जब बेटे की शैतानी का पता चला कि, बेटा स्कूल में अपनी टीचर को देखते हुए मुठ मार रहा था। तो टीचर ने मुझे कॉल किया और उसे स्कूल से निकलने की बात कही। तो मैने उसकी घर पर क्लास लेनिकी डिसाइड किया । मगर जब वो घर पर आया तो मैने नोटिस किया कि उसके पेंट का उभार अभी भी है। तो मैने उसे डाट लगते हुए बेडरूम में खींचा और उसके कपड़े बदलने को कहा। और में भी अपने रूम में कपड़े बदलने चली गई।
मगर उसने कपड़े बदलना छोड़कर मुझे कपड़े बदलते देखने लगा। में कपड़े बदलने के लिए अपनी पेंट नीचे की तभी उसने उसने आव देखा न ताव और मुझे खींच लिया और अपनी बांहों में भरकर जबरदस्ती करने लगा। मैं उस से अलग होने लगी लेकिन उसने मुझे जकड़ लिया। और चाटने लगा और अपने हाथों से मेरी गांड को भी दबाने लगा।
मॉम की गांड़ में जीभ को घुमाते हुए।
हालांकि मुझे उसकी हरकतों में मजा आ रहा था पर फिर भी दिखाने के लिए मैं उससे अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। लेकिन वो फुल जोश में था। कभी वो मेरी गांड दबाता तो कभी बूब्स। जिससे मैं भी गर्म होने लगी थी और धीरे-धीरे मेरी वासना जागने लगी थी। फिर उसने अपनी पेंट नीचे खींच कर उसके लन्ड को आजाद कर दिया। तब में भी उसके लन्ड को देखकर चकित रह गयी। यह तो बिल्कुल तगड़े मर्द की तरह था। तकरीबन 7 इंच लम्बान और 3 इंच मोटा होगा। वो अपने हाथ में पकड़कर उसे गोल गोल हिलने लगा। में उसे ऐसे हिलाते देख बोली- ये क्या कर रहे हो, पागल हो गए हो क्या?
आज से पहले उसने ऐसी हरकत कभी भी नहीं की थी। आज तो उसने मुझे खींच लिया। और अपना लन्ड मेरे हाथ में रख दिया। में भी जोश में आकर उसके लन्ड को चूसने लगी।
अपने ही बेटे का लन्ड चूसते हुए.बेटे के लन्ड को अपने बूब्स से मसलते हुए।बेटे के रस को और गाढ़ा कर ने के लिए, उसकी गोटियों को चूसी…हल्के से बेटे के लन्ड को अपने चूत मे लेते हुए।बेटे का पूरा लन्ड अपने अंदर समा लिया।बेटे ने गहराई तक पेला लन्ड का पानी मुंह में लेते हुए लन्ड का पानी पीने से तृप्ति का एहसास हुआ।
आज की कहानी शॉर्ट में है। आप चित्र देखकर अपने सपने सजाए और अपनी कहानी हमें हमारे मेल पर मेल हमारा मेल ID maltipatil97@gmail.com इस पर मेल करें।
हाय दोस्तो, मैं कुलदीप, उम्र 19 साल, गोवा से हूं। यह मेरी पहली कहानी है।
घर में मैं और मेरी मम्मी ही हैं। उनका नाम अनीता है।
पापा का देहांत होने के कारण सारा बोझ मम्मी के सर पर आ गया था।
मम्मी ने एक योग अकादमी में योग सिखाना शुरू कर दिया था। घर में बहुत तंगी थी तो मुझ पर भी बहुत दबाव था।
मेरी मम्मी की उम्र 40, रंग गोरा और हाईट 5.6 इंच है। बेटा होने के नाते मैंने कभी मम्मी को उस नज़र से तो नहीं देखा परंतु आप सबके लिए बता दूं कि मम्मी की चूचियों का साइज़ 36 है, कमर 30 है और भरी हुई गांड 40 की है। इसीलिए मम्मी 30 साल की माल औरत लगती हैं।
मैं एक नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी हूं जिसके पीछे मेरी मम्मी का बहुत बड़ा हाथ है।
वो योगा टीचर हैं। उन्होंने अपने आपको फिट रखा हुआ है, इसी कारण मेरे आस-पड़ोस का हर नौजवान मम्मी की बड़ी गान्ड को चोदने का सपना देखता रहता है।
मम्मी ज्यादातर जींस या लेगिंग्स ही पहनती हैं, साड़ी और सूट-सलवार तो कभी कभी ही चलता है।
उन्होंने पापा के गुजर जाने के बाद शादी तो नहीं कि परंतु उनके संबंध 4 या 5 लोगों से ज़रूर रहे हैं। इनमें 4 मेरे से उम्र में थोड़े बड़े थे।
मम्मी की उम्र का एक आदमी जो अकादमी का मालिक भी है, उसके साथ मम्मी के संबंध अभी भी हैं। वो अंकल मम्मी को छोड़ने भी आते हैं और कभी कभी लेने भी आते हैं।
मम्मी कभी-कभी उनके साथ पार्टियों में भी जाती है। मम्मी को कई बार अंकल ने हमारे घर पर ही चोदा है और मैंने उनकी चुदाई अपनी आंखों से देखी है।
मुझे बुरा तो लगता था परंतु मम्मी की खुशी इसी में ही थी तो कुछ नहीं कर पाता था।
आज जो कहानी मैं बताने जा रहा हूं ये कहानी दो साल पहले की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में स्टेट के सिलेक्शन के लिए काफ़ी मेहनत कर रहा था। जब सिलेक्शन का वक्त आया तो मुझे मेरे कोच ने ट्रायल्स में बाहर कर दिया।
इस बात का मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर पर आकर रोने लगा। मॉम ने पूछा तो मैंने उनको सारी बात बताई। वो कहने लगी कि वो कोच से खुद बात करके सब सही कर देगी।
फिर सुबह होते ही मैंने और मम्मी ने नाश्ता किया और मम्मी ने अपनी जॉब से छुट्टी ले ली और कहा- बेटा आज मैं तेरे साथ स्कूल चलूंगी। मैंने भी हां कह दिया।
मैं स्कूल के लिए तैयार होने लगा तो मम्मी तैयार हो चुकी थीं। उस दिन मम्मी कुछ अलग रही थीं। उन्होंने लाल रंग की चमकदार साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उनका जिस्म उभर कर बाहर आ रहा था।
उनके चूचे एकदम मिसाइल की तरह तने हुए थे और गांड एकदम बम लग रही थी।
हम घर से निकले और फिर थोड़ी देर बाद हम स्कूल चल दिए। स्कूल के अंदर हम घुसे ही थे कि मेरी मम्मी को सब बड़े बच्चे और पुरुष टीचर हवस भरी निगाहों से देखने लगे।
फिर हम जैसे ही ग्राउंड में कोच के पास पहुंचे तो स्पोर्ट्स वाले बच्चों और कोच की आंखें फटी की फटी रह गईं।
कोच से मैंने मम्मी का परिचय कराया तो दोनों ने अपने नाम बताए और दोनों के बीच कुछ बातें हुईं।
मेरे कोच का नाम अभिषेक था। अभिषेक की उम्र 28 साल, रंग गोरा और हाईट पूरी 6 फिट थी।
मुझे अपनी मम्मी को देखकर ऐसा लगा जैसे मेरी मम्मी को कोच पसंद आ गया हो। फिर कोच ने कहा- चलो अनिता जी, स्पोर्ट्स रूम में जाकर बात करते हैं।
फिर हम तीनों स्पोर्ट्स रूम में चल दिए। स्पोर्ट्स रूम में घुसते ही कोच ने मम्मी को कुर्सी पर बैठाया और मैं खड़ा रहा।
मम्मी और कोच आपस में बात करने लगे।
कोच ने मम्मी से कहा- आपका बेटा स्टेट लेवल तक खेलने लायक प्लेयर नहीं है इसीलिए हम इसको नहीं ले सकते। मम्मी ने कहा– अभिषेक जी, मुझे अपने बेटे से बहुत उम्मीदें हैं, देख लो कुछ हो जाए तो!
मम्मी ने थोड़ा कुर्सी पर झुक कर कोच सर को अपनी छाती के दर्शन करवा दिए जिससे कोच के चेहरे पर एक हवस भरी मुस्कान तैर गई। फिर कोच ने कहा- अनिता जी, अब मैं कुछ नहीं कर सकता, अब लिस्ट जा चुकी है। तभी मम्मी ने कहा– मैं अपने बेटे को टीम में लाने के लिए कुछ भी कर सकती हूं, कृपया करके एक मौका तो दें?
इस बात पर कोच मेरी मॉम की क्लीवेज में घूरने लगा और मॉम थोड़ा और नीचे झुक गई। मुझे समझ आ गया कि सर के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे, जरूर मम्मी की चुदाई होने वाली है।
फिर मम्मी ने मुझसे कहा– बेटा तुम बाहर जाकर प्रैक्टिस करो, मैं इनसे अकेले में कुछ बातें करना चाहती हूं। मैं रूम से बाहर निकल गया।
कुछ देर तो मैं वहीं पर खड़ा रहा। मैंने सोचा कि अंदर झांक कर देखता हूं कि मम्मी अभी तक क्यों नहीं आई।
जब मैंने देखा तो दरवाजा अंदर से लॉक हो चुका था। अब तो मेरा शक पक्का हो गया था।
पीछे की ओर एक खिड़की थी। मैं चुपके से पीछे गया और खिड़की के नीचे बैठ गया।
फिर धीरे धीरे नजर उठाते हुए मैंने कमरे में अंदर झांक कर देखा। कोच ने मम्मी को टेबल पर बिठाया हुआ था और उनकी साड़ी कमर तक खुली हुई थी, उनका ब्लाउज उतर चुका था और वो नारंगी कलर की ब्रा में थी।
कोच मेरी मम्मी की चूचियों को दबाते हुए उनके होंठों को चूम रहा था और मम्मी भी उसके गले में बाहें डाले हुए उसका साथ दे रही थी। इतने में मम्मी ने अपनी ब्रा खोल दी।
मम्मी की चूचियां कोच के सामने हवा में आजाद हो गईं। मैं मम्मी की गोरी और मोटी रसीली चूचियों को देखकर हैरान रह गया। ऐसी ही हैरानी शायद कोच को भी हुई होगी।
उसने मम्मी को टेबल पर गिराया और बुरी तरह से उसकी चूचियों को भींच भींचकर पीने लगा।
मम्मी के चूचों को चूसते हुए कोच ने कहा– अनीता जी, जब से आपको देखा है तब से ही इन चूचों को चूसने के लिए दिल मचल रहा था। मम्मी बोली- मेरे बेटे को टीम में जगह दोगे तो मैं आपको स्वर्ग की सैर करवा सकती हूं।
कोच- तो करवाइये ना अनीता जी, मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूं। आपके बेटे की टीम में जगह पक्की करवाना मेरे हाथ में है।
इतने में ही मम्मी ने कोच की लोअर के ऊपर से उसके लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया और कोच के मुंह से कामुक बातें निकलने लगीं- आह्ह … स्स … अनीता जी … आप तो बहुत रोमांटिक हैं … ऐसी लेडी तो मुझे पहली बार मिली है।
अब कोच काफी उत्तेजित हो गया और उसने मेरी मम्मी के बदन से साड़ी को बिल्कुल अलग कर दिया। जल्दी से उसने पेटीकोट उतारा और मम्मी की पैंटी के ऊपर से चूत को रगड़ने लगा। मम्मी भी सिसकारने लगी।
फिर उसने पैंटी में हाथ देकर चूत को अच्छे से रगड़ना शुरू कर दिया। अब मम्मी भी अपनी चूचियों को दबाते हुए आह्ह … स्स … आह्ह … स्स्स … करने लगी।
कोच ने मम्मी की चूत में उंगली डाल दी और वो एकदम से उचक सी गई। वो मेरी मॉम की चूत में उंगली चलाने लगा तो मम्मी बहुत गर्म हो गई। उसने कोच की लोअर नीचे खींच दी और उसे नंगा कर लिया।
जल्दी से मॉम ने उसके लंड को मुंह में भरा और तेजी से चूसने लगी।
कोच जोर जोर से सिसकारने लगा- आह्ह … स्स्स … हाय … साली रंडी … आह्ह … क्या मस्त चूसती है तू … आह्ह … खा जा मेरे लंड को रांड … स्स … हाय … चूस जा पूरा! वो दोनों हवस में जैसे पागल हो चुके थे।
फिर कोच ने मेरी मम्मी की पैंटी को उतार दिया और खुद भी नंगा हो गया। उसने मम्मी को पलटा लिया और मॉम की मोटी गांड उसके सामने थी। उसने मॉम की गांड पर चांटे लगाने शुरू किए।
कई चांटे मारने के बाद मॉम की गांड लाल हो गई। फिर उसने मम्मी की गांड में मुंह लगा दिया और उसको चाटने लगा। मॉम भी पागल होने लगी।
टेबल पर झुकी हुई मॉम की चूचियां आगे पीछे हिल रही थीं और वो आगे पीछे होते हुए अपनी गांड को कोच के मुंह पर रगड़ रही थी।
मुझे यह सब देखकर गुस्सा तो आ रहा था लेकिन अंदर ही अंदर मज़ा भी बराबर आ रहा था। मैंने मम्मी को पहले भी नंगी देखा था लेकिन इस बार और ज़्यादा मज़ा आ रहा था।
फिर कोच ने मम्मी की चूत में थूक दिया। उसने अपने लंड पर भी थूक लगा लिया।
उसने मॉम को सीधी किया और अपना लन्ड मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी एकदम से सिहर सी गई।
फिर कोच ने मम्मी की दोनों टांग पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया। कुछ देर में मॉम को भी मजा आने लगा। मम्मी की चुदाई कोच बहुत बेरहमी से कर रहा था।
अब मॉम अपनी चूत को खुद कोच के लौड़े की तरफ धकेल रही थी।
थोड़ी देर बाद कोच ने मम्मी को टेबल पर बैठा दिया और खुद भी बैठ गया। फिर उसने मम्मी को लिटा कर मम्मी की चूचियों में लन्ड फंसा कर चूचियों को चोदना शुरू किया। मॉम की मोटी चूचियों के बीच लंड अच्छे से रगड़ खा रहा था।
लन्ड मम्मी के मुंह तक टच हो रहा था। मम्मी और कोच ने फिर एक ज़ोरदार किस की।
अब मॉम कोच को लिटा कर उनके ऊपर बैठ गई और कोच ने मम्मी की चूत के बजाय गांड में लन्ड पेल दिया।
मम्मी उचक गई और फिर आराम से लंड को धीरे धीरे करके पूरा उतरवा लिया। लंड को गांड में लेकर वो आराम से चुदने लगी।
धीरे धीरे दोनों का जोश बढ़ने लगा और कोच अब तेजी से जोर लगाते हुए नीचे से मॉम की गांड में लंड को पेलने लगा।
ये सब देखकर मेरे लंड का भी बुरा हाल हो गया था।
मैं मुठ मारना चाहता था लेकिन वहां पर खतरा था। कुछ देर चोदने के बाद कोच ने मम्मी को टेबल से नीचे उतार दिया।
मम्मी को कुर्सी पर घोड़ी बना कर कोच ने उनकी चूत में लन्ड डाल दिया। मम्मी को चूत चुदवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
15 मिनट चूत मारने के बाद फिर कोच ने फुर्ती से मम्मी को घुटनों पर बिठाया और मम्मी के मुंह में लन्ड डाल दिया और मुख चोदन करने लगा।
वो मॉम का सिर पकड़ कर मुंह को चोद रहा था। मम्मी को सांस नहीं आ रही थी तो मम्मी की आंखों में आंसू आने लगे।
कुछ देर मुंह चुदाई करने के बाद कोच ने मम्मी को उल्टा किया और मम्मी की गांड पर माल झाड़ दिया। अब दोनों थक चुके थे।
उनकी चुदाई खत्म होते ही मैं भी वहां से सरक लिया लेकिन मेरे लंड का बुरा हाल था। मैं सीधा टॉयलेट में गया और मुठ मारने लगा।
मेरे ख्यालों में मम्मी की चुदाई और सिसकारियां चल रही थीं।
फिर झड़ने के बाद मैं स्पोर्ट्स रूम के पास गया। अभी भी दरवाजा बंद ही था।
मैंने खिड़की से झांक कर देखा कि मम्मी कोच की गोदी में बैठी थी। मम्मी और कोच ने कपड़े पहन रखे थे।
फिर दूसरी तरफ जाकर मैंने रूम का गेट खटखटाया तो सर ने आ कर गेट खोला और मम्मी मुझे देखकर अपने कपड़े ठीक करने लगीं।
इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मम्मी बोली- चल कुलदीप, सर से बात हो गई है। तुझे टीम में लेने के लिए सर मान गए हैं। मॉम फिर से कोच सर के पास गई और उनसे हाथ मिलाकर धन्यवाद करने लगी।
कोच ने मॉम को मेरे सामने ही गले लगा लिया। मॉम भी अच्छी तरह से चिपक कर उनसे गले मिली।
मैंने देखा कि कोच ने धीरे से मेरी सेक्सी मॉम की गांड पर हाथ फेरते हुए कहा- दर्शन करवाते रहिएगा अनीता जी! मॉम ने भी शरारती स्माइल दी और वहां से आ गई।
फिर मम्मी ने रूम से बाहर आकर अपने पुराने यार को कॉल लगाकर कहा- मिश्रा जी, जल्दी हमको लेने के लिए कुलदीप के स्कूल आ जाओ। यह कहकर मम्मी ने फोन रख दिया।
थोड़ी देर स्कूल के बाहर इंतजार करने के बाद मिश्रा जी अपनी गाड़ी लेकर आ गए।
मम्मी मिश्रा जी के साथ आगे बैठ गईं और मैं पीछे वाली सीट पर बैठ गया। हम तीनों घर पहुंच गए तो मम्मी ने मुझे बोला– बेटा तुम घर में जाकर पढ़ाई करो, मैं मिश्रा जी के साथ दोबारा हाफ डे जॉब जा रही हूं।
मैं समझ गया कि मम्मी जॉब तो जा रहीं हैं लेकिन साथ साथ मिश्राजी ने उनको चोदने का प्लान बनाए रखा होगा इसीलिए जल्दी है। मैंने मम्मी और अंकल को बाय कहा और घर में आ गया।
तो दोस्तो, मेरी सेक्सी मॉम की स्टोरी कैसी लगी? ईमेल के ज़रिए अपनी राय मुझे ज़रूर दें। मेरा ईमेल आईडी है- rpatilemail@gmail.com
गंदा सेक्स का मजा लिया मैंने अपने मायके में आकर. मेरी दोस्ती मेरी सहेली ने एक सड़क छाप लड़के से करवा दी. उसने मुझे चुदाई के लिए एक बदनाम गली में बुलाया.
दोस्तो, मेरा नाम नीलिमा है. पर लोग मुझे नीलू कहते हैं और मैं 25 साल की हूँ.
दिखने में मैं गोरी-चिट्टी, सुडौल फिगर वाली लड़की हूँ. मेरी फिगर की साइज 34-30-38 की है और कद 5 फिट 7 इंच का है.
यह बात पिछले साल अक्टूबर की है, जब मैं दशहरा में दिल्ली से अपने घर छत्तीसगढ़ आ गई थी. इस बार मैं इधर लंबे समय तक रहने के लिए आई थी.
मैं दशहरा के दिनों में अपनी पड़ोस की बस्ती की एक सहेली काजल के घर कुछ ज्यादा ही आना-जाना करने लगी थी.
तब से उसी बस्ती का एक लड़का मुझे लाइन मारने लगा था. उसका नाम विलास है और वह उम्र में भी मुझसे बड़ा था.
वैसे तो विलास दिखने में उतना हैंडसम बंदा नहीं है पर विलास और काजल एक ही बस्ती के थे और एक दूसरे को जानते भी थे.
काजल ने ही मेरी सैटिंग विलास से करवा दी थी.
मैं कुछ दिनों तब विलास से कॉल पर बात करती रही. विलास मेरे साथ सेक्सी बातें ही किया करता था. मुझे भी उस तरह की गंदा सेक्स करने की बात करने में बड़ा मज़ा आता था.
मैं इतना तो समझ गई थी कि विलास मुझे चोदना चहता था. पर मैं खुद ही विलास को मना कर देती थी.
विलास अक्सर मुझे सार्वजनिक स्थान पर आने के लिए कहता था जो मुझे सुरक्षित नहीं लगता था.
फिर विलास ने एक दिन मुझे एक वीडियो भेजा. उस वीडियो में विलास अपने काले लंड से खेल रहा था.
विलास का लंड भी कोई सामान्य आकार का नहीं था, एकदम मस्त मोटा–लंबा लंड था.
ऐसा लंड तो मेरे दिल्ली वाले बॉयफ्रेंड का भी नहीं था इसलिए अब मैं भी विलास से चुदवाने के लिए कहीं भी आने के लिए तैयार हो गई थी.
लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे घरवालों ने नवंबर में गोवा जाने की बात छेड़ दी और मैंने विलास को कुछ दिन इंतज़ार करने के लिए कहा. लेकिन विलास था कि मान ही नहीं रहा था.
दीवाली की शाम विलास मुझे मेरे घर के पीछे वाली कंडोम गली में बुलाया जिस गली में लोग चोदा–चोदी करते थे और अपना इस्तेमाल किया हुआ कंडोम फेंक देते थे. इसीलिए उस गली का नाम कंडोम गली पड़ गया था.
सच कहूँ तो मैं उस गली से कभी गुज़री भी नहीं थी. लेकिन गंदा सेक्स करने, लंड खाने के लिए मैं उस बदनाम गली में जाने के लिए तैयार थी.
उस दिन मैं घर से यह बोल कर निकली थी कि मैं सहेली के घर जा रही हूँ और इसीलिए मैं हीरोइन बन के घर से निकली थी.
मैंने एक टाइट फिटिंग वाला टॉप और स्कर्ट पहनी थी.
जब मैं उस कंडोम गली में पहुंची तो विलास पहले से मेरा इंतज़ार कर रहा था.
विलास मुझे देख मुस्कुराते हुए बोला- एकदम माल लग रही हो नीलू रानी! मैं भी मुस्कुराती हुई विलास से बोली- अच्छा, मैं तुम्हें माल लगती हूँ क्या?
विलास ने कोई जबाव न देते हुए सीधा मुझे अपनी बांहों में खींच लिया, जिससे मेरी चूचियां विलास के सीने से लग कर दब गईं और विलास मेरे रसीली होंठों को चूमने लगा.
विलास मुझसे बोला- माल तो तुम हो ही नीलू … इसी लिए तो तुम्हारे पीछे पड़ा हुआ हूँ. मैं भी मुस्कुराती हुई बोली- वैसे यहां कोई आएगा तो नहीं?
अब मेरे बदमाश विलास ने मुझसे कहा- कोई आएगा तो उसे भी शामिल कर लेंगे.
मैं विलास की बात को सुन कर उसके छाती पर अपने हाथों से मारने लगी. विलास ने हंस कर मुझे रोक लिया और मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपनी पतलून में खड़े लंड पर रखवा दिया.
उफ्फ्फ … विलास के लंड को पकड़ते ही मेरी उत्तेजना जग गई थी. मैं विलास की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी.
तभी विलास ने अपना मुँह आगे बढ़ा दिया. मैंने भी अपना मुँह आगे बढ़ाया और हमारे होंठ एक दूसरे से सट गए.
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. उफ्फ्फ … विलास तो मुझे चूमते हुए मेरे चूतड़ों को दबाए जा रहा था.
अब तक जितनी बार भी मैंने चूमाचाटी की है, मुझे हर बार पहली बार जैसा अहसास होने लगता है. इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाती हूँ और शर्म लाज भुला कर मैं बिंदास रंडी सी हो जाती हूँ.
उधर विलास भी मेरे होंठों को चूमते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ को भी डालने लगा था. उसने मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मेरी स्कर्ट को पीछे से उठा रखा था.
वह मेरी पैंटी में हाथ डाल कर मेरे चूतड़ों की दरार में अपनी उंगली से सहला रहा था.
‘ईईस्स्स … उउह्ह्ह’ मुझे बेहद मज़ा आ रहा था. मैंने भी विलास की पतलून से उसके लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी.
विलास ने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग कर दिए और मुझे नीचे झुकाने लगा. मैं झुक गई और तब विलास का बौखलाया हुआ लंड मेरे मुँह के सामने था.
विलास मुझसे कहने लगा- लो अब चूसो नीलू … जैसे तुम मुझसे बोला करती थीं! मैं मुस्कुराती हुई विलास से बोली- लंड चूसना तो ठीक है … पर चुसवाने के चक्कर में कहीं तुम्हारा रस निकल न जाए!
विलास खुद भी बौखलाया हुआ था इसलिए उसने मेरी मुंडी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना तनतनाता हुए लंड ठूंस दिया. मैं भी मस्ती से विलास के लंड को चूसने लगी.
‘ईईस्स्स …’ मन तो कर रहा था कि लंड चूसती ही रहूँ.
विलास भी मेरी चोटी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना लंड आगे-पीछे करते हुए पेल रहा था और सिसक भी रहा था.
मैं ‘गल्प गल्प आहहह …’ करती हुई लंड चूस रही थी.
जल्द ही मैंने विलास के लंड को चूस चूस कर अपनी लार से लथपथ कर दिया.
विलास बोलने लगा- ईईस्स्स … नीलू, लंड तो तू बहुत मस्त चूसती है रे … चल अब मेरे आंड भी चाट ले साली रांड.
तो मैं मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा, मैं रांड भी हो गई हूँ साले कमीने … लंड चुसवाने का मजा ले रहा है … चल अब अपना लंड ऊपर उठा … मैं तेरे आंड भी चाट लेती हूँ.
विलास ने अपना लंड पकड़ कर ऊपर उठा दिया. उसके चिकने आंड मेरे सामने आ गए थे. बड़े बड़े आंवले से आंड थे जो मस्त झूल रहे थे.
मैं उसके झूलते हुए आंडों में से एक आंड को मुँह में लेकर चूसने लगी. विलास मज़े लेता हुआ ‘ईईस्स्स्स … आहहह … करने लगा था.
जितना मज़ा विलास को आ रहा था, उतना ही मज़ा मुझे विलास के आंडों को चूसने चाटने में आ रहा था.
यह सब मैंने विलास से कॉल पर बोला था इसीलिए विलास मुझसे ये सब करवा रहा था.
मुझे भी विलास के आंड को चूस चाट कर बहुत मज़ा आ रहा था.
करीब पाँच मिनट तक मैं विलास के आंडों को चूसती रही और अपनी लार से उसके आंडों को चिपचिपा कर दिया था.
अब विलास ने मुझे ड्यूरेक्स का कंडोम पकड़ा दिया. मैंने विलास के खड़े लंड में कंडोम पहना दिया.
विलास ने मुझे खड़ा करते हुए सामने दीवार की तरफ झुकाया और मेरी स्कर्ट ऊपर करते हुए मेरी पैंटी को पूरा उतार दिया.
विलास पीछे से मेरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से फैलाए हुए था तो उसको मेरी गांड का खुला हुआ छेद दिख गया था.
विलास- ईईस्स्स्स … साली रंडी तू तो अपनी गांड भी मरवा चुकी है … तभी मैं सोचूँ कि तेरी गांड इतनी गदराई हुई क्यों है! मैं मुस्कुराती हुई बोली- तो क्या तुम्हें गदराई गांड वाली पसंद नहीं है क्या?
विलास- तेरी गांड जितनी बड़ी है न … उतना ही मस्त है. आज गांड चाटे बिना मज़ा नहीं आएगा.
ये बोलते ही विलास ने अपना मुँह मेरी गांड में लगा दिया. मेरी आह निकल गई ईईस्स्स्स … उउह्ह्ह!
वह एकदम से छेद में जीभ की नोक लगा कर चाटने लगा.
विलास मेरी गांड चाटते हुए बोला- ईईस्स्स्स … लगता है गांड के छेद में लक्स साबुन रगड़ रगड़ कर लगाती हो! मैं अपनी गांड चटवाती हुई बोली- ईईस्स … उउह्ह्ह … तुम गांड चाट रहे हो या साबुन सूंघ रहे हो?
विलास गांड चाटते हुए बोला- तेरी गांड की खुशबू सूंघ कर चाट रहा हूँ … ईईस्स … बहनचोदी.
वह मेरी गांड चाटने के साथ मेरी बुर को भी चाटने लगा. उफ्फ … आहहह … मेरी गांड के साथ उसने मेरी फुदी को भी गीला कर दिया था.
फिर विलास ने मेरी बुर में थूका और खड़ा हो गया. उसने मेरी बुर में अपना मोटा लंड रगड़ते हुए उसे मेरी बुर में एक झटके से पेल दिया.
मेरी चीख निकली- आह्ह … आह मर गई. उसने बिना कुछ सुने मुझे चोदना शुरू कर दिया.
विलास का लंड मोटा था, इसलिए मेरी बुर को वह पूरी खोल कर चोद रहा था. मैं बस जकड़ी हुई कुतिया की तरह ‘आह्ह … आह्ह …’ करती हुई कराह रही थी.
विलास मुझे चोदते हुए बोला- आहह … नीलू मेरी जान तुझको मज़ा आ रहा न? मैं भी विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … ईईस्स … बहुत मज़ा आ रहा है आह्ह.
विलास मेरी बुर चोदते हुए मस्ती करने लगा. उसने उसी दौरान मेरी गांड के छेद में अपना अंगूठा घुसा दिया. उसने दूसरे हाथ से मेरी चोटी को खींच कर पकड़ रखा था.
अब विलास मुझे ज़ोर ज़ोर से ताबड़तोड़ धक्के भी लगा रहा था और मैं बस बिलबिलाती हुई मादक आवाजें निकाल रही थी- आह्ह्ह … आह्ह … ईईस्स्स!
मैं चुदते हुए कराह रही थी और सिसक भी रही थी. विलास मुझे चोदते हुए रुका और उसने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया.
उसने मेरे टॉप को ऊपर उठाया और मेरी ब्रा से मेरी चूचियों को बाहर निकाल कर मेरे मम्मों को चूसने चाटने लगा.
ईईस्स्स … उफ्फ … अब तो और ज्यादा मजा आने लगा था. विलास मेरी चूचियों को चूस भी रहा था. वह पूरा मुँह खोल कर मेरी चूचियों को अपनी लार से गीला करते हुए लथपथ कर रहा था.
कुछ देर बाद विलास ने मेरी एक टांग को उठाया और फिर से मेरी फुदी में लंड घुसेड़ा और ज़ोर ज़ोर से नीचे से ऊपर धक्के देते हुए चोदने लगा.
मैं फिर से ‘आह्ह … आह्ह …’ करने लगी. विलास को और मज़ा आने लगा.
इसी लिए विलास ने मेरी दूसरी टांग को भी उठा लिया और अपने ऊपर झूला झुलाने लगा.
मैं विलास को अपनी बांहों में भर कर पकड़े हुई थी.
विलास मुझे नीचे से ऊपर चोदने लगा. आह्ह … आह्ह … ईईस्स …
विलास हट्टा कट्टा था और कद में भी लंबा मर्द था. इसलिए वह मुझे उठा कर चोद रहा था.
उफ्फ्फ … ईईस्स …
विलास तो मेरी हालत ही ख़राब किए दे रहा था.
कुछ देर बाद विलास ने मुझसे दोनों पैरों को अपनी कमर से लपेटने के लिए कहा. मैंने अपने पैरों से विलास की कमर को जकड़ लिया.
अब मैं भी विलास के लंड पर उछल उछल कर चुदवाने लगी.
ईईस्स्स … उफ्फ्फ … पूरा मज़ा आ रहा था.
ऊपर से विलास मेरे चूतड़ों को थप्पड़ पर थप्पड़ मारे जा रहा था. चट …चट …
मैं आह्ह्ह … आह्ह … किए जा रही थी. फिर विलास मुझे अपनी बाइक केटीएम के पास लेकर गया.
वह मुझे अपनी केटीएम बाइक की सीट पर लेटा कर मेरी दोनों टांगों को फैला कर पूरा जड़ तक लंड पेल कर धक्के देते हुए मुझे चोदने लगा.
मैं बस ‘आई ईई … आह्ह्ह … आह्ह्ह …’ करती हुई कराहने लगी थी.
कुछ ही देर बाद रफ्तार बढ़ गई और विलास के आंड मेरी गांड से लग कर थप … थप … की आवाज़ करने लगे थे.
मैं विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … आह्ह्ह … बस विलास अब बस करो. विलास- आह रुक जा बस थोड़ी देर और थोड़ी देर आह मजा आ रहा है रंडी तुझे चोदने में ईईस्स्स!
तभी विलास ने मेरी एक टांग छोड़ते हुए अपने लंड को मेरी फुदी से निकाला और उसने झटके से कंडोम को निकाल कर मेरी एक चूची पर लगा दिया. उसी वक्त उसने अपने गर्म लच्छेदार मुठ से मेरी चूत और झाँटों को नहला दिया.
उफ्फ … ईईस्स्स …
ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ था बल्कि उसके बाद मैंने विलास से दो बार और चुत चुदवाई थी. वह भी उसी कंडोम गली में.
आप लोगों को मेरी यह गन्दा सेक्स कहानी पसंद आई होगी. मैं आगे की कहानी भी बताऊंगी.
मेरी ये गन्दा सेक्स का मजा कहानी आप लोगों को कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सुनीता है, मेरी उम्र 45 वर्ष है, रंग गोरा और मेरा फिगर 36-32-40 है. मैं इंदौर में अपने पति के साथ रहती हूँ. मेरे दो बच्चे हैं, दोनों दूसरे शहर में नौकरी करते हैं.
मेरे पति एक MNC में काम करते हैं. मेरे पति सुबह 8 बजे ऑफिस चले जाते हैं और शाम 7 बजे के बाद ही आते हैं. मैं पूरा दिन अकेली रहती हूँ या अपने कुछ सहेलियों के साथ कभी कभी पार्टी कर लिया करती थी. मेरा दिन अच्छा कट रहा था.
एक दिन मेरे पति ने मुझे अचानक बताया कि उनके भाई का लड़का हमारे शहर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये आ रहा है और वो हमारे साथ हमारे ही घर में ही रहने वाला है.
मुझे यह सही नहीं लगा, उसके हमारे घर में रहने से मेरी पूरी आज़ादी छीन जाएगी.
पर बात घर की थी तो मजबूरन मुझे मानना पड़ा.
मैंने ऊपर के कमरे में उसके रहने का इंतजाम कर दिया.
अजय सीधा साधा लड़का था, पढ़ाई लिखाई में भी अच्छा था. मैं कई बार उससे मिली हूँ और वो मेरी काफी इज़्ज़त भी करता है लेकिन अभी मुझे उसका आना पसंद नहीं था.
कुछ ही दिनों में अजय घर आ गया. वो 19 साल का बड़ा लड़का हो गया था, कद काठी भी अच्छी हो गई थी.
मैं तो पहले उसे देखती ही रह गई. फिर मैंने उसे ऊपर का कमरा दिखा दिया.
अब अजय हमारे साथ हमारे घर में रहने लगा. वो काफी शर्मीला लड़का था.
शुरू से ही कम उम्र के लड़के मुझे काफी पसंद हैं. मेरे पति की उम्र 50 साल की हो गई है, अब उनमे पहले जैसे बात नहीं रही तो अब मेरी यह दबी हुई इच्छा अब अजय को देख के बाहर आने लगी थी.
एक दिने मैं सूखे कपड़े लेने छत पे जा रही थी. तभी मेरी नजर बाथरूम पे पड़ी जो अजय के रूम के बगल में था. उसका दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर अजय नंगा नहा रहा था.
वो बिल्कुल दरवाजे के पास खड़ा शावर से नहा रहा था और खुले दरवाजे से झांटों के बीच लंड साफ़ दिख रहा था. उसका 7 इंच का लंड बिल्कुल मेरे सामने था, मैं तो हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ भी सकती थी.
जवान लंड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गई, मैं तो बस खड़ी खड़ी देखती ही रह गई और दरवाजे के पीछे वो मजे से नहा रहा था. थोड़ी देर बाद जब उसका लंड दरवाजे से छिप गया तब मैं किसी तरह खुद को मनाती हुई नीचे आ गई, कपड़े भी नहीं लाई.
अजय प्यारा तो था ही … पर अब मुझे वो और भी प्यारा लगने लगा था. अब मैं उसका और भी ध्यान रखने लगी और धीरे धीरे उसके करीब आने की कोशिश करने लगी.
वो मेरे पास केवल 4 साल के लिये आया था और अब मैं बिना समाये गंवाये जल्द से जल्द उसका लंड लेने के लिये तड़प रही थी. अब मुझे अपने पति में कोई इंटरेस्ट नहीं था, मुझे तो बस अजय ही चाहिये था.
मैं चाहती थी कि पहल अजय करे क्यूंकि घर की बात थी, कुछ गड़बड़ हुई तो पूरी उम्र सुनना पड़ेगा. अपने पति, अपने बच्चों को मैं क्या मुँह दिखाऊंगी.
अजय जिस बाथरूम में नहाता था उस बाथरूम की कुण्डी थोड़ी मुश्किल से लगती थी, शायद इसलिए नहाते समय बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रखता था.
अब मैं हररोज अपने भतीजे के लंड का दीदार करती थी और कई बार जब वो कपड़े बदल रहा हो, उसी समय बहाने से उसके कमरे में चली जाती थी और वो मुझे देख के शर्मा जाता था.
धीरे धीरे कुछ महीने बीत गए, अब मैं और अजय काफी नजदीक आ गए थे. अब अजय ऊपर से नंगे बदन केवल निक्कर में मेरे सामने आ जाता था, मैं भी उसे ऐसे दिखती जैसे कोई बात नहीं … लड़के घर में ऐसे ही रहते हैं.
पर मेरी चूत अब भी खाली थी और अजय के लंड के लिये तड़प रही थी.
मुझे अब ये समझ में आ गया था कि लंड लेना है तो अब बात मुझे खुद आगे बढ़ानी पड़ेगी.
मैं दिन के समय सलवार सूट या टॉप और लोअर पहनती हूँ. मैं इन कपड़ों में साधारण सी हाउसवाइफ दिखती हूँ और रात में नाइटी.
मेरी नाइटी स्लीवलेस और बड़े गले की है, इसमें मैं सेक्सी दिखती हूँ. ये नाइटी अब तक मैं अपने पति का सामने ही केवल पहना करती थी पर अब यह नाइटी मैंने अजय के सामने भी पहनना शुरु कर दी ताकि उसे अपने बड़े बड़े चूचों का अच्छे से दीदार करा पाऊं.
अब मैं उठते बैठते अजय को अपने स्तनों की दीदार करने लगी. उसकी नजर तो मेरी चूचियों की घाटी में आकर मानो फंस ही जाती थी, जब भी हमारी नज़र मिलती तो वो झेम्प जाता और मैं मुस्कुरा देती.
एक दिन मैं नाइटी पहन के अपनी छत पे प्लांट लगा रही थी. तभी वहाँ अजय भी आ गया.
मैं मौका देखते ही अपने नाइटी घुटनों तक मोड़ के कुछ इस तरह बैठ गई कि सामने आने से अजय को मेरी मोटी मोटी जाँघें और पैंटी साफ़ दिखे.
अजय पहले तो थोड़ी देर बड़े ध्यान से मेरी नाइटी के अंदर देखता रहा, मैं भी मजे से दिखाती रही. पर थोड़ी ही देर में वो छत की दूसरी ओर जाने लगा.
मैंने उसे तुरंत बुलाया और उससे इधर उधर की बातें करने लगी ताकि मैं उसे ज्यादा समय तक मैं उसे अपने नंगे अंगों को दिखा पाऊं.
ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए पर बात अब भी बनती नज़र नहीं आ रही थी. वो बड़ा सभ्य लड़का था.
अब मैं छत पे कपड़े सुखाने को अजय को भेज दिया करती थी जिसमे मेरी ब्रा और पैंटी भी होती थी. वो भी बड़े प्यार से मेरे ब्रा पैंटी को सुखाता था.
एक दिन मुझे अपनी एक सहेली के यहाँ जाना था. मैंने अजय को कहा- मुझे लेट हो रही है और मेरा सूट प्रेस नहीं है, प्लीज मेरा सूट प्रेस कर दो, नहीं तो मैं लेट हो जाऊंगी.
अजय मेरे कमरे में ही मेरा सूट प्रेस करने लगा और मैं अपने रूम के अटैच्ड बाथरूम में नहाने चली गई.
मैं जल्दी नहा कर अपने सफ़ेद पेटीकोट को अपने वक्ष के ऊपर बाँध कर बाहर आई और उसे जल्द प्रेस करने को बोलती हुई अपने बाल संवारने लगी. सफेद पेटीकोट मेरे गीले बदन से पूरा चिपक गया था.
मैं चारों तरफ घूम घूम कर बाल संवार रही थी ताकि अजय को अपना बदन अच्छे से दिखा पाऊं. अजय भी चोरी चोरी मुझे निहार रहा था.
सफेद पेटीकोट में मेरी 36 इंच की चूचियाँ जबरदस्त लग रही थी. जब मैं झुक रही थी तो पीछे से मेरी नंगी चूत भी दिख रही थी. यह सब देख कर अजय का बुरा हाल हो रहा था.
वो जल्दी से प्रेस करके बाहर जाने लगा तो मैंने उसे फिर रोक लिया और इधर उधर की बातें करने लगी.
फिर उसकी और पीठ करके पेटीकोट खोल के ब्रा पहनने लगी. आईने में अजय की बैचनी मुझे साफ़ दिख रही थी.
मैंने अजय को अपनी ब्रा का हुक लगाने को कहा. वो डरते डरते मेरे पास आया और हुक लगाया, उसके हाथ काम्प रहे थे.
मैंने उसे कहा- अब तुम्ही रोज मेरी ब्रा का हुक लगा दिया करना, मुझे हाथ पीछे जाने में प्रॉब्लम होती है. वो हामी भर कर वहीं खड़ा रहा, जैसे वो बुत बन गया हो, जैसे उसे कुछ समझ ही ना आ रहा हो.
फिर मैंने वहीं उसके सामने ब्रा में कैद अपनी चूचियों को दिखाते हुए पेटीकोट नीचे कमर पर बाँधा. वो मेरे बदन को निहार रहा था और मैं उससे इधर उधर की बातें कर रही थी जैसे यह सब नार्मल था.
फिर मैंने उसके सामने ही पैंटी पहनी. अजय ऐसे व्यवहार कर रहा था जैसी मानो मैंने उसे सम्मोहित कर लिया हो. वो चुपचाप मेरे अधनंगे बदन को देख रहा था और मुझसे आँखें बचा के अपने लंड को सहला रहा था.
उस दिन के बाद अजय हमेशा मेरी ब्रा का हुक खोला और लगाया करता था. कई बार मैं उसे खोलने को बुला लेती थी.
मैं भी ब्रा पहनते और खोलते समय उसे अपने चूचों के दर्शन करवा देती थी.
अब अजय ज्यादा समय मेरे साथ बिताने लगा था और मेरी ध्यान भी रखने लगा जैसे मानो मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ.
खाना भी हम साथ बनाते थे और किचन में काम करते समय कई बार वो मेरे अंगों को छू देता था जिसके बदले मैं भी मौका देख के उसके अंगों को छू देती या अपने चूचियाँ या चूतड़ उसके बदन से रगड़ देती थी.
जब अजय कॉलेज जाता या अपने दोस्तों के पास जाता तो मेरा दिल करता था मैं भी उसके साथ चली जाऊं … पर मैं खुद को कंट्रोल करती. अजय भी समझदार था, वो मेरे पति के सामने मुझे दूरियां बना के रखता था.
अजय के साथ मुझे मजा तो आ रहा था पर अब भी मेरी चूत अब भी खाली पड़ी थी, उसे अब तक अजय लंड का स्वाद नहीं मिला था.
अब हम दोनों एक दूसरे को गले लग के गुड मॉर्निंग विश किया करते थे. अजय भी कई बार मुझे जोर से अपने बांहों में जकड़ लेता था और बहाने से मेरे कूल्हों से मुझे पकड़ के मुझे उठा लेता था. कई बार अजय मुझे पीछे से पकड़ के मेरी गांड में अपने लंड फंसा देता था और कभी मेरे पेट को तो कभी मंगल सूत्र को देखने के बहाने मेरी चूचियों से खेलता रहता था.
मुझे भी बड़ा मजा आता था और मैं भी अपने चूतड़ों को मटका मटका करके अपनी गांड से उसके लंड को मसलने की कोशिश करती रहती थी. एक दूसरे के अंगों को छूना, गाल और गले को चूमना अब हमारे लिए आम बात हो गई थी.
एक दिन मैं नहा रही थी और गलती से तौलिया ले जाना भूल गई क्योंकि तौलिया छत पे था.
पहले मैंने नंगी ही बाहर कमरे में आकर तौलिया ढूंढा पर नहीं मिलने पर अजय को तौलिया लाने को बोल के बाथरूम में वापस चली गई.
थोड़ी देर बाद अजय तौलिया लेकर आया और मुझे आवाज लगाई. मैंने कहा- दरवाजा खुला है, अंदर आकर रख दो.
अजय अंदर मुझे शावर के नीचे नंगी नहाती हुई देखने लगा. वो बिना पलक झपकाए अपनी चाची को देख रहा था.
मैंने पूछा- तुम्हें भी नहाना है क्या? वो बोला- नहीं, ये बाथरूम काफी बड़ा और सुन्दर है.
मैं भी उसके हाथ से तौलिया लेती हुई अपने नंगे बदन को पौंछने लगी. लेकिन मैं चाहती थी कि अजय तौलिया से मेरे गीले बदन का पानी सुखाये. पर वो चूतियों की तरह खड़ा रहा.
फिर हम बातें करते हुए बाहर आ गए और मैंने कपड़े पहन लिए.
उस दिन मुझे अजय पे काफी गुस्सा आ रहा था, इतनी सुन्दर औरत जिसकी दीदार को सारा मुहल्ला परेशान रहता है, वो नंगी खड़ी है और इस चूतिये को बाथरूम दिख रहा था.
अजय समझ गया कि मैं नाराज हूँ. वो मुझे मेरी उदासी का कारण पूछने लगा और ज़िद करके सोफे पे मुझसे चिपक का बैठ गया.
जब उसकी जिद बढ़ गई तब मैंने बात पलटने को उससे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या? उसने साफ़ मना कर दिया.
फिर मैंने बातों बातों में पूछा- पहले कभी किसी लड़की को नंगा देखा है क्या? उसने धीरे से शरमाते हुए कहा- चाची जी, आपको कई बार देखा पर आज आपको देख के मजा आ गया.
फिर उसने धीरे से पूछा- आप अपने नीचे के बालों को क्यों नहीं साफ़ करती? उसके मुँह से इस तरह की बात की मुझे उम्मीद न थी.
फिर भी मैं तपाक से बोली- किसके लिये साफ़ करूं? उसने पूछा- क्यों चाचाजी कुछ बोलते नहीं?
मैंने कहा- उन्हें जैसे भी मिल जाये सब चलता है, वैसे तुम भी तो साफ़ नहीं करते.
यह सुनते ही वो सकपका गया और पूछा- आपको कैसे मालूम? मैं बोली- दरवाज़ा खोल के नहाओगे तो सब मालूम चल ही जायेगा.
कुछ दिन और गुजर गए अब हम दोनों को एक दूसरे के सामने नंगा होने में कोई शर्म नहीं आती थी. पर अब भी हमारे लंड और चूत का मिलन नहीं हुआ था. आग दोनों और थी पर कोई पहल करने को तैयार नहीं था.
कपड़े के ऊपर से तो हम एक दूसरे के बदन को प्यार से सहला लेते थे पर हाथ अंदर ले जा कर सहलाना अभी बाकी था.
फिर एक दिन मैंने भी मन बना के बाथरूम में अपने झांटों को साफ़ किया और अपनी पीठ पर साबुन लगाने के बहाने अजय को अंदर बुलाया. उस वक्त मैं अपनी पेटीकोट को चूचियों पे बंधी हुई थी और अजय अपनी निक्कर और टीशर्ट में था.
मैंने उसे कपड़े उतरने को कहा. उसने अपनी टीशर्ट तो उतार दिया पर अपनी निक्कर नहीं उतरना चाहता था. हम दोनों ने कई बार एक दूसरे को नंगा देखा था तो उसकी वो बात मुझे अच्छी नहीं लगी.
फिर भी मैंने अपनी पेटीकोट उठा के उसे अपनी बिना बालों वाली सुन्दर चूत का दर्शन करवाए.
अजय ने यह देख के तुरंत अपनी निक्कर उतार दी और अपना बिना बालों वाले 7 इंच के लंड दिखाया. उसने भी अपने नीचे के बालों को मेरे कहने पे साफ़ कर लिया था.
यह देख के हम दोनों ने एक साथ वाओ बोले और नज़दीक आकर एक दूसरे के अंगों को छूने सहलाने लगे. जल्द ही अजय का लंड खड़ा हो गया.
उसने मेरा पेटीकोट और अपनी निक्कर उतार दी और मेरे बदन को पागलों की तरह चूमने सहलाने लगा. मैंने भी उसका लंड पकड़े हुए खुद को उसे सौंप दिया.
बाथरूम में ये सब करना असुविधाजनक लग रहा था तो मैं उसे उसके लंड से खींच के रूम में ले आई और वहाँ बेड पे लिटा के उसके उसके ऊपर चढ़ के चूमने लगी और अजय का लंड अपनी चूत में रगड़ने लगी.
अजय की सांसें तेज चल रही थी. मैंने धीरे से पूछा- पहली बार क्या? उसने शरमाते हुए हाँ कहा.
मैं समझ गई थी कि अब सब मुझे ही करना है.
तो मैं अजय को लिटा के धीरे से अपनी चूत को उसके खड़े लंड पे सेट करके धीरे धीरे बैठने लगी और धीरे धीरे अजय का लंड मेरी चूत में समाता चला गया. अजय लेटा हुआ अपनी गर्दन उठा के यह सब देख रहा था.
फिर मैंने अजय के लंड पे सवार होके जी भर के चुदवाया और फिर अजय ने मेरे साथ ही अपना पानी मेरे चूत की गहराई में छोड़ दिया.
हम दोनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे.
थोड़ी देर बाद जब आंख खुली तो मैं अब भी अजय के ऊपर और अजय का लण्ड मेरे अंदर था, जो धीरे धीरे अपना आकर ले रहा था. मैंने पूछा- मजा आया? उसने शरमाते हुए हाँ कहा और मेरी चूचियों में अपना मुँह छिपा लिया.