करने के बहाने से पिटाई की और छुट्टी के बाद बस में लड़कियों के साथ पीछे खड़ी हो गयी। जब मेरी साथी टीचरों ने पूछा तो मैंने कहा कि मैं स्टूडेंट्स के साथ मिक्स-अप होने की कोशिश कर रही हूँ ताकि ये मुझसे इतना ज़्यादा ना डरें।

उस दिन सब ठीक रहा। मैं उनके साथ तीन-चार दिन बस में खड़े हो कर सफ़र करती रही। वो चार बदमाश हमारे पीछे ही खड़े रहते थे लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ कर सकें। फिर कुछ दिन बाद मैं फिर आगे बैठने लगी। दो ही दिन बाद वो लड़कियाँ फिर मेरे पास वही शिकायत ले कर आ गयीं। उस दिन मैं फिर पीछे खड़ी हो कर सफ़र करने लगी।

दो-एक दिन तक सब ठीक था लेकिन फिर एक दिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई चीज़ मेरे पीछे मेरे चूतड़ों के बीच घुसा दी हो। मैं एक दम काँप गयी। मेरा पूरा जिस्म ठंडा पड़ गया। मेरे शौहर को गुज़रे हुए सात-आठ महीने हुए थे और इस दौरान मैंने अपनी जिस्मनी ख्वाहिशों को बिल्कुल दबा कर रखा था।

कभी-कभार रात को अपनी उंगलियों से अगर खुद-लज़्ज़ती कर भी लेती थी तो तसव्वुर हमेशा अपने मरहूम शौहर का ही होता था। मैं बेहद पाक और नेक तरबियत वाली औरत थी। वैसे तो मैं गोरी-चिट्टी बेहद खूबसूरत और स्लिम और सैक्सी हूँ और अपने शौहर के साथ बेहद एक्टिव और अच्छी सैक्स लाईफ़ थी मेरी।

लेकिन मेरे शौहर के अलावा किसी गैर-मर्द ने मुझे कभी छुआ तक नहीं था और ना ही मैंने कभी उनके अलावा किसी को ऐसी नज़र से देखा था। लेकिन उस पल मुझे जैसे बिजली का झटका लगा। इतने महीनों में पहली मर्तबा मैंने किसी को अपने जिस्म के एक नाज़ुक हिस्से के अंदर शरारत करते हुए महसूस किया था।

मेरी टाँगें कमज़ोर हो गयीं और हाई हील सैंडल में मेरा बैलेंस बिगड़ने लगा। एक लम्हे के लिये मेरे होश उड़ गये… चेहरे का रंग एक दम फ़ीका पड़ गया… गला सूख गया… मैं लड़खड़ा कर गिरने लगी लेकिन फिर बस की सीट पर लगे हैंडल को पकड़ कर अपने आप को संभाला। मेरे हाथ काँप रहे थे। उन लड़कियों ने पूछा, “तवस्सुम मैम आप ठीक तो हैं?”

“हाँ मैं ठीक हूँ”, मैंने कहा लेकिन मेरे चेहरे के उतरे रंग को देख कर मेरी साथी टीचरों ने जब यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि शायद मुझे बुखार हो रहा है। उस दिन रात को देर तक मुझे नींद नहीं आयी। पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों के बीच वो चीज़ सरकती महसूस होती रही। उस एहसास ने मेरे अंदर दबी हुई चिंगारी को जैसे हवा दे दी थी। मैंने उस रात करीब तीन मर्तबा अपनी उंगलियों से मैस्टरबेशन किया।

मैं अगले दो दिन स्कूल भी नहीं गयी और बिमार होने का बहाना कर दिया। जिस दिन मैं स्कूल गयी भी तो उस दिन बस में मैं आगे अपनी सीट पर जा कर चुपचाप बैठ गयी। वो लड़कियाँ उतरे से चेहरे के साथ मेरी जानिब देखती रही। मुझे टीचरों ने भी पूछा, “आज आपने स्टूडेंट्स के साथ खड़े नहीं होना क्या? क्या बात है? सब ठीक तो है ना तब्बू मैम?” सब टीचर्स मुझे त़ब्बू कह कर बुलाती थीं।

“सब ठीक है… बस थोड़ी वीकनेस लग रही है”, मैंने बहाना किया। अगले दिन वो लड़कियाँ फिर मेरे पास आयी और मुझसे बोली, “तबस्सुम मैम आपको क्या हुआ? मैम जब आप हमारे साथ खड़ी नहीं होती हैं तो वो लोग हमें फिर तंग करना शुरू कर देते हैं! मैम आप प्लीज़ हमारे साथ पीछे खड़ी हो जाया कीजिये… प्लीज़!”

मैंने कहा, “अच्छा ठीक है!” और वो चली गयी लेकिन मैं पूरा दिन टेंशन में रही और उस दिन का वाक़या याद करती रही। छुट्टी के बाद किसी तरह हिम्मत जुटा कर मैं पीछे जा कर खड़ी हो गयी। तकरीबन पूरा सफ़र आराम से कट गया और मैं भी इत्मिनान से हो गयी थी.

लेकिन मेरा स्टॉप आने से तीन-चार मिनट पहले ही किसी ने फिर पीछे से मेरे चूतड़ों में हाथ दे दिया और इस दफ़ा अच्छी तरह एक झटके में मेरे चूतड़ों के बीचों-बीच नीचे से सरकाते हुए ऊपर तक ले गया। मैं एक दम से पीछे पलटी तो सभी लड़के इधर-उधर देख रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि ये किसने किया है।

सुहाना और फ़ातिमा भी मेरे साथ ही खड़ी थीं। उन्होंने पूछा, “तब़स्सुम़ मैम सब ठीक है ना?” उन लड़कियों के पूछने के अंदाज़ में मुझे फ़िक्र की बजाय तंज़ महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे कि उन्हें पता था कि मेरे साथ किसी ने क्या हरकत की है। “हाँ!” मैंने जवाब दिया।

उस रात भी मैं ठीक से सो नहीं पायी। आज भी उन लड़कों की हरकत ने मेरे अंदर दबी हुई जिस्मानी हसरतें भड़का दी थी जो मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी। ये मेरे तहज़िबे-इख्लाक़ के खिलाफ़ था लेकिन अपने जिस्म में उठती मीठी सी सनसनाहट मुझे कमज़ोर कर रही थी।

अपनी अजीब सी जिस्मानी और ज़हनी हालत के लिये मुझे उन लड़कों पे बेहद गुस्सा आ रहा था। अगले दिन क्लॉस में जाते ही मैंने जानबूझ कर उन चारों से इंगलिश के ऐसे मुश्किल सवाल पूछे जिनका मुझे पता था कि वो नालायक जवाब नहीं दे सकेंगे और इस बहाने से उनकी खूब पिटाई की।

उस दिन शाम को बस में चढ़ते ही जब लड़कियों ने मुझे पीछे बुलाया तो मैं कॉन्फिडेंस के साथ उन लड़कों को घूरती हुई पीछे जा कर खड़ी हो गयी। अब इतनी पिटाई होने के बाद भला वो क्यों नहीं सुधरेंगे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही किसी ने मेरे चूतड़ों में फिर हाथ दे दिया।

जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो इस बार चारों ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुरा पड़े। मैं आगे देखने लगी। उन चारों में से दो लड़कों की उम्र तो करीब बीस साल होगी और चारों थे भी हट्टे-कट्टे। मेरी हाइट पाँच फुट पाँच इंच है और ऊपर से मैं हमेशा चार से पाँच इंच ऊँची पेन्सिल हाई हील की सैंडल ही पहनती हूँ तो भी मैं उनमें से सबसे बिगड़े लड़के कुल्दीप के कंधे तक ही पहुँचती थी जबकी सैंडल पहन के बाकी तीनों के करीब-करीब बराबर पहुँचती थी।

खैर कुछ पल बाद उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों में हाथ दिया तो इस दफ़ा मैं थोड़ा सरक कर आगे हो गयी। उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों हाथ दिया तो मैं थोड़ा और आगे सरक गयी। ऐसा चार-पाँच दफ़ा हुआ। आज भी पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों में उनके हाथ ही महसूस होते रहे और मैंने तीन-चार मर्तबा मैस्टरबेट किया।

मुझे बेहद शर्मिंदगी और गुनाह का एहसास हो रहा था। फ्रस्ट्रेशन और गुस्से में अगले दिन मैंने फिर किसी बहाने से उनकी पिटाई कर दी और क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। शाम को बस में उस दिन उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं। मैं बहुत खुश थी लेकिन तीन दिन बाद ही फिर बस में उन्होंने अचानक मेरी गाँड में हाथ डाला तो मैं चिहुँक कर झटके से थोड़ा आगे सरक गयी.

जिस से बस के मटैलिक फर्श पे मेरे हील वाले सैंडल के ज़ोर से बजने की आवाज़ भी हुई। हर रोज़ की तरह सुह़ाना और फ़ातिमा बारहवी क्लास की कुछ और लड़कियों के साथ मेरे पास ही खड़ी थी। फ़ातिमा ने मुस्कुराते हुए पूछा कि मुझे क्या हुआ तो मैंने कहा कि “कुछ नहीं…

बस खड़े-खड़े पैर सो गया था!” लेकिन अब मुझे गुस्सा आ गया था और मैंने ठान लिया कि अबकी बार मैं आगे नहीं सरकुँगी और देखती हूँ इनमें कितनी हिम्मत है। आखिर कब तक ये ऐसे ही उंगली देते रहेंगे। इस मर्तबा जब फिर से मेरे चूतड़ों में किसी ने हाथ दिया तो मैं वहाँ से नहीं हिली।

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उसने दो-तीन दफ़ा फिर हाथ दिया तो भी मैं नहीं हिली। इस बार उसने हाथ मेरे चूतड़ों के बीच डाल कर वहाँ टिका कर ही रख लिया। मैंने भी अपनी रानें जोड़ कर चूतड़ों के बीच उसके हाथ को दबा लिया। कुछ देर तक ना वो हिला और ना मैं। जब मैंने गर्दन घुमा कर पीछे देखा तो उनमें से सब से ज्यादा बिगड़ा लड़का मेरे पीछे खड़ा था।

मेरे पीछे गर्दन घुमाने पर भी उसने हाथ नहीं हटाया बल्कि उसे मेरी टाँगों के बीच सरकाता हुआ आगे मेरी चूत तक ले गया और सलवार के ऊपर से उसे मसलने लगा। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। मेरी तो हालत खराब हो गयी और मेरी टाँगें काँपने लगीं।

मेरी आँखें बंद हो गयीं और मेरे पेट में बल सा पड़ा और मेरी चूत ने धड़धड़ाते हुए पानी छोड़ दिया। बड़ी मुश्किल से अपने होंठ दबाते हुए मैंने अपने मुँह से सिसकारियाँ निकलने से रोकीं। पहली मर्तबा इस तरह मैं पब्लिक प्लेस में झड़ी थी और वो भी स्टूडेंट्स से भरी हुई बस में। सच कहुँ तो मुझे बेहद अच्छा लगा और मेरे चेहरे का रंग तो ठीक हो गया लेकिन मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा था कि मेरी रानों के गिर्द सलवार बिल्कुल गीली हो गयी थी।

घर पहुँच कर बार-बार बस का सीन मेरे ज़हन में घूमता रहा। रात को बेडरूम लॉक करके मैं सारे कपड़े उतार के बिल्कुल नंगी हो गयी और वही सीन याद करते हुए दो दफ़ा अपनी चूत को उंगलियों से सहलाते हुए झड़ी। फिर भी जब चैन नहीं पड़ा तो ज़िंदगी में पहली दफ़ा गाजर चूत में घुसेड़ कर मैस्टरबेट किया।

इससे पहले सिर्फ़ उंगलियों से ही मैस्टरबेट किया था। बाद में ऐसे ही नंगी सो गयी लेकिन ख्वाब में भी मुझे वही बस में उस लड़के का बार-बार मेरी चूत और गाँड को रगड़ना और सहलाना ही याद आया और मैं सोते हुए भी अपनी चूत सहलाती रही। सुबह जब उठी तो मेरे हाथ टाँगों के बीच में चूत पे ही मौजूद थे।

अगले दिन क्लास में जब वो लड़के फिर से होमवर्क करके नहीं लाये तो पहली दफ़ा ना चाहते हुए भी मैंने उनकी पिटाई की क्योंकि शायद मैं ये जताना चाहती थी कि पिछले दिन बस में हुए वाकिये के बावजूद मेरा इख़्तियार बरकरार है। टीचर हूँ इसलिये रौब रखना भी ज़रूरी है… लेकिन मुझे दिल में बेहद अफ़सोस महसूस हुआ।

उस दिन बस में उनके करीब खड़ी थी लेकिन जब उन्होंने मुझे नहीं छुआ तो थोड़ी मायूसी हुई। लेकिन पता नहीं क्यों अब पहली बार मैं चाहती थी कि वो मुझे छुयें… मेरे चूतड़ों के बीच में हाथ डालें… मेरी चूत को सहलायें। इसी उम्मीद में मैं बस में पीछे उनके पास जाकर खड़ी होती लेकिन अगले दो-तीन दिन भी मेरे साथ ऐसी कोई हरकत नहीं की और उसके बाद फिर चार-पाँच दिन तो वो स्कूल ही नहीं आये।

मैं तड़प कर रह जाती और मायूस हो कर अपने स्टॉप पे उतर जाती। वो लड़के मेरे दिलो-दिमाग में बस से गये थे और ये हालत हो गयी थी कि रोज़ रात को उनके बारे में सोच-सोच कर बार-बार अपनी चूत सहलाती और गाजर से मैस्टरबेट करती। स्कूल में भी कईं दफ़ा उनका ख्याल आ जाता तो चूत गीली हो जाती.

और फिर अपने ऑफिस या टॉयलेट में जा कर खुद-लज़्ज़ती करती। मुझे पोर्नोग्राफी से नफ़रत थी लेकिन एक रात को मैंने पहली दफ़ा अपने लैपटॉप पे पोर्न-वेबसाईट तक खोल ली। इससे पहले मैंने कभी गंदी तस्वीरें या ब्लू-फिल्म नहीं देखी थी लेकिन उस रात और फिर अगली दो-तीन रातें मैंने घंटों तक अलग-अलग तरह की चुदाई की क्लिप्स का मज़ा लिया।

मेरे जिस्म में हवस की आग इस कदर भड़क गयी थी कि मेरे सारे इख़लाक़ और नेक तर्बियत उसमें जल कर ख़ाक हो रहे थे और कुछ ही दिनों में मेरी फ़ितरत और चाल-चलन में किस कदर बेइंतेहा तब्दीली आ गयी थी। फिर एक दिन काफी बारिश हो रही थी और स्कूल में बच्चे भी कम आये थे तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गयी।

उस दिन बस में भीड़ नहीं थी। मैं आसानी से कहीं भी खड़ी हो सकती थी लेकिन खुश नसीबी से मुझे वो लड़के पीछे खड़े नज़र आये तो मैं पीछे उन ही लड़कों के पास जा कर खड़ी हो गयी क्योंकि मैं तो दिल में ये ही चाहती थी कि वो मुझे छुयें। हमेशा की तरह सुहाना और फ़ातिमा भी वहीं मौजूद थीं।

मुझे पूरा शक हो गया था कि वो दोनों भी जानती थी कि लड़के मेरे साथ क्या फ़ाहिश हरकतें करते हैं। बस में भीड़ ना होने की वजह से वो मुझसे थोड़ा पीछे खड़े थे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही वो मेरे नज़दीक आ गये। बारिश की वजह से हाईवे पे काफी ट्रैफिक था और बस धीरे-धीरे चल रही थी।

मैं मोबाइल फोन पे किसी से बात करने में मसरूफ थी कि अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई लड़का एक दम मेरे साथ चिपक कर खड़ा हो गया हो। मैंने फोन कॉल बंद करते हुए पीछे देखा तो वो बोला, “अखतर मैम आप ज्यादा पीछे आ गयी हैं… थोड़ा आगे सरक सकती हैं!”

उस लम्हे मैंने गौर किया कि दरअसल मैं ही फोन पे बात करते हुए पीछे उन लड़कों तक सरक गयी थी। इसके अलावा मैंने देखा कि सुहाना और फ़ातिमा भी उनमें से दो लडकों से बिल्कुल चिपक के खड़ी थीं। मैंने उन लड़कियों की जानिब देखा तो वो मेरी जानिब देखते हुए मुस्कुराने लगीं।

तब मुझे एहसास हुआ कि हक़िकत में वो दोनों भी इन लड़कों से मिली हुई हैं और खुद उनसे उंगली करवा के मज़े लेती हैं। मैं भी झेंप कर थोड़ा सा आगे सरक गयी तो वो सब भी आगे सरक आये और एक लड़के ने हल्के से मेरी गाँड में हाथ दे दिया। मैं तो खुद इसी इंतज़ार में थी इतने दिन से और इस बार मैं भी थोड़ा पीछे सरक गयी ताकि उसका हाथ अच्छी तरह से मेरी टाँगों के बीच में घुस जाये।

मैंने अपनी रानों को थोड़ा-थोड़ा खोला और फिर बंद किया तो उस लड़के ने एक हाथ मेरी टाँगों के बीच में घुसा दिया और दूसरा हाथ वो मेरे चूतड़ों पे फेरने लगा। मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। मेरी तरफ़ से कोई मुखालफ़त ना देख कर शायद मेरी नियत का भी अंदाज़ा हो गया था।

फिर उसने मेरे कान में कहा, “तब़्बू मैम अगले स्टॉप पर पीछे की सीट खाली हो रही है… आप मेरे और मेरे दोस्त के बीच मैं बैठ जायें… बाकी दोनों लड़के और ये लड़कियाँ आगे अपनी हो जायेंगे ताकि किसी को आगे से पता ना चले!”

मैं कुछ नहीं बोली। ये लड़के हमेशा मुझे अख़्तर या तबस़्सुम़ मैम कह कर बुलाते थे लेकिन आज बाकी स्टॉफ की तरह तब्बू मैम कह कर उस लड़के ने मुझसे बात करी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और चूत गिली हो चुकी थी। बारिश की हल्की सी ठंडक मेरे जिस्म की गर्मी में और इज़ाफ़ा कर रही थी।

हवस ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि अगर वो वहीं मुझे नंगी करके चोदना भी शुरू कर देते तो शायद मैं उन्हें मना नहीं करती। उस वक़्त मुझे अपनी इज़्ज़त-आबरू… हैसियत और सोसायटी में रुसवाई या बदनामी… किसी बात की ज़रा सी भी परवाह नहीं थी। मैंने देखा कि वो दोनों लड़कियाँ असल में मजे से दूसरे दो लड़कों का हाथ अपनी स्कूल युनीफॉर्म की ट्यूनिक के अंदर अपनी टाँगों के बीच में ले रही थी।

वो मेरी जानिब देख कर बेहयाई से मुस्कुराने लगीं। तब मेरे पीछे वाले लड़के ने मेरे कान में कहा, “ये दोनों तो अक्सर हम चारों चुदती हैं… तब्बु मैम आप इनकी परवाह ना कीजिये… इनका काम अब पूरा हो गया… अब इन्हें अगले संडे मजे से चोदेंगे… आज आपका नम्बर है!”

मैं उसकी हिम्मत पे हैरान थी कि किस तरह खुल कर गंदे लफ़्ज़ों में वो अपनी टीचर के साथ चुदाई की बातें कर रहा था। उसकी गंदी बातें सुनकर मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लगा। मैं कुछ नही बोली और चुप रही। मैं तो खुद अपनी हवस की आग में अंधी हो गयी थी और अपनी इज़्ज़त लुटाने के लिये खुद ही तड़प रही.

अगले स्टॉप पर पीछे वाली सीट खाली हुई तो मेरे पीछे वाला लड़का दायीं तरफ़ बैठ गया और मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गयी। दूसरा लड़का मेरी बांयी तरफ़ बैठ गया। बाकी दोनों लड़के और वो लड़कियाँ हमारे आगे खड़ी हो गयीं। बस चलने लगी तो मेरी बगल वाले लड़कों को जैसे खुली छूट मिल गयी मेरे साथ खेलने की… मेरे खज़ाने लूटने की।

दायीं तरफ़ वाले लड़के ने एक बाँह मेरे सर के पीछे सीट पर पसार दी और दूसरे हाथ को मेरी नरम और हवस की वजह से गरम दाहिनी रान पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। बांयी तरफ़ वाला लड़का मेरी बांयी रान को सहलाने लगा। मेरी साँसें एक दम से और तेज़ और गरम हो गयीं और मेरा सर हल्का-हल्का महसूस होने लगा।

मैं मदहोश सी हो गयी थी। मैंने आँखें बंद कर लीं। दोनों लड़कों ने अपने हाथ मेरी रानों पर ऊपर की जानिब सरकाये और मेरी कमीज़ के पल्ले के नीचे से सरकाते हुए मेरे पेट की तरफ़ बढ़ा दिये। तभी एक लड़के ने अपने हाथ को मेरी रानों के बीच मेरी चूत की जानिब सरकाने की कोशिश की तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकरी छूट गयी.

और मैंने अपनी दोनों टाँगों को ज़ोर से आपस में जोड़ लिया और अपने हाथों से उन लड़कों के हाथों को पकड़ लिया और मेरे मुँह से ज़ोर से एक साँस अटकती हुई निकली। इस पर मेरी दांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर ज़ोर से से चूम लिया और मेरे होंठ चूसने लगा।

मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी हो। मेरे होश उड़ गये और मेरा सर बिल्कुल हल्का हो गया। मेरा जिस्म काँपने लगा और वो मेरे होंठ चूसता रहा। मेरे शौहर ने भी कभी मेरे होंठों को चूमते हुए इस तरह नहीं चूसा था। ये मेरी ज़िंदगी का पहला माकूल फ्रेंच-किस था।

उसने मेरे सर के पीछे वाले अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ कर हमारे होंठों को कस कर सी लिया और उसी पल मेरी बांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने दूसरे हाथ से मेरी छाती पकड़ ली और कमीज़ के ऊपर से ही मेरे बूब्स मसलने लगा। मेरी साँसें फूलने लगी और मैं अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ कर रोकने लगी.

तो दोनों लड़कों ने मेरी रानों को सहला रहे दूसरे हाथों से हल्का सा ज़ोर लगा कर मेरी टाँगों को खोल दिया और दांयी तरफ़ वाले लड़के ने तपाक से अपना हाथ मेरी सलवार के ऊपर से मेरी चूत पे रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। कुछ ही देर में मेरे पेट में अकड़ाव पैदा हुआ और फिर एक ज़ोर का झटका लगा और मेरी चूत में फ़ुव्वारे फूटने लगे।

मैं झड़ चुकी थी और मेरी पैंटी और उसके आसपास की सलवार भी भीग गयी। मैं झड़ी तो उस लड़के ने मेरे होंठ चूसने बंद कर दिये और मेरी साँसें भी ठीक हो गयीं। फिर दूसरा लड़का मुझे फ्रेंच-किस करने लगा तो पहले वाला बोला, “वाह यार मज़ा आ गया… आज तो अंग्रेज़ी वाली को अच्छे से चूसा है और अब अच्छे से चोदेंगे भी! साली मारती बहुत ज़ोर से है… आज उतने ही ज़ोर से हम इसकी मारेंगे!” और फिर वो बारी-बारी मुझे चूमने लगे।

थोड़ी देर बाद जो लड़के हमारे सामने खड़ी उन लड़कियों की गाँड में उंगली कर रहे थे उन्होंने कहा, “चलो बहुत हुआ… अब हमें भी तो त़बस्सूम मैडम का थोड़ा मज़ा लेने दो… तुम इधर आ कर इन लड़कियों के मम्मों को थोड़ा मसल दो… ये भी बहुत गरम हैं आज बरिश की ठंडक में!”

फिर उन चारों ने जगह बदल ली। अब दूसरे दोनों लड़के मेरे अगल-बगल बैठ कर मुझे किस करने और मेरे मम्मे और चूत को सहलाने लगे। फिर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू किया तो मैंने अपने दोनों हाथों से नाड़ा पकड़ लिया। फिर दोनों लड़कों ने मेरे दुपट्टे के नीचे से मेरी कमीज़ के गले में से हाथ डाल कर मेरे एक-एक मम्मे को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगे।

मैं पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी और मैंने अपने हाथ दोनों की एक-एक रान पर रख दिये और उनके किस के बदले में उन्हें किस करने लगी। बेहद अजीब पर मजेदार चुंबन थे। बार-बार वो मेरे होंठ चूमते हुए अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल रहे थे। चारों लड़कों ने शायद पोलो-मिन्ट काफी खा रखी थी इसलिये उन्हें किस करते हुए मुझे मीठा-मीठा लग रहा था।

तभी मौका पाकर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल ही दिया और मेरी सलवार और भीगी पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने भी अपनी गाँड सीट से ऊपर उठा दी और उसे मेरी सलवार और पैंटी मेरे घुटनों के नीचे तक खींच दी।

फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डाल कर गीला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर-ऊपर घुमाने लगा। हाय अल्लाह! मैं तो पागल सी हो गयी और मेरे मुँह से तेज़-तेज़ आहें निकलने लगी। बच्चों से भरी स्कूल की बस में अपनी नंगी चूत खोले मैं अपने ही स्टूडेंट से उसमें उंगली करवा रही थी। इस एहसास ने मेरी गरमी और बढ़ा दी और मैं कुछ ही पलों में फिर झड़ गयी। मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी ओर सलवार को ऊपर कर दिया और मेरा नाड़ा दोबारा बाँध दिया।

फिर वो बोला, “तबस़्सुम़ मैम अगर आपको चुदाई का पूरा मज़ा लेना है तो आप घर फोन कर दीजिये कि आप अपनी किसी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जाओ! ये संजय पास ही अपने घर से कार ले आयेगा… हम इसके खेत पे चलते हैं ऐश करने के लिये…. बाद में शाम को हल्का सा अंधेरा होते ही अपको आपके घर के करीब छोड़ देंगे!”

मैंने थोड़ा शरमाते हुए गर्दन हिलाकर रज़ामंदी ज़ाहिर की। मेरे अब्बू और अम्मी एक हफ़्ते के लिये अजमेर गये हुए थे एक रिश्तेदार की शादी में लेकिन मैं इन लड़कों को ये ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी इसलिये अपने पर्स में से मोबाइल निकाल कर झूठमूठ एस-एम-एस करने का नाटक किया। इतने में जब उनका स्टॉप आ गया तो मैं उनके पीछे-पीछे वहीं उतर गयी। बस में आगे बैठी एक टीचर ने पूछा, “अरे तब़्बू… तुम कहाँ छुपी बैठी थी और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?”

मैंने कहा, “मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ… कई दिनों से मिली नही उससे और आज किस्मत से जल्दी छुट्टी हो गयी तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ…. और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा था… इसलिये पीछे की सीट पर लेट कर थोड़ा सो गयी थी!”

“अरे तू अभी कुछ दिन पहले भी तो बीमार हो गयी थी! तेरी अम्मी से बोलुँगी कि अपनी बेटी को कुछ अच्छा खिलाया करो… स्लिम और खूबसूरत दिखने के चक्कर में कैसे सूख के मरी जा रही है!” उनमें से सबसे उम्र-दराज़ टीचर जो मेरी अम्मी को जानती थी वो बोली।

“जी सकीना आँटी ज़रूर बता देना… पर मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हूँ… आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुस्टंडों की पिटाई करते देखना… फिर पता चलेगा आपको!” मैं हंसते हुए बोली और बस से उतर गयी।

बस से उतरी तो बारिश रुक गयी थी। मैं पीछे की जानिब चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गयी और एक तन्हा जगह पर जा कर खड़ी हो गयी। हवस में मैं इतनी बहक गयी थी कि उस वक़्त एक मर्तबा भी मुझे किसी तरह की शर्मिंदगी या बद-अखलाक़ी का एहसास नहीं हुआ।

मेरी शरमो-हया और सारी सक़ाफ़त और अखलाक़ियत हवस की आग में फ़ना हो गयी थी। धड़कते दिल के साथ मैं बेकरारी से उन लड़कों के आने का इंतज़ार कर रही थी। जिस्म की आग ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि एक दफ़ा भी ख्याल नहीं आया कि मैं कोई गुनाह करने जा रही हूँ और इस बदकारी का क्या नतीजा होगा।

मेरी टाँगें काँप रही थी और चूत गिली हो रही थी और इक्साइटमेम्ट में निप्पलों में भी सनसनाहट महसूस हो रही थी। कुछ ही देर में एक काले शीशों वाली टाटा सफ़ारी आ कर मेरे सामने रुकी और उसका पिछली सीट वाला दरवाजा खुला। उसमें से मेरा एक स्टूडेंट नीचे उतरा और बोला, “अंदर आ जाओ तब़्बु मैडम!”

अंदर पीछे की सीट पर एक लड़का बैठा था जबकि दो लड़के आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुसकर बैठने लगी तो अंदर बैठे दूसरे लड़के ने मुझे कमर से पकड़ कर ज़ोर से अपनी गोद में खींच लिया। दूसरे ने भी फ़ौरन अंदर बैठते ही गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया और गाड़ी चल पड़ी।

जिस लड़के की गोद में मैं बैठी थी उसने अपना एक हाथ मेरी बगल में से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया और मेरे मम्मे ज़ोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी रानों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा। दूसरे लड़के ने मेरे ऊँची पेन्सिल हील वाली सैंडल वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टाँगों को अपनी जानिब खींच लिया।

अब मेरी टाँगें उसके अगल बगल थीं और वो मेरी टाँगों के बीच। “साली रंडी! कुत्ती! क्लास में बहुत मारती है ना… आज तेरी गाँड ना फाड़ दी तो हमारे नाम बदल देना!” ये कहते ही वो मेरी चूत को ज़ोर से मसलने लगा। दूसरे वाले ने झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठों से सी लिया और मेरे निचले होंठ को काटने लगा और मेरे मम्मों को मसलने लगा।

तभी आगे बैठा लड़का बोला, “यार दारू के ठेके पे रोकना पहले… दारू पी के तब्बू मैडम जी को चोदने में और मज़ा आयेगा!”

“हाँ यार… इस साली तब़्बू को भी पिलायेंगे तो ये भी खुल के चुदवायेगी….!” दूसरा बोला। स्कू

ल की बस में तो चारों लड़के फिर भी मुझसे इज़्ज़त और अदब से बात कर रहे थे लेकिन अब उनका लहज़े में अचानक तब्दीली आ गयी थी और बेहद बद-तमीज़ी से पेश आ रहे थे। ‘मैम’ या ‘मैडम’ कहते हुए भी उनका लहज़ा तंज़िया था। इधर एक लड़के ने ज़ोर से अपने दाँत मेरी कमीज़ में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले हिस्से पर गड़ा दिये।

मेरे मुँह से चींख और सिसकरी एक साथ निकली। उस एक लम्हे में मुझे दर्द और मज़े का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मुझे लगा कि मैं उसी लम्हे झड़ जाऊँगी लेकिन झड़ी नहीं। वो दोनों मिल के मुझे मसल रहे थे…. चूम रहे थे… काट रहे थे और मेरे होंठों से मुसलसल सिसकारियाँ निकल रही थी। इतने में कार हाइ-वे पे एक शराब के ठेके पे रुकी तो उन्होंने मुझे अपने बीच में सीधी कर के बिठा लिया।

आगे ड्राइविंग सीट वाला संज़य उतर कर ठेके पे चला गया। इतनी देर मेरी अगल-बगल बैठे दोनों लड़के मुझे दोनों तरफ से चूमते रहे और मेरे मम्मे और रानें सहलाते रहे। मैं भी मस्त होकर उनकी युनिफॉर्म की ग्रे पैंट के ऊपर से उनके लंड मसलते हुए महसूस करने लगी।

इतने में संजय शराब की बोतल लेकर आ गया। आगे बैठा दूसरा लड़का बोला, “यार गिलास तो हैं नहीं कार में… खेत पे जा के ही दो-दो पैग खींचेंगे!”

ये सुनकर मेरी बगल में बैठा एक लड़का हंसते हुए बोला, “यार तब़्बु मैम को क्यो इंतज़ार करवा रहे हो… लाओ इन्हें तो बोतल से ही पिला दें थोड़ी… तो खेत पे पहुँचने तक इसकी शरम तो खुल जाये…!”

ये सुनकर मैं इंकार करते हुए बोली, “नहीं.. नहीं… मैं शराब नहीं पीती… तुम चारों को पीनी हो तो पियो… मैं नहीं पियुँगी!”

“अरे तब्बू मैम… पी कर तो देखो… जब थोड़ा नशा होगा तो चुदाई में खूब मज़ा आयेगा….!” मेरे बगल में बैठा एक लड़का बोतल खोलते हुए बोला और मेरे होंठों से लगाने लगा तो मैंने मुँह फेरते हुए फिर इंकार किया, “नहीं… मुझे नहीं पीनी… पहले कभी नही पी मैंने…!”

“अरे रंडी तब़्बू साली… पहले नहीं पी तो आज पी ले… अपने स्टूडेंट्स के साथ चुदाने भी तो पहली बार आयी है कि नहीं… या फिर और दूसरे स्टूडेंट्स से चुदवाया है पहले!” उनमें से एक लड़का बोला और सब हंसने लगे। “थोड़ी सी पी लो तबस़्सुम़ मैम… कुछ नहीं होगा… हम चारों के नाम के दो-दो घूँट भर लो बस… फिर अच्छी नहीं लगे तो और ज़ोर नहीं देंगे!” आगे ड्राइविंग सीट से संजय बोला।

वो लोग मानने वाले तो थे नहीं और जब फिर से उस लड़के ने बोतल मेरे मुँह से लगा दी तो पता नही क्यों मैंने और मुज़ाहमत नहीं की और एक बड़ा सा घूँट भर के हलक के नीचे उतार लिया। मेरे हलक और पेट में इस क़दर जलन हुई कि मेरा दम घुटने लगा और मैं खाँसने लगी। मेरी बगल में बैठा एक लड़का मेरी कमर सहलाते हुए बोला, “बस बस त़ब्बू मैडम जी… अभी ठीक हो जायेगा… पहली बार पी रही हो ना इसलिये…!”

फिर कुछ ही लम्हों में मेरी साँसें नॉर्मल हो गयीं और जलन भी खतम हो गयी तो उन्होंने ये कहते हुए फिर बोतल मेरे मुँह से लगा दी कि इस बार मुझे अच्छी लगेगी और तकलीफ भी नहीं होगी। जब मैंने दूसरा घूँट पिया तो उतनी जलन नहीं हुई और ऐसे ही उन्होंने इसरार करते हुए ज़बरदस्ती आठ-दस घूँट पिला दिये।

कुछ ही देर में मुझे बेहद खुशनुमा सुरूर महसूस होने लगा और मैं उन लड़कों के बीच में बैठी हुई झूमने लगी। इतने में उस लड़के का खेत आ गया जो ज्यादा दूर नहीं था। बारिश तो पहले ही बंद हो चुकी थी लेकिन काले बादल अभी भी छाये हुए थे।

काले बादलों के बीच में से सूरज की हल्की गुलाबी सी रोशनी क़ायनात को रंगीन बना रही थी। उनके खेत में पानी की मोटर के साथ एक छोटा सा कमरा था। उसके बाहर तीन-चार मजदूर बैठे थे। आगे वाले एक लड़के ने गाड़ी से उतरते ही उनसे कहा, “ओये! आज तुम सबकी छुट्टी है… तुम सब घर जाओ अभी!”

“जी बाबू जी!” ऐसा बोल कर वो सब मजदूर जाने के लिये उठे।

इतने में गाड़ी के पीछे वाली सीट का दरवाजा खोल कर एक लड़का मुझे गोद में उठाये बाहर निकला।

“अरे ये तो वो आपके स्कूल वाली मास्टरनी है ना! वो शुगर मिल वाले खुर्शीद साहब की लौंडी? इसको चोदने लगे हो बाबू…. आपने तो राम कसम हमारा दिल खुश कर दिया! ऐसी मक्खन जैसी चिकनी गोरी कहाँ मिलेगी और वो भी अपनी ही मास्टरनी! जियो बाबू जियो! और खूब जम कर चोदना! रंडी बना देना आज साली को! और तू घबरा मत मास्टरनी हम किसी से नहीं कहेंगे कि तू इस मोटर पर किनसे चुदी है!” एक मजदूर बोला।

“अच्छा अच्छा… अब तुम जल्दी जाओ यहाँ से!” एक लड़का बोला।

“जाते हैं बाबू जी! पर एक तकलीफ़ होगी आपको! मोटर पर जो चारपायी है ना वो टूट गयी थी इसलिये बनने के लिये गयी हुई है… आपको इसे अंदर कमरे में जो सूखे चारे का ढेर पड़ा है उसी पर चोदना पड़ेगा!” वो मजदूर जाता-जाता बोला।

उस एक लम्हे के लिये मुझे एहसास हुआ कि आज मैं कितनी बिगड़ गयी हूँ और मुझे अपने पर थोड़ी सी शरम भी आयी और थोड़ी घबराहट भी महसूस हुई। लेकिन अगले ही लम्हे चार-चार जवान लड़कों से एक ही साथ खेत में सूखे चारे के ढेर पर चुदने के खयाल से मेरी हवस और ज़्यादा बढ़ गयी।

इतने में वो लड़का मुझे गोद से नीचे उतार चुका था। मैं खुद ही मोटर के साथ बने कमरे की जानिब झूमती हुई चलने लगी। एक तो मैंने ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे और फिर शराब का सुरूर भी था तो ज़ाहिर है मेरे कदम ज़रा लड़खड़ा से रहे थे। कमरे के दरवाजे के पास पहुँच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो चारों लड़के मेरी जानिब देख कर हंस पड़े।

“बड़ी जल्दी है भई हमारी तब़स्सुम़ मैडम को चुदने की आज तो… फिर शुरू हो जाये!” एक ने कहा और सभी हंस पड़े।

“हाँ-हाँ जल्दी चलो!” दूसरा बोला।

“अरे पहले तब्बू मैम से तो पूछ लो के हम से चुदना है कि नहीं!” तीसरा बोला।

“क्यों त़बस्सूम मैडम चुदोगी हमसे?” एक ने सवाल किया।

अब तक शराब के सुरूर में मैं बिल्कुल बेशरम हो चुकी थी। मैंने मुस्कुराते हुए अपने टीचर वाले कड़क अंदाज़ में कहा, “तो अब क्या ये भी दो-दो थप्पड़ मार के तुम नालायकों को समझाना पड़ेगा…!”

उनमें से एक लड़के ने डॉयलॉग मारा, “हाय तब़स्सुम़ मैडम जी… मार लो थप्पड़ भी मार लो… हमें आपके थप्पड़ से डर नहीं लगता… आपकी सैक्सी अदाओं से लगता है!” और सब हंसने लगे और मुझे भी उसकी बात पे ज़ोर से हंस पड़ी।

“चलो यरों! हरी झंडी मिल गयी”, एक लड़का बोला।

फिर वो मुझे लेकर कमरे में घुस गये और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और एक मद्धम सी रोशनी वाला बल्ब चालू कर दिया। उनमें से एक लड़के ने आ कर पीछे से मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दबोच लिया और मेरे गाल और गर्दन को पीछे से चूमने लगा और मेरे चूतड़ दबाने लगा। मेरे होंठों से सिसकरी निकलने लगी। इतने में दूसरे लड़के ने आगे से मुझे दबोच लिया और मेरे मम्मे और तने हुए निप्पल मसलने लगा।

मुझे उसकी पैंट में से उसका तना हुआ लौड़ा अपनी नाफ़ के नीचे चुभता हुआ महसूस हुआ और वैसे ही अपनी कमर के नीचे चूतड़ों के बीच में भी पीछे वाले का लौड़ा महसूस हो रहा था। पीछे वाला लड़का कपड़ों के ऊपर से ही अपने लंड से मेरी गाँड में धक्के मारने लगा तो मैंने भी तड़पते हुए अपने चुतड़ उसके लौड़े पे दबा दिये।

“अरे देखो यार… साली तबस़्सुम मैडम को कितना मज़ा आ रहा है… क्यों री चूतमरानी… बोल मज़ा आ रहा है कि नहीं!” तीसरा लड़का बोला।

मैं कुछ नहीं बोली तो एक लड़का जोर से बोला, “बोल ना साली चूत… शरमा क्यों रही है… खुल के बता मज़ा आ रहा है कि नहीं…?”

मैंने गर्दन हिलाते हुए धीरे से कहा, “हाँ! हाँ! अच्छा लग रहा है!” और आगे वाले लड़के की गर्दन में बाँहें डाल दी।

फिर मेरे आगे खड़े लडके ने मेरी कमीज़ का दामन उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और बाकी दोनों लड़के बैठ कर मेरी पेंसिल हील वाले सैंडल खोलने लगे क्योंकि मेरी टाइट चुड़ीदार सलवार बिना सैंडल खोले उतारना मुमकिन नहीं होता। सैंडल खुलते ही उन्होंने मेरी सलवार पैरों तक खिसका दी और पहले एक ने मेरा पैर उठा कर सलवार मेरे पैर से निकाली और फिर दूसरे ने दूसरे पैर से मेरी सलवार निकाल दी।

उसके बाद दोनों ने फिर मेरे सैंडल दोबारा पहना कर स्ट्रैप के बकल लगा दिये। मेरे आगे और पीछे मुझसे से चिपक कर खड़े दोनों लड़के अभी भी मुझे चूमते हुए मेरे जिस्म पे हाथ फिरा रहे थे। मैं बिल्कुल मस्त होकर सिसकारियाँ भर रही थी और अपनी गाँड आगे पीछे हिलाते हुए उनकी युनिफॉर्म की पैंटों में तने हुए लौड़ों पर दबाने लगी।

फिर एक लड़का बोला, “अरे अखतर मैम… इतनी बेसब्री क्यों हो रही हो… बहुत टाईम है हमारे पास… हम कहीं भागे नहीं जा रहे… ज़रा ढंग से ऐश करेंगे…!” और अचानक दोनों लड़के मुझसे अलग हो गये।

एक लड़का भाग के गाड़ी में से शराब की बोतल ले आया और उन्होंने जल्दी से कमरे में पड़े गिलासों में शराब और पानी डाल कर पाँच पैग तैयार लिये। चारों ने एक-एक गिलास उठया और मुझे भी एक गिलास पकड़ा दिया और फिर चारों लड़के मेरे गिलास से अपने गिलास टकराते हुए ज़ोर से ‘चियर्स’ बोले।

मैं तो अब तक पुरी तरह मस्त हो चुकी थी और मैंने भी चियर्स कह के गिलास अपने होंठों से लगा लिया और पीने लगी। इस बार तो शराब में पानी मिला होने की वजह से उसका ज़ायका बिल्कुल बुरा नहीं लगा।

उनमें से एक लड़का बोला, “अरे यार सुरिंदर! अपने फोन पे कोई गरमा-गरम ऑइटम साँग तो बजा यार… आज तब्बू मैडम का मुजरा देखेंगे पहले!”

ये सुनकर मैं चौंकते हुए बोली, “नहीं… नहीं… पागल हो गये हो क्या…. मुझे नाचना नहीं आता!”

“अरे तब़्बू मैडम! क्यों नखरा कर रही हो! तुम क्या कटरीना या हिरोइन तब्बू से कम हो क्या… और गाने पे ठुमके लगाते हुए ज़रा अदा के साथ धीरे-धीरे नंगी ही तो होना है तुम्हें… वो क्या कहते हैं तुम्हरी अंग्रेज़ी में… स्ट्रिपटीज़!” उन्होंने कहा तो मैं उनकी बात मानने को राज़ी हो गयी।

चारों अपने-अपने गिलास लेकर ज़मीन पे बैठ गये और सुरिन्दर ने अपने स्मार्ट-फोन पे “चिकनी चमेली… छुप के अकेली… पव्वा चढ़ा के आयी…” लगा दिया। मैंने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और फिर बिना सलवार के सिर्फ़ कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील वाले सैंडल पहने एक आइटम-गर्ल की तरह अपने स्टूडेंट्स के बीच में नाचने लगी।

वो लोग “वाह-वाह” करने लगे। नाचते-नाचते मैं बारी- बारी से उनके करीब जाती और किसी को झुक कर चूम लेती तो किसी की टाँगों के बीच में पैर रख के लौड़े को सैंडल के पंजे से दबा देती। फिर एक लड़का खड़े हो कर मेरे साथ चिपक कर नाचने लगा और और मेरी कमीज़ की पीछे से ज़िप मेरी कमर तक खोल दी.

तो मैंने मुस्कुराते हुए उसे प्यार से धक्का मार के वापस बिठा दिया और नाचते हुए बड़ी शोख अदा से उन्हें तड़पाते हुए धीरे-धीरे अपनी कमीज़ उतारने लगी। कुछ ही लम्हों में मैं सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और हाई पेन्सिल हील के सैंडल पहने नशे में झूमती हुई अपने स्टूडेंट्स के सामने नाच रही थी।

चारों लड़के मस्त होकर पैंट के ऊपर से ही अपने लौड़े मसलने लगे। ये देख कर मैं भी और ज्यादा गरम हुई जा रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी ब्रा भी उतार के एक लड़के के चेहरे पर फेंक दी। इतने में गाना खतम हुआ तो सुरेंदर ने वही गाना फिर से चला दिया। मैंने अपने नंगे बूब्स उछालते हुए नाचना ज़ारी रखा।

उसके बाद मैंने अपनी गाँड मटकाते हुए धीरे-धीरे पैंटी अपनी टाँगों से नीचे खिसकानी शुरू की तो चारों लड़के आँखें फाड़े हवस-ज़दा नज़रों से मुझे देखने लगे। जब मैंने अपने पैरों से पैंटी निकाल के हवा में उछाली तो चारों उसे पकड़ने के लिये लपके लेकिन पैंटी उनमें से सबसे बिगड़े और बड़े लड़के कुलदीप के हाथ आयी।

वो फतेहाना अंदाज़ में इतराते हुए बैठ कर मेरी गीली पैंटी को सूँघने लगा। अब मैं सिर्फ़ ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल मादरजात नंगी उन लड़कों के बीच में नाच रही थी। मुझे अपने जिस्म पर बाल अच्छे नहीं लगते इसलिये मैं वैक्सिंग करके सिर के अलावा जिस्म के हर हिस्से को बालों से पाक रखती हूँ।

“अरे तबस़्सुम मैडम… साली तू तो मक्खन से भी ज्यादा चिकनी और गोरी है और तेरे गोल-गोल बूब्स कितने प्यारे हैं! इसकी चिकनी चूत भी कितनी गोरी है और गुलाबी है… आज तो मज़ा आ जायेगा इसे चोदने का! और गाँड भी कितनी सैक्सी है… आज साली रंडी की चूत फाड़ देंगे…! मैं तो रसीली गाँड भी मारुँगा साली तब़्बू मैडम की!”

ये सब तबसरे करते हुए चारों लड़के खुद भी अपनी स्कूल की युनिफॉर्म उतार के नंगे होने लगे। उनके नंगे जिस्म और खासतौर पे उनके तने हुए जवान लौड़े देख कर मेरी धड़कने तेज़ हो गयी और फरेफ्ता हो कर उनके लौड़े निहारने लगी। तने हुए चार नौजवान बे-खतना लौड़े मेरी हवस की आग बुझाने के लिये मौजूद थे।

चारों लौड़े मेरे मरहूम शौहर के लंड के मुकाबले काफी बड़े थे। उनमें से सबसे छोटा लंड कमज़ कम आठ इंच होगा और कुल्दीप का लंड तो दस-ग्यारह इंच से कम नहीं था। अचानक मुझे शराब का नशा पहले से बुलंद महसूस हो रहा था। ज़िंदगी में पहली दफ़ा जो शराब पी थी।

उनमें से एक लड़का बोला, “ऐसे आँखें फाड़े क्या देख रही हो त़ब्बू मैडम… ये चारों लौड़े आज तेरी जम के खूब चुदाई करेंगे कि तेरी सारी अकड़ निकल जायेगी… स्कूल में लड़कों की पिटाई करने का बहुत शौक है ना तुझे… आज इन लौड़ों से चुद के तेरी सारी फ्रस्ट्रेशन दूर हो जायेगी!”

“चल मैडम… पहले हमारे लौड़े तो चूस के चिकना कर…!” दूसरा लड़का मुझे नीचे बिठाने के मकसद से मेरे कंधे दबाते हुए बोला। चारों लड़के मुझे घेर के खड़े थे और जैसे ही मैं उनके बीच में उकड़ू बैठी तो एक लड़के ने अपना लंड मेरे चेहरे के आगे कर दिया। उसके लंड की चमड़ी में से बाहर झाँकती टोपी उसकी मज़ी से भीगी हुई थी।

मैं अपने शौहर का लंड कईं दफ़ा चूसती थी इसलिये मुझे इन लड़कों के लंड चूसने में कोई परहेज़ नहीं था। वैसे भी इस वक़्त मैं शराब और हवस के नशे में इस कदर मखमूर थी कि कुछ भी नागवार नहीं था। उस लड़के ने अपना लंड मेरे होंठों पे लगाया तो पेशाब और पसीने की तेज़ बू मेरी नाक में समा गयी लेकिन उस वक़्त मेरी कैफ़ियत ऐसी थी कि वो बू भी मेरे लिये शहवत-अंगेज़ थी।

उसके लंड में से चिकना सा मज़ी रिस रहा था। मैंने एक लम्हा भी ताखीर किये बिना अपने होंठ खोलकर उसके लंड की टोपी अपने मुँह में ले ली। उसका तीखा सा तल्ख ज़ायका भी वाकय में मुझे बेहद लज़ीज़ लगा। ठोस और सख्त होने के साथ-साथ उसका लौड़ा गुदगुदा और लचकदार भी था।

मेरे लरज़ते होंठों पे तपिश भरा मखसूस एहसास मेरी तिश्नगी बढ़ा रहा था। अपने मुँह के अंदर ही मैं अपनी ज़ुबान उसके लंड के सुपाड़े पे ज़ोर से चारों तरफ़ फिराने लगी जैसे कि वो कोई लज़ीज़ कुल्फ़ी हो। फिर अपने होंठ और ज्यादा खोल कर मैंने उसका लंड अपने मुँह में और अंदर तक ले लिया और बिल्कुल बेहयाई से मस्ती में अपने स्टूडेंट का लौड़ा चूसने लगी।

ये बे-खतना लौड़ा मेरे मरहूम शौहर के लंड के मुकाबले काफी बड़ा था। बाकी तीनों लड़के भी मेरे चारों तरफ़ खड़े थे। मेरे दोनों तरफ़ खड़े लड़के अपने लौड़े मसलते हुए मेरे दोनों गालों पे छुआ रहे थे और पीछे खड़े लडके का लंड मेरी गर्दन पे टकरा रहा था। अपने सामने वाले लड़के का लौड़ा चूसते हुए मैंने अपने दोनों तरफ़ खड़े लड़कों के लंड अपने एक -एक हाथ में पकड़ लिये और उन्हें मसलते हुए उनकी चमड़ी आगे-पीछे करने लगी।

चार-चार जवान तगड़े लौड़ों से घिरी हुई मैं बे-इंतेहा मस्ती के आलम में थी। कुछ ही देर में मैं ऐसे बारी-बारी से चारों के लंड बदल-बदल कर अपने मुँह में ले कर मस्ती में शिद्दत से चूसने लगी और साथ-साथ दोनों मुठियों में दो लौड़े मसलने लगी। मेरे दोनों हाथ दो लड़कों के लौड़ों पे मसरूफ़ होने की वजह से मेरे सामने जो भी लड़का मौजूद होता वो खुद अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर आगे-पीछे करते हुए चुसवाता और मैं भी पूरी शिद्दत से उनके लौड़े चूस रही थी।

उनकी मज़ी का ज़ायका जब मुझे अपनी ज़ुबान पे महसूस होता तो पूरे जिस्म में सनसनी लहर दौड़ जाती। कितना फ़ाहिश मंज़र था। एक टीचर अपने से कम उम्र के स्टूडेंट्स के बीच में उनसे घिरी हुई सिर्फ़ ऊँची हील वाले सैंडल पहने बिकुल नंगी बैठी उनके लौड़े चूस रही थी।

“हाय मैडम… क्या मस्त लंड चूसती है साली…. साली तब़्बू का मुँह इतना मज़ेदार है तो चूत कितनी गरम होगी… मज़ा आ गया… मस्त लंड-चुसक्कड़ है साली!”

उन लड़कों के फाहिश तबसरे मेरा जोश और हवस भी बढ़ा रहे थे। अपना लंड मेरे मुँह में चोदते हुए मस्ती में वो लड़के बाज़ दफ़ा अपना लंड मेरे हलक तक ठेल देते तो मेरी साँस घुट सी जाती लेकिन मुझे तड़पते देख कर वो कुछ लम्हों के लिये मेरे थूक से सना हुआ अपना लंड बाहर खींच लेते।

मैं खाँसते हुए ज़ोर-ज़ोर से लंबी साँसें लेती तो मेरी हालत पे हंस पड़ते और तबसीरे कसते, “अब पता चला तब़स्सुम मैडम… क्लास में थप्पड़ मार-मार के हमारे गाल सुजा देती है साली!” इसी तरह करीब आठ-दस मिनट मैं उनके लौड़े चूसती रही। इस दौरान मेरा मुँह और हलक़ भी उनके लौड़ों की जसामत से काफी हद तक मुवाफिक़ हो गये थे।

फिर जब एक लड़का बोला कि “चलो यारों… अब इस साली मुसल्ली तब़्बू को चोदना भी है कि नहीं!” तो उन्होंने अपने लौड़े मेरे मुँह और मुठियों में से निकाले। उनके तने हुए लौड़े मेरे थूक से बूरी तरह तरबतर थे और मेरे खुद के गाल, गला और छाती भी मेरे थूक से भीगे हुए थे। मैं वहीं ज़मीन पे अपने चूतड़ टिका कर बैठ गयी और पास पड़े अपने डुपट्टे से अपना चेहरा, गला और छाती पोंछने लगी।

इतने में दो लड़कों ने जल्दी से पाँच गिलासों में फिर से व्हिस्की और पानी मिला कर पैग तैयार कर लिये। मैं तो पहले से ही नशे में मखमूर थी तो मैंने कोई मुज़ाहमत नहीं की और अपना गिलास ले कर धीरे-धीरे पीने लगी। वो चारों भी खड़े-खड़े अपने पैग पी रहे थे। एक लड़का बोला, “वाह तब़्बु मैडम… कमाल का लंड चूसती हो… मज़ा आ गया!”

“वो सुहाना और फ़ातिमा तो बिल्कुल अनाड़ी हैं आपके सामने… तबस़्सुम़ मैडम जी अंग्रेज़ी के साथ-साथ लंड चूसना भी तो सिखाओ उन माँ की लौड़ियों को!” दूसरे लड़के ने कहा और फिर तीसरा बोला, “देखो तो चूस-चूस के हमारे लौड़े किस तरह भिगो दिये त़ब्बू मैडम ने अपने थूक से!” इतने में एक लड़का मेरे हाथ से मेरा आधा भरा गिलास लेते हुए बोला, “तो क्या हुआ दोस्तों… लो साफ़ कर लो अपने-अपने लौड़े!”

और ये कहते हुए वो अपना लंड मेरे गिलास में शराब में डुबा के हिलाने लगा। बाकी तीनों लड़के हंसने लगे और फिर उन तीनों ने भी बारी-बारी अपने लंड उस गिलास में डाल कर शराब से धोये। उसके बाद जब उन्होंने वो गिलास मुझे वापस पकड़ाया तो उनका इरादा समझ आते ही मैं हैरान रह गयी ओर थोड़ा गुस्से से बोली, “ये क्या बदतमीज़ी है… तुम लोगों का दिमाग तो ठिकाने पे है?”

“अरे मैडम जी… क्यों भड़क रही हो… अभी यही लौड़े तो मज़े से मुँह में लेकर चूस रही थी और इन पे लिसड़ा हुआ थूक भी तुम्हारा ही तो था…!” एक लड़के ने कहा तो इतने में दूसरा बोला, “अरे पी लो त़बस्सूम मैडम… बड़ा मज़ा आयेगा… चार-चार लौड़ों के मर्दाना फ्लेवर का मज़ा मिलेगा…!”
उन्होंने इसरार किया तो मुझे भी लगा कि वो सही ही तो कह रहे हैं और मैं ज़रा झिझकते हुए पीने लगी। ये देख कर वो खुशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाने लगे तो मेरे चेहरे पे भी मुस्कुराहट आ गयी। उसके बाद उन्होंने मुझे खड़ा किया और फिर एक लड़के ने पीछे से मुझे कंधे से पकड़ कर और एक ने आगे से टाँगों से पकड़ कर उठा लिया और सूखी घास पे लिटा दिया।

उनमें से सबसे बड़ा लड़का कुल्दीप मेरे ऊपर झुक कर मेर गालों पर, होंठों पर और गर्दन पर सब जगह चूमने लगा। उसका लंड बीच-बीच में मेरी चूत को छू जाता तो मुझे बिजली का झटका सा लगता और मैं सिसक जाती। फिर कुल्दीप गर्दन उठा कर अपने दोस्तों से बोला, “देख क्या रहे हो… आओ मिलकर तब़्बू मैडम की नशीली जवानी को शराब में मिलाकर पियेंगे…!”

उसके बाद बाकी तीनों भी मेरे करीब आ गये। एक लड़के ने मुझे कंधे से पकड़ कर बिठा दिया औरे मेरी दोनों तरफ़ अपनी टाँगें खोलकर मेरे पीछे बैठ गया। उसका लौड़ा मेरी कमर में चुभ रहा था। इतने में दो लड़के मेरे एक-एक पैर पे झुक गये और बोतल से थोड़ी-थोड़ी व्हिस्की मेरे सैंडल और पैरों पे उड़ेल कर उन्हें चाटने और चूमने लगे।

उन लड़कों को इस तरह अपने सैंडल के तलवे, हील और स्ट्रेप्स के बीच में से मेरे पैर शराब में भिगो कर चाटते देख मेरे जिस्म में अजीब सी मस्ती भरी लहरें उठने लगी। इसी तरह मेरे जिस्म को शराब में भिगोते हुए वो दोनों आहिस्ता-आहिस्ता मेरी टाँगों को चूमते और चाटते हुए मेरी रानों की जानिब बढ़ने लगे।

मेरी बगल में बैठा लड़का मेरे मम्मों पे अपने गिलास में से शराब उड़ेल-उड़ेल कर चाट रहा था और मेरे पीछे वाला मेरी गर्दन और कमर पे व्हिस्की उड़ेल कर चाट रहा था। इसी तरह कुछ देर वो चारों मेरे हुस्न को शराब में भिगो कर चूमते और चाटते रहे।

इतने में सुरिंदर बोला, “बस यार अब नहीं रुका जाता मुझसे… मैं तो अब तब्बू मैडम की चूत मारुँगा!” ये सुनके संज़य बोला, “गाड़ी मेरी… ये खेत मेरे बाप का तो पहले मैं चोदुँगा तब़्बु मैडम को!” इतने में कुल्दिफ बोला, “ओये इसको सुह़ाना और फात़िमा की हेल्प से इसे फंसाने का प्लैन मेरा था और बस में भी मैंने ही सबसे ज्यादा खतरा उठा कर तब़स्सुम मैडम की गाँड में उंगली करी थी तो इसकी चूत में मैं ही सबसे पहले अपना लौड़ा पेलुँगा!”

मुझे सबसे पहले चोदने के लिये उन लड़कों को इस तरह बहस करते देख मुझे बेहद अच्छा लगा और अपने हुस्न पे फ़ख्र सा महसूस हुआ। खैर कुळदीप ही एक बार फिर मुझे लिटा कर मेरे ऊपर आ गया और बाकी तीनों एक तरफ़ हो गये। कुल्दीप ही सबसे लम्बा-चौड़ा था और उसका लंड भी उनमें से सबसे बड़ा था।

कुलद़ीप मेरे ऊपर झुक कर मेरे होठों पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा। मैं भी उससे लिपट गयी और उसके होंठ और ज़ुबान चूसने लगी। मेरी कमर और चूतड़ों पर सूखा चारा रगड़ खा रहा था पर मेरे अंदर की हवस की आग मुझे इसका एहसास भी नहीं होने दे रही थी।

मेरे होंठों को चूमने के बाद कुल्दीप ने मेरे मम्मे भींच-भींच कर चूसे और चाटे। फिर से वो पास पड़ी बोतल उठा कर फिर से मेरे पेट और नाफ़ पे व्हिस्की उड़ेल कर उन्हें चाटने लगा। उसके बाद उसने दोनों हाथों से मेरे घुटने पकड़ कर मेरी टाँगें खोल दीं। जब वो मेरी चूत पे शराब डाल कर मेरी चूत चाटने लगा तो मैं मस्ती में पागल सी हो गयी।

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मेरे मरहूम शोहर ने भी कभी मेरी चूत को नहीं चाटा था। ये मेरे लिये बिल्कुल नया तजुर्बा था और मैं जोर-जोर से सिसकने लगी और उसके बाल अपनी मुठ्ठियों में जकड़ कर उसका चेहरा अपनी रानों में भींचने लगी। मेरा पेट अकड़ने लगा और चूत में फुव्वारे फूट पड़े। फिर उसने मेरी टाँगों के बीच में बैठ कर अपने अकड़े हुए सख्त लौड़े को मेरी चूत पे रख दिया तो मैं जोर से सिसक उठी “ऊँऊँम्फफ!”

“ओये कंडोम नहीं डालेगा क्या?” एक लड़के ने पूछा तो कुल्दीप बोला, “साला कंडोम लाया ही कौन है… पता थोड़ी था कि ये छिनाल त़ब्बू इतनी आसानी से आज ही चुदवाने के लिये तैयार होके दौड़ी चली आयेगी हमारे साथ!”

“कोई बात नहीं यार… इसे घर छोड़ते हुए रास्ते में केमिस्ट से आई-पिल दिलवा देंगे!” संज़य ने कहा।

“चल रंडी साली… कुत्तिया तब़स्सुम़ मैडम… तुझे स्वर्ग की सैर कराता हूँ!” कहते हुए कुलद़ीप ने अपना बे-खतना लौड़ा मेरी चूत में डालना शुरू किया।

मेरी चूत तो महीनों से चुदी नहीं थी और उससे पहले भी चुदी थी तो अपने मरहूम शौहर के लंड से जो लंबाई और मोटाई दोनों में कुल्दीप के लंड से आधे से भी कम था। इसलिये कुल्दीप को मेरी बेहद भीगी हुई चूत में भी अपना लंड दाखिल करने के लिये काफी ज़ोर लगाना पड़ रह था। दर्द के मारे मेरी ज़ोर से चींख निकल गयी तो उसने फौरन अपने होंठों से मेरे होंठों को सी दिया

और ज़ोर से अपना पूरा लौड़ा मेरी चूत में आगे ढकेलने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी से ने गरम-गरम लोहे की मोटी सलाख मेरी चूत में घुसेड़ दी हो। मैं अपना सिर भी नहीं हिला पा रही थी और उसके जिस्म के नीचे कुचली पड़ी हुई दर्द से छटपटा रही थी और वो था कि मेरी चूत फाड़ने पर अमादा था। इतना दर्द तो मुझे अपनी सुहागरात में अपने शौहर से पहली दफ़ा चुदवाने में भी नहीं हुआ था।

उसका लंड मेरी चूत में फंस-फंस कर जा रहा था तो उसने मेरे होंठों से अपने होंठ हटा लिये और मेरी कमर में अपनी बाँहें डाल कर जकड़ते हुए ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचते हुए अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसाने लगा। मेरी टाँगें छटपटा रही थीं और मैं अपनी मुठियों में सूखी घास भींचे हुए बे-तहाशा चींखने लगी, “आआआईईईई…. हाय…. अल्लाह के लिये छोड़ दो… प्लीज़… ऊऊऊँईईई कुऽऽलदीऽऽप बहोत बड़ाऽऽ है तेरा…!”

“और चिल्ला साली रंडी… और चिल्ला… तुझे कहा था ना कि आज तेरी चूत फाड़ देंगे… साली तब़्बू क्लॉस में बहुत मारती है ना!” वो बोला।

“प्लीज़ मुझे छोड़ो… आआआअहहह ईईईई! नहीं प्लीज़…” मैं गिड़गिड़ायी तो चारों हंसने लगे। “अभी बोल रही है छोड़ दो… पर जब दर्द चला जायेगा और मज़ा आने लगेगा तो डियर तब्बू मैडम… तुम ही बार-बार कहोगी कि मुझे चोद दो!” एक लड़का बोला।

“भोंसड़ चुदी! तू खुद ही तो अपनी मर्ज़ी से आयी थी ना चुदने के लिये… हम कोई ज़बरदस्ती नहीं लाये तुझे यहाँ पे…!” दूसरा लड़का बोला।

कुल्दीप ने इतने में अचानक से ज़ोर का झटका मारते हुए अपना तमामतर लौड़ा मेरी चूत में इतनी गहरायी तक पेल दिया जहाँ तक आज से पहले कोई चीज़ दाखिल नहीं हुई थी। इस अचानक हमले से मेरी ज़ोर से चींख निकल गयी, “आआआआईईईईई कुऽऽऽलद़ीऽऽऽप नहींऽऽऽ अळ्ळाऽऽहऽऽऽऽ रहम….!”

वो थोड़ी देर रुका तो मुझे दर्द थोड़ा कम होता महसूस हुआ लेकिन फिर उसने जब लौड़ा बाहर निकालना शुरु किया तो दर्द फिर शुरू हो गय। फिर वो अपने लौड़े को मेरी चूत में अंदर-बाहर करने लगा। कब मेरा दर्द खतम हुआ और कब मेरी दर्द भरी चींखें, गरम आहों और मस्ती भरी सिसकियों में तब्दील हो गयीं और कब मेरी छटपटाती टाँगें और बाँहें खुद-ब-खुद उसकी कमर में लिपट गयीं मुझे इसका पता भी नहीं चला।

जैसा कि उन्होंने कहा था, थोड़े दर्द के बाद मुझे इस कदर मज़ा आने लगा कि दिल कर रहा था कि ये चुदाई खतम ही ना हो। वैसे भी कमबख्त ये चुदाई खतम भी कहाँ हो रही थी। वो मेरे स्कूल का सबसे ताकतवर और बिगड़ा हुआ स्टूडेंट था और आसानी से कहाँ थकने वाला था।

अब तो मैं खुद भी मस्ती में सिसकती हुई अपने चूतड़ उठा-उठा कर चुदवा रही थी। मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मेरे जैसी पाक और परहेज़गार और स्ट्रिक्ट टीचर एक दिन इस तरह शराब पी कर बिल्कुल नंगी होकर सूखी घास के ढेर पे सिर्फ़ ऊँची हील के सैंडल पहने अपने ही स्टूडेंट के नीचे लेटी हुई उसके लंड से पुर-जोश अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदवा रही होगी।

पता नहीं कितनी दफ़ा मेरा जिस्म अकड़ा… पर जब भी मेरा जिस्म अकड़ता तो मेरी टाँगें और बाँहें उसकी कमर पर ज़ोर कस जाती और फिर जब मैं झड़ जाती तो मेरी टाँगें और बाँहें भी कुलद़ीप की कमर पे ढीली पड़ जाती। लेकिन वो कमबख्त काफी देर बाद झड़ा और झड़ा भी मेरी चूत में कहीं दूर अंदर तक।

मुझे मेरी चूत के गहराइयों में कहीं गरम-गरम फुव्वारा छूटता महसूस हुआ। वो हाँफते हुए मेरे ऊपर गिर पड़ा लेकिन फिर संभल कर मुझे थोड़ी देर किस करने के बाद मेरे ऊपर से हटा। मैंने देखा की मेरी गाँड के नीचे और आसपास की सुखी घास मेरी चूत से कईं दफ़ा खारिज़ हुए पानी से भीग चुकी थी।

इतनी दफ़ा झड़ने के बावजूद मेरा जोश कम नहीं हुआ था क्योंकि कुल्दीप के मूसल जैसे लौड़े से चुदने के बाद मुझे चूत में बेहद खालीपन महसूस हो रहा था और चूत में लंड लेने की तलब बरकरार थी। इसके अलावा मुझे पता था कि अभी तो शुरुआत है। अभी तो तीन और लौड़े मेरी चूत चोदने के लिये बेताब थे।

कुल्दीप हटा तो मेरा दूसरा बिगड़ा स्टूडेंट संज़य जिसे पता नहीं क्यों मैं पहले सबसे ज्यादा नफ़रत करती थी और जिसकी सबसे ज्यादा और खतरनाक पिटाई करती थी वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे गालों और होंठों को चूमते हुए बोला, “मेरी प्यारी अखतर मैडम… अब मेरी बारी है… आज मुझे कुछ पढ़ाओगी नहीं! ओह सॉरी मैं तो भूल ही गया था… आज तो मैंने आपको सिखाना है कि अपने प्यारे स्टूडेंट की रंडी कैसे बनते हैं!” और वो मेरे होंठों को ज़ोर से चूमने लगा।

वो मुझे चूम भी रहा था और एक हाथ से मेरी छाती मसल रहा था और एक हाथ से मेरी कमर की साइड को सहलाते हुए मेरी बाँह सहला रहा था। उसका लौड़ा भी करीब-करीब कुळ्दी़प के लौड़े के मुकाबले का ही था और मुझे वो अपनी चूत और रानों के बीच में रगड़ता हुआ महसूस हो रहा था। मैं मस्त हो गयी थी और मेरी हवस फिर से भड़क उठी थी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं उससे लिपट गयी और उसे किस करने लगी।

“ऊँहह… संजेऽऽय तुम मेरे सबसे अज़ीज़ स्टूडेंट हो गये हो आज!” हवस और शराब के नशे में पता नहीं कहाँ से मेरे मुँह से निकला। मैंने उसकी छाती को किस किया तो उसने मुझे मेरे सिर के बालों से पकड़ कर पीछे खींचा और मेरी गर्दन पर किस करने लगा। फिर मुझे उलटा करके मेरी कमर और मेरी गर्दन को पीछे से किस करने लगा और मेरे कान में बोला, “त़बस्सुम़ मैडम जी! कुल्दीप ने तो आपकी चूत मारी लेकिन मैं तो आपकी गाँड मारुँगा!”

ऐसा कह कर उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मेरे चूतड़ ऊपर उठा दिये। अब मैं अपना सिर आगे झुका कर सूखी घास के ढेर पर टिकाये और कुहनियों और घुटनों के बल कुत्तिया बनी हुई थी। मेरी गाँड हवा में उठी हुई थी। उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ पकड़ कर उन्हें खोला और एक उंगली को थूक लगा कर मेरी गाँड पे रगड़ा।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। क्या वो वही करने जा रहा था जो मैं सोच रही थी। मैं बेहद डर गयी। मेरे धड़कने बढ़ गयीं और पसीना आ गया। मैंने अपनी टाँगों के बीच में से अपनी गाँड के पीछे लटक रहे उसके टट्टों को देखा और उसके तने हुए लौड़े को देखा जो कमज़-कम दस इंच का था।

उसने मेरी कमर को दोनो हाथों से पकड़ा और अपना लौड़ा मेरी गाँड के मुँह पर रखा तो मैं खौफ़ज़दा होकर गिड़गिड़ाते हुए बोली, “नहीं संजय! अल्लाह् के लिये ये ज़ुल्म ना करो… मैंने वहाँ कभी नहीं करवाया पहले…. मैं वहाँ पे तुम्हारा लौड़ा बर्दाश्त नहीं कर सकुँगी! प्लीज़ वहाँ नहीं…!”

पिछली कुछ दो घंटों में उनकी सोहबत का मेरे ऊपर इतना असर हुआ कि ज़िंदगी में पहली दफ़ा मैंने “लौड़ा” जैसे गंदे और फ़ाहिश अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल किया और उस वक़्त तो मुझे इस बात का एहसास तक भी नहीं हुआ। लेकिन उसने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे अपनी जानिब खींचते हुए अपना लौड़ा मेरी गाँड के छेद में ढकेल दिया।

दर्द के मारे मेरी चींखें निकल गयी, “आआआआईईईईई सऽऽन्जयऽऽऽ मरररऽऽऽ गयीऽऽऽऽऽ मैं… अळ्ळाहहहऽऽऽ नहींऽऽऽ!” उसके लौड़े का सुपाड़ा अभी आधा इंच भी अंदर नहीं गया था कि मेरी गाँड फट के हाथ में आ रही थी। मेरी आँखों में आँसू आ गये और मैं चींखे जा रही थी।

मैंने कुहनियों के बल आगे भागने की कोशिश की पर उसकी मजबूत बाँहों ने मुझे कमर से जकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया। “कहाँ जा रही है तब्बूमैडम मेरी जान… बड़ा दुख दिया है तूने क्लॉस में… आज मेरी बारी है… चल इधर आ जा मेरी तब़्बूजान!” वो बोला।

उसने और जोर लगाया तो मुझे उसके लौड़े से अपनी गाँड चीरती हुई महसूस हुई। उसका लौड़ा आहिस्ता-आहिस्ता गाँड के अंदर सरकने लगा। मैं रोते हुए दर्द से छटपटाती हुई ज़ोर-ज़ोर से चींख रही थी “आआऊ… आआऊ… नहीं…. प्लीऽऽ… आआऊ… अल्ल्ल्लाहहह… आआऊ… मर गयीऽऽऽ… संजेऽऽयऽऽ बाहर… बाहर निकाल ले ज़ालिम… ऊऊऊऊहहह अल्ल्लाहऽऽऽ चीर दिया मुझे!”

मेरी गाँड बुरी तरह फैल गयी थी और बे-इंतेहा दर्द बर्दाश्त के बाहर था। तीन-चार मिनट ही लगे होंगे उसे अपना तमाम लौड़ा मेरी सूखी गाँड में घुसाने में लेकिन मुझे लगा जैसे कि बर्सों लग गये हों। दर्द के मारे मैं करीब-करीब बेहोश ही हो गयी थी।

“अरे भोंसड़ी की तऽऽब्बू मैडम… सब्र कर ज़राऽऽ… अभी अच्छा लगने लगेगा तुझे!” वो बोला और फिर उसने भी अपना लौड़ा अंदर बाहर करना शुरू किया। मैं सुबकते हुए जोर-जोर से कराह रही थी “ओहहह आआऊ… ओहह अल्लाआहहह… आआउ… आआह….” लेकिन कुछ देर बाद दर्द कम होने लगा और मुझे अजीब से मज़े का एहसास होने लगा… दर्द और मज़े का मिलाजुला एहसास।

मैं वैसे ही कराहती रही लेकिन अब दर्द के साथ बेहद मज़ा भी आ रहा था और मैं नीचे से एक हाथ पीछे ले जाकर अपनी चूत रगड़ने लगी। जब उसने मेरी गाँड में अपनी मनी इखराज़ की तब तक मैं दो-तीन दफ़ा झड़ गयी। वो उतरा तो मैं घूम के घास के ढेर पे पीठ के बल लेट गयी।

गाँड में हल्का सा दर्द का एहसास अभी भी था तो मैं हाथ से अपनी गाँड का मुआयना करने लगी। चारों लड़के हंसते हुए बोले, “चिंता ना करो तबस़्सुम़ मैडम… कुछ नहीं हुआ… बिल्कुल ठीक है तुम्हारी गाँड… देखो कैसे फैल के खुल गयी है… लगता है और लंड माँग रही है ये!”

संज़य ने मेरी गाँड मार के मुझे मुख्तलिफ़ मज़े से वाक़िफ़ करवाया था लेकिन फिर भी चूत में खालीपन का एहसास और उसमें लंड लेने की बेकरारी बरकरार थी। मुझे पता था बाकी दोनों लड़के भी बेकरार हो रहे थे मुझे चोदने के लिये। मैं बस यही दुआ कर रही थी कि वो दोनों मेरी गाँड ना मारें और बस मेरी चूत की धुंआधार चुदाई कर दें। तीसरे लड़के सुरेंदर ने ज्यादा वक़्त ज़ाया नहीं किया और मेरे ऊपर आ गया।

उसका लंड पहले दोनों लड़कों से लंबाई में ज़रा कमतर ज़रूर था लेकिन फिर भी तकरीबन आठ-नौ इंच लंबा था और उसके लंड की खासियत ये थी कि चारों लड़कों में सबसे ज्यादा मोटा था। चूसते वक़्त भी उसकी गैर-मामूली मोटाई की वजह से मुझे सुरिंदऱ का लंड मुँह लेने में सबसे ज्यादा तकलीफ हुई थी।

सुरिंदर ने मेरे ऊपर आते ही लौड़े की टोपी चूत के लबों के दर्मियान दबाते हुए एक ही धक्के में अपना तमाम लौड़ा ज़ोर से मेरी भभकती चूत में पेल दिया। इस तरह अचानक हमले से मेरी ज़ोरदार चींख निकल गयी। उसका मोटा लंड लेने के लिये मेरी चूत की दीवारों को फ़ैलाते हुए एक दफ़ा तो हद्द से ज्यादा खिंचाव बर्दाश्त करना पड़ा लेकिन उसका लंड मेरी रसीली चूत में दाखिल होने के बाद फिर तकलीफ कम हो गयी। मेरी चूत अब उसके लौड़े से ठसाठस भर गयी थी।

मस्ती में मैंने अपनी टाँगें उसकी कमर पे लपेट कर कैंची की तरह कस दीं और वो पागलों की तरह मुझे वहशियाना तरीके से दनादन चोदनए लगा। “ऊँऊँह सुऽऽऽरिंदऱऽऽऽ आँआह…” मैं अलमस्त होकर सिसकने और आहें भरने लगी। मुझे चोदते हुए वो मेरे मम्मों पे झुका हुआ मेरे निप्पल और मम्मे मुँह में लेकर चूसने और काटने लगा।

कुछ ही देर में मेरा जिस्म अकड़ा और चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन उसने मुझे चोदना ज़ारी रखा। इतने में चौथा लड़का अनिल बोला, “जल्दी करो यार… मुझसे अब और इंतज़ार नहीं हो रहा!” तो सुरिंदर ने मेरी चूत में दो-तीन ज़ोरदार धक्के मारे और मेरी कमर में बाँहें डाल कर अपना लौड़ा मेरी चूत में गहरायी तक घुसाये हुए ही घूम कर पलट गया जिससे कि अब मैं उसके ऊपर आ गयी।

मैं इस कदर मस्ती के आलम में थी कि उसके ऊपर आगे झुकी हुई मैं उसके लौड़े पे ऊपर-नीचे उछलने लगी। वो भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर मेरी चुत में लंड ठोक रह था। इतने में सुरेंदर हाँफते हुए बोला, “आजा अनि़ल! साथ में चोदते हैं इस माँ की लौड़ी तबससुम मैडम को!”

सुरिंदर की बात मुझे समझ नहीं आयी कि दोनों कैसे एक साथ मुझे चोद सकते हैं। पिछले तीन-चार दिनों में इंटरनेट पे जो मैंने कुछ-एक ब्लू-फिल्में और गंदी तसवीरें देखी थी तो उनके हिसाब से तो मुझे लगा शायद अनिल मेरे मुँह में लंड डाल कर चुसवायेगा। लेकिन जब मुझे उसके हाथ पीछे अपने चूतड़ों पे महसूस हुए और फिर अगले ही लम्हे उसके लंड का सुपाड़ा अपनी गाँड के छेद पे महसूस हुआ तो मेरी साँसें हलक़ में ही अटक गयीं।

“हाय अल्लाह! ये कैसे मुमकिन है!” मैं तो ख्वाब में भी इस तरह की चुदाई का तसव्वुर नहीं कर सकती थी। इससे पहले कि मैं कुछ रद्दे-अमल कर पाती, अनि़ळ ने एक ही धक्के में बेहद बेरहमी से आठ-नौ इंच लंबा अपना तमाम बे-ख़तना लौड़ा मेरी गाँड में अंदर तक पेल दिया।

कुछ देर पहले संजय के लौड़े से चुदने के बाद मेरी गाँड खुल तो गयी थी लेकिन अनिल ने जिस बेरहमी से अपना लंड एक बार में पेला और फिर चूत में भी सुरिंदर का मोटा लौड़ा मौजूद होने के वजह से मैं दर्द के मारे ज़ोर से चींख पड़ी, “नहींईईंईंईंईं अऽऽनिलऽऽऽ…. रुक जाओ ओ ओ ओ ओ…. मर गयीईईई…!

एक दफ़ा फिर मेरी आँखों में आँसू आ गये। मेरे दोनों स्टूडेंट मिलकर मेरी चूत और गाँड एक साथ चोदने लगे और मैं सुबकती हुई कराहने और चींखने लगी। चारों लड़के कुछ-कुछ तबसीरे कर रहे थे। गनिमत है कि इस दफ़ा दो-तीन मिनट में ही दर्द का एहसास कम होना शुरू हो गया। मैं सिसकते हुए बोली, “हाय अल्लाह़! तुम लड़कों का दिमाग खराब हो गया क्या… आहहह…. ऊम्म्म ये क्या कर रहे हो… ऐसे भी कोई करता है क्या… ऊँहहह!”

इस दोहरी चुदाई में मुझे अजीब सा मज़ा आने लगा था। एक लंड पीछे खिसकता तो दूसरा लंड अंदर फिसलता। गाँड और चूत के दर्मियान की झिल्ली पे मुझे उन दोनों लड़कों के लौड़े आपस में रगड़ते हुए महसूस हो रहे थे। दोनो लड़के वहशियाना जुनून में अपने लौड़े मेरे दोनों छेदों में बेहद तालमेल के साथ चोद रहे थे।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरी चूत और गाँड एक हो गयी थीं जिसमें दो अज़ीम लौड़े एक साथ अंदर-बाहर चोद रहे थे। मेरे जिस्म के रोम-रोम में हवस के शोले भड़क रहे थे और बिजली का करंट दौड़ता हुआ महसूस हो रहा था। मेरी मस्ती भरी कराहें उस छोटे से कमरे में गूँजने लगी।

ज़िंदगी में मैंने कभी इस कदर लुत्फ़ महसूस नहीं किया था। मेरी चूत ने इस दौरान तीन-चार दफ़ा पानी छोड़ा और फिर दोनों लड़कों ने भी तकरीबन साथ-साथ ही मेरी चूत और गाँड में अपनी-अपनी मनी भर दी। उसके बाद एक दफ़ा फिर चारों ने अपने-अपने लौड़े मुझसे चुसवाये।

उस वक़्त शराब के सुरूर और जिस्मानी लुत्फ़ और सुकून की कैफ़ियत में मैंने अपनी चूत और गाँड में से निकले उनके बेहद नाजिस लौड़े भी खूब शौक़ से मज़े ले कर चूसे। इस दफ़ा चारों ने अपना-अपना रस मेरे मुँह में और चेहरे पर इखराज़ किया।

तब तक शाम हो चुकी थी और मैं बेखुद सी होकर ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी घास के ढेर पे लेटी थी। मैं उनके लौड़ों के रस से भर चुकी थी। लिहाजा अब मुझसे सुबह वाली पर्फ़्यूम की खुशबू नहीं बल्कि शराब और उनके लौड़ों के रस की मस्तानी सी महक आ रही थी। मैं उठ कर अपनी सलवार और कमीज़ की जानिब जाने लगी तो थकान और नशे में ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।

“अरे तब्बू मैडम… इतना ज़ोर मत दो… कमर लचक जायेगी… इस हालत में घर कैसे जाओगी… आओ पहले नहला दें तुम्हें!” एक लड़का बोला और मुझे नंगी को ही गोद में उठा के कमरे के बाहर पानी की मोटर के सामने पानी से भरी हौज़ में फेंक दिया। मुझे सैंडल उतारने का मौका भी नहीं दिया उन्होंने।

सूरज डूबने से अंधेरा होने लगा था लेकिन आसमान में हल्की सी लाली अभी भी थी। फिर चारों लड़के खुद भी हौज़ में मेरे साथ कूद गये और हम पाँचों दस-पंद्रह मिनट एक दूसरे के साथ छेड़छाड़ करते हुए पानी में नहाते रहे। जब हम हौद में से नहा कर निकले तो थकान और नशा भी पहले से कम महसूस हो रहा था। चारों लड़कों ने अपने साथ-साथ मेरा जिस्म भी एक तौलिये से पौंछा। उन्होंने खुद अपने कपड़े तो पहन लिये लेकिन मुझे उन्होंने कपड़े पहनने नहीं दिये।

मैं खुले खेत में ऊँची पेंसिल हील की सैंडल पहने बिल्कुल नंगी खड़ी थी और हैरत की बात है मुझे ज़रा सी भी शरम महसूस नहीं हो रही थी। अपने कपड़े पहनने के बाद उनमें से एक लड़का मुझे चूमते हुए बोला, “चलो तबस़्सुम मैडम… अब तुम्हें घर छोड़ दें!” फिर उसने मुझे नंगी को ही गोद में उठा लिया और टाटा सफ़ारी में ले गया। मैंने देखा कि एक लड़का मेरा पर्स और सारे कपड़े इकट्ठे करके ले आया। सब कार में बैठ गये और मेरे घर की जानिब चल पड़े। करीब आधे घंटे का ही रास्ता था। रास्ते में चारों लड़कों ने बारी-बारी अपनी सीट और ड्राइवर बदल-बदल के मुझे खूब चूमा और मसला।

मेरी शर्म-ओ-हया तो बिल्कुल काफ़ूर हो ही चुकी थी और मैं सरगर्मी से उनका पूरा साथ दे रही थी और मज़े ले रही थी। उनमें से कोई मेरे गुदाज़ रसीले मम्मों का ज्यादा दिवाना था तो कोई मेरी हसीन गाँड को ज्यादा तवज्जो दे रहा था। एक दिलचस्प बात ये थी कि ऊँची पेन्सिल हील की सैंडल में मेरे खूबसूरत पैरों पे चारों लड़के फ़िदा थे और चारों ने मेरे सैंडलों और पैरों को काफ़ी चूमा चाटा। इस दौरान थोड़ी सी शराब जो बोतल में बाकी रह गयी थी वो भी उन्होंने बातों-बातों में मुझे ही पिला दी।

मेरी गांड का कांड हो गया

(Hot Ladki Gand Fuck Kahani)

दोस्तो, मेरा नाम मालती है. मेरी हाइट 5 फिट 2 इंच है और रंग मीडियम गोरा है.
मेरी फिगर साइज कुछ इस तरह से है. सीना 32 इंच, कमर 26 इंच और गांड 36 इंच की है जो कि बहुत बाहर निकली हुई है.
जब मैं गांड मटका कर चलती हूँ, तब जवान लड़कों की बात तो छोड़िए, बूढ़े आदमी भी चश्मा लगा कर गांड की थिरकन देखते हैं.

और आजकल तो दिन पर दिन मेरी गांड का साइज बढ़ता जा रहा है.

अभी मेरी उम्र 26 साल की है, पर मैंने आपको जहां सन 2017 में छोड़ा था, आज की सेक्स कहानी को मैं वहीं से शुरू करूंगी क्योंकि इन 6 सालों में मेरी लाइफ में अनेकों सेक्सी घटनाएं घटी हैं.

उन सभी को मैं एक एक करके सेक्स कहानी के रूप में आपके सम्मुख पेश करूंगी.

दोस्तो, आपने मेरी 6 साल पहले लिखी हुई कहानियां पढ़ी होंगी!
अगर नहीं पढ़ी हैं, तो प्लीज पहले पढ़ लो क्योंकि मेरी कहानियों से सिर्फ लड़कों के लंड ही खड़े नहीं होते, उनके लंड के नीचे के पहरेदार यानि टट्टों में भी नए खून का संचार होने लगता है.

लड़कियों की चूत की गहराई में बच्चेदानी तक में झनझनाहट होने लगती है और उनकी चूत का पानी टपकने लगता है.
ऐसा मेरे पाठक पाठिकाएं मेल द्वारा बताते हैं.

इसी लिए कह रही हूँ दोस्तों कि यदि आपने मेरी कहानियां नहीं पढ़ीं, तो प्लीज जरूर पढ़ें.

मेरा दावा है कि आपके लंड या चूत में पानी ना आ जाए, तो आप इस मालती को भूल जाना … और यदि आपने पढ़ी हैं … तो भी मेरे प्यारे दोस्तो प्लीज़ फिर से पढ़ो, जिससे पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी.

मेरी सहेली ने मुझे बिगाड़ा … और गर्म कर खोल दिया नाड़ा
भोला भाई और चुदक्कड़ बहन
चूत चुदाई का चस्का, चलती बस में चुदाई.
छोटी बहन की कामुकता जगाकर बुर चोदन करवाया
गांड बची तो लाखों पाये
कामवासना से बेबस मैं क्या करती

दोस्तो, मैंने कितने दर्द सहे हैं, यह मैं आपको लिख कर तो बता सकती हूं … पर महसूस नहीं करा सकती.
मालती का दर्द मालतीही जाने.

जब पापा ने मुझे फिर से चुदवाते हुए रंगे हाथ अपने ही घर में देख लिया, तो वे भड़क गए.
उसके बाद तो मेरी जो पिटाई हुई, वह मैं कभी भूल ही नहीं सकती.
बाप ने डंडों से ऐसी गांड बजाई और पीटी कि वैसी हालत कभी मेरे दुश्मन की भी ना हो.

पापा की पिटाई से सारी रात मेरी सूजी हुई गांड ने दर्द दिया और मुझे सोने ही नहीं दिया.
मैं उल्टी सोती, तो मुझे नींद नहीं आती. पर मैं क्या करती.

इस पिटाई के बाद मैंने पक्का ठान लिया था कि अब मैं खुद को काबू में रखूंगी, चाहे कुछ भी हो.
मेरी खुद की चूत मेरा नहीं मानेगी, तो मैं साली को चाकू से काट कर कुत्तों को डाल दूंगी.

यह मैं स्टाम्प पेपर में लिखकर देती हूं.

मैंने फिर से ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया कि मैं सुधर जाऊंगी और जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, तब तक मैं लंड का मुँह तक नहीं देखूँगी.
कम से कम ऐसे दिन तो देखने ना पड़ेंगे.

मुझे ठीक होने में बीस दिन लगे.
वह बीस दिन का दर्द मैं कभी नहीं भूल सकती.

चार दिन तक में चल बैठ नहीं सकी, सात दिन तक मेरी प्यारी बाहर निकली मक्खन जैसी गांड ने खूब दर्द किया.

दोस्तो, दिन बीतते गए.
मैंने अपनी चूत चुदाई पर कंट्रोल करना सीख लिया था.

परंतु हमारे अड़ोस पड़ोस वाले मुझे ऐसे घूरते मानो मैंने कोई बड़ा कांड कर दिया हो … जैसे किसी आंतकवादी संगठन से मेरा नाता हो और ग्यारह मुल्क की पुलिस मुझे ढूंढ रही हो.

उन्हीं दिनों पड़ोस में एक शादी थी.
उधर जाने का न्योता आया तो मैं और मेरे परिवार के लोग वहां डिनर करने गए.

वहां मुझे मेरी कई सहेलियां मिलीं परन्तु कई सहेलियों ने मुँह फेर लिया तो कई मुझसे डरते डरते बात कर रही थीं.
बात करते समय उनकी आंखें इधर उधर देख रही थीं मानो उन्हें डर हो कि कोई देख ना ले!

मेरी एक पुरानी और पक्की सहेली भी वहीं आई थी.
वह मेरे साथ पहली क्लास से बारहवीं कक्षा तक मेरे साथ रही थी.
उसका नाम नेहा था, वह मुझ से बात कर रही थी.

तभी उसके पापा और मम्मी आए और मेरी तरफ घूरकर नेहा से बोले- घर चलो नेहा बेटी. कैसे कैसे बेशर्म लोगों को शादी में बुलाया है.
यह कहकर कुछ कुछ बड़बड़ाते हुए वे लोग नेहा को लेकर चले गए.

इस घटना ने मुझे अन्दर से हिला डाला.

मेरी सब पुरानी सहेलियां मुझसे दूर हो गईं और लोग मुझे देखकर आपस में खुशफुस करते हुए हंसने लगे.

मुझे खुद को भी ऐसा लगने लगा कि मैं कोई बहुत बड़ी वाली छिनाल हूं.

शादी से लौटकर हम सब घर आए तो मेरा चेहरा उतरा हुआ था.

मैं अपने कमरे में जाकर रोने लगी.
मेरा रोना बन्द ही नहीं हो रहा था.

तभी वर्षा कमरे में सोने आई और मुझे देखकर बोली- क्या हुआ मालती दीदी?
मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी

वह समझ गई और बोली- मालती दीदी, यह दुनिया खराब है, जो पकड़ा जाए वह चोर है … बाकी सब साधु हैं. तुम जरा सा भी टेंशन ना लो. थोड़े समय बाद सब भूल जाएंगे, सब सामान्य हो जाएगा. दुनिया में ऐसा ही चलता रहता है.

ऐसी घड़ी में मेरी छोटी बहन वर्षा ने मुझे हमेशा सहारा दिया है.

उसने हंसते हुए यह भी कहा- दीदी, लड़कियों की चूत चुदाई के लिए ही बनी है और लड़कों का लौड़ा चूत चुदाई के लिए ही बना होता है. कोई गड्डा खुदाई के लिए नहीं होता है.

अपनी छोटी बहन वर्षा की इस तरह की खुली बातें सुनकर मुझे बड़ा सुकून मिला और हम दोनों बहनें सो गईं.

अब एक महीने से ज्यादा हो गया था.
इस दरमियान मेरे मन में चुदाई का एक भी विचार नहीं आया था.

एक रात मुझे अचानक सपना आया.
सपने में डोरबेल बजी.

मैं घर में अकेली थी.
मैंने दरवाजा खोला तो किशोर आया था.
किशोर के बारे में जानने के लिए मेरी कहानी
कामवासना से बेबस मैं क्या करती
पढ़ें.
उसे देख कर मैंने जैसे ही दरवाजा बंद करना चाहा तो वह मुझे धक्का देकर घर के अन्दर आ गया.

मैं कुछ करती … तब तक वह दरवाजा बंद भी कर चुका था.

वह मुझे अपनी बांहों में भरकर बोला- मेरी प्यारी मालती डार्लिंग, मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता. मुझे माफ कर दो.
इतना कह कर वह अपनी पैंट की जिप खोलकर मुझे अपना लंड दिखाने लगा.

उसको पता था कि मेरी मजबूरी क्या है.
मैं जब भी लंड देख लेती हूं, फिर मुझसे रहा नहीं जाता.

मैं उसका लंड देखना नहीं चाहती थी इसलिए मैं दूसरी तरफ घूम गई.
मैंने गुस्से से किशोर से कहा- कितने बेशर्म हो तुम … मेरे घर से बाहर निकलो विश्वासघाती कुत्ते कहीं के … नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी!

किशोर बोला- माया, तुम्हारी भरी भरी बाहर निकली गांड को मैं कभी भूल नहीं सकता. प्लीज़ मुझे एक और आखिरी बार माफ कर दो!
मैं बोली- जब मेरी इस गांड पर लाठियां बरसाई गईं, तब तुम तो मुझे अकेला मार खाने के लिए छोड़कर भाग गए थे. तुम मेरे पापा के सामने नहीं बोल सके कि तुम मुझसे प्यार करते हो … उल्टा तुमने मेरे पापा को बुड्ढा बोला और सब आरोप मुझ पर ही लगा दिए … और तुमने न जाने क्या क्या बोला था कि तुम्हारी बेटी को मेरा लंड पसंद है … मुझे उसकी शक्ल तक पसंद नहीं है! वह सब मैं कैसे भूल सकती हूं? तुमने मेरे दिल को तोड़ दिया था!

किशोर बोला- सॉरी मालती मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी थी सॉरी … सॉरी हजार बार सॉरी!
यह कहकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरा मुँह अपने हाथ से दबा दिया.

वह जबरन मुझे गले में किस करने लगा और अपना लंड मेरी गांड में बिना सलवार खोले दबाने लगा.
मैंने काफी कोशिशें की उससे छूटने की, पर सब नाकाम रहीं.

फिर वह अपना एक हाथ मेरी सलवार में डालकर चूत पर रगड़ने लगा.
मैं बहुत छटपटाई, पर उसके ताकतवर हाथों से छूट ना सकी.

उस वक्त मैं उन्नीस साल की कमसिन कली. वह पच्चीस साल का गबरू पत्थर उठाने वाला लोहे जैसा सख्त हाथ वाला मर्द था.
वह कोई कप्यूटर की-बोर्ड चलाने वाले लड़कियों जैसे मखमली हाथ वाला झण्डू नहीं था.

उसने करीबन दस मिनट तक बिना कुछ बोले मेरी चूत को रगड़ा.
इससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मेरी सांसें तेज होने लगीं.

उसने अपना हाथ मेरे मुँह से हटा लिया.
पर मेरे मुँह से आह आहहह की आवाज निकलने लगी थी.

मैं इतनी मदहोश हो गई थी कि उसके हाथ को अपनी चूत पर दबाने लगी- आहह आह ओहह करते रहो … आह!

अब किशोर का दूसरा हाथ मेरे स्तन दबाने लगा.
मैं गर्मा गई और कहने लगी- आह और दबाओ … दबाते रहो आह हह आह … मसल डालो मुझे … आह!

वह और जोर जोर से मेरे स्तन मसलने लगा.
मेरे स्तन लाल हो चुके थे.
मुझे काफी दर्द हो रहा था और मेरी आंखों से पानी भी निकल रहा था.

पर दोस्तो, मुझे यह दर्द फिर भी मीठा लग रहा था.
मैं जोरों से चिल्ला रही थी- और जोर से दबाओ किशोर आह हह!

किशोर ने मुझे पीछे से पकड़ा हुआ था.
उसने मुझे घुमा कर अपनी तरफ कर लिया.

मेरी आंखें बंद थीं.
वह मेरी तरफ देखने लगा.
मेरी आंखों से आंसुओं की धाराएं बह रही थीं.

मैं आंखें बंद किए हुई जोरों से चिल्ला रही थी- आह किशोर … और दबाओ मेरे स्तनों को निचोड़ दो … आहह!

तभी उसने मेरे स्तनों को दबाना रोक दिया.
मेरी आंखें खुल गईं.

मैंने गहरी सांस लेते हुए, कांपते लबों से उससे पूछा- क्या हुआ किशोर … रुक क्यों गए?
वह बोला- तेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं और तेरे चूचे भी लाल होकर सूज गए हैं. तुझे दर्द हो रहा है क्या?

मैं मदहोशी में बोली- दर्द होने दो ऐसे दर्द से मुझे खुशी मिलती है … कुछ नहीं होगा यार … दो चार दिन मेरे चूचे दर्द करेंगे और ज्यादा से ज्यादा दो दिन बुखार हो जाएगा, पर तुम अपनी हसरत पूरी करो!

उसने मेरे स्तनों को छोड़ दिया और घुटनों के बल बैठकर मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मेरी चूत चाटने लगा.

मेरी आंखें फिर से बंद हो गईं और अपने आप मेरे मुँह से आह की आवाज निकलने लगी.
पूरे रूम में मेरी आहह आह की आवाज ही गूंज रही थी.

किशोर को भी चूत चाटने का गजब का अनुभव था.
वह अपनी जीभ को मेरी चूत की गहराई तक अन्दर बाहर करता और बीच बीच में मेरी चूत की बाहर निकली हुई पंखुड़ियों को अपने दांतों से हल्का सा काटता तो मुझे स्वर्ग सी अनुभूति होती.
मेरे मुँह से आह निकल जाती और मैं उसका सिर अपनी चूत पर दबा देती.

करीब दस मिनट तक उसने मेरी चूत को चाटा.
फिर उसने मुझे जमीन पर ही उल्टा लिटा कर मेरे दोनों चूतड़ों को अपने ताकतवर हाथों से फैलाया और अपनी जीभ मेरी गांड की रिंग पर फेरने लगा.

वह बोला- कितने दिनों से तेरी गांड नहीं मारी मालती… तेरी गांड पर तो मैं सारी दुनिया कुर्बान कर दूं माया!
फिर उसने मेरी गांड में ऐसी जीभ लपलपाई कि मैं निहाल हो गई. हॉट लड़की गांड फक के लिए बेचैन हो गयी.
उसकी जीभ की रगड़ का सुख कह ही नहीं सकती.

मैंने कई दिनों से गांड नहीं मरायी थी, इस वजह से मेरी गांड सिकुड़ चुकी थी.
उसकी जीभ और थूक की लार ने मेरी गांड के छेद को काफी बड़ा बना दिया था.

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था.
मैंने किशोर से कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो … तड़पाओ मत मेरी जान … आह अब रहा नहीं जाता!

यह सुनते ही किशोर अचानक से रुक गया.
मैंने पूछा- क्यों रुक गए. मेरी गांड में अपना लंड डाल दो और मेरी गांड को अपने गर्म वीर्य से भर दो आह मेरी गांड को ठंडी कर दो. फिर मेरी चूत को इतना चोदो कि आज वह भोसड़ा बन जाए.

मेरे प्यारे दोस्तो, इधर मैं आपको एक ज्ञान की बात बता दूँ. चूत वह चीज होती है, जिसमें थूक अथवा तेल-वेल कुछ लगाए बिना उंगली ही नहीं घुसती है.

इसके इतर जिन जिन लड़कियों की चूत चुद चुदकर भोसड़ा बन गई हो, वह हमेशा के लिए चाहे लड़की खड़ी हो, चाहे बैठी हो चाहे चल रही हो … और चाहे बिस्तर पर सोई हो … उसके भोसड़े के अन्दर उंगली जितना छेद खुला ही रह जाता है.
मतलब पूरी तरह से छेद बंद नहीं होता है. इस तरह की चूत को चूत नहीं, बल्कि भोसड़ा कहा जाता है.

वह बोला- तू अकेले ही मजा लेगी साली. पहले मेरा लंड चूस भोसड़ी की कुतिया … फिर देख आज तेरी गांड और चूत का कैसा मस्त फालूदा बनाऊंगा अपने इस फौलादी लंड से!

उसका लंड ज्यादा बड़ा नहीं था, बस 6 इंच का ही था. पर सख्त इतना कि लोहे की रॉड हो.

मैंने झट से उसका लंड अपने हाथों से पकड़ा.
उसके लंड में से भी चिपचिपा पानी निकल रहा था.

मैंने लंड पर निकले उस पानी को चाट लिया और एक सांस में लंड अपने मुँह में पूरा ले लिया.
किशोर के मुँह से आह हह निकल गई.

दोस्तो, मुझे भी लंड चूसने का अनुभव हो चुका है.
पहले पहले तो मुझे पूरा लंड मुँह में निगलना नहीं आता था … उल्टी या खाँसी हो जाती थी.
पर दोस्तो अब मैं पूरे लंड को अन्दर निगल कर देर तक सांस रोक कर मौत को छूकर वापस आ सकती हूं.

वाह क्या डायलॉग मार दिया शाबाश मालती डार्लिंग …

फिर मैंने उसके लंड को ऐसा चूसा कि लंड का ऊपर का भाग लाल हो गया.

किशोर का अब वीर्य निकलने वाला ही था, तब उसने कहा- मालती आह … मेरा पानी निकलने वाला है!
मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और जल्दी से उल्टी हो गई. 

मैंने कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो. मैं वीर्य की एक भी बूंद वेस्ट जाने नहीं दे सकती!

उसने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ा और गांड के छेद पर सैट कर दिया.
मुझे उसके लंड का अग्र भाग गर्म गर्म महसूस हो रहा था.

वह बोला- डालता हूं माया!
मैंने कहा- अब पूछना कैसा … जल्दी डालो मेरी गांड की गर्मी शांत करो और भूलना नहीं साले … सारा वीर्य मेरी गांड में ही जाना चाहिए समझे, नहीं तो चूची से तेरी गांड मार दूँगी.

उसने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड मेरी गांड पर सैट करके जोर लगाकर फच से मेरी गांड में उतार दिया.

मेरी ना चाहते हुए भी चीख निकल गई- उई ईईई माँ!

मैं ऐसी छटपटाई और बोली- प्लीज निकालो अभी … फिर थोड़ी देर बाद में डाल लेना.

उस कमीन ने मेरी एक नहीं सुनी, उल्टा मेरा मुँह दबा दिया और मेरी गांड मारता रहा.

फिर अचानक से मेरा सपना टूट गया.
सुबह हो गई थी … मेरी नींद खुल चुकी थी.

मैं बिस्तर पर पड़ी पड़ी मन ही मन में किशोर को गालियां देने लगी थी ‘कुत्ता कहीं का …’

इस सपने का अर्थ यह था कि मैं अब भी उसे नहीं भूल पा रही थी.

पहले वह मुझे वास्तव में चोदता था … अब भोसड़ी का मेरे सपनों में भी मेरी गांड मार जाता है.

मैं बिस्तर से उठ कर बैठी तो मेरा शरीर भारी भारी लग रहा था.
सिर दर्द भी था.

कमरे में मैं और मेरी छोटी बहन वर्षा एक ही बेड पर सोती हैं. वह स्कूल में बारहवीं में है.
वह रोज सुबह 6 बजे उठकर नहाकर नाश्ता करके 7 बजे स्कूल चली जाती है.
आज वह जा चुकी थी.

मैं मुँह धोने के लिए बिस्तर से उठी तो मेरी गांड और मेरे चूचे बहुत दर्द कर रहे थे.

मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.
मेरे कमरे में ही ड्रेसिंग टेबल है, उसमें एक बड़ा सा आईना लगा है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बारीकी से अपने जिस्म को देखने लगी.

मेरे स्तन एकदम लाल और सूज चुके थे और मैंने घूमकर अपनी गांड को आईने में देखा, तो उसमें चिपचिपा सफेद पानी बह रहा था और मेरी गांड का छेद लाल लाल टमाटर सा हो गया था.

मैंने अपनी गांड में एक उंगली डाली, तो वह आराम से चली गयी.
मैंने दो उंगलियां डालीं, वे भी चली गईं.

मैं स्तब्ध रह गयी कि मुझे सपना आया था कि हकीकत में कोई भोसड़ी का मेरी गांड मार गया?

दोस्तो, बाकी की घटना अगली कहानी में लिखूँगी.

आपको यह हॉट लड़की गांड फक कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर ईमेल के माध्यम से बताएं.
आपके मेल से मुझे और कहानियां लिखने की प्रेरणा मिलेगी. 

maltipatil97@gmail.com

सेक्सी बहु को ससुर जी ने पूरी रात बजाया

मेरा नाम नेहा है और मैं 24 साल की शादी शुदा औरत हूं. मेरी हाईट 5 फीट है और फिगर 33-28-34 है. मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं. मेरी शादी पिछले साल फरवरी में हुई थी. बीते दिसंबर की एक रात को मुझे तेज प्यास लगी. आप जानते होंगे कि सर्दी में या तो प्यास लगती नहीं और लगती है तो फिर प्यास कितनी जोर से लगती है.



ठंड बहुत ज्यादा थी फिर भी मैं जल्दी से उठी रसोई में जाने लगी. मेरा ध्यान ससुर के कमरे की ओर गया तो मैंने पाया कि उनके रूम की लाइट जल रही थी.
मैंने सोचा कि इतनी रात को ये जाग क्यों रहे हैं, कहीं तबियत तो खराब नहीं हो गयी?

उनको देखने के लिए मैं रूम की ओर जाने लगी तो मैंने पाया कि मेरे ससुर अपने लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाये जा रहे थे.
उनका लन्ड करीब 7 इंच का था. इतना बड़ा लंड मैंने कभी किसी मर्द का नहीं देखा था.

मैं आपको उनके बारे में बता दूं कि वो उम्र में 55 साल के करीब हैं. उनकी हाइट 6 फीट है.

मेरी सास की मृत्यु बहुत समय पहले हो गयी थी. शायद इसी वजह से ससुर जी का लंड इतना बेताब लग रहा था.

वो आंखें बंद किये लगातार अपने हाथ को अपने लंड पर चला रहे थे.
ये नजारा देखकर मैं तो सन्न रह गयी.
मगर मेरी नजर भी मेरे ससुर के लंड से हट नहीं रही थी. मेरे पति का लंड उनके लंड से कम था.
उनका लंड देखकर मेरे अंदर भी चुदास सी जागने लगी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी.

फिर मैं रसोई से पानी लेकर अपने कमरे में चली गयी. अब मुझे भी लंड चाहिए था तो मैंने पति को जगाया और उनको गर्म करने की कोशिश करने लगी.

मैंने पति के लंड को ऊपर से ही सहलाया. उनका हाथ मेरी चूत पर रखवाया और सहलवाने लगी.
थोड़ी देर में उनका लंड खड़ा होने लगा. फिर मैंने उनके लंड को चूसा और चुदाई के लिए पूरा तैयार कर दिया.

पति ने मेरी चूत में लंड डाला और चोदने लगे. उनका लंड 6 इंच के करीब था. मैं चुदाई का मजा लेने लगी.

मगर दिमाग में ससुर का लंड अभी भी घूम रहा था. उनका लंड बहुत मोटा था.

पति ने मुझे पांच मिनट तक चोदा और फिर वो झड़ गये. मुझे लंड तो मिल गया लेकिन वो संतुष्टि वाली चुदाई नहीं हुई. फिर भी मैंने पति को ज्यादा नहीं कहा क्योंकि वो नींद में थे और मैं भी अब सोना चाहती थी.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पति ने कहा कि वो जॉब करने दिल्ली जाने वाले हैं.
वो कहने लगे कि पहले वो वहां पर जम लेंगे और उसके बाद मुझे भी वहीं बुला लेंगे. मैं ये सोचकर परेशान हो रही थी.

मुझे पति के बिना कैसे चुदाई का मजा मिलने वाला था. 4 जनवरी को मेरे पति दिल्ली चले गये.

उनके जाने के बाद मेरा मन सूना हो गया.
एक दो दिन तो मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर ससुर का लंड मेरे दिमाग में घूमने लगा.

मैं उनका लंड देख चुकी थी और जब से मैंने उनका मोटा लंड देखा था मैं उसको अपनी चूत में लेने का सपना भी देख रही थी.
अब मैं किसी तरह ससुर जी का लंड खड़ा करके उनको खुद चुदाई के लिए तैयार करना चाहती थी.
इसके लिए मैंने बाजार से कुछ नये कपड़े ले लिये. नाइटी, पैंटी और ब्रा के सेट लिये. सेक्सी वाली नाइट ड्रेस ली ताकि अपने बदन को दिखाकर मैं ससुर जी के लौड़े की प्यास को और ज्यादा बढा़ सकूं.

शाम को जब मैं घर आयी तो मैंने जल्दी जल्दी खाना बनाया.

ससुर जी को भूख लगी तो वो बोले- बहू खाना लगा दो.
मैंने उनको बैठने को कहा और बोली- अभी लगा देती हूं.

मैं अपनी साड़ी बदल कर आ गयी और मैंने वो नयी ड्रेस पहनी जो मैं बाजार से लायी थी.

जब मैं खाना लेकर उनके पास पहुंची तो उनकी नजर मेरे बदन पर पड़ी और वहीं पर ठहर गयी.
इससे पहले मेरे ससुर ने मुझे इतने ध्यान से नहीं देखा था.

वो लगातार मुझे देख रहे थे और मैं खुश हो रही थी कि मेरा प्लान काम कर रहा है. वो ये भी कोशिश कर रहे थे कि मुझे उनकी नजर के बारे में पता न चले इसलिए बार बार नीचे नजर कर लेते थे.

ससुर ने खाना खाया और फिर वो सोने के लिए चले गये.

मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेरे बदन की गर्मी मुझे चैन से लेटने नहीं दे रही थी.
आज मैंने ससुर की आंखों में मेरे जिस्म के लिए हवस भी देख ली थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर पा रही थी.

मैं फिर सोचते सोचते सो गयी.

मगर उस दिन के बाद से मैं किसी न किसी तरह अपने बदन और उसके उभार दिखाकर अपने ससुर को तड़पाने लगी.
वो अब अक्सर मेरी चूचियों और मेरी गांड को ताड़ते रहते थे.

कुछ दिन बीत गये. फिर 9 जनवरी की रात आयी.
उस रात को मैंने लाल रंग की नाइटी पहनी थी जो चूचियों पर से जालीदार थी. उसको देखकर तो मेरे ससुर की आंखें ही फैल गयीं. वो जैसे पागल से हुए जा रहे थे.
उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया और थोड़ा सा ही खाकर रूम में चले गये.
मैंने भी जल्दी से काम खत्म किया और सोने के लिए जाने लगी.
मगर मेरा मन बेचैन था.

आज ससुर जी बहुत उतावले थे. मैं एक बार उनकी हालत देखना चाहती थी.

इसलिए मैंने दूध गर्म किया और उनके कमरे की ओर चल दी.
मैंने अंदर देखा तो वो लंड को लगातार हिला रहे थे और बार बार कह रहे थे- चूस साली मेरे लंड को … साली नेहा … चूस इसे.

ऐसे कहते हुए वो अपने लंड की मुठ मार रहे थे.
मैं बहुत उत्तेजित हो गयी उनकी ये हालत देखकर.

उसके बाद मैंने दरवाजा खटखटाया तो वो संभल गये. उन्होंने अपना लंड अंदर पजामे में किया और ढक लिया.

मगर जब मैं अंदर गयी तो तब भी उनके पजामे में वो लंड तना हुआ ऐसे ही उछल रहा था. उनके माथे पर पसीना आ गया था.

मैंने उनके लंड की ओर देखा और हल्की सी मुस्कान दे दी और शर्माते हुए गिलास को उनके बेड के पास रख दिया.

जब मैं जाने लगी तो ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- कुछ देर बैठ जा बहू.
मैं बोली- ये आप क्या कर रहे हैं पापा? ये सब ठीक नहीं है.

इस बात पर उनको गुस्सा आ गया और मेरा हाथ अपनी ओर खींचकर मुझे अपने पास बिठाते हुए बोले- साली रण्डी, जब से तेरा पति गया है तभी से तेरा नाटक देख रहा हूं. आज तुझे चोद चोद कर सब तेरी नौटंकी दूर कर दूंगा.

ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे ऊपर आ चढ़े.
वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों में मुंह मारने लगे. मेरी गर्दन को चूमने लगे.

पहले तो मैंने दिखावटी विरोध किया लेकिन फिर हार मानने का नाटक करके मैं आराम से लेट गयी.
फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगे लेकिन मैंने मुंह नहीं खोला. फिर वो मेरी चूचियों को दबाने लगे तो मेरी आह्ह निकल गयी और मेरे होंठ खुल गये.

इस मौके का फायदा उठाकर वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैं भी अंदर ही अंदर उनका साथ देने लगी लेकिन मैं ये नहीं दिखाया कि मुझे मजा आ रहा है.
मैं बस न चुदवाने का नाटक सा करती रही.

ससुर जी के घोड़े पर सवारी करती बहू



मेरे ससुर के हाथ मेरी चूचियों पर आ गये थे और वो मेरी नाइटी के ऊपर से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे.
मैं अब सिसकारने लगी थी.

वो बोले- हां, साली रंडी, मैं जानता था कि तू ये सब नाटक चुदने के लिए ही कर रही है. मैं आज तेरी चूत को फाड़ दूंगा.
ये बोलकर मेरे ससुर ने मेरी नाइटी फाड़ डाली और मेरी चूचियों को जोर जोर से पीने लगे.

उनके मुंह की पकड़ इतनी तेज थी कि मेरे मुंह से जोर जोर की आहें निकलने लगीं.
मैं अपनी चुदास को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

इतने में ही ससुर का एक हाथ मेरी चूत को सहलाने लगा. मेरी चूत में हल्का गीलापन आने लगा था. वो मेरी चूत को जोर जोर से रगड़ने लगे.

मेरी चूत में पानी आने लगा और वो चूत में उंगली से कुरेदने लगे.
मैं भी पागल सी हो रही थी अब.

इतने में ही ससुर ने अपने पजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में दे दिया.
उनका लंड मेरे मुंह में फंस गया और वो धक्के देते हुए बोले- चूस साली … यही है तेरा सपना … चूस ले इसे. चूस साली कुतिया.
मेरे मुंह में उनका लंड पूरा फंस गया था और मेरे गले में अटक गया था. मुझसे सांस नहीं ली जा रही थी लेकिन वो मेरे मुंह को चोदे जा रहे थे.

काफी देर तक मेरे मुंह को चोदने के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाला जो मेरी लार में पूरा गीला हो गया था.

फिर उन्होंने मुझे उल्टी तरफ लिटा दिया और मेरी गांड ऊपर आ गयी.
वो मेरी गांड में मुंह देकर चाटने लगे.

मैं डर गयी कि कहीं ये अपने इस मोटे मूसल को मेरी गांड में न धकेल दें. मैं उनका लंड गांड में नहीं ले सकती थी.

वो मेरी गांड को लगातार चाटे जा रहे थे. मुझे मजा भी आ रहा था लेकिन साथ में डर भी बना हुआ था.

इससे पहले मैंने कभी भी अपनी गांड नहीं चुदवाई थी. कई बार मेरे पति मेरी गांड में लंड देने की कोशिश करते थे लेकिन मैं मना कर देती थी.
अभी तक मेरी गांड कुंवारी ही थी.

उसके बाद वो मेरी चूत भी चाटने लगे तब जाकर मेरी सांस में सांस आयी. वो मेरी चूत को चाटते हुए मेरे बूब्स भी दबा रहे थे और मुझे अब बहुत मजा आ रहा था.
दोनों तरफ से मजा मिल रहा था.

कुछ देर तक वो मेरी चूत को काट काटकर खाते रहे.
मैं भी पानी छोड़ती रही और चुदने के लिए मचल उठी.

अब ससुर जी से भी नहीं रुका गया तो उन्होंने अचानक से मेरी चूत पर लंड रखा और एक धक्का दे दिया.
उनके लंड की चोट से मेरी जान निकल गयी.
एक बार में ही मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया उनके मोटे लंड ने.

उन्होंने मेरे मुंह पर थप्पड़ मारा और चुप रहने के लिए कहा.
मैं चुप हो गयी.

अब वो मुझे चोदने लगे. मैं तो बेहाल होने लगी.

कुछ देर तक तो लंड नहीं लिया गया लेकिन फिर जब चूत खुलने लगी तो मुझे मजा आने लगा.
अब मैं आराम से चुदवाने लगी.

लेकिन ससुर जी की स्पीड बढ़ रही थी. वो लगातार तेज तेज चोदे जा रहे थे.

बीस मिनट की चुदाई में मैं दो बार झड़ गयी. वो अभी भी मुझे तेजी से चोद रहे थे.

फिर उन्होंने एकदम से मेरी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह पर उनके वीर्य की पिचकारी एकदम से आकर लगी.

कई बार उनके लंड से वीर्य की पिचकारी लगी और मेरा पूरा चेहरा सन गया.
मुझे मजा आ गया.
इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी.

झड़ने के बाद वो मेरे बगल में आकर लेट गये.

हम दोनों फिर 69 में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.

कुछ देर की चुसाई के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया. अब उन्होंने लंड पर तेल लगा लिया. मेरी चूत और गांड पर दोनों जगह तेल लगा दिया.

उसके बाद मुझे पेट की तरफ सुला दिया और नीचे तकिया लगा दिया.
फिर वो मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे.

मैं आह्ह आह्ह करते हुए चुदने लगी.

मगर अचानक से उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर तकिया लगा दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाता हुआ महसूस हुआ.

जब एक जोर का झटका लगा तो मेरी जान निकल गयी.
मैं जोर से चीखी लेकिन मेरी आवाज तकिया के नीचे ही दब गयी.
ससुर का लंड मेरी गांड में घुस गया था और मैं दर्द से छटपटाने लगी.
मगर ससुर ने लंड को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल दिया.

वो मेरी गांड में धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगे मगर मैं दर्द में तड़प रही थी.

मैं दर्द से रोने लगी तो वो बोले- साली … तेरी गान्ड कब से मारना चाह रहा था. आज तो फ़ाड़ डालूंगा इसे मैं!

अब मैं बेहोश होने वाली थी कि एक थप्पड़ जोर से मुंह पर उन्होंने मारा और फिर गांड में लंड को धकेलने लगे.
उसके बाद वो मेरी गांड को चोदने लगे.

धीरे धीरे मेरी गांड खुली और मैं चुदवाने लगी.
पांच मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में दे दिया.
मैं फिर से उनका लंड चूसने लगी.

फिर ससुर ने मेरे मुंह में ही अपना माल गिरा दिया. मैंने उस माल को पी लिया.

उनकी चुदाई से मेरी चूत और गांड दोनों ही फट गयी थी. मगर मुझे चुदाई में मजा भी बहुत मिला.
उन्होंने मेरी चूत और गांड पर मलहम लगाया और मेरा दर्द कम करने की कोशिश की.

अगले 2 दिन तक मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी.

फिर उसके 20 दिन के बाद मेरा जन्मदिन था. मेरे जन्मदिन पर भी मेरे ससुर ने मुझे चुदाई का तोहफा दिया.
मगर उस दिन उनके साथ उनका एक दोस्त भी था.
उन दोनों ने मिलकर मुझे चोदा.

9 जनवरी की रात जो ससुर और बहू की चुदाई हुई वो मैं कभी नहीं भूल पाती हूं. पहली बार ससुर के लंड से चुदाई और उनका मोटा लंड आज भी जब मैं सोचती हूं तो मेरी चूत गीली हो जाती है.

फिर मेरे जन्मदिन पर मेरे ससुर जी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर मुझे कैसे चोदा वो मैं आपको अगली कहानी में सुनाऊंगी.

भतीजे के मोटे लंड से चूत चमकाई

मेरी सेक्स कहानी में पढ़ें कि मुझे जवान लंड लेने की चाहत हो गयी थी. अपने जेठ के बेटे मतलब अपने भतीजे के लंड से जोरदार चुदाई का मजा मैंने कैसे लिया?

नमस्ते साथियों, मैं मालती आपके लिए अपनी एक दास्तान सेक्सी चाची चुदाई कहानी लेकर आई हूं.
आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देती हूँ. मेरी उम्र 38 साल है और मैं एक आम घरेलू औरत हूं.

लेकिन फर्क इतना सा आया है कि मैं एक छोटे शहर से बड़े शहर रहने लगी. तो मेरे पहनावे का ढंग बदल गया. जिससे मैं अपने यहां के लोगों के लिए सेक्स की दुकान लगती हूं.

अभी भी मेरे नाम के तोते शहर में उड़ते हैं. ऐसा इसलिए कि मैं 2 बच्चे की मां होते हुए भी अपने बच्चों की उम्र के लंड का सेवन करती रहती हूं. इससे मैं काफ़ी फिट भी रहती हूं.


आज मैं आपको अपनी जिंदगी में घटी एक असली घटना को सेक्स कहानी के रूप में लिख कर बताने जा रही हूं.
मैं आशा करती हूं कि आपको मेरी कहानी पसंद आएगी.

जैसा कि मैंने बताया कि मैं शादी से पहले एक छोटे शहर में रहती थी, तो शादी के बाद पति के साथ बड़े शहर आ गयी.
मैं औरतों की पसंदीदा जगह ब्यूटीपार्लर जाने लगी, जिधर से मुझे मसाज का शौक लग गया.
लेकिन अब तक मैं सिर्फ औरतों से ही मसाज लेती थी.

मसाज का शौक लगा तो मेरी कामेक्षाएं बढ़ने लगीं और धीरे धीरे मैं पुरुषों से भी मसाज लेने लगी.
मर्दों के हाथों ने मेरे बदन को छुआ, तो अंदरूनी अंगों में हलचल होनी शुरू हो गई और इसकी वजह से मुझे गैर मर्दों में रूचि जागने लगी.

उन्हीं दिनों मुझे एक जवान लंड मिला जिसकी साइज़ पूरे साढ़े सात इंच की थी. उसने मुझे ऐसा मज़ा दिया कि बस कुछ भी बताने के काबिल ही न रही.
उस मर्द ने मेरे साथ चुदाई की और मेरे बदन में एक अलग ही सिरहन पैदा कर दी.

हालांकि ऐसा देसी लड़का हर औरत के घर में होता है … बस मैंने परख लिया और उसे पा लिया.

मैंने अपने जेठ के लड़के यानि अपने भतीजे के साथ पहली बार कैसे सेक्स किया, यही दास्तान आपको इस सेक्स कहानी में आगे पता चलेगी.

मेरे भतीजे का नाम अयान है. उसकी उम्र करीब 25 साल के करीब थी. वो एक मस्त बॉडी वाला लड़का है … जैसा देशी लौंडे होते हैं.
उसके मजबूत हाथ और लंड मेरे पूरे शरीर को रगड़ कर रख देते हैं.

मैंने अयान के लंड को पहली बार यूं लिया कि मेरी सास का निधन हो गया था.
मुझे आनन फानन में अपने उसी छोटे शहर में वापस आना पड़ा.

लेकिन दाह संस्कार के अगले दिन पति देव बच्चों को लेकर निकल गए क्योंकि उनके ऑफिस और बच्चों की पढ़ाई दोनों की हानि हो रही थी.
मुझे यहीं रुकना पड़ा क्योंकि मैं बहुत दिन बाद आई थी और सास के निधन का मामला था तो सभी के सामने वापस चला जाना भी अव्यवहारिक था.

उस वक़्त तक अयान से मेरी मुलाकात बस नॉर्मली ही होती थी. वो मेरे पास आता और ‘नमस्ते चाची’ करके हाल चाल लेता, और चला जाता.

ऐसे ही एक दिन मैं मार्किट चली गयी चचिया सास और भाभी जी साथ में थीं.

वापस आते आते हम सभी को रात हो गयी थी और मुझे काफी थकान भी हो गयी थी. मेरे पैर में बहुत दर्द होने लगा था. इसकी वजह से मैं खाना खाकर अपने रूम में चली आयी और कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगी.

तभी भाभी मेरे कमरे में आईं और उन्हें मुझसे बात करके पता चली कि मेरे पैर में दर्द है.
उन्होंने तुरंत अयान को आवाज लगाई और मुझे बताया कि अयान बहुत अच्छा पैर दबाता है.

भाभी की आवाज सुनकर अयान मेरे कमरे में आ गया.
मेरी भाभी ने उससे बोला- अयान, अपनी चाची के पैर दबा दे … फिर चले जाना.

अयान ने अपनी मां के सामने अपना सर हिलाते हुए हां में इशारा किया और आकर मेरे पैर दाबने लगा.
इससे मुझे काफी अच्छा लगने लगा. अयान के हाथ पूरे पैर को अच्छे से दबा रहे थे, जिससे मैं आराम करने की मुद्रा में आ गयी.

भाभी अयान को समझाते हुए जाने लगीं और अयान को पैर दाबने के बाद दूध पीने को बोल कर अपने कमरे में सोने चली गईं.

मैं अपने भतीजे से बड़े आराम से पैर दबवा रही थी कि अचानक से मुझे महसूस हुआ कि उसके नर्म हाथ मेरी जांघों को दबाने लगे हैं.
हालांकि उसके हाथ मेरी मैक्सी के ऊपर से ही मेरी जांघों को मसल रहे थे और मुझे काफी अच्छा भी लग रहा था तो मैंने उसे नहीं रोका.

मुझे मर्दों से मालिश करवाने में जो मजा आता था, वो आज कुछ अलग तरह का मजा आ रहा था.

कुछ ही देर में अयान के हाथों का ये दबाव मुझे ऐसे लगने लगा था कि मेरी पैंटी के अन्दर एक अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी.
ऐसा क्यों होने लगा था, ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

शायद इसकी वजह ये थी कि काफी समय से मेरा अपने पति के साथ सेक्स न करना था और उसके मजबूत हाथों के दबाव से भी कुछ मज़ा आने लगा था.

तभी वो उठ कर जाने लगा.
मैंने तुरन्त उसको रोका और पूछा- रुक क्यों गए?
वो बोलने लगा- आपकी आंखें बंद हो गयी थीं … इसलिये मैंने समझा आप सो गई हैं … इसलिए जाने लगा.

मैंने उसको रुकने के लिए कहा और अयान से बोला- तुम बहुत अच्छी तरह से दबा लेते हो … प्लीज़ मेरी पीठ में बहुत दर्द है क्या तुम मेरी पीठ को भी दबा दोगे?
अयान ने हामी भर दी.

मैं औंधी हो गई और उसके बाद अयान मेरे बदन को अच्छे से दाबने लगा.
उसके मर्दाना हाथों के मजबूत दबाव से मेरे अन्दर की कई दिन की प्यासी औरत मस्त होने लगी.

जवान भतीजे अयान का हाथ भी एक प्यासी औरत को जगाने वाली जगहों के पास से होता हुआ चलने लगा, जिससे मेरी पैन्टी में हलचल होनी शुरू होने लगी.
इसकी वजह मेरे मुँह से कामुक आह निकल गयी.

इस मादक आवाज को अयान ने सुन लिया.



पता नहीं क्यों … उसे इसी आवाज का इंतजार था या वो सच में मासूम था.

लेकिन उसके हाथ अब मेरे चूतड़ों के ऊपर आने लगे और अब उसके हाथों का दबाव कुछ जोर से होने लगा.
इससे मेरी चुत हल्के हल्के आगे पीछे होने लगी और मेरी चुत का पानी निकल गया, जिसको उसने भी महसूस कर लिया.

वो बोला- चाची, आप अपने मैक्सी उतार दो … मैं आपकी मालिश अच्छे से कर दूंगा.

मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था. उस वक़्त मैं कैसे एक रिश्ते में चुदने को बेताब होने लगी थी. मुझे कुछ होश ही नहीं रहा और मैंने उसकी बात मानते हुए अपने मैक्सी उतार फेंकी. मैं अपनी काले रंग की ब्रा और पैंटी में आ गयी.

जिसके बाद मैंने देखा अयान के लोवर में एक लंबा उभार आ गया है, इससे मुझे अंदाज हो गया था कि आज मैं अपने भतीजे के तगड़े लंड को अपनी चुत में लेने वाली हूं.

इसके बाद मैंने औंधे लेटे हुए ही उससे कहा- पहले देख कर आओ कि घर में सब सो गए हैं या नहीं … फिर सब कर लेना.
वो देखने चला गया.

उसके बाहर जाते ही मुझे कुछ होश आया और मैं बहुत ही कशमकश में फंस गयी थी.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं. क्योंकि अयान मेरे पति के बड़े भाई का लड़का है और मेरे बेटे से सिर्फ 2 साल बड़ा है. फिर भी आज पहली बार किसी जवान लंड को लेने का मेरा मन होने लगा था.

तब ही अयान आ गया और उसने कमरे का दरवाजा इस तरह लगा दिया कि अगर कोई आये तो पता चल जाएगा.

वो वासना से मेरे बदन को देखने लगा और बोलने लगा- चाची आपका बदन आपकी उम्र से बिल्कुल भी मैच नहीं कर रहा है. क्योंकि जिस उम्र की आप हैं … उस उम्र की इतनी खूबसूरत औरत मैंने अपने पूरे शहर में नहीं देखी.

मैंने तुरंत पूछा- नहीं देखी का क्या मतलब है? तुमने कभी किसी लड़की को अभी तक नहीं चोदा क्या?

अयान ने मेरे मुँह से चोदा शब्द सुना तो वो गनगना उठा.
और उसने भी खुल कर जवाब दिया. उसके जवाब को सुन कर कई लोगों को दुख होगा लेकिन उसने सही बोला था.

उसने बताया- मेरी सेक्सी चाची जी, मैं अभी एक बेरोजगार लड़का हूँ और बहुत ज्यादा पैसे नहीं कमा पाता हूँ. इस वजह से मेरी शादी नहीं हो रही है. आज के वक़्त में कोई भी लड़की बिना पैसे देखे नहीं पटने वाली है. तो मुझको अपना लंड हिला कर शांत करना पड़ता है. मैं लड़कियों और भाभियों को बस अपने सपनों में ही चोद पाता हूँ.

मैं उसकी इस बात से हंस दी. हालांकि उसकी बात में देश की बेरोजगारी की समस्या थी.

इस बीच अयान ने मुझे लेटने का इशारा कर दिया और बातें करते करते मेरी पीठ से नीचे बिंदास जाने लगा.
जिसका अहसाह मुझे गर्म करने लगा और मेरी कामुक आहें निकलने लगीं.

कुछ देर बाद उसने मुझसे सीधा लेटने का बोला.
मैं पीठ के बल ललित गई अब मेरी तनी हुई चूचियां अयान के सामने आ गई थी. साथ ही मेरी टांगों के बीच में मेरी गीली चुत भी उसे मस्त कर रही थी.

उसने पहला हमला मेरी चूचियों पर किया और मेरे मम्मों को अपने हाथों से रगड़ने लगा.
इससे मैं पागल होने लगी और आवाज करने लगी- आह आह धीरे कर … ओइ मां … आह आह जोर से अयान!

मेरे मुँह से खुद ब खुद उसके लिए आवाज निकलने लगी.

आवाज तेज़ होने की वजह से अयान ने मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया.

अब मुझे उसका मोटा सा लंड अपनी चुत के ऊपर महसूस होने लगा.
मैं झट से उठ गई और लपक कर अयान के लोवर के ऊपर से लंड के उभार को छूने लगी.

ये देख कर अयान ने अपने लोवर से अपने लंड को बाहर निकाल दिया और हिलाने लगा.

उसके खड़े लंड को देख कर मेरे मुँह से लार टपक पड़ी … क्योंकि उसका लंड था ही ऐसा मोटा और लंबा. ये लंड मेरे पति से थोड़ा बड़ा और मोटा था.

मैंने तुरंत उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और लंड चूसने लगी.
मुझे आज पता नहीं क्या हो गया था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. बस अब मुझे इस लंड से अपनी चुदाई करवानी थी, ऐसा मैंने सोच लिया था.

अयान भी मेरी चुत पर अपनी उंगली घुमाने लगा और मुझे और गर्म करने लगा.

वो जैसे जैसे मेरे चुत पर अपनी उंगली घुमाता गया, वैसे वैसे मैं उसके लंड को अपने मुँह के अन्दर बाहर करने लगी.

कुछ देर बाद ही उसके लंड ने पानी छोड़ दिया.
क्योंकि उसको अभी सेक्स का ज्ञान नहीं था इसलिए उसका लंड जल्दी निकल गया.

मगर उसके बाद जो उस लौंडे ने कमाल किया … वो मैं शब्दों में बता ही नहीं सकती.

उसके लंड का पानी निकल जाने के बाद वो मेरे पैरों के बीच अपना मुँह डाल कर मेरी चुत पर अपनी दाढ़ी से हल्का हल्का मसाज देने लगा.
इससे मुझे सिहरन होने लगी.

कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने अपनी गर्म जीभ को मेरी चुत पर रख दिया.

अपनी लपलप करती जीभ के साथ अपनी लंबी उंगली को मेरी चुत में उतारने लगा, जिससे मैं एक अलग ही दुनिया में जाने लगी.
मेरे मुँह से मादक सिसकारियों की आवाजें आनी शुरू हो गईं.

उसने मेरी आवाजें सुनी तो मेरी चुत को चूसना छोड़ कर मेरे होंठों को चूसने लगा और उसने मेरे मुँह को बंद कर दिया.
उसके इस कदम से मुझे अपनी चुत से निकलते हुए पानी का खारा स्वाद मिलने लगा.

उसने मेरे कान में कहा- चाची, इतनी तेज आवाज करोगी तो बाहर कोई सुन लेगा.
वो मुझे चिल्लाने से मना करने लगा.

मैंने बात की गंभीरता को समझते हुए अपनी आंखों से मौन स्वीकृति दे दी.
उसने भी समझ लिया और अब वो जल्दबाजी दिखाते हुए अपना लंड मेरी चुत पर सैट करने लगा.

मैंने भी चुत खोल कर लंड को अन्दर ले लिया.
उसका एक दो इंच लंड अन्दर घुसा तो मैं मस्त हो गई.

वो इतने लंड से ही धक्के लगाने लगा. वो अपना पूरा लंड मेरी चुत में बिना डाले चुदाई कर रहा था. मेरी चुत एक भट्ठी की तरह जल रही थी. मैंने अपने हाथ से उसका लंड बाहर निकलवाया और फिर से फांकों में सैट करके उसे चोदने के लिए कहा.

अबकी बार अयान का लंड जैसे ही मेरी चुत में सैट हुआ, उसने जोरदार तरीके से अपने लंबे लंड को मेरी चुत में जड़ तक उतार दिया.

इस प्रहार से मैं चिल्लाने ही वाली थी … लेकिन उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला कर मेरी आवाज को रोक दिया.

अब वो धकापेल चुदाई करने लगा और मेरी चुत का भोसड़ा बनाने लगा.
वो लौड़े को चुत की गहराई तक पेल कर मजा देने लगा था.
मेरी गर्म चूत की चुदाई ऐसी हो रही थी … जैसे कोई अनुभवी चोदू करता है.

उसने 10 मिनट तक इसी पोजीशन में अपनी सेक्सी चाची चुदाई की, फिर मुझे उल्टा होने को बोला.

मैं औंधी हो गयी और मेरे भतीजे ने मेरी चुत में पीछे से अपना लंड डाल दिया.

उसी समय मुझे किसी के बाहर होने का अंदाजा हुआ.
लेकिन मुझे चुदाई का नशा ऐसा चढ़ा था कि मुझे कुछ होश ही नहीं था. मुझे तो बस अपनी चुत में एक जवान लंड लेना था.

वो मुझे चोदते हुए लगातार आसन बदल रहा था और चुदाई के बीच बीच वो मेरी चुत को अपनी जीभ से चाट भी लेता था. मुझे बेहद मजा आ रहा था.

इस तरह मेरे भतीजे अयान ने मुझे बहुत देर तक चोदा.
मैं दो बार झड़ चुकी थी.

अयान बोला- चाची मेरा निकलने वाला है.
मैंने बोला- हां, मेरे अन्दर ही गिरा दे.

मुझे उसके लंड के पानी की गर्मी अन्दर तक महसूस करनी थी.

उसके बाद अचानक से मेरी चुत में एक बाढ़ सी आ गयी और उसका पानी मेरी चुत के पानी के साथ बाहर आने लगा.

इस चुदाई के बाद अयान ने अपने कपड़े पहने और बाहर जाने लगा.

इसके बाद वो मेरी चुदाई रोज करने लगा और मैं भी जितने दिन उधर रही, उसी की बाट जोहती रही.
वो मुझे रोज रात सबके सो जाने के बाद रोज रात में 1 से 2 बार चोदता या मेरी चुत को एक अच्छा मसाज देने के साथ चूस कर उसका पानी निकाल देता.

इस तरह मेरी रिश्तों में पहली चुदाई हुई थी. जिसका अनुभव ऐसा रहा कि मैंने छह महीने तक उसको अपने साथ बड़े शहर में रखा.

अब जब भी मेरे पास आता है, मुझे तसल्ली से चोदता है. उसको अब सेक्सी चाची चुदाई करने को मिलती है तो अपने लंड को हाथ से हिलाने की जरूरत नहीं पड़ती.

आपको यह सेक्सी चाची चुदाई कहानी कैसी लगी. आप मेल करके जरूर बताएं क्योंकि इससे ही मुझे आगे की सेक्स कहानी लिखने का हौसला मिलेगा.

उस रात भतीजे के साथ चुदाई के दौरान जो आहट हुई थी, वो कौन था और क्या हुआ … वो सब भी लिखने का मन है. मैं आपकी मालती आपके लिए ऐसी बहुत सी सेक्स कहानी लेकर आऊंगी, जो मेरे साथ बीती है.
आपकी कामुक मालती ठोके

ग़ैर मरद के लण्ड का चस्का

मेरी चूत चोद के मजा कर यार … जो भी मुझे अच्छा लगा, मैंने उससे यही कहा. इस कहानी में एक लड़का बारिश से बच कर मेरे घर के पोर्च में खड़ा था. मैंने उसे अंदर बुला लिया।


सौ मालती ठोके

मैं सबीना हूँ दोस्तो! मैं उच्च घराने को बिलोंग करती हूँ, मॉडर्न हूँ और ओपन माइंडेड हूँ। मैं पुराने रीति रिवाजों को नहीं मानती, न ही मेरे घर वाले मानते हैं।
हम लोग आज के ज़माने में रहते हैं और आज के ज़माने के अनुसार ही अपनी ज़िन्दगी जीते हैं।

मैंने जब जवानी में कदम रखा तो मुझे लड़कों से ज्यादा लड़कों के लण्ड से प्यार होने लगा.
मैं लण्ड के बारे में सोचने लगी. जैसे कि इस लड़के का लण्ड कितना बड़ा होगा? उस लड़के का लण्ड इतना मोटा होगा, इसका लण्ड खबसूरत होगा उसका लण्ड शायद छोटा होगा आदि आदि।
मन ही मन मैं लोगों के लण्ड के साइज का अनुमान लगाने लगी।

मैं अपने कुनबे के ही लोगों के लण्ड छुप छुप कर देखने और पकड़ने की कोशिश करने लगी।

इसी बीच मैंने अपनी कई सहेलियां बना लीं थीं और उनसे खुल कर बातें करने लगी थी।
लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा सबके बारे में खुल कर बातें करतीं थीं हम सब!

उनके घर आना जाना भी शुरू हो गया था तो धीरे धीरे उनकी घर के सभी लोगों से भी घुल मिल गयी थी मैं!

उनमें से एक सहेली थी नगमा!
एक दिन मैंने उससे कहा- यार नगमा, तेरा भाई तो बड़ा हैंडसम है, किसी दिन उसका लण्ड दिखाओ न मुझे? मैंने अभी तक कोई लण्ड नहीं पकड़ा. मैं देखना चाहती हूँ कि लण्ड होता कैसा है … लण्ड दिखता कैसा है?
वह बोली- हायल्ला तूने अभी तक कोई लण्ड नहीं देखा? झूठ बोल रही है तू … चूतिया बना रही है तू मुझे!

मैंने कहा- यार, मैं झूठ नहीं सच कह रही हूँ। मैंने नहीं पकड़ा आज तक कोई लण्ड!
वह बोली- अच्छा बता तू किस तरह का लण्ड देखना चाहती है?
मैंने कहा- यार मैं लण्ड के बारे में कुछ जानती ही नहीं. पोर्न में देखा है तो लगता है कि लण्ड बड़े बड़े होते हैं और मोटे मोटे भी!
वह बोली- अच्छा रुक जा, आज मैं तुझे अभी लण्ड दिखा देती हूँ।

उसने अपना फोन उठाया और जाने क्या लिखा कि बस 10 मिनट में ही एक नहीं, दो लड़के आ गए।

नगमा बोली- देखो सबीना, यह मेरी फूफी का बेटा शमी है और यह इसका दोस्त रज़ा है।
उन दोनों से उसने कहा- ये सबीना है मेरी पक्की दोस्त। हम दोनों दो जिस्म इक जान हैं! न मैं इससे कुछ छुपाती हूँ और न ये मुझसे! इस बिचारी ने अभी तक कोई लण्ड नहीं देखा। शमी तुम अपना लण्ड इसे दिखा दो। मैं तुम्हारे दोस्त का लण्ड पकड़ लेती हूँ।

उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और शमी का पजामा मेरे आगे खोल कर फेंक दिया।
उसका टनटनाता हुआ लण्ड मुझे पकड़ा दिया, बोली- ले भोसड़ी की सबीना, अब तू जी भर के देख ले लण्ड! अच्छी तरह पकड़ के देख ले लण्ड!

मैंने बड़ी मस्ती से मुस्कराते हुए उसका लंड पकड़ लिया, उसे थोड़ा हिलाया, प्यार से उसे चूमा और उसे चारों तरफ घुमा कर देखने लगी।
मैं लण्ड में खो गयी।

मेरा मुंह अपने आप ही खुल गया और मैं लण्ड चाटने चूसने लगी।

तब तक नगमा ने भी रज़ा का लण्ड चूसना शुरू कर दिया था।

मैंने पूछा- शमी क्या तुम दोनों मिलकर लड़कियां चोदते हो?
वह बोला- हां हम लोग मिलकर लड़कियां चोदते हैं. मिलकर लड़कियों की माँ भी चोदते हैं।

तब तक नगमा बोली- क्या तुम लोग एक दूसरे की माँ बहन भी चोदते हो?
शमी बोला- हां चोदता हूँ। रज़ा मेरी माँ चोदता हैं मैं रज़ा की माँ चोदता हूँ। रजा मेरी बहन चोदता है मैं रजा की बहन चोदता हूँ।

इन बातों ने मेरी चूत की आग बुरी तरह भड़का दी।
मैं लण्ड और उत्तेजित होकर चूसने लगी।

जोश नगमा को भी आ गया था।

मैं बीच बीच में लण्ड बाहर निकाल निकाल कर मुट्ठ से आगे पीछे करने लगी, ऊपर नीचे करने लगी जैसे सड़का मारा जाता है।
ऐसा ही कुछ नगमा भी कर रही थी।

शमी बहुत ज्यादा ही उत्तेजित हो गया तो वह मेरे मुंह झड़ गया।
मैं भी उसका सारा वीर्य पी गयी क्योंकि मैंने लड़कियों को लण्ड पीते हुए पोर्न में देखा था।

उधर जब रज़ा का लण्ड झड़ा तो मैंने नगमा के साथ उसका लण्ड भी चाटा।

उस दिन तो दोनों चले गए मगर दूसरे दिन नगमा ने मुझे फिर बुलाया।
मैं पहुँच गयी तो वो दोनों पहले से ही बैठे थे।
मैंने कहा- मेरी चूत चोद के मजा कर यार!

फिर क्या … दोनों ने मुझे बारी बारी से खूब धकाधक चोदा और मैंने खूब धकाधक चुदवाया भी!
इसके बाद मेरा चुदवाने का रास्ता खुल गया और मैं हर रोज़ किसी न किसी का लण्ड पेल पेल कर चुदवाती रही।

मैंने अपने खालू से चुदवाया, अपने मामू जान से चुदवाया, मेरा चचा जान तो आज भी मुझे चोदता है।
मुझे सच में नए नए लण्ड से चुदाने की आदत पड़ गयी।

इस तरह मैं बुर चोदी सबके लण्ड का मज़ा लेने लगी।

फिर मेरी शादी हो गयी, मैं अपने शौहर के साथ मुंबई चली गयी।

मेरी शादी का एक साल हो चुका था।
यह तो आप जानते ही हैं कि मैं एक मदमस्त, सुन्दर, सेक्सी और हॉट बीवी हूँ। गोरी चिट्टी हूँ। मेरा कद 5′ 4″ है। मेरा जिस्म भरा हुआ है।

मेरे बड़े बड़े सेक्सी और हॉट बूब्स बड़े बड़े मर्दों को अपना लण्ड हिलाने के लिए मजबूर कर देते हैं।

मैं जब निकलती हूँ तो लोग आगे से मेरी उछलती हुई चूचियाँ और पीछे से मेरी मटकती हुई गांड आँखें फाड़ फाड़ कर देखते हैं। मेरे नाम का सड़का मारते हैं लोग!
उधर मेरा भी मन करता है कि मैं भी उनके लण्ड पकड़ कर देखूं, लण्ड मुंह में लेकर चूसूं और लण्ड अपनी चूत में पेल कर मज़ा लूं।

यही सब सोचती हुई और मुस्कराती हुई मैं निकल जाती हूँ।

मेरे शौहर एक बड़ी कंपनी में बड़े पद पर काम करते हैं इसलिए उनका आना जाना देश में कई जगहों में और विदेशों में भी कई जगहों पर होता रहता है।
मैं यहाँ घर में पूरे फ्लैट में अकेली ही रहती हूँ।

जब मेरा शौहर बाहर टूर पर जाता है तो मैं ड्राइवर की भी छुट्टी कर देती हूँ और गाड़ी खुद चलाती हूँ। अगर उसे रखूंगी तो वह मेरे सारे राज़ जान जायेगा। फिर मेरे लिए मुश्किल हो जाएगी।

मुझे पराये मर्दों के लण्ड पीने का बड़ा शौक है और पराये मर्दों से चुदवाने का तो जबरदस्त शौक है।
मेरी सबसे ज्यादा पसंदीदा चीज है पराये मर्दों के लण्ड!

मैं जब अकेली होती हूँ तो मेरे मन में, मेरे दिल में बस लण्ड ही लण्ड घूमा करते हैं।
लण्ड के अलावा मैं कुछ और सोच ही नहीं सकती।

मैं जब पोर्न देखती हूँ तो उसमे भी सबसे ज्यादा लण्ड ही देखती हूँ इसलिए लण्ड के जुगाड़ में लगी रहती हूँ।
कभी अपने यारों को घर में बुलाकर चुदवाती हूँ और कभी बाहर जाकर लण्ड अपनी चूत में पेलवाती हूँ।
घर में अकेली रहने पर नंगी नंगी पोर्न देखती हूँ और sexy hot stories और फ्री सेक्स कहानी साईट पर हिंदी की सेक्स कहानियां पढ़ती हूँ।

एक दिन पानी बहुत जोर से बरस रहा था।
मैं मुंबई में रहती हूँ और मुंबई की बरसात तो बड़ी मशहूर है।

नीचे पोर्च में एक मस्त जवान लड़का बिलकुल भीगा हुआ खड़ा था। वह ठण्ड के मारे थोड़ा कंपकंपा भी रहा था।
मुझे उस पर तरस आ गया तो मैं उसे अपने फ्लैट पर ले आई और उसे एक तौलिया दिया।

मैंने कहा- तुम इसे लपेट कर अपने सारे कपड़े उतार दो, मैं उन्हें मशीन में धो दूँगी. एक घंटे में धुलकर और सूख जायेंगे, तब तुम उन्हें पहन कर चले जाना।
वह मान गया।

मेरा तो निशाना कहीं और था।
मैंने जब उसकी चड्डी देखी तो समझ गयी कि अब यह तौलिये के नीचे बिल्कुल नंगा है।

पहले मैंने उसके लिए गर्म गर्म चाय बनाई।
हल्का सा ब्लोवर चला दिया तो उसकी ठंड दूर हो गयी।

लड़का बड़ा स्मार्ट था, हैंडसम भी था।
उसकी छाती के बाल बड़े सेक्सी लग रहे थे। बदन उसका कसरती था।

मेरी चूत की आग धधकने लगी थी।

फिर मैंने उसे हॉट वाटर में एक पैग व्हिस्की बनाकर दी और मैं भी उसके साथ पीने लगी।
मैं केवल मैक्सी में थी और कुछ भी नहीं, ना ब्रा ना पेंटी।

मैसी फ्रंट ओपन थी, मैंने अपने लम्बे लम्बे बाल आगे कर लिया था, जिससे मेरी दोनों चूचियाँ ढकी हुईं थीं।
बीच बीच में मैं उसका रुख जानने के लिए अपनी चूचियों की झलक उसे दिखा भी देती थी।

मैंने कहा- यार अब तुम अपने बारे में मुझे बताओ कुछ?

उसने कहा- मैं असद हूँ। मैं 22 साल का हूँ, एम बी ए फाइनल ईयर में हूँ।

मैंने पूछा- तो फिर तुम्हारे कॉलेज में लड़कियां भी होंगी? अब तुम सच सच बताओ की तेरी गर्ल फ्रेंड्स कितनी हैं?
वह बोला- करीब करीब सभी लड़कियां हैं मेरी गर्ल फ्रेंड्स, मैं सबसे बड़े प्यार से बोलता हूँ, सबके बना कर रखता हूँ किसी से कोई मनमुटाव नहीं रखता।

मैंने कहा- मेरा मतलब कितनी लड़कियां तुम्हारी पक्की दोस्त हैं जिन्हें तुम अच्छी तरह से जानते हो … सब कुछ खुल कर करते हो, वो भी तुमसे पूरी तरह खुली हुई हैं।
उसने बताया- वो तो बस 4 / 5 ही हैं।

मैंने पूछा- तो फिर सच सच बताओ की कितनी लड़कियां चोदीं हैं तुमने अभी तक?
वह थोड़ा शर्मा गया।

मैंने उसकी हिम्मत जुटाई और कहा- यार असद, तुम मर्द हो न? एक बात अच्छी तरह समझ लो कि बिना लड़की चोदे कोई लड़का मर्द नहीं बनता. मर्द होने का सबूत है बुर चोदना। तुम्हें बताने में क्या दिक्कत हो रही है? यहाँ मेरे अलावा कोई और तो है नहीं!
वह बोला- हां, मैंने दो लड़कियां चोदीं हैं।

मैंने कहा- अच्छा कितनी लड़कियों ने तेरा लण्ड पकड़ा है?
उसने बताया- वो तो कई हैं मेम, कुछ तो जबरदस्ती लण्ड पकड़ लेती हैं। कुछ डरा धमका कर पकड़ लेती हैं. कहतीं हैं कि मुझे लण्ड पकड़ाओ नहीं तो मैं शोर मचा दूंगी। फिर मुझे पकड़ाना ही पड़ता है।

मैंने कहा- अच्छा बताओ लड़कियां लण्ड पकड़ कर क्या करतीं हैं।
उसने बताया- मुंह में लेती हैं. चूमती हैं चाटती हैं फिर सड़का मारती हैं और जो कुछ निकलता है उसे पी जाती हैं, चाट जाती हैं.

मैंने कहा- लड़कियों को कभी गाली देते हुए सुना है?
वह बिंदास बोला- खूब सुना है. रोज़ ही सुनता हूँ। लड़कियां आपस में खूब गालियां बकतीं हैं। लड़कों के आगे बकतीं हैं। लड़कों को खुले आम गालियां देती हैं।

मैंने एक तीखा सवाल पूछा- अच्छा अब बता कि तेरे लण्ड का साइज क्या है असद?
वह बोला- कभी नाप कर देखा नहीं मैंने!

मैंने उसे इशारा किया तो वह खड़ा हो गया। मैंने उसकी तौलिया खींच लिया तो वह नंगा हो गया।
तब मैंने मुस्कराते हुए कहा- अब मैं नाप कर देखूंगी तेरे लण्ड का साइज!

लण्ड उसका बहनचोद खड़ा ही था।

हाथ बढ़ाकर मैंने बड़े प्यार से लंड पकड़ लिया, उसकी चुम्मी ली और कई चुम्मियाँ ली तो लण्ड एकदम से तन गया।
मैंने पेल्हड़ भी चूमे।

उसकी मस्ती बढ़ने लगी।

मैंने अपनी चूचियाँ खोल दीं.
उन्हें देख कर उसका लौड़ा और ज्यादा फनफना उठा।

मैंने इंची टेप निकाला और लण्ड का साइज नापा तो 8″ x 4″ का निकला।
तो मैंने कहा- वॉव … बड़ा मोटा तगड़ा है तेरा भोसड़ी का लण्ड असद! तू सच में बहुत मस्त और शानदार मर्द है यार! अब मुझे मालूम हुआ कि लड़कियां क्यों पसंद करतीं हैं तेरा लण्ड! आज मैं भी तेरे लण्ड की दीवानी हो गई हूँ!

मैंने अपने बाल एक ही झटके में पीछे कर दिया तो मेरी दोनों चूचियाँ एकदम नंगी हो गयीं उसके आगे।
वह मुझे बड़े गौर से देखने लगा।

फिर मैंने अपनी मैक्सी भी उतार फेंकी।
मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी उसके आगे … और वह भी नंगा हो चुका था मेरे आगे!

उसे मैं बेशरम बनाना चाहती थी, उसकी झिझक ख़त्म करना चाहती थी।

मैंने पूछा- असद, तुमने कभी किसी लड़की की बुर चाटी है?
वह बोला- हां, मैंने अपनी भाभीजान की बुर चाटी है। उसने खुद ही अपनी बुर दिखाते हुए कहा था ‘देवर जी, पहले मेरी बुर चाटो फिर चोदो।’

उसकी यह बात सुनकर मुझे भी जोश आ गया।
मैं भी बड़ी सेक्सी आवाज़ में बोली- मैं भी तेरी बुरचोदी भाभी जान हूँ असद! मैं भी तेरी हरामजादी भोसड़ी वाली भाभीजान हूँ। मेरी भी बुर चाटो मेरे देवर राजा, मैं तेरा लण्ड चाटूँगी।

ऐसा बोलकर मैंने उसे बेड पर चित लिटा दिया, अपने बालों का जूड़ा बना कर ऊपर बांध लिया और उसके ऊपर चढ़ बैठी, अपनी बुर उसके मुंह पर रख दी और खुद झुक कर उसका लण्ड चाटने लगी।
वह मेरी बुर चाटने लगा।

हम दोनों 69 बन गए।

बिना झांट का लण्ड बहन चोद बड़ा खूबसूरत लग रहा था।
वैसे भी मुझे पराये मर्दों के लण्ड बिना झांट के चिकने चिकने ही अच्छे लगते हैं।

वह भी मस्ती से मेरी बुर चाटने लगा। उसकी शर्म झिझक सब ख़त्म हो गयी थी। उसे खूबसूरत परायी चोदने को मिल रही थी तो वह भी मस्त हो गया था।

तो मैंने उसे कहा- अब मेरी चूत चोद यार!

असद ने फिर लण्ड मेरी चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा घुसा दिया अंदर!
फिर उसे पूरा बाहर निकाला और फिर पेल दिया अंदर!

ऐसा वह बार बार करने लगा।

लण्ड पूरा निकाल कर बार बार पेलना मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।

मैं समझ गयी कि इसे बुर चोदना आता है … अनाड़ी नहीं है असद!
चूत चोदने का अनुभव है इसे!

ऐसे में मैं भी अपनी गांड गांड उछाल उछाल कर चुदवाने लगी।

उसके मुँह से निकला- हाय मेरी भाभी जान, तेरी फुद्दी मुझे बड़ा मज़ा दे रही है। आज मैं इसे अच्छी तरह चोद डालूँगा। मुझे लगता है कि तू भी पूरी छिनार है। ग़ैर मर्दों से खूब भकाभक चुदवाती है। तेरी माँ का भोसड़ा … तेरी बहन की चूत! फाड़ डालूँगा आज मैं तेरी चूत। मेरी बुरचोदी भाभीजान भी ऐसे ही चुदवाती है जैसे तू चुदवा रही है। वह भी बहुत बड़ी छिनार है। मेरे दोस्तों के भी लण्ड पीती है मेरी भाभी। मेरे पड़ोस में एक लड़की है तब्बू … मैं उसकी भी बुर चोदता हूँ।

उसकी बातों ने तो मेरी चूत में और आग लगा दी।
मैं और उत्तेजित हो के चुदवाने लगी।

मैंने कहा- हाय रे मेरे राजा … चोद डालो मेरी चूत। तेरा लण्ड साला बड़ा ताकतवर है। आज चीर डाल मेरी चूत। बहुत दिनों के बाद कोई लौड़ा घुसा है इसमें! मेरी चूत का बना दो भोसड़ा। मैं तेरी बीवी हूँ यार असद … मुझे बीवी की तरह हचक हचक के चोदो, पूरा लौड़ा पेल के चोदो। मेरी माँ भी चोद डाल यार … मेरी बहन की बुर में भी लौड़ा घुसेड़ दे। तू कुछ भी कर सकता है।

मैं उचक उचक के खूब मस्ती से चुदवाये चली जा रही थी।
वह चुदाई की स्पीड बढ़ाता जा रहा था।

मैं पागल हुई जा रही थी और वह शेर की तरह मेरी चूत मार रहा था।
कुछ देर में वह बोला- भाभीजान, अब मैं निकल जाऊंगा।

तब तक मैं भी खलास हो चुकी थी।

फिर मैंने उसका झड़ता हुआ लण्ड पिया।

मैंने उसे रात में रोक लिया और रात में 3 बार उससे चुदवाया और खूब मजे से चुदवाया।

किसी ने सच ही कहा है कि जिस बीवी को ग़ैर मरद के लण्ड का चस्का लग जाता है, वह फिर कभी ज़िन्दगी में छूटता नहीं है।
मेरी कहानी कैसी लगी? कमेंट्स करके बताएं.