शादीसुदा लड़की बनी भाई की रंडी

मैं एक 22 वर्ष की शादीशुदा लड़की हूँ. यह पोर्न सिस्टर सेक्स कहानी मेरी चूत चुदाई की है.

मेरा फिगर 32-28-34 का है. मेरे पति फौज में होने के कारण साल में दो ही बार छुट्टी लेकर घर आ पाते हैं.
जब मेरे पति घर आते हैं तो वो मेरी जमकर चुदाई करते हैं.

पर उनके जाने के बाद मेरा सम्भोग करने का बहुत मन करता है मगर मैं बिना लंड के बेबस रह जाती थी.
इस वजह से मेरा मन नहीं लगता तो मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली जाती थी.

मेरे मायके में मेरे मम्मी-पापा, दादी और एक बड़ा भाई है जो शादीशुदा है.
उसकी पत्नी सामान्य रूप और कद काठी वाली है.

इस बार पति के जाने के बाद मैं एक महीने के लिए मायके आई थी.
अक्सर मेरा मन होने पर मेरे पति मेरे साथ फोन पर ही सेक्स किया करते थे.

उस दिन पति के साथ सेक्सी बातें करने से ही ये मामला शुरू हो गया था.

हुआ यूं कि हल्की सर्दी के दिन थे, एक दिन मम्मी और दादी ऊपर छत पर थीं.
भाई दुकान पर गया हुआ था.
मेरी भाभी भी अपने मायके गयी हुई थी.

मैं अपने पति से सेक्सी बातें कर रही थी.
उसी समय मेरी हाथ मेरी चूत पर चला गया और मेरी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.



इसी बीच मेरा भाई खाना खाने के लिए घर कब आ गया, मुझे कुछ अंदाजा ही नहीं ही सका था.
भाई ने जब मेरी वासना भरी सिसकारियां सुनी तो वो मुझे खिड़क़ी से देखने लगा.

कुछ देर बाद जब मेरी चूत से पानी निकल गया तो मैं बाहर आ गयी.

भाई सोफे पर बैठा हुआ था और मुझे देखे जा रहा था.

मैं सामान्य भाव से अन्दर जाकर उसे खाना देने लगी.

वो मुझे देख कर हंसने लगा.
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- कुछ नहीं.

मैं समझ गई कि इसने मेरी बातें सुन ली हैं मगर मैं कुछ नहीं बोली और उसे खाना देकर कमरे में चली गई.

अब ये रोजाना का किस्सा हो गया था.

मेरा भाई मुझे हवस भरी निगाहों से देखने लगा था.
मुझे भी आभास हो गया था कि भैया ने मुझे देख लिया था, मैं उससे नजरें नहीं मिला पाती थी.

एक दिन घर में कोई नहीं था और मेरा बेटा भी मम्मी के साथ बाहर गया हुआ था.
मैं कमरे में सोई हुई थी.
मेरा भाई दुकान से आया और रसोई में जाकर खाना लेकर खाने लगा.

मैं भी गहरी नींद में सोई हुई थी. मेरा भाई मेरे पास आकर सो गया.
उस दिन मैंने ऊपर टॉप और नीचे फुल स्कर्ट पहनी हुई थी.

वो धीरे धीरे मेरा टॉप ऊपर करने लगा लेकिन मुझे कुछ होश नहीं था.

मेरा भाई मेरे मम्मों को सहलाने लगा.
उसने अपना लंड मेरी गांड पर लगाया हुआ था.

अचानक से उसने मेरे मम्मों को जोर से दबाया तो मैं जाग गयी.
पर वो पीछे नहीं हटा और मुझे अपने नीचे दबाने लगा.
मैंने उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया.

वो मेरी तरफ देख कर हंसने लगा.
मैंने कहा- ये क्या कर रहे थे आप?

वो साफ़ शब्दों में बोला कि मैंने देखा है कि तू अपनी चूत में उंगली से पानी निकालती है, तो मेरे साथ सेक्स करने में क्या बुराई है.
मैंने कहा- आप मेरे भाई हो और मैं अपने पति के सिवाय किसी के साथ सेक्स नहीं कर सकती हूँ.

भाई ने उठ कर मन्दिर से सिन्दूर लिया और मेरी मांग भर दी.
वो बोला- अब मैं भी तेरा पति बन गया हूँ. मैं तुझे बहुत प्यार करने लगा हूँ और तुझे तेरे पति की कमी महसूस नहीं होने दूँगा.

मैं कमरे से बिना कुछ बोले बाहर आ गयी.
मैं ये बात किसी को बता भी नहीं सकती थी.

मैंने अपने पति को ही ये सारी बात बतायी.
मेरे पति बोले- मेरे बिना तू हमेशा तड़पती रहती है. मैं भी तुझे तड़पते हुए नहीं देख सकता. तू उसे अपना दूसरा पति मान ले, तो तू भी खुश रहेगी.

मुझे उनके ऊपर बहुत गुस्सा आया, मैंने कहा- आप ये क्या कह रहे हैं?
पति ने कहा- जरा ठंडे दिमाग से सोच … सेक्स की भूख सभी को लगती है. यदि कभी तूने घर के बाहर किसी दूसरे से सेक्स कर लिया और कुछ लफड़ा हो गया तो बड़ी बदनामी होगी और हो सकता है कि तू किसी परेशानी में फंस जाए. इससे अच्छा है कि तू अपने भाई के साथ ही सेक्स कर ले.

मैंने उन्हें झिड़की दी- ये आप क्या कह रहे हैं. मैं ऐसा नहीं कर सकती.

aur मैंने ऐसा करने से मना कर दिया.
पर उन्होंने मुझे अपनी कसम दी तो मुझे मानना पड़ा.

फिर पति ने कहा- मेरे लिए भी तू अपनी भाभी का इंतजाम भी कर लेना. इस बार मैं तुम दोनों को एक साथ चोद लूंगा.
मैं हंसने लगी- भाभी को कैसे सैट कर सकती हूँ.
पति भी हंसने लगे और बोले- चलो सैट करने की कोशिश करना. यदि भाभी सैट हो गई तो ठीक है नहीं तो अपने भैया से कह कर मेरे लिए उसकी बीवी की बात करना.

मैंने हंस कर बात टाल दी.

अब मैं अपने भाई से अपनी चूत चुदवाने की सोचने लगी.
अभी भी मुझे संकोच हो रहा था कि मैं अपनी चूत में अपने भाई का लंड कैसे ले सकती हूँ.
उधर मेरा भाई अब भी मेरी हां का इन्तजार कर रहा था.

मैं फोन पर व्हाट्सैप चलाने लगी.
मुझे ऑनलाइन देख कर मेरे भाई ने मुझे हैलो लिखा.
मैंने भी उसे हाय लिखा.

तभी उसका मैसज आया- चांदनी आई लव यू!
मैंने कुछ देर सोचा, फिर जवाब लिखा- तुम्हारी पत्नी चांदनी आज रात, सुहागरात मनाने के लिए इन्तज़ार कर रही है.

मेरा भाई खुश हो गया और उसने रात को मुझे चोदने की हामी भर दी.
मुझे इस सब में अब भी अच्छा नहीं लग रहा था.
मगर चूत की कुलबुलाहट और पति की तरफ से हरी झंडी मिलने से मैं चुदने को बेकरार हो गई थी.

रात में मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और अन्दर काले रंग की ब्रा और पैंटी.
सब के सोने के बाद भाई अन्दर आया. मुझे देखकर वो बहुत खुश हुआ.

मेरे पास आकर बैठा और मेरे पैरों पर हाथ फिराने लगा,फिर उसने मुझे पकड़ा और मेरे होंठों पर किस करने लगा.

मुझे अच्छा नहीं लग रहा था. मैं बस अपने पति के लिए कर रही थी.

वो मेरे होंठों को बहुत देर तक चूसता रहा.
फिर उसने मेरी साड़ी खोल दी और मेरे पेटीकोट को ऊपर करके मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगा.
उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया और मेरे भरे हुए दूध चूसने लगा.

उसने मेरे मम्मों को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
अब मुझे भी अच्छा लगने लगा.

मैंने उसका सर उठाया और उसके होंठों को चूसकर अपने ऊपर लेटा लिया.
अब मैं भी चुदने के लिए पागल सी हो गयी थी.

वो मेरी चूत में उंगली करने लगा.
मेरी चूत गीली हो गयी थी.

मैंने उससे कहा- जान अपनी पत्नी की चूत नहीं पियोगे?
इतना सुनते ही उसने मेरे पैर ऊपर उठा कर चौड़ा दिए और मेरी चूत पीने लगा.

अब हम दोनों पति पत्नी जिस्म से भी बन चुके थे.

मैंने पैरों से उसे अपनी चूत पर दबा लिया.
उसके मुँह में मैंने दो बार पानी छोड़ा.

उसने कहा- तुम भी मेरा लंड पियो ना जान!
मैंने मना किया तो उसने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और मेरे मुँह की चुदाई करने लगा.

दस मिनट तक मेरा मुँह चोदने के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और जोर से अन्दर डाल दिया.

उसका लंड मेरी चूत में हाहाकार मचाने लगा.
मुझे मीठा दर्द होने लगा.

उसने जोर जोर से मेरी चूत चुदाई शुरु कर दी. उसने अलग अलग पोजीशन में 20 मिनट तक मेरी चुदाई की और अपना वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया.

वो चुदाई करके वापिस अपने कमरे में जा रहा था तो मैंने कहा- आज से तुम अपनी पत्नी के पास ही सोया करोगे. घर वालों को मैं कुछ भी बोल दूंगी.
ये सुनकर वो खुश हो गया.

उस रात उसने मेरी 5 बार चुदाई की.
अब रोज जब भी उसे मौका मिलता है, भाई पोर्न सिस्टर सेक्स करता है मेरे साथ!

कुछ दिनों बाद उसकी पत्नी वापस आ गई.

एक रात जब वो मेरी चुदाई के लिए, मेरे कमरे में आया तो मेरी भाभी ने उसे देख लिया और उसने हम दोनों को चुदाई करते हुए पकड़ लिया.

वो मुझे और उसे गालियां देने लगी.
उसने धमकी दी कि वो सबको हमारे रिश्ते के बारे में बता देगी.

मेरे भाई ने उसे किसी तरह मना लिया.
अब हम दोनों का एक साथ सोना मुश्किल हो गया.

वो बोला- तेरी भाभी मान नहीं रही है.

मैंने उससे हम दोनों को एक साथ चोदने के लिए कहा.
भाई राज़ी था.

मैंने भाई के साथ मिल कर भाभी की थ्रीसम चुदाई का प्लान बनाया.

उस दिन मैंने भाभी को अपने कमरे में बुलाया और उससे चुदाई की बातें करने लगी.

वो बड़ी ही कामुक महिला थी.
उसने मुझसे कहा- दीदी आपको जीजा के लंड के बिना अच्छा नहीं लगता होगा न?
मैंने हंस कर कहा- हां … पर क्या किया जा सकता है. तुमको अपनी ननद का दुःख कहां देखा जाता है?

वो बोली- आप क्या चाहती हो दीदी?
मैंने कहा- वो सब बाद में बताती हूँ.

वो बोली- बाद में क्या बताओगी. जब चूत में आग अभी लगी है तो लंड कहां से लाओगी?
मैंने उससे मजाक करते हुए कहा- लंड न सही चूत से ही काम चला लूंगी.

भाभी हंसने लगी.
फिर मैं उसे पकड़कर किस करने लगी और उसकी चूत में उंगली डाल दी.

अभी भाभी गर्म हो चुकी थी.
वो बोली- दीदी एक साथ चुदना चाहो तो चुदवा लो.
मैंने कहा- हां भाभी अपने पति को बुला लो हम दोनों एक साथ एक ही लंड से चुदवा कर मजा ले लेंगे.

मेरा भाई पहले से ही इन्तजार कर रहा था, वो अन्दर आ गया.
तभी भाभी दूर हट गई और नजरें चुराने लगी.

भाई ने उसे बिस्तर पर पटका और चूत चाटने लगा.
मैं भी उसके दूध पीने लगी.

भाभी गर्म होने लगी, तो भाई ने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया.
कुछ मिनट के बाद भाई ने अपना माल उसकी चूत में डाल दिया.

मुझे भी भाई से चुदाई करवानी थी.

जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकला, मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया.
भाई के लंड पर दोनों का माल लगा हुआ था, जिसे मैंने चाट लिया.

अब भाभी भी हमारा साथ दे रही थी. उसने मेरी चूत चूसना शुरु कर दी.

अब मेरी चुदाई की बारी थी.
भाई ने अपना लंड मेरी चूत में पेला और मुझे चोदना शुरु कर दिया.

कोई बीस मिनट तक चोदने के बाद वो झड़ने वाला था.
मेरा भी दो बार पानी निकल चुका था.

भाई ने अपना लंड निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया और अपना वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया.

अब हम तीनों मिलकर चुदाई करते हैं.

बस में अजनबी से चूत की खुजली मिटाई

नमस्कार दोस्तो, मैं आपकी अंजलि ठाकुर sexystory.art.blog पर मेरी खुली चूत से सबको प्रणाम. मेरी उम्र 29 साल की है और मेरा फिगर 34C-30-34 का है. मेरी बाहर निकली गांड और बड़ी बड़ी भरी हुई चूचियों को देखकर ज़वान से लेकर बुड्ढा भी अपने लंड पर हाथ फेरने को मजबूर हो जाते हैं.

दोस्तो, जैसे कि मेरे पति आर्मी में हैं और वो ड्यूटी के लिए बाहर रहते हैं. इसलिए मेरी गान्ड और चूत भी लंड के लिए तड़पती रहती है.

लेकिन मेरे सास ससुर के रहते में बस लंड को याद करके रात में अपनी उंगली से ही चूत को शांत करके सो जाती हूं.

मेरे मुहल्ले में सबकी नजर मुझ पर हमेशा रहती थी और लड़के बुड्डे सब मुझे अपनी नज़रों से चोदते थे.
मेरी बड़ी गांड और जुल्फों में जाने कितनों का दिल अटका हुआ था.

मैं दिन भर घर का काम करती http://www.sexystory.art.blog पर कहानी पढ़ती और रात में पति से बात करने के बाद चूत में उंगली करके पानी निकाल कर सो जाती.

अब मैं मेरी ट्रेवल सेक्स कहानी बताती हूँ.मैं जम्मू में रहती हूँ. एक दिन मेरी सास को लेकर मुझे पी जी आई चंडीगढ़ जाना था, वो बीमार थी.
हमने पहले से टिकट नहीं ली थी रात की. जिस स्लीपर बस में हम चढ़े, उसमें बैठने की एक ही सीट मिल सकी और जाना भी जरूरी था.

अपनी सास को मैंने नींद की गोली दी, वो खाकर चादर ओढ़कर सो गई.
मैं पास की सीट में गांड सटाकर खड़ी हो गई.

मैंने पीठ से खुली गुलाबी कुर्ती पहनी हुई थी जिसमें लाल ब्रा से मेरी चूची बाहर निकलने को हो रही थी.

नीचे लाल पैंटी और काली पजामी पहनी हुई थी. मेरी 34 की गांड बाहर को निकली हुई है.

बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी और अंदर अंधेरा था.

अचानक से मुझे लगा जैसे किसी ने मेरी गान्ड पर हाथ लगाया हो.
अंधेरे में मुझे कुछ नहीं दिखा लेकिन मुझे अच्छा भी लगा.

थोड़ी देर बाद फिर से मेरी गान्ड पर हाथ चलने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने मन को काबू करके एकदम से अपनी गांड हटा ली और मैंने पीछे मुड़कर देखा तो अंधेरे में ज्यादा नहीं दिखा लेकिन कोई लड़का था.

मैंने उसकी तरफ गुस्से से देखा.
वो कुछ नहीं बोला और अपने लंड पर हाथ फेरने लगा.

सच बोलूं जब वो मेरी गान्ड में हाथ फेर रहा था तो मुझे भी मजा आने लगा था.

अब मैं सोचने लगी कि यह मैंने क्या कर दिया … और अपने आप पर गुस्सा करने लगी.

कुछ देर बाद फिर मेरी गान्ड में उसका हाथ चलने लगा.
मुझे भी उसका ये सब करना अच्छा लगने लगा.

बस अपनी फुल स्पीड पर चल रही थी और सब सो चुके थे.

अब उसने अपने हाथों को धीरे धीरे मेरी कमर पर फेरना शुरू कर दिया मैं चुपचाप खड़ी हुई थी.
उसको जैसे कोई डर ही नहीं था.

अब मैं भी गर्म हो चुकी थी और समझ गई कि आज की रात मेरी चूत में सिर्फ उंगली नहीं, लंड भी जाने वाला है.
रात को 11 बज चुके थे और हमें सुबह 6 बजे तक पहुंचना था.

अब मैं घूम गई, उसने मेरे दोनों कबूतरों को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया.
उसने धीरे से कहा- अंदर केबिन में आ जाओ.
वो शायद बस के स्टाफ में से था.

मैंने एक बार अपनी सास को देखा.
वो गोली खाकर गहरी नींद में सो रही थी.
मैंने चादर से उन्हें ढक दिया.

अब मैं केबिन में आ गई और उसने अंदर से बंद करते ही मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मैं भी जोश में आ गई और उसका साथ देने लगी.

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.
उसने मेरी कुर्ती उतार दी और ब्रा खोल दी.
अब वो मेरे बूब्स चूसने लगा.

आज बहुत दिनों बाद कोई मर्द मेरे जिस्म से खेल रहा था.

अब उसने मेरी पजामी और पैंटी एक साथ उतार कर फेंक दी और मैं पूरी नंगी हो गई.
वो अब मेरे शरीर को चूमने लगा और उसने अपनी बनियान उतार दी.

वह पहले से ही बनियान और अंडरवियर में था.

उसने मुझे कहा तो मैंने उसकी अंडरवियर उतार दी.
अब उसका मोटा 7 इंच का लंड मेरे हाथ में आ गया जो गर्म हो चुका था.
वो शायद पहले से ही चुदाई के लिए तैयार हो चुका था.

उसने मुझे उसका लंड चूसने को कहा और मैं उसके लंड को चूसने लगी.
उसका लौड़ा मेरे मुंह में पूरा नहीं आ रहा था.

उसने झटके लगाने शुरू कर दिये और लंड गले तक अंदर बाहर करने लगा.
आज पूरे 2 माह बाद मेरे मुंह में लंड था.

अब मैं लंड को अंदर बाहर करने लगी और वो तेजी से कमर चलाने लगा.
थोड़ी देर बाद उसने मेरे मुंह में लावा निकाल दिया जो मेरे गले से अंदर चला गया और बाहर निकलने लगा.

अब उसने लंड निकाल लिया और मुझे नीचे लिटा दिया और मेरी चूत में अपना मुंह लगाकर चाटने लगा.
वो अब अपनी जीभ मेरी गीली चूत में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा.

अब मैं झटपटाने लगी और मेरी सिसकारियां निकलने लगी.
उसने मेरे मुंह को बंद कर दिया.

अब वो जीभ से मेरी चूत चोदने लगा.
मेरी चूत कसने लगी और उसने पानी की धार छोड़ दी.
उस लड़के ने सब चाट कर के पी लिया.

उसने मेरे बारे में पूछा तो मैंने सब बता दिया.
उसने बताया कि वो जम्मू में रहता है और काम से चंडीगढ़ जा रहा है.

थोड़ी देर बाद उसने फिर से चूमना शुरू कर दिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.
मैंने कहा- अब मेरी चूत में लन्ड डालो.

उसने मुझे लिटा दिया और ऊपर आकर चूत में लन्ड रख दिया और एक झटके से लगभग पूरा लंड घुसा दिया.

मैं ऊईई ईई ओई सीईईईई ईईई करके चिल्लाने लगी.
अंधेरे में मुझे उसके लन्ड का अंदाजा नहीं लगा.
मेरी चूत में उसका लंड जैसे ही अंदर जाता तो मेरी जान निकल जाती.

उसने अचानक से अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी और अंदर-बाहर करने लगा. उसके इस हमले से मैं बिल्कुल अनजान थी.
अब मेरी चूत फटने वाली थी.

उसने मेरी चूचियां को मुंह में लेकर काटना शुरू कर दिया. उसने मेरे मुंह को अपने हाथों से बंद कर दिया और मेरी चूत में झटके पे झटके लगाने लगा.
मेरी चूत उसके सामने हार गई और पानी छोड़ दिया.
चूत रस से उसका लंड गीला हो गया और अंदर तक जाने लगा.
वो एक पुराने खिलाड़ी की तरह चुदाई कर रहा था.

अब मैं भी गर्म हो गई और अपनी गांड ऊपर उठा कर लंड लेने लगी.

उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से पकड़ कर चोदने लगा अब वो मेरे बूब्स पकड़कर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा.
बस में हो रही इस चुदाई का मज़ा अब बढ़ने लगा.

आज मैं खुद उसका लौड़ा अपनी चूत में रात भर लेना चाहती थी.
उसने मुझे लिटा दिया और मेरी टांगों को अपने कंधे पर रख कर लंड घुसा दिया और गपागप गपागप चोदने लगा.

अब दोनों एक-दूसरे से लिपटकर किस करने लगे और चुदाई का मज़ा ले रहे थे.

उस अजनबी ने अपना नाम मुझे रोहित बताया.

रोहित मुझे अपने लंड का स्वाद चखा रहा था और मैं भी आहहह आहहह आहहह करके मस्ती से उसके लन्ड को ले रही थी.
अब हम दोनों का चरम आ गया और दोनों ने एक साथ पानी छोड़ दिया.

मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा.
रोहित मेरे ऊपर लेट गया, उसका लंड मेरी चूत में घुसा था.
हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे.

10 मिनट बाद रोहित का लंड बाहर निकल गया.
मैंने उसे बताया कि मुझे बहुत मजा आया.

उसने मुझे अपने सामने बैठा दिया और लंड को होंठों पर रख दिया.
मैंने अपना मुंह खोला और उसका लंड चूसने लगी.

थोड़ी ही देर में उसका लंड खड़ा हो गया और झटके मारने लगा.

उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गान्ड को सहलाना शुरू कर दिया.

मैं समझ गई कि अब मेरी गान्ड की बारी है.
मैंने उसे मना किया, मै गांड में लंड लेने के लिए मना करने लगी.

मैं लंड को सोचकर डरने लगी थी.
रोहित ने मेरी गान्ड के छेद पर कुछ लगाया, शायद कुछ जैली थी.

अब उसने गांड के सुराख पर उंगली डाल दी.
मेरी चीख निकल पड़ी, मैं आहह हहहह ओहहह ऊईईई करने लगी, मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था.
उसने कहा- अंजलि अपना मुंह बंद कर लो, आवाज मत निकलने दो.

तब उसने मेरी गांड पर कोई तेल लगाया और अपने लंड को तेल से गीला करके मेरी गान्ड पर दबाने लगा.
उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने हाथ से मेरा मुंह बंद कर दिया और लंड को जोर से धक्का लगाया

मैं झटपटाने लगी क्योंकि उसका आधा लंड मेरी गान्ड में जा चुका था. मैं चिल्ला रही थी लेकिन मेरी आवाज़ नहीं निकल पा रही थी.

तभी रोहित ने लंड मेरी गांड से बाहर निकाल लिया और जोर से धक्का लगाया और पूरा लौड़ा अन्दर तक घुसा दिया.

मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे और मुझे लगा मेरी गान्ड फट गई.

अब मुझे होश नहीं था.
रोहित ने मुझे लिटा दिया और ऊपर से गांड में लंड डालकर चोदने लगा.

अब उसने अपने लंड की रफ्तार तेज कर दी और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा.
तब धीरे धीरे मेरा दर्द कुछ कम हुआ.

उसने अपना हाथ मेरे मुंह से हटा दिया अब मैं आहहह उहहह आहहह करके उसका लंड ले रही थी.

अब उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा और वो नीचे लेट गया. मैं अपनी गांड को उसके लन्ड पर लगाकर बैठ गई और धीरे धीरे उछलने लगी.
रोहित का लंड मेरी गांड में अंदर बाहर होने लगा.

अब हम दोनों बहुत गर्म हो गए और मैं उछलने लगी.
मैंने मेरे कबूतर उसके हाथ में पकड़ा दिये और वो उनको मसलने लगा.

अब बस की स्पीड के साथ लंड की रफ्तार भी तेज होने लगी.
मेरी गान्ड ने रोहित के लंड से दोस्ती कर ली.

अब रोहित ने उठाकर घोड़ी बना दिया और तेज़ तेज़ चोदने लगा.
आहह आहहह आहह करके अब मैं अपनी गांड आगे पीछे करने लगी.

अब दोनों तरफ से बराबर झटके लगने लगे थे और एक दूसरे को किस करने लगे.

रोहित ने लंड बाहर निकाल लिया और झटके से चूत में घुसा दिया और तेज़ तेज़ चोदने लगा.

अब मैं उसके हर झटके का जवाब दे रही थी.
अब तक हम दोनों एक दूसरे के सामने खुल चुके थे.

मैं एक अजनबी से ऐसे चुदवा रही थी जैसे वो ही मेरा पति हो.
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और रोहित का लंड गीला हो गया.

रोहित ने मुझे लिटा दिया और ऊपर आ गया. उसने चूत में लन्ड घुसा दिया और तेज़ तेज़ अंदर बाहर करने लगा.

गीला लंड फच्च फच्च करके अंदर बच्चादानी तक जाने लगा और मेरी सिसकारियां तेज़ हो गई थी.

उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिया और चूमने लगा. वो तेजी से अपना लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर करने लगा और मैं उसके होंठों को चूसने लगी.

अब रोहित ने अचानक से अपनी रफ़्तार तेज कर दिया और उसकी सिसकारियां भी तेज हो गई.

एक बार फिर दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे और एक साथ पानी छोड़ दिया.

रोहित मेरी चूत में लंड डाले डाले मेरे ऊपर लेट गया और मेरी चूचियों को चूसने लगा.
हम दोनों थक चुके थे और एक दूसरे को बांहों में लेकर चूमने लगे.

थोड़ी देर बाद बस रूकी. शायद कोई ढाबा था.

रोहित ने पूछा- कुछ लोगी क्या?
मैंने कहा- हां कॉफ़ी!

उसने लोवर टी-शर्ट पहनी और 2 कप कॉफ़ी ले आया.
हमने साथ में कॉफ़ी पी.
थोड़ी देर बाद लाइट बंद हो गई और बस चलना शुरू हो गई.

उसके बाद रोहित ने मुझे सुबह तक एक बार और जमकर चोदा और उसने मुझे रातभर कपड़े नहीं पहनने दिये.
रोहित ने मेरा नंबर ले लिया था.

सुबह 5:30 में मैंने कपड़े पहने तो उसने मेरी पैंटी ले ली और मैं बिना पैंटी के पजामी पहनकर बाहर आ गई.
एक सीट खाली थी, मैं उसमें बैठ गई. ट्रेवल सेक्स के बाद मैं थक गयी थी तो मुझे सीट पर बैठ के बहुत आराम मिला.

बस स्टेंड पर हमारी बस रूकी तो मैं अपनी सास के साथ ऑटो रिक्शा में बैठ गई.
और वो भी वहां से निकल गया.

उसने मुझे शाम को फोन किया.
मैंने उसे बताया कि मैं अपनी सास के साथ होटल रूपा में रूकी हुई हूं.
उसने बोला कि मैं भी आ रहा हूं.
और उसने मेरे साथ वाला रूम बुक कर दिया.

1 घंटे के बाद रोहित का फोन आया.
मैंने उससे कहा- अभी मेरी सास जाग रही है.

फिर थोड़ी देर बाद मैंने सांस को दवा पिलाकर नींद की गोलियां खिलाकर बिस्तर पर लिटा दिया.
थोड़ी देर बाद वो गहरी नींद में सो गई.

मैंने रोहित को फोन किया.
वो बोला- मेरा रूम खुला है, तुम अंदर आ जाओ.

अब मैं जल्दी से तैयार हो गई; मैंने सिल्क की गुलाबी मखमली नाइटी पहन ली; अंदर मैंने कुछ नहीं पहना.
मैं जैसे ही रोहित के रूम में पहुंची वो मेरा ही इन्तजार कर रहा था.

उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और चूमने लगा वो अंडरवियर में था. उसने मेरे बूब्स दबाने शुरू कर दिया और किस करने लगा.
अब मैं भी उसके साथ रंग में रंग गई और उसका हाथ पकड़ कर अपनी गांड पर ले गई.
हम दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलने लगे.

थोड़ी देर बाद दोनों नंगे हो गए और 69 की पोजीशन में आ गए.

रोहित आज मुझे पूरी तरह से खुश करके चोदने को तैयार हो गया और उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में लन्ड घुसा दिया और तेज़ तेज़ चोदने लगा.
अब मैं तेज़ तेज़ सिसकारियां निकालने लगी.

रोहित ने मुझे गोद में उठाया और झटके लगाने लगा.
अब होटल में हमें कोई डर नहीं था.

रोहित हर बार पोज बदल बदल कर चोद रहा था.
मेरी चूत ने दो बार पानी छोड़ दिया था.

अब रोहित ने मुझे घोड़ी बनाया और चोदने लगा. अब उसकी आवाज और रफ्तार अचानक से तेज़ हो गई और मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करने लगी.

एकदम से हम दोनों की सिसकारियां निकलने लगी और एक साथ पानी छोड़ दिया.

रात भर में रोहित ने मुझे अलग अलग आसन में 4 बार चोदा.
मेरी गान्ड और चूत फूल गई थी.
और हम दोनों थककर पता नहीं कब सो गए.

सुबह जब मेरी नींद खुली तो देखा कि सुबह के 7 बज चुके थे.

मैंने जल्दी से नाइटी पहनी और रोहित के ऊपर चादर डाल कर सोता ही छोड़कर अपने रूम में आ गई.
मेरी सास सो रही थी.
मुझे लगा कि आज बच गई.

थोड़ी देर में वो जाग गई.
रात की चुदाई से मेरे शरीर में दर्द हो रहा था, मैं बिस्तर पर ही लेटी रही.

10 बजे मैंने अपनी सास को अस्पताल में दिखाया और रात की बस से आने की तैयारी थी.
रोहित भी बस में आ गया और मेरी सास के सोने के बाद रात भर चलती बस में मुझे चोदा.

उसके बाद वो फोन पर मुझे चोदकर रात को मेरा पानी निकालने लगा.

बहन ने भाई से चुदवाया ट्रेन के अंदर

आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हूं यह कहानी आपका लंड खड़ा कर देगी यह कहानी ज्यादा पुरानी नहीं है मात्र 2 दिन पहले की है. यह कहानी मेरे और भाई के बीच की है मेरा भाई मुझे कैसे चोदा ट्रेन में वह मैं आपको बताने जा रही हूं आपको जानकर हैरानी होगी दोस्तों कैसे वह मुझे ट्रेन में ही सेटिस्फाइड कर दिया था.

इसके पहले मैं दो बार चुद चुकी हूँ अपने ड्राइवर से वो मेरी सील को तोड चुका था. और परसों जो मेरी चुदाई हुई वो दर्द के बिना हुई थी. पहली बार तो मुझे काफी दर्द हुआ था खून भी निकला था पर परसों मुझे दर्द नहीं हुआ बल्कि मैं और भी ज्यादा सेक्सी हो गयी थी. मैं गांड उठा उठा कर और जीभ निकाल निकाल कर अपनी चूचियों को मसलते हुए भाई के लंड और गांड को सहलाते हुए चुदी थी. आपके सामने वही सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ.

मेरा नाम दिव्या है मैं झारखण्ड में रहती हूँ मैं दिल्ली अपने भाई के साथ आ रही थी क्यों की मेरा इंजीनियरिंग में एडमिशन हो गया था.

मेरा भाई दिल्ली में ही रहता है मुखर्जी नगर में और मेरा एडमिशन नोएडा के एक नामी कॉलेज में हुआ है इसलिए हम दोनों ही धनबाद से दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस में आ रहे थे और सिचुएशन ऐसा बना की वो मुझे पेल दिया और मैं भी रोक नहीं पाई.

मेरा टिकट फर्स्ट क्लास ऐसी में था. मेरे पापा अफसर है इसलिए उन्होंने पास मिलता है और बहुत काम रूपये में ही फर्स्ट क्लास ऐसी का टिकट बुक हो जाता है. और आपको तो पता होगा. फर्स्ट ऐसी में प्राइवेसी होती है. और मेरे केबिन में तो सिर्फ हम दोनों ही थे. और दरवाजा जब बंद हो और उसमे एक लड़का और लड़की हो तो बात तो कुछ और हो ही जाती है.

ट्रैन शाम की थी. हम दोनों आराम से बैठ गए और सामान रख दिए. वो भी मोबाइल में कुछ देख रहा था और मैं भी मोबाइल में http://www.sexystory.art.blog डॉट कॉम ओपन कर हॉट भाई बहन की चुदाई की कहानियां पढ़ रही थी. तो ऐसे भी मैं कामुक हो रही थी. क्यों की कहानिया बड़ी हॉट होती है इस वेबसाइट की.

पर मैं ये जानकर हैरान हो गयी क्यों की वो भी इसी वेबसाइट को पढ़ रहा था. मुझे काफी ज्यादा कौतुहल होने लगा. मैं समझ गयी जब वो इस वेबसाइट पर कहानी पढ़ रहा हुआ तो बिंदास लड़का होगा. यानी की वो सेक्सी होगा. मुझे लगा की काश आज रिश्ता बन जाये सेक्स का तो मजा आ जाएगा. यही सोच रही थी और सपने में खो गयी. तभी मेरा भाई बोला क्या सोच रही हो. मैं अचानक से उठ गई और बोलने लगी कुछ भी नहीं कुछ नहीं नहीं.

कई बार ऐसा होता है जब आप किसी के बारे में सोच रहे हो और वही आपको टोक दे तो डर जाता है सामने वाला वही मेरे साथ ही हुआ था. पर उसने बार बार पूछने लगा की बता ना क्या सोच रही थी. बता ना प्लीज. तो मैं बोल दी तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी. की काश मेरा पति भी तुम्हारे जैसा ही हो. हॉट और सेक्सी.

ट्रैन तेज तेज भागी जा रही थी. अन्धेरा हो गया था टीटी भी टिकट देखकर चला गया था. तो मैं उठी और केबिन की चिटकिनी बंद कर दी. वो मुझे घूर घूर कर देख रहा था. वो भी सेक्सी हो रहा था क्यों की वो बार बार मेरी बड़ी बड़ी चूचियों को और गांड को निहार रहा था.

तो उसने कहा की मुझे बनने का होता तो मैं पहले ही बन जाता तुम्हारा पति मैं भी तुमको बहुत पसंद करता हूँ. दिल से चाहो जो रिश्ते को तो वही रिश्ता सच्चा हो जाता है. मैं तो तुम्हे अपना बहन कम और गर्ल फ्रेंड ज्यादा मानता हूँ. इतना सुनते ही मेरे अंदर जोश आ गया.

और फिर बोली की तो आज रात को तुम मुझे मेरे साथ गर्ल फ्रेंड का रिश्ता ही रख लो. पहले तो उसको लगा की वो मजाक कर रही हूँ . पर मैं काफी ज्यादा सीरियस थी. मैं उसके ही बर्थ पर बैठ गयी. और धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के करीब आ गए. कब मेरे होठ उसके होठ के करीब पहुंच गए पता ही नहीं चला. हम दोनों आँखे बंद के एक दूसरे के लवों को चूसने लगे चूमने लगे.

मेरी चुत गीली होने लगी और मेरे भाई का लंड खड़ा होने लगा. धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के बाहों में समा गए. ओह्ह्ह्हह क्या बताऊँ दोस्तों चलती ट्रैन में एक केबिन के एक भाई बहन और वो भी सेक्स का रिस्ता काफी सेक्सी था. मेरा भाई वाइल्ड हो गया था. वो मेरे तंग कपड़ों में से मेरी चूचियों को निकालने की कोशिश करने लगा. पर ऐसा पॉसिबल ही नहीं था. मैं मदद की. मैंने अपना टीशर्ट उतारा दिया अब मैं अपने भाई केसामने ब्रा में थी. मेरी बड़ी बड़ी गोल गोल गोरी चुकियाँ देखकर वो पागल हो गया और तुरंत ही ब्रा का हुक खोलने की कोशिश करने लगा. मैं पागल होने लगी.

जैसे भी मेरा हुक खुला ब्रा का बड़ी बड़ी चूचियां गेंद की तरफ बाहर आ गया. मेरा भाई तुरंत ही दोनों को पकड़पर मसलने लगा. ओह्ह्ह्हह क्या बताऊँ दोस्तों कैसा लगता था जब वो मेरी निप्पल को अपनी दोनों हाथों की उँगलियाँ से रगड़ता था. मेरे रोम रोम सिहर रहे थे.

मैं तुरंत ही उसका बेल्ट खोलने लगी. और फिर उसने खुद ही अपना जीन्स उतार दिया और मैंउसका अंडरवियर उतार दी और मोटा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. वो मेरी बालों को सहला रहा था मेरी चूचियों को छू रहा था मेरी पीठ को सहला रहा था.

मैं कामुक हो गयी थी लंड चूसते चूसते मेरी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा था. मैं तुरंत ही खड़ी होकर अपने जीन्स और पेंटी उतार दी और बर्थ पर लेट गयी.

उसने मेरी टांगो को अलग अलग किया और मेरी चूत को चाटने लगा. मैं भी आँखे बंद कर अपनी चूचियों को दबाते हुए सिसकारियां लेते हुए मजे लेने लगी. मेरे पुरे बदन में करंट दौड़ रहा था. उसके बाद उसने मेरी चूत में ऊँगली करने लगा. अब तो मैं और भी पागल होने लगी. बार बार अंगड़ाई लेने लगी.

फिर क्या था दोस्तों अब मैं चुदने के लिए तैयार थी. उसने भी लंड को हिलाते हुए मेरी चूत छेद पर पास रखा तो मैं पानी पानी हो गयी. और फिर मैं टांगो को और ऊपर की और अलग अलग किया तो उसने अपना लंड सेट कर लिया. और फिर जोर से घुसा दिया. मेरी चीख निकल गयी. मैं ओह्ह्ह्हह्हह आआह ओह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़ की आवाज निकलने लगी और वो जोर जोर से पेलने लगा. मैं पागल होने लगी और जोर जोर से चिलाने लगी चोद मुझे दे लंड जोर से दे.

ओह्ह्ह्हह्हह क्या बताऊँ दोस्तों ट्रैन सरपट भाग रही थी. और मैं हाय ओह्ह्ह्हह आआह्ह जोर जोर से कर रही थी. कोई डर भी नहीं था. गांड घुमा घुमा कर मैं सटासट लंड को ले रही थी. फिर वो लेट गया और मैं ऊपर चढ़ गयी और उसके लंड को पकड़ कर अपने चूत के अंदर ले ली.

जोर जोर पेलने लगा मुझे मेरी चूचियों को मसलने लगा. मैं भी सिसकारियां लेते हुए खुद से भी चूचियों को दबाते हुए निचे से कभी ऊपर से धक्के लेने लगी. फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और अब गांड के तरफ से मुझे चोदने लगा. मजा आ गया अतः दोस्तों मैं पानी पानी हो गयी थी करीब एक घंटे की चुदाई से मैं संतुष्ट हो गयी थी. और उसका पूरा माल मैं मुँह में लेकर पी गयी.

रात भर हम दोनों जागते रहे और थोड़े थोड़े देर में ही हम एक दूसरे को खुश करते रहे. सुबह जब दिल्ली पहुंची तो मेरी टांगो में और कमरे में दर्द हो रहा था. चूचियां और चूत दोनों ही सूज गए थे. पर मजा खूब ली. मजा आ गया था. मैं दूसरी कहानी भी जल्द ही इस वेबसाइट पर लेकर आउंगी तब तक के लिए आपका धन्यवाद.

होली में बन गई पापा के बिस्तर की परी

आज मैं आपको अपनी सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूँ. ये मेरी पहली कहानी ये कहानी होली के दिन की है. आप इस सेक्स कहानी में पढ़ेंगे की कैसे मेरे पापा ने मेरी चुदाई कर दी. उनको लगा की मम्मी है और मुझे चोद दिया. पर अब हम दोनों करते क्या ? जो हो गया सो हो गया. कब और कैसे ये सब हुआ वो अब आपको बताने जा रही हूँ.



मेरा नाम दिव्या है मैं अभी 20 साल की हूँ. मेरे पापा की उम्र ४५ साल है और मेरी मम्मी की उम्र चालीस साल है. मेरे पापा बहुत सेक्सी हैं और पापा से भी ज्यादा सेक्सी मेरी मम्मी है. मेरी मम्मी अभी ऐसे लगती है जैसे मानो कोई मॉडल हो. तो पापा भी कभी कम नहीं रहते हैं. जब भी समय मिलता है दरवाजा बंद कर मम्मी की चुदाई करने लगते हैं. मैं अकेली संतान हूँ. घर में और कोई नहीं रहता है. तो जब पापा मम्मी कमरे के अंदर दरवाजा लगा कर होते हैं. और मम्मी अंदर आह आह अहा ओह्ह्ह जी और जोर जोर से और जोर से ओह्ह्ह, ऐसे बोलती है और सेक्सी आवाज निकालती है तो मैं भी दरवाजे के बाहर पानी पानी हो जाती हूँ.

ऐसे में लगता है पापा ही चोद दे मुझे शांत कर दे पर ये संभव नहीं था की मैं पापा से चुदुँ. पर दोस्तों मेरा ये सपना हकीकत में बदल गया होली के दिन. जब सब लोग रंग खेल रहे थे तब मैं चुद रही थी.

हुआ यूँ की होली के दिन मैं सुबह सुबह ही दोस्तों के साथ खूब होली खेली. मैं रंग से तरबतर थी. मेरा चेहरा पहचानने लायक नहीं था. मेरा चेहरा और मम्मी का चेहरा एक जैसा है. कद काठी भी सेम है और देखने में ऐसी हूँ जैसे की जुड़वाँ हु दोनों मैं माँ बेटी.

तो दिन के करीब २ बजे थे. मैं रंग खेल कर आ गयी थी और थककर चूर हो गयी थी. मैं जैसे ही लेटी बेड पर ना जाने इतनी जोर से नींद आ गयी और मैं सो गयी. मैं अपने मुँह पर बेडसीट डाल रखी थी और सो गयी. और मम्मी पिंटू भैया के घर होली खेलने चली गयी थी तो मैं सिर्फ घर पर थी.

तभी पापा आये और दरवाजा बंद कर दिए. वो बहुत ही ज्यादा नशे में थे. वो आये और पलंग पर चढ़कर मेरे दोनों पैरों के बिच में बैठ गए. मैं मम्मी की नाईटी पहनी थी. उन्होंने तुरंत ही नाईटी को ऊपर किया और मेरे दोनों हाथो को कस कर पकड़ा और मुँह दबाया मैं ढकी थी बेडशीट से मुँह. उनकी पकड़ जोर की थी. मैं कुछ नहीं कर पाई. और मेरे टांगो को अलग अलग किया और मेरी चूत पर लंड रखा और जोर से घुसा दिया.

मेरी चूत पहले से ही गीली थी क्यों की मैं इसी वेबसाइट पर ही कहानियां पढ़ रही थी. तो पहले से ही कामुक थी और मेरी चूत गीली थी. तो ज्यादा देर नहीं लगी लंड को अंदर जाने में. पर पापा तुरंत ही बोल उठे. क्या बात है आज तो तेरी चूत किसी लड़की की तरह लग रही है.

मैं कुछ बोल पाती की उन्होंने दो तीन धक्के में ही अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया. मैं झट से खड़ी भी हो सकती थी पर इसलिए नहीं हुई ना कुछ बोली मुझे लगा की वो तीन चार झटके देंगे और तुरंत चले जायेंगे. वो नशे में थे तो पता भी नहीं चलेगा की वो अपनी बेटी को ही चोद दिए है.
पर दोस्तों उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी और लंड इतना मोटा और टाइट और ताकत जैसे की घोड़ा हो. जोर जोर से धक्के देने लगे. अब मैं भी सेक्सी होने लगी. मुझे भी उनका चोदना अच्छा लगने लगा. मैं भी हौले हौले निचे से गांड को गोल गोल घुमाने लगी और उनका लंड अपनी चुत के अंदर लेने लगी.

मैं भी निचे से धक्के देती और वो ऊपर से देते. मुझे भी मजा आने लगा. वो कहने लगे क्या बात है आज की बात ही कुछ और है मेरी जान. तू तो जवान हो गयी है और आज जैसे तो चुदवा रही है वैसा तो कभी नहीं चुदवाई और तेरी जिस्म तो गदराया हुया लग रहा है. वो जोर जोर से धक्के दे रहे थे और बड़बड़ा रहे थे.

वो इतना ज्यादा नशे में थे की चुदाई के अलावा उनका कोई होशहवाश नहीं था. अपनी बेटी को चोद रहे थे और उनको लग रहा था की उनकी बीवी चुद रही रही है.

वो अब मेरी चूचियों को मसलने लगे. मेरी चूचियां मम्मी की जितनी है पर टाइट है. वो कह रहे थे आज होली के दिन तो तू जवान हो गयी है आज तेरी चूचियां तो बहुत ज्यादा टाइट लग रही है. और वो जोर जोर से धक्के देने लगा. मैं भी जोर जोर से धक्के देने लगी हम दोनों ही आवेश में आ गए.

वो चोद रहे थे और मैं चुद रही है. बाप अपनी बेटी को चोद रहा था और बेटी आराम से चुद रही यही. तभी वो आह आह आह ओह्ह ओह्ह्ह करते हुए अपना सारा माल निकला दिया पर गनीमत ये थे की वो सारा माल मेरी चूत के बाहर निकाला. और फिर उठकर लड़खड़ाते हुए घर से निकल गए.

उसके बाद तो उनको खुद ही पता नहीं की वो अपनी बेटी को चोद चुके है. उस दिन शाम को आये टल्ली होकर और सो गए. दूसरेन उठे उनके लिए सब कुछ नार्मल. पर मेरे लिए नार्मल नहीं था. मैं होली के दिन को याद करती हु तो अभी भी चुदने का मन करने लगता है.

मुहंबोले भाई ने बना दिया चुदाई की रंडी

मेरा कोई भाई नहीं है, इसलिए मैंने पड़ोस के वर्मा जी को ही अपना भाई बना लिया था.

हर साल मैं वर्मा जी को ही राखी बांधती हूँ, लेकिन इस बार नहीं बांधी थी. वर्मा जी के घर हालात ठीक नहीं थे क्योंकि कोरोना की वजह से उनकी फैक्ट्री बंद हो गई थी और उनकी बीवी भी को कोरोना हो गया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी.

वैसे वर्मा जी की बीवी को पहले से दमा की बीमारी थी इसलिए उनका बचना नामुमकिन हो गया था.

बीवी की मौत के बाद वर्मा जी को गांव जाना पड़ा था.
उधर से वो लगभग 25 दिन बाद घर वापस आए और दो दिन बाद मेरे घर पर आए.

मैं- वर्मा जी आप … गांव से कब आए?
नासिर जी- जी, मालती मुझे आए हुए दो दिन हुए हैं.

मैं- और बताएं, सब काम ठीक शुरू हुआ या नहीं!
वर्मा जी- नहीं मालती, ठीक नहीं हुआ. लेकिन एक मेरा ग्राहक है, जो मुझे ऑर्डर देना चाहता है. पर वो साला थोड़ा रंगीन मिजाज वाला है, तो उससे बात बन नहीं पाएगी.

मैं बोली- रंगीन मिजाज मतलब? … और उसके मिजाज से आपको क्या लेना देना?
वर्मा जी- अरे वो बहुत रंगीन मिजाज मतलब शौक वाला है. साला कुछ कुछ चाहता है और … छोड़ो जाने दो.

मगर मैं वर्मा की बात पूरी सुनने की जिद करती हुई बोली- अरे वर्मा जी, जो भी हो, खुल कर बोलो … मन में मत रखो.

फिर वर्मा जी बोले- बात ये है कि वो ग्राहक है, उसे औरतें बहुत पसंद हैं. वो सेक्स में बहुत रुचि रखता है. वो चाहता है कि अगर मैं उसे किसी औरत के साथ सेक्स करने का मौका दूं, तो वो मुझसे डील करेगा वर्ना नहीं. और तुम तो जानती ही हो कि मेरी बीवी की मृत्यु हो गयी है, वर्ना मैं उसे … खैर छोड़ो, पता नहीं क्या होगा.

वर्मा जी की बात सुनकर मुझे मेरी चूत में खुजली होने लगी क्योंकि मैं एक बेवा हूँ और पति के जाने के बाद मैंने दुबारा शादी नहीं की.

मैं अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए एक खुली किताब हूँ. जो भी मर्द मुझे पसंद आ जाता था, मैं उसके साथ चुद लेती थी.

मगर अभी इस महामारी के चलते काफी दिनों से मुझे किसी से चुदने का कोई मौका नहीं मिला था.

मैं बोली- वर्मा जी हिम्मत रखो, वैसे वो तुम्हारा ग्राहक है कौन?
वर्मा जी- जी वो रमेश गूज़र है. अभी 38 साल का है.

मैंने वर्मा जी से कहा- उसे मुझसे मिलवा दो.

वर्मा जी मेरी तरफ देखने लगे. उन्हें मेरे बारे में सब पता था कि मैं किसी से भी चुदवा लेती हूँ.

वर्मा जी ने कहा- अरे वो साला सांड है, तुम उसे कैसे सहन कर पाओगी.
मैं बोली- हम्म … कोई बात नहीं है. तुम्हारा काम होता हो … मतलब उससे डील मिलती हो, तो तुम्हारी ये बहन उसके साथ मिल सकती है.

मैं इतना कह कर चुप हो गई. मेरे मुँह से ये सुन कर वर्मा जी ने मेरी तरफ देखा.

फिर बोले- अरे नहीं नहीं … यह क्या बोल रही हो … तुम मेरी बहन हो, तुम उसके साथ कैसे … नहीं नहीं ये सब नहीं.
मैं वर्मा जी की तरफ देख कर बोली- अरे जब भाई मुश्किल में हो … और बहन काम ना आए तो क्या मतलब वर्मा जी. आप परेशान न हों मैं सब देख लूंगी.

मैंने किसी तरह उन्हें मना लिया.

वर्मा जी दुआ देते हुए बोले- सभी बहनें तेरे जैसी हों तो किसी भाई को कभी कष्ट ही न हो. वैसे इस ज़माने में कोई किसी सगे भाई के काम भी नहीं आता … और तू तो अपने मुँह बोले भाई के लिए रजामंद हो गई है.
मैं उनकी बात काटते हुए बोली- देखो समय बर्बाद मत करो. तुम अपने उस ग्राहक को फोन करो.

तब वर्मा जी ने उसे फोन किया और उससे घर आने के लिए बोले.

उधर से अभी एक घंटे में आता हूँ की आवाज आई और फोन कट हो गया.
वर्मा जी अपने घर चले गए.

अब मैं तैयार होकर वर्मा जी के घर आ गयी, जहां वो ग्राहक आने वाला था.
मैंने इस समय टाइट ब्लू जींस और ब्लू टॉप पहनी हुई थी. इस चुस्त ड्रेस में मेरा 38-34-40 का सेक्सी जिस्म खूब उभर रहा था.

कुछ देर बाद रमेश घर आ गया. वर्मा जी ने उससे बाहर ही कुछ बात की.
मैं समझ नहीं पायी कि उन दोनों में क्या बात चल रही है.
मुझे लगा वो दोनों डील की बात कर रहे होंगे.

कुछ 15 मिनट बाद रमेश अन्दर आया और वर्मा जी ने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया. रमेश ने अन्दर से कमरा लॉक कर दिया.

रमेश मेरे बगल में आ बैठा और बोला- मैं रमेश गूजर हूँ … मेरी उम्र तो तुझे वर्मा ने बता ही दी है. तू कितने साल की है.
तब मैं बोली- जी, मैं 34 साल की हूँ.

रमेश बोला- ह्म्म्म … तेरा पति है?
मैं बोली- नहीं, मैं विधवा हूँ.

रमेश बोला- ओह … कोई बात नहीं … मेरी बीवी मुझे मजा नहीं देती है. मुझे अलग अलग औरतों के साथ खेलने में बहुत मजा आता है.
मैं कुछ नहीं बोली.

वो बोला- चल खड़ी हो जा.
मैं खड़ी हो गई.

रमेश ने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे और मुझे गोल गोल घुमाया और मेरी फिगर को देख कर बोला- मस्त आइटम है तू!

ये कह कर उसने मेरी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ लगाया और बोला- क्या मस्त धांसू गांड है … बहुत गांड देखीं, लेकिन ऐसी कसी हुई गांड अब तक नहीं देखी.

मैं मन ही मन अपनी तारीफ़ सुनकर खुश हो रही थी. मगर मुझे किसी भी मर्द की परफ़ॉर्मेंस को चैक किए बिना उसकी तारीफ़ करना पसंद नहीं है.

अब रमेश ने मेरे बदन को टटोलते हुए अपने कपड़े उतार दिए और मुझसे भी कपड़े उतारने को बोला.

मैं उसका कड़ियल जिस्म देख कर गर्मा गई और मेरी चूत में भी चिंगारी भड़क उठी. मेरी चूत में भी काफी दिनों से लंड नहीं गया था. मैंने भी मुस्कुराते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर एक तरफ रख दिए.

अब हम दोनों पूरे नंगे हो गए थे.

रमेश ने मुझे अपनी गोद में खींचा और मेरे मम्मों को दबाने लगा. वो मेरे दूध चूसते हुए निप्पल काटने लगा.

मैं मस्त होने लगी और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं- आह इईईई … ऊऊऊह … ऊमम्म!

अब मैं गर्म सिसकारी भर रही थी और रमेश मेरे जिस्म के मजे ले रहा था; मेरे मम्मों को चूस रहा था और मेरी गांड पर थप्पड़ लगाए जा रहा था.
वो मेरी चूत में उंगली भी डालने लगा और मेरी चूत का छेद खोलने लगा.

कुछ मिनट तक वो मेरी चूत में उंगली करता रहा और फिर बोला- चल अब लेट जा. साले इस कोरोना के चक्कर में बहुत दिनों से कोई नई चूत ही चोदने को नहीं मिली.

रमेश की बात सुनकर मैं भी सोच रही थी कि हां साला इस कोरोना के चलते मुझे भी कोई लंड नहीं मिला, जिससे मैं अपनी चूत की गर्मी शांत करवा सकूँ.

मैं चित लेट गयी और टांगें खोल कर चूत पसार दीं.

रमेश मेरी चूत चाटने लगा और बोला- बड़ी मस्त गर्म चूत है साली … आज तक इतनी गर्म चूत नहीं चाटी.

वो लपर लपर करके मेरी चूत चाटे जा रहा था. उसकी जीभ मेरे चूत की गहराई तक जा रही थी. आज तक मेरी चूत किसी ने ऐसे नहीं चाटी थी.
मेरा पति तो मादरचोद मेरी चूत चाटता ही नहीं था.
आज काफी दिन बाद किसी मर्द ने मेरी चूत को इस मस्ती से चाटा था, तो मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर चूत चटवाने के मजे ले रही थी.

रमेश ने मेरी चूत को काफी देर तक चाटा और पूरी लाल कर दी थी. साला चूत चाटने के साथ काट भी रहा था. इससे मेरी चूत पर रमेश के दांत के निशान भी दिखाई देने लगे थे.

उसकी इस मस्त चूत चटाई से मैं झड़ गई, तो उसने भी मेरी चूत का सारा पानी पी लिया.

अब उसने मुझे घुटने बल बैठा दिया और मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया. रमेश का लंड 7 इंच लम्बा और 2.5 इंच मोटा था.
मैं उसके मोटे लंड को मुँह में लेने लगी.

वो अपना पूरा लंड मेरे मुँह में घुसाने की कोशिश कर रहा था और गाली देते हुए ‘आह आह ..’ कर रहा था.

रमेश मुझसे बोला- आह साली रांड अच्छे से लंड चूस मां की लवड़ी … आह बड़ा मजा दे रही है.

मुझे भी काफी दिन बाद लंड चूसने को मिला था तो मैं भी पूरी तन्मयता से लंड चूस रही थी.

मैं रमेश के लंड को काफी देर तक चूसती रही.
इतनी देर तक लंड चुसवाने वाला ये मुझे पहला मर्द मिला था.
अब तक तो मैं किसी भी मर्द का लंड चूसती थी, तो दो पांच मिनट में ही उसके लंड का पानी निकल जाता था.
मगर रमेश लम्बी रेस का घोड़ा निकला.

काफी देर तक उसका लंड चूसने के बाद उसका पानी निकलने को हुआ.
उसने लंड निकालने की कोशिश की तो मैं समझ गई कि इसका पानी निकलने को है. रमेश जैसे मजबूत मर्द का पानी मैं ऐसे कैसे छोड़ सकती थी.

मैंने लंड चूसते हुए उससे हाथ के इशारे से मेरे मुँह में ही वीर्य छोड़ने का कहा.

वो भी तेज तेज आखिरी झटके देते हुए मेरे मुँह में ही अपनी टौंटी खोल बैठा.

उसके लंड से रसभरी पिचकारियां मेरे मुँह में गले को तर करने लगी थीं.
रमेश ने 2 मिनट तक अपना लंड मेरे मुँह में रखा ताकि पानी अन्दर तक चला जाए.
मैं भी उसका लंड गन्ने की तरह चूसती रही.

इससे हुआ ये कि उसका लंड झड़ने के बाद फिर से गर्मा गया.
अब उसका लंड मेरे थूक से एकदम चिकना हो चुका था.

फिर रमेश ने मुझे चुदाई की पोजीशन में आने के लिए बोला.
मैं उसकी चुदक्कड़ रांड बनने को बेताब थी. मैं चित लेटी और चूत खोल कर उसे आने का इशारा कर दिया.

उसने मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी चूत में लंड पेला और धीमे धीमे चोदना शुरू किया. उसका लंड मेरी चूत में बड़ी लज्जत दे रहा था.
काफी दिन बाद चूत को लंड नसीब हुआ था.

रमेश मेरी चूची मसलते हुए बोला- आह क्या मस्त चूत है तेरी … एकदम गर्म.

पूरा लंड चूत की गहराई में उतारने के बाद वो मेरी चूत के चिथड़े उड़ाने वाले धक्के देने लगा.

उसकी ताकत के सामने मैं बकरी सी मिमिया रही थी- आआआह … मर गई … ऊऊ धीरे कर … ओओह … मर गयी रे … आह इआ!

लेकिन रमेश पूरे जोश में धकापेल कर रहा था.
पूरा रूम मेरी चीखों से गूँज रहा था.

रमेश मेरे ऊपर पूरा चढ़ गया था और मेरी चूत को लावारिस कुतिया की चूत समझ कर चोद रहा था.

कुछ ही देर में मेरी चूत ने झरना बहा दिया.

मगर रमेश अभी भी सांड सा गर्म था. रमेश ने अब मुझे खड़ी कर दिया और दीवार के सहारे से टिका दिया.

उसने मेरी एक टांग अपने हाथ में पकड़ी और उंची उठा दी. इससे मेरी चूत खुल गई. वो लंड चूत में पेल कर मेरी चूत चोदने लगा.

जब वो मुझे इस पोज में चोदने लगा, तब मुझे और दर्द होने लगा क्योंकि रमेश के झटकों से मेरी गांड दीवार पर लग रही थी, जिसकी वजह से गांड में दीवार के झटके लग रहे थे और दर्द हो रहा था.

आगे से रमेश का लंड चूत फाड़ रहा था, पीछे से दीवार, मेरी गांड में चांटे मार रही थी.

रमेश ने बीस मिनट तक इसी पोजीशन में मेरी चूत चुदाई की और अपना माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया.
मेरा रस भी निकल गया.

दोनों के रस से रमेश का लंड चिकना हो गया था.

उसने फिर से मेरे मुँह में लंड दे दिया. उसका पूरा चिकना लंड मेरे मुँह में अन्दर तक घुसा था. मैं मस्ती से लंड चूसने लगी थी.

कुछ देर बाद रमेश का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया और इस बार रमेश ने मुझे घोड़ी बना दिया.

उसने पीछे से मेरी गांड में लंड पेला तो मैं अचकचा गई.
मैं चूत में लंड सोच रही थी, मगर हरामी ने मेरी गांड भी मारने में कसर नही छोड़ी.

वो पूरा लंड गांड में ठोक कर मेरी गांड मारने लगा.

मेरी कराहें निकलती रहीं मगर उस बेदर्दी ने किसी सांड की तरफ मुझे चोदा.

वो साला जम जम के धक्के देने में लगा था. मेरे चूतड़ों से उसकी मजबूत जांघें पट पट कर रही थीं.

उसने आगे हाथ बढ़ा कर मेरी चूचियां दबोची हुई थीं. कुछ ही देर में मुझे उसके मोटे लंड से अपनी गांड मराने में मजा आने लगा.

दस मिनट बाद उसने मुझे अपनी बांहों में समेटा और बिस्तर पर लाकर पूरी उल्टी लेटा दिया. मेरी टांगें बिस्तर के नीचे थीं और बाकी का शरीर बिस्तर पर था. वो अपनी टांग बिस्तर पर रख कर फिर से मेरी गांड मारने लगा.

कुछ ही समय में वो मेरे ऊपर ही चढ़ गया. रमेश के पूरा बदन का भार मेरी पीठ पर था. उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुसा हुआ था.

रमेश ने और 15 मिनट मेरी गांड मारी और लंड का पानी मेरी गांड में छोड़ दिया. उसने अपने वीर्य से मेरी गांड एकदम चिकनी कर दी.

इसके बाद रमेश ने मोबाइल से मेरी नंगी फोटो खींच ली.
मैंने मना किया तो वो बोला- यार तू मुझे बड़ी पसंद आई है. तेरी फोटो को देख कर मैं खुश होता रहूँगा.

मैं हंस दी, मुझे भी रमेश जैसा मर्द भा गया था.

फिर रमेश ने दरवाजा खोला, तो वर्मा जी रूम में अन्दर आ गए.
तब मैं कपड़े बदल रही थी.

रमेश ने एक सिगरेट जला ली थी और वो धुंआ उड़ाता हुआ बोला- वर्मा यार, बड़ा मस्त माल चोदने को दिया है. आज पूरा पैसा वसूल हो गया है.

रमेश के मुँह से यह सुन कर मैं एकदम से चौंक गयी. रमेश हंसता हुआ चला गया.

मैंने वर्मा जी से पूछा- वो ये क्या बोल रहा था कि पैसा वसूल हुआ है!
वर्मा ने बोला- हां तूने ठीक सुना … मैंने ये धंधा शुरू किया है. लेकिन इस कोरोना काल में किसी लड़की या औरत का जुगाड़ नहीं हो रहा था, तब मैंने तेरे बारे में सोचा. तू मान गयी और मेरा काम आसान हो गया.

मैं वर्मा से कहा- मैंने तुझे भाई माना और तुमने मेरे साथ यह किया?

वर्मा की एकदम से भाषा बदल गई और वो बोला- साली क्यों चिढ़ रही है, तुझे भी तो रमेश से चुदने में मजा आया न?

मैं कुछ नहीं बोली, बस चुप रही. वर्मा की बात सच थी कि मुझे रमेश के लंड से चुदने में काफी मजा आया था.

मैं कपड़े पहन कर घर जाने लगी. तो वर्मा ने कहा- अब मैं जब भी तुझसे कहूँ, आ जाना.
मैंने मना किया- भाई मैं नहीं आऊंगी.

वर्मा ने मुझसे कहा- ठीक है जब तेरा मन करे तब आ जाया करना. मुझे मालूम है कि तुझे भी मर्द की जरूरत होती है, तुझे भी मैं कुछ पैसे दे दिया करूंगा.
मैं कुछ नहीं बोली और चली गई.

शाम को वर्मा फिर से मेरे घर आया और मुझे उसने थोड़े रूपए दिए.

मैंने रूपए रख लिए और उससे आगे भी आने की हां कह दी.
मैंने सोचा कि चुदना तो है ही, साला पैसे भी मिल रहे हैं … तो क्या दिक्कत है.

अब जब जब वर्मा बुलाता है, मैं चली जाती हूँ. अब रमेश भी ग्राहक लेकर आने लगा है.

दरअसल रमेश एक दल्ला था और उसने इसी लिए मेरी नंगी पिक्चर खींची थी ताकि वो ग्राहकों को मेरे लिए बुक कर सके.

चुदक्कड़ अम्मी ने बेटियों को लण्ड की शौकीन बना दिया

मेरा नाम शकीरा बेगम है दोस्तो.
मैं इस समय 44 साल की एक खूबसूरत मस्त जवान औरत हूँ। मैं अपने तन बदन का बहुत ख्याल रखती हूँ।

मेरा रंग गोरा है, मेरा कद 5′ 4″ है और चेहरा गोल है।
मेरी आँखें बड़ी बड़ी हैं, मेरे मम्मे भी बड़े बड़े हैं और मेरी बांहें एकदम खुली हुई हैं, मतलब मेरा सीना चौड़ा है।

मैं आज के परिवेश में रहती हूँ, पढ़ी लिखी हूँ, बिंदास हूँ और एक बड़े खानदान से तालुक रखती हूँ।

मेरी दो बेटियां हैं जिनके घरेलू नाम हैं शन्नो और बन्नो।

मेरी शादी को जब 10 साल हुए थे तब एक छोटी सी बात पर शौहर से कुछ ‘तू तू मैं मैं’ हो गयी तो उसने मुझे तलाक दे दिया।
मैं उसके घर रुकी नहीं बल्कि अपने अब्बू के घर आ गई।

मैंने उसकी झांट परवाह नहीं की, मैंने कहा- तू भोसड़ी का मेरा क्या उखाड़ लेगा? मेरी एक झांट भी टेढ़ी नहीं कर पायेगा तू … तेरे पास है ही क्या? तूने तो दहेज़ के बल पर मुझसे शादी की थी। तेरे पास जितना पैसा है उतना तो मैं अपनी चूत के रख रखाव में खर्च कर देती हूँ। तेरी माँ का भोसड़ा! तू समझता है कि तूने मेरी जवानी बरबाद कर दी? तो तू बहुत बड़ा चूतिया है … तू नहीं तो क्या मुझे चोदने वाले सैकड़ों हैं। बड़े बड़े लण्ड वाले मुझे चोदने के लिए लाइन में खड़े रहतें हैं। तेरा पिद्दी भर का लण्ड साला ठीक से फुद्दी चोद भी नहीं पाता। मैंने तो ग़ैरों से चुदवाकर दो बेटियां पैदा की हैं. तेरे सहारे रहती तो अब तक कुछ भी नहीं होता. मैं जा रही हूँ, अब लौट कर वापस नहीं आऊंगी।

मैं सच में बड़ी सेक्सी और हॉट औरत हूँ दोस्तो!
मेरी उम्र जरूर 44 साल की है पर मैं 30 / 32 साल से ज्यादा की नहीं लगती हूँ।
ऐसा लोग कहते हैं।

मुझे लण्ड पकड़ने का और चुदवाने का जबरदस्त शौक है।
मैं आज की औरत हूँ, मॉडर्न ज़माने की औरत हूँ और खुल्लम खुल्ला सेक्स एन्जॉय करने वाली औरत हूँ। मैं खुल कर गन्दी गन्दी बातें भी करती हूँ और प्यार से गालियां भी देती हूँ।

प्यार मोहब्बत से चोदा चोदी करते हुए ज़िन्दगी गुजारना ही मेरा मकसद है।

मैं अपने अम्मी और अब्बू के साथ बेटियों के सहित रहने लगी.

कुछ दिन बाद मेरे अब्बू भी चल बसे और मेरी अम्मी जान भी!
अब पूरे घर में मेरा ही कब्जा हो गया।

उधर मेरी बेटियां भी बड़ी होने लगीं। मैं अपनी जिस्म की आग बुझाने के लिए बाहर से चुदवा कर आने लगी।

कभी अपने नाते रिश्तेदारों से चुदवा लेती, कभी अपने गली मोहल्ले वालों से या पास पड़ोसियों से चुदवा लेती, कभी किसी पार्टी में कोई लण्ड मिल जाता तो उसे चूत में पेलवा लेती, कभी अपने सहेलियों के शौहरों से चुदवा कर आ जाती।

बस ऐसे ही काम चलता रहा।

हां एक बात और है कभी जब मेरी बेटियां कॉलेज में होती तो मैं अपने यारों को बुलाकर उनसे घर में ही चुदवा लेती।
मुझे कभी लण्ड की कमी महसूस नहीं हुई।

और जब मेरी दोनों बेटियां जवान हो गईं तो मैं सोचने लगी कि अब क्या किया जाए?
कहाँ तक मैं छुपछुप कर चुदवाती रहूंगी?



एक न एक दिन मेरी बेटियों को पता चल ही जाएगा।
तो फिर क्यों न अब उनसे खुल कर बात की जाए!

एक दिन मैंने दोनों बेटियों को बुलाया और कहा- देखो शन्नो और बन्नो, अब तुम जवान हो गई हो. इसलिए मैं तुमसे कुछ भी छुपाना नहीं चाहती। तुमसे खुल कर बात करना चाहती हूँ। मैं भी अभी जवान हूँ। सच्चाई यह है कि हम तीनों को चाहिए लण्ड, लण्ड और लण्ड. तुम लोग भी लण्ड का मज़ा लेना सीखो। लण्ड चूमना, चाटना और चूसना सीखो। लण्ड पेलवाना सीखो। माँ चुदाना सीखो।

मैंने आगे कहा- अब देखो घर में तो कोई लण्ड है नहीं, बाहर वालों के लण्ड का ही भरोसा है। ऐसे में क्यों न हम तीनों मिलकर लण्ड का जुगाड़ करें और मिलकर लण्ड का मज़ा लूटें! एक लण्ड मिले चाहे दो … अब आज के बाद हम तीनों मिलकर उसका मज़ा लेंगी।

मैं उनसे बात करती रही- देखो बेटी, मैं मादरचोद बड़ी चुदक्कड़ औरत हूँ। मैं लण्ड के बिना एक दिन भी नहीं रह सकती। मैं जानती हूँ कि तुम लोग भी लण्ड के बिना नहीं रह सकती। तो फिर आज से ही शुरू हो जाओ। आज से हम तीनों दोस्त हैं और एक दूसरे की चूत का ख्याल रखने वाली सहेलियां हैं। खुल कर गन्दी गन्दी बातें करो, हंसी मजाक करो और खूब प्यार से गालियां दे दे कर जवानी का मज़ा लूटो। जवानी का हर एक दिन बड़ा कीमती होता है। इसे बर्बाद न करो।

फिर मैं गाली देकर बोली- समझ में आया बुरचोदियों शन्नो और बन्नो? तेरी माँ का भोसड़ा!
दोनों एक स्वर में बोली- हां समझ में आ गया मेरी हरामजादी अम्मी जान!
फिर हम तीनों खिलखिलाकर हंस पड़ीं।

मेरे मन में ख्याल आया कि ये दोनों मस्त जवान लड़कियां है तो लण्ड अभी तक पकड़ा जरूर होगा. हो सकता है कि पेलवाया भी हो. पर बताया नहीं मुझे.
बताती भी कैसे … अभी आज ही ये मेरे सामने खुली हैं। अब आगे सब कुछ मालूम होगा।

मैं यही सब सोच ही रही थी कि किसी ने डोरबेल बजा दी।

मैंने दरवाजा खोला तो सामने असद खड़ा था।
वह मेरी ननद का बेटा है।

उसके पीछे एक और लड़का था।

असद बोला- मामी जान, ये मेरा दोस्त अमन है।

मुझे दोनों लड़के एक ही नज़र में भा गए। मैंने मन में कहा कि मैं अभी लण्ड की बातें कर ही रही थी कि ऊपर वाले ने मेरे पास दो दो लण्ड भेज दिये।

आज तो मैं बिना इनके लण्ड अपनी जवान बेटियों की बुर में पेलकर मानूंगी. चाहे उनकी माँ चुद जाए भोसड़ी वाली।

मैं दोनों को बैठा कर बातें करने लगी।

मैंने कहा- असद, तू तो बहुत बड़ा हो गया है. मरद बन गया है तू!
वह बोला- हां मामी जान, मरद तो मैं वाकई बन गया हूँ.

“तो फिर तेरी शादी कब हो रही है?”
“बस एक महीने के बाद हो जाएगी।”

“अरे वाह! तो फिर सुहागरात में क्या करोगे?”
“वही करूँगा जो सब करते हैं!”

“आजकल तो लोग तो सुहागरात में अपनी बीवी दूसरों से चुदवाते हैं, क्या तुम भी चुदवाओगे?”
“अगर मेरी बीवी मान गयी तो दूसरों से चुदवा लूंगा, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं क्योंकि मैंने अमन की बीवी उसकी सुहागरात में चोदी थी।”

“तो इसका मतलब तुमको बुर चोदना आता है।”
“हां चोदना तो जरूर आता है मामीजान!”
“तो फिर मुझे चोद कर दिखाओ।”

इतने में मेरी दोनों बेटियां आ गयीं।
शन्नो बोली- अरे असद भाई जान, आदाब।
बन्नो ने भी आदाब बोला।

फिर उसने बताया कि ये मेरा दोस्त अमन है.
तो दोनों ने अमन को भी विश किया।

असद बोला- अरे यार शन्नो, तुम तो लाजवाब हो गयी हो। एकदम मस्त जवान हो गई हो तुम. बड़ी अच्छी लग रही हो तुम. तेरी बहन बन्नो भी बहुत हॉट लग रही है। मैं सच कह रहा हूँ कि मेरी नियत ख़राब हो रही है तुम दोनों पर! इतना बढ़िया माल दिखाओगी तो फिर मेरे हथियार का क्या होगा?

मैंने कहा- हथियार नहीं लण्ड बोलो बेटा लण्ड! मेरी बेटियां एडल्ट हो गईं हैं, बोल्ड और बेशरम गई हैं। सब कुछ जानती हैं। एकदम खुल कर बातें करती हैं।

फिर मैंने कहा- शन्नो और बन्नो, तुम लोग इन दोनों के लिए आमलेट का नाश्ता बनाकर ले आओ।

वो दोनों आमलेट बनाने किचन में चली गयी और मैंने दोनों को सोफे पर बैठा दिया।
मैंने हंसकर कहा- भोसड़ी के असद, लगता है कि मेरी बेटियां देख कर तेरी लार टपकने लगी है।

वह बोला- हां लार तो सच में टपकने लगी है मेरी! बड़ी मस्त जवान हैं तेरी बेटियां मामी जान।

मैंने असद के पाजामे का नाड़ा खोला और उसके अंदर अपना हाथ घुसेड़ते हुए कहा- अच्छा तो मैं देखती हूँ कि तेरे लण्ड की लार टपक रही है या नहीं?
इसी तरह मैंने अमन के पाजामे के अंदर भी हाथ घुसेड़ दिया।

मैं अंदर ही अंदर दोनों लण्ड सहलाने लगी।
मुझे लगा कि लण्ड की लार लण्ड के टोपे से निकल रही है।

टोपा दोनों लण्ड का बड़ा आलिशान लग रहा था।

फिर वो दोनों भी मूड में आ गए तो मेरे मम्मे खोल डाले, मेरे बड़े बड़े स्तन सहलाने लगे।

असद बोला- मामी जान, तेरे तो बहुत ज्यादा बड़े बड़े हैं मम्मे! मज़ा आ गया इन्हें देख कर। इन्हें मसलने में बड़ा मज़ा आ रहा है.

उधर मुझे अहसास हो गया कि दोनों के लण्ड भी माशाल्ला बड़े मोटे तगड़े हैं।

फिर मैंने दोनों लण्ड पाजामे से बाहर निकाल लिये और लण्ड देखकर बोली- असद एक बात बताऊँ … तेरा लण्ड तो तेरे बाप के लण्ड से बड़ा हो गया है! बेटा असद, तेरा बाप मेरा ननदोई है। मेरे साथ उसके चुदाई के रिश्ते हैं। उसने कई बार पेला है अपना लण्ड मेरी चूत में। आज मैं तेरे साथ भी चुदाई के रिश्ते बना लूंगी।

इतने में शन्नो और बन्नो नाश्ता लेकर आ गईं.

शन्नो बोली- वाओ कितने बड़े बड़े लण्ड हैं यार शकीरा इन लोगों के? तूने तो इन्हें नंगा करके कमाल कर दिया?
बन्नो ने कहा- हां यार, लण्ड बड़े प्यारे लग रहे हैं। कितने खूबसूरत हैं दोनों लण्ड … मेरी तो चूत में पानी आ गया।

तब मैंने कहा- ले बुर चोदी शन्नो, पकड़ असद का लण्ड और ले ले पूरा मज़ा! और तू बन्नो माँ की लौड़ी पकड़ ले अमन का लण्ड तू भी मौज़ कर ले।

वो दोनों एक एक लण्ड पकड़ कर मस्ती करने लगीं।

मैं अपनी दोनों बेटियों के हाथ में एक एक खड़ा लण्ड देख कर बड़ी खुश हुई।
मैंने पहली बार अपने हाथ से अपनी दोनों बेटियों को लण्ड पकड़ाया। मुझे अपनी बेटियों पर गुमान हो रहा था।

बेटियां जब जवानी में नंगी नंगी लण्ड से खेलती हैं तो उन्हें बड़ा मज़ा आता है।

फिर मैंने अपना घाघरा खोल डाला तो मेरा भोसड़ा सबकी आँखों के सामने मचल उठा।
मैंने घूम कर शन्नो के सारे कपड़े उतार दिये, बोली- बेटी जब लौड़ा हाथ में होता है तो बदन पर कपड़े अच्छे नहीं लगते।

फिर मैंने बन्नो के भी कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह नंगी कर दिया।

मेरी दोनों मस्त जवान बेटियां जब नंगी हो गईं तो उन्हें देख कर लण्ड साले और ज्यादा टनटनाने लगे।
मैं भी उन दोनों के साथ लण्ड चाटने और चूसने लगी।

असद एक हाथ से बन्नो के मम्मे दबाने लगा और अमन एक हाथ से शन्नो की चूत सहलाने लगा।

इतने में मुझे लगा कि कोई ऊपर से उतर रहा है; कोई छत के रास्ते से आहिस्ते आहिस्ते अंदर आ रहा है।

मेरा अनुमान सही था।
वह मेरे पड़ोस का लड़का शेखू था।

वह हमारे सामने आ गया और हम सबको नंगी देख कर भौचक्का रह गया।
मैंने कहा- शेखू तू यहाँ कैसे आ गया?
वह बोला- अरे आंटी, छत का दरवाजा खुला था तो मैं अंदर आ गया।

मैंने कहा- अच्छा, तू इधर मेरे सामने आ!

जैसे ही वह आया तो मैंने उसके भी कपड़े उतार दिये और उसका लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी।
लण्ड साला पूरी तरह से खड़ा हो गया। लण्ड का साइज पूरा मर्दों वाला था।

मैंने यूँ ही पूछ लिया- कल तूने किसकी चूत में लण्ड पेला था?
वह बोला- कल रात को मैंने जोश में आकर अपनी अम्मी की चूत में लण्ड पेल दिया था।

मैंने कहा- अच्छा ऐसे कैसे हुआ?
उसने कहा- क्या करता … मेरी अम्मी जान पहले मेरे सामने मेरे जीजू से चुदवा रही थी। मेरे जीजू ने जब अपना लण्ड अम्मी की चूत से निकाल कर मेरी खाला की चूत में पेल दिया तो मैंने लण्ड अम्मी की चूत में पेल दिया। वह भी मस्ती से चुदवाने लगीं।

मैंने कहा- तो तुम अपनी माँ चोद कर आ रहे हो? मज़ा तो खूब आया होगा?
वह बोला- हां मज़ा तो सच में खूब आया।

शन्नो ने पूछा- तुम्हें अपनी माँ चोदते हुए शर्म नहीं आई?
वह बोला- मेरा दोस्त भी अपनी माँ चोदता है। मैंने उसे अपनी माँ चोदते हुए देखा था। मेरा जीजू भी अपनी माँ चोदता है इसलिए तो मुझे शर्म नहीं आई। और फिर मेरी अम्मी ने एक दिन मुझसे खुद कहा था कि बेटा चुदाई में सबकी चूत में लण्ड पेलना जायज़ होता है, इसमें कोई शर्म नहीं करनी चाहिए। चाहे माँ का भोसड़ा चोदो चाहे बेटी की बुर!

मैं शेखू का लण्ड नंगी नंगी अपनी बेटियों के सामने चूसने लगी।
फिर क्या? पूरा माहौल गर्म हो गया।

फिर असद ने शन्नो को अपनी तरफ खींचा, उसकी टांगें फैला दी और रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!
असद ने एक ही धक्के में पूरा पेल दिया लण्ड।

शन्नो चिल्ला पड़ी- हाय अम्मी जान, मर गई मैं! फट गयी मेरी बुर … इतना मोटा लण्ड पेल दिया भाई जान ने! बड़ा दर्द हो रहा है। मैं लुट गयी बहनचोद, मेरी इज़्ज़त चली गयी।

उधर इतने में अमन ने भी लण्ड बन्नो की चूत में घुसेड़ दिया।

वह भी चिल्ला उठी- हायल्ला, बड़ा मोटा है तेरा लण्ड भोसड़ी के अमन। फाड़ डाली तूने मेरी बुर … ले ली मेरी इज़्ज़त,! साले तू बड़ा हरामी है तेरी माँ की चूत … तेरी बहन की बुर।

इस तरह मेरी दोनों बेटियां बड़ी मस्ती से चुदने लगीं।
मैं ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी; मैं इसी दिन का इंतज़ार कर रही थी।

तब तक शेखू ने भी घुसा दिया लण्ड मेरे भोसड़े में।
वह भी घपाघप चोदने लगा मुझे।

मैंने कहा- माँ के लौड़े शेखू, ये तेरी माँ की चूत नहीं है, मेरी चूत है, ज़रा लौड़ा पूरा पेल पेल के चोदो।

फिर मैं भी अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी।
आज पहली बार मैं अपनी बेटियों की चुदती हुई बुर देख देख कर अपना भोसड़ा चुदवा रही थी।

मुझे बड़ा फ़ख्र महसूस हो रहा था।

शन्नो बोली- बुर चोदी शकीरा, तेरी बिटिया की बुर! तू ससुरी बड़ी हरामी औरत है। अपने सामने अपनी बेटियां चुदवा रही है।
मैंने कहा- मुझसे ज्यादा तो तू हरामजादी है शन्नो! तू मादरचोद अपने आगे अपनी माँ चुदा रही है, अपनी बहन की बुर में लण्ड पेलवा रही है। तेरी चूत की माँ की चूत!

तब तक बन्नो भी मस्ती में बोली- हाय मेरी चुदक्कड़ शकीरा, तेरी बुर की बिटिया की बुर … तुझे बेटियां चुदाने का बड़ा शौक है न … मैं किसी दिन तेरी गांड में ठोक दूँगी लण्ड!

इस तरह हम तीनों एक दूसरे को प्यार से गालियां देती हुई बड़ी मस्ती से लण्ड का मज़ा लूटने लगीं।

बन्नो फिर बोली- शन्नो, तू बहुत बड़ी बुर चोदी है, तेरी माँ भी बुर चोदी है!
मैंने कहा- बन्नो, तेरी भी बहन की बुर, तेरी भी माँ का भोसड़ा!

जानते हो दोस्तो, मैं जब बेटियों के साथ हिंदी में गालियों से बात करती हूँ तो मन खिल जाता है।
उनसे मिलकर चुदाई करती हूँ तो मैं अपने आपको उनकी जैसी ही महसूस करने लगती हूँ।

मुझे लगता है कि मैं उनकी ही उम्र की हूँ, उनकी दोस्त हूँ, उनके साथ लण्ड चाटने वाली सहेली हूँ।
ऐसे में मुझे भी जवानी का मज़ा उतना ही मिलने लगता है जितना की उनको मिलता है।

हम तीनों की चूत एक साथ एक ही कमरे में चुद रही थी। हम सब एक दूसरी की चुदती हुई चूत देख देख कर उत्तेजित हो रहीं थीं।
तीनों चूत का बाजा एक साथ बज रहा था।
मस्त मस्त चुदाई की आवाज़ और चुदाई की महक चारों तरफ फ़ैल रही थी।

इस सामूहिक चुदाई का सबको बड़ा आनंद आ रहा था।
उसके साथ गन्दी गन्दी बातों का सिलसिला भी ज़ारी था।
मैं यही माहौल बनाना चाहती थी।

शन्नो और बन्नो तो बिलकुल रंडियों की तरह चुदवा रहीं थीं और मैं तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हूँ ही!

फिर अचानक असद ने लण्ड शन्नो की बुर से निकाल कर बन्नो की बुर में घुसा दिया तो अमन ने बन्नो की बुर से लण्ड निकाल कर मेरी बुर में खोंस दिया।
इधर शेखू ने अपना टन्नाता हुआ लण्ड शन्नो की चूत में घुसेड़ दिया।

हम तीनों के लण्ड बदल गए तो एक अलग तरह का मज़ा आने लगा।

शन्नो बोली- यार शेखू, तेरा भी लण्ड बड़ा गज़ब का है. किस किस की बुर में पेलते हो अपना लण्ड?
उसने कहा- रात में जिसकी बुर खाली होती है उसी की बुर में घुसा देता हूँ लण्ड!

शेखू ऐसा कह कर शन्नो की चूत की धज्जियाँ उड़ाने लगा।

सबके मुंह से मस्ती में कुछ न कुछ निकलने लगा।
जैसे कि- हाय रब्बा बड़ा मज़ा आ रहा है .. चोद डालो मेरी बुर चोदी बुर … पूरा लौड़ा पेल दो अंदर … जल्दी जल्दी चोदो यार … अपनी बीवी समझ कर चोदो मेरी चूत … ये भोसड़ी वाली शकीरा आज मेरी चूत फड़वा कर ही मानेगी … हाय रे चीर डालो मेरी चूत … गांड़ में भी ठोक दो लण्ड … तुझे भी चोदूंगा तेरी माँ भी चोदूंगा … मैं बहुत दिनों से तुझे अपना लण्ड पकड़ाना चाहता था शन्नो … बन्नो की बुर चोदने की इच्छा बहुत दिनों से थी आज पूरी हुई … हाय रे ये बुर चोदी मेरी बेटियां देखो कितनी मस्ती से मेरा भोसड़ा चुदवा रहीं हैं … बड़ी बेशरम और बेहया हो गई हैं दोनों बेटियां … इनकी माँ का भोसड़ा … अब मैं हर रोज़ बजाऊंगी इनकी चूत का बाज़ा … तेरा साला माँ चोदने वाला लण्ड बड़ा खूंखार हो गया है … तेरा अब्बा भी बहन चोद ऐसे ही चोदता है मुझे … तुम्हें बड़ा मज़ा आ रहा है न मेरी बिटिया की बुर लेने में … ले लो खूब तबियत से ले लो उसकी बुर!

इन सब सेक्सी बातों से सबका जोश बढ़ता जा रहा था; सबकी उत्तेजना बढती जा रही थी, चुदाई की रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी।
नौजवान लड़के भी खूब जोर लगा लगा कर चोद रहे थे।
लड़कियां भी चुदवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं थीं।

कोई पीछे से चोद रहा था तो कोई आगे से … कोई लण्ड पर बैठा कर चोद रहा था तो कोई चूचियाँ चोदने में लगा था। कोई लण्ड बार बार मुंह में डालता और फिर बुर में घुसेड़ देता।
सबको अपने अपने हिसाब से चोदने की आज़ादी थी और अपने अपने हिसाब से चुदवाने की भी आज़ादी थी।

कुछ देर बाद एक एक करके सबकी चूत खलास होने लगी और लण्ड भी झड़ने लगे।
सबने झड़ते हुए लण्ड खूब मजे से चाटे।

चुदाई रुकी तो फिर नंगे नंगे ही खाना वगैरह हुआ और आपस में खूब हंसी मजाक भी हुई।

करीब एक घंटा के बाद लण्ड फिर खड़े होने लगे।
इस बार मैंने असद का लण्ड पकड़ लिया, शन्नो ने अमन का लण्ड पकड़ा और बन्नो ने शेखू का लण्ड।
उसके बाद जो घमासान चुदाई हुई वह मुझे आज भी याद है।

गाण्ड मारने की विधि २

गाण्ड की तैयारी

क्योंकि भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिए नहीं बनाया है तो यह आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उसे इस काम के लिए तैयार करें। यह तैयारी तुरन्त नहीं हो सकती। इसमें 2-3 दिन से लेकर 6-7 दिन तक लग सकते हैं। जितनी आराम से तैयारी करेंगे, लड़की को आप पर उतना ही भरोसा बढ़ेगा और आपको भी उतना ही सुख गाण्ड मारने में मिलेगा। इसलिए जल्दबाज़ी मत करें।
गाण्ड की सफाई

अगर लड़की ने मंज़ूरी दे दी है और वो गाण्ड मरवाने का अनुभव करना चाहती है तो अपने आप वो अपनी गाण्ड को अच्छी तरह से साफ करके आएगी। गाण्ड अगर गंदी होगी तो सारा मज़ा खराब हो जाएगा। सबसे मज़ेदार तरीक़ा है जब आप दोनों एक साथ स्नान करो और इस दौरान एक दूसरे के गुप्तांगों को सहलाओ और साफ करो।
ज़रूरी सामान

साफ बिस्तर
1-2 सख़्त तकिये
1-2 छोटे तौलिए
1 मोटी मोमबत्ती (1.5 – 2.0 इंच चौड़ी, 6-8 इंच लंबी)
1 ट्यूब के-वाइ जेली / नारियल तेल (तेल से जेली बेहतर है)

के वाइ जेली की ट्यूब रु 90/- किसी भी केमिस्ट की दुकान पर मिल जाएगी।
शुरुआत

ध्यान रखो कि आपकी उंगली के नाख़ून बढ़े हुए नहीं हैं और ठीक तरह से कटे हुए हैं। नाख़ून के किनारे तेज़ नहीं होने चाहिए, उन्हें ठीक से फ़ाइल कर लो। अगर नाख़ून बढ़े होंगे तो जब उंगली लड़की की गाण्ड में डालोगे तो उसे लग सकता है।

लड़की को गाण्ड की बनावट के बारे में और रिंग मसल्स को किस तरह से ढीला या टाइट कर सकते हैं, के बारे में बताओ।

अब प्यार से लड़की के कपड़े उतारो और एक साफ बिस्तर पर पीठ के बाल लिटा दो। उसकी टाँगों को मोड़ दो और थोड़ा खोल दो। अब उसके चूतड़ों के नीचे 1-2 सख़्त तकिये रख कर उसके चूतड़ उपर की तरफ उठा दो जिससे उसकी चूत और गाण्ड साफ दिखाई दे। खुद भी पूरी तरह नंगे हो जाओ। अब उससे प्यार भारी बातें करो और पूरे शरीर को सहलाओ, खास तौर से उसके गाल, गर्दन, स्तन, चूचुक, पेट, जांघें और टाँगें !

कुछ देर तक उसकी चूत और गाण्ड को हाथ ना लगाएँ। थोड़ी देर में लड़की की चूची सख़्त हो जाएगी और वो अपनी टाँगें और खोल देगी। अब उसकी चूत को प्यार से सहलाना शुरू करो जिससे वो उत्तेजित हो जाए और चूत में से पानी का रिसाव होने लगे।

अब लड़की चुदाई के लिए तैयार है पर हमारा इरादा उसकी गाण्ड मारने का है। अपनी एक उंगली पर अच्छी तरह से के-वाइ जेली (या नारियल तेल) लगा कर लड़की की गाण्ड के मुँह पर सहलाओ। अभी उंगली अंदर डालने की कोशिश ना करो। उसे अपनी मांसपेशियाँ बारी बारी ढीली और टाइट करने को कहो। आप अपनी उंगली पर उसकी रिंग मसल्स को महसूस कर सकोगे। लड़की से प्यारी प्यारी बातें करो और उसको रिलॅक्स होने को कहो। थोड़ी देर में जब लड़की रिलॅक्स होने लगेगी तो उसकी गाण्ड भी थोड़ी ढीली हो जाएगी।

अब अपनी उंगली पर थोड़ी और जेली लगा कर धीरे धीरे उसकी गाण्ड के अंदर धकेलो। अगर लड़की गाण्ड को टाइट कर ले तो फिर उसे विश्वास दिलाओ कि उसे दर्द नहीं होने दोगे। ज़रूरत हो तो उंगली बाहर निकल लो और उसकी चूत, जांघें और बूब्स को प्यार से सहलाओ। जब लड़की दोबारा रिलॅक्स हो जाए तो उंगली पर जेली लगा कर एक बार और गाण्ड में डालने की कोशिश करो, जल्दबाज़ी नहीं करना। गाण्ड की बाहरी रिंग मसल को धीरे धीरे ढीला कर के उंगली को करीब आधा इंच अंदर डाल दो। अब धीरे धीरे उंगली को आधा इंच तक अंदर बाहर करो। देखो कि लड़की को दर्द नहीं हो रहा है। अगर लड़की खुश नहीं है तो उंगली अंदर रख कर रुक जाओ और थोड़ी देर बाद फिर शुरू करो।

अगर लड़की खुश है तो धीरे धीरे उंगली को और अंदर करो। कुछ दूर तक तो उंगली अंदर चली जाएगी पर फिर ऐसा लगेगा जैसे आगे कोई रुकावट है। यह उसकी गाण्ड की दूसरी रिंग मसल है। इसको पार करने की लिए एक बार फिर लड़की को रिंग मसल ढीला करने के लिए बोलो। (इस वक़्त लड़की को अपनी गाण्ड पर नीचे के तरफ ज़ोर लगाना चाहिए जैसा कि पॉटी करते वक़्त लगाते हैं, ऐसा करने से रिंग मसल खुल जाएगी और आप अपनी उंगली उसके पार ले जा सकते हैं). अगर लड़की रिलॅक्स नहीं करती है तो आपको धीरज रख कर धीरे धीरे उंगली से उसकी रिंग मसल को खोलने की कोशिश करनी होगी। याद रहे, कोई काम जल्दबाज़ी में ना करो। देखा जाए तो इस क्रिया में भी आप काफ़ी मज़ा ले सकते हो।

किसी भी वक़्त अगर लड़की को तकलीफ़ होने लगे तो उंगली तुरंत बाहर निकाल लो और उसको प्यार करो। उसे यह पूरा विश्वास होना चाहिए कि गाण्ड मारने के वक़्त आप उसे तकलीफ़ नहीं दोगे।

जब उंगली दूसरी रिंग मसल को पार कर जाए तो आपकी उंगली ने फ़तेह पा ली है। अब आप आराम से उंगली को जितना अंदर डालना चाहो डाल सकते हो। ध्यान रहे कि उंगली पर जेली या तेल अच्छी तरह लगा हो। अगर सूख गया है तो उंगली बाहर निकल कर दोबारा लगा लो और फिर से धीरे धीरे अंदर डालो। अगर एक बार उंगली अंदर चली गई है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अब हमेशा आसानी से चली जाएगी। गाण्ड की मसल्स तो फिर से बंद हो गई होंगी, इसलिए हर बार गाण्ड में धीरे धीरे और प्यार के साथ ही प्रवेश करना है।

जब आपकी एक उंगली गाण्ड के अंदर बाहर जाने लगे और लड़की को तकलीफ़ नहीं हो रही हो तो आप यही प्रक्रिया दो उंगलियों पर जेली लगा कर कोशिश करो। इसमें शुरू में थोड़ी मुश्किल होगी क्योंकि गाण्ड का छेद छोटा होता है। एक उंगली तो चली जाती है पर दो उंगलियाँ मोटी होती हैं. लेकिन यह काम भी प्यार से और धीरज से हो जाएगा। आप महसूस करोगे कि जैसे जैसे लड़की को आप पर भरोसा बढ़ेगा वो इस काम में आपको सहयोग देगी और थोड़ा बहुत दर्द भी सहन करने लगेगी।

जब आपकी दो उंगलियाँ पूरी तरह अंदर चली जाएँ तो धीरे धीरे उंगलियों को दोनो तरफ घुमाना शुरू करो, इससे गाण्ड का पूरा छेद ढीला होगा। साथ ही साथ उंगलियों को अंदर बाहर भी करो।

हो सकता है इतना सब कुछ करने के बाद आप दोनों थक गये हों। अगर ऐसा है तो उंगलियाँ बाहर निकाल लो और आप दोनों कुछ और कार्यवाही कर सकते हो। अगर लड़की खुश है तो वो आपके लंड को मुँह में ले कर चूस सकती है जिससे आपके तने हुए लंड को आराम मिलेगा। यह मैं इस लिए कह रहा हूं क्योंकि उंगली करने के चक्कर में आप का लंड ज़रूर तैयार हो गया होगा। पर अभी मंज़िल बहुत दूर है और आप को धीरज से काम करना होगा। दूसरी बात यह है कि जो लड़की गाण्ड मरवाने के लिए तैयार होगी वो लंड तो चूस ही लेती होगी। अगर नहीं करती है तो उसे मेरी “लंड चूसने की विधि” पढ़नी चाहिए।

चलिए, आप दोनों ने आराम कर लिया। अब आगे बढ़ते हैं !

अब एक मोटी मोमबत्ती लो जिसका घेरा आपके तने हुए लंड के बराबर हो। इसकी लंबाई 6 इंच से कम नहीं होनी चाहिए। मोमबत्ती को अच्छी तरह चिकना कर लो। मोमबत्ती का सिरा पैना (शार्प) नहीं होना चाहिए। उसे चाकू से छील करके लंड-नुमा शेप दे दो। अब आगे के 3-4 इंच पर अच्छी तरह से जेली लगा लो।

एक बार फिर लड़की को रिलॅक्स होने के लिए बोलो और उसकी गाण्ड के अंदर और बाहर भी अच्छी तरह से जेली लगा दो। कभी भी जेली लगाने में कंजूसी ना करो।

अब मोमबत्ती का सिरा गाण्ड के मुँह पर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने की कोशिश करो। शुरू में मुश्किल होगी। अगर ज़रूरत हो तो गाण्ड में एक उंगली डाल कर उसकी दोनों रिंग मसल्स को ढीला कर लो। लड़की को भी गाण्ड ढीली करने को कहो। जब मोमबत्ती करीब आधा इंच अंदर चली जाए तो एक दो बार उतना ही अंदर बाहर करो। लड़की के इशारों का ध्यान रखो कि उसे कोई तकलीफ़ तो नहीं हो रही। उससे बातें करते रहो। जब लड़की आधा इंच तक अंदर बाहर को सहन करने लगे तो आप मोमबत्ती को घुमाते हुए और अंदर डालने की कोशिश करो। (यकीन करो कि जेली सूख ना गई हो. ज़रूरत हो तो और लगा लो).

मोमबत्ती थोड़ा और अंदर जाएगी और फिर रुक जाएगी। अब तो आपको मालूम है यह क्यों रुकी है, दूसरी रिंग मसल सामने है। लड़की के स्तनों को चूमो और उसकी चूत को सहलाओ। साथ ही उसे रिलॅक्स करने और गाण्ड को ढीला करने को कहो। जैसे ही वो गाण्ड को रिलॅक्स करेगी, मोमबत्ती आराम से अंदर चली जाएगी।

अब थोड़ा इंतज़ार करो जिससे लड़की मोमबत्ती की मोटाई को अपनी गाण्ड में महसूस कर सके और उसका शरीर इस नई फीलिंग को समझ सके। थोड़ी देर के बाद मोमबत्ती को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू करो। बाहर करते वक़्त लड़की को कोई तकलीफ़ नहीं होगी पर अंदर करते वक़्त आप को ध्यान रखना होगा कि जल्दबाज़ी ना हो। अगर जेली कम हो गई हो या सूख गई हो तो और लगा लो। इस तरह मोमबत्ती से आप उसकी गाण्ड को चोदना शुरू करो।

धीरे धीरे लड़की की तकलीफ़ कम हो कर ख़तम हो जाएगी और वो आनंद महसूस करने लगेगी। अब आप ४-५ इंच तक मोमबत्ती अन्दर बाहर कर सकते हो। जब तक लड़की चाहे उसे मोमबत्ती से चोदते रहो और फिर धीरे धीरे मोमबत्ती को बाहर निकाल लो। यह काम भी धीरे धीरे ही करना चाहिए।

मेरी राय में आपको यह उंगली और मोमबत्ती वाली प्रक्रिया दो तीन दिन तक करनी चाहिए। वैसे भी अब तक आप दोनों थक गये होंगे और इंतज़ार का फल हमेशा मीठा होता है।

उम्मीद है आपने दो तीन दिन तक बताई हुई प्रक्रिया कर ली है और अब लड़की अपनी गाण्ड की मसल्स को ढीला और टाइट करना सीख गई है।

गाण्ड मारने की विधि १

मैने गाण्ड मारने पर बहुत कहानियाँ पढ़ी हैं, कुछ अच्छी होती हैं लेकिन ज़्यादातर झूठ होती हैं। ऐसा लगता है यह कहानी नहीं बल्कि लेखक की कल्पना है। जिन लोगों को सेक्स नहीं मिलता या जो अपनी ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाते वो कल्पना से कहानियाँ लिखते हैं।

अगर इन कहानियों को सच समझा जाए तो गाण्ड मारना बहुत आसान लगता है। बस, लंड के सुपारे को गाण्ड के मुँह पर रखो और ज़ोर से धक्का लगाओ- हो गया… लड़की ज़ोर से चिल्लाएगी…” ऊऊउउइ मर गयी…… मेरी गाण्ड फाड़ दी……”

और थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगेगा !! असलियत में ऐसा नहीं होता है।

आप लोगों ने भी ऐसी बहुत कहानियाँ पढ़ी होंगी।

मैने बहुत गाण्ड मारी है और मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि गाण्ड मारना इतना आसान नहीं है। मेरे अनुभव में तो चूत लेना भी इतना आसान नहीं होता जितना यह लोग गाण्ड मारना समझते हैं।

अगर आप सचमुच में गाण्ड मारना चाहते हो और आप चाहते हो कि लड़की को भी उतना ही मज़ा आए जितना आपको आता है और वो बार बार आपसे गाण्ड मरवाने की चाहत रखे तो आपको मैं सही विधि बताता हूँ। ध्यान से पढ़िए आपकी मनोकामना पूरी होगी…



इस विधि में लड़की की गाण्ड की बात की गई है लेकिन अगर आप लड़के की गाण्ड मारना चाहते हैं तो भी यही विधि लागू होगी क्योंकि गाण्ड दोनों की एक जैसी होती है।
ज़रूरी बातें :

गाण्ड मारने से पहले कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान रखा गया तो लड़की को भी उतना ही मज़ा आएगा जितना आपको और वो आपसे बार बार गाण्ड मरवाने की कोशिश करेगी। अगर इन ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया तो हो सकता है आप गाण्ड कभी मार ही नहीं पाएँगे !
लड़की की मंज़ूरी

सबसे पहले यह बहुत ज़रूरी है कि लड़की गाण्ड मरवाने के लिए राज़ी हो। इसके लिए आपको उसे यह भरोसा दिलाना होगा कि आप ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और अगर किसी भी वक़्त वो मना करती है तो आप रुक जएँगे। लड़की को ज़्यादा दर्द नहीं होना चाहिए। दर्द को कम करने का तरीक़ा इस विधि में आगे बताया गया है।
गाण्ड की बनावट

भगवान ने गाण्ड को संभोग के लिया नहीं बनाया इसलिए इसकी बनावट, पोज़िशन और प्रक्रिया ऐसी है कि आदमी का लिंग आसानी से उस में प्रवेश नहीं कर सकता (जैसा की चूत में कर सकता है)। इसके लिए आप को गाण्ड की बनावट के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

गाण्ड का काम शरीर से मल बाहर निकलना है। इसके मुँह की तरफ दो छल्लेदार मांसपेशियाँ (रिंग मसल्स) होते हैं जो कि अपनी इच्छा से खोले या बंद किए जा सकते हैं। एक छल्ला बिल्कुल मुँह पर होता है और दूसरा करीब पौन इंच अंदर की तरफ होता है। इन मांसपेशियों को आप अपनी गाण्ड में महसूस कर सकते हैं।
अपनी बीच की उंगली पर तेल या क्रीम लगा कर अपनी गाण्ड में डालने की कोशिश करें। जो बाहर की मांसपेशी है वो अपने आप सिमट कर सिकुड़ जाएगी क्योंकि उसका काम है बाहर की चीज़ को अंदर जाने से रोकना !
अपने आप को थोड़ा रिलॅक्स करो और गाण्ड की मांसपेशी को ढीला करो तो आपकी उंगली थोड़ा अंदर चली जाएगी। अब आप दूसरी मांसपेशी को महसूस कर सकेंगे जो कि आपकी उंगली को और अंदर नहीं जाने देगी। इस मांसपेशी को भी आप ढीला कर सकते हैं और थोड़ी कोशिश के बाद आपकी उंगली इसके भी पार हो जाएगी। जब दूसरी मांसपेशी पार कर ली तो फिर कोई और रुकावट नहीं होगी और आपकी उंगली आसानी से अंदर जा सकती है।

गाण्ड की ये मान्सपेशियाँ काफ़ी मज़बूत होती हैं और इनको आसानी से पार नहीं किया जा सकता। ख़ास तौर से अगर लड़की की मर्ज़ी ना हो तो। दूसरी बात यह भी है कि उंगली के मुक़ाबले में लंड का घेरा (साइज़) ज़्यादा होता है, इस कारण भी गाण्ड के अंदर डालना मुश्किल होता है।

गाण्ड की एक ख़ासियत है कि चूत की तरह इसमें कोई तरल (लिक्विड) चीज़ का प्रवाह नहीं होता। जब लड़की सेक्स की लिए उत्सुक होती है तो उसकी चूत में अपने आप गीलापन होता है जिससे लंड का प्रवेश आसान हो जाता है। यह प्रकृति का तरीक़ा है क्योंकि चूत को बनाया ही इस काम के लिए है। गाण्ड में कोई प्राकृतिक चिकनाहट नहीं होती इसलिए वो हमेशा सूखी सी रहती है। ऐसी हालत में लंड के प्रवेश से ना केवल लड़की को दर्द होगा बल्कि पुरुष को भी मज़ा नहीं आएगा। कुछ देर के बाद लंड में भी दर्द हो सकता है तो चुदाई का मज़ा किरकिरा हो सकता है।

गाण्ड की इन मांसपेशियों के इर्द गिर्द बहुत सी चेतना-नसें(नर्व-एंडिंग्स) होती हैं जिनमें रक्त संचार होता है। इस कारण गाण्ड मरवाने के दौरान लड़की को भी बहुत मज़ा आता है, शर्त यह है कि उसे दर्द ना हो।

गाण्ड ठीक से ना मारी जाए तो लड़की को बहुत दर्द होता है।

गाण्ड की बनावट से यह साफ हो गया है कि:
1) गाण्ड में कोई बाहर की चीज़ आसानी से अंदर नहीं जा सकती।
2) गाण्ड के अंदर कुछ भी डालने के लिए गाण्ड की मांसपेशियाँ को ढीला करना ज़रूरी है।
3) गाण्ड की मांसपेशियों को लड़की अपनी मर्ज़ी से ढीली या टाइट कर सकती है।
4) गाण्ड को बाहरी चिकनाहट की ज़रूरत होती है।
5) गाण्ड में नर्व एंडिंग्स होती हैं जिससे लड़की को गाण्ड मरवाने मैं मज़ा आता है। (यही कारण है कि दुनिया में इतने पुरुष समलिंगी होते हैं और खुशी खुशी गाण्ड मरवाते हैं)

शादी के बाद भी बॉयफ्रेंड प्रकाश का लंड लिया!

हैलो फ्रेंड्स, मैं जानकी एक बार फिर से उपस्थित हूँ अपनी नई सेक्स कहानी के साथ. मेरी उम्र 25 साल है, नवम्बर में ही मेरी शादी हुई है, मेरे पति अमेरिकन हैं. शादी के बाद ही मैं अमेरिका चली गई थी.

अब मैं मुख्य घटना पर आती हूँ, मेरी शादी को 20 दिन ही हुए थे और हम दोनों हर रात चुदाई का मज़ा भी ले रहे थे. उसी समय मेरे पति को सर्दी और बुखार हो गया, इस वजह से उन्होंने और मैंने सेक्स से थोड़ा दूरी बना ली. पर उनकी तबियत थोड़ी और बिगड़ गई.

लगभग एक महीने में उनकी तबियत ठीक हुई, पर बुखार की वजह से उनमें थोड़ी कमजोरी आ गई थी. हालांकि इस दौरान इन्होंने काम पर जाना बन्द नहीं किया था क्योंकि वो भी बहुत जरूरी है.

इधर दो महीने से हम दोनों ने भी सेक्स नहीं किया था. मैं भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरे हस्बैंड भी. लेकिन अभी पूरी तरह से स्वास्थ्य ठीक न हो पाने के कारण हम दोनों ने अभी सेक्स करना ठीक नहीं समझा.

इस तरह कुछ दिन और निकल गए, अब मुझे भी अपने देश वापस आना था. पर कुछ डाक्यूमेंट्स की प्रॉब्लम हो गई थी, इसलिए वापस आने में समय लग गया. जब डाक्यूमेंट्स प्रॉब्लम सॉल्व हो गई तो उसके बाद मैं इंडिया आ गई.

अभी कुछ ही दिन पहले मैं इंडिया आई हूँ और सबसे पहले मैं अपने पेरेंट्स के पास आई, जहाँ वो रहते हैं.

कुछ दिन बाद मेरे दूसरे घर जहाँ मैं रहती हूँ, वहां गई. घर पर पहुँचते ही मुझे मेरी किरायदार मिली, जो अकेले ही रहती हैं. वो उस वक्त कहीं पर जा रही थी.

उसके बाद मैंने कुछ देर रेस्ट किया और रात प्रकाश के पास गई.. चिंटू भी उनके साथ ही बैठे थे. उन्हें देखते ही मेरे पूरे बदन में आग लग गई, पर खुद को मैंने सम्भाला. प्रकाश भी बहुत हट्टे कट्टे दिख रहे थे. मुझे भी चुदाई की इच्छा हो रही थी. मैंने उनसे चुदाई की बात भी की, पर उन्होंने अगले दिन बताया कि वो 4-5 दिन के लिए गोवा जा रहे हैं, चिंटू का कोई काम है.

मैंने भी साथ चलने के लिए थोड़ी ज़िद की और थोड़ा मनाया भी, उन्होंने भी हाँ कह दिया. चिंटू ने जल्दी ही फोन लगाकर तैयार होने के लिए बोल दिया. उन्हें कोई जल्दी वाला काम था.

मैंने सामान की पैकिंग तो ही कर ली थी, उसके बाद हम घर से गोवा के लिए चल दिए. हमें शाम को ट्रेन से जाना था तो हमने खाने का पूरा बंदोबस्त कर रखा था. ट्रेन में कुछ देर बाद टीसी भी आ गया, टिकट देखने के बाद टीसी चला गया और चिंटू और प्रकाश थकान की वजह से जल्दी सो गए.

मैं भी प्रकाश के ऊपर ही सो गई क्योंकि मेरा लगाव भी प्रकाश से भी ज्यादा है. लेकिन बर्थ छोटी थी, जिस वजह से प्रकाश को थोड़ी सी समस्या हो रही थी. चिंटू ऊपर की बर्थ पर सो रहा था, जो मुझे मिली थी, क्योंकि और कोई भी आने वाला नहीं था तो नीचे की बर्थ मैंने ले ली. पर मुझे अभी नींद नहीं आ रही थी और प्रकाश भी मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी नंगी पीठ को सहला रहे थे. पता नहीं कब प्रकाश को नींद आ गई, जब वो सो गए तो मैं भी मेरी बर्थ पर जाकर सो गई.

सुबह जल्दी ही हमारी नींद खुल गई, जब हम गोवा पहुंचे, उस समय सुबह 6:00 बज रहे थे. सबसे पहले हम रूम पर पहुंचे जो चिंटू के ही दोस्त का था और जहाँ मैं पहले भी बहुत बार आई हूँ और चुदी भी हूँ.

फ्रेश होने, नहाने और नाश्ता करने के बाद हम तीनों ही चिंटू के काम के लिए निकल पड़े. चिंटू का काम होने के बाद होटल में हम खाना खाने के लिए रुके. खाना खाने के बाद हम तीनों फिर से रूम में पहुंचे. पर सुबह उठने से लेकर ही मुझे तो सिर्फ चुदाई की ही याद आ रही थी, पता नहीं ये दोनों मेरी चुदाई कब करेंगे.

जैसे ही हम रूम में पहुँचे मैं कपड़े बदलने लगी, जब कपड़े बदल लिए तो उन्होंने मुझसे दरवाजा लगाने के लिए बोला. जैसे ही मैं दरवाजा लगाकर आई तो तुरन्त ही प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ा और किस करने लगे.

मैं यह हमला सम्भाल नहीं पाई, तभी चिंटू ने भी मेरी लोअर और पेंटी नीचे कर मेरी गांड को चाटना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मैं भी नॉर्मल हो गई और मैंने खुद ही मेरी टी-शर्ट और ब्रा निकाल दी. चिंटू को, जो मेरी गांड को चाट रहा था. उनको खड़ा किया और किस करने लगी. इस दौरान मैंने प्रकाश से अपनी चुदासी चूत चटवाई. मैं ये सब खड़े खड़े ही कर रही थी.

मैं कुछ देर में ही बहुत गर्म हो गई, तभी उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया और दोनों मेरे मम्मों को चूसने लगे.

तभी मैंने दोनों की टी-शर्ट को निकाल दिया और पेंट उन दोनों ने खुद ही निकाल दी.

उन दोनों के लंड को एक साथ मैंने हाथ में ले लिया. लगभग 4 महीने बाद उन दोनों के लंड को देखा और छुआ, जिससे मुझे एक अलग ही सुकून मिल रहा था.

पहले तो मैंने इन दोनों के लंड को चूमा और तुरन्त ही लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी क्योंकि मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था. एक तरफ मैं दोनों के लंड चूस रही थी, तो दूसरी तरफ ये दोनों मेरे दोनों मम्मों को मसल रहे थे. उन्होंने मेरे दोनों मम्मों मसल मसल कर एकदम लाल कर दिए. जब उनके लंड बिल्कुल सख्त हो गए तो उन्होंने खुद ही एक साथ मेरी चूत और गांड में लंड डाल दिया.

प्रकाश ने कहा- आज 4 महीनों की कमी एक बार में ही पूरी करेंगें.

मैं कुछ नहीं बोली और उन्होंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. दो महीने बाद मेरी चुदाई हो रही थी तो मेरी चूत और गांड भी थोड़ी सिकुड़ गई थी और थोड़ा दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था.

मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सीत्कार कर रही थी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह आहह्ह्ह चोदो मुझे.. और चोदो फाड़ दो.. मेरी चूत और गांड को.. चार महीने से तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ.. आहह्ह्ह यईआह.. उह्ह्म्म्माआ..

धीरे धीरे उन्होंने धक्के लगाने तेज कर दिए. तेज धक्कों के साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था, तो मैंने चिंटू के सीने को बिल्कुल मम्मों की तरह कसकर पकड़ लिया.

उसके मुँह से सीईईईईई की आवाज निकली तो मैंने उन्होंने और भी तेज मसलना शुरू कर दिया.

अब उसने भी तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए. मेरा दर्द और मजा दोनों बढ़ रहे थे, पर दर्द होने की वजह से आँसू भी निकल रहे थे.

मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि थोड़ी देर में ही झड़ गई, मेरे झड़ते ही चिंटू ने प्रकाश से जगह बदलने के लिए बोला.

उन दोनों ने मेरी चूत से और गांड से लंड को बाहर निकाला और दोनों ने ही एक एक करके मेरे मुँह को चोदा. पहले प्रकाश ने मेरे मुँह को चोदा और उसके बाद चिंटू ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. चिंटू का लंड मेरी चूत के रस से गीला हो रहा था तो उसके लंड को चूसने में अलग ही स्वाद आ रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था.

कुछ देर बाद प्रकाश ने अपने लंड को मेरी चूत में डाला और फिर चिंटू ने गांड में पेल दिया.

अब एक बार फिर से मेरी चूत और गांड एक साथ चुदने के लिए तैयार थी और दोनों ने ही धक्के लगाने शुरू कर दिए.

मैं एक बार फिर से सीत्कारने लगी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह.. आआ आअह्हह्ह ह्ह चोद दो.. मेरी चूत.. मेरी दो महीनों की प्यास भी बुझा दो, बहुत तड़पी थी तुम दोनों के लंड के लिए.. आअह्ह्ह आहह्ह्ह..

तभी कुछ देर बाद प्रकाश ने चिंटू से धक्के बन्द करने के लिए कहा. चिंटू ने भी वैसा ही किया. तभी प्रकाश और चिंटू ने मुझे कसकर पकड़ लिया और प्रकाश अचानक तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदने लगे. मेरी जैसे ही दर्द से चीख निकली, चिंटू ने तुरन्त मेरे मुँह को बन्द कर दिया, जिससे मेरी चीख ज्यादा नहीं निकल पाई.

कुछ देर ऐसे ही मुझे बहुत स्पीड के साथ चोदते रहे, बीच बीच में उनका लंड भी फिसला, पर उन्होंने फिर से मेरी चूत में डालकर मेरी चूत को चोदा.

जब तक मैं दूसरी बार नहीं झड़ी, तब तक प्रकाश मुझे ऐसे ही चोदते रहे. बीच बीच में चिंटू भी मेरी गांड को चोद रहा था.

जब मेरी चूत ने दूसरी बार पानी छोड़ा उसके बाद दोनों ने ही उनके लंड को बाहर निकाल लिया.. अब मुझे भी ठंडक मिल रही थी. उसके बाद प्रकाश मेरी चूत को चाटने लगे, जो मेरी चूत से रस निकल रहा था, इन्होंने उसे भी चाट लिया.

चिंटू मुझे किस करने लगा. पता नहीं क्यों जब भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते हैं, मुझे तो जैसे जन्नत मिल जाती है. उनके चूत चाटने के साथ साथ मैं भी एक हाथ से चिंटू के बदन को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी चूत को ऊपर से ही मसल रही थी. साथ ही ये दोनों मेरे एक एक चूचे को भी मसल रहे थे.

तभी चिंटू ने मेरे हाथ से अपने लंड को अलग किया और मेरे जिस दूध को वो मसल रहा था, उसे पीना शुरू किया और फिर मुझे किस करने लगा.

तभी अचानक ही मेरी कमर अपने आप ऊपर हो गई और मेरी चूत ने पानी निकाल दिया. मैं सिसकारी भी नहीं निकाल पाई क्योंकि चिंटू ने मुझे और मेरे होंठों को उनके होंठों से अलग ही नहीं होने दिया. मेरे झड़ने के बाद भी प्रकाश मेरी चूत को चाटते रहे और फिर से मेरी चूत का पानी भी पी गए.

उसके बाद चिंटू ने प्रकाश को धक्का देकर अलग किया, यह देखकर मुझे हँसी आ गई और प्रकाश भी मुस्कुरा दिए.

तभी मैंने प्रकाश को मेरी तरफ खींचकर उन्हें किस करने लगी और चिंटू से मेरी चूत को चटवाने लगी.

पर चिंटू मेरी चूत को चूसने और चाटने के साथ साथ अपनी उंगली से मेरी चुत को चोद भी रहा था. चिंटू भी आज मेरी चूत के साथ खेल ज्यादा रहा था.

कुछ ही देर में मैं एक बार और झड़ गई और इस बार चिंटू भी मेरी चूत का सारा रस पी गया. दोनों ही चूत का रस आसानी से पी जाते हैं, ये उनके लिए कोई नई बात नहीं है.

तभी चिंटू ने मेरी चूत को चाटना छोड़ दी और अपने लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया. मैं उसके लंड को सहला रही थी.

तभी मैंने प्रकाश को भी, जो मुझे किस कर रहे थे, उन्हें अपने से अलग किया और उनके भी लंड को सहलाने लगी. उन दोनों के लंड अभी आधे ही खड़े हुए थे तो मैं उनके लंड को बारी बारी मुँह में लेकर चूस रही थी.

तभी चिंटू मेरा मुँह पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगा. उसने अपने लंड से 20-25 धक्के लगाए होंगे कि अपना लंड मेरे मुँह से खींच लिया. इसके बाद प्रकाश भी मेरे मुँह को चोदने लगे.

बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा. पहले 20-25 धक्के लगाकर चिंटू मेरे मुँह को चोदता, उसके बाद प्रकाश 20-25 धक्के लगाकर मेरे मुँह को चोदने लगते.

बहुत देर तक उनके इस तरह चोदने से मेरा मुँह भी दुखने लगा. मैंने उन्हें लंड को चूत में डालने के लिए कहा, तो उसके बाद वो फिर से मुझे गर्म करने में लग गए और 5 मिनट में ही मेरी चूत में और ज्यादा आग लगने लगी.

उसके बाद मैंने फिर से उनके कहने पर थोड़ी देर उनके लंड को चूसा. फिर उन्होंने भी देर नहीं की और चिंटू ने मुझे उनकी गोदी में उठा कर अपने लंड को मेरी चूत में फंसाने लगा. पर उसका लंड बार बार मेरी चूत से फिसल रहा था, तो फिर मैंने ही उसके लंड को पकड़कर मेरी चूत में डाला और फिर धीरे धीरे पूरे लंड को अपनी चूत के अन्दर तक डाल लिया.

जब चिंटू का लंड मेरी चूत के अन्दर पहुँच गया, उसके बाद प्रकाश ने भी अपने मोटे लंड को मेरी गांड में अन्दर तक पेल दिया और अब दोनों मुझे पकड़कर मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.

यह पहली बार था कि जब इस तरह से दो लंड मेरी चूत और गांड को चोद रहे थे. इस पोजीशन में उनके पूरे लंड भी मेरी चूत और गांड में अन्दर तक जा रहे थे. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.

कभी वो दोनों मुझे उछाल उछाल कर मेरी चूत और गांड की चुदाई करते, तो कभी मुझे कसकर पकड़कर खुद धक्के लगा कर मेरे दोनों छेदों को ठोकते.

अब मैं भी थोड़ी थक चुकी थी और थोड़ी ही देर में झड़ने वाली भी थी. कुछ पलों बाद मैं झड़ भी गई और मेरी पकड़ भी ढीली हो गई.

तभी चिंटू ने प्रकाश से कहा- मुझे भी तो इसकी गांड का मजा लेने दो, तुम अकेले ही इसकी गांड का मजा ले रहे हो.. जरा तुम भी इसकी चूत को छोड़ कर मजा ले लो.
तभी मैंने भी कहा- हाँ चिंटू सही बोल रहा है. मेरी चूत भी तुम्हारे लंड की प्यासी हो रही है, प्लीज इसकी आप भी प्यास बुझा दो न..!

प्रकाश ने भी बिना कुछ बोले मुझे चिंटू की गोद से उनकी गोद में ले लिया और उनके लंड को मेरी चूत में डाल दिया. मेरी चुत तो भरपूर गीली थी, इस वजह से उनका लंड आसानी से मेरी चूत में अन्दर तक चला गया.

वहीं चिंटू ने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाते ही दो करारे धक्कों में मेरी गांड में पूरा उतार दिया. उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला होने की वजह से इतनी जल्दी मेरी गांड की दीवार को चीरता हुआ अन्दर तक पहुंच गया कि मुझे समझ ही नहीं आया.. बस यूं लगा कि कोई गरम सरिया मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया. मैं भी दर्द से चीखने ही वाली थी कि प्रकाश ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने भी शुरू कर दिए.

इस बार दोनों लंड मेरी चूत और गांड में थे, पर जब एक मेरी चूत में धक्का लगाता, तब दूसरा रुक जाता और उसके बाद दूसरा लंड धक्का मेरी गांड में लगाता. फिर कुछ देर बाद दोनों एक साथ ही धक्का लगा देते. मेरे सुख की सीमा नहीं थी.

अब मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी और मेरी पकड़ लगभग ढीली ही हो चुकी थी, पर चिंटू और प्रकाश ने मुझे कसकर पकड़ रखा था.

जब मैं एक बार और झड़ी, तब मैंने प्रकाश और चिंटू दोनों से उनके रस को बाहर निकालने के लिए बोली, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और बिना लंड को मेरी चूत और गांड से बाहर निकाले, मुझे बेड पर ले गए. जैसे तैसे मुझे बेड पर लेटाकर फिर से मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.

पर अब मुझे मजा कम और दर्द ज्यादा हो रहा था और उनसे छोड़ने के लिए बोल रही थी.

अचानक उन्होंने धक्के लगाने की स्पीड बहुत तेज कर दी और प्रकाश ने चिंटू से कहा कि वो अब अपना लंड निकालेंगे तो चिंटू ने भी धक्के लगाना रोक दिया. प्रकाश ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर अपने लंड को निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया.

जैसे ही उन्होंने लंड को मेरे मुँह में डाला, तुरन्त ही उन्होंने सारा रस मेरे मुँह में ही निकाल दिया. मैंने भी उनका सारा रस निगल लिया.

तभी चिंटू जो अपना वीर्य मेरे मम्मों पर गिराने को तैयार दिख रहा था, मैंने भी उसके लंड के रस को मुँह में निकालने के लिए कहा.

उसने भी मेरे मुँह में उनका वीर्य निकाल दिया. वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा तो मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक हल्की सी चपत जड़ दी. फिर मैं गांड हिलाते हुए बाथरूम में चली गई.

उसके कुछ देर बाद हमारी चुदाई का दूसरा राउंड शुरू हुआ. यह खेल 4 दिन तक चला.

चार दिन तक तो उन्होंने मेरी चूत और गांड की तो चटनी बना कर रख दी. एक दिन तो दोनों ने सिर्फ मेरी गांड चुदाई का ही मजा लिया. इन 4 दिनों में चिंटू ने भी उनका काम पूरा किया और मेरी चुदाई भी जमकर की.

उसके बाद हम घर पर आ गए. पर 4 दिन की चुदाई ने मेरी चूत और गांड की 2 महीने की प्यास नहीं बुझा पाई थी. अगले 3 दिन रेस्ट करने के बाद मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी.

मायके से आई सेक्सी मुस्लिम भाभी को पति ने जल्दी से पेल दिया

हेल्लो दोस्तों, मैं आप सभी का sexystory.art.blog में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ. मेरा नाम शबनम है. मैं पिछले कई सालों से सेक्सी स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ. आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ. मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी.

मैं २ महीने के लिए अपने मायके गयी थी. साल के १० महीने मैं अपनी ससुराल में ही रहती थी. गर्मी में २ महीने के लिए गर्मी की छुट्टियाँ हो जाती थी. तब मुझे मायके जाने का मौक़ा मिलता था. मैं अपने मायके चली गयी थी और २० दिन बीत चुके थे. फिर पति का फोन आया.



“शबनम जान….जल्दी से घर आ जाओ. २० दिन से मुझे चूत मारने को नही मिली है!!” पति बोले

“सुनिए जी!! मैं कम से कम २ महीने माँ के पास रहूंगी. तब तक आप हाथ से मुठ मारकर काम चला लीजिये!!” मैंने कहा

“अरे …जान तुम जानती हो की मुठ मारने में वो मजा कहाँ आता है तो चूत मारने में आता है. प्लीस जल्दी से लौट आओ!!” पति बोले पर मैंने उनकी सब बातें काट दी और अपनी माँ के पास मायके में ही रहने लगी. क्यूंकि मुझे घर की बहुत याद आती थी और ससुराल में जरा भी अच्छा नही लगता था. दोस्तों मेरे पति बहुत ही सेक्सी आदमी थे और इकदम जवान थे. वो दिन में २ बार और रात में ३ बार मेरी चूत मारते थे. उनको सेक्स करना बहुत पसंद था और इधर मैं भी कुछ इसी तरह की औरत थी की मुझे रोज मोटा मोटा लंड खाना बहुत पसंद था.

अब मुझे मायके आये १ महिना बीत चुका था इसलिए मैं भी लंड खाने को तरस रही थी. मैं अपनी चूत में डिलडो डाल के मजा ले लेती थी. इसके अलावा मैं अपनी उँगलियों से भी काम चला लेती थी. उधर मेरे पति आजकल अपने हाथ से काम चला रहे थे. पर उनको वो चूत वाला मजा नही मिल पा रहा था. धीरे धीरे २ महीने कट गये और मेरे बच्चों का स्कूल खुल गया. माँ के घर से आने का दिल तो नही कर रहा था पर क्या कर सकते है. हर शादीशुदा लड़की को एक दिन अपनी ससुराल तो आना ही पड़ता है. इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे अपने पति के पास लौटना पड़ा.

बच्चों को लेकर मैंने ट्रेन पकड़ ली और फिर ससुराल आ गयी. जैसे ही मैं घर में घुसी मेरी सास, नन्द, देवर और ससुर मुझसे बात करने लगे और पूछने लगे की ट्रेन से आने में कोई दिक्कत तो नही है. मेरी सास ने मेरे लिए तुरंत चाय बनाई. मैंने चाय पी ली और सबके साथ बैठकर मैं बात कर रही थी. मेरे बच्चे अपने दादा के पास खेलने चले गये थे. मैंने अभी कपड़े भी नहीं बदले थे की पति ने आवाज लगाई.

“शबनम ….इधर आना!!” पति जोर से बोले तो मैं सास और नन्द के पास से उठकर पीछे पति के कमरे में चली गयी. उन्होंने तुरंत मुझे पकड़ लिया और किस करने लगे.
“शबनम!! मुझे अभी चूत दे. तू नही जानती की मैंने २ महीने कैसे गुजारे है बिना तेरी गदराई चूत के!!” पति बोले

“अभी मैं सास और नन्द से बात कर रही हूँ. अभी कुछ देर में आती हूँ!” मैंने कहा तो पति ने मेरा हाथ पकड़ लिए और दरवाजा बंद कर लिया.

“देख शबनम…नाटक मत कर. मैं ६० दिन बिना तेरी चूत मारे गुजारे है. अब मेरा काम नही चल रहा है. पहले मुझे चूत दे दे फिर घर में सबसे बात कर लेना!!” पति गुस्साकर बोले

“अरे यार….ऐसे दिन में नही अच्छा लगता है. सब लोग घर में क्या सोचेंगे!!” मैंने झल्लाते हुए कहा पर पति ने मेरी एक बात नही सुनी और मेरी साड़ी निकाल दी. फिर जबरदस्ती मुझे बिस्तर पर लिटा लिया और मेरा ब्लाउस खोल दिया, फिर मेरी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी. अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी. पति कपड़े निकाल कर मेरे उपर लेट गये थे और मेरे दूध मुंह में लेकर पी रहे थे. मुझे चुदाई बहुत पसंद है. पति का मोटा लंड खाना बहुत पसंद है पर अभी सुबह के ११ बजे थे और घर में सब लोग मुझसे बात करने के लिए मेरा इन्तजार कर रहे थे. इधर पति को मेरी चूत मारने की तलब लगी थी. वो मेरे दूध पीने लगे.

“सुनिए जी, घर में सब लोग मेरा इन्तजार कर रहे है. प्लीस मुझे छोड़ दीजिये और जाने दीजिये!!” मैंने कहा

“बस २ मिनट रुक जा. मैं तेरी चूत मार लू. बस २ मिनट लगेगा!!” पति देव बोले

सुबह सुबह मुझे चुदाई बड़ी अजीब लग रही थी. अभी मुझे मायके से आये ५ १० मिनट भी नही हुए और पति मुझे चोदने लगे. पर वो मेरे पति थे, मैं कैसे उनको मना कर सकती थी. इसलिए मैं खुलकर दोनों टांग फैलाकर लेट गयी.

“अच्छा ठीक है—आप चोद लीजिये पर जल्दी करिये. उधर घर में सब लोग मेरा इंतजार कर रहे है!!” मैंने कहा
खूबसूरत थी. उनके चारो ओर बड़े बड़े डार्क काले घेरे थे जो बहुत सेक्सी और कामुक लग रहे थे. पति देव तो आज ऐसे मेरी चूचियां पी रहे थे जैसे आज जन्मो बाद मैंने उसको मिली थी. वो मेरी निपल्स को कामुक तरह से काट लेते थे. मैं “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” बोलकर अपनी कमर उठा देती थी. पति ने मुझे नही छोड़ा और मेरे मम्मे पीते रहे. उधर मेरी सास मुझे आवाज दे देकर थक गयी. इधर मेरे पति मुझे बजा रहे थे.

पति मेरी दोनों रसीली चूचियों को पी रहे थे. मजा आ रहा था. मुझे भी दूध पिलाने में खूब मजा आ रहा था. फिर पति ने मेरी दोनों टांगो को खोल दिया और मेरी चूत में २ उँगलियाँ डाल दी और जल्दी जल्दी मेरे भोसड़े को फेटने लगे. मैं पागल हो रही थी. मुझे बहुत जादा उतेज्जना हो रही थी. पति आज तो कामदेव की तरह लग रहे थे. आज मुझे चोदकर वो भरपूर मजा लेना चाहते थे. वो जल्दी जल्दी मेरी रसीली और नम बुर को अपनी उगंलियों से फेटे जा रहे थे. मैं पागल हो रही थी. मैंने पति के हाथ को पकड़कर रोकने लगी पर वो नही रुके और अपनी २ उँगलियाँ अंदर गहराई तक मेरी चूत में उतार दी थी. मैं बार बार अपनी गांड उठा देती थी. पति तो जैसे आज मेरे गुलाबी भोसड़े को फाड़ ही देना चाहते थे. मेरी तो यौन उतेज्जना से जान जा रही थी.

मैं मजा मार रही थी. पति ने आधे घंटे मेरी बुर फेटी तो मेरी चूत से उसका सफ़ेद मक्खन निकलने लगा जो पति के हाथ में चुपड़ गया. पति मेरे भोसड़े का पूरा माल पी गये. वो अपनी उँगलियों को मुंह में लेकर मेरा सारा मक्खन चाट गये और पी गये. फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मैं उलटी घूमकर अपने घुटनों को मोड़कर घोड़ी बन गयी और मैंने अपना पिछवाड़ा माउंट एवरेस्ट पहाड़ की तरह उचा उठा दिया. पतिदेव मेरे पिछवाड़े पर आ गये और मेरे ३४” के चिकने गोल पुट्ठे सहलाने लगा और चूमने लगा. मैं  “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” करने लगी. आज पुरे ६० दिन बाद मुझे भी सेक्स करने का मौका मिला था इसलिए मुझे भी काफी खुशी मिल रही थी और मजा मिल रहा था. पति बड़े प्यार से मेरे गोल मटोल पुट्ठों को हाथ से सहला रहे थे और दबा रहे थे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

“शबनम….जान बाय गॉड!! तुमसी हसीन औरत मैंने आजतक नही देखी!!” पति बोले और मेरी तारीफ़ करने लगे. मैंने खुश हो गयी. बड़ी देर तक वो मुझे घोड़ी बनाए रहे और मेरे मुलायम पुट्ठों को सहलाते और चूमते चाटते रहे. फिर वो पीछे से मुंह लगाकर मेरे फटे भोसड़े को पीने लगे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मुझे फुल मजा मिल रहा था. पति अपने होठो से मेरी रसीली चूत की एक एक कली को चाट और पी रहे थे. मैं अपने पिछवाड़े को उपर उठाये हुए थी और फुल मजा ले रही थी. पतिदेव मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डाल रहे थे. मैं सिसक रही थी और मोन कर रही थी. कुछ देर बाद पति ने मेरे फटे और चिरे भोसड़े में अपना मोटा खूटे जैसा लंड डाल दिया और किसी कुत्ते की तरह मुझे चोदने लगे और मेरी चूत मारने लगे.

मुझे बहुत मजा मिल रहा था. कामवासना में आकर मैं अपने रसीले होठो को अपने दांत से काट रही थी और होठ चबा रही थी. मेरा पूरा शरीर जल रहा हो. पति पीछे से दनादन मुझे चोद रहे थे. मैं घोड़ी बनी हुई थी. दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगी की मेरे पति को मुझे घोड़ी बनाकर चोदना बेहद प्रिय था. हर रात वो मुझे घोड़ी जरुर बनाते थे और इस तरह खूब जी भरकर मेरी चूत बजाते थे. मुझे भी इस पोज में सेक्स करना बेहद पसंद था. पति ने मेरे चिकने और सफ़ेद पुट्ठों को हाथ में कसकर पकड़ रखा था और किसी कुत्ते की तरह मुझे पीछे से पेल रहे थे. मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हहसी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” कह कहकर चिल्ला रही थी. इस तरह पति ने मुझे ३५ मिनट चोदा फिर भी उनका माल नही गिरा. फिर वो सीधा बिस्तर पर लेट गये और मुझे अपनी कमर पर लौड़े पर बिठा लिया.

“जान….अब तुम मेरे लौड़े की सवारी करो!!” पति बोले. धीरे धीरे मैं उनकी कमर पर बैठकर उनके लौड़े की सवारी करने लगी और कुछ ही देर में मैं तेज तेज अपनी कमर को चलाने लगी. मैं अच्छे से चुद रही थी. पति के ८” लौड़े को मैंने अपने रसीले भोसड़े में ले रखा था. फिर वो भी नीचे से मुझे धक्के मारने लगे. और आधे घंटे बाद वो मेरी चूत में ही शहीद हो गये. जब मैं कपड़े पहनकर सास के पास पहुची तो वो सो चुकी थी और नन्द भी कॉलेज पढने चली गयी थी. ये कहानी आप sexystory.art.blog पर पढ़ रहे है.