पडोसी अंकल ने मेरी चूत फाड़ दी

मैं ललिता जोशी एक नियमित पाठिका हूँ.
लॉकडाउन में जब मैं फ्री हुई, तो मुझे लगा मुझे भी अपने जीवन की रसीली कहानियां लिखनी चाहिए क्योंकि मेरा जीवन सेक्सी कहानियों से भरा हुआ है.

मेरा शुरू से ही भरपूर सेक्स में बहुत इंटरेस्ट था.
मेरी सहेलियां मुझे अपने अपने बॉयफ्रेंड के साथ किए हुए सेक्स के अनुभव सुनाया करती थीं, इसी वजह से सेक्स में मेरी रुचि और बढ़ती चली गयी. मैं सेक्स क्रेजी गर्ल बन गयी.

जवानी में कदम रखते ही, मतलब 19 वर्ष की उम्र में मेरे साथ पहली बार सेक्स हुआ.
आज मैं 38 वर्ष की हूँ और अब तक मैंने 64 लंडों का स्वाद चख लिया है.



मेरे पहले लंड से लेकर 64 लंड तक की सभी कहानियां मैं आपको क्रमवार सुनाना चाहती हूं. यह एक ही कहानी में संभव नहीं है, इसीलिए मैंने इन कहानियों के अलग-अलग भाग बनाए हैं.

आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देना चाहती हूँ. मैं 38 वर्ष की भरी पूरी एक कामुक और सुंदर महिला हूँ.
मुझे देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाता है.
आज भी 25-30 साल के लड़के मुझे जब देखते हैं, तो उनको लगता ही नहीं कि मैं उनके बराबर की नहीं हूँ इसीलिए वह मेरे आगे पीछे मंडराते रहते हैं.

मेरा फिगर 36-28-38 का है. वैसे तो मैं 12 साल के एक बेटे की मां हूँ लेकिन मुझे देखकर कोई भी कह नहीं सकता कि मैं शादीशुदा हूँ.
आप यूं भी कह सकते हैं अलग-अलग लंड खाने की आस में मैंने अपने आपको काफी मेंटेन कर रखा है.

मेरी शादी जयपुर में एक व्यापारी जय जोशी (बदला हुआ नाम) से हुई. वे भी बहुत स्मार्ट और जोशीले हैं.
उनकी भी सेक्स में उतनी ही रुचि है, जितनी मेरी है.

खैर … मैं अपनी पहली चुदाई की कहानी पर आती हूँ.
जवानी के दिनों में मेरे पड़ोस में शर्मा अंकल और आंटी रहते थे, जिनकी उम्र लगभग उस समय 35-36 वर्ष होगी.
उन लोगों से हमारा पारिवारिक मेलजोल था अक्सर वह या तो हमारे घर या हम उनके घर होते थे.

एक दिन शर्मा आंटी अपने मायके में भाई की शादी का न्यौता देने हमारे घर आईं.
उन्होंने मेरी मम्मी को सपरिवार आने का न्यौता दिया और कहा कि आपके भाई साहब (शर्मा अंकल) शादी में एक-दो दिन पहले ही आएंगे. आप लोग भी उनके साथ आ जाना.
मेरी मम्मी ने शर्मा आंटी से कहा- हां भाभी जी, आप बिल्कुल आप निश्चिंत होकर जाइए. भाई साहब के खाने-पीने का पूरा ध्यान हम लोग रख लेंगे.

यह सुनकर शर्मा आंटी मन में निश्चिंत भाव लेकर अपने मायके चली गईं.

अब शर्मा अंकल को सुबह की चाय, दिन का खाना, रात का खाना देने जाने की जिम्मेदारी मेरी हो गई.
जब तक वह खाना खाते, मेरी उनसे खूब बातें होतीं.

धीरे-धीरे मैं और शर्मा अंकल खुलकर हर तरह की बातें करने लगे.

एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- ललिता तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- नहीं.

तो उन्होंने बड़े आश्चर्य से मुझसे कहा- तुम इतनी बड़ी हो गई हो और अभी तक तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है. तुम तो इतनी सुंदर हो कि तुम्हारे पीछे तो हजारों लड़के पड़ते होंगे, फिर भी तुमने आज तक किसी को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया. तुम्हारा कोई भी बॉयफ्रेंड क्यों नहीं है?
मैंने उनसे कहा- मुझे डर लगता है.

उन्होंने मुझसे कहा- इसमें डरने की क्या बात है. आजकल तो सभी लड़कियों के बॉयफ्रेंड होते हैं.
मैंने कहा- हां पर मेरी सहेलियां बताती हैं कि बॉयफ्रेंड बनने के बाद लड़के अजीब-अजीब हरकतें करते हैं.

अंकल ने कहा- अरे पागल, उसे अजीब हरकतें नहीं … सेक्स कहते हैं. फिर आजकल सभी लड़कियां अपने बॉयफ्रेंड के साथ ये सब बड़े मजे से करती हैं. यह तो जीवन का एक परम सत्य है.
मैंने अंकल से कहा- पर मुझे तो डर लगता है.
अंकल ने कहा- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा डर भगा सकता हूं क्योंकि मुझे सेक्स का भरपूर अनुभव है.

यह कहते हुए अचानक अंकल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया.
अंकल की इस हरकत से मैं कुछ देर के लिए दंग रह गई.
फिर मैंने अपने आपको संभाला और अंकल की बांहों से छूटने की कोशिश करती हुई मैंने उनसे कहा- आप कहां और मैं कहां … आप मुझसे कितने बड़े हो.

अंकल ने मुझे बड़े प्यार से समझाया- इसमें बड़ा छोटा क्या होता है. सेक्स तो एन्जॉय करने की चीज है, जिसे एक अनुभवी आदमी किसी लड़की को ज्यादा अच्छे से एन्जॉय करा सकता. किसी नौसिखए के साथ सेक्स करने से ज्यादा अच्छा है कि तुम मेरे साथ सेक्स करो. मैं तुम्हें स्वर्ग का अहसास करा दूंगा.

यह कहते हुए उन्होंने मुझे छोड़ दिया और कहा- सोच कर बताना कि क्या तुम अपने डर पर काबू करना चाहती हो … या खुल कर मस्ती करना चाहती हो. क्योंकि डर के आगे ही जीत होती है.

फिर मैं भागकर अपने घर आ गई.
घर आकर मैंने किसी को कुछ नहीं कहा क्योंकि कहीं ना कहीं मैं भी शर्मा अंकल को पसंद करने लगी थी और उनकी इस हरकत पर मुझे किसी भी प्रकार का गुस्सा नहीं आ रहा था.

रात भर मैं अपने कमरे में लेटे-लेटे सोच रही थी कि जो वह कह रहे हैं, क्या वह सही है.
वही सब सोचते-सोचते मैं सो गई.

अगले दिन जब मैं उन्हें खाना देने गई तो अब उनके और मेरे बीच में पहले जैसी बात नहीं रही.
अब मैं उनसे आंखें नहीं मिला पा रही थी और वह मुझे देखकर हल्के से मुस्कुरा रहे थे.

उन्होंने मुझसे पूछा- ललिता क्या सोचा तुमने?
मैंने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया तो उन्होंने अचानक बांहों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर एक चुंबन जड़ दिया.

मैं अभी कुछ कहती कि वह मेरे होंठों को चूसने में लग गए और लगातार मुझे चूसे जा रहे थे.

मैंने उनसे अपने आपको अलग करने की कोशिश की.

मैंने कहा- यह आप क्या कर रहे हो?
उन्होंने मेरी एक भी बात नहीं सुनी और मुझे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गए.

मैंने उनसे कहा- मैंने आपको हां नहीं बोला है.
उन्होंने कहा- तुम्हारी चुप्पी ही तुम्हारी हां है. मेरी जान अब तुम्हें कुछ और बोलने की जरूरत भी नहीं है.

यह कहते हुए अंकल ने मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरे मम्मे दबाने शुरू कर दिए.
पहली बार किसी ने मेरे मम्मे दबाए थे.
उनके मम्मे दबाने से मुझे एक नशा सा छाने लगा.
अपने आप ही मेरे मुँह से ‘आह ह ह उम ह ह …’ की आवाजें निकलने लगीं.

मौका पाकर धीरे से उन्होंने मेरे कुर्ते को उतार दिया.
अब मैं उनके सामने केवल ब्रा में थी.

अंकल ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को खूब अच्छे से सहला रहे थे.
फिर मेरे दूध सहलाते-सहलाते उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार दी.

मैं आपको यह बताना चाहती हूं कि जब अंकल ये सब कर रहे थे तो मैं उन्हें बार-बार रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

आखिरकार उन्होंने मेरे मम्मों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया और अपने मुँह से मेरी चूचियां चूसने लगे.
पहली बार किसी मर्द का अहसास अपने मम्मों पर पाकर मैं एक अलग ही दुनिया में जा पहुंची थी.

अंकल मम्मों को दबाए और चूसे जा रहे और साथ ही कहते जा रहे थे- ललिता, कितने हसीन मम्मे हैं तेरे, तेरा बदन कितना सेक्सी है ललिता … तेरी जवानी आज तक अनछुई कैसे रह गई … आज तेरी अनछुई जवानी को छूकर मैं निहाल हो गया. अब तू चिंता मत कर, आज के बाद तुझे किसी भी तरह का कोई डर नहीं लगेगा क्योंकि तेरी हसीन चूत में मैं अपना लंड डाल कर तुझे कली से फूल बना दूंगा.

मैंने आज तक इस तरह के शब्द सुने नहीं थे.
उनके मुँह से इस तरह के शब्द सुनने से मैं और रोमांचित होती जा रही थी.
मेरा पूरा शरीर कांप रहा था और मुझमें अब विरोध करने की ताकत नहीं बची थी.

फिर उन्होंने मेरी सलवार भी उतार दी अब मैं केवल उनके सामने पैंटी में थी वह मुझे बेहताशा चूमे जा रहे थे.
चूमते चूमते वह मेरे मम्मों से पेट पर … और पेट से मेरी चूत तक पहुंच गए.

पैंटी के ऊपर से काफी देर तक चूमने के बाद अचानक उन्होंने मेरी पैंटी भी मेरे जिस्म से अलग कर दी.
मैं आपको बता नहीं सकती यह पहला अहसास मेरी जिंदगी का कितना मीठा अहसास था.

उन्होंने मेरी दोनों टांगें चौड़ी की और मेरी चूत अपनी जुबान चाटने लगे.
मैं सिहर उठी और मेरे मुँह से आह उन्ह की मादक आवाजें निकलने लगीं.

दस मिनट तक चूत चटवाने का आनन्द लेने के बाद अचानक से मुझे अपनी चूत से कुछ गर्म-गर्म सा लावा बाहर निकलता हुआ महसूस हुआ.
यह मेरा पहला स्खलन था, मगर कितना अद्भुत था … सच में ये मेरी कल्पना से परे सुख का अहसास था.

अब उन्होंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.
मैंने अपने सामने पहली बार किसी नंगे मर्द को देखा था.
उनका लंड देखकर मैं घबरा गई.

अंकल का लंड लगभग साढ़े सात इंच लंबा रहा होगा.
मैं सोच रही थी कि मेरी छोटी सी चूत में अगर यह लंड घुस गया तो मेरा क्या हाल होगा.

तभी अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह के पास लाकर रख दिया.
मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं.

अंकल ने कहा- चूसो इसे!
मैंने कहा कि यह तो गंदा है.
अंकल ने कहा- पागल, गंदा नहीं बहुत टेस्टी है. एक बार टेस्ट तो करके देख.

उनके बार-बार कहने और जोर देने पर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया.
अंकल की बात सच निकली, लंड बहुत टेस्टी लग रहा था.
मैं पहली बार किसी का लंड चूस रही थी लेकिन इतने अच्छे से चूस रही थी कि मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि मैं पहली बार लंड चूस रही हूं.

कुछ देर लंड चूसते के बाद अंकल ने मुझसे कहा- मेरी रानी अब तू तैयार हो जा … कली से फूल बनने के लिए मन बना ले. अब तू अपनी चूत में लंड ले ले.
मैंने कहा- नहीं अंकल, आप ऐसा मत करो. बाकी का काम हम फिर कभी कर लेंगे.

लेकिन इतना सब कुछ हो जाने के बाद अंकल कहां मानने वाले थे, वे मेरे ऊपर आ गए और मेरी दोनों टांगें चौड़ी करके अपने लंड के सुपारे को मेरी चूत के मुँह पर रख दिया.
साथ ही अंकल ने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा लिए और एक जोरदार झटका मेरी चूत में लगाकर अपना लंड आधा अन्दर उतार दिया.

दर्द के मारे मेरी आंखों से आंसू निकल आए. मैं चिल्लाना चाहती थी मगर उन्होंने अपने होंठों से मेरे होंठों को बंद कर रखा था.
मैं खूब कसमसाई मगर उनके मजबूत शरीर ने मेरे शरीर को जकड़ रखा था.

वे मुझे हिलने डुलने नहीं दे रहे थे.

फिर उन्होंने दोबारा से एक जोरदार झटका मारा और बचा हुआ आधा लंड भी मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक जा घुसा.
मुझे इतनी जोर का दर्द हुआ कि मैंने पूरी ताकत लगा कर धक्के से अंकल को अपने आपसे दूर कर दिया और जोर से चिल्लाई- हट जाओ साले अंकल.

तभी मेरी नज़र अंकल के लंड पर पड़ी तो देखा कि लंड चूत के लाल खून से भरा हुआ है.
मैं डर गई और रोने लगी.

तभी अंकल मेरे पास आए और मुझे प्यार से बोले- शुरू शुरू में थोड़ा सा दर्द होता है ललिता, एक-दो बार अन्दर बाहर करने पर यह दर्द मजे में बदल जाएगा … और आज अगर तुमने यह हिम्मत नहीं दिखाई, तो तुम अपनी पूरी जिंदगी इस बात को लेकर डरती रहोगी.

उनके समझाने से मैं समझ गई.
मेरे पास समझने के अलावा और कोई चारा भी नहीं था.

फिर उन्होंने दोबारा से अपने लंड को मेरी चूत के मुँह पर रखा और अब की बार धीरे धीरे अपना अपना लंड मेरी चूत में उतार दिया.
इस बार मुझे थोड़ा कम दर्द हुआ.

थोड़ी देर तक उन्होंने अपना लंड अन्दर ही बिना हिलाए-डुलाए घुसाए रखा और मेरे मम्मों को चूसने लगे.
धीरे-धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और वापस से मुझमें उत्तेजना होने लगी.

अब मुझे चूत में लंड का अहसास अच्छा लग रहा था.
कुछ देर रुकने के बाद अंकल धीरे-धीरे हिलने लगे और मुझे भी अब मजा आने लगा.
धीरे-धीरे करते-करते मेरे मुँह से ‘हुम्म्म आहहह …’ की आवाज़ बराबर निकल रही थी.
अंकल अब मुझे धीरे-धीरे चोद रहे थे.

काफी देर तक वह मुझे धीरे धीरे चोदते रहे. इस बीच मेरी चूत दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी.

अचानक अंकल उठ कर मेरे मुँह के पास अपना लंड ले आए और बोले- मुँह खोलो.
इससे पहले मैं कुछ समझ पाती, उनके लंड ने गर्म गर्म वीर्य मेरे चेहरे पर गिरा दिया.

मैं ‘छी … छी …’ करती हुई बाथरूम में भागी.
मैंने अपने चेहरे और चूत को अच्छे से धोया और कपड़े पहन कर बाहर वाले रूम आकर बैठ गई.

कुछ देर बाद अंकल भी कपड़े पहन कर बाहर आ गए और मुस्कुराकर बोले- कैसा लगा ललिता?
मैंने कहा- बहुत दर्द हुआ.
उन्होंने कहा- आज पहली बार था इसलिए ऐसा लगा. बाद में धीरे-धीरे दर्द खत्म हो जाएगा और मजा आने लगेगा.

उसके बाद अंकल ने प्यार से मुझे अपने गले लगाया और मैं अपने घर आ गई.

उस दिन के बाद तो अंकल दिन में तीन-तीन बार मुझे अलग-अलग आसन में चोदने लगे थे.
मुझे भी अपनी चूत चुदवाने में मजा आने लगा था.

अंकल ने शायद ही ऐसा कोई आसन छोड़ा होगा, जिसमें उन्होंने मुझे नहीं चोदा होगा.
अंकल ने 15 से 20 ही दिनों में मुझे लगभग 50 बार चोद दिया होगा और मैं भी इन 15 से 20 ही दिनों में चुद-चुद कर एकदम जबरदस्त चुदाई की खिलाड़ी बन चुकी थी.

दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई की कहानी थी.
अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि किस तरह मैं अपनी फैमिली के साथ शर्मा आंटी के भाई की शादी में गई, जहां शर्मा आंटी के भाई ने और उसके तीन दोस्तों ने मिलकर मुझे चोद

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कुंवारी बहन की जवान चूत मारी

दोस्तो, नमस्कार. मैं मानसी एक और नई सेक्स कहानी लेकर आई हूँ. मैं उम्मीद करती हूँ कि यह वर्जिन बहन की सेक्स कहानी आपको पसंद आएगी. इस सेक्स कहानी के पात्र बहन भाई हैं. बहन का नाम शीना है. वो 22 साल की उम्र की दिल्ली की रहने वाली मस्त माल है.
दूसरा पात्र पीयूष है, जो कि शीना का भाई है. वो 25 साल का है.
शीना की फिगर 36-30-38 का है, जो कि नॉर्मल से ज्यादा है बहुत ही सेक्सी दिखने वाली लौंडिया है.
उसकी आंखें तो ऐसी हैं कि एक बार नजरें मिला कर बात कर ले, तो कोई भी मर्द उसका दीवाना हो जाए.
उसकी उभरी हुई गांड देखकर किसी बूढ़े व्यक्ति का भी लंड खड़ा हो जाए.

ऐसी हॉट बहन हो तो कौन नही चोदेगा।

इन दोनों के पापा का अपना बिजनेस होने के कारण पैसे की कोई कमी नहीं है. दिल्ली में बहुत बड़ा बांग्ला है, पूरा परिवार ऐश की ज़िंदगी जी रहा है.

शीना बैंगलोर में आइआइटी की पढ़ाई कर रही है और पीयूष भी बैंगलोर में ही रह कर किसी बड़ी कंपनी में बिजनेस की इंटर्नशिप कर रहा है.

दोनों भाई बहन में बहुत प्यार है, दोनों ही खुले विचारों वाले हैं. इन्होंने बैंगलोर में एक फ्लैट ले रखा है.
क्योंकि हॉस्टल में रोका-टोकी बहुत होने के कारण इतनी आज़ादी नहीं है इसलिए फ्लैट लेना ज्यादा बेहतर लगा.

अपने इस फ्लैट में शीना बहुत ही सेक्सी कपड़ों में रहती है. वो ज्यादातर शॉर्ट्स और स्कर्ट में ही होती है, जिसमें जरा सी झुकने पर उसकी पैंटी भी साफ दिखाई देती है.
लेकिन पीयूष ने कभी शीना को सेक्स की नजरों से नहीं देखा था.

एक दिन शीना किसी पान की दुकान से सिगरेट खरीद रही थी तो पीयूष भी वहीं आ गया.
शीना अपने भाई को मिली और जाने लगी.

जाते टाइम पान वाला आदमी शीना की हिलती हुई गांड देख कर ललचा रहा था.
जिस पर पीयूष को थोड़ा गुस्सा भी आया.
लेकिन वो ऐसे ही उससे उलझना नहीं चाहता था.

पीयूष ने पान वाले को बोला- क्या देख रहे हो भाई?
तो पान वाला बोला- भैया आपकी गर्लफ्रेंडवा बहुतेई सेक्सी है. सच में अगर मेरी ऐसी होती, तो मैं तो पूरी रात नंगी करके पेलता, साली को कपड़े भी न पहनने देता.

यह बात सुन कर पीयूष के शरीर में झनझनाहट पैदा हो गई लेकिन अगले ही पल उसने सोचा कि यह तो मेरी सगी बहन है इसके लिए मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए.
वो वहां से चल पड़ा.

अब पीयूष की रात की नींद उड़ गई थी. उसको बार बार शीना की गांड और बूब्स याद आ रहे थे.
तब भी उसने कोई भी ऐसा काम करने का नहीं सोचा, जिससे उसकी बहन उसके नीचे आ जाए.

एक दिन पीयूष ऐसे ही फ्री बैठा शीना के लैपटॉप में काम कर रहा था.

उस दिन इंटरनेट कुछ स्लो चल रहा था. वो हिस्टरी चैक करने लगा, तो हक्का बक्का रह गया.

शीना ज्यादातर बार हॉट कहानियां ही पढ़ती थी. उसमें भी वो ज्यादातर सेक्स कहानी भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ना पसंद करती थी.
यह देखकर पीयूष शॉक हो गया.

अब उसे लगा कि उसकी बहन भी सेक्स के प्रति बहुत गर्म है. क्यों ना मैं भी एक बार कोशिश कर ही लेता हूँ.

अपनी इस वासना को और अधिक मजबूत करने के लिए उसने भी अन्तर्वासना पर भाई बहन की चुदाई की कहानी पढ़ना शुरु कर दीं.
इससे उसके लंड में तनाव आ गया और उसने अपनी बहन शीना की चूचियों और गांड को याद करके मुठ मार ली.

अब पीयूष बार बार शीना से टकरा जाता और शीना की गांड और चूचों को दबा देता.
वो शीना के साथ और भी बहुत कुछ करने की कोशिश करता लेकिन वो अभी उससे सीधा सेक्स के लिए बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था.

शाम को शीना को कुछ शॉपिंग करनी थी, तो उसने पीयूष को भी साथ ले लिया. वहां पर शीना को ब्रा पैंटी लेनी थी.

उसने अपने भैया से पूछा कि कौन सी लूँ?
तो पीयूष बोला- ये सब बकवास देख रही हो, तुम थोंग वाली पैंटी ले लो.

यह सुनकर शीना हैरान रह गई कि यह क्या हो गया भाई को.
वो हैरानी से अपने भाई को देखने लगी.

इस तरह से अपनी तरफ देख कर पीयूष ने हंस कर कहा- तूने पूछा तो मैंने बता दिया. ले लो ना, पहनने में भी मजा आएगा.

शीना ने भी मुस्कुरा कर एक थोंग पैंटी उठाई और पूछा- अच्छा ठीक है, कलर बताओ कौन सी ले लूं?
पीयूष ने उंगली रखते हुए एक लाल रंग कि पैंटी लेने के लिए कह दिया.

शीना ने लाल और काली दो कलर की थोंग पैंटी ले लीं.

फिर घर आकर जब शीना ने वो पैंटी पहनी, तो उसको अपनी गांड में अजीब सा लगा. वो चेंज करने जा ही रही थी.
तभी पीयूष ने कमरे में आकर उसे देखा और बोला- मस्त लग रही है.

शीना बोली- मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है.
पीयूष- कोई बात नहीं, यही पहन कर रखो, धीरे धीरे तुमको मजा आने लगेगा.
शीना भी मुस्करा दी.

अगले दिन पीयूष ने शीना की पैंटी पर खुजली की दवाई लगा दी, जिससे शीना की बुर में बार बार खुजली हो रही थी. उसका हाथ बार बार चुत पर जा रहा था.

उसे चुत खुजाते देखकर पीयूष बोला- क्या हुआ शीना … उधर खुजा क्यों रही हो?
शीना चुत खुजलाते हुए बोली- भैया लगता है मेरी सुसु में एलर्जी हो गई है.

पीयूष बोला- दिखाओ जरा!
शीना बोली- नो भैया, वो दिखाने वाली जगह नहीं है.

पीयूष बोला- कोई बात नहीं तुम मेरी बहन हो, मुझे दिखा सकती हो.
इस पर शीना ने एक कातिलाना मुस्कराहट दे दी और बोली- नहीं भैया, ऐसा कुछ नहीं है. मगर पता नहीं क्यों … खुजली बहुत ज्यादा हो रही है.

अब पीयूष ने अपने प्लान के मुताबिक उसको एक लोशन दे दिया और लगाने के लिए कह दी. खाने के लिए एक कामवर्धक गोली दे दी यह कह कर कि इससे एलर्जी ठीक हो जाएगी.
शीना को क्या पता था कि वो एलर्जी की नहीं सेक्स की गोली खा रही है.

शीना दवा खाकर सोने के लिए बेड गई.
कुछ 15-20 मिनट में गोली ने असर दिखाना शुरू कर दिया. शीना की चुत में एलर्जी की खुजली तो ठीक हो गई थी, लेकिन लंड लेने के लिए खुजली शुरू हो गई थी.

अब उसको नींद भी नहीं आ रही थी.
वो भाई को कुछ बता भी नहीं सकती थी कि क्या हो रहा है.

तभी पीयूष बोला- क्या हुआ ठीक तो हो?
तो शीना बोली- पता नहीं भाई, बड़ी बेचैनी सी हो रही है.

अपने प्लान के मुताबिक पीयूष ने शीना को पीछे से हग कर लिया और ये कहते हुए लेट गया- मेरे साथ लेट जाओ, सब बेचैनी दूर हो जाएगी.

उसने पानी बहन को से तरह पहले भी हज़ारों हग बार किया था, इसलिए ये बात उन दोनों के लिए एक सामान्य सी बात थी.

लेकिन आज गोली के असर के कारण जैसे ही पीयूष ने शीना को अपनी बांहों में लिया तो उसके तन बदन में एक अलग ही चिंगारी पैदा हो गई.

फिर आज पीयूष का लंड भी कुछ अकड़ा हुआ था.
थोड़ी देर में पीयूष का 8 इंच का लौड़ा शीना की गांड में गड़ने लगा था, जिससे शीना की सांसें तेज़ हो रही थीं.

पीयूष ने अपना एक हाथ शीना के कंधे पर रख दिया था और वो उसे सहला रहा था.
धीरे धीरे पीयूष ने अपना हाथ नीचे को लाना शुरू किया और उसके मम्मों के क्लीवेज में टच करने लगा.

शीना की सांस और तेज़ होने लगीं.

तभी अचानक शीना बोली- भैया लगता है बिस्तर में चूहा आ गया, मुझे वो मेरे पीछे चुभ रहा है.
पीयूष बोला- अरे नहीं वो चूहा नहीं है, तुम्हारा वहम है, ऐसा कुछ भी नहीं है.

थोड़ी देर बाद शीना अपना एक हाथ पीछे करके पीयूष के लौड़े को, जिसको वो चूहा समझ रही थी … हटाने लगी, तो उसका हाथ सीधा अपने भाई के लौड़े से टकरा गया.

वो हैरान हो गई और शर्मा गई. वो धीरे से बोली- भैया यह चूहा नहीं है, यह तो आपका वो है.
पीयूष बोला- मेरा क्या है?

वो बोली- मुझे नहीं बताना कि आप कितने बेशर्म हो.
पीयूष बोला- मैं क्या बेशर्म हूँ … बताओ न, किसकी बात कर रही हो?

शीना बोली- मुझे शर्म आ रही है.
पीयूष उसके मम्मे पर हाथ फेर कर बोला- अरे शर्माओ नहीं बताओ प्लीज.

शीना बोली- अरे वही है यार … जो आपका पर्सनल बॉडी पार्ट है.

लेकिन पीयूष कहां मानने वाला था, ऊपर से वायग्रा का असर भी अब उसकी बहन पर चरम पर था.

शीना धीरे से बोली- आपका लौड़ा कितना बड़ा है.
उसने ये कह कर अपने हाथों से अपनी आंखें बंद कर लीं.

पीयूष उसे अपनी बांहों में भरता हुआ बोला- मुझे सुनाई नहीं दिया, थोड़ा ऊंचा बोलो.
तभी शीना बोली- आपका लौड़ा.

पीयूष बोला- और ऊंचा बोलो.

तो शीना ने पूरा जोर लगाकर तीन बार बोला- आपका लौड़ा … आपका लौड़ा … आपका लौड़ा बहुत बड़ा है.
ये कह कर वो शर्माने लगी.

पीयूष बोला- हां यह हुई न बात.

अब पीयूष का हाथ शीना के मम्मों को जोर से दबाने लगे थे और शीना न चाहते हुए भी उसको मना नहीं कर पा रही थी.

पीयूष बोला- मेरे लौड़े को हाथ में लेकर कैसा लगा?
शीना बोली- बहुत अच्छा.
पीयूष बोला- तुमने तो मेरा लौड़ा हाथ में ले ही लिया है. अब तुम भी मुझे अपनी चुत को हाथ लगाने दो.

थोड़ी नानुकर करते करते शीना ने हां कर दी. तभी पीयूष ने बैठ कर अपनी बहन शीना की स्कर्ट के नीचे से उसकी पैंटी उतार दी और उसकी स्कर्ट उठा दी.

शीना नीचे से नंगी हो गई थी.
उसकी सफाचट चुत देख कर पीयूष एक पल के लिए भी न रुक सका. उसने सीधे ही अपनी बहन की बुर पर अपनी जीभ रख दी और जोर जोर से चाटने लगा.

शीना को इस हमले की उम्मीद न थी, वो मचल उठी. शीना मस्ताते हुए बोली- आह भैया यह क्या कर रहे हो … आह हटो न … वो गंदी जगह है आप अपना मुँह वहां से हटाओ.

लेकिन पीयूष कहां रुकने वाला था. ऐसी अनछुई बुर को वो किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने वाला था.
धीरे धीरे शीना का विरोध भी खत्म हो गया और वो अब जोर जोर से मादक सिसकारियां ले रही थी जो पूरे कमरे में गूंज रही थीं.

पीयूष ने अपनी पूरी जीभ वर्जिन बहन की बुर में डाल दी.
कुछ ही देर में शीना कि चुत का माल निकाल गया और वो भी बहुत ज्यादा निकला था.
पीयूष अपनी बहन की चुत का पूरा रस पी गया.

अब शीना भी बहुत ही तरोताज़ा महसूस कर रही थी.

पीयूष ने पूछा- मजा आया?
तो वो बोली- बहुत ज्यादा … बता नहीं सकती कि कितना मजा आया.

पीयूष बोला- तो अब मेरा भी मुँह में लेकर चूस दो.
शीना बोली- छी: … गंदा काम मैं नहीं करूंगी.

पीयूष बोला- अपना काम निलवा कर अब मना कर रही हो.
वो हंसने लगी.

तभी पीयूष ने अपना बीवी मुँह शीना के बूब्स पर रख कर उसके निप्पल चूसने लगा.

बहन पर गोली का असर तो अभी भी था. कुछ ही सेकंड में शीना फिर से गर्म हो गई. अब पीयूष ने धीरे से अपना लौड़ा निकाल कर उसके मुँह पर रख दिया तथा उसके होंठों पर झटके देने लगा, जिससे शीना और ज्यादा गर्म हो रही थी.

दोनों ही भाई बहन का रिश्ता भूल चुके थे.

लंड देख कर बहन भाई से बोली- भाई, आपका इतना बड़ा लंड मेरे मुँह में नहीं आएगा.

वो अपनी जीभ निकाल कर अपने भाई के लौड़े के टोपे पर जीभ चलाने लगी जिससे भाई का लौड़ा और ज्यादा टाइट हो गया.

शीना अपने भाई का लौड़ा थोड़ा थोड़ा करके अपने मुँह में लेने लगी थी.
पीयूष अपनी बहन के मुँह को बड़ी मस्ती में चोद रहा था और उसके मम्मों को दबा रहा था.

कुछ ही देर में मस्ती छा गई और अब शीना अपने भाई का लौड़ा ऐसे चूस रही थी जैसे वो कोई लॉलीपॉप चूस रही हो.

फिर पीयूष ने अपना लौड़ा शीना के मुँह से निकाल लिया और अब वो अपनी बहा की चुत की फांकों पर घिसने लगा.
बहन ने अपनी कुंवारी बुर का मुँह खोल दिया.
भाई अपनी बहन की चुत पर लंड टिका कर और ज्यादा रगड़ने लगा.

अचानक शीना को कुछ याद आ गया और वो बोली- नहीं भैया, यह सब नहीं … आपका लौड़ा बहुत बड़ा है और मेरी चुत अभी तक कुंवारी है. प्लीज़ नहीं … बहुत दर्द होगा.

पीयूष मदहोशी में था; वो बोला- कभी ना कभी तो लंड को अपनी बुर में लेना ही पड़ेगा … क्यों ना आज तुम अपने भाई का लंड ही ले लो. मैं भी अभी कुंवारा ही हूँ. हम दोनों की सील एक साथ टूटेगी … मजा आएगा.

शीना मन होते हुए भी मना करती रही.
मगर पीयूष ने अपना लौड़ा वर्जिन बहन की बुर की दरार में फंसा कर एक झटका दे मारा.

भाई का लंड चुत में घुसा तो बहन की चीख निकल गई- आह मर गई भैया … आह प्लीज छोड़ दो … मैं मर गई मम्मी रे … हाय मेरी चुत फाड़ दी … मेरी चुत फट गई.

लेकिन अब कहां कुछ होने वाला था.
पीयूष रुक गया और अपनी बहन के मम्मों को चूसने लगा. वो उसके होंठों को चूसने लगा.

धीरे धीरे बहन का दर्द कम हुआ, तो अचानक से भाई ने दूसरा झटका और दे मारा. इस बार भाई का आधा लौड़ा बहन की बुर में चला गया था.

शीना दर्द से छटपटाने लगी.

पीयूष रुका नहीं, उसने एक और झटका दे दिया और उसका पूरा लंड उसकी बहन की बुर के अन्दर चला गया.

शीना की जान निकल गयी वो लगभग बेहोश सी हो गई.
ये देखकर पीयूष थोड़े समय के लिए रुक गया.

एक दो पल बाद शीना के जिस्म में हरकत होने लगी और अब धीरे धीरे उसकी चीखें मादक सिसकारियों में बदल गईं.

अब वो खुद अपनी गांड उठा उठा कर अपने भाई के लंड से चुद रही थी.

पूरे कमरे में एसी की ठण्डक के बावजूद दोनों पसीने से लथपथ थे.
पीयूष जोरों से शीना की चुत को चोद रहा था.
शीना इस बीच दो बार झड़ गयी थी.

अब पीयूष के लंड का भी माल निकलने वाला था. उसने अपने धक्के तेज कर दिए और शीना की बुर में अपना वीर्य भर दिया.

लंड खाली करने के बाद पीयूष अपनी बहन के ऊपर ही लेट गया.
आधे घंटे तक दोनों को दीन दुनिया का कोई होश ही न रहा.
भाई का लंड बहन की चुत में ही घुसा रहा.

होश में आने के बाद शीना ने बोला- भैया मेरी जांघें दुख रही हैं … प्लीज़ अब अपना लंड बाहर निकाल लो.

जैसे ही पीयूष ने अपनी सगी बहन की बुर से लंड बाहर खींचा, तो पटाके चलने जैसी आवाज आयी. इस आवाज से दोनों हंस पड़े.

जब शीना ने अपनी बुर की तरफ देखा तो उसमें से भाई का वीर्य और खून की धारा बह कर सूख चुकी थी.
पूरी चादर खून से लथपथ हो चुकी थी

और उसकी टांगें हिल ही नहीं रही थीं.

पीयूष ने अपनी बहन को अपनी गोद में उठा लिया और उसे बाथरूम में लेकर आ गया.
गीजर चालू करके गर्म पानी से पीयूष ने बहन की बुर को साफ किया.

बहन बड़े प्यार से अपने भाई के हाथों से अपनी चुत साफ़ करवाती हुई देखती रही.

बाद में दोनों बिस्तर पर आकर नंगे ही चिपक कर सो गए.

चुदाई के तीन दिन तक शीना लंगड़ा कर चलती रही थी. ठीक होने के बाद चुदाई का सिलसिला चालू हो गया.

अब तो वो दोनों अपने फ्लैट में नंगी हालत में ही रहते. जब उन दोनों का दिल करता, चुदाई का मजा ले लेते.

बेटा ही बना माँ का पति

ये कहानी मेरी बुवाजी की है, और कहानी को बुवाजी ने ही लिखी है। मेरी बुवाजी के क्या ही बताइये वह दिखाने मे एक कामसीन औरत है..कहानी..

मैं कौशल्या देवी उम्र ३९ साल, चंडीगढ़ के रहने बाली हु, पति मेरे कनाडा में रहते है, एक बेटा है जो मेरे साथ रहता है, आज मैं आपको एक ऐसी कहानी कह रही हु, जिसको मैं आज 6 महीने से छुपा के राखी थी, पर आज मैंने सुबह ही तय कर लिया था की आपलोग के सामने अपनी इस कहानी को लेकर आई ताकि थोड़ा हल्का महसूस कर सकु.

ऐसी माँ रहे तो कौन नहीं चाहेगा…

ज़िंदगी कई सारे सुख और दुःख का मेल है, कई बार इंसान के साथ अच्छा होता है तो ख़ुशी होगी है और कभी कुछ गलत होता है तो दिल के कोने में एक राज होता है जिको सदा के लिए दफ़न हो जाता है और मरते दम तक इस बोझ को सहना पड़ता है, अब तो माध्यम है इंटरनेट का जिसपे हम अपनी बात को खोल सकते है, ना तो आपको पता है की मैं कौन हु, ना मुझे पता है की आप कौन है, इसलिए आज डर भी नहीं है की लोग और पडोसी क्या कहेंगे, मैंने अपना असली नाम नहीं बताया है इसलिए लिए माफ़ी चाहती हु, पर कहानी 100 % सच है.

मैं कई दिनों से चुदाई की कहानी प्यासी मालती भाभी के वेबसाइट पे पढ़ रही थी, तभी लगा की मुझे भी बतानी चाहिए, मैं ३९ साल की हु, और एक बैंक में जॉब करती हु, ज़िंदगी काफी अच्छी चल रही है, पति के पास नहीं जा पाती हु, क्यों की आपको पता है की वो विदेश में है, वो दो साल में एक बार आते है, सब सुख है पर सिर्फ सेक्स से बंचित थी, क्यों की दो साल में सिर्फ १ महीने के लिए ही मैं रंगरेलियां मना पाती थी, बाकी ज़िंदगी तो सुखाड़ थी, किसी और से भी अगर सेक्स सम्बन्ध बना लू तो सकाज का डर फिर बाद में वो इंसान मुझे किस तरह से उसे करेगा, ये सब सोच के मैं बहकते बहकते बची, पर मेरा जिस्म मुझे बहका रहा था, जब भी रात को सोती थी तो मुझे दूसरे मर्दो का ख्याल आता था, और मेरे तन बदन में आग लग जाती थी, कभी कभी तो सेक्स की जवाला ऐसे धधकती थी, मैं बाथरूम में जाके ठन्डे पानी का सहारा लेना पड़ता था चूचियाँ तन जाती थी, चूत गरम हो के पिघलने लगती थी, और सच तो ये था की ये चार साल जब से मैं 35 की उम्र पार की, मेरे शरीर का बनावट और अच्छा हो गया था, गांड गोल गोल चूचियाँ बड़ी पर सुडौल, पेट और कमर सुराही की तरह, गोरी तो हु ही, अपने आप की मेंटेन करती थी किसी चीज की कमी नहीं थी, स्पा और बिउटी पारलर हमेशा जाती हु, सच पूछिये तो आजकल मैं सेक्स बम हो गई थी.
मेरा बेटा जो २१ साल का है, अभी कॉलेज में जाता है, रणवीर कपूर से काम नहीं लगता है, जब वो सोलह साल का हुआ था तभी से मैंने उससे अपने साथ सुलाना बंद कर दिया था पर जब उसका बर्थडे अप्रैल 2015 में हुआ तो मैंने उसे गिफ्ट मांगने के लिए बोली, मैंने कहा मनपसंद गिफ्ट दूंगी इस बार तुझे, मैंने सोचा वो जो भी गाडी, मांगेगा मैं दूंगी, पर उसने मुझे इमोशनल कर दिया था. उसने कहा माँ मैं आपके साथ सोना काफी मिस कर रहा हु, मुझे आप अपने आप से अलग मत करो मेरा आपके सिवा और कौन है, मैं आपके साथ ज़िंदगी में कभी भी साथ नहीं छोड़ना चाहता, मैं रो पड़ी और कह दी ठीक है बेटा तू जो कहेगा होगा, उसके बाद से वो मेरे साथ ही सोने लगा, मेरे मन में कभी भी कोई ख्याल नहीं आया था, बस वो मेरे साथ सोने लगा था, देर रात तक बात करते और फिर दोनों एक दूसरे को गुड नाईट कहके सो जाते, पर एक दिन सब कुछ बदल गया था, रात के करीब २ बजे मेरी नींद खुली, मैंने देखा वो मेरे ऊपर चढ़ा हुआ था, और मेरी चूचियाँ दबा रहा था, मेरे होठ को चूस रहा था, मैं जैसे ही जगी उसको धक्के दे के नीच की, और मैंने दो तीन गालियां दे दी, और कहा मैं अभी फ़ोन करते हु तेरे डेड को, तुमने क्या किया है मेरे साथ, माँ बेटे के रिश्ते को तार तार कर दिया है, तुम्हे पता भी है की तुम क्या कर रहा था, माँ बेटा का एक रिश्ता होता है.

तो बेटा कहने लगा, माँ तुम मुझे मत रोको, मैं जवान हु, घर से बाहर मुह मारूं इससे बढ़िया है की आपको भी खुश कर दू और मैं खुद भी एन्जॉय करूँ, मैंने कहा हरामी है तुम, मैं सोची थी की तुम अच्छा इंसान बनेगा पर तू तो हरामी निकला, तो कहने लगा, मैंने क्या किया क्या मैं ही ऐसा करता हु, मेरे दोस्त बंटी, मेरा दोस्त रणवीर, उन दोनों के पापा भी कनाडा में रहते है, और वो दोनों भी अपने माँ की चुदाई करता है, बंटी तो अपने बहन को भी नहीं छोड़ता, तो बुराई क्या है, घर की बात घर में ही तो है.
एक मिनट के लिए तो ऐसा लगा की मैं कोमा में चली गई, फिर अपने आप को सम्हालते हुए बोली की पर मैं ऐसा नहीं कर सकती, तभी मेरा बेटा बोला अगर तुम ऐसा नहीं कर सकती तो आज से मैं आपका बेटा नहीं, सुबह ही मैं कही और चला जाऊंगा, मैं डर गई, मैंने उसको गले से लगा लिया और बोली बेटा तू जो कहेगा वैसा ही मैं करुँगी, मैं अपने बेटे को खोना नहीं चाहती थी, ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, मैं इसको बर्बाद नहीं करना चाहती थी, मैं सोची अगर मैं इसके साथ सेक्स नहीं करती हु तो मेरा बेटा मेरे हाथ से चला जायेगा और अगर राजी हो जाती हु तो बेटा तो बेटा रहेगा ही, पति भी बन जायेगा.

फिर मैंने उसको गले से लगा ली पर वो हैवान हो गया था, वो मेरी चूचियाँ पे टूट पड़ा और मेरे होठ को चूसने लगा, मैंने भी उसी नदी की धरा में बह गयी मैं भी उसको हेल्प करने लगी, और हम दोनों अपने अपने जिस्म पर के कपडे कब निकाल दिए पता ही नहीं चला, आज मेरे सामने एक जवान लण्ड मुझे सलामी दे रहा था, मेरे तन बदन में आग लग गई थी, मैंने झट से उसके लण्ड के अपने मुह में ले ली, और चूसने लगा वो मेरे सर के बाल को पकड़ के लण्ड को अंदर बाहर कर रहा था और कह रहा था आज से तू मेरी माँ नहीं बल्कि रंडी माँ है तू मेरी रखैल है, आज तो तुम्हे चोद के तेरे चूत फाड़ दूंगा, मैं भी कहा काम थी मैंने भी दो तीन गलियां दे दी, मैंने कहा तेरे लण्ड में इतनी ताकत है तो मुझे आज संतुष्ट कर के देख, अगर तू सच में मादरचोद है तो आज मैं देखना चाहती हु तेरे में कितना दम है.

इतना कहते ही हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गए, और वो मेरा चूत चाट रहा था और मैंने उसका लण्ड, लण्ड भी क्या था मोटा और करीब नौ इंच का, मेरे मुह में पूरा लण्ड नहीं आ रहा था, मैं उसके बदन को महसूस कर रही थी, उसके बाद वो फिर मेरे ऊपर आके मेरी चुचिया से अठखेलियां करने लगा, पर मैं और ज्यादा बर्दास्त नहीं कर सकती थी मुझे जल्द से जल्द लण्ड चाहिए था, मैंने कहा देर मत कर आज तू इस रखैल को खुश कर दे. वो मेरे पैर को अपने कंधे पर रखके अपना मोटा लण्ड मेरे चूत के बीच में रखा और एक ही धक्के में पूरा नौ इंच का लण्ड मेरे चूत में डाल दिया, मैं कराह उठी, आज तक मैं इतना मोटा लण्ड कभी भी नहीं ली थी, फिर क्या था, लैपटॉप ओन कर दिया और एक रसियन एडल्ट फिल्म लगा दिया, और मुझे उसकी स्टाइल में चोदने लगा, रात में करीब ६ बार उसने मुझे चोदा, और मैं भी चुदवाई, आज सुहागरात के बात पहली बार था जब ६ बार मैं चुदी. अब तो बेटा बेटा ना रहा, अब तो समझ ही नहीं आ रहा है क्या कहूँ, रोज चुदती हु, अपनी वासना की आग को शांत करती हु, पर ज़िंदगी बहुत ही अच्छी चल रही है.

सहेली के पति से चुदवाई

हेलो दोस्त मेरा नाम मालती है, मैं अपने पति को बहुत प्यार करती हु पर आज कल मुझे अपने सहेली के पति के साथ सेक्स सम्बन्ध बन गए है, क्या करू मेरा चूत आजकल मुझे दो लंड से चुदवाने की आदत सी हो गयी है, मैं बहुत ही सेक्सी औरत हु, मेरी उम्र २९ साल है, हॉट हु मेरी ब्रा की साइज ३६ है, आप सोच रहे होंगे की चूच बहुत बड़ा बड़ा होगा पर ऐसा नहीं है मेरा शरीर काफी सुन्दर है, निचे से ऊपर तक सेक्सी दिखती हु.

आज मैं आपको एक कहानी जो की बिलकुल सच्ची है मैं शेयर कर रही हु, ये सेक्स का रिश्ता जो नया नया बना वो मेरे सहेली का पति मनोज है, काफी सेक्सी इंसान है, गजब का सुन्दर है, मैं जब भी उसके घर जाती थी तो मेरा चूच मचलता था की कास ये चूचियाँ मनोज के हाथ से दबे जब भी मैं मनोज को देखती मेरी चूत में खुजली होने लगी, चुदवाने का मन करने लगता पर क्या करती मैं कामयाब नहीं हो पा रही थी, मैं चुदवाने के लिए तैयार थी पर मनोज मुझे उस निग़ाह से नहीं देखता था, पर मैं भी बहुत ही चुदक्कड़ हु, मैंने भी सोच लिया की लंड का मज़ा लेके ही रहूगी,

एक दिन मैं ऑफिस नहीं गयी थी मेरा पति भी पुणे गया था किसी काम से तो मैं सोची की आज मनोज को फ़ोन करती हु, क्यों की मेरी सहेली गाँव गयी थी क्यों की बच्चों की छुटियाँ थी, मनोज भी ५ दिन बाद जाने बल था ये बात मुझे पता था, तो मैं जानबूझ कर मैंने मनोज को फ़ोन किया और बोली मनोज जी, मुझे अर्जेंट बैंक का अकाउंट खुलवाना है, मैं फॉर्म भी ले आयी पर बैंक में किसी का खता हो उसका परिचय चाहिए, आपका तो अकाउंट उसी बैंक में है क्या आप परिचय दे देंगे बहुत भी जरूरी है, तो मनोज बोले हां हां क्यों नहीं मैं शाम को आपके घर के तरफ आऊंगा तो मैं फॉर्म में परिचय दे दूंगा. तो मैं बोल पड़ी नहीं नहीं मैं तो आपके अपार्टमेंट के पास ही हु, किसी काम से आई थी, आप कहे तो मैं आ जाती हु पांच मिनट के लिए, तो मनोज बोले ये तो और भी अच्छी बात है,
मैं तो सोच ली की आज मैं माँ को पिघला के ही रहूगी जब आग सामने होगी तो पिघलना पड़ेगा ही. मैं ५ मिनट में ही पहुंच गयी उन्होंने दरवाजा खोला और मैं अंदर आ गयी बहार बहुत गर्मी थी इस वजह से मेरे माथे पे पसीना था तो मनोज बोले अरे इतनी गर्मी में, मैंने कहा हां जरूरी था इस वजह से, मनोज के यहाँ बैडरूम में ही ऐ सी था तो बोले आप १० मिनट ऐ सी में ही बैठ जाओ, तो मैं बैडरूम में ही बैठ गयी वो फ्रीज़ से पानी निकलने गए, मैंने अपना दुपटा उतार के बगल में ही रख दी थी, मेरा जो सूट था उसमे से मेरी चूची आराम से दिख रही थी, दोनों गोल गोल चूचियाँ बाहर झांक रहा था, मनोज जैसे ही अंदर आया मैंने देखा की वो मेरी चूची को घूर रहा है मैंने भी थोड़ा और झुक गयी पानी लेने के बहाने की मनोज को चूचियाँ और ज्यादा दिखे, मैं समझ गयी, वो देख रहा था.

फिर वो मेरे सामने ही प्लास्टिक का चेयर लगा के बैठ गया मैंने पेट के बल लेट गयी और मुह उसके तरफ था, अब तो आप भी कल्पना कीजिये की मैं किस तरह दिख रही हूँगी, फिर मनोज ने कहा आज आप बड़े ही अच्छे लग रही हो, मैंने कहा आप भी तो आज सेक्सी लग रहे हो, और मैं मुस्करा दी, वो भी मुस्कुराया, फिर मैंने फॉर्म पे साइन करवाई, और बोली कैसा चल रहा तो मनोज ने कहा बीवी के वगैर क्या चलेगा, तो मैं बोल दी कहो तो मैं आज खाना बना देती हु, तो मनोज ने कहा नहीं खाना की चिंता नहीं है खाना के अलावा भी कुछ होता है खाना तो सब जगह मिल जाता है पर हरेक कुछ सब जगह नहीं मिलता, मैं समझ गयी वो क्या चाह रहा है, आज पहली बार वो थोड़ा लाइन दे रहा था मैं भी मौके का इंतज़ार कर रही थी, तो मैं ही बोल पड़ी अगर कुछ ऐसा है मेरे पास तो मैं दे सकती हु, तो मनोज बोल पड़ा, उसपे तो आपके पति का हक़ है, तो मैंने कहा की पति को क्या पता, इतना कह कर मैंने एक सेक्सी मुस्कान दी, वो मेरे पास खींचा चला आया और अपना होठ मेरे होठ पे रख के मुझे अपनी बाहों में भर लिया.
मैंने भी भरपूर मदद की होठ चुस्वाने में धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चूची पे गया और कस कस के दबाने लगा, मैं भी उसको चूमने लगी, बेड पे पैर फैलाकर लेट गयी वो मेरे ऊपर चढ़ गया, और कपडे के ऊपर से ही धक्क्के लगाने लगा और होठ चूस रहा था, फिर उसने मेरे एक एक कर के कपडे खोलने सुरु किया मैं उस दिन बड़ी भी जालीदार सेक्सी ब्रा और पेंटी पहनी थी, वो ब्रा का हुक खोलते ही, मुह से मेरे चूच की निपल को चूसने लगा फिर वो पुरे चूच पे जीभ फेरने लगा, मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था फिर मैंने कहा मनोज ऊपर का कर रहे हो असल मज़ा तो निचे है देखो, मनोज तुरंत ही मेरे पेंटी को निकाल दिया और दोनों पैर के बीच में बैठ के मेरा पैर फैला दिया और मेरे चूत को चाटने लगा, मैं मदहोश होने लगी, वो दोनों हाथ से चूच पकडे था और मुह कभी चूत के कभी नाभि पे, फिर मैं सेक्सी आवाज़ निकलने लगी, उसका लंड खड़ा हो गया था और काफी टाइट था, मैं भी पुरे लंड को अपने चूत में लेने के लिए बेक़रार थी.

आखिर वो समय आ गया जब वो पूरा लंड मेरा चूत में पेल दिया मैं कराह उठी, उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था, उसके मसल को मैं अपने चूच से सटाये थी, और जोर जोर से गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, वो भी मुझे चोदता रहा कभी उठा के कभी बैठा के कभी ऊपर चढ़ा के, कभी पैर ऊपर कर के, फिर मुझे पेट के बल लिटा दिया और अपने लंड पे थूक लगाया और मेरे गांड में एक से दो झटके में में पूरा लंड मेरे गांड में दाल दिया, फिर मुझे काफी देर गांड मरने के बाद फिर से चूत चोदा फिर सारा का सारा वीर्य मेरे मुह में डायल दिया, मैं उसके नमकीन वीर्य को चाट रही थी, उस रात को भी हम वही रुके और रात भर रंगरेलियां मनाई, आपको ये कहानी कैसी लगी जरूर रेट करे और फेस बुक पे शेयर करे आपको मेरी कसम आपको अपने लंड की कसम प्लीज.

चलती हुई बस में लंड का लोलीपोप कर के चूसा


हाय, मेरा नाम मालती है, मुझे लगा कि मुझे यहां अपना अनुभव लिखना चाहिए. कुछ कहने से पहले मैं आप सभी को खुद के बारे में थोड़ा सा बता देती हूँ.

मैं 27 साल की हूँ, मेरे मॉम डैड दोनों जॉब करते हैं, मैं अपने मॉम डैड की एकलौती पुत्री हूँ. हमारे घर पर सर्वेन्ट्स के अलावा सिर्फ मैं ही रहती हूँ.

फ्रेंड्स, मुझे लंड चूसना बहुत पसंद है … इतना ज्यादा पसंद है कि मैं हमेशा उसी के बारे में सोचती रहती हूँ.

हमारे पास पैसे की कोई कमी नहीं है, पर मुझे अकेलापन बहुत महसूस होता था. मेरे दिमाग में हर वक्त सेक्सी बातें ही घूमती रहती हैं.

ये सब कैसे शुरू हुआ था, वो मैं आपको किसी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी, पर अभी मैं बस वो सेक्स कहानी लिख रही हूँ कि मैंने अपनी इस लंड चूसने की कामना को पूरा करने के लिए क्या किया था.

मुझे हमेशा जान पहचान का कोई न मिल जाए, इसका डर रहता था; तो मैं अपने शहर में ऐसा कभी कुछ नहीं करती थी.

इसके लिए मैं अक्सर दूसरे शहर में कुछ दिन के लिए चली जाती थी.
किसी होटल में रुक कर मैं अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए हर सम्भव प्रयास करती और एन्जॉय भी कर लेती थी.

लंड चूसने से लेकर कभी कभी चुदाई करने तक की सारी हसरतों को पूरा करने के बाद मैं अपने शहर वापस आ जाती थी.

वैसे तो अकेली लड़की देख कर लड़के तो हमेश रेडी ही रहते हैं. लड़कों को पटाने के लिए तो मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती थी.

हालांकि मुझे चुदाई में इतना इंटरेस्ट नहीं था जितना लंड चूसने में मजा आता था.
मुझे जब भी कोई मस्त लौंडा दिखाई दे जाता था तो बस यही मन करता था कि उसे रोककर अपने घुटनों पर बैठ जाऊं; फिर उसकी पैंट खोल कर उसका लंड हाथों में लेकर अपनी जीभ से पूरी उसकी लम्बाई चौड़ाई नाप लूं.

जब मर्दाना लंड का सुपारा मेरी जीभ के पिछले हिस्से और मेरे गले को रगड़ता है तो मैं बता नहीं सकती कि कितना मजा आता है.

लंड रगड़ते रगड़ते उसका गर्म गर्म लावा मेरे गले में धार बनकर निकलता है, तो मेरी पूरी बॉडी ख़ुशी से मचल जाती है.

आज मैं आपको अपना एक छोटा सा किस्सा सुना रही हूँ.

एक बार मुझे जब किसी अनजान आदमी का लंड चूसने का बहुत मन कर रहा था तो मैंने एक लग्जरी ट्रेवल्स की बस में टिकट बुक किया.
लेकिन मैंने फ़ार्म में फीमेल ही जगह मेल भर दिया.

वो बस सेमी स्लीपर थी, उसमें सीट को पीछे फैला कर बैठने की व्यवस्था थी. मतलब आप बस की सीट को पीछे झुका कर पैर पसार सकते थे मगर बर्थ जैसी व्यवस्था नहीं थी कि लेट सकें.

चूंकि मुझे किसी के साथ सेक्स नहीं करना था. बस लंड ही चूसना मेरा मकसद था, तो मेरे लिए बस की इस तरह की सीट्स मुफीद थीं.

मैंने उस दिन घुटनों तक की स्कर्ट पहनी और ऊपर टी-शर्ट पहन कर रेडी हो गई.
अपने साथ एक छोटे बैग में एक चादर ले लिया जिसका फायदा मैं सेक्स कहानी में आगे बताउंगी.

रात को दस बजे की बस थी. रात का भी फायदा था कि ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ता था.

मैं बस में चढ़ी और अपनी सीट पर बैठ गयी.
मेरे साथ वाली सीट अभी खाली ही थी.

मैंने विंडो साइड बुक की थी ताकि मैं थोड़ी छिपी रहूँ और लाइट ऑफ होने के बाद किसी को कुछ पता न चले.

बस चल पड़ी थी … एक घंटे बीत जाने के बाद भी कोई नहीं आया तो मैं थोड़ी मायूस हो गयी.

फिर बस एक जगह रुकी खाने के लिए.

आधे घंटे के बाद बस वापस चली और लाइट्स वगैरह फिर से बंद हो गईं.

मुझे लगा कि मेरा आज का प्लान फेल हो गया.

पर दस मिनट आगे जाने के बाद बस रुक गई और एक लड़का बस में चढ़ गया.
उसकी सीट वही मेरे पास वाली थी.

पहले मुझे देखकर वो थोड़ा रुक गया … और उसने फिर से अपनी सीट चैक की.

वो मुझसे बोला- आपकी सीट यही है क्या?
मैंने कहा- हां, गलती से ये मैंने बुक कर ली थी और जेंडर सिलेक्ट नहीं किया था. मुझे कोई दिक्कत नहीं है, आप बैठ जाइए.

अब वो बैठ गया और उसने बैग रख कर खुद को सीट पर एडजस्ट किया.

उसने सीट को थोड़ा पीछे पुश कर दिया.

इससे मुझे लगा कि क्या करना चाहिए, ये तो सोने की जुगाड़ बना रहा है.

मैंने उससे बातें करना शुरू कर दीं.
फिर उसे ऐसा दिखाया कि मुझे थोड़ी ठंड लग रही है. मैंने अपने बैग से चादर निकाल कर ओढ़ ली.

बस की लाइट्स पूरी ऑफ थीं, तो मैंने अपना स्कर्ट घुटने से थोड़ा ऊपर किया और उसके घुटने को टच कर लिया.

अब लड़के तो लड़के होते हैं, उसने जैसे ही मेरा घुटना देखा … तो बस देखने लगा.
वो मुझे देखने लगा तो मैं सोने का नाटक करने लगी.

उसने मेरे घुटने को अपने पैर से छुआ और हाथ से थोड़ा सहलाया.
मैं समझ गई कि मेरा काम हो गया.

वो मेरे पैर पर ऊपर को आने लगा.
मेरी जांघ एकदम गर्म थी. मेरे दिमाग में सेक्स जो घूम रहा था.

वो ऊपर जाने लगा.

दो मिनट के बाद मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे रोक दिया.
वो घबरा गया.

मैंने उसकी तरफ देखा, तो उसने सॉरी बोला.
मैंने कहा- सॉरी मतलब?

वो बोला- व्वो म…मैं अपनी टांग खुजा रहा था, इसलिए मेरा हाथ आपकी टांग को लग गया.
मैंने कहा- बहुत खुजली हो रही है क्या?

वो मेरी बात से डर गया और बोला- सॉरी मेम … मैं सच कह रहा हूँ.
तभी मैंने उससे कहा कि चलो मान लेती हूँ कि तुम खुजली मिटा रहे थे. अब अपनी खुजली मिटा रहे हो, तो मेरे पैर को भी खुजला दो.

उसने मेरी बात सुनी तो मेरी तरफ अपलक देखने लगा.

मैंने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो … अब खुजाओ भी!
वो कुछ नहीं बोला और सीधा बैठ गया. उसे लगा कि मैं उसको धमकी दे रही हूँ.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी जांघ पर रख कर कहा- खुजाओ न … रुक क्यों गए?

वो मेरी तरफ फिर से देखने लगा. शायद उसे भरोसा ही नहीं हो रहा था कि मैं उससे ये सब करने के लिए कह रही हूँ.

वो मेरी जांघ पर हाथ चलाने लगा और धीरे से बोला- आप वास्तव में ऐसा करवाना चाहती हैं?
मैंने कहा- कैसा?

वो फिर से सकपका गया मगर इस बार उसने कुछ साहस दिखाया और अपनी उंगली को मेरी पैंटी के किनारे से रगड़ते हुए कहा.

वो- अन्दर की खुजली भी शांत करवाना चाहती हो?
मैं हंस कर बोली- तुम सिर्फ उतना करो, जितना कहा है.

वो मेरी जांघ पर हाथ फेरने लगा.

उसके हाथ मेरी चुत तक जाने लगे थे.
तो मैंने उससे कहा- ज्यादा अन्दर मत जाओ … पर मैं तुम्हें थोड़ा एन्जॉय करा सकती हूँ.

वो मेरी बात से खुश हो गया.

मैंने अपनी चादर उसके पैर पर फैला कर उसके लंड को पैंट के ऊपर से ही छुआ. उसका लंड थोड़ा हार्ड हो गया था.

मैं उसके लंड को सहलाने लगी.

फिर जब लंड टाइट हो गया तो मैंने उसकी ज़िप खोली.
इधर इसके हाथ मेरे बूब्स को सहलाने दबाने लगे थे

उसके बैठने की वजह से मैं उसका लंड बाहर नहीं निकाल पा रही थी.

उसने अपनी कमर को कुछ ऊपर किया तो लंड बाहर निकल आया.
मैं उसके लंड को हिलाने लगी और चादर के अन्दर मेरे हाथ चलने लगी.

बस में अंधेरा बहुत था, तो ये सब आराम से हो रहा था. रात के बारह बज चुके थे तो सब सोये पड़े थे.

मैंने उससे कहा कि तुम बाहर देखते रहना … कोई देख तो नहीं रहा.

इतना कह कर मैं उसकी गोद में झुक गयी और लंड को मुँह में ले लिया.
वो बहुत ही उत्तेजित हो गया था तो बीस चुप्पे लगाने में ही उसके लंड ने लावा उगल दिया.
मैं पूरा लंड रस पी गयी.

पर अभी मेरा मन नहीं भरा था.
मैं उसके लंड को झड़ जाने के बाद भी लगातार चूसती ही रही.

उसका लंड ढीला पड़ गया था मगर कुछ मिनट चूसने के बाद उसमें फिर से तनाव आने लगा.

मैंने उसका लंड पूरा मुँह में भर लिया और गले और जीभ से उसका सुपारा ऐसे दबाने लगी, जैसे मैं लंड निगलना चाहती हूँ.

उसे तो जन्नत का मजा आ रहा था.

इस बार उसे झड़ने में पांच मिनट लगे और मुझे वो मजा मिला जो पिछली बार में नहीं मिला था.
उसके वीर्य की धार मेरे गले में आने लगी थी.

अब मुझे मजा आ गया था और मैं उसके लंड को तब तक चूसती रही, जब तक वो दोबारा छोटा नहीं हो गया.

फिर मैंने कहा- अब बस मुझे सोना है.

मैं खिड़की से सर टिका कर सोने लगी लेकिन वो बस कभी मेरी जांघों पर, तो कभी मेरे मम्मों को दबाता रहा.
मगर जैसे ही वो चूत के पास जाने की कोशिश करता, मैं उसका हाथ रोक देती क्योंकि मुझे वो सब नहीं करना था.

फिर रात को तीन बजे उसने मुझे जगाया और बोला- तुम मेरी गोद में बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- यार मेरा लंड खड़ा हो गया है और मेरा चुदाई करने का बहुत मन कर रहा है.
मैंने उसके लौड़े को हाथ लगाया तो सच में खड़ा था.

मैंने उससे कहा- मैं फिर से चूस देती हूँ … मगर उससे ज्यादा कुछ नहीं.
उसने कहा- ओके.

मैंने इस बार उसके लौड़े और अच्छे से चूसा.
इस बार उसे और मुझे बहुत मजा आया.

उसने मेरे मुँह को थोड़ा ऐसे चोदना शुरू कर दिया था जैसे चूत चोदते हैं.
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

इस बार उसे लंड का लावा निकालने में देर भी लगी.

मैंने उसका लंड पूरा मुँह में भरकर जीभर के चूसा. उसके झड़ने पर मैंने उसका पूरा रस भी पिया.

अब तक सड़क पर थोड़ा थोड़ा उजाला दिखने लगा था. हम दोनों ठीक होकर बैठ गए.

सुबह उसका स्टॉप जल्दी आ गया और वो उतरने से पहले मुझसे मेरा मोबाइल नंबर मांगने लगा दोबारा मिलने के लिए और अपने साथ चलने के लिए बोलने लगा.

मैंने उससे कहा- बस नमस्ते … ये हमारी पहली और आखिरी मुलाकात है. मुझे तुमसे अब कभी नहीं मिलना है. यही तुम्हारे और मेरे लिए ठीक है.

वो बहुत देर तक रिक्वेस्ट करता रहा.
फिर उसका स्टॉप आने पर वो उतर गया.
उसे लगा कि मैं उसकी बात नहीं सुनूंगी.

वो मायूस होकर नीचे उतर गया और बाय बोल कर चल दिया.

दोस्तो, चलती बस में मेरा लंड चुसाई का अनुभव यही था. आप सबको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. ईमेल से बताना.

आप नीचे मुझे कमेंट्स लिख सकते हैं. अगर आपका अच्छा रिस्पोंस मिला, तो मैं अपनी वो कहानी लिखूंगी कि ये मेरा जुनून कैसे शुरू हुआ.
तब तक के लिए बाय.

लवर और आशिक संग 3 सम चुदाई-1

हाई फ्रेंड्स, मेरा नाम मालती है. मेरी सेक्स कहानी में आप सबका स्वागत है. उम्मीद करती हूं कि आप लोग अच्छे और स्वस्थ होंगे.

आप लोगों ने मेरी पिछली सेक्स कहानी में पढ़ा था कि किस तरह हमारे डायरेक्टर के युवा बेटे राजीव ने मुझे गर्म करके चोदना शुरू करके खुद ठंडा हो गया था.

मुझे उस समय तो बहुत गुस्सा आया था लेकिन मैं शांत हो गयी. क्योंकि राजीव का वो फ़र्स्ट टाइम सेक्स था. उसके बाद से राजीव मुझे बराबर ही चोदने लगा था. उसे जब भी मौका मिलता, वो मेरी ढंग से चुदाई करता था.

अब वो फ़ोटो शूट के दौरान मेरे से खेलने भी लगा था. उसका जब भी दिल करता, वो मुझे छेड़ देता और मैं भी उसका साथ बराबर दे रही थी. वो अब मुझ पर पहले से ज्यादा पैसा लुटाने लगा था. हालांकि मुझे ये बात पसन्द नहीं थी, फिर भी मैंने सोचा कि लुटाने दो, मेरे बाप का क्या जा रहा है.

वो मेरे पर बिल्कुल लट्टू हो चुका था. वो मुझे कहीं भी अकेला नहीं छोड़ना चाहता था, हमेशा मेरे पास रहने की कोशिश करता था. मैं कहीं भी जाती, तो वो साथ रहता. मैं जब भी शॉपिंग जाती, वो मेरे साथ ही रहता था और मुझे अपनी पसंद की ड्रेसेस दिलाता, अपनी पसंद के अंडरगारमेंट्स दिलवाता और कभी कभी तो वो मेरे साथ ट्रायल रूम में घुस जाता था.

धर जब तक वो मुझे अच्छे से मसल कर मेरे चूचे नहीं चूस लेता, बाहर ही नहीं निकलता था. इस तरह से वो हमेशा ही शॉपिंग के दौरान मेरे से खूब खेलता. मैं भी उसका साथ देती थी क्योंकि मुझे भी ऐसी हरकतें बहुत पसंद थीं.

फिर आप लोगों को तो पता ही है कि ये सब हरकतें मैं कॉलेज टाइम में खूब किया करती थी. इसीलिए मैं राजीव के साथ जब भी रहती, मुझे ऐसा लगता कि मैं अभी कॉलेज लाइफ जी रही हूँ.

अब मैं और राजीव बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे.

धीरे-धीरे उसे मेरे भाई के बारे में पता चला कि मैं अपने भाई से चुदती हूँ. अब वो मेरे घर पर भी आ जाता. उसने वो मेरे भाई से दोस्ती कर ली. कुछ दिनों में मेरे भाई को भी ये बात मालूम हो गयी कि मैं राजीव से भी चुदती हूँ.

ये सब खुलासा होने के बाद मेरा भाई और राजीव आपस में बिल्कुल फ्रेंक हो चुके थे. मेरी चुदाई के बात करते हुए वे दोनों आपस में बिल्कुल बेशर्मी से बात करते थे. मैं भी उनकी बातों का मजा लेती रहती. कुछ ही समय में हम तीनों आपस में बिल्कुल फ्रेंक हो चुके थे. अब जहां भी मैं जाती, वो दोनों मेरे साथ ही जाते और हम तीनों हर जगह बहुत एन्जॉय करते.

पहले एक मर्द मेरे साथ खेलता था और अब दोनों मेरे साथ हर जगह खेलने लगे थे. मुझे भी अब दो के साथ खेलने में मजा आने लगा था. उनके साथ चाहे मैं पार्क में होऊं या मॉल में … या किसी पब्लिक प्लेस में … वो लोग मेरे साथ हरकत करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते.

मुझे तो सेक्स एडवेंचर पहले से बहुत पसंद था. ऐसी ही मस्ती भरी जिन्दगी को मैं जी रही थी. हालांकि अभी तक मैं उन दोनों के साथ एक ही बिस्तर पर एक साथ नहीं चुदी थी. इसकी चर्चा वे दोनों अक्सर करते रहते थे कि एक साथ कबड्डी खेलने का प्लान बनाओ. मगर मैं मना कर देती थी.

मेरी एक फैंटेसी थी कि मैं अपने जीवन में एक साथ कभी ग्रुप सेक्स करूं तो खुले आसमान के नीचे करूं.

फिर एक दिन उन दोनों ने बिना मेरे से पूछे ही थ्री-सम का प्लान बना लिया. प्लान बनाने के बाद उन दोनों ने मुझे बताया. मैं तो सुनकर बहुत खुश हो गयी थी कि बहुत दिनों बाद थ्री-सम करने का मौका मिलेगा. लेकिन मुझे थोड़ा ड्रामा करना था.

मैं उन दोनों से थोड़ी गुस्से में बोली- तुम लोग पागल हो गए हो क्या? मुझे तुम लोग समझ क्या रखे हो?

तो मेरा भाई मेरे पास आया और मेरे गालों को चूमते हुए बोला- यार दी, हम दोनों का एकाउंट तो तुम्हारे बैंक में है ही … बस हम दोनों एक साथ जॉइंट एकाउंट खोलना चाहते हैं.
मुझे उसकी बात पर अन्दर से बड़ी हंसी आ रही थी, मगर मैं शांत रही.

मैं कुछ बोलती कि इतने में राजीव मेरे दूसरी साइड में बैठ गया और मेरे दूसरे गाल पर किस करते हुए बोला- मालती जी मान जाइए ना … कसम से आपको भी बहुत मजा आएगा.

मैं तो मन ही मन खुश ही हो रही थी … सो बस कुछ नहीं बोली.
इतने में मेरा भाई बोला- यार दी मान भी जाओ ना. मैं भी तुम्हें चुदते देखना चाहता हूँ.
ये कह कर वो मेरी चुचियों को दबाने लगा.

मैं बोली- साले तू तो बहनचोद था ही … और अब अपनी बहन को दूसरों से चुदते भी देखना चाहता है.
इतने में राजीव ने मेरी चुचियों को दबाते हुए कहा- मैं दूसरा थोड़ी ही हूँ. मैं तो इसका जीजा हूँ.

इतना कहते ही मेरी हंसी छूट गई … और हम सब हंसने लगे.

फिर मैं बोली- ठीक है, जो तुम लोगों को अच्छा लगे.
इतना सुनते ही वो दोनों खुश हो गए और मेरे गालों और चुचियों पर अपनी खुशी जाहिर करने लगे.

मैं दोनों को अलग करते हुए बोली- लेकिन मेरी एक शर्त है.
वे दोनों एक साथ बोले- क्या शर्त है?
मैं बोली- मैं घर में थ्री-सम नहीं करवाऊँगी.
राजीव बोला- कोई बात नहीं मालती जी, हम होटल चलेंगे.

इतने में मेरा भाई बोला- क्यों न हम तीनों आउट ऑफ सिटी चलते हैं.
मैं उसकी तरफ देख कर बोली- किस सिटी में?
भाई- जिस सिटी में चलने के लिए तुम बोलो.
मैं बोली- ओके तुम लोगों की जहां मर्ज़ी हो, चलो … लेकिन मैं ओपन एयर में सेक्स करवाऊंगी.

इतना सुनते ही दोनों के मुँह खुले के खुले रह गए.

मैं बोली- क्या हुआ … फट गई क्या?
इतने में राजीव बोला- नहीं अभी फटी नहीं … फाड़ना है. मालती जी आपका बहुत बढ़िया प्लान है … आपको इस तरह से खुले में चोदने में बड़ा मज़ा आएगा.
फिर मेरा भाई बोला- दीदी यार इसमें रिस्क बहुत है. अगर किसी ने देख लिया, तो लेने के देने पड़ जाएंगे.
मैं बोली- कुछ नहीं होगा … अगर किसी ने देख लिया, तो तेरा एक जीजू और बढ़ जाएगा.

इतना सुनते ही राजीव और मैं हंसने लगे.

मेरा भाई बोला- तो ठीक है … फिर फ़ोर-सम का मजा भी आ जाएगा, चलो मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

मैंने उसके मुँह से फ़ोर-सम की बात सुकर उसे तरेरा, तो वो भी हंसने लगा.

अब हम लोगों ने मिलकर गोवा का प्लान बनाया. फिर तय की हुई तारीख़ को हम तीनों लोग गोवा पहुंच गए.

मैंने उन दोनों के साथ रास्ते में बहुत मस्ती की थी, जिसे मैं अपनी किसी दूसरी सेक्स कहानी में बताऊंगी कि मैंने उन दोनों के साथ क्या-क्या और किस तरह से मस्ती की.

हम लोग 11 बजे रात में गोवा पहुंच गए. वहां राजीव ने एक ही रूम बुक किया था. हम तीनों होटल के कमरे में आ गए. वो दोनों उसी समय मुझे चोदना चाह रहे थे, लेकिन मैं बुरी तरह थक चुकी थी … इसलिए मैं मना करके सो गयी. मेरे एक तरफ राजीव और दूसरी तरफ मेरा भाई लेट गया. वे दोनों मेरे अंगों के साथ खेलने लगे. मैं इतनी थकी थी कि मैं लेटते ही नींद के आगोश में चली गयी.

जब सुबह उठी, तो देखा कि उन दोनों ने मेरे पूरे शरीर पर अपने वीर्य की बौछार की हुई थी. मैं उनके वीर्य को देखते हुए मदमस्त हो गई थी. फिर मैंने उन दोनों को उठाया और नाश्ते का ऑर्डर कर दिया.

जब तक हम सब फ्रेश हुए. तब तक नाश्ता कमरे में ही आ गया था.

हम तीनों ने नाश्ता किया और बीच के लिए निकल पड़े. उस दिन मैंने होटल से ही एक ढीला सा वन पीस पहना था. बीच पर पहुंचते ही मैं उस वन पीस को उतार दिया और अब मैं एक छोटी सी बिकनी में रह गई थी. उन दोनों की मस्त और कामुक निगाहें मुझे गर्म करने लगी थीं.

फिर बीच पर हम लोगों ने ढेर सारी मस्ती की. जितने भी लोग हमारे आस-पास थे, वे सब हम तीनों को ही देख रहे थे. कुछ लोग तो हम लोगों की मस्ती की वीडियो भी बना रहे थे. कितने ही लड़कों ने तो मेरे साथ सेल्फी भी ली. मैं बहुत खुश थी.

हम तीनों ही वहां दिल खोलकर मस्ती कर रहे थे. राजीव और मेरा भाई मेरे साथ खुलकर रोमांस कर रहा था. कभी वो दोनों मुझे किस करते, तो कभी मेरे मम्मों से खेलते, तो कभी गांड पर चपत लगा देते. इस सबसे मैं भी काफी उत्तेजित हो रही थी.

फिर हम लोगों ने बोटिंग के दौरान भी खूब मस्ती की. मैं ऐसा अनुभव पहली बार ले रही थी. मेरा दिल तो कर रहा था कि ये दोनों मुझे यहीं ढंग से चोद दें … लेकिन वहां चुदना ठीक नहीं था.

हम लोग कामुकता की सारी हदें पार कर चुके थे. हम तीनों एक दूसरे में मग्न हो गए थे … लेकिन हम लोगों की ऐसी हरकतें कुछ लोगों को पसंद नहीं आईं. इसलिए कुछ लोग हम लोगों के पास आए और बोले- अगर आप लोगों को चुदना है … तो होटल जाकर चुदो ना. यहां और भी लोग हैं.

मेरा भाई उनसे झगड़ने लगा.
फिर मैंने उसे शांत करवाया और कुछ देर बाद हम तीनों होटल के कमरे में चले गए.
हम अभी तक थ्री-सम नहीं कर पाए थे. फिर हम लोगों ने प्लान बनाया कि रात में बीच के किनारे खुली हवा में चुदेंगे. ऐसा सोचते ही आगे का प्लान बन गया. चूंकि बीच की मस्ती से हम तीनों ही काफी थक गए थे, इसलिए हम लोगों ने कुछ देर रेस्ट किया. फिर दो घंटे बाद उठ कर आस-पास की जगहों पर घूमने चले गए.

हमारा बीच पर रात के 9 बजे जाने का प्लान बना था. अभी करीब 8:30 बज रहे थे.
राजीव बोला- मालती जी तैयार हो जाइए.
मैं बोली- तैयार क्या होना है. वहां जाकर तो चुदना ही है ना.

इतने में मेरे भाई ने मेरी बगल में बैठते हुए मेरे हाथ में एक पैकेट थमा दिया.

मैं बोली- इसमें क्या है?
मेरा भाई बोला- खुद खोलकर देख लो.

जैसे ही मैंने पैकेट खोला, तो उसमें से एक छोटी सी मिडी ड्रेस निकली.

मैं मज़ाक करते हुए बोली- इतनी बड़ी क्यों ले आए?
मेरा भाई भी मज़ाक करते हुए बोला- सही बोल रही हो दी, कुछ ज्यादा ही बड़ा साइज़ आ गया है.
राजीव हंस कर बोला- मालती जी आप चेंज कर लीजिए, फिर हम लोग चलते हैं.
मैं बोली- इसकी ब्रा पेंटी कहां है?
मेरा भाई कुटिल मुस्कान देते हुए बोला- मैं तो तुझे नंगी ही ले जाने को सोच रहा था. वो तो राजीव ने जबरदस्ती की, तो ले लिया.

मैं हंस दी और ड्रेस लेकर बाथरूम के तरफ बढ़ी.

तभी मेरे भाई ने मेरी कलाई पकड़ते हुए कहा- यहीं बदल लो रानी … हमसे क्या छुपाना.
मैं मुस्कुराते हुए बोली- थोड़ी सब्र करो … इंतजार का फल मीठा होता है साले बहनचोद.
उसको प्यार से गाली देते हुए और हंसते हुए मैं बाथरूम में घुस गई.

मैंने बाथरूम में जाकर ड्रेस चेंज की और खुद को आईने में देखकर मेरे मुँह से आह निकल गयी कि कोई इतनी हॉट कैसे हो सकती है. अगर मैं ड्रेस की बात करूं तो ऐसी मिडी आप लोगों ने हॉलीवुड की फिल्मों में देखी होगी. इस बदन से चिपकी हुई मिडी में मेरे आधे से ज्यादा चूचियां बाहर थीं. और नीचे पूरी गांड भी नहीं ढक पा रही थी.

अगर मैं दिन में ये ड्रेस पहन कर निकलती, तो लोग मुझे देख कर छोड़ते ही नहीं.

तभी मैं बाथरूम से बाहर निकली. मुझे देखते ही दोनों की आंखें फ़टी की फटी रह गईं और दोनों झट से मेरे पास आ गए.
लेकिन मैंने दोनों को दूर कर दिया और कहा- अभी कुछ नहीं … जो करना है बीच पर करना.

तभी मेरा भाई बोला- यार दीदी गजब की माल लग रही हो. अगर मेरी बहन ना होती, तो पक्का मैं तुमसे शादी कर लेता.
राजीव बोला- हां यार, तुम्हारी तो बहन है. मगर मैंने तो कितनी बार इससे शादी के लिए बोला है, लेकिन ये मानती ही नहीं है.
उन दोनों की बात सुनकर मैं बोली- ये भी सोचो कि तुम लोग खुशनसीब हो, जो बिना शादी किए शादी के सारे फायदे ले रहे हो.

मेरी बात सुनकर वे हंसने लगे.

फिर हम लोग जाने के लिए तैयार हो गए थे. तभी अचानक तेज बारिश होने लगी. पहले तो हम लोगों ने सोचा कि थोड़ी देर में बारिश खत्म हो जाएगी. लेकिन बारिश तो धीरे धीरे और तेज होती जा रही थी. मैं अब मायूस होने लगी थी.

राजीव बोला- मालती जी बारिश बहुत तेज है … रूम में ही थ्री-सम कर लेते हैं.
मगर मैं बोली- नहीं … बिल्कुल नहीं. अगर थ्री-सम करना है, तो ओपन में ही करूंगी.

इतने में मेरा भाई मेरे पास आया और मेरी गांड पर चपत मारते हुए बोला- मेरी बहना तुझे ओपन सेक्स ही करना है ना!
तो मैं उसके गालों को प्यार से उमेठते हुए बोली- हां मेरे चोदू भैया राजा.
वो हंस कर बोला- कोई दिक्कत नहीं है. … आज तो खुले में ही तेरी चूत और गांड फाड़ेंगे. आज तुझे ओपन सेक्स बारिश में करेंगे.
मैं बोली- वो कैसे?
मेरा भाई बोला- होटल के टैरेस पर चलते हैं.

मैं बोली- नहीं … वहां कोई आ गया तो!
मेरा भाई हंसते हुए बोला- तो क्या हुआ … मेरा एक जीजा और बढ़ जाएगा.
इतने में राजीव भी हंसते हुए बोला- बिल्कुल सही बोल रहे हो भाई, तेरी बहन को बारिश में चोदने में मजा आ जाएगा.

मैं भी उन लोगों की बातों को सुनकर रोमांचित हो गई. इतने में दोनों मुझे मनाने लगे. मेरी भी चूत में आग लगी थी, इसलिए मैं तुरंत मान गयी और हां कर दी.

तभी मेरे भाई और राजीव दोनों ने ही मुझे जकड़ लिया और चुम्बनों की बरसात कर दी. वे दोनों मेरे मम्मों, गांड, चूत के साथ खेलने लगे.

मैं बोली- रुको भी … पहले छत पर तो चलो.
इतने में मेरा भाई बोला- धीरज रखो मेरी बहना रानी … आज की चुदाई तुम हमेशा याद रखोगी.

वे दोनों मुझे फिर से चूमने लगे. मेरा भाई मेरे होंठों और गालों को चूम रहा था और बीच बीच में मेरी गांड को दबा रहा था. दूसरी तरफ राजीव मेरी अधनंगी चूचियों को मेरी मिडी के ऊपर से ही चाट रहा था … काट रहा था.

पता नहीं मुझे तो बस ऐसा लग रहा था कि आज मैं अपने जीवन की इस बहुप्रतीक्षित कल्पना के न जाने कितने करीब आ गई हूँ … मैं तो बस इस सबका लुफ्त उठाए जा रही थी. वो अपने हाथ से मेरी मिडी उठा कर मेरी चूत में उंगली कर रहा था, जिससे मैं गर्म होने लगी थी और दोनों का साथ दे रही थी. मैं कामवासना में बिल्कुल खो चुकी थी.

वो दोनों मेरे साथ क्या कर रहे थे … ये मुझे समझ में नहीं आ रहा था. बस मैं वासना के सागर की गहराई में गोते लगा रही थी. दो जवान लड़कों से ऐसे मैं पहली बार चुद रही थी. मैं इसके एक एक क्षण को महसूस करना चाहती थी. इसलिए मैं भी उन लोगों का जोश बढ़ाने के लिए दोनों के कभी होंठों को चूमती, तो कभी गाल. साथ ही मैं अपने दोनों हाथ उन दोनों की पैंट में डालकर उनके खड़े होते लंड मसलने लगी.

उनके लंड तो पहले ही विशाल रूप लिए हुए थे. मेरे हाथ लगते ही उनके लंड और भी ज्यादा अकड़ गए. हम तीनों एक दूसरे में बिल्कुल ही खो चुके थे. हम लोग भूल चुके थे कि हमें छत पर जाना था. मैं तो जैसे सातवें आसमान की सैर कर रही थी.

तभी मुझे अचानक याद आया की हमें तो ओपन सेक्स करना है. तभी मैंने ना चाहते हुए भी उन दोनों को अपने से अलग किया और बोली- सब कुछ यहीं करोगे क्या?
दोनों अलग होते ही मुझे खा जाने वाले नज़रों से देख रहे थे.
मेरा भाई गुर्राते हुए बोला- तो चल फिर आज तेरी यह तमन्ना भी पूरी कर देता हूं.

फिर हम रूम लॉक करके ऊपर छत पर आ गए. ऊपर जाने तक लिफ्ट में उन दोनों ने मिलकर मुझे बुरी तरह से मसल कर रख दिया था. मैं अब तक काफी गर्म हो गयी थी … बस यूं समझिए कि चुदने के लिए एकदम तैयार थी.

मेरी थ्री-सम चुदाई की कहानी का अगला पार्ट चुदाई से भरपूर होगा. आप पढ़ने से ना चूकिए. बस अभी एक प्यारी से मेल लिख कर मुझे और गर्म कर दीजिएगा, जिससे मैं थ्री-सम सेक्स करते अपनी चुत में आपका लंड महसूस कर सकूं.

आपकी चुदक्कड़ लेखिका सिर्फ आपकी प्यारी मालती.

मुझे मेल या इंस्टाग्राम पर जरूर बताइएगा.

दीदी के घर जीजू से चुदा बैठी

जीजा साली की चुदाई कैसे हुई? पढ़ें इस कहनी में कि जब मैं अपनी दीदी के घर रहने गयी तो जीजू ने कैसे मेरी चूत की चुदाई की जम कर! तो चलिए शुरू करते हैं जीजा साली के प्यार कहानी को।

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मालती है मेरी लम्बाई लगभग पाँच फुट है और मेरे बदन का साइज़ 32-30-32 है. मेरा रंग बहुत गोरा है.

दोस्तो, स्तन के आपरेशन के दो महीने बाद कुछ दिन के लिए मैं दीदी के पास रहने उनके ससुराल आ गयी.
मेरी दीदी की शादी दूसरे शहर में हुई है.

वैसे तो मम्मी मुझे भेजती नहीं है इसलिए कि कहीं मालती की सील ना टूट जाये क्योंकि दीदी के घर में किराये पर कमरा लेकर पढ़ने वाले लड़के रहते हैं.

जब मैं दीदी के यहाँ जाती तो वह सब मुझे देखते रहते या बात करने की कोशिश करते!

दीदी का घर दो मंजिला है. ऊपर दीदी जीजू रहते हैं और नीचे दीदी के एक देवर रहते हैं. कुछ लड़के किराये पर कमरे लेकर रहते थे.

अगर मैं सामने पड़ जाती तो कोई लड़का मुझसे बोल भी लेता था.
पर ये सब दीदी को भी पसन्द नहीं था.
इस बात की चिंता दीदी को भी थी कहीं कोई लड़का नीलम को पटा कर चोद ना दे।

मेरी दीदी कहती है कि आजकल के लड़कों का प्यार तो बस चूत पर जाकर खत्म होता है. वे तो सिर्फ चूत के प्यासे होते हैं।

वैसे मैं इससे पहले एक दो बार गर्मियों में दीदी के पास रहने आयी थी. मेरा मन होता है कि मैं दीदी के पास रहूं.
फिर भी मम्मी मना कर देती हैं.
इसी बात पर कभी-कभी मम्मी से मेरी लडाई भी हो जाती थी।

दोस्तो, अब मैं आपको अपने जीजू के बारे बता दूँ.
उनकी लम्बाई अच्छी है. वे बिल्कुल किसी क्रिकेट खिलाड़ी की तरह दिखते हैं और मुझसे बहुत हँसी मज़ाक करते रहते हैं.

जब से दीदी की शादी हुई है तभी से जीजू मुझे चोदने की फिराक में हैं. ऐसा मैंने नोटिस किया है।

मैं दीदी के यहाँ गयी तो मुझे देखते ही जीजू बोले- लो आ गयी साली साहिबा! कैसी हो साली जी?
वे दीदी के सामने भी मुझे छेड़ते रहते हैं।

मेरे स्तन पर आपरेशन का निशान है. उसके लिए जीजू कहते हैं कि अब तो तुम्हारे स्तन पर मुहर लग चुकी है. जरा मैं भी देख लूँ कैसी है मुहर!
ऐसा बोलकर मुझे चिढ़ाते हैं।

एक बार जीजू बोले- काश मैं डाक्टर होता. फिर तुम्हारा आपरेशन मैं करता।
तो मैंने कहा- इसमें आप क्या कर लेते?
जीजू बोले- अगर मैं डाक्टर होता तो तुम्हें बिल्कुल नंगी करके तुम्हारा आपरेशन करता।

मुझे बहुत शर्म आयी लेकिन जीजू बेहिचक बोल देते हैं.

एक दिन मैंने सलवार सूट पहन रखा था. उसमें पीछे से मेरी ब्रा की दोनों पट्टियां दिखाईं दे रहीं थीं लेकिन मुझे मालूम नहीं था.

जब जीजू ने देखा तो मेरी ब्रा की दोनो पट्टियों को पीछे से पकड़ कर बोले- साली साहिबा, ये घोड़ी की लगाम तो ठीक कर लो।
वो दीदी के सामने भी मजाक कर लेते हैं, कहते हैं कि साली आधी घर वाली होती है.

फिर जीजू बोले- वैसे मालती है बहुत गोरी।
एक बार जीजू बोले- अगर उस समय तुम्हारी उम्र कम नहीं होती तो मैं तुमसे ही शादी करता।

दोस्तो, उन दिनों गर्मियों के दिन थे और गर्मी की वज़ह से मेरी पीठ पर घमौरियाँ हो गई थी.
तो दीदी मेरी पीठ पर नाईसिल का पाउडर लगा देती थी.

एक बार जब दीदी मेरी कुर्ती ऊपर करके मेरी पीठ पर नाईसिल का पाउडर लगा रही थी तो अचानक से जीजू आ गये और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया.

जब मेरी ब्रा का हुक खुला तब मुझे पता चला.
फिर जीजू कहने लगे- साली साहिबा, रात को इतनी टाईट ब्रा पहन कर मत सोया करो.

मैंने कहा- दीदी देखो, जीजू परेशान कर रहे हैं.
तो दीदी बोली- ठीक ही तो कह रहे हैं. रात को ब्रा निकाल कर सोया करो.

और तब से मैं रोज़ सोते समय ब्रा उतार कर सोती थी।

मैं अपना नाईट सूट लाना भूल गयी थी तो दीदी ने अपनी गाउन दे दी थी. जो मुझे बहुत ढीली आती थी और उसका गला भी बड़ा था जिसमें से मेरे स्तन भी दिखाई दे जाते थे.
और जीजू की नजर वहीं रहती थी।

दोस्तो, उस समय गर्मियां थी और दीदी के कमरे में ए.सी लगा हुआ था.
इसलिए दीदी ने कहा- तुम हमारे कमरे में ही सो जाया करो.
तो मैं दीदी के कमरे में ही सोती थी.

दीदी के कमरे में डबल बैड पड़ा हुआ था जिसमें एक तरफ मैं सोती. फिर दीदी और सबसे किनारे जीजू सोते थे. मतलब बीच में दीदी सोती थी।

एक बार रात को पता नहीं कैसे सोते-सोते जीजू बीच में आ गये और मुझसे चिपक कर सोने लगे.

वो तो मुझे पेशाब लगीं और मेरी आँख खुल गई. जब मैंने लाइट जलाकर देखा तो वे जीजू थे.
अगर कहीं दीदी देख लेती तो पता नहीं क्या होता!

और उनका लिंग तनाव में उठा हुआ था वे तो रात को अंडरवियर बनियान में ही सोते हैं।

दोस्तो, एक बार पता नहीं कैसे मेरे पूरे शरीर में खुजली की बीमारी हो गयी.
मैं जहाँ पर जितना खुजलाती, वहीं पर उतनी ज्यादा खुजली मचती.
मेरा और ज्यादा खुजलाने का मन करता.

जब मैं स्तन पर खुजलाती तो मेरे गोरे स्तन खुजलाने से लाल हो जाते.
मैं जोर से खुजलाती तो जीजू हँसने लगते.

फिर दीदी मुझे डाक्टर के पास ले गयी तो उसने मुझे नहाने के लिए एक दवाई वाला साबुन और एक तेल दिया जो कि मुझे नहाने से आधे घंटे पहले अपने पूरे शरीर पर लगाना था और फिर उस साबुन से नहाना था।

सब जगह तो मैं तेल लगा लेती लेकिन अब समस्या ये थी कि मैं पीठ पर तेल कैसे लगाती!
मैंने दीदी से कहा तो दीदी मेरी पीठ पर तेल लगाती थी.

एक दिन जीजू ने देख लिया तो जीजू मजाक में बोले- साली जी सारे कपड़े उतार लो. मैं तेल लगा देता हूँ।
सारी मुसीबत जैसे उसी साल मुझ पर आयी थी।

जीजू मजाक में बोलते हैं:
गोरी हो या काली
सबसे प्यारी होती हैं
अपने जीजू की साली
वो भी छोटी वाली,
और मैं तो वैसे भी सबसे छोटी थी।

दोस्तो, उन गर्मी के दिनों में मैं नहा कर तौलिया से बिना पोंछे ही गीले बदन पर कपड़े पहन लेती थी. जिससे गीलापन बना रहता था और थोड़ी देर तक ठंडा ठंडा लगता था, मज़ा भी आता था.

लेकिन ये मज़ा कुछ ही दिनों में सज़ा में बदल गयी।
ऐसा मैं रोज नहा कर करती थी. इससे मेरी चूत और उसके आसपास छोटे छोटे दाने निकल आये जिनसे खुजली मचती थी.

एक बार खुजलाते हुए जीजू ने देख लिया था और दीदी ने भी!
फिर एक दिन मैंने दीदी को चूत पर निकले दानों के बारे में बता ही दिया.

तो दीदी बोली- ठीक है कल डाक्टर के पास चलकर दवाई ले आना.
डाक्टर का नाम सुनते ही मेरी हालत खराब हो गयी.
मैं सोचने लगी कि डाक्टर तो मेरी चूत देखेगा.
इसलिए मैंने दीदी से मना कर दिया।

फिर अगले दिन सुबह दीदी बोली- नीलम, चलो अस्पताल दवाई ले आओ.
तो मैंने मना कर दिया.

दीदी गुस्सा होकर बोली- दवाई नहीं लोगी तो दाने कैसे ठीक होंगे?
मैंने कहा- दीदी अपने आप ठीक हो जायेंगे।

दवाई का नाम सुनकर जीजू बोले- क्या हो गया? किस चीज की दवाई लेने जा रही हो.

अब मैं कैसे बताती कि मेरी चूत पर दाने निकल आये है.
जीजू दीदी से पूछने लगे.

फिर दीदी ने इशारे से जीजू को बताया कि नीलम की चूत पर दाने निकल आये है।
जीजू मेरी तरफ देख कर हँसे और कहने लगे- साली जी, जाकर दवाई ले आओ ना! क्या परेशानी है?

मैंने गर्दन हिलाते हुए मना कर दिया और कहा- मुझे नहीं जाना है।
फिर दीदी ने कहा जीजू से- ऐसा करिए … पास वाले क्लिनिक से आप डाक्टर को घर पर ही बुला लाइये.

यह बात सुनकर मेरी तो हालत ही खराब हो गयी।

फिर जीजू बाहर चले गये और थोड़ी देर बाद पास के ही एक क्लिनिक से महिला नर्स को बुला कर ले आये.
नर्स को देख कर मुझे कुछ सुकून मिला कि चलो पुरूष डाक्टर तो नहीं है।

फिर उस महिला नर्स ने मुझसे पूछा- दाने कहाँ पर हैं और कितने दिनों से हैं?
मैंने बता दिया.

फिर वह नर्स बोली- दिखाओ दाने कितने बड़े हैं?
तो मैंने मना कर दिया. जीजू कमरे के बाहर खड़े थे।

दीदी गुस्सा होकर बोली- जब नर्स कह रही है तो दिखा दो ना!
इतना कहते ही दीदी ने मुझे बैड पर लिटा दिया और मेरी सलवार का नाड़ा पकड़कर खींच दिया.

मैंने दोनों हाथों से कसकर अपनी सलवार पकड़ ली और उतारने नहीं दी।
नर्स से मैंने कहा- आप ऐसे ही दवाई दे दीजिये.
तो वह नर्स बोली- बिना देखे तो दवाई देना ठीक नहीं है एक बार चेक करा दीजिये. तो उसी के हिसाब से दवाई ज्यादा ठीक रहेगी।

जब मैंने सलवार नहीं छोड़ी तो दीदी ने जीजू को आवाज़ लगा दी- अजी सुनते हो! नीलम तो दिखा ही नहीं रही है.

दीदी के इतना कहते ही जीजू अन्दर आ गये.
और जीजू ने मेरे दोनों हाथ पकड़कर ऊपर कर दिए.

दीदी ने मेरी सलवार और पैंटी निकाल कर मेरे दोनों पैरों को पूरा फैलाकर खोल दिया.
मैं अपने पैरों को हिला भी नहीं पा रही थी.

अब मेरी चूत उन तीनों के सामने थी.

मेरी नंगी चूत देखते ही जीजू के मुँह से निकल गया- आए हाय!

उस नर्स ने एक दो मिनट तक मेरी चूत को चेक किया.
मुझे गुदगुदी हो रही थी.

जब नर्स ने हाथ लगाया तो मेरी सिसकारी निकल रही थी.

जीजू की नजर तो हट ही नहीं रही थी. वे बहुत ध्यान से मेरी चूत को देख रहे थे।

फिर उस नर्स ने कुछ दवाइयाँ लिखी. मैंने अपनी सलवार और पैंटी पहन ली थी और जीजू मेरी दवाइयाँ ले आये.
उसमें एक चूत पर लगाने के लिए ट्यूब भी लिखा था जिसे मैं रात को सोने से पहले अपनी चूत के चारों तरफ लगाती थी.
और मुझे पैंटी पहनने के लिए भी मना कर दिया था।

फिर लगभग दस बारह दिनों में मेरे दाने ठीक हो गये।

बीच बीच में दीदी भी पूछ लेती थी कि अब कैसे है दाने?
तो मैं कह देती थी- कि अब तो ठीक हो रहे हैं.
एक दिन दीदी ने पैंटी उतरवा कर देखे भी थे।

उस दिन से जीजू और भी ज्यादा मजाक करने लगे.
कभी कहते कि अपनी चूत के दाने दिखा दो!
तो कभी बोलते- साली जी, कसम से तुम्हारी चूत बहुत गोरी है.

मुझे शर्म आ जाती लेकिन जीजू बेहिचक खुलकर बोल देते थे.

एक-दो बार जीजू बोले- साली जी तुम्हारी सील मैं एक झटके में तोड़ दूँगा।

एक दिन की बात है कि सुबह जीजू ऑफिस जा चुके थे और दीदी को बैंक का कुछ काम था इसलिए दीदी बैंक चली गयी थी.
मैं घर पर ही थी.

तभी मेरे फोन पर एक मिस कॉल आयी.
मैंने देखा तो वह मेरी सहेली की मिस कॉल थी.

बहुत दिनों से उससे बात नहीं हो पायी थी.
फिर मैंने कॉल करी और अपनी सहेली से बात करने लगी.

वह मेरा हाल-चाल पूछने लगी तो उसको अपने स्तन के आपरेशन वाली बात बताने लगी.
मैंने उसको सब कुछ बता दिया.
सुनकर उसको भी बहुत अचम्भा हुआ.

फिर मैंने चूत पर दाने निकलने वाली बात भी उसको बतायी और कहा कि मेरी चूत पर जो दाने निकले थे, वे अब ठीक हो गये हैं।

जब मैंने इतना कहा, तभी पीछे से जीजू आ गये और बोले- साली साहिबा, चूत पर दाने ठीक हो गये और बताया भी नहीं?
पता नहीं कब जीजू ऑफिस से आ गये होंगे।

जीजू बोले- किसका फोन था साली जी?
मैंने कहा- मेरी सहेली का फोन था.
और मैंने तुरन्त फोन काट दिया।

फिर जीजू बोले- तुम्हारी चूत पर दाने बिल्कुल ठीक हो गये हैं मैं भी तो देखूं जरा?
और इतना कहते ही जीजू ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

मैं हाथ छुड़ाने लगी और बोली- नहीं जीजू … अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ।
तो जीजू बोले- साली साहिबा, एक बार मैं भी तो देख लूँ कि अब दवाई की जरूरत है या नहीं।

फिर जीजू मुझे गोद में उठा कर अन्दर कमरे में ले गये और डबल बैड पर लिटा दिया.
मैं कहने लगी- छोड़ो जीजू … प्लीज मुझे छोड़ दो।
जीजू ने एक नहीं सुनी और मेरी लोवर उतार दी.

अब मैं पैंटी में थी.
फिर जीजू ने मेरी पैंटी कच्छी भी निकाल दी.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.

जीजू बोले- साली साहिबा उस दिन जब से मैंने तुम्हारी चूत को देखा है, तब से मैं पागल हो गया हूँ।

मैंने कसकर दोनों जाँघों को चिपका लिया और चूत को छिपाने लगी.

लेकिन जीजू ने मेरे
दोनों पैरों को खोलकर फैला दिया और मेरी चूत को करीब से देखने लगे।
फिर जीजू मेरी भगनासा को छूने सहलाने लगे।

मैंने कहा- जीजू मत करो. प्लीज छोड़ दो. मैं मर जाऊँगी।

लेकिन जीजू कहाँ मानने वाले थे; उन्होंने मेरे हाथ पकड़ कर बैठाया और मेरी कमीज़ को निकाल दिया.
अब मैं सिर्फ सफेद रंग की ब्रा में थी।

फिर जीजू ने अपनी जींस, टी-शर्ट और बनियान को निकाल दिया और अंडरवियर में हो गये.
उनका लिंग मुझे अंडरवियर के अन्दर ही फूला हुआ महसूस हो गया था.

फिर जीजू ने मुझे उठाया और फ्रेंच किस करने लगे।
वे मेरी जीभ को चूस रहे थे और जीभ से जीभ लड़ा रहे थे.

मैं तो गर्म होती जा रही थी।

फिर जीजू उठे और अपना अंडरवियर भी निकाल दिया.

अंडरवियर उतारते ही उनका लिंग किसी स्प्रिंग की तरह हिल रहा था; बहुत लम्बा और मोटा था.

फिर जीजू बोले- लो चूसो!
उन्होंने अपना लिंग मेरे होंटों के पास कर दिया. तो मैंने गर्दन हिलाकर मना कर दिया.

फिर जीजू ने मुझे उठाया और पीछे से मेरी ब्रा का हुक खोलकर दूर फेंक दी.

अब जीजू और मैं बिल्कुल नंगे थे।
कसम से मुझे बहुत शर्म आ रही थी. मुझे इतनी शर्म आ रही थी कि मैंने डबल बैड की चादर को ओढ़ लिया था.

लेकिन जीजू ने उसे भी हटाकर अलग कर दिया.
मैंने कहा- जीजू मत करो. प्लीज छोड़ दो. दीदी आ जायेंगी.

लेकिन जीजू अब कहाँ मानने वाले थे और दीदी भी तीन चार घंटे से पहले नहीं आने वाली थी; ये तो जीजू को भी पता था।

फिर जीजू ने मुझे 69 वाली पोजीशन में कर दिया और बोले- साली साहिबा अब चूसो!
अब उनका लिंग बिल्कुल मेरे होंटों पर था हालाँकि मैंने अपने होंटों को बंद कर लिया था मैं अपने होंठ नहीं खोल रही थी।

दूसरी तरफ जीजू अपनी जीभ की नोक से मेरी भगनासा को छू रहे थे.
फिर जीजू ने अपने दाँत से मेरी भगनासा पर हल्के से काटा तो मेरी आआआह … निकल गयी.

जैसे ही मैंने ऊउई … आह … आआह … आआ … आह किया, वैसे ही मेरा मुँह खुल गया और जीजू ने अपने लिंग का सुपारा मेरे होंटों के अंदर कर दिया.

मैंने लिंग को बाहर निकालने की बहुत कोशिश की लेकिन असफल रही और जीजू ने पूरा लिंग मेरे हलक़ तक डाल दिया।

जब लिंग मेरे हलक़ में जाकर फँसा तब मुझे अहसास हुआ कि लिंग कितना लम्बा, मोटा और सख्त होता है.
क्योंकि डाक्टर ने तो चुसाया नहीं था और ना मैंने चूसा था.
लेकिन जीजू चुसा रहे थे।

लगभग दस मिनट तक जीजू अपना लिंग चुसाते रहे.
मेरा दम घुटने लगा था; मैं कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.

उधर जीजू ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल रखी थी. मैं बस मछली की तरह तड़प रही थी।

दस मिनट तक ये सब करने से मैं और जीजू इतने गर्म हो गये कि हम दोनों एक साथ झड़ गये.
जीजू ने लिंग फिर भी नहीं निकाला उनका माल मेरे मुँह में निकल चुका था।

इसका नतीजा यह हुआ कि मुझे उल्टी हो गयी.
मैंने कहा- जीजू आप बहुत गंदे हो.
फिर जीजू ने मुझे कुल्ला करवाया और गोदी में उठा कर कमरे में ले गये.

मैंने कहा- जीजू मुझे अब कुछ नहीं करना है, मुझे छोड़ दो.
तो जीजू बोले कि अरे अभी तो मैंने कुछ किया ही नहीं है।

फिर जीजू ने मुझे लिटा दिया और लंड का सुपारा मेरी चूत की दरार में फंसा दिया.
उन्होंने अपने एक हाथ से मेरा मुँह बंद किया और धक्का लगा दिया. जिससे उनका लिंग आधा अंदर चला गया था.

मैं छटपटायी और जीजू का हाथ हटाने लगी लेकिन नहीं हटा पायी.

इतने में जीजू ने कसकर दूसरा धक्का लगा दिया जिससे उनका पूरा लिंग अन्दर चला गया.
जीजा साली का प्यार सेक्स तक पहुंच गया. मैं बिलबिलाती रह गई और रोने लगी।

जीजू का लिंग मेरी चूत में ऐसे कस गया था जैसे कोई नट-बोल्ट आपस में कस जाते हैं.
तभी जीजू बोले- मेरी जान, बड़ी कसी चूत है।

मेरी चूत में लगभग तीन महीने बाद कोई लंड गया था इसलिए कसी तो होगी ही!

फिर जीजू ने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू किये.
अब मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी थी.

पाँच मिनट बाद ही जीजू रुक गये और बोले- साली साहिबा, तुम्हारी सील तो पहले ही खुल चुकी है.

क्योंकि मेरी चूत से खून नहीं निकला था इसलिए जीजू समझ गये.
वे तो इस मामले में पक्के खिलाड़ी थे. शादी से पहले उन्होंने बहुत सीलें तोड़ी थी.
उन्होंने बाद में मुझे बताया था।

अब मैं क्या कहती … मेरी सील तो डाक्टर ने पहले ही तोड़ दी थी.
लेकिन जीजू यही समझ रहे थे कि मेरी सील बन्द होगी.
और फिर मुझे वह डाक्टर वाली बात बतानी ही पड़ी।

फिर जीजू हल्के हल्के धक्के लगाने लगे.
मेरी सिसकारियाँ निकल रही थी.

दस पन्द्रह मिनट के बाद जीजू झड़ गये. उन्होंने कंडोम लगाया हुआ था.

फिर जीजू ने थोड़ी देर रूक कर आराम किया. और तभी उनका लंड फिर तन गया.
दूसरा कंडोम लगाकर उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड को चूत में डालकर चोदने लगे.

इस बार जीजू ने बीस मिनट तक चोदा।

उस दिन जीजू ने मुझे ढाई घंटे में चार बार चोदा.
उन्होंने वियाग्रा की गोली खा ली थी।

फिर लगभग तीन घंटे बाद दीदी आ गयी.

उसके बाद जब भी मौका मिलता; जीजू मेरी चुदाई करते.

मैं वहाँ एक महीने रही थी और एक महीने में मेरी बहुत बार चुदाई हुई।

अगर आप लोग चाहते हैं कि मैं अपनी और भी कहानियाँ लिखूं तो आप लोग मेल करके बताना कि कहानी कैसी लगी।

जीजू और उसके दोस्त ने की मेरी मस्त चुदाई

मैं मालती ठोके सेक्सी कहानियाँ लिखती हूँ. ये वो किस्सा है, जब लौड़े की नोक पर चुत का गांड के संग डांस हुआ था.

मुझे तो आप सब जानते ही होंगे, इसलिए में सीधे सेक्स कहानी का वर्णन करती हूं.

ये सेक्स कहानी लखनऊ की है. लॉक डाउन के 4 महीने पहले की घटना है.

उस समय ठंड का मौसम था. मैं लखनऊ में अपनी बुआ की लड़की मतलब अपनी दीदी के घर पर थी.

हुआ यूं कि मुझे लखनऊ में अपनी सहेली की शादी में जाना था, तो मैं शादी में होकर अपनी दीदी के घर उनके बुलाने पर पहुंच गई.

दीदी का नाम संगीता है. उनकी शादी अभी 2 साल पहले हुई है.

मेरे जीजू एक हट्टे-कट्टे नौजवान हैं. वो किसी पहलवान की तरह लगते हैं.
वो एक बड़ी कंपनी में जॉब करते हैं.

उनके घर मैं पहली बार गई थी.

दो दिन उधर रहते हुए मुझे समझ आ गया कि जीजू मुझे बार बार देखते हुए मेरी आगे पीछे की गोलाइयों को झांकने की कोशिश करते हैं.
उनकी नजरें मेरे पिछवाड़े और मेरे स्तनों पर ही टिकी रहती थीं.

मालती ठोके

वो मुझसे अक्सर जीजा साली वाला मजाक करते रहते थे.
कभी कभी तो जीजू बहुत गंदा मजाक कर देते थे.
जीजू होने की वजह से मैं उनसे कुछ नहीं कहती थी.

फिर मैंने उनसे बोलना ही छोड़ दिया, पर वो बड़े ही हब्शी किस्म के आदमी थे.
आप उनकी ठरक को ऐसे समझ सकते हैं कि वो दिन हो या रात, दीदी को कमरे में ले जाकर दरवाजा बन्द करके उनकी चुदाई करने लगते थे.

मेरी दीदी संगीता

मैं अक्सर दीदी के अन्दर से रोने और चिल्लाने की आवाजों को सुनती रहती थी.
बाद में कमरा खुलने पर मुझे दीदी का मुँह लाल और बाल फैले मिलते थे.
चुदाई के बाद उनकी चाल भी बदल जाती थी.

चूंकि मैंने अपने एक ब्वॉयफ्रेंड निलेश से चुदने के बाद सब कुछ जान लिया था कि चुदाई के बाद लड़की के जिस्म की चाल ढाल कैसी हो जाती है.
तो मैं तुरंत समझ जाती थी कि दीदी की चुदाई हुई है.

निलेश के बाद बाकी का बचा खुचा चुदाई का ज्ञान मैंने अपने दूसरे चोदू शेखर से चुदवा कर जान लिया था. शेखर मेरी सहेली का यार और मेरा सगा भाई था.

जीजू को एक दिन के लिए कहीं बाहर जाना था तो उन्होंने सुबह से दीदी को चोदा और चले गए.

उस दिन जीजू ने शायद दीदी की हचक कर चुदाई की थी जिस वजह से दीदी चल नहीं पा रही थीं.

इसी कारण से उस दिन खाना भी मैंने बनाया था.

दीदी मुझे हर एक बात बता देती थीं कि जीजू किस तरह से उन्हें चोदते हैं.

खाना खाकर हम दोनों फ्री हुईं तो जीजू को लेकर दीदी बताने लगीं कि सुबह से जीजू ने उन्हें किस तरह से ताबड़तोड़ चोदा था.

जीजू को अगले दिन 12 बजे आना था. तब तक दीदी की हालत भी ठीक हो गई थी.

शाम हुई तो डोरबेल बजी.

दीदी दरवाजा खोलने गईं. वो जब वापस आईं, तो अपने साथ एक हट्टे-कट्टे लड़के को ले आईं.

उन्होंने मुझे बताया कि ये मेरा पहला प्यार है, जिसको मैं अभी भी प्यार करती हूं.

मैं दीदी को देखती रह गई.
वो उस लड़के को अपने साथ कमरे में ले गईं.

शाम छह बजे से रात 9 बजे तक दोनों अन्दर घुसे रहे.
दीदी की उस लड़के ने उतनी देर में जमकर चुदाई की.

फिर दीदी ने मुझे आवाज दी, तो बुलाया मैं कमरे में अन्दर आ गई.
वो लड़का उस समय सो रहा था और दीदी का मुँह लाल था. वो बिना कपड़ों के लेटी थीं.

मैंने उन्हें देखा, उनकी चुदी हुई चुत से रस टपक कर सूख गया था.

दीदी ने बिंदास मुझे देख कर स्माइल दी और बोलीं- यार, मुझे बड़ी भूख लग रही है.

मैंने कुछ नहीं कहा और दीदी को खाना दे दिया.

मैं बाहर आ गई, लेकिन अब मेरा भी मन चुदाई के लिए मचलने लगा था.

अगले दिन जीजू घर आ गए और आते ही उन्होंने भी दीदी की फिर से चुदाई कर दी.
वैसे भी दीदी रात की चुदाई से बहुत ढीली पड़ गई थीं.

जीजू ने उन्हें उस रात कुछ ज्यादा ही चोद दिया था, जिससे दीदी बीमार हो गईं.

दीदी की तबियत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाना पड़ा.

दवाई और दो तीन ड्रिप लगने के बाद दीदी ठीक हो गईं मगर अभी उन्हें हस्पताल से छुट्टी नहीं मिली थी.

उस दिन जीजू और दीदी हॉस्पिटल में थे तो मैंने ही खाना बनाया.

जीजू अस्पताल से घर आए और दीदी के लिए खाना ले गए.

मैंने दीदी की तबियत की पूछी, तो जीजू ने बताया कि वो अभी 4 दिन अस्पताल में ही एडमिट रहेगी.

जीजू ने मेरे घर वालों को भी फोन करके बता दिया.

मेरे घर वालों ने भी मुझे कॉल करके कहा कि कुछ दिन और रुक जाओ. फिर तुम्हारे जीजू तुम्हें घर वापिस छोड़ जाएंगे.

एक दिन और गुजर गया.

अगले दिन जीजू और उनका दोस्त सन्नी घर आए.
मैंने उन दोनों के लिए चाय नाश्ता बनाया और उन्हें दे आई.

वो दोनों ही मेरी तरफ वासना से देख रहे थे.
मैं उस समय डर गई क्योंकि मैं अकेली थी.

फिर भी मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी क्योंकि वो दोनों मुझे चोदने के अलावा तो कुछ कर नहीं सकते थे.

मैं अपने काम में लग गई.

वो दोनों चले गए.

रात में सब काम से फ्री होकर मैं अपने कमरे में आकर लेट गई.

जीजू आज घर पर ही रहने वाले थे, मैं यह जानती थी.

मैंने अपने कमरे का डोर लॉक कर दिया था. कमरे में मैं दीदी की मैक्सी पहन कर लेटी थी.

उस समय मैं जीजू और उनके दोस्त को लेकर सोच रही थी.

फिर मुझे दीदी की वासना का ख्याल आया कि किस तरह से मेरी दीदी ने एक लड़के को बुला कर अपनी चुत चुदवाई थी.

ये सब सोच कर मेरी चुत में चींटियां रेंगने लगीं.

मैंने भी नेट पर एक कॉल बॉय से दस मिनट बात की.
फिर मैं पोर्न फिल्म देखने लगी.

मैंने सेक्स साईट पर जो सेक्स मूवीज आती हैं, उनको देखने लगी.

अब तक करीब दो घंटे हो चुके थे. अब 12 बज गए थे.

तभी जीजू ने दरवाजे के पास से आवाज लगाई- मालती, यहां आओ.

करीब दो मिनट तक वो मुझे आवाज लगाते रहे.

फिर मैं उठी और डोर खोला तो देखा कि जीजू और उनका वो दोस्त सन्नी बाहर खड़े थे.

जीजू तुरन्त ही मुझे धकेल कर पीछे ले गए और बेड पर बिठा कर मुझे किस करने लगे.

सन्नी मेरे बगल में खड़ा था.

मैंने जीजू को धकेल दिया और कहा- ये सब ठीक नहीं है, मैं दीदी को कहूंगी जीजू, आप ये सब क्या कर रहे हैं. ये मत करो.
हालांकि मैं मन ही मन खुश थी कि मेरी जोरदार चुदाई होगी आज!

जीजू कहने लगे- अरे मेरी रानी, जो ये तुम्हारा गदराया बदन है … इसका स्वाद तो ले लेने दो. तुम्हारी दीदी को चोद चोद कर मैं थक गया हूं. तुम भी तो अब चुदने लायक हो गई हो … तुम्हें लंड की जरूरत तो होती ही होगी?

सन्नी मेरे जीजू से बोला- अबे साले, इस मस्त लौंडिया के सामने फ़ालतू का ज्ञान मत चोद … साली को पटक कर यहीं पेल दे.

सन्नी के मुँह से दारू की महक आ रही थी तो मैं उसकी तरफ देखने लगी.

इतनी देर से ब्लू-फिल्म देखने के कारण मेरी चुत लंड के लिए तरसने लगी थी.
मैंने ड्रामा किया और कहा- जीजू मैं आपके पैर पड़ती हूँ, प्लीज़ ऐसा मत कीजिए.

मगर जीजू ने मेरे बाल पकड़ कर मुझे उठाया और मुझे किस करने लगे.

उसी समय सन्नी ने मेरा हाथ पकड़ा और वो अपनी पैंट के अन्दर मेरा हाथ करने लगा.
मेरा हाथ अन्दर नहीं गया, तो उसने मेरी मैक्सी फाड़ कर अलग कर दी.

जीजू ओर उनका दोस्त अब मेरे अधनंगे बदन को सिर्फ ब्रा पैंटी में देख रहे थे.

चुदने का मन तो मेरा भी था लेकिन थोड़े नखरे भी जरूरी होते हैं.
जीजू अकेले होते तो मैं एक आजाद साली की तरह ही चुद जाती लेकिन उनके साथ उनका दोस्त भी था तो मुझे दो मर्द चोदने वाले थे.

जीजू ने अपने कपड़े उतार दिए. जीजू का लंड मेरी आंखों के सामने फड़फड़ा रहा था.
उनके लंड की साइज देखने के बाद मेरी चुत मचल उठी.

लेकिन मन में अभी भी चल रहा था कि आज मेरा न जाने क्या होगा. दर्द होगा या नहीं बस इसी तरह की बातें मेरे दिमाग में आने लगीं.

इतने में सन्नी जीजू से बोला- साले तेरी साली तो बड़ी मस्त माल है. इसको तो पहले में चोदूँगा.
जीजू ने उससे कहा- भोसड़ी वाले, ये मेरी साली है. पहले मैं ही इसे चोदूंगा. ये अभी कोमल कली है. मैं पहले 5 मिनट इसे चोद कर इसको चुदाई की लाइन पर ले आऊंगा, फिर तू चोद लेना.

सन्नी बोला- यार मेरे भाई पहला स्वाद मुझे लेना है … चाहे एक मिनट ही सही, लेकिन इसकी चुत में लंड पहले में ही डालूँगा.
उन दोनों की इतनी गन्दी गन्दी बातें सुनकर मुझे शर्म सी आ गई.
मैं उन दोनों के बीच में कुछ न बोल सकी.

अब सन्नी ने भी अपनी चड्डी उतार दी. उसका लौड़ा जीजू से कम था, लेकिन मोटा उन्हीं के जैसा था.

सन्नी मुझे किस करने लगा. जीजू मेरे हाथों से अपने लौड़े को सहलाने लगे. उनका लंड गर्म था.

वो बोले- जानेमन, आज तुम्हें असली मजा मिलेगा … और जो आज होगा हम फिर तुम्हारे साथ वो कभी नहीं करेंगे.

सन्नी ने मेरे मम्मों पर हमला बोल दिया और ब्रा फाड़ दी.

सन्नी बोला- ओए … देख रे इसके दूध तो बड़े भरे हुए हैं. साले एक एक किलो का एक होगा. इतने टाइट भी हैं कि बिना चूसे तो मन ही नहीं मानेगा. ले तू भी दबा कर चैक करके देख.

इतना सुन जीजू ने मुझे लिटा दिया.
सन्नी और जीजू मेरे आजू बाजू लेट गए.

मेरा एक दूध सन्नी और दूसरा जीजू के कब्जे में आ गया था. वो दोनों अपने हाथों से मेरे मम्मे मसलने लगे.

उन दोनों के हाथ मेरी पैंटी तक भी आ गए.
जीजू ने मेरी पैंटी उतार कर फैंक दी.

अब उन दोनों का एक एक हाथ मेरी चूत पर आ गया था.

मैं सिसकारियां लेने लगी.
उस समय में सातवें आसमान पर थी, मुझे बेहद मजा आ रहा था.

सन्नी ने मेरे मम्मों को चूसना शुरू कर दिया था. एक सन्नी चूसता और एक बार जीजू चूसते.

जीजू तो निप्पलों के पीछे पड़ गए थे. वो मेरे निप्पल को काटने लगे थे.

मैंने जीजू के बाल पकड़ कर उन्हें रोक दिया और कहा- क्या अब जान ही ले लोगे … छोड़ दो जीजू, काटने से खून निकल आएगा … मत करो यार!

वो प्यार से दूध चूसने लगे.

इधर सन्नी भी मेरे दूसरे थन पर बच्चे के जैसे चूसने में लगा था.

कुछ देर बाद जीजू ने सन्नी को अलग किया और वो मेरे पेट पर दोनों तरफ टांगें डाल कर बैठ गए.

उन्होंने मेरे मम्मों के बीच में अपने फौलादी लंड को रखा और हाथों से मम्मे दबा कर मेरी बूब फकिंग करने लगे.
उनका लंड मेरे मुँह तक आ रहा था, तो मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल रखी थी.

जीजू का लंड मेरी जीभ की नोक से टच होता और मैं उसी पल जल्दी से अपनी जीभ लंड के टोपे पर फिरा कर जीजू को मजा दे देती.

ऊपर मेरे चूचों के साथ जीजू लगे थे और नीचे मेरी चुत पर सन्नी आ गया था. वो मेरी चूत पर जीभ फिराने लगा.

अब मुझे कुलबुली सी होने लगी.

जीजू ने मुझसे कहा- जान, अब मुँह खोल कर कुल्फी चूसो.
मैंने लंड चूसने से मना कर दिया.
उन्होंने जबरदस्ती मेरे मुँह में लंड डाल दिया और झटके देने लगे.

मैंने 5 मिनट बाद उनको रोका और उनको लिटा दिया. अब मैं खुद जीजू के लंड को चूसने लगी.

सन्नी मेरे बगल में लेट गया.
मैंने सोचा कि अब तो ये भी नहीं मानेगा. इसका लंड भी मेरे मुँह में जाए बिना नहीं रहेगा.

तभी उसने इशारा करके अपने लंड को पकड़ा दिया.
मैंने सन्नी के लौड़े को पकड़ कर उसे भी चूसना शुरू कर दिया.

करीब दस मिनट तक दोनों के लंड चूसने के बाद सन्नी ने खड़े होकर अपना पानी मेरे ही चेहरे पर निकाल दिया.

जीजू ने मुझे तौलिया दी और बाथरूम में जाकर नहा कर आने को कहा.

मैंने मना कर दिया.

जीजू ने मुझे उठा लिया और बाहर बने बाथरूम के बहाने अपने रूम में ले गए.
उधर बाथरूम में ले गए.

दरवाजा लॉक करके जीजू कहने लगे- चल दोनों साथ में नहाते हैं.

उन्होंने सन्नी को आवाज लगा कर कहा- मैं इसको नहला कर लाता हूं.

जीजू और मैं बिना कपड़ों के थे.
वो मेरे कान में आकर कहने लगे- मैं तुझे जानबूझ कर बाथरूम में लाया हूं क्योंकि वो सन्नी तो इस गेम में नया है. यदि वो पहले चोदेगा, तो तुझे लापरवाही से चोदेगा. मैं बहुत पुराना खिलाड़ी हूँ. तुझे ज्यादा दर्द न हो इसलिए पहले यहां चोद कर चूत को रवां कर देता हूँ.

मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी कि जीजू मेरी चुत तो पहले से ही खुली हुई है.

जीजू ने शावर ऑन किया और मुझे बाथरूम की दीवार से झुका कर टिका दिया.
मैं दीवार पकड़ कर घोड़ी बनी थी.

वो मेरे पीछे आ गए लेकिन मुझे सन्नी से ज्यादा जीजू के लंड का डर लग रहा था.
उनका लौड़ा सन्नी के लौड़े के बहुत बड़ा था.

जीजू ने मुझसे कहा- मालती मैं बाहर चलकर तुझे एक इंजेक्शन लगवा दूँगा.
मैंने पूछा- जीजू कौन सा इंजेक्शन!

उन्होंने बताया कि उससे तुम्हें प्रेग्नेंट होने का रिस्क नहीं रहेगा. तुम 6 महीने तक रिलेक्स होकर सेक्स कर सकती हो.
मैंने कहा- जीजू, मैं तो आज आपके चंगुल में फंस गई हूं, इसी लिए करवा रही हूँ. उसके बाद तो मुझे घर चली जाना है. छह महीने की कोई बात ही नहीं है.

वो बोले- अरे मेरी जान, तुम अब यहां 3 महीने और रुकोगी, मैं तुम्हें जाने ही नहीं दूँगा. इसलिए ये सब बहुत जरूरी है.
मैंने बोला- मैं रुकने वाली नहीं हूँ.

उन्होंने कहा- अभी टाइम कम है, मुझे अपना काम करने दो.उन्होंने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और मेरे पीछे से लग गए. लंड पर थूक लगाया और फिर पीछे से मेरी चूत पर ही लंड रखने लगे.

मैं डर रही थी. जीजू ने देर न करते हुए लंड चुत के अन्दर पेल दिया.

पहला झटका मैं सह ही न सकी.
अभी जीजू के लंड का टोपा ही चूत में गया था लेकिन मेरी चीख बड़ी जोर से निकली.

मैंने कहा- आंह मर गई जीजू … रुको जरा … ऐसे में तो मैं मर ही जाऊंगी.
वो बोले- तो ठीक है, तू फर्श पर लेट जा नीचे.

मैं लेट गई. उन्होंने मेरा एक पैर ऊपर किया और लंड चूत पर रख कर मुझे किस किया.

हमारे ऊपर पानी गिर रहा था क्योंकि शॉवर चालू था.
जीजू ने जल्द ही जोर से लंड पेल दिया.

मेरी आंखें फ़ैल गईं और मैं अपने हाथों से उनको दूर करने लगी लेकिन जीजू का जिस्म बहुत भारी थी.

मुझे बहुत दर्द होने लगा.

उन्होंने किस करना बंद नहीं किया. मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोका और लंड बाहर निकाला कर फिर से चुत के अन्दर बाहर करने लगे.

मैं रोने लगी थी. मगर वो मेरे आंसू देखकर भी अनदेखा कर रहे थे और चोदने में लगे थे.

जब उनका लंड चुत के अन्दर जाता, तब मेरे पेट में एक अलग ही खलबली मच जाती.

मैं इस चुदाई के दर्द को पता नहीं क्यों, सहन नहीं कर पा रही थी.

जीजू जल्दी जल्दी धक्के लगाते रहे.

कुछ देर बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं उनको चूम चूम कर मजा देने लगी.

अब वो मेरे दूध मसलते हुए मुझे चोद रहे थे.

कोई दस मिनट तक ऐसे ही चुदाई करके वो मेरे अन्दर ही झड़ गए.

फिर उन्होंने मुझे उठा कर नहलाया. चूत में साबुन लगा कर मुझे साफ किया.

हम दोनों ही पानी में भीगे थे तो तौलिया से पौंछकर बोले कि सन्नी के सामने इस चुदाई की बात मत करना.

वो मुझे गोद में उठाकर ले गए और बेड पर लिटा दिया. मेरे बाल गीले तो थे लेकिन ज्यादा भी नहीं थे.

जीजू ने सन्नी से कहा- चल पहले एक ड्रिंक हो जाए.
मैं समझ गई कि अब मुझे रेस्ट मिल जाएगा, इसलिए जीजू उससे ड्रिंक की बात कर रहे हैं.

जीजू सन्नी पीने बैठ गए और करीब 30 मिनट बाद जीजू मुझे अपने कमरे में ले गए.

बेड खाली ही था. सन्नी ने मुझे वहीं इंजेक्शन लगाया.

सन्नी का लौड़ा और जीजू का शेर दोनों ही मेरी चुत को सलामी दे रहे थे.

सन्नी बोला- इस इंजेक्शन में मैंने एक पेनकिलर भी मिला दी है.
जीजू ने कहा- ये तो और अच्छी बात है.

करीब 5 मिनट बाद सच में मेरा पहले का दर्द गायब हो गया और चुदने की लालसा मन में उठने लगी.

सन्नी मुझे बड़ी देर से चोदने के लिए बेताब था. मैंने उसे इशारा किया.

वो मेरे ऊपर चढ़ गया. उसका लंड जीजू जितना तो बड़ा नहीं था मगर अब डर नहीं था.

मैंने कहा- यार तुम परेशान मत हो … लेट जाओ. मैं आज तुम्हें चुदाई का असली मजा दूँगी.

मैं सन्नी को लिटा कर उसके लंड पर बैठ गई.
अब मेरे अन्दर दर्द नाम की चीज नहीं थी, मैं लंड चुत में लेकर उछलने लगी.

सन्नी सच में मजे लेने लगा.
वो मेरे मम्मों को अपने हाथों से मसलने लगा.

मैं उछलती हुई लंड का मजा लेने लगी. कमरे में पट पट की आवाज गूँजने लगी.

करीब 20 मिनट बाद जीजू ने मुझे उठा लिया और हवा में ऊपर ही उठाए हुए नीचे से मेरी चुत में लंड पेल दिया.

वो बड़े खूंखार चोदने वालों में से एक थे.

उनका लंड लेते ही मेरे मुँह से दर्द भरी आह निकली.
वो मुझे एक रबर की डॉल की तरह झूला झुलाते हुए चोदने लगे.

दर्द कम हो रहा था, लेकिन दर्द तो दर्द ही होता है.

करीब 20 मिनट तक उन्होंने भी मेरी चुत की चुदाई की. फिर वैसे ही पकड़ कर बेड पर लेट गए.

वो करवट से लिटा कर अपनी पूरी ताकत लगा कर मुझे चोदने लगे.

मेरे पीछे से सन्नी आ गया. उसने मेरी गांड पर थूक लगा दिया. मैं मना नहीं कर सकी क्योंकि मेरा मुँह जीजू के मुँह में फंसा हुआ था.
शायद ये उन दोनों की चाल थी.

सन्नी ने अपने लौड़े को गांड के छेद पर रखा और पेलने लगा.

जीजू जानबूझ कर मुझे छोड़ नहीं रहे थे. वो कसके मेरे सिर को पकड़ कर किस कर रहे थे.

जब तक सन्नी ने मेरी गांड में अपने लंड को पेल नहीं लिया, तब तक जीजू ने मुझे नहीं छोड़ा.

उस समय मेरी आंखों से आंसू निकल रहे थे. फिर भी जीजू ने नहीं छोड़ा.

अब नीचे से वो चूत का भोसड़ा बनाने में लगे थे और पीछे से सन्नी मेरी गांड मारने में लगा था.
मेरी डबल सेक्स में सैंडविच चुदाई होने लगी थी.

फिर जैसे ही जीजू ने मुझे छोड़ा, मैंने जीजू को गाली दी और लंड निकालने को कहा.
मगर वो नहीं माने.

वो दोनों मुझे रगड़ रहे थे.
मैं दर्द सहन करने लगी.

फिर करीब 20 मिनट चुदाई के बाद जीजू झड़ गए. उनका लंड चुत से निकल गया था.
मैं आगे से आजाद हो गई.

अब तक जीजू हट चुके थे. लेकिन उनका लंड खड़ा था.

सन्नी भी मेरी गांड से निकल गया.

मैंने जीजू के लंड पर बैठ कर उछलना शुरू कर दिया. हालांकि जीजू में हिम्मत नहीं बची थी. उनकी आंखें बंद हो गई थीं.

मैं इस वक्त एकदम से रांड बन गई थी. मेरी स्पीड और तेज हो गई.

वो अब हाथ जोड़ने लगे- उठ जाओ … अभी थोड़ी रुक कर मैं फिर से चोद दूंगा.

मैं उठी तो सन्नी ने मुझे पकड़ कर अपने लंड पर बिठा लिया.

करीब दस मिनट तक उसने मेरी चुदाई की और मेरी चूत में ही झड़ गया.

आज मेरी चूत में बहुत पानी समा गया था.

करीब एक घंटे बाद जीजू ने मुझे उठाकर दूसरे कमरे में लाकर फिर से काफी देर तक चोदा और मुझे चरम सुख तक पहुंचा दिया.

मुझे भी उन दोनों से डबल सेक्स करके काफी अच्छा फील हुआ.
फिर हम लोग सो गए.

सुबह सन्नी अपने घर निकल गया और जीजू ने सब फैला हुआ साफ किया और अस्पताल चले गए.

दिन में एक बजे मैं भी उठकर नहाने गई. फिर खाना बनाया.

शाम को दीदी अस्पताल से घर आ गईं.
डॉक्टर ने दीदी को रेस्ट करने के लिए कहा था. वो प्रेग्नेंट भी हो गई थीं.

जीजू ने मुझे ये खुशखबरी दी.

मुझे भी अच्छा लगा.

दीदी को जो दवाएं दी गई थीं उनसे उन्हें गहरी नींद आ जाती थी.

जीजू इस बात का फायदा उठाने लगे.

अब वो दिन रात मुझे ही चोदने लगे. रोज जैसे ही 11 बजते, जीजू मेरे कमरे में आ जाते.

मैं दिन में खाना बनाती, तो किचन में आकर मुझे पीछे से चोदने लगते.

उनको मुझसे बहुत मजा मिल रहा था. मैं भी उनके लंड का जमकर मजा ले रही थी.

तीन महीनों तक ऐसे ही खेल चलता रहा.

जब मैं घर आ गई तो वो यहीं आकर होटल में ले जाकर पहले चुदाई कर लेते थे. बाद में घर पर आते थे.

अब दीदी का 8 वां महीना शुरू होने वाला है … तो मुझे फिर से उनके घर जाना पड़ेगा. पता नहीं मुझे जीजू के अलावा किसी और का लंड मिलेगा या नहीं!

मम्मी के यार ने बेटी की चूत पर डाका डाला

दोस्तों, आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रही हूँ. कैसे मेरी सील टूटी, और मम्मी के यार ने मुझे कैसे चोदा उसकी कहानी सुनाने जा रही हूँ.

मेरा नाम मालती है. मैं गुजरात की रहने वाली हूँ, मैं एक गुजराती फॅमिली से आती हूँ. पापा का जब देहांत हुआ तब मेरी मम्मी मुंबई आ गई, क्यों की मुंबई में मेरे मामा रहते हैं. पर मामी की वजह से, हम दोनों माँ बेटी कुछ ही दिनों में अलग रहने लगे. माँ एक ऑफिस में काम करने लगी और मैं कंप्यूटर सिखने लगी अकाउंट का काम के लिए.

दोस्तों धीरे धीरे हम दोनों मुंबई में सेट हो गए, और फिर ठीक ठाक से रहने लगे. मेरी माँ की उम्र 36 साल है. और मेरी अठारह साल. मेरी  मम्मी को एक आदमी से प्यार हो गया या यु कहिये की मम्मी एक आदमी से चुदने लगी. मम्मी ने ऑफिस के एक आदमी से प्यार करने लगी.

धीरे-धीरे मम्मी और वह इंसान काफी करीब आ गए अब वह मेरे घर भी आने लगे उनका नाम निरज जी था.  निरज जी देखने में बहुत ही हैंडसम हैं वह मेरी और मेरी मम्मी का काफी ख्याल रखने लगे हम दोनों भी काफी खुश रहने लगे कोई भी कमी होती थी हम लोग उनको फोन करते थे हमें लगता था कि शहर में भी कोई ऐसा इंसान होता है जो किसी की मदद कर सकता है.

दोस्तों जिंदगी हम दोनों की बहुत आसान हो गई थी क्योंकि शहर में भी एक गार्जियन मिल गया था.

मम्मी की नज़दीकियां इतनी ज्यादा हो गई क्या मम्मी कहीं बाहर भी उनके साथ ही घूमने जाने लगी यहां तक कि कोई सामान भी लाने का होता था तो मम्मी उनको फोन करती थी. अंकल आते थे उन्हें ले जाते थे और फिर शाम को वह दोनों वापस आते थे धीरे-धीरे बात इतनी बढ़ गई और मेरे घर में भी रुकने लगे.  अंकल शादीशुदा थे उनका तलाक हो चुका था उनकी पत्नी दूसरी शादी कर चुकी थी उनका कोई बच्चा नहीं था.

दोस्तों एक बार नए साल मनाने के लिए मम्मी ने उनको इनवाइट किया और हम दोनों घर पर ही थे अंकल 9:00 बजे के करीब घर पर आए और हम लोगों ने केक काटा खाना खाए खूब मजे के डांस  के 12:00 बजे हम तीनो ने एक दूसरे को विश किया मैं अपने कमरे में चली गई और मम्मी अलग कमरे में और अंकल ड्राइंग रूम ही सोफे पर रजाई लेकर सो गए थे.

जब मुझे रात में पेशाब लगा तो मैंने अंकल वहां पर नहीं मम्मी के कमरे से आह आह की आवाज आ रही थी मैं सोची पता नहीं मम्मी का तबीयत तो खराब नहीं होगा इसलिए उनको देखने चले गए दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था खोल कर देखें कल मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे मम्मी अपने कपड़े  उतारे हुए थे और अपने सारे कपड़े उतार के मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे.

अंकल मम्मी की चूचियां दबा रहे थे मम्मी अंकल को किस कर रही थी वह उनके होंठ को चूस रही थी अपना जीभ निकालकर उनके मुंह में डाल रही थी यह सब देखकर मेरा भी मन डगमगा गया मेरी चूत गीली हो गई थी.  मैं अपनी चूचियां खुद भी मसलने लगी थी. मेरे रोम रोम में आग लग गए थे.

जब-जब अंकल मम्मी को जोर से मिलते मम्मी आ फिर आवाज  करती थी. अंकल अपना लौड़ा मम्मी की चूत में डाले जा रहे थे और मम्मी मजे ले रही थी.  मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियां हिल रही थी और जोर जोर से जब वो धक्के देते मम्मी जोर जोर से हिल जाती और आह आह करती.

अंकल मम्मी से अलग हो गए और बोले जानेमन अगर तुमने नए साल पर  पायल को साथ दो तो तुम जो कहोगी वह करेंगे चाहे तो तुम अपने नाम से मकान ले लो जेवर ले लो जो भी लेना है सब ले लो नए साल में रिश्तो की शुरुआत कुछ और होनी चाहिए.

मम्मी बोली कि आप जितना चाहे मुझे ले लो जैसे मर्जी ले लो पर अभी मेरी बेटी को छोड़ दूं वह भी 18 साल की है और तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है शायद वह सह नहीं पायेगी.  इसलिए तुम अभी थोड़ा दिन रुक जाओ उसके बाद जो कहोगे करना.

अंकल  बोले मेरे पर भरोसा रखो जोर से मैं नहीं डालूंगा धीरे-धीरे डालूंगा तभी हम कल उठे और अपना बैग खोलें और उसमें से ₹100000 निकाल दे मेरे मम्मी को दे दिए.  मम्मी बोली इसका मतलब यह है कि तुम नहीं मानोगे आज तुम उसका सील तोड़कर ही रहोगे.

दोनों हंसने लगे मां अपने कमरे में आ गए दोस्तों सच तो यह था कि करीब आधे घंटे से उन दोनों की चुदाई  देख रहे थे और मुझे भी चुदने का मन करने लगा था क्योंकि मेरी चुत गीली हो चुकी थी मैं काफी गर्म हो गई थी.

तेरी मम्मी बोली ठीक है लो मजे पर मैं उसे कुछ नहीं बोलूंगी पटाना तुम्हें ही पड़ेगा.  तुम कल बोले वह मुझे पहले से ही लाइन देती है तुम चिंता नहीं करो उसकी तो कई बार चूचियां  भी छू चुका हूं वह कुछ नहीं बोली. बस तुम्हारी इजाजत की जरूरत थी क्योंकि मैं लंबे समय तक इस रिश्ते को बनाए रखना चाहता हूं और तुम दोनों को खुश रखना चाहता हूं.

दोस्तों में दौड़ कर अपने कमरे में चली गई 5 मिनट बाद  मेरे कमरे में आ गए. मैं सोने का नाटक कर लगी वो मेरे बेड पर बैठ गए.  अपना हाथ मेरे सीने पर सहलाने लगे मेरे होंठ को छूने लगे. मैं पहले से ही गर्म थी मैंने भी ज्यादा नाटक नहीं कर पाई मैं उनका हाथ पकड़ ली और अपनी चूचियों पर रख दी.  होले होले दबाने लगे दबाते दबाते दबाते मेरे सारे कपड़े उतार दिए.

अब वो मेरी चूत को चाटने लगे.  और ऊँगली घुसाने लगे. मैं आह आह करने लगी. वो मेरे ऊपर लेट गए मेरे दोनों पैरों को अलग अलग किया और अपना लौड़ा मेरी चुत पर लगाया और जोर से पेल दिया. मैं कराह उठी. दर्द काफी होने लगा था खून भी नीकलने लगा था. मैं पसीना पसीना हो गई थी.

वो अब वो मुझे जोर जोर से चोदने लगे और मैं भी जोर जोर से चुदवाने लगी. दोस्तों मेरी चुत फट चुकी थी दर्द हो रहा था पर दर्द का मजा ही अलग था. मैं खूब चुदी सारी रात.

फिर क्या था दोस्तों उस दिन से लेकर आज तक वो कभी मम्मी को कभी मुझे चोद रहे हैं और हम दोनों माँ बेटी खूब मजे ले रहे हैं.

जेठ ने दिया मुझे मोटा लंड

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मालती है, मैं एक संस्कारी बहु हूँ. मेरी उम्र 27 साल है और मेरा फिगर 34-26-36 है. मेरा रंग एकदम दूध से गोरा है और मेरे पति थोड़े से साँवले हैं. बात को ज़्यादा ना खींचते हुए मैं सीधे कहानी पे आती हूँ. यह कहानी मेरी अपनी सच्ची कहानी है.

मेरे घर में मैं,मेरे बच्चे, मेरी जेठानी, जेठ जी और उनकी एक बेटी साथ में रहते हैं. ससुर जी का बैंक में जॉब था तो वो मेरी सास के साथ घर से दूर सहारनपुर में रहते थे और मेरे पति डेढ़ साल से विदेश में थे.

कहानी मेरे और मेरे जेठ की चुदाई की है.

उन दिनों शादियों का सीजन चल रहा था और मेरी जेठानी के भाई की शादी तय हो गयी थी जो 10 दिन बाद होने वाली थी.
अप्रैल-मई का महीना था तो बच्चों के स्कूल भी बंद थे.

हुआ ये कि मेरी जेठानी दो दिन बाद अपने मायके जा रही थीं, तो मैंने कहा- बच्चों को भी साथ लेते जाइये और मैं दो दिन बाद आऊंगी क्योंकि मेरी ब्लाउज अभी तैयार नहीं है और दर्ज़ी ने चार दिन का वक्त मांगा है.
तो वो मान गयीं और दो दिन बाद अपनी बेटी और मेरे बच्चों के साथ वो चली गईं.

जेठ जी उनके साथ नहीं गए क्योंकि वो जिस कम्पनी में काम करते थे वहां से उनको छुट्टी भी नहीं मिली थी.
एक बात बता दूं कि मेरे जेठ जी बहुत ही शर्मीले किस्म के इंसान हैं.
तो मैंने सोचा कि उनके साथ ही चली जाऊंगी जब वो जाएंगे.

इत्तेफाक से उस दिन बहुत ज़ोर की बारिश हो रही थी. मैंने रात का खाना बनाया और बैठ कर टीवी देखते देखते जेठ जी का इंतज़ार करने लगी ताकि वो आएं और हम साथ में डिनर करें.

चूँकि बारिश तेज़ थी तो थोड़ी ठंड भी लग रही थी, मैं अंदर से एक शॉल लेकर आई और बैठ कर टीवी देखने लगी.

उस वक्त ज़िस्म मूवी आ रही थी और रोमांटिक दृश्य चल रहा था. अब मेरे बदन में गर्मी होने लगी और शॉल को हटाकर दूर रख दिया और मैं वासना से मचलने लगी. मैं अपनी चूचियों को आपस में मसलने लगी और जांघों और पेट को भी सहलाने लगी.

मैं एकदम गर्म हो चुकी थी क्योंकि मेरे पति भी डेढ़ साल से विदेश में ही थे और कितने दिन हो गए थे मैं चुदी भी नहीं थी. और ऊपर से बारिश भी हो रही थी.

सच पूछिए तो उस वक़्त मेरे मन था कि किसी को भी बुलाकर चुदवा लूं. लेकिन जैसे तैसे मैंने अपने आप को संभाला, उठकर साड़ी को भी ठीक किया. उस दिन मैंने हल्के गुलाबी रंग की पतली सी साड़ी पहन रखी थी और मैचिंग लिपस्टिक भी लगा रखी थी.

रात के 9 बज चुके थे और जेठ जी के आने का समय भी हो गया था.
थोड़ी देर बाद घर की घण्टी बजी, मैंने दरवाजा खोला तो जेठ जी थे. वो एकदम भीग चुके थे.

मैंने कहा- आप चेंज कर लीजिए, मैं तौलिया लेकर आती हूँ फिर खाना खाएंगे.
मैं तौलिया लेने चली गयी और वो अपने कमरे में जाकर चेंज करने लगे. शायद वो दरवाज़ा बन्द करना भूल गए और ऐसे ही कपड़े बदलने लगे.

तौलिया लेकर उनके कमरे में चली आयी तो देखा कि उन्होंने अपना शर्ट और पैंट निकल दिया था और सिर्फ चड्डी में थे. उनके पूरे शरीर पर बाल थे, एकदम हट्टा-कट्टा शरीर, मैं तो बस उन्हें ही देखे जा रही थी.
फिर मैं थोड़ी साइड में हो गयी और दरवाजा खटखटाया और साइड से ही तौलिया देकर चली आयी.

वो नज़ारा मेरी आँखों में घूमने लगा, मेरा मन फिर से मचलने लगा.

तभी वो बाहर आये और बोले- सॉरी, वो मैं दरवाज़ा बन्द करना भूल गया था.
मैन कहा- कोई बात नहीं.

फिर हम बैठ के खाना खाने लगे. खाते वक़्त मेरा ध्यान उनकी तरफ ही जा रहा था. उन्होंने एक शार्ट निक्कर और एक टीशर्ट डाल रखी थी.

जेठ जी खाना खाकर आपने रूम में चले गए और लैपटॉप पे काम करने लगे.

मैंने भी अपना काम खत्म किया और दूध लेकर जेठ जी के कमरे गयी तो देखा कि वो काम करते करते टेबल पे ही सर रख के सो गए थे.
मैंने झुककर धीरे से उनकी कान में आवाज़ लगाई- जेठ जी!

वो अचानक से उठे तो उनकी कोहनी मेरी चुचियों से टच हो गयी, उन्होंने तो सॉरी बोला लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा और ‘कोई बात नहीं’ बोलकर दूध रखकर बाहर आ गयी.

अब मेरी वासना जाग गयी और जेठ जी से चुदने के लिए सोचने लगी कि क्या करूँ कि उनका ध्यान मेरी तरफ आये.

थोड़ी देर बाद मैं फिर उनके कमरे की तरफ गयी तो देखा कि अब तक वो लैपटॉप पे ही थे. रात के 11 बज चुके थे, मैं उनके पास गई और ज़बरदस्ती उनका लैपटॉप बन्द किया और बोला- इतनी रात हो गयी और आप अब तक काम कर रहे हैं.

मैंने उनका हाथ पकड़ा और बिस्तर की तरफ खींचने लगी. तभी मैं जानबूझकर लड़खड़ाते हुए उनके बिस्तर पर गिर गयी और ऐसे खींचा कि वो मेरे ऊपर ही आ गिरे.

अब जेठ जी पूरी तरह से मेरे ऊपर थे.
वो उठने ही वाले थे कि उसी वक़्त बिजली कड़की और मैंने डर के मारे उनको फिर से अपनी बांहों में जकड़ लिया.

थोड़ी देर मैं उनसे ऐसे ही लिपटी रही और मेरी सांसें गर्म होने लगी. मेरा पूरा बदन गर्म हो चुका था.

तभी मैंने महसूस किया कि उनका लन्ड भी तन गया और मेरी जांघों में चुभने लगा.
उन्होंने मेरा हाथ छुड़ाया और खड़े हो गए.

तभी फिर से बिजली कड़की और मैं उनसे फिर लिपट गयी.
उन्होंने मेरा चेहरा पकड़ा और बोला- कोई बात नहीं, डरो मत, मैं हूँ ना!
मेरी आँखें बंद थी.

फिर मैंने आंखे खोली और उनकी आंखों में देखने लगी और इससे पहले वो मुझसे दूर होते, मैंने अपने होंठ उनकी होंठों पर रख दिया और किस करने लगी.
उन्होंने मुझे छुड़ाया और बोला- क्या कर रही हो, तुम मेरे भाई की बीवी हो, ये गलत है.

मैंने उन्हें फिर अपनी तरफ खींचा और बोली- जेठ जी मुझे पता है कि ये गलत है, लेकिन इस वक़्त मैं बहुत ही प्यासी हूँ, मेरी प्यास बुझा दीजिये प्लीज!
और ऐसा कहकर मैंने फिर से अपने होठों को उनके होंठों पे रख दिया और किस करने लगी.

अब वो भी मेरा साथ देने लगे.

हम किस करते हुए बिस्तर पर गिर गए. लगभग 10 मिनट किस करने के बाद हम अलग हुए और उन्होंने मेरे कपड़े उतारे और मैंने उनके.

अब हम पूरी तरह से नंगे थे, मैंने उनका लन्ड देखा और बोली- आपका ये कितना लम्बा और मोटा है.
मेरे जेठ जी का लंड लगभग 8″ लम्बा और 3″ मोटा था जो कि मेरे पति के मुकाबले ज्यादा था.

मैंने उनका लन्ड पकड़ा और अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी. करीब 5 मिनट चूसने के बाद मैं फिर से किस करने लगी.

अब उन्होंने मुझे अलग किया और मेरी पैंटी उतारकर मेरी चूत चूसने लगे, जब उन्होंने मेरी चूत पर अपने होंठ को रखा मैं सिहर गयी और मैं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ करने लगी.
उनकी गर्म सांसें मेरी चूत पर एक अलग ही अहसास दिला रही थी.

चूत चूसने के बाद उन्होंने अपना लन्ड मेरी चूत के मुंह पे रखा और एक हल्का सा धक्का मारा. मेरे मुंह से ‘उइ माँ मर गयी’ निकल गया.
जेठ जी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और धक्के मारने लगे.

करीब पांच मिनट चोदने के बाद उन्होंने मुझे मेरी पोजिशन बदली और मेरी टांग को कंधे पे रख के मुझे चोदने लगे.

लगभग आधा घंटा चोदने के बाद उन्होंने अपना लन्ड मेरी चुत से निकाला और मुझे उल्टा लिटाकर मेरी गांड में लंड घुसाने लगे.
मैं मना करने लगी क्योंकि इससे पहले मैंने गांड नहीं मरवाई थी.
लेकिन वो भी पूरे जोश में थे और नहीं माने, उनका लन्ड मेरी गांड में नहीं घुस रहा था क्योंकि मेरी गांड एकदम टाइट थी.

फिर उन्होंने मेरी गांड की छेद पर थूक लगाया और एक जोर के झटके के साथ पेल दिया.
मेरी जान निकल गयी और मैं बहुत जोर से चीखी. मुझे बहुत दर्द हुआ था.

उन्होंने हाथ से मेरा मुँह बन्द कर दिया और ऐसे ही 2 मिनट पड़े रहे ताकि मेरा दर्द कम हो जाए.
थोड़ी देर में मैं शांत हो गयी और मेरा दर्द भी कम हो गया.

अब वो धीरे-2 अपने लन्ड को अंदर बाहर करने लगे, मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं भी अपनी गांड उठा कर उनका साथ देने लगी.

करीब दस मिनट चोदने के बाद मुझे पलटकर एक बार फिर से मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और मेरी चुत पे लन्ड टिकाकर एक ही झटके में पूरा अंदर डाल कर अंदर बाहर करने लगे.
इस जेठ बहू की चुदाई के दौरान मैं दो बार झड़ चुकी थी लेकिन उनका अभी बाकी था. जेठ जी पिछले चालीस मिनट से वो मुझे पोजिशन बदल कर चोद रहे थे.

मैं उनके स्टेमिना की दीवानी हो चुकी थी. अब मेरी चुत में दर्द होने लगा था लेकिन उस दर्द में भी मुझे मज़ा आ रहा था.

लगभग एक घंटे चोदने के बाद उनकी स्पीड बढ़ने लगी और दस बारह झटकों बाद अपना लन्ड निकाल कर मेरे मुंह में दे दिया और अपना पूरा वीर्य मेरे मुंह में उड़ेल दिया.
मेरा पूरा मुँह भर गया और मैंने भी उनके वीर्य की एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी और मैं गट गट करके उनका पूरा वीर्य पी गयी.

आह … उनका गर्म वीर्य बहुत ही स्वादिष्ट था. मैंने उनका लन्ड पूरा चाट के साफ किया और वो मेरे बगल में लेट गए.

अभी हमारे पास दो दिन का वक़्त था और इन दो दिन में हमने पांच छह बार चोदा चोदी की.

उसके बाद हम शादी में चले गए. वहां पर भी हम दोनों का नैन मटक्का चालू रहा.

वहां से लौटने के बाद भी जब भी हमें मौका मिलता हम खूब मज़े करते.

मैं आपकी अपनी सौ मालती ठोके.