नंदोई जी ने मनाई सुहागरात

दोस्तो, मेरा नाम मालती है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र इकीस साल है, एक बच्चे की माँ हूँ, शादी के ठीक ग्यारवें महीने मैंने लड़का जना है। आजकल घर में रहती हूँ, सासू माँ और मैं दोनों अकेली होती हैं।

एक साल पहले में बी.ए पहले साल में थी जब माँ-बापू ने लड़का ढूंढ कर मेरी शादी पक्की कर दी। हमारे समाज में छोटी उम्र में शादियाँ होती हैं। शादी से पहले मेरे ३ लड़कों के साथ चक्कर रहे थे और तीनों के साथ मेरे शारीरक संबंध बने और मुझे चुदाई का पूरा पूरा चस्का लगा।

पहली चुदाई सोनू नाम के लड़के के साथ हुई जब मैं अठरा साल की थी।
उसके बाद दो और एफेअर चले।

मुझे लड़के की फोटो दिखाई गई थी। शादी से बीस दिन पहले मेरा घर से आना जाना बंद हो गया था और चुदाई भी !

हालांकि एक चक्कर मेरा पड़ोसी के साथ था, वो मुझसे शादी करना चाहता था लेकिन हम मजबूर थे क्योंकि एक गाँव में शादी मुश्किल काम था।

शादी से तीन रात पहले उसने मुझे रात को कॉल कर छत पर बुलाया। उस वक्त रात के दो बजे थे। मिलते ही उसने मुझे दबोच लिया और मेरे होंठ चूसने लगा, साथ में उसने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल मेरी चूत को मसलना चालू कर दिया। मैं पूरी गर्म हो गई और उसके लौड़े को मसलने लगी। उसने अपना लौड़ा बाहर निकाल दिया और मैंने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

वो बोला- जान, कुर्ती उठा लो, आज
आखिरी बार इतने गोल मोल मम्मे चूसने हैं !

मैंने कहा- ऐसा मत कहो ! मैं आती रहूंगी मायके ! मिलकर जाया करुँगी !

उसके बाद मैंने सलवार खोल दी और उसने वहीं फर्श पर मुझे ढेर कर लिया और अपना लौड़ा चूत में डाल रफ़्तार पकड़ी। एक साथ ही हम शांत हुए और उसने मुँह में ठूंस दिया।

अगले दिन शगुन की रसम होनी थी। हमारे इधर सुबह पहले लड़की वाले लड़के को शगुन लगाने जाते हैं और साथ में दहेज़ का जो भी सामान देना, भेजना हो वो सब कुछ ले जाते हैं!

सभी शगुन लगाने चले गए, पीछे मैं और दादी माँ थी।

उसके बाद शाम को लड़के की बहनें, भाभियाँ और उनके पति लड़की को शगुन की चुन्नी, गहने, सिंगार के सामान साथ मेंहदी लगाने आई। उनमे से मेरी नज़र बार बार एक मर्द पर टिकने लगी वो भी मुझे देख वासना की ठंडी आहें भर रहे थे।

शगुन डालते वक्त फोटो होने लगी तो मालूम चला वो मेरे एक नंदोई सा हैं। क्या मर्द था ! मैं मर मिटी थी ! वो भी जानते थे, उन्होंने इधर उधर देख मुझे आंख मारी, मैं होंठ से चबाते हुए मुस्कुरा दी।

मैं अपने कमरे में कपड़े
बदलने चली गई, लहंगा भारी था, कमरा बंद किया पर अपने कमरे से बाथरूम की कुण्डी लगाना भूल गई। मैंने जल्दी से कुर्ती उतारी और लहंगा खोला। दरवाज़े की तरफ मेरी पीठ थी। जैसे ही मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में रह गई तो एक आवाज़ आई- क्या हुसन पाया है ! क़यामत !

मुड़ कर देखा तो सामने नंदोई जी थे, बोले- बाथरूम मेरे कमरे के साथ जुड़ा है। उसका एक दरवाज़ा लॉबी में भी खुलता है।

मैंने कमरे में नंदोई सा को देख झट से तौलिये से खुद को छुपाया। वो मेरी ओर बढ़े, मैं पीछे हटी, आखिर में बेड पर गिर गई। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे तपते होंठों से अपने होंठ मिला दिए। उन्होंने ड्रिंक की हुई थी।

प्लीज़ ! मुझे सबके बीच वापस लौटना है ! बाद में कभी

बोले- पहले गर्म करती हो ! फ़िर मना करती हो?

वो दोनों हाथों से मेरे मम्मे दबाने लगे, मुझे कुछ होने लगा, मेरी चूत मचल उठी और मैंने उनके लौड़े को पकड़ लिया। जब वो मेरा दाना मसल देते तो मैं मचल उठती !

थोड़ी देर में खुद ही वो अलग हो गए बोले- भाभी कल सही !

अगले दिन मैं दुल्हन बनी। पार्लर से दुल्हन बनकर पहुंची पैलेस !

पापा ने शहर का सबसे महंगा पैलेस बुक किया था।
हमारे इधर शादी दिन में होती है। बारह बजे बारात आई, मिलनी की रसम के बाद नाश्ता हुआ। फिर स्टेज पर जयमाला हुई। काफी देर वहीँ बैठे। सबने शगुन वगैरा डाला, फोटो खिंचवाई।

ऊपर मंडप तैयार था। आज नंदोई सा बहुत ज्यादा हैण्डसम लग रहे थे। बहुत बढ़िया डी.जे कार्यक्रम का प्रबन्ध किया था पापा ने ! एक तरफ दारु भी
चलवा दी ताकि जिसको मूड बनाना हो बना ले ! वैसे भी मेरे ससुराल में सभी शादी-बियाह में पीते ही थे।

खैर मंडप पर मुझे दीदी, भाभी, सहेलियाँ लेकर गईं और फेरों के बाद मंगल सूत्र पहनाया गया। दूल्हे के बराबर नंदोई सा उसकी हर रसम में मदद कर रहे थे ताकि उसको कोई घबराहट न हो ! इधर मुझे भाभी सब बताये जा रहीं थी। नंदोई सा मेरी भाभी पर भी लाइन मार लेते।

शाम पाँच बजे तक सब ख़त्म हुआ, उसके बाद मेरी डोली उठी और मैं गुलाबों से सजी कार में बैठ ससुराल आ गई। मांजी ने पानी वारने की रसम पूरी की। मुझे भाभी और इधर वाली दीदी अलग कमरे में ले गईं। मुझे कहा कि
कपड़े बदल कर फ्रेश हो जाओ।

बाहर लॉन में सब नशे में धुत हो नाच-गा रहे थे। शगुन मांगने वालो की लाइन लगी पड़ी थी, ससुरजी और नंदोई सा तो उनको ही सम्भाल रहे थे।

रात हुई, दीदी बोली- एक सरप्राईज़ बाकी है !

कुछ पल के लिए पतिदेव पास आये, बोले- बहुत आग लग रही हो !

उन्होंने पी रखी थी, नशा काफी था, होंठ चूसने लगे। बोले- बदल लो कपड़े !

उन्होंने मेरा लाचा खोला, फिर कुर्ती की डोरी खींची और अलग कर दी, पीठ पर चूम लिया।

मैं सिकुड़ सी गई।

अब दोनों आओ भी ! गाने की रसम पूरी करनी है !

पति ने मेरे मम्मे दबाये और मैंने भी सूट पहन लिया और बाहर गए। वहाँ पंरात में कच्ची लस्सी में सिक्का गिरा कर ढूंढने की रसम हुई। उसके बाद दीदी बोली- तेरे नंदोई सा ने तुम दोनों के लिए फाइव स्टार में स्वीट बुक
किया है !

पतिदेव को काफी नशा हो चुका था, दीदी ने नंदोई सा को उन्हें और पिलाने से रोका। कार में बैठ कर भी उनको काफी नशा था। नंदोई सा हमें छोड़ने आये। पहले नीचे पूरा डाइनिंग हॉल हम तीनों के लिए बुक था। मेरे लिए तब तक कोल्ड ड्रिंक आर्डर की, उन दोनों ने लिए मोटे पटियाला पैग ! दो पैग के बाद पतिदेव लुढ़क गए। मैं कुछ-कुछ समझ गई।

बस करिए न आप ! कितनी पिओगे ?

भाभी जान ! आज ही तो पीने का दिन है !

खाना खाया, नंदोई सा ने मुझे कमरे की चाभी गिफ्ट की और रूम सर्विस वाला मुझे कमरे तक लेकर गया। कमरा खोलते वक्त देखा- हाथ में दो चाभियाँ थीं- ४०५ और ४०७ वो दोनों भी आ गए !

जाओ भाई अपनी दुल्हन के पास ! सुहागरात मनाओ !

इनको बहुत ज्यादा पिला दी गई थी। कमरे तक आते वक्त तक दारू हाथ में थी। उतनी ही नंदोई सा ने पी लेकिन वो हट्टे-कट्टे थे।

ये तो बिस्तर पर लेटते सो गए। मैं वाशरूम गई। पहली रात के लिए सबसे महंगी
नाइटी खरीदी थी, उसी रंग की ब्रा और पैंटी ! बदल कर वापस आई ! लाल गुलाबों वाले बिस्तर पर में इनके साथ लिपटने लगी, सोचा कि इस से नशा कम होगा। शर्ट उतार दी लेकिन इन्हें कोई होश न था।

तभी मुझे मोबाइल पर कॉल आई- कैसी हो जान ? मुझे मालूम है कि क्या हो रहा होगा ! ऐसा करो, हाउस-कीपर ने दो चाभी दी थी ना ! इसकी सुबह से पहले नहीं उतरेगी। बाहर से लॉक करो और इधर आ जाओ !

लेकिन मैं नाइटी में हूँ !

कोई बात नहीं ! रात के बारह बज चुके हैं, इन कमरों में कम लोग ही आते हैं !

मैं उठी,
इनको हिलाया, कमरा लॉक किया और नंदोई सा के कमरे में चली गई।

वाह भाभी ! क्या खूबसूरती है ! मदहोश कर देने वाली !

यह आपने क्या किया? इनको इतनी पिला दी?

वो उठे, मुझे बाँहों में लेते हुए बोले- क्या करता कल से तूने होंठ चबा और बाद में कमरे में जवानी दिखाई !

आप बहुत खराब हो !

मेज़ पर शेम्पेन और बियर पड़ी थी, मुझे कह कुहा कर बियर पिला दी उसके बाद अपनी मर्ज़ी से मग भर पिया। वो मुझे सोफा पर बिठा बीच में बैठ मेरे स्तनपान करने लगे। सिसकियाँ फूटने लगी, मैंने पाँव से उनके लौड़े को मसल दिया।

इतने में दीदी की कॉल आई नंदोई सा को !

उस वक्त मैं उनकी गोदी में अधनंगी बैठी थी।

कहाँ रह गए आप? सब ठीक तो है?

हाँ, उन दोनों को भेज दिया जान कमरे में ! इसने ज्यादा पी ली है ! सहारा देकर छोड़ कर नीचे आया हूँ ! बेचारी जानकी घबरा गई है, इसलिए उन्हें कुछ बताये बिना मैं अपने दोस्त के साथ नीचे बार में हूँ, कहीं साला
साहिब कोई गलती ना कर दें !

दीदी बोली- कोई बात नहीं ! सही किया आपने ! खुद मत पीना !

और फ़ोन साइलेंट पर लगा दिया मेरी दोनों टांगें खोल मेरी चूत जो कि सुबह ही शेव करवाई थी, उसपे होंठ रख दिए। मैं भड़क उठी। सोफ़े पर कोहनियों के सहारे उठ कर चूत चुसवाने लगी। अह उह सी !

मेरी जान क्या चूत है तेरी ! क्या जवानी है ! बाग़ लगा है माली भी ज़रूर रखें होंगे !

मैं शरमा सी गई !

उठा मुझे बिस्तर पर लिटा दिया !

मेरे मम्मो पर बियर डाल डाल कर चाटने लगे।

वाह नंदोई सा ! और चाटो ! मसलो इनको !

भाभी, कसम से तेरे जैसी जवानी वाली लड़की नहीं चोदी !

दीदी भी सुन्दर हैं !

हैं, लेकिन मेरे इस चाँद के सामने उसका रंग भी फीका है !

बातें करते हुए मैंने उनको निर्वस्त्र कर दिया, उनको बेड पर धकेलते हुए उनके कच्छे को उतार उनके लौड़े पर एख दिए अपने कांपते होंठ !

इतना लम्बा लौड़ा नंदोई सा?

मैंने भी कसम से अभी तक इतना मोटा और लम्बा नहीं उतरवाया चूत में !

ओह मेरी रानी, दिलबर ! कस के चूस इसको !

मैं नशे में थी, कुछ भी बके जा रही थी,
मैंने ६९ में लेटते हुए उनके लौड़े को चूसा और अपनी चूत को खूब चुसवाया।

नंदोई सा ! अब रुका नहीं जा रहा ! आओ अपनी भाभी के पास और उतर जाओ गहराई में !

ओह बेबी !

मैंने टांगें खोल लीं, वो बीच में आये और मैंने अपने हाथ से पकड़ लौड़ा ठिकाने पर रख दिया। उन्होंने जोर लगाया और उसका सर अन्दर घुस गया। काफी मोटा था लेकिन बेडशीट को जोर से पकड़े मैंने उनका सारा अन्दर डलवा लिया।

ओह भाभी ! वाह, क्या चूत है तेरी साली ! कितनी चिकनी है ! तू देख तेरा नंदोई बहिन की लोड़ी आज रेल बनाता है तेरी !

आह ! रगड़ो ! और रगड़ो ! फाड़ दो मेरी ! हाय ! मेरे कुत्ते चोद अपनी कुतिया को !

मेरे मुँह से यह सुन उनमें जोश भर गया- बहनचोद ! देखती जा साली रांड कहीं की ! यह ले मादरचोद ! यह ले !

उई उई ई ई तू ही असली मर्द है कमीने ! तेरा
लौड़ा ही सबसे अच्छा है !

कुछ देर उसी आसन के बाद दोनों टाँगें कन्धों पर रखी, जिससे पूरा लौड़ा जाकर बच्चेदानी से रगड़ खाता तो मुझे स्वर्ग दिखता !

उसके बाद मुझे घोड़ी बना लिया और ज़बरदस्त झटके लगने लगे।

और तेज़ तेज़ !

साथ में खाली बियर की बोतल मेरी
गांड में घुसाने लगे।

हाय साले ! यह क्या करने लगा है !

चल साली कुतिया ! मेरे बाल खींच !

गांड पर थप्पड़ मारा और बोतल एक तरफ़ रख दी। एक पल में लौड़ा चूत से निकाला और गांड में डाल दिया !

ओह हा और और ! बहुत बढ़िया !

मेरी गांड मारने लगे, साथ में मेरे दाने को चुटकी से मसल रहे थे। एक साथ में मेरा मम्मा पकड़ रखा था।

फिर चूत में डाल लिया और तेज़ होने लगे।

मैं झड़ने वाली हूँ !

अह अह ऽऽ ले साली ! साली ले ! कहते कहते उन्होंने मेरी चूत में अपना पानी निकाल दिया, मेरी बच्चेदानी के पास गरम पानी छोड़ा, जिससे मुझे अता आनंद आया।

बाकी का मैंने मुँह में डाल साफ कर दिया।

साढ़े तीन के करीब दोनों बाथरूम गए, शॉवर लिया, मैंने कपड़े डाले और अपने कमरे में आई, पूरे बिस्तर पर सलवटें डाल दी और गुलाबों को बिखेर दिया। सारे कपड़े उतार दिए, सिर्फ पैंटी छोड़ कर ! पति को जाते वक्त ही मैंने अंडरवियर छोड़ निर्वस्त्र कर दिया था। उनके पास लेट गई, उनकी बाजू अपने ऊपर डाल दी, सो गई।

सुबह के सात बजे अपने ऊपर किसी को पाया- पतिदेव थे ! मैं सोने की एक्टिंग करने लगी, उन्होंने प्यार से मुझे उठाया, मैं चुपचाप बाथरूम गई रूठने की एक्टिंग करते हुए !

जान क्या हुआ?

इतनी पी ली थी? क्यूँ सोचा नहीं था कि मेरी बीवी के साथ पहली रात है ! नशे में रौंद दिया आपने मुझे ! अंग अंग हिला दिया !सॉरी ! आगे से ऐसा नहीं होगा ! आपने बिना प्रोटेक्शन के मेरे साथ सब कर दिया ! अभी हमने एन्जॉय करना है अगर अभी गर्भवती हो गई तो?

कल से हम बाहर निकाल लिया करेंगे, आज किस्मत पर छोड़ दो !

उसके बाद अगली रात पतिदेव ने चोदा। आज कम पी रखी थी, घर में थे, झड़ने के समय बाहर खींच मेरे मुँह में डाल दिया !

दोस्तो, यह थी मेरी मस्त चुदाई जो हर पल मेरी आँखों में रहती है !

उसके बाद मौका देखा एक बार और नंदोई सा ने चोदा ! शादी के अगले महीने ही मेरी माहवारी रुक गई, मुझे चक्कर आये, डॉक्टर ने खुशखबरी सुना दी।

रात को मैंने पति से ऊपर से खफा होते कहा- देख लिया उस रात का नतीजा ?

लेकिन चल छोड़ कोई बात ना ! किस चीज़ की कमी है हमें !

यह गर्भ नंदोई सा के कारण ठहरा था। पहली ही रात तीन बार अपना माल मेरी बच्चेएदानी के पास छोड़ा था ! था भी इतना लम्बा कि मानो अन्दर घुसकर बच्चा डाल आये !

उनको मैंने फ़ोन पर बताया कि इनका पानी मैंने कभी अन्दर नहीं डलवाया, हमेशा गांड में या मम्मों पर ! सिर्फ आपका पानी अन्दर डलवाया था।

नशे में वो बहुत खुश हुए।

अब जब मैंने लड़का जना है, सासु माँ बहुत खुश हैं, पति भी नंदोई सा ने बुआ की तरफ से मेरे बेटे को चार तोले सोने की चैन, कड़ा, डायमंड का लाकेट डाला !

सो कैसी लगी मेरी आप बीती ? लिखना ज़रूर !

फिर बताऊँगी आगे लाइफ में क्या हुआ !

बदनाम गली में नए बॉयफ्रेंड से चूत चुदवाई

गंदा सेक्स का मजा लिया मैंने अपने मायके में आकर. मेरी दोस्ती मेरी सहेली ने एक सड़क छाप लड़के से करवा दी. उसने मुझे चुदाई के लिए एक बदनाम गली में बुलाया.

दोस्तो, मेरा नाम नीलिमा है. पर लोग मुझे नीलू कहते हैं और मैं 25 साल की हूँ.

दिखने में मैं गोरी-चिट्टी, सुडौल फिगर वाली लड़की हूँ.
मेरी फिगर की साइज 34-30-38 की है और कद 5 फिट 7 इंच का है.

मेरी पिछली सेक्स कहानी
बदमाश स्टूडेंट्स ने विधवा टीचर को चोदा
को आपने खूब सराहा था. उसके लिए आप सबका दिल से धन्यवाद.

यह बात पिछले साल अक्टूबर की है, जब मैं दशहरा में दिल्ली से अपने घर छत्तीसगढ़ आ गई थी. इस बार मैं इधर लंबे समय तक रहने के लिए आई थी.

मैं दशहरा के दिनों में अपनी पड़ोस की बस्ती की एक सहेली काजल के घर कुछ ज्यादा ही आना-जाना करने लगी थी.

तब से उसी बस्ती का एक लड़का मुझे लाइन मारने लगा था.
उसका नाम विलास है और वह उम्र में भी मुझसे बड़ा था.

वैसे तो विलास दिखने में उतना हैंडसम बंदा नहीं है पर विलास और काजल एक ही बस्ती के थे और एक दूसरे को जानते भी थे.

काजल ने ही मेरी सैटिंग विलास से करवा दी थी.

मैं कुछ दिनों तब विलास से कॉल पर बात करती रही.
विलास मेरे साथ सेक्सी बातें ही किया करता था.
मुझे भी उस तरह की गंदा सेक्स करने की बात करने में बड़ा मज़ा आता था.

मैं इतना तो समझ गई थी कि विलास मुझे चोदना चहता था.
पर मैं खुद ही विलास को मना कर देती थी.

विलास अक्सर मुझे सार्वजनिक स्थान पर आने के लिए कहता था जो मुझे सुरक्षित नहीं लगता था.

फिर विलास ने एक दिन मुझे एक वीडियो भेजा.
उस वीडियो में विलास अपने काले लंड से खेल रहा था.

विलास का लंड भी कोई सामान्य आकार का नहीं था, एकदम मस्त मोटा–लंबा लंड था.

ऐसा लंड तो मेरे दिल्ली वाले बॉयफ्रेंड का भी नहीं था इसलिए अब मैं भी विलास से चुदवाने के लिए कहीं भी आने के लिए तैयार हो गई थी.

लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे घरवालों ने नवंबर में गोवा जाने की बात छेड़ दी और मैंने विलास को कुछ दिन इंतज़ार करने के लिए कहा.
लेकिन विलास था कि मान ही नहीं रहा था.

दीवाली की शाम विलास मुझे मेरे घर के पीछे वाली कंडोम गली में बुलाया जिस गली में लोग चोदा–चोदी करते थे और अपना इस्तेमाल किया हुआ कंडोम फेंक देते थे.
इसीलिए उस गली का नाम कंडोम गली पड़ गया था.

सच कहूँ तो मैं उस गली से कभी गुज़री भी नहीं थी.
लेकिन गंदा सेक्स करने, लंड खाने के लिए मैं उस बदनाम गली में जाने के लिए तैयार थी.

उस दिन मैं घर से यह बोल कर निकली थी कि मैं सहेली के घर जा रही हूँ और इसीलिए मैं हीरोइन बन के घर से निकली थी.

मैंने एक टाइट फिटिंग वाला टॉप और स्कर्ट पहनी थी.

जब मैं उस कंडोम गली में पहुंची तो विलास पहले से मेरा इंतज़ार कर रहा था.

विलास मुझे देख मुस्कुराते हुए बोला- एकदम माल लग रही हो नीलू रानी!
मैं भी मुस्कुराती हुई विलास से बोली- अच्छा, मैं तुम्हें माल लगती हूँ क्या?

विलास ने कोई जबाव न देते हुए सीधा मुझे अपनी बांहों में खींच लिया, जिससे मेरी चूचियां विलास के सीने से लग कर दब गईं और विलास मेरे रसीली होंठों को चूमने लगा.

विलास मुझसे बोला- माल तो तुम हो ही नीलू … इसी लिए तो तुम्हारे पीछे पड़ा हुआ हूँ.
मैं भी मुस्कुराती हुई बोली- वैसे यहां कोई आएगा तो नहीं?

अब मेरे बदमाश विलास ने मुझसे कहा- कोई आएगा तो उसे भी शामिल कर लेंगे.

मैं विलास की बात को सुन कर उसके छाती पर अपने हाथों से मारने लगी.
विलास ने हंस कर मुझे रोक लिया और मेरे एक हाथ को पकड़ कर अपनी पतलून में खड़े लंड पर रखवा दिया.

उफ्फ्फ … विलास के लंड को पकड़ते ही मेरी उत्तेजना जग गई थी.
मैं विलास की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी.

तभी विलास ने अपना मुँह आगे बढ़ा दिया.
मैंने भी अपना मुँह आगे बढ़ाया और हमारे होंठ एक दूसरे से सट गए.

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.
उफ्फ्फ … विलास तो मुझे चूमते हुए मेरे चूतड़ों को दबाए जा रहा था.

अब तक जितनी बार भी मैंने चूमाचाटी की है, मुझे हर बार पहली बार जैसा अहसास होने लगता है.
इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाती हूँ और शर्म लाज भुला कर मैं बिंदास रंडी सी हो जाती हूँ.

उधर विलास भी मेरे होंठों को चूमते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ को भी डालने लगा था.
उसने मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मेरी स्कर्ट को पीछे से उठा रखा था.

वह मेरी पैंटी में हाथ डाल कर मेरे चूतड़ों की दरार में अपनी उंगली से सहला रहा था.

‘ईईस्स्स … उउह्ह्ह’ मुझे बेहद मज़ा आ रहा था.
मैंने भी विलास की पतलून से उसके लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी.

विलास ने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग कर दिए और मुझे नीचे झुकाने लगा.
मैं झुक गई और तब विलास का बौखलाया हुआ लंड मेरे मुँह के सामने था.

विलास मुझसे कहने लगा- लो अब चूसो नीलू … जैसे तुम मुझसे बोला करती थीं!
मैं मुस्कुराती हुई विलास से बोली- लंड चूसना तो ठीक है … पर चुसवाने के चक्कर में कहीं तुम्हारा रस निकल न जाए!

विलास खुद भी बौखलाया हुआ था इसलिए उसने मेरी मुंडी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना तनतनाता हुए लंड ठूंस दिया.
मैं भी मस्ती से विलास के लंड को चूसने लगी.

‘ईईस्स्स …’ मन तो कर रहा था कि लंड चूसती ही रहूँ.

विलास भी मेरी चोटी पकड़ कर मेरे मुँह में अपना लंड आगे-पीछे करते हुए पेल रहा था और सिसक भी रहा था.

मैं ‘गल्प गल्प आहहह …’ करती हुई लंड चूस रही थी.

जल्द ही मैंने विलास के लंड को चूस चूस कर अपनी लार से लथपथ कर दिया.

विलास बोलने लगा- ईईस्स्स … नीलू, लंड तो तू बहुत मस्त चूसती है रे … चल अब मेरे आंड भी चाट ले साली रांड.

तो मैं मुस्कुराती हुई बोली- अच्छा, मैं रांड भी हो गई हूँ साले कमीने … लंड चुसवाने का मजा ले रहा है … चल अब अपना लंड ऊपर उठा … मैं तेरे आंड भी चाट लेती हूँ.

विलास ने अपना लंड पकड़ कर ऊपर उठा दिया.
उसके चिकने आंड मेरे सामने आ गए थे.
बड़े बड़े आंवले से आंड थे जो मस्त झूल रहे थे.

मैं उसके झूलते हुए आंडों में से एक आंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
विलास मज़े लेता हुआ ‘ईईस्स्स्स … आहहह … करने लगा था.

जितना मज़ा विलास को आ रहा था, उतना ही मज़ा मुझे विलास के आंडों को चूसने चाटने में आ रहा था.

यह सब मैंने विलास से कॉल पर बोला था इसीलिए विलास मुझसे ये सब करवा रहा था.

मुझे भी विलास के आंड को चूस चाट कर बहुत मज़ा आ रहा था.

करीब पाँच मिनट तक मैं विलास के आंडों को चूसती रही और अपनी लार से उसके आंडों को चिपचिपा कर दिया था.

अब विलास ने मुझे ड्यूरेक्स का कंडोम पकड़ा दिया.
मैंने विलास के खड़े लंड में कंडोम पहना दिया.

विलास ने मुझे खड़ा करते हुए सामने दीवार की तरफ झुकाया और मेरी स्कर्ट ऊपर करते हुए मेरी पैंटी को पूरा उतार दिया.

विलास पीछे से मेरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से फैलाए हुए था तो उसको मेरी गांड का खुला हुआ छेद दिख गया था.

विलास- ईईस्स्स्स … साली रंडी तू तो अपनी गांड भी मरवा चुकी है … तभी मैं सोचूँ कि तेरी गांड इतनी गदराई हुई क्यों है!
मैं मुस्कुराती हुई बोली- तो क्या तुम्हें गदराई गांड वाली पसंद नहीं है क्या?

विलास- तेरी गांड जितनी बड़ी है न … उतना ही मस्त है. आज गांड चाटे बिना मज़ा नहीं आएगा.

ये बोलते ही विलास ने अपना मुँह मेरी गांड में लगा दिया.
मेरी आह निकल गई ईईस्स्स्स … उउह्ह्ह!

वह एकदम से छेद में जीभ की नोक लगा कर चाटने लगा.

विलास मेरी गांड चाटते हुए बोला- ईईस्स्स्स … लगता है गांड के छेद में लक्स साबुन रगड़ रगड़ कर लगाती हो!
मैं अपनी गांड चटवाती हुई बोली- ईईस्स … उउह्ह्ह … तुम गांड चाट रहे हो या साबुन सूंघ रहे हो?

विलास गांड चाटते हुए बोला- तेरी गांड की खुशबू सूंघ कर चाट रहा हूँ … ईईस्स … बहनचोदी.

वह मेरी गांड चाटने के साथ मेरी बुर को भी चाटने लगा.
उफ्फ … आहहह …
मेरी गांड के साथ उसने मेरी फुदी को भी गीला कर दिया था.

फिर विलास ने मेरी बुर में थूका और खड़ा हो गया.
उसने मेरी बुर में अपना मोटा लंड रगड़ते हुए उसे मेरी बुर में एक झटके से पेल दिया.

मेरी चीख निकली- आह्ह … आह मर गई.
उसने बिना कुछ सुने मुझे चोदना शुरू कर दिया.

विलास का लंड मोटा था, इसलिए मेरी बुर को वह पूरी खोल कर चोद रहा था.
मैं बस जकड़ी हुई कुतिया की तरह ‘आह्ह … आह्ह …’ करती हुई कराह रही थी.

विलास मुझे चोदते हुए बोला- आहह … नीलू मेरी जान तुझको मज़ा आ रहा न?
मैं भी विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … ईईस्स … बहुत मज़ा आ रहा है आह्ह.

विलास मेरी बुर चोदते हुए मस्ती करने लगा. उसने उसी दौरान मेरी गांड के छेद में अपना अंगूठा घुसा दिया. उसने दूसरे हाथ से मेरी चोटी को खींच कर पकड़ रखा था.

अब विलास मुझे ज़ोर ज़ोर से ताबड़तोड़ धक्के भी लगा रहा था और मैं बस बिलबिलाती हुई मादक आवाजें निकाल रही थी- आह्ह्ह … आह्ह … ईईस्स्स!

मैं चुदते हुए कराह रही थी और सिसक भी रही थी.
विलास मुझे चोदते हुए रुका और उसने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया.

उसने मेरे टॉप को ऊपर उठाया और मेरी ब्रा से मेरी चूचियों को बाहर निकाल कर मेरे मम्मों को चूसने चाटने लगा.

ईईस्स्स … उफ्फ … अब तो और ज्यादा मजा आने लगा था. विलास मेरी चूचियों को चूस भी रहा था.
वह पूरा मुँह खोल कर मेरी चूचियों को अपनी लार से गीला करते हुए लथपथ कर रहा था.

कुछ देर बाद विलास ने मेरी एक टांग को उठाया और फिर से मेरी फुदी में लंड घुसेड़ा और ज़ोर ज़ोर से नीचे से ऊपर धक्के देते हुए चोदने लगा.

मैं फिर से ‘आह्ह … आह्ह …’ करने लगी.
विलास को और मज़ा आने लगा.

इसी लिए विलास ने मेरी दूसरी टांग को भी उठा लिया और अपने ऊपर झूला झुलाने लगा.

मैं विलास को अपनी बांहों में भर कर पकड़े हुई थी.

विलास मुझे नीचे से ऊपर चोदने लगा.
आह्ह … आह्ह … ईईस्स …

विलास हट्टा कट्टा था और कद में भी लंबा मर्द था. इसलिए वह मुझे उठा कर चोद रहा था.

उफ्फ्फ … ईईस्स …

विलास तो मेरी हालत ही ख़राब किए दे रहा था.

कुछ देर बाद विलास ने मुझसे दोनों पैरों को अपनी कमर से लपेटने के लिए कहा.
मैंने अपने पैरों से विलास की कमर को जकड़ लिया.

अब मैं भी विलास के लंड पर उछल उछल कर चुदवाने लगी.

ईईस्स्स … उफ्फ्फ … पूरा मज़ा आ रहा था.

ऊपर से विलास मेरे चूतड़ों को थप्पड़ पर थप्पड़ मारे जा रहा था.
चट …चट …

मैं आह्ह्ह … आह्ह … किए जा रही थी.
फिर विलास मुझे अपनी बाइक केटीएम के पास लेकर गया.

वह मुझे अपनी केटीएम बाइक की सीट पर लेटा कर मेरी दोनों टांगों को फैला कर पूरा जड़ तक लंड पेल कर धक्के देते हुए मुझे चोदने लगा.

मैं बस ‘आई ईई … आह्ह्ह … आह्ह्ह …’ करती हुई कराहने लगी थी.

कुछ ही देर बाद रफ्तार बढ़ गई और विलास के आंड मेरी गांड से लग कर थप … थप … की आवाज़ करने लगे थे.

मैं विलास से बोलने लगी- आह्ह्ह … आह्ह्ह … बस विलास अब बस करो.
विलास- आह रुक जा बस थोड़ी देर और थोड़ी देर आह मजा आ रहा है रंडी तुझे चोदने में ईईस्स्स!

तभी विलास ने मेरी एक टांग छोड़ते हुए अपने लंड को मेरी फुदी से निकाला और उसने झटके से कंडोम को निकाल कर मेरी एक चूची पर लगा दिया.
उसी वक्त उसने अपने गर्म लच्छेदार मुठ से मेरी चूत और झाँटों को नहला दिया.

उफ्फ … ईईस्स्स …

ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ था बल्कि उसके बाद मैंने विलास से दो बार और चुत चुदवाई थी.
वह भी उसी कंडोम गली में.

आप लोगों को मेरी यह गन्दा सेक्स कहानी पसंद आई होगी.
मैं आगे की कहानी भी बताऊंगी.

मेरी ये गन्दा सेक्स का मजा कहानी आप लोगों को कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं.

जवान भतीजे ने मिटाई चाची की प्यास

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सुनीता है, मेरी उम्र 45 वर्ष है, रंग गोरा और मेरा फिगर 36-32-40 है. मैं इंदौर में अपने पति के साथ रहती हूँ.
मेरे दो बच्चे हैं, दोनों दूसरे शहर में नौकरी करते हैं.

मेरे पति एक MNC में काम करते हैं. मेरे पति सुबह 8 बजे ऑफिस चले जाते हैं और शाम 7 बजे के बाद ही आते हैं. मैं पूरा दिन अकेली रहती हूँ या अपने कुछ सहेलियों के साथ कभी कभी पार्टी कर लिया करती थी.
मेरा दिन अच्छा कट रहा था.



एक दिन मेरे पति ने मुझे अचानक बताया कि उनके भाई का लड़का हमारे शहर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये आ रहा है और वो हमारे साथ हमारे ही घर में ही रहने वाला है.

मुझे यह सही नहीं लगा, उसके हमारे घर में रहने से मेरी पूरी आज़ादी छीन जाएगी.

पर बात घर की थी तो मजबूरन मुझे मानना पड़ा.

मैंने ऊपर के कमरे में उसके रहने का इंतजाम कर दिया.

अजय सीधा साधा लड़का था, पढ़ाई लिखाई में भी अच्छा था. मैं कई बार उससे मिली हूँ और वो मेरी काफी इज़्ज़त भी करता है लेकिन अभी मुझे उसका आना पसंद नहीं था.

कुछ ही दिनों में अजय घर आ गया.
वो 19 साल का बड़ा लड़का हो गया था, कद काठी भी अच्छी हो गई थी.

मैं तो पहले उसे देखती ही रह गई.
फिर मैंने उसे ऊपर का कमरा दिखा दिया.

अब अजय हमारे साथ हमारे घर में रहने लगा.
वो काफी शर्मीला लड़का था.

शुरू से ही कम उम्र के लड़के मुझे काफी पसंद हैं.
मेरे पति की उम्र 50 साल की हो गई है, अब उनमे पहले जैसे बात नहीं रही तो अब मेरी यह दबी हुई इच्छा अब अजय को देख के बाहर आने लगी थी.

एक दिने मैं सूखे कपड़े लेने छत पे जा रही थी. तभी मेरी नजर बाथरूम पे पड़ी जो अजय के रूम के बगल में था.
उसका दरवाजा थोड़ा खुला था और अंदर अजय नंगा नहा रहा था.

वो बिल्कुल दरवाजे के पास खड़ा शावर से नहा रहा था और खुले दरवाजे से झांटों के बीच लंड साफ़ दिख रहा था.
उसका 7 इंच का लंड बिल्कुल मेरे सामने था, मैं तो हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ भी सकती थी.

जवान लंड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गई, मैं तो बस खड़ी खड़ी देखती ही रह गई और दरवाजे के पीछे वो मजे से नहा रहा था.
थोड़ी देर बाद जब उसका लंड दरवाजे से छिप गया तब मैं किसी तरह खुद को मनाती हुई नीचे आ गई, कपड़े भी नहीं लाई.

अजय प्यारा तो था ही … पर अब मुझे वो और भी प्यारा लगने लगा था.
अब मैं उसका और भी ध्यान रखने लगी और धीरे धीरे उसके करीब आने की कोशिश करने लगी.

वो मेरे पास केवल 4 साल के लिये आया था और अब मैं बिना समाये गंवाये जल्द से जल्द उसका लंड लेने के लिये तड़प रही थी.
अब मुझे अपने पति में कोई इंटरेस्ट नहीं था, मुझे तो बस अजय ही चाहिये था.

मैं चाहती थी कि पहल अजय करे क्यूंकि घर की बात थी, कुछ गड़बड़ हुई तो पूरी उम्र सुनना पड़ेगा.
अपने पति, अपने बच्चों को मैं क्या मुँह दिखाऊंगी.

अजय जिस बाथरूम में नहाता था उस बाथरूम की कुण्डी थोड़ी मुश्किल से लगती थी, शायद इसलिए नहाते समय बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रखता था.

अब मैं हररोज अपने भतीजे के लंड का दीदार करती थी और कई बार जब वो कपड़े बदल रहा हो, उसी समय बहाने से उसके कमरे में चली जाती थी और वो मुझे देख के शर्मा जाता था.

धीरे धीरे कुछ महीने बीत गए, अब मैं और अजय काफी नजदीक आ गए थे.
अब अजय ऊपर से नंगे बदन केवल निक्कर में मेरे सामने आ जाता था, मैं भी उसे ऐसे दिखती जैसे कोई बात नहीं … लड़के घर में ऐसे ही रहते हैं.

पर मेरी चूत अब भी खाली थी और अजय के लंड के लिये तड़प रही थी.

मुझे अब ये समझ में आ गया था कि लंड लेना है तो अब बात मुझे खुद आगे बढ़ानी पड़ेगी.

मैं दिन के समय सलवार सूट या टॉप और लोअर पहनती हूँ. मैं इन कपड़ों में साधारण सी हाउसवाइफ दिखती हूँ और रात में नाइटी.

मेरी नाइटी स्लीवलेस और बड़े गले की है, इसमें मैं सेक्सी दिखती हूँ. ये नाइटी अब तक मैं अपने पति का सामने ही केवल पहना करती थी पर अब यह नाइटी मैंने अजय के सामने भी पहनना शुरु कर दी ताकि उसे अपने बड़े बड़े चूचों का अच्छे से दीदार करा पाऊं.

अब मैं उठते बैठते अजय को अपने स्तनों की दीदार करने लगी.
उसकी नजर तो मेरी चूचियों की घाटी में आकर मानो फंस ही जाती थी, जब भी हमारी नज़र मिलती तो वो झेम्प जाता और मैं मुस्कुरा देती.

एक दिन मैं नाइटी पहन के अपनी छत पे प्लांट लगा रही थी.
तभी वहाँ अजय भी आ गया.

मैं मौका देखते ही अपने नाइटी घुटनों तक मोड़ के कुछ इस तरह बैठ गई कि सामने आने से अजय को मेरी मोटी मोटी जाँघें और पैंटी साफ़ दिखे.

अजय पहले तो थोड़ी देर बड़े ध्यान से मेरी नाइटी के अंदर देखता रहा, मैं भी मजे से दिखाती रही.
पर थोड़ी ही देर में वो छत की दूसरी ओर जाने लगा.

मैंने उसे तुरंत बुलाया और उससे इधर उधर की बातें करने लगी ताकि मैं उसे ज्यादा समय तक मैं उसे अपने नंगे अंगों को दिखा पाऊं.

ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए पर बात अब भी बनती नज़र नहीं आ रही थी.
वो बड़ा सभ्य लड़का था.

अब मैं छत पे कपड़े सुखाने को अजय को भेज दिया करती थी जिसमे मेरी ब्रा और पैंटी भी होती थी.
वो भी बड़े प्यार से मेरे ब्रा पैंटी को सुखाता था.

एक दिन मुझे अपनी एक सहेली के यहाँ जाना था.
मैंने अजय को कहा- मुझे लेट हो रही है और मेरा सूट प्रेस नहीं है, प्लीज मेरा सूट प्रेस कर दो, नहीं तो मैं लेट हो जाऊंगी.

अजय मेरे कमरे में ही मेरा सूट प्रेस करने लगा और मैं अपने रूम के अटैच्ड बाथरूम में नहाने चली गई.

मैं जल्दी नहा कर अपने सफ़ेद पेटीकोट को अपने वक्ष के ऊपर बाँध कर बाहर आई और उसे जल्द प्रेस करने को बोलती हुई अपने बाल संवारने लगी.
सफेद पेटीकोट मेरे गीले बदन से पूरा चिपक गया था.

मैं चारों तरफ घूम घूम कर बाल संवार रही थी ताकि अजय को अपना बदन अच्छे से दिखा पाऊं.
अजय भी चोरी चोरी मुझे निहार रहा था.

सफेद पेटीकोट में मेरी 36 इंच की चूचियाँ जबरदस्त लग रही थी.
जब मैं झुक रही थी तो पीछे से मेरी नंगी चूत भी दिख रही थी.
यह सब देख कर अजय का बुरा हाल हो रहा था.

वो जल्दी से प्रेस करके बाहर जाने लगा तो मैंने उसे फिर रोक लिया और इधर उधर की बातें करने लगी.

फिर उसकी और पीठ करके पेटीकोट खोल के ब्रा पहनने लगी.
आईने में अजय की बैचनी मुझे साफ़ दिख रही थी.

मैंने अजय को अपनी ब्रा का हुक लगाने को कहा.
वो डरते डरते मेरे पास आया और हुक लगाया, उसके हाथ काम्प रहे थे.

मैंने उसे कहा- अब तुम्ही रोज मेरी ब्रा का हुक लगा दिया करना, मुझे हाथ पीछे जाने में प्रॉब्लम होती है.
वो हामी भर कर वहीं खड़ा रहा, जैसे वो बुत बन गया हो, जैसे उसे कुछ समझ ही ना आ रहा हो.

फिर मैंने वहीं उसके सामने ब्रा में कैद अपनी चूचियों को दिखाते हुए पेटीकोट नीचे कमर पर बाँधा.
वो मेरे बदन को निहार रहा था और मैं उससे इधर उधर की बातें कर रही थी जैसे यह सब नार्मल था.

फिर मैंने उसके सामने ही पैंटी पहनी.
अजय ऐसे व्यवहार कर रहा था जैसी मानो मैंने उसे सम्मोहित कर लिया हो.
वो चुपचाप मेरे अधनंगे बदन को देख रहा था और मुझसे आँखें बचा के अपने लंड को सहला रहा था.

उस दिन के बाद अजय हमेशा मेरी ब्रा का हुक खोला और लगाया करता था.
कई बार मैं उसे खोलने को बुला लेती थी.

मैं भी ब्रा पहनते और खोलते समय उसे अपने चूचों के दर्शन करवा देती थी.

अब अजय ज्यादा समय मेरे साथ बिताने लगा था और मेरी ध्यान भी रखने लगा जैसे मानो मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ.

खाना भी हम साथ बनाते थे और किचन में काम करते समय कई बार वो मेरे अंगों को छू देता था जिसके बदले मैं भी मौका देख के उसके अंगों को छू देती या अपने चूचियाँ या चूतड़ उसके बदन से रगड़ देती थी.

जब अजय कॉलेज जाता या अपने दोस्तों के पास जाता तो मेरा दिल करता था मैं भी उसके साथ चली जाऊं … पर मैं खुद को कंट्रोल करती.
अजय भी समझदार था, वो मेरे पति के सामने मुझे दूरियां बना के रखता था.

अजय के साथ मुझे मजा तो आ रहा था पर अब भी मेरी चूत अब भी खाली पड़ी थी, उसे अब तक अजय लंड का स्वाद नहीं मिला था.

अब हम दोनों एक दूसरे को गले लग के गुड मॉर्निंग विश किया करते थे.
अजय भी कई बार मुझे जोर से अपने बांहों में जकड़ लेता था और बहाने से मेरे कूल्हों से मुझे पकड़ के मुझे उठा लेता था.
कई बार अजय मुझे पीछे से पकड़ के मेरी गांड में अपने लंड फंसा देता था और कभी मेरे पेट को तो कभी मंगल सूत्र को देखने के बहाने मेरी चूचियों से खेलता रहता था.

मुझे भी बड़ा मजा आता था और मैं भी अपने चूतड़ों को मटका मटका करके अपनी गांड से उसके लंड को मसलने की कोशिश करती रहती थी.
एक दूसरे के अंगों को छूना, गाल और गले को चूमना अब हमारे लिए आम बात हो गई थी.

एक दिन मैं नहा रही थी और गलती से तौलिया ले जाना भूल गई क्योंकि तौलिया छत पे था.

पहले मैंने नंगी ही बाहर कमरे में आकर तौलिया ढूंढा पर नहीं मिलने पर अजय को तौलिया लाने को बोल के बाथरूम में वापस चली गई.

थोड़ी देर बाद अजय तौलिया लेकर आया और मुझे आवाज लगाई.
मैंने कहा- दरवाजा खुला है, अंदर आकर रख दो.

अजय अंदर मुझे शावर के नीचे नंगी नहाती हुई देखने लगा.
वो बिना पलक झपकाए अपनी चाची को देख रहा था.

मैंने पूछा- तुम्हें भी नहाना है क्या?
वो बोला- नहीं, ये बाथरूम काफी बड़ा और सुन्दर है.

मैं भी उसके हाथ से तौलिया लेती हुई अपने नंगे बदन को पौंछने लगी.
लेकिन मैं चाहती थी कि अजय तौलिया से मेरे गीले बदन का पानी सुखाये. पर वो चूतियों की तरह खड़ा रहा.

फिर हम बातें करते हुए बाहर आ गए और मैंने कपड़े पहन लिए.

उस दिन मुझे अजय पे काफी गुस्सा आ रहा था, इतनी सुन्दर औरत जिसकी दीदार को सारा मुहल्ला परेशान रहता है, वो नंगी खड़ी है और इस चूतिये को बाथरूम दिख रहा था.

अजय समझ गया कि मैं नाराज हूँ.
वो मुझे मेरी उदासी का कारण पूछने लगा और ज़िद करके सोफे पे मुझसे चिपक का बैठ गया.

जब उसकी जिद बढ़ गई तब मैंने बात पलटने को उससे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
उसने साफ़ मना कर दिया.

फिर मैंने बातों बातों में पूछा- पहले कभी किसी लड़की को नंगा देखा है क्या?
उसने धीरे से शरमाते हुए कहा- चाची जी, आपको कई बार देखा पर आज आपको देख के मजा आ गया.

फिर उसने धीरे से पूछा- आप अपने नीचे के बालों को क्यों नहीं साफ़ करती?
उसके मुँह से इस तरह की बात की मुझे उम्मीद न थी.

फिर भी मैं तपाक से बोली- किसके लिये साफ़ करूं?
उसने पूछा- क्यों चाचाजी कुछ बोलते नहीं?

मैंने कहा- उन्हें जैसे भी मिल जाये सब चलता है, वैसे तुम भी तो साफ़ नहीं करते.

यह सुनते ही वो सकपका गया और पूछा- आपको कैसे मालूम?
मैं बोली- दरवाज़ा खोल के नहाओगे तो सब मालूम चल ही जायेगा.

कुछ दिन और गुजर गए अब हम दोनों को एक दूसरे के सामने नंगा होने में कोई शर्म नहीं आती थी.
पर अब भी हमारे लंड और चूत का मिलन नहीं हुआ था.
आग दोनों और थी पर कोई पहल करने को तैयार नहीं था.

कपड़े के ऊपर से तो हम एक दूसरे के बदन को प्यार से सहला लेते थे पर हाथ अंदर ले जा कर सहलाना अभी बाकी था.

फिर एक दिन मैंने भी मन बना के बाथरूम में अपने झांटों को साफ़ किया और अपनी पीठ पर साबुन लगाने के बहाने अजय को अंदर बुलाया.
उस वक्त मैं अपनी पेटीकोट को चूचियों पे बंधी हुई थी और अजय अपनी निक्कर और टीशर्ट में था.

मैंने उसे कपड़े उतरने को कहा.
उसने अपनी टीशर्ट तो उतार दिया पर अपनी निक्कर नहीं उतरना चाहता था.
हम दोनों ने कई बार एक दूसरे को नंगा देखा था तो उसकी वो बात मुझे अच्छी नहीं लगी.

फिर भी मैंने अपनी पेटीकोट उठा के उसे अपनी बिना बालों वाली सुन्दर चूत का दर्शन करवाए.

अजय ने यह देख के तुरंत अपनी निक्कर उतार दी और अपना बिना बालों वाले 7 इंच के लंड दिखाया.
उसने भी अपने नीचे के बालों को मेरे कहने पे साफ़ कर लिया था.

यह देख के हम दोनों ने एक साथ वाओ बोले और नज़दीक आकर एक दूसरे के अंगों को छूने सहलाने लगे.
जल्द ही अजय का लंड खड़ा हो गया.

उसने मेरा पेटीकोट और अपनी निक्कर उतार दी और मेरे बदन को पागलों की तरह चूमने सहलाने लगा.
मैंने भी उसका लंड पकड़े हुए खुद को उसे सौंप दिया.

बाथरूम में ये सब करना असुविधाजनक लग रहा था तो मैं उसे उसके लंड से खींच के रूम में ले आई और वहाँ बेड पे लिटा के उसके उसके ऊपर चढ़ के चूमने लगी और अजय का लंड अपनी चूत में रगड़ने लगी.

अजय की सांसें तेज चल रही थी.
मैंने धीरे से पूछा- पहली बार क्या?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा.

मैं समझ गई थी कि अब सब मुझे ही करना है.

तो मैं अजय को लिटा के धीरे से अपनी चूत को उसके खड़े लंड पे सेट करके धीरे धीरे बैठने लगी और धीरे धीरे अजय का लंड मेरी चूत में समाता चला गया.
अजय लेटा हुआ अपनी गर्दन उठा के यह सब देख रहा था.

फिर मैंने अजय के लंड पे सवार होके जी भर के चुदवाया और फिर अजय ने मेरे साथ ही अपना पानी मेरे चूत की गहराई में छोड़ दिया.

हम दोनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे.

थोड़ी देर बाद जब आंख खुली तो मैं अब भी अजय के ऊपर और अजय का लण्ड मेरे अंदर था, जो धीरे धीरे अपना आकर ले रहा था.
मैंने पूछा- मजा आया?
उसने शरमाते हुए हाँ कहा और मेरी चूचियों में अपना मुँह छिपा लिया.