नंदोई जी ने मनाई सुहागरात

दोस्तो, मेरा नाम मालती है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र इकीस साल है, एक बच्चे की माँ हूँ, शादी के ठीक ग्यारवें महीने मैंने लड़का जना है। आजकल घर में रहती हूँ, सासू माँ और मैं दोनों अकेली होती हैं।

एक साल पहले में बी.ए पहले साल में थी जब माँ-बापू ने लड़का ढूंढ कर मेरी शादी पक्की कर दी। हमारे समाज में छोटी उम्र में शादियाँ होती हैं। शादी से पहले मेरे ३ लड़कों के साथ चक्कर रहे थे और तीनों के साथ मेरे शारीरक संबंध बने और मुझे चुदाई का पूरा पूरा चस्का लगा।

पहली चुदाई सोनू नाम के लड़के के साथ हुई जब मैं अठरा साल की थी।
उसके बाद दो और एफेअर चले।

मुझे लड़के की फोटो दिखाई गई थी। शादी से बीस दिन पहले मेरा घर से आना जाना बंद हो गया था और चुदाई भी !

हालांकि एक चक्कर मेरा पड़ोसी के साथ था, वो मुझसे शादी करना चाहता था लेकिन हम मजबूर थे क्योंकि एक गाँव में शादी मुश्किल काम था।

शादी से तीन रात पहले उसने मुझे रात को कॉल कर छत पर बुलाया। उस वक्त रात के दो बजे थे। मिलते ही उसने मुझे दबोच लिया और मेरे होंठ चूसने लगा, साथ में उसने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल मेरी चूत को मसलना चालू कर दिया। मैं पूरी गर्म हो गई और उसके लौड़े को मसलने लगी। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल दिया और मैंने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

वो बोला- जान, कुर्ती उठा लो, आज
आखिरी बार इतने गोल मोल मम्मे चूसने हैं !

मैंने कहा- ऐसा मत कहो ! मैं आती रहूंगी मायके ! मिलकर जाया करुँगी !

उसके बाद मैंने सलवार खोल दी और उसने वहीं फर्श पर मुझे ढेर कर लिया और अपना लौड़ा चूत में डाल रफ़्तार पकड़ी। एक साथ ही हम शांत हुए और उसने मुँह में ठूंस दिया।

अगले दिन शगुन की रसम होनी थी। हमारे इधर सुबह पहले लड़की वाले लड़के को शगुन लगाने जाते हैं और साथ में दहेज़ का जो भी सामान देना, भेजना हो वो सब कुछ ले जाते हैं!

सभी शगुन लगाने चले गए, पीछे मैं और दादी माँ थी।

उसके बाद शाम को लड़के की बहनें, भाभियाँ और उनके पति लड़की को शगुन की चुन्नी, गहने, सिंगार के सामान साथ मेंहदी लगाने आई। उनमे से मेरी नज़र बार बार एक मर्द पर टिकने लगी वो भी मुझे देख वासना की ठंडी आहें भर रहे थे।

शगुन डालते वक्त फोटो होने लगी तो मालूम चला वो मेरे एक नंदोई सा हैं। क्या मर्द था ! मैं मर मिटी थी ! वो भी जानते थे, उन्होंने इधर उधर देख मुझे आंख मारी, मैं होंठ से चबाते हुए मुस्कुरा दी।

मैं अपने कमरे में कपड़े
बदलने चली गई, लहंगा भारी था, कमरा बंद किया पर अपने कमरे से बाथरूम की कुण्डी लगाना भूल गई। मैंने जल्दी से कुर्ती उतारी और लहंगा खोला। दरवाज़े की तरफ मेरी पीठ थी। जैसे ही मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में रह गई तो एक आवाज़ आई- क्या हुसन पाया है ! क़यामत !

मुड़ कर देखा तो सामने नंदोई जी थे, बोले- बाथरूम मेरे कमरे के साथ जुड़ा है। उसका एक दरवाज़ा लॉबी में भी खुलता है।

मैंने कमरे में नंदोई सा को देख झट से तौलिये से खुद को छुपाया। वो मेरी ओर बढ़े, मैं पीछे हटी, आखिर में बेड पर गिर गई। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे तपते होंठों से अपने होंठ मिला दिए। उन्होंने ड्रिंक की हुई थी।

प्लीज़ ! मुझे सबके बीच वापस लौटना है ! बाद में कभी

बोले- पहले गर्म करती हो ! फ़िर मना करती हो?

वो दोनों हाथों से मेरे मम्मे दबाने लगे, मुझे कुछ होने लगा, मेरी चूत मचल उठी और मैंने उनके लौड़े को पकड़ लिया। जब वो मेरा दाना मसल देते तो मैं मचल उठती !

थोड़ी देर में खुद ही वो अलग हो गए बोले- भाभी कल सही !

अगले दिन मैं दुल्हन बनी। पार्लर से दुल्हन बनकर पहुंची पैलेस !

पापा ने शहर का सबसे महंगा पैलेस बुक किया था।
हमारे इधर शादी दिन में होती है। बारह बजे बारात आई, मिलनी की रसम के बाद नाश्ता हुआ। फिर स्टेज पर जयमाला हुई। काफी देर वहीँ बैठे। सबने शगुन वगैरा डाला, फोटो खिंचवाई।

ऊपर मंडप तैयार था। आज नंदोई सा बहुत ज्यादा हैण्डसम लग रहे थे। बहुत बढ़िया डी.जे कार्यक्रम का प्रबन्ध किया था पापा ने ! एक तरफ दारु भी
चलवा दी ताकि जिसको मूड बनाना हो बना ले ! वैसे भी मेरे ससुराल में सभी शादी-बियाह में पीते ही थे।

खैर मंडप पर मुझे दीदी, भाभी, सहेलियाँ लेकर गईं और फेरों के बाद मंगल सूत्र पहनाया गया। दूल्हे के बराबर नंदोई सा उसकी हर रसम में मदद कर रहे थे ताकि उसको कोई घबराहट न हो ! इधर मुझे भाभी सब बताये जा रहीं थी। नंदोई सा मेरी भाभी पर भी लाइन मार लेते।

शाम पाँच बजे तक सब ख़त्म हुआ, उसके बाद मेरी डोली उठी और मैं गुलाबों से सजी कार में बैठ ससुराल आ गई। मांजी ने पानी वारने की रसम पूरी की। मुझे भाभी और इधर वाली दीदी अलग कमरे में ले गईं। मुझे कहा कि
कपड़े बदल कर फ्रेश हो जाओ।

बाहर लॉन में सब नशे में धुत हो नाच-गा रहे थे। शगुन मांगने वालो की लाइन लगी पड़ी थी, ससुरजी और नंदोई सा तो उनको ही सम्भाल रहे थे।

रात हुई, दीदी बोली- एक सरप्राईज़ बाकी है !

कुछ पल के लिए पतिदेव पास आये, बोले- बहुत आग लग रही हो !

उन्होंने पी रखी थी, नशा काफी था, होंठ चूसने लगे। बोले- बदल लो कपड़े !

उन्होंने मेरा लाचा खोला, फिर कुर्ती की डोरी खींची और अलग कर दी, पीठ पर चूम लिया।

मैं सिकुड़ सी गई।

अब दोनों आओ भी ! गाने की रसम पूरी करनी है !

पति ने मेरे मम्मे दबाये और मैंने भी सूट पहन लिया और बाहर गए। वहाँ पंरात में कच्ची लस्सी में सिक्का गिरा कर ढूंढने की रसम हुई। उसके बाद दीदी बोली- तेरे नंदोई सा ने तुम दोनों के लिए फाइव स्टार में स्वीट बुक
किया है !

पतिदेव को काफी नशा हो चुका था, दीदी ने नंदोई सा को उन्हें और पिलाने से रोका। कार में बैठ कर भी उनको काफी नशा था। नंदोई सा हमें छोड़ने आये। पहले नीचे पूरा डाइनिंग हॉल हम तीनों के लिए बुक था। मेरे लिए तब तक कोल्ड ड्रिंक आर्डर की, उन दोनों ने लिए मोटे पटियाला पैग ! दो पैग के बाद पतिदेव लुढ़क गए। मैं कुछ-कुछ समझ गई।

बस करिए न आप ! कितनी पिओगे ?

भाभी जान ! आज ही तो पीने का दिन है !

खाना खाया, नंदोई सा ने मुझे कमरे की चाभी गिफ्ट की और रूम सर्विस वाला मुझे कमरे तक लेकर गया। कमरा खोलते वक्त देखा- हाथ में दो चाभियाँ थीं- ४०५ और ४०७ वो दोनों भी आ गए !

जाओ भाई अपनी दुल्हन के पास ! सुहागरात मनाओ !

इनको बहुत ज्यादा पिला दी गई थी। कमरे तक आते वक्त तक दारू हाथ में थी। उतनी ही नंदोई सा ने पी लेकिन वो हट्टे-कट्टे थे।

ये तो बिस्तर पर लेटते सो गए। मैं वाशरूम गई। पहली रात के लिए सबसे महंगी
नाइटी खरीदी थी, उसी रंग की ब्रा और पैंटी ! बदल कर वापस आई ! लाल गुलाबों वाले बिस्तर पर में इनके साथ लिपटने लगी, सोचा कि इस से नशा कम होगा। शर्ट उतार दी लेकिन इन्हें कोई होश न था।

तभी मुझे मोबाइल पर कॉल आई- कैसी हो जान ? मुझे मालूम है कि क्या हो रहा होगा ! ऐसा करो, हाउस-कीपर ने दो चाभी दी थी ना ! इसकी सुबह से पहले नहीं उतरेगी। बाहर से लॉक करो और इधर आ जाओ !

लेकिन मैं नाइटी में हूँ !

कोई बात नहीं ! रात के बारह बज चुके हैं, इन कमरों में कम लोग ही आते हैं !

मैं उठी,
इनको हिलाया, कमरा लॉक किया और नंदोई सा के कमरे में चली गई।

वाह भाभी ! क्या खूबसूरती है ! मदहोश कर देने वाली !

यह आपने क्या किया? इनको इतनी पिला दी?

वो उठे, मुझे बाँहों में लेते हुए बोले- क्या करता कल से तूने होंठ चबा और बाद में कमरे में जवानी दिखाई !

आप बहुत खराब हो !

मेज़ पर शेम्पेन और बियर पड़ी थी, मुझे कह कुहा कर बियर पिला दी उसके बाद अपनी मर्ज़ी से मग भर पिया। वो मुझे सोफा पर बिठा बीच में बैठ मेरे स्तनपान करने लगे। सिसकियाँ फूटने लगी, मैंने पाँव से उनके लौड़े को मसल दिया।

इतने में दीदी की कॉल आई नंदोई सा को !

उस वक्त मैं उनकी गोदी में अधनंगी बैठी थी।

कहाँ रह गए आप? सब ठीक तो है?

हाँ, उन दोनों को भेज दिया जान कमरे में ! इसने ज्यादा पी ली है ! सहारा देकर छोड़ कर नीचे आया हूँ ! बेचारी जानकी घबरा गई है, इसलिए उन्हें कुछ बताये बिना मैं अपने दोस्त के साथ नीचे बार में हूँ, कहीं साला
साहिब कोई गलती ना कर दें !

दीदी बोली- कोई बात नहीं ! सही किया आपने ! खुद मत पीना !

और फ़ोन साइलेंट पर लगा दिया मेरी दोनों टांगें खोल मेरी चूत जो कि सुबह ही शेव करवाई थी, उसपे होंठ रख दिए। मैं भड़क उठी। सोफ़े पर कोहनियों के सहारे उठ कर चूत चुसवाने लगी। अह उह सी !

मेरी जान क्या चूत है तेरी ! क्या जवानी है ! बाग़ लगा है माली भी ज़रूर रखें होंगे !

मैं शरमा सी गई !

उठा मुझे बिस्तर पर लिटा दिया !

मेरे मम्मो पर बियर डाल डाल कर चाटने लगे।

वाह नंदोई सा ! और चाटो ! मसलो इनको !

भाभी, कसम से तेरे जैसी जवानी वाली लड़की नहीं चोदी !

दीदी भी सुन्दर हैं !

हैं, लेकिन मेरे इस चाँद के सामने उसका रंग भी फीका है !

बातें करते हुए मैंने उनको निर्वस्त्र कर दिया, उनको बेड पर धकेलते हुए उनके कच्छे को उतार उनके लौड़े पर एख दिए अपने कांपते होंठ !

इतना लम्बा लौड़ा नंदोई सा?

मैंने भी कसम से अभी तक इतना मोटा और लम्बा नहीं उतरवाया चूत में !

ओह मेरी रानी, दिलबर ! कस के चूस इसको !

मैं नशे में थी, कुछ भी बके जा रही थी,
मैंने ६९ में लेटते हुए उनके लौड़े को चूसा और अपनी चूत को खूब चुसवाया।

नंदोई सा ! अब रुका नहीं जा रहा ! आओ अपनी भाभी के पास और उतर जाओ गहराई में !

ओह बेबी !

मैंने टांगें खोल लीं, वो बीच में आये और मैंने अपने हाथ से पकड़ लौड़ा ठिकाने पर रख दिया। उन्होंने जोर लगाया और उसका सर अन्दर घुस गया। काफी मोटा था लेकिन बेडशीट को जोर से पकड़े मैंने उनका सारा अन्दर डलवा लिया।

ओह भाभी ! वाह, क्या चूत है तेरी साली ! कितनी चिकनी है ! तू देख तेरा नंदोई बहिन की लोड़ी आज रेल बनाता है तेरी !

आह ! रगड़ो ! और रगड़ो ! फाड़ दो मेरी ! हाय ! मेरे कुत्ते चोद अपनी कुतिया को !

मेरे मुँह से यह सुन उनमें जोश भर गया- बहनचोद ! देखती जा साली रांड कहीं की ! यह ले मादरचोद ! यह ले !

उई उई ई ई तू ही असली मर्द है कमीने ! तेरा
लौड़ा ही सबसे अच्छा है !

कुछ देर उसी आसन के बाद दोनों टाँगें कन्धों पर रखी, जिससे पूरा लौड़ा जाकर बच्चेदानी से रगड़ खाता तो मुझे स्वर्ग दिखता !

उसके बाद मुझे घोड़ी बना लिया और ज़बरदस्त झटके लगने लगे।

और तेज़ तेज़ !

साथ में खाली बियर की बोतल मेरी
गांड में घुसाने लगे।

हाय साले ! यह क्या करने लगा है !

चल साली कुतिया ! मेरे बाल खींच !

गांड पर थप्पड़ मारा और बोतल एक तरफ़ रख दी। एक पल में लौड़ा चूत से निकाला और गांड में डाल दिया !

ओह हा और और ! बहुत बढ़िया !

मेरी गांड मारने लगे, साथ में मेरे दाने को चुटकी से मसल रहे थे। एक साथ में मेरा मम्मा पकड़ रखा था।

फिर चूत में डाल लिया और तेज़ होने लगे।

मैं झड़ने वाली हूँ !

अह अह ऽऽ ले साली ! साली ले ! कहते कहते उन्होंने मेरी चूत में अपना पानी निकाल दिया, मेरी बच्चेदानी के पास गरम पानी छोड़ा, जिससे मुझे अता आनंद आया।

बाकी का मैंने मुँह में डाल साफ कर दिया।

साढ़े तीन के करीब दोनों बाथरूम गए, शॉवर लिया, मैंने कपड़े डाले और अपने कमरे में आई, पूरे बिस्तर पर सलवटें डाल दी और गुलाबों को बिखेर दिया। सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ पैंटी छोड़ कर ! पति को जाते वक्त ही मैंने अंडरवियर छोड़ निर्वस्त्र कर दिया था। उनके पास लेट गई, उनकी बाजू अपने ऊपर डाल दी, सो गई।

सुबह के सात बजे अपने ऊपर किसी को पाया- पतिदेव थे ! मैं सोने की एक्टिंग करने लगी, उन्होंने प्यार से मुझे उठाया, मैं चुपचाप बाथरूम गई रूठने की एक्टिंग करते हुए !

जान क्या हुआ?

इतनी पी ली थी? क्यूँ सोचा नहीं था कि मेरी बीवी के साथ पहली रात है ! नशे में रौंद दिया आपने मुझे ! अंग अंग हिला दिया !सॉरी ! आगे से ऐसा नहीं होगा ! आपने बिना प्रोटेक्शन के मेरे साथ सब कर दिया ! अभी हमने एन्जॉय करना है अगर अभी गर्भवती हो गई तो?

कल से हम बाहर निकाल लिया करेंगे, आज किस्मत पर छोड़ दो !

उसके बाद अगली रात पतिदेव ने चोदा। आज कम पी रखी थी, घर में थे, झड़ने के समय बाहर खींच मेरे मुँह में डाल दिया !

दोस्तो, यह थी मेरी मस्त चुदाई जो हर पल मेरी आँखों में रहती है !

उसके बाद मौका देखा एक बार और नंदोई सा ने चोदा ! शादी के अगले महीने ही मेरी माहवारी रुक गई, मुझे चक्कर आये, डॉक्टर ने खुशखबरी सुना दी।

रात को मैंने पति से ऊपर से खफा होते कहा- देख लिया उस रात का नतीजा ?

लेकिन चल छोड़ कोई बात ना ! किस चीज़ की कमी है हमें !

यह गर्भ नंदोई सा के कारण ठहरा था। पहली ही रात तीन बार अपना माल मेरी बच्चेएदानी के पास छोड़ा था ! था भी इतना लम्बा कि मानो अन्दर घुसकर बच्चा डाल आये !

उनको मैंने फ़ोन पर बताया कि इनका पानी मैंने कभी अन्दर नहीं डलवाया, हमेशा गांड में या मम्मों पर ! सिर्फ आपका पानी अन्दर डलवाया था।

नशे में वो बहुत खुश हुए।

अब जब मैंने लड़का जना है, सासु माँ बहुत खुश हैं, पति भी नंदोई सा ने बुआ की तरफ से मेरे बेटे को चार तोले सोने की चैन, कड़ा, डायमंड का लाकेट डाला !

सो कैसी लगी मेरी आप बीती ? लिखना ज़रूर !

फिर बताऊँगी आगे लाइफ में क्या हुआ !

सहेली के ससुर से चुद गई मैं – 1

Saheli Ke Sasur Se Chud Gayi Main- Part 1

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम मालती है. मेरी पिछली सेक्स कहानी
कुंवारी चूत प्यार में चुद गई
आप सबको बहुत पसंद भी आई थी, जिसको लेकर मुझे बहुत से ईमेल भी मिले थे. मैं किसी को ज़्यादा जवाब नहीं दे पाई, इसलिए आपसे माफी चाहूँगी.

मैं एक छोटे से गांव की हूँ. ससुराल वालों की खेती है, पर सभी लोग शहर में रहते हैं. कभी कभी हमारे परिवार के लोग अपने गांव में आते हैं. खेती का कुछ काम होता है. गांव की भी एक सेक्स कहानी है, उसे मैं आपको बाद में बताऊंगी.

वैसे तो मेरा फिगर साइज़ आपको पहले भी मैं बता चुकी हूँ. नए दोस्तों के लिए मैं अपने 34-28-36 के फिगर को फिर से बता रही हूँ. मैं देखने में बहुत खूबसूरत हूँ.

शादी के कुछ दिनों बाद ही हम लोगों ने शहर में ही एक किराये का अलग मकान लिया. हमारे घर में कुछ दिक्कत चल रही थी. उधर जगह कम थी, इस वजह से भी दूसरा घर लेना पड़ा. इस नए घर से मेरे पति को ऑफिस जाने आने में जरा नज़दीक भी पड़ता था. मेरे पति काम से ज़्यादा बाहर ही रहते थे.

इस नए घर में जाने के कुछ दिन बाद मेरी मुलाकात मेरे बाजू में रहने वाली पड़ोसन वनिता से हुई. कुछ ही दिनों में हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए.

मेरे घर में मैं और मेरे पति ही रहते थे. वनिता के घर में उसके पति और ससुर के अलावा एक लड़का भी था. वनिता की सास अब इस दुनिया में नहीं थीं.

वनिता की उम्र 26 साल की है और उसकी फिगर भी मेरे जैसे ही 34-26-36 की है. उसका वजन 54 किलोग्राम के लगभग होगा व हाइट 5 फिट 3 इंच की है. वो देखने में खूबसूरत थी.

दोपहर में हम घर में ही रहते थे, तो वनिता मेरे घर आ जाती थी या मैं उसके घर चली जाती थी. हम दोनों धीरे धीरे खुल कर बातें करने लगे. हमारी बातों में सेक्स का रंग जमने लगा था. चुदाई के बारे में हम दोनों आपस में बड़े खुल कर चर्चा करती थीं. शादी से पहले क्या हुआ और शादी के बाद भी किसका किससे चक्कर रहा. आस पास के इलाके में कौन सी लड़की का किसके साथ चक्कर चल रहा है … वगैरह वगैरह.

फिर वनिता के ससुर जी से भी मुलाकात हुई. उसने मेरी थोड़ी बहुत बातें होती रहती थीं. जैसे वो पूछते कि कैसी हो, खाना खाया या नहीं … वगैरह.

फिर वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार से मेरे पति की पहचान भी अच्छे हो गई. राजेन्द्र कुमार भी मेरे घर आने लगे. ख़ास बात यह कि वनिता के ससुर राजेन्द्र बहुत हंसमुख इंसान थे. वे हमेशा मजाक के मूड में ही रहते थे. अपने इसी स्वभाव के चलते वो मेरे साथ और मेरे पति के साथ भी मजाक करने लगे.

एक दिन मैं घर में थी और वनिता कुछ काम से बाहर गई हुई थी. उसके ससुर राजेन्द्र कुमार जी बाहर गए हुए थे. तो उसके घर की चाभी मेरे पास थी.

वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार करीब 12:30 बजे मेरे घर पर आए. उन्होंने दरवाजे की बेल बजाई, मैं उस वक्त कपड़े धो रही थी. मेरी सलवार आधी गीली थी. तब मैंने बिना ओढ़नी के ही जल्दी से जाकर दरवाजा खोल दिया.

सामने राजेन्द्र कुमार थे. वे मुस्कुरा कर मेरे घर में अन्दर आ गए.
उन्होंने पूछा- क्या कर रही थी मालू?
मैं बोली- जी कपड़े धो रही थी. आप बैठें, मैं अभी आती हूँ.

मुझे ख्याल ही नहीं था कि वो मेरे मम्मों को देख रहे हैं. मैं कपड़े साफ़ करने लगी और बातें भी करने लगी.
तभी मेरा ख्याल गया कि वो मेरे मम्मों को हिलते हुए देख रहे हैं.
तब तक मेरा काम हो गया था, तो मैं हाथ साफ करके उनको पानी देने लगी.

पानी लेने के बहाने उनके हाथ मेरे हाथ को टच हो गए. राजेन्द्र जी ने मेरे हाथ से पानी का गिलास लिया और पानी पीने लगे. तब तक वनिता भी आ गई. वे दोनों अपने घर चले गए. मैं भी अपना सब काम करके हॉल में आ गई और टीवी ऑन करके सीरियल देखने लगी.

कुछ टाइम बाद दरवाजे की बेल फिर से बजी. मैंने दरवाजा खोला, तो सामने वनिता थी. वो अन्दर आई और मेरे पास बैठ कर टीवी देखने लगी. टीवी देखते हुए हम दोनों बात करने लगे.

बातों बातों में मैंने पूछ लिया- यार वनिता, तेरी सास को गुज़रे हुए कितना टाइम हुआ?
तो वो बोली- करीब 3 साल हो गए … क्यों पूछ रही हो?
मैं बोली- बस ऐसे ही पूछ रही हूँ, वैसे तुम ससुर राजेन्द्र जी का ख्याल बहुत अच्छे से रखती हो ना.
वो बोली- हां यार, रखना पड़ता है.

मैं चुप हो गई.

फिर वो बोली- यार एक बात पूछना चाह रही थी.
मैंने कहा- हां पूछो न!
तो बोली- यार मुझे लगता है कि मेरे ससुर जी को तुम कुछ ज्यादा ही देख रही थीं.
मैं बोली- नहीं यार … ऐसा कुछ भी नहीं था.
वनिता बोली- हम्म झूठ मत बोलो यार … एक बात कहूँ, मेरे ससुर जी तुम पर फ़िदा हैं.
मैं बोली- वो कैसे?
तो बोली- यार तुम जवान हो, खूबसूरत हो … और जब मैं चाभी लेने आई, तो दरवाजा खुला था, ससुर जी पानी का गिलास हाथ में ले रहे थे. उस वक्त उनकी नजरें तेरे मिल्की मम्मों पर थीं.
मैं बोली- नहीं यार.
तो वो बोली- ओके तो चल ट्राय करके देखते हैं कि क्या होता है.

मैं हंसी मजाक में उसकी बात मान गई. फिर वो कुछ देर बैठ कर अपने घर चली गई.

इसके बाद मैंने राजेन्द्र जी के सामने इस बात को चैक करना शुरू कर दिया. वे मेरे घर आते, तो मैं कभी उनके सामने झुक कर झाड़ू लगाने लगती, कभी पौंछा लगाने लगती. साथ ही मैं चुपके से उनके सामने देखती, तो वो हमेशा ही मेरे चूचों और गांड को ही देखते रहते.

इस तरह दो महीने हो गए.

फिर एक बार पति को रात में अपने काम से तीन हफ़्तों के लिए बाहर जाना था. तब वनिता के बेटे का बर्थडे भी था. उसने हम दोनों को भी बुलाया था.

उसी दिन पति को बाहर जाना था तो वे बोले- तुम होटल चली जाना, मैं कुछ गिफ्ट लेकर वहां दे जाऊंगा.
पति करीब छह बजे चले गए.

बर्थडे की पार्टी रात में एक होटल में थी, उसमें खाना भी रखा गया था. पार्टी में बहुत सारे लोगों को आना था, तो मैं सज धज कर जाने के लिए तैयार होने लगी. मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी और ससुर जी को याद करते हुए मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना, ये ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ था, जिसमें से मेरी पीठ एकदम नंगी दिख रही थी. मैं खुद को आईने में देखती रही और मुस्कुरा दी. इस ब्लाउज में से मेरे मम्मे बाहर आने को मचल रहे थे.

तभी वनिता मुझे बुलाने आई और मुझे देख कर बोली- वाओ … बड़ी मस्त लग रही हो … लगता है आज ससुर जी को दीवाना बना ही दोगी.
उसकी इस बात पर मैं भी मुस्कुरा दी.

उसके बाद मैं घर को ताला मार कर निकल गई.
हम सभी शाम को 7:30 को बाहर निकले थे. मैं, वनिता और वनिता के पति व राजेन्द्र जी और एक अन्य मेहमान स्विफ्ट कार से निकल पड़े. मेहमान कार में आगे बैठ गए. वनिता, मैं और राजेन्द्र जी पीछे की सीट पर थे. वनिता खिड़की वाली सीट पर थी. ससुर जी मेरे बाजू में बैठ गए थे. कार हाइवे पर आई, तो राजेन्द्र जी की कोहनी मेरे मम्मों को टच होने लगी भी. वनिता जानबूझ कर अपनी टांगें फैला कर बैठी थी. जिससे मैं और भी ज़्यादा वनिता के ससुर जी से चिपक गई थी. इसलिए उनको और भी मौका मिल गया था.

मैं उनकी कोहनी लगने से कुछ नहीं बोली. तो वो और हिम्मत करते हुए मेरे मम्मों को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मुझे भी मजा आने लगा था.
कुछ ही देर में हम लोग होटल पहुंच गए थे.

तभी मेरे पति का फोन आया, वो बोले- आप लोग कहां पर हो?
मैंने उन्हें बताया- हम लोग मोनार्क होटल में हैं.
वे बोले- ओके मैं भी आ रहा हूँ.

कुछ देर बाद पति गिफ्ट लेकर पहुंच गए. उसके बाद हम सबने केक काटा और छोटी सी पार्टी की. पार्टी के बाद हम सभी रात में घर पहुंचे. तब 10:30 बज गए थे.
कार में पहले से ही जगह नहीं थी. इसलिए पति बोले- आप लोग निकलो, मैं आता हूँ.

फिर वैसे ही कार में बैठे और घर को आने लगे. तो इस बार कार में बैठते ही राजेन्द्र जी ने अपना काम शुरू कर दिया और मेरी नाभि पर हाथ घुमाने लगे. मैंने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें देखा, तो वे थोड़ा रूक गए. फिर एक दो मिनट बाद वे मेरे मम्मों को छूने लगे. मेरी चुत का हाल बुरा हो चला था.

मैं हाथ से उनके हाथ को दबाने लगी. तभी वनिता की नज़र मुझ पर पड़ी, तो वो मुस्कुरा दी.

कुछ टाइम में हम लोग घर आ गए. मैं सबसे बाद में उतरी.

राजेन्द्र जी ने सबसे कहा- आप लोग चलो, मैं कुछ सामान लेकर आता हूँ.

उन्होंने मुझे भी रुकने को बोला. अपना मोबाइल फोन मेरे हाथ में धीरे से देते हुए बोले- ज़रा बैटरी देखना.

सब लोग बिना कुछ सोचे घर पर चले गए. तब राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और किस करके बोले- बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हो.
मैं शर्मा कर बोली- जी छोड़ दीजिएगा. कोई देख लेगा.

मैं घर पर आ गई. घर पर आते ही पति भी घर पहुंच गए. मैंने साड़ी उतारी और नाइटी पहन ली. उस रात पति ने मुझे एक बार चोदा और बाहर चले गए.

मैं वनिता के ससुर राजेन्द्र जी के बारे में सोचने लगी और अपनी प्यासी चुत में उंगली करने लगी.

एक बार चुदने के बाद भी मेरी चुत से ढेर सारा जूस निकल गया. फिर मैं सो गई.

सुबह पति का फोन आया कि वो आज ही वापस आ जाएंगे. उनका काम नहीं हुआ था और तीन हफ्ते तक रुकने का कार्यक्रम निरस्त हो गया था.

पति से बात करने के बाद मैंने फ्रेश होकर अपना देखा. करीब 12:00 बजे तक मैं अपने सब काम निपटा चुकी थी. तभी किसी ने दरवाजे की बेल बजाई. मैंने दरवाजा खोला तो सामने राजेन्द्र जी थे. वे मुस्कुरा कर अन्दर आ गए और मेरे पति के बारे में पूछने लगे.
मैं बोली- जी वो तो रात को ही बाहर चले गए थे. लेकिन आज शाम तक आ जाएंगे.

अब तक मैं दरवाजा बंद कर चुकी थी. मैं बोली- आपके लिए चाय बना कर लाती हूँ.

मैं किचन में चली गई. उस दिन मैं लैगी पहनी थी और फिट टॉप पहना हुआ था. इस ड्रेस में मेरा फिगर साफ़ दिख रहा था. मैं चाय बना कर लाई और उन्हें दी.
वो चाय पीते हुए बोले- अगर दूध पिलाती, तो और मजा आता.
मैं बोली- ओके अभी लाती हूँ.

तो राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- मुझे वो दूध नहीं पीना, तुम अपना दूध पिलाओ मेरी रानी.
राजेन्द्र जी ने मुझे अपनी गोद में खींच कर मेरे गालों पर एक किस कर दिया.

मैंने उन्हें किस करने दिया. वो और भी आगे बढ़ने वाले थे कि मैंने उन्हें रोक दिया.

मैं बोली- अंकल जी, अभी नहीं … मुझे कुछ टाइम और दो … उसके बाद हम सब करेंगे.
वे भी मान गए और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- ओके … पर मैं रोज किस करूंगा.
मैंने हमे भर दी- जी ओके.

वे कुछ टाइम बाद चले गए.

उसके एक घंटे बाद वनिता आ गई. वो कार वाली बात पूछने लगी.

तब मैं बोली- हां मजा तो आ रहा था.
वो बोली- ओके फिर आज क्या हुआ?

मैंने उसे सब बता दिया कि अंकल ने किस किया, मम्मों को दबाया … वगैरह वगैरह.

तो वनिता बोली- ओह गॉड … अब कल मेरे बाहर जाने पर तू उन्हें अपने घर बुला लेना और आगे वो क्या करते हैं, मुझे सब बताना.
मैं हंस कर आंख मारते हुए बोली- ओके.

फिर दूसरे दिन वनिता सुबह काम से बाहर चली गई. उस दिन 12 बजे से 2 बजे तक मैं भी अकेली थी. पति सुबह ही ऑफिस निकल गए थे.

वनिता के जाते ही उसके ससुर जी मेरे पास आ गए. मैंने दरवाजा खुला ही रखा था. मुझे पता था कि वनिता के जाते ही राजेन्द्र जी मेरे पास आ जाएंगे.

यही हुआ … वो वनिता के जाते ही मेरे घर आ गए. उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.

मैं किचन में थी, वो वहीं आ गए और मुझे पीछे से पकड़ कर किस करने लगे.
तब मैं बोली- अंकल, हॉल में चलो, मैं वहीं आती हूँ.

ससुर जी हॉल में आ गए.
कहानी में सेक्स का रंग चढ़ने लगा था. मेरी चुदाई की घड़ियां समाप्त होने को थीं.
आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

मेरी गांड का कांड हो गया

(Hot Ladki Gand Fuck Kahani)

दोस्तो, मेरा नाम मालती है. मेरी हाइट 5 फिट 2 इंच है और रंग मीडियम गोरा है.
मेरी फिगर साइज कुछ इस तरह से है. सीना 32 इंच, कमर 26 इंच और गांड 36 इंच की है जो कि बहुत बाहर निकली हुई है.
जब मैं गांड मटका कर चलती हूँ, तब जवान लड़कों की बात तो छोड़िए, बूढ़े आदमी भी चश्मा लगा कर गांड की थिरकन देखते हैं.

और आजकल तो दिन पर दिन मेरी गांड का साइज बढ़ता जा रहा है.

अभी मेरी उम्र 26 साल की है, पर मैंने आपको जहां सन 2017 में छोड़ा था, आज की सेक्स कहानी को मैं वहीं से शुरू करूंगी क्योंकि इन 6 सालों में मेरी लाइफ में अनेकों सेक्सी घटनाएं घटी हैं.

उन सभी को मैं एक एक करके सेक्स कहानी के रूप में आपके सम्मुख पेश करूंगी.

दोस्तो, आपने मेरी 6 साल पहले लिखी हुई कहानियां पढ़ी होंगी!
अगर नहीं पढ़ी हैं, तो प्लीज पहले पढ़ लो क्योंकि मेरी कहानियों से सिर्फ लड़कों के लंड ही खड़े नहीं होते, उनके लंड के नीचे के पहरेदार यानि टट्टों में भी नए खून का संचार होने लगता है.

लड़कियों की चूत की गहराई में बच्चेदानी तक में झनझनाहट होने लगती है और उनकी चूत का पानी टपकने लगता है.
ऐसा मेरे पाठक पाठिकाएं मेल द्वारा बताते हैं.

इसी लिए कह रही हूँ दोस्तों कि यदि आपने मेरी कहानियां नहीं पढ़ीं, तो प्लीज जरूर पढ़ें.

मेरा दावा है कि आपके लंड या चूत में पानी ना आ जाए, तो आप इस मालती को भूल जाना … और यदि आपने पढ़ी हैं … तो भी मेरे प्यारे दोस्तो प्लीज़ फिर से पढ़ो, जिससे पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी.

मेरी सहेली ने मुझे बिगाड़ा … और गर्म कर खोल दिया नाड़ा
भोला भाई और चुदक्कड़ बहन
चूत चुदाई का चस्का, चलती बस में चुदाई.
छोटी बहन की कामुकता जगाकर बुर चोदन करवाया
गांड बची तो लाखों पाये
कामवासना से बेबस मैं क्या करती

दोस्तो, मैंने कितने दर्द सहे हैं, यह मैं आपको लिख कर तो बता सकती हूं … पर महसूस नहीं करा सकती.
मालती का दर्द मालतीही जाने.

जब पापा ने मुझे फिर से चुदवाते हुए रंगे हाथ अपने ही घर में देख लिया, तो वे भड़क गए.
उसके बाद तो मेरी जो पिटाई हुई, वह मैं कभी भूल ही नहीं सकती.
बाप ने डंडों से ऐसी गांड बजाई और पीटी कि वैसी हालत कभी मेरे दुश्मन की भी ना हो.

पापा की पिटाई से सारी रात मेरी सूजी हुई गांड ने दर्द दिया और मुझे सोने ही नहीं दिया.
मैं उल्टी सोती, तो मुझे नींद नहीं आती. पर मैं क्या करती.

इस पिटाई के बाद मैंने पक्का ठान लिया था कि अब मैं खुद को काबू में रखूंगी, चाहे कुछ भी हो.
मेरी खुद की चूत मेरा नहीं मानेगी, तो मैं साली को चाकू से काट कर कुत्तों को डाल दूंगी.

यह मैं स्टाम्प पेपर में लिखकर देती हूं.

मैंने फिर से ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया कि मैं सुधर जाऊंगी और जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती, तब तक मैं लंड का मुँह तक नहीं देखूँगी.
कम से कम ऐसे दिन तो देखने ना पड़ेंगे.

मुझे ठीक होने में बीस दिन लगे.
वह बीस दिन का दर्द मैं कभी नहीं भूल सकती.

चार दिन तक में चल बैठ नहीं सकी, सात दिन तक मेरी प्यारी बाहर निकली मक्खन जैसी गांड ने खूब दर्द किया.

दोस्तो, दिन बीतते गए.
मैंने अपनी चूत चुदाई पर कंट्रोल करना सीख लिया था.

परंतु हमारे अड़ोस पड़ोस वाले मुझे ऐसे घूरते मानो मैंने कोई बड़ा कांड कर दिया हो … जैसे किसी आंतकवादी संगठन से मेरा नाता हो और ग्यारह मुल्क की पुलिस मुझे ढूंढ रही हो.

उन्हीं दिनों पड़ोस में एक शादी थी.
उधर जाने का न्योता आया तो मैं और मेरे परिवार के लोग वहां डिनर करने गए.

वहां मुझे मेरी कई सहेलियां मिलीं परन्तु कई सहेलियों ने मुँह फेर लिया तो कई मुझसे डरते डरते बात कर रही थीं.
बात करते समय उनकी आंखें इधर उधर देख रही थीं मानो उन्हें डर हो कि कोई देख ना ले!

मेरी एक पुरानी और पक्की सहेली भी वहीं आई थी.
वह मेरे साथ पहली क्लास से बारहवीं कक्षा तक मेरे साथ रही थी.
उसका नाम नेहा था, वह मुझ से बात कर रही थी.

तभी उसके पापा और मम्मी आए और मेरी तरफ घूरकर नेहा से बोले- घर चलो नेहा बेटी. कैसे कैसे बेशर्म लोगों को शादी में बुलाया है.
यह कहकर कुछ कुछ बड़बड़ाते हुए वे लोग नेहा को लेकर चले गए.

इस घटना ने मुझे अन्दर से हिला डाला.

मेरी सब पुरानी सहेलियां मुझसे दूर हो गईं और लोग मुझे देखकर आपस में खुशफुस करते हुए हंसने लगे.

मुझे खुद को भी ऐसा लगने लगा कि मैं कोई बहुत बड़ी वाली छिनाल हूं.

शादी से लौटकर हम सब घर आए तो मेरा चेहरा उतरा हुआ था.

मैं अपने कमरे में जाकर रोने लगी.
मेरा रोना बन्द ही नहीं हो रहा था.

तभी वर्षा कमरे में सोने आई और मुझे देखकर बोली- क्या हुआ मालती दीदी?
मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी

वह समझ गई और बोली- मालती दीदी, यह दुनिया खराब है, जो पकड़ा जाए वह चोर है … बाकी सब साधु हैं. तुम जरा सा भी टेंशन ना लो. थोड़े समय बाद सब भूल जाएंगे, सब सामान्य हो जाएगा. दुनिया में ऐसा ही चलता रहता है.

ऐसी घड़ी में मेरी छोटी बहन वर्षा ने मुझे हमेशा सहारा दिया है.

उसने हंसते हुए यह भी कहा- दीदी, लड़कियों की चूत चुदाई के लिए ही बनी है और लड़कों का लौड़ा चूत चुदाई के लिए ही बना होता है. कोई गड्डा खुदाई के लिए नहीं होता है.

अपनी छोटी बहन वर्षा की इस तरह की खुली बातें सुनकर मुझे बड़ा सुकून मिला और हम दोनों बहनें सो गईं.

अब एक महीने से ज्यादा हो गया था.
इस दरमियान मेरे मन में चुदाई का एक भी विचार नहीं आया था.

एक रात मुझे अचानक सपना आया.
सपने में डोरबेल बजी.

मैं घर में अकेली थी.
मैंने दरवाजा खोला तो किशोर आया था.
किशोर के बारे में जानने के लिए मेरी कहानी
कामवासना से बेबस मैं क्या करती
पढ़ें.
उसे देख कर मैंने जैसे ही दरवाजा बंद करना चाहा तो वह मुझे धक्का देकर घर के अन्दर आ गया.

मैं कुछ करती … तब तक वह दरवाजा बंद भी कर चुका था.

वह मुझे अपनी बांहों में भरकर बोला- मेरी प्यारी मालती डार्लिंग, मैं तुमसे दूर नहीं रह सकता. मुझे माफ कर दो.
इतना कह कर वह अपनी पैंट की जिप खोलकर मुझे अपना लंड दिखाने लगा.

उसको पता था कि मेरी मजबूरी क्या है.
मैं जब भी लंड देख लेती हूं, फिर मुझसे रहा नहीं जाता.

मैं उसका लंड देखना नहीं चाहती थी इसलिए मैं दूसरी तरफ घूम गई.
मैंने गुस्से से किशोर से कहा- कितने बेशर्म हो तुम … मेरे घर से बाहर निकलो विश्वासघाती कुत्ते कहीं के … नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी!

किशोर बोला- माया, तुम्हारी भरी भरी बाहर निकली गांड को मैं कभी भूल नहीं सकता. प्लीज़ मुझे एक और आखिरी बार माफ कर दो!
मैं बोली- जब मेरी इस गांड पर लाठियां बरसाई गईं, तब तुम तो मुझे अकेला मार खाने के लिए छोड़कर भाग गए थे. तुम मेरे पापा के सामने नहीं बोल सके कि तुम मुझसे प्यार करते हो … उल्टा तुमने मेरे पापा को बुड्ढा बोला और सब आरोप मुझ पर ही लगा दिए … और तुमने न जाने क्या क्या बोला था कि तुम्हारी बेटी को मेरा लंड पसंद है … मुझे उसकी शक्ल तक पसंद नहीं है! वह सब मैं कैसे भूल सकती हूं? तुमने मेरे दिल को तोड़ दिया था!

किशोर बोला- सॉरी मालती मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी थी सॉरी … सॉरी हजार बार सॉरी!
यह कहकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरा मुँह अपने हाथ से दबा दिया.

वह जबरन मुझे गले में किस करने लगा और अपना लंड मेरी गांड में बिना सलवार खोले दबाने लगा.
मैंने काफी कोशिशें की उससे छूटने की, पर सब नाकाम रहीं.

फिर वह अपना एक हाथ मेरी सलवार में डालकर चूत पर रगड़ने लगा.
मैं बहुत छटपटाई, पर उसके ताकतवर हाथों से छूट ना सकी.

उस वक्त मैं उन्नीस साल की कमसिन कली. वह पच्चीस साल का गबरू पत्थर उठाने वाला लोहे जैसा सख्त हाथ वाला मर्द था.
वह कोई कप्यूटर की-बोर्ड चलाने वाले लड़कियों जैसे मखमली हाथ वाला झण्डू नहीं था.

उसने करीबन दस मिनट तक बिना कुछ बोले मेरी चूत को रगड़ा.
इससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मेरी सांसें तेज होने लगीं.

उसने अपना हाथ मेरे मुँह से हटा लिया.
पर मेरे मुँह से आह आहहह की आवाज निकलने लगी थी.

मैं इतनी मदहोश हो गई थी कि उसके हाथ को अपनी चूत पर दबाने लगी- आहह आह ओहह करते रहो … आह!

अब किशोर का दूसरा हाथ मेरे स्तन दबाने लगा.
मैं गर्मा गई और कहने लगी- आह और दबाओ … दबाते रहो आह हह आह … मसल डालो मुझे … आह!

वह और जोर जोर से मेरे स्तन मसलने लगा.
मेरे स्तन लाल हो चुके थे.
मुझे काफी दर्द हो रहा था और मेरी आंखों से पानी भी निकल रहा था.

पर दोस्तो, मुझे यह दर्द फिर भी मीठा लग रहा था.
मैं जोरों से चिल्ला रही थी- और जोर से दबाओ किशोर आह हह!

किशोर ने मुझे पीछे से पकड़ा हुआ था.
उसने मुझे घुमा कर अपनी तरफ कर लिया.

मेरी आंखें बंद थीं.
वह मेरी तरफ देखने लगा.
मेरी आंखों से आंसुओं की धाराएं बह रही थीं.

मैं आंखें बंद किए हुई जोरों से चिल्ला रही थी- आह किशोर … और दबाओ मेरे स्तनों को निचोड़ दो … आहह!

तभी उसने मेरे स्तनों को दबाना रोक दिया.
मेरी आंखें खुल गईं.

मैंने गहरी सांस लेते हुए, कांपते लबों से उससे पूछा- क्या हुआ किशोर … रुक क्यों गए?
वह बोला- तेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं और तेरे चूचे भी लाल होकर सूज गए हैं. तुझे दर्द हो रहा है क्या?

मैं मदहोशी में बोली- दर्द होने दो ऐसे दर्द से मुझे खुशी मिलती है … कुछ नहीं होगा यार … दो चार दिन मेरे चूचे दर्द करेंगे और ज्यादा से ज्यादा दो दिन बुखार हो जाएगा, पर तुम अपनी हसरत पूरी करो!

उसने मेरे स्तनों को छोड़ दिया और घुटनों के बल बैठकर मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मेरी चूत चाटने लगा.

मेरी आंखें फिर से बंद हो गईं और अपने आप मेरे मुँह से आह की आवाज निकलने लगी.
पूरे रूम में मेरी आहह आह की आवाज ही गूंज रही थी.

किशोर को भी चूत चाटने का गजब का अनुभव था.
वह अपनी जीभ को मेरी चूत की गहराई तक अन्दर बाहर करता और बीच बीच में मेरी चूत की बाहर निकली हुई पंखुड़ियों को अपने दांतों से हल्का सा काटता तो मुझे स्वर्ग सी अनुभूति होती.
मेरे मुँह से आह निकल जाती और मैं उसका सिर अपनी चूत पर दबा देती.

करीब दस मिनट तक उसने मेरी चूत को चाटा.
फिर उसने मुझे जमीन पर ही उल्टा लिटा कर मेरे दोनों चूतड़ों को अपने ताकतवर हाथों से फैलाया और अपनी जीभ मेरी गांड की रिंग पर फेरने लगा.

वह बोला- कितने दिनों से तेरी गांड नहीं मारी मालती… तेरी गांड पर तो मैं सारी दुनिया कुर्बान कर दूं माया!
फिर उसने मेरी गांड में ऐसी जीभ लपलपाई कि मैं निहाल हो गई. हॉट लड़की गांड फक के लिए बेचैन हो गयी.
उसकी जीभ की रगड़ का सुख कह ही नहीं सकती.

मैंने कई दिनों से गांड नहीं मरायी थी, इस वजह से मेरी गांड सिकुड़ चुकी थी.
उसकी जीभ और थूक की लार ने मेरी गांड के छेद को काफी बड़ा बना दिया था.

मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था.
मैंने किशोर से कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो … तड़पाओ मत मेरी जान … आह अब रहा नहीं जाता!

यह सुनते ही किशोर अचानक से रुक गया.
मैंने पूछा- क्यों रुक गए. मेरी गांड में अपना लंड डाल दो और मेरी गांड को अपने गर्म वीर्य से भर दो आह मेरी गांड को ठंडी कर दो. फिर मेरी चूत को इतना चोदो कि आज वह भोसड़ा बन जाए.

मेरे प्यारे दोस्तो, इधर मैं आपको एक ज्ञान की बात बता दूँ. चूत वह चीज होती है, जिसमें थूक अथवा तेल-वेल कुछ लगाए बिना उंगली ही नहीं घुसती है.

इसके इतर जिन जिन लड़कियों की चूत चुद चुदकर भोसड़ा बन गई हो, वह हमेशा के लिए चाहे लड़की खड़ी हो, चाहे बैठी हो चाहे चल रही हो … और चाहे बिस्तर पर सोई हो … उसके भोसड़े के अन्दर उंगली जितना छेद खुला ही रह जाता है.
मतलब पूरी तरह से छेद बंद नहीं होता है. इस तरह की चूत को चूत नहीं, बल्कि भोसड़ा कहा जाता है.

वह बोला- तू अकेले ही मजा लेगी साली. पहले मेरा लंड चूस भोसड़ी की कुतिया … फिर देख आज तेरी गांड और चूत का कैसा मस्त फालूदा बनाऊंगा अपने इस फौलादी लंड से!

उसका लंड ज्यादा बड़ा नहीं था, बस 6 इंच का ही था. पर सख्त इतना कि लोहे की रॉड हो.

मैंने झट से उसका लंड अपने हाथों से पकड़ा.
उसके लंड में से भी चिपचिपा पानी निकल रहा था.

मैंने लंड पर निकले उस पानी को चाट लिया और एक सांस में लंड अपने मुँह में पूरा ले लिया.
किशोर के मुँह से आह हह निकल गई.

दोस्तो, मुझे भी लंड चूसने का अनुभव हो चुका है.
पहले पहले तो मुझे पूरा लंड मुँह में निगलना नहीं आता था … उल्टी या खाँसी हो जाती थी.
पर दोस्तो अब मैं पूरे लंड को अन्दर निगल कर देर तक सांस रोक कर मौत को छूकर वापस आ सकती हूं.

वाह क्या डायलॉग मार दिया शाबाश मालती डार्लिंग …

फिर मैंने उसके लंड को ऐसा चूसा कि लंड का ऊपर का भाग लाल हो गया.

किशोर का अब वीर्य निकलने वाला ही था, तब उसने कहा- मालती आह … मेरा पानी निकलने वाला है!
मैंने उसका लंड मुँह से निकाला और जल्दी से उल्टी हो गई. 

मैंने कहा- जल्दी से मेरी गांड में लंड डाल दो. मैं वीर्य की एक भी बूंद वेस्ट जाने नहीं दे सकती!

उसने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ा और गांड के छेद पर सैट कर दिया.
मुझे उसके लंड का अग्र भाग गर्म गर्म महसूस हो रहा था.

वह बोला- डालता हूं माया!
मैंने कहा- अब पूछना कैसा … जल्दी डालो मेरी गांड की गर्मी शांत करो और भूलना नहीं साले … सारा वीर्य मेरी गांड में ही जाना चाहिए समझे, नहीं तो चूची से तेरी गांड मार दूँगी.

उसने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड मेरी गांड पर सैट करके जोर लगाकर फच से मेरी गांड में उतार दिया.

मेरी ना चाहते हुए भी चीख निकल गई- उई ईईई माँ!

मैं ऐसी छटपटाई और बोली- प्लीज निकालो अभी … फिर थोड़ी देर बाद में डाल लेना.

उस कमीन ने मेरी एक नहीं सुनी, उल्टा मेरा मुँह दबा दिया और मेरी गांड मारता रहा.

फिर अचानक से मेरा सपना टूट गया.
सुबह हो गई थी … मेरी नींद खुल चुकी थी.

मैं बिस्तर पर पड़ी पड़ी मन ही मन में किशोर को गालियां देने लगी थी ‘कुत्ता कहीं का …’

इस सपने का अर्थ यह था कि मैं अब भी उसे नहीं भूल पा रही थी.

पहले वह मुझे वास्तव में चोदता था … अब भोसड़ी का मेरे सपनों में भी मेरी गांड मार जाता है.

मैं बिस्तर से उठ कर बैठी तो मेरा शरीर भारी भारी लग रहा था.
सिर दर्द भी था.

कमरे में मैं और मेरी छोटी बहन वर्षा एक ही बेड पर सोती हैं. वह स्कूल में बारहवीं में है.
वह रोज सुबह 6 बजे उठकर नहाकर नाश्ता करके 7 बजे स्कूल चली जाती है.
आज वह जा चुकी थी.

मैं मुँह धोने के लिए बिस्तर से उठी तो मेरी गांड और मेरे चूचे बहुत दर्द कर रहे थे.

मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.
मेरे कमरे में ही ड्रेसिंग टेबल है, उसमें एक बड़ा सा आईना लगा है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बारीकी से अपने जिस्म को देखने लगी.

मेरे स्तन एकदम लाल और सूज चुके थे और मैंने घूमकर अपनी गांड को आईने में देखा, तो उसमें चिपचिपा सफेद पानी बह रहा था और मेरी गांड का छेद लाल लाल टमाटर सा हो गया था.

मैंने अपनी गांड में एक उंगली डाली, तो वह आराम से चली गयी.
मैंने दो उंगलियां डालीं, वे भी चली गईं.

मैं स्तब्ध रह गयी कि मुझे सपना आया था कि हकीकत में कोई भोसड़ी का मेरी गांड मार गया?

दोस्तो, बाकी की घटना अगली कहानी में लिखूँगी.

आपको यह हॉट लड़की गांड फक कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर ईमेल के माध्यम से बताएं.
आपके मेल से मुझे और कहानियां लिखने की प्रेरणा मिलेगी. 

maltipatil97@gmail.com

अंकल से मैं जी भर कर चुदी (Garam Choot Me Old Lund)

गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.

मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.

वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।

मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।

ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।



मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।

मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।

शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!

मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।

मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.

लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।

उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।

वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।

बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।

तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।

बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।

मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.

फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।

जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!

मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।

मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।

मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।

मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।

मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।

मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।

एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।

अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।

मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।

वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!

फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।

फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।

मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।

मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।

मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।

मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।

इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।

मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.

वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।

उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।

दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!

मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।

आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।

अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।

इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।

फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।

उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.

फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।

मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।

मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.

मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।

उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।

वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।

वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!

वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।

फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।

मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।

मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।

उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।

वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।

मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।

फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।

मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।

सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।

मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!

तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।

मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.

मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।

बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।

मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।

उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।

मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।

मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!

वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।

अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।

सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।

मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।

इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।

सुबह उठ कर वे चले गये।

उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
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