जब बेटे की शैतानी का पता चला कि, बेटा स्कूल में अपनी टीचर को देखते हुए मुठ मार रहा था। तो टीचर ने मुझे कॉल किया और उसे स्कूल से निकलने की बात कही। तो मैने उसकी घर पर क्लास लेनिकी डिसाइड किया । मगर जब वो घर पर आया तो मैने नोटिस किया कि उसके पेंट का उभार अभी भी है। तो मैने उसे डाट लगते हुए बेडरूम में खींचा और उसके कपड़े बदलने को कहा। और में भी अपने रूम में कपड़े बदलने चली गई।
मगर उसने कपड़े बदलना छोड़कर मुझे कपड़े बदलते देखने लगा। में कपड़े बदलने के लिए अपनी पेंट नीचे की तभी उसने उसने आव देखा न ताव और मुझे खींच लिया और अपनी बांहों में भरकर जबरदस्ती करने लगा। मैं उस से अलग होने लगी लेकिन उसने मुझे जकड़ लिया। और चाटने लगा और अपने हाथों से मेरी गांड को भी दबाने लगा।
मॉम की गांड़ में जीभ को घुमाते हुए।
हालांकि मुझे उसकी हरकतों में मजा आ रहा था पर फिर भी दिखाने के लिए मैं उससे अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। लेकिन वो फुल जोश में था। कभी वो मेरी गांड दबाता तो कभी बूब्स। जिससे मैं भी गर्म होने लगी थी और धीरे-धीरे मेरी वासना जागने लगी थी। फिर उसने अपनी पेंट नीचे खींच कर उसके लन्ड को आजाद कर दिया। तब में भी उसके लन्ड को देखकर चकित रह गयी। यह तो बिल्कुल तगड़े मर्द की तरह था। तकरीबन 7 इंच लम्बान और 3 इंच मोटा होगा। वो अपने हाथ में पकड़कर उसे गोल गोल हिलने लगा। में उसे ऐसे हिलाते देख बोली- ये क्या कर रहे हो, पागल हो गए हो क्या?
आज से पहले उसने ऐसी हरकत कभी भी नहीं की थी। आज तो उसने मुझे खींच लिया। और अपना लन्ड मेरे हाथ में रख दिया। में भी जोश में आकर उसके लन्ड को चूसने लगी।
अपने ही बेटे का लन्ड चूसते हुए.बेटे के लन्ड को अपने बूब्स से मसलते हुए।बेटे के रस को और गाढ़ा कर ने के लिए, उसकी गोटियों को चूसी…हल्के से बेटे के लन्ड को अपने चूत मे लेते हुए।बेटे का पूरा लन्ड अपने अंदर समा लिया।बेटे ने गहराई तक पेला लन्ड का पानी मुंह में लेते हुए लन्ड का पानी पीने से तृप्ति का एहसास हुआ।
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हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम मालती है. मेरी पिछली सेक्स कहानी कुंवारी चूत प्यार में चुद गई आप सबको बहुत पसंद भी आई थी, जिसको लेकर मुझे बहुत से ईमेल भी मिले थे. मैं किसी को ज़्यादा जवाब नहीं दे पाई, इसलिए आपसे माफी चाहूँगी.
मैं एक छोटे से गांव की हूँ. ससुराल वालों की खेती है, पर सभी लोग शहर में रहते हैं. कभी कभी हमारे परिवार के लोग अपने गांव में आते हैं. खेती का कुछ काम होता है. गांव की भी एक सेक्स कहानी है, उसे मैं आपको बाद में बताऊंगी.
वैसे तो मेरा फिगर साइज़ आपको पहले भी मैं बता चुकी हूँ. नए दोस्तों के लिए मैं अपने 34-28-36 के फिगर को फिर से बता रही हूँ. मैं देखने में बहुत खूबसूरत हूँ.
शादी के कुछ दिनों बाद ही हम लोगों ने शहर में ही एक किराये का अलग मकान लिया. हमारे घर में कुछ दिक्कत चल रही थी. उधर जगह कम थी, इस वजह से भी दूसरा घर लेना पड़ा. इस नए घर से मेरे पति को ऑफिस जाने आने में जरा नज़दीक भी पड़ता था. मेरे पति काम से ज़्यादा बाहर ही रहते थे.
इस नए घर में जाने के कुछ दिन बाद मेरी मुलाकात मेरे बाजू में रहने वाली पड़ोसन वनिता से हुई. कुछ ही दिनों में हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए.
मेरे घर में मैं और मेरे पति ही रहते थे. वनिता के घर में उसके पति और ससुर के अलावा एक लड़का भी था. वनिता की सास अब इस दुनिया में नहीं थीं.
वनिता की उम्र 26 साल की है और उसकी फिगर भी मेरे जैसे ही 34-26-36 की है. उसका वजन 54 किलोग्राम के लगभग होगा व हाइट 5 फिट 3 इंच की है. वो देखने में खूबसूरत थी.
दोपहर में हम घर में ही रहते थे, तो वनिता मेरे घर आ जाती थी या मैं उसके घर चली जाती थी. हम दोनों धीरे धीरे खुल कर बातें करने लगे. हमारी बातों में सेक्स का रंग जमने लगा था. चुदाई के बारे में हम दोनों आपस में बड़े खुल कर चर्चा करती थीं. शादी से पहले क्या हुआ और शादी के बाद भी किसका किससे चक्कर रहा. आस पास के इलाके में कौन सी लड़की का किसके साथ चक्कर चल रहा है … वगैरह वगैरह.
फिर वनिता के ससुर जी से भी मुलाकात हुई. उसने मेरी थोड़ी बहुत बातें होती रहती थीं. जैसे वो पूछते कि कैसी हो, खाना खाया या नहीं … वगैरह.
फिर वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार से मेरे पति की पहचान भी अच्छे हो गई. राजेन्द्र कुमार भी मेरे घर आने लगे. ख़ास बात यह कि वनिता के ससुर राजेन्द्र बहुत हंसमुख इंसान थे. वे हमेशा मजाक के मूड में ही रहते थे. अपने इसी स्वभाव के चलते वो मेरे साथ और मेरे पति के साथ भी मजाक करने लगे.
एक दिन मैं घर में थी और वनिता कुछ काम से बाहर गई हुई थी. उसके ससुर राजेन्द्र कुमार जी बाहर गए हुए थे. तो उसके घर की चाभी मेरे पास थी.
वनिता के ससुर राजेन्द्र कुमार करीब 12:30 बजे मेरे घर पर आए. उन्होंने दरवाजे की बेल बजाई, मैं उस वक्त कपड़े धो रही थी. मेरी सलवार आधी गीली थी. तब मैंने बिना ओढ़नी के ही जल्दी से जाकर दरवाजा खोल दिया.
सामने राजेन्द्र कुमार थे. वे मुस्कुरा कर मेरे घर में अन्दर आ गए. उन्होंने पूछा- क्या कर रही थी मालू? मैं बोली- जी कपड़े धो रही थी. आप बैठें, मैं अभी आती हूँ.
मुझे ख्याल ही नहीं था कि वो मेरे मम्मों को देख रहे हैं. मैं कपड़े साफ़ करने लगी और बातें भी करने लगी. तभी मेरा ख्याल गया कि वो मेरे मम्मों को हिलते हुए देख रहे हैं. तब तक मेरा काम हो गया था, तो मैं हाथ साफ करके उनको पानी देने लगी.
पानी लेने के बहाने उनके हाथ मेरे हाथ को टच हो गए. राजेन्द्र जी ने मेरे हाथ से पानी का गिलास लिया और पानी पीने लगे. तब तक वनिता भी आ गई. वे दोनों अपने घर चले गए. मैं भी अपना सब काम करके हॉल में आ गई और टीवी ऑन करके सीरियल देखने लगी.
कुछ टाइम बाद दरवाजे की बेल फिर से बजी. मैंने दरवाजा खोला, तो सामने वनिता थी. वो अन्दर आई और मेरे पास बैठ कर टीवी देखने लगी. टीवी देखते हुए हम दोनों बात करने लगे.
बातों बातों में मैंने पूछ लिया- यार वनिता, तेरी सास को गुज़रे हुए कितना टाइम हुआ? तो वो बोली- करीब 3 साल हो गए … क्यों पूछ रही हो? मैं बोली- बस ऐसे ही पूछ रही हूँ, वैसे तुम ससुर राजेन्द्र जी का ख्याल बहुत अच्छे से रखती हो ना. वो बोली- हां यार, रखना पड़ता है.
मैं चुप हो गई.
फिर वो बोली- यार एक बात पूछना चाह रही थी. मैंने कहा- हां पूछो न! तो बोली- यार मुझे लगता है कि मेरे ससुर जी को तुम कुछ ज्यादा ही देख रही थीं. मैं बोली- नहीं यार … ऐसा कुछ भी नहीं था. वनिता बोली- हम्म झूठ मत बोलो यार … एक बात कहूँ, मेरे ससुर जी तुम पर फ़िदा हैं. मैं बोली- वो कैसे? तो बोली- यार तुम जवान हो, खूबसूरत हो … और जब मैं चाभी लेने आई, तो दरवाजा खुला था, ससुर जी पानी का गिलास हाथ में ले रहे थे. उस वक्त उनकी नजरें तेरे मिल्की मम्मों पर थीं. मैं बोली- नहीं यार. तो वो बोली- ओके तो चल ट्राय करके देखते हैं कि क्या होता है.
मैं हंसी मजाक में उसकी बात मान गई. फिर वो कुछ देर बैठ कर अपने घर चली गई.
इसके बाद मैंने राजेन्द्र जी के सामने इस बात को चैक करना शुरू कर दिया. वे मेरे घर आते, तो मैं कभी उनके सामने झुक कर झाड़ू लगाने लगती, कभी पौंछा लगाने लगती. साथ ही मैं चुपके से उनके सामने देखती, तो वो हमेशा ही मेरे चूचों और गांड को ही देखते रहते.
इस तरह दो महीने हो गए.
फिर एक बार पति को रात में अपने काम से तीन हफ़्तों के लिए बाहर जाना था. तब वनिता के बेटे का बर्थडे भी था. उसने हम दोनों को भी बुलाया था.
उसी दिन पति को बाहर जाना था तो वे बोले- तुम होटल चली जाना, मैं कुछ गिफ्ट लेकर वहां दे जाऊंगा. पति करीब छह बजे चले गए.
बर्थडे की पार्टी रात में एक होटल में थी, उसमें खाना भी रखा गया था. पार्टी में बहुत सारे लोगों को आना था, तो मैं सज धज कर जाने के लिए तैयार होने लगी. मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी और ससुर जी को याद करते हुए मैंने गहरे गले का ब्लाउज पहना, ये ब्लाउज पीछे से एकदम खुला हुआ था, जिसमें से मेरी पीठ एकदम नंगी दिख रही थी. मैं खुद को आईने में देखती रही और मुस्कुरा दी. इस ब्लाउज में से मेरे मम्मे बाहर आने को मचल रहे थे.
तभी वनिता मुझे बुलाने आई और मुझे देख कर बोली- वाओ … बड़ी मस्त लग रही हो … लगता है आज ससुर जी को दीवाना बना ही दोगी. उसकी इस बात पर मैं भी मुस्कुरा दी.
उसके बाद मैं घर को ताला मार कर निकल गई. हम सभी शाम को 7:30 को बाहर निकले थे. मैं, वनिता और वनिता के पति व राजेन्द्र जी और एक अन्य मेहमान स्विफ्ट कार से निकल पड़े. मेहमान कार में आगे बैठ गए. वनिता, मैं और राजेन्द्र जी पीछे की सीट पर थे. वनिता खिड़की वाली सीट पर थी. ससुर जी मेरे बाजू में बैठ गए थे. कार हाइवे पर आई, तो राजेन्द्र जी की कोहनी मेरे मम्मों को टच होने लगी भी. वनिता जानबूझ कर अपनी टांगें फैला कर बैठी थी. जिससे मैं और भी ज़्यादा वनिता के ससुर जी से चिपक गई थी. इसलिए उनको और भी मौका मिल गया था.
मैं उनकी कोहनी लगने से कुछ नहीं बोली. तो वो और हिम्मत करते हुए मेरे मम्मों को धीरे धीरे दबाने लगे. अब मुझे भी मजा आने लगा था. कुछ ही देर में हम लोग होटल पहुंच गए थे.
तभी मेरे पति का फोन आया, वो बोले- आप लोग कहां पर हो? मैंने उन्हें बताया- हम लोग मोनार्क होटल में हैं. वे बोले- ओके मैं भी आ रहा हूँ.
कुछ देर बाद पति गिफ्ट लेकर पहुंच गए. उसके बाद हम सबने केक काटा और छोटी सी पार्टी की. पार्टी के बाद हम सभी रात में घर पहुंचे. तब 10:30 बज गए थे. कार में पहले से ही जगह नहीं थी. इसलिए पति बोले- आप लोग निकलो, मैं आता हूँ.
फिर वैसे ही कार में बैठे और घर को आने लगे. तो इस बार कार में बैठते ही राजेन्द्र जी ने अपना काम शुरू कर दिया और मेरी नाभि पर हाथ घुमाने लगे. मैंने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें देखा, तो वे थोड़ा रूक गए. फिर एक दो मिनट बाद वे मेरे मम्मों को छूने लगे. मेरी चुत का हाल बुरा हो चला था.
मैं हाथ से उनके हाथ को दबाने लगी. तभी वनिता की नज़र मुझ पर पड़ी, तो वो मुस्कुरा दी.
कुछ टाइम में हम लोग घर आ गए. मैं सबसे बाद में उतरी.
राजेन्द्र जी ने सबसे कहा- आप लोग चलो, मैं कुछ सामान लेकर आता हूँ.
उन्होंने मुझे भी रुकने को बोला. अपना मोबाइल फोन मेरे हाथ में धीरे से देते हुए बोले- ज़रा बैटरी देखना.
सब लोग बिना कुछ सोचे घर पर चले गए. तब राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और किस करके बोले- बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हो. मैं शर्मा कर बोली- जी छोड़ दीजिएगा. कोई देख लेगा.
मैं घर पर आ गई. घर पर आते ही पति भी घर पहुंच गए. मैंने साड़ी उतारी और नाइटी पहन ली. उस रात पति ने मुझे एक बार चोदा और बाहर चले गए.
मैं वनिता के ससुर राजेन्द्र जी के बारे में सोचने लगी और अपनी प्यासी चुत में उंगली करने लगी.
एक बार चुदने के बाद भी मेरी चुत से ढेर सारा जूस निकल गया. फिर मैं सो गई.
सुबह पति का फोन आया कि वो आज ही वापस आ जाएंगे. उनका काम नहीं हुआ था और तीन हफ्ते तक रुकने का कार्यक्रम निरस्त हो गया था.
पति से बात करने के बाद मैंने फ्रेश होकर अपना देखा. करीब 12:00 बजे तक मैं अपने सब काम निपटा चुकी थी. तभी किसी ने दरवाजे की बेल बजाई. मैंने दरवाजा खोला तो सामने राजेन्द्र जी थे. वे मुस्कुरा कर अन्दर आ गए और मेरे पति के बारे में पूछने लगे. मैं बोली- जी वो तो रात को ही बाहर चले गए थे. लेकिन आज शाम तक आ जाएंगे.
अब तक मैं दरवाजा बंद कर चुकी थी. मैं बोली- आपके लिए चाय बना कर लाती हूँ.
मैं किचन में चली गई. उस दिन मैं लैगी पहनी थी और फिट टॉप पहना हुआ था. इस ड्रेस में मेरा फिगर साफ़ दिख रहा था. मैं चाय बना कर लाई और उन्हें दी. वो चाय पीते हुए बोले- अगर दूध पिलाती, तो और मजा आता. मैं बोली- ओके अभी लाती हूँ.
तो राजेन्द्र जी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- मुझे वो दूध नहीं पीना, तुम अपना दूध पिलाओ मेरी रानी. राजेन्द्र जी ने मुझे अपनी गोद में खींच कर मेरे गालों पर एक किस कर दिया.
मैंने उन्हें किस करने दिया. वो और भी आगे बढ़ने वाले थे कि मैंने उन्हें रोक दिया.
मैं बोली- अंकल जी, अभी नहीं … मुझे कुछ टाइम और दो … उसके बाद हम सब करेंगे. वे भी मान गए और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- ओके … पर मैं रोज किस करूंगा. मैंने हमे भर दी- जी ओके.
वे कुछ टाइम बाद चले गए.
उसके एक घंटे बाद वनिता आ गई. वो कार वाली बात पूछने लगी.
तब मैं बोली- हां मजा तो आ रहा था. वो बोली- ओके फिर आज क्या हुआ?
मैंने उसे सब बता दिया कि अंकल ने किस किया, मम्मों को दबाया … वगैरह वगैरह.
तो वनिता बोली- ओह गॉड … अब कल मेरे बाहर जाने पर तू उन्हें अपने घर बुला लेना और आगे वो क्या करते हैं, मुझे सब बताना. मैं हंस कर आंख मारते हुए बोली- ओके.
फिर दूसरे दिन वनिता सुबह काम से बाहर चली गई. उस दिन 12 बजे से 2 बजे तक मैं भी अकेली थी. पति सुबह ही ऑफिस निकल गए थे.
वनिता के जाते ही उसके ससुर जी मेरे पास आ गए. मैंने दरवाजा खुला ही रखा था. मुझे पता था कि वनिता के जाते ही राजेन्द्र जी मेरे पास आ जाएंगे.
यही हुआ … वो वनिता के जाते ही मेरे घर आ गए. उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
मैं किचन में थी, वो वहीं आ गए और मुझे पीछे से पकड़ कर किस करने लगे. तब मैं बोली- अंकल, हॉल में चलो, मैं वहीं आती हूँ.
ससुर जी हॉल में आ गए. कहानी में सेक्स का रंग चढ़ने लगा था. मेरी चुदाई की घड़ियां समाप्त होने को थीं. आपके मेल का इन्तजार रहेगा.
सभी को नमस्कार, मेरा नाम अनुक्ति है मुझे घर पर सभी अनु नाम से ही बुलाते हैं. मैं मध्य प्रदेश से हूँ.
मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं. पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.
दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं दो साल से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ. मुझे sexystory.art.blog के बारे में मेरी सहेली ने बताया था, तभी से मैं यहां पर कहानिया पढ़ती आई हूँ.
यह 2013 की बात है. मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.
शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था. बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.
इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.
कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे. क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.
मेरी क्लास में ही संजय भी था. वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था. मेरी दोस्ती संजय से थी. हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.
संजय और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे. हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.
छवि भी इस बात को जानती थी. उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.
इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था. हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.
मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.
संजय देखने में अच्छा लड़का था. उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे. उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी. उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.
उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स संजय के बर्थडे पर उसके घर गए थे.
संजय के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं. पर संजय ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था. वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.
संजय और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे. धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.
वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता. मैं भी उसे मना नहीं करती थी.
उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया. मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी. ऐसे ही समय गुजरता रहा.
कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.
उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.
हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.
वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.
फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी. मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.
संजय चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.
बस इसी तरह चल रहा था.
संजय सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था. पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.
कुछ दिन बाद संजय ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.
मैं भी फटाफट तैयार हो गयी. वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.
मैं छवि को बोल कर आई थी कि संजय के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.
मैंने संजय से पूछा- कहां चलना है? तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं. मैं राजी हो गई.
वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे. उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.
तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे. हम भी वहीं चले गए.
संजय ने कहा- क्या विचार है? मैंने कहा- मैं नहीं आती.
वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया. और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.
वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.
थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.
भीड़ कम होती गयी.
संजय ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं. मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?
पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए. वहां कोई नहीं दिख रहा था.
थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा. वो दोनों कपड़े पहन रहे थे. उन्होंने हमें नहीं देखा.
फिर संजय ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.
मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है. पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.
वहां जाने के बाद संजय मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है. मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं! उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.
इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया. उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.
उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.
मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी. मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.
मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.
संजय की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी. वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.
उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी. उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.
उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था. बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.
वह मुझे चूमने लगा.
करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ. मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है. उसने कहा- ठीक है.
तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा. फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.
उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे! उसने कहा- ठीक है.
उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी. वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.
मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा. तो संजय बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.
मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा. फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.
वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.
मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती. उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.
फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.
उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी? मैंने कहा- नहीं.
उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.
मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.
अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.
संजय ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.
मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया. मुझे स्वाद ठीक लगा.
उसने अपने कपड़े पहन लिए. तो मैंने कहा- अब चलते हैं.
उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं. मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.
उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है. मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी. उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.
उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा. वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.
मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे. तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.
फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है. मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.
पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी. चूत में हल्के हल्के बाल थे.
वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा. मुझे भी मजा आने लगा.
मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.
उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी. मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.
उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो. वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.
उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी. वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.
इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और संजय ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.
फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.
अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय संजय ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है. मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी. होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.
संजय अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया. बस फिर जुगाड़ हो गया.
मैंने संजय से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी. उसने कहा- ठीक है अनु.
उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया. फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.
दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना. वह किसी काम से बाहर चला गया.
संजय ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया. पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.
ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया. मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.
उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए. उसका लंड खड़ा होने लगा था.
वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.
फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.
वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.
मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.
मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.
उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं. मैंने कहा- ठीक है.
वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता. इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.
मैं भी उसके लंड को चूस रही थी. मेरी चूत गीली हो चुकी थी.
वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.
मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और संजय के लंड को पहना दिया.
बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा. जिससे मैं पागल सी हो गयी.
फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.
मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.
उसने कहा- अनु रेडी! मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.
उसने झटके से लंड अन्दर किया. वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.
उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला. इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.
उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा. मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.
उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!
फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.
वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था. मुझे भी मजा आ रहा था.
वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा. कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.
वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.
कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.
मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था. मेरी चूत फट चुकी थी.
तभी संजय आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.
मैं बाथरूम में गयी. जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा संजय मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था. मैंने कहा- लाओ दो इधर.
उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी. मैंने कहा- फिर मैं! उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.
मैंने अपने कपड़े पहन लिए. संजय बोला- अनु मजा आया?
मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है. उसने कहा- ठीक हो जाओगी.
मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम? संजय ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.
मैं कुछ नहीं बोली.
उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ? तो मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो. मैंने कहा- घर?
उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से. मैंने कहा- ठीक है.
फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.
उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.
हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं. उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.
वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं. क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.
हाय दोस्तो, मैं कुलदीप, उम्र 19 साल, गोवा से हूं। यह मेरी पहली कहानी है।
घर में मैं और मेरी मम्मी ही हैं। उनका नाम अनीता है।
पापा का देहांत होने के कारण सारा बोझ मम्मी के सर पर आ गया था।
मम्मी ने एक योग अकादमी में योग सिखाना शुरू कर दिया था। घर में बहुत तंगी थी तो मुझ पर भी बहुत दबाव था।
मेरी मम्मी की उम्र 40, रंग गोरा और हाईट 5.6 इंच है। बेटा होने के नाते मैंने कभी मम्मी को उस नज़र से तो नहीं देखा परंतु आप सबके लिए बता दूं कि मम्मी की चूचियों का साइज़ 36 है, कमर 30 है और भरी हुई गांड 40 की है। इसीलिए मम्मी 30 साल की माल औरत लगती हैं।
मैं एक नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी हूं जिसके पीछे मेरी मम्मी का बहुत बड़ा हाथ है।
वो योगा टीचर हैं। उन्होंने अपने आपको फिट रखा हुआ है, इसी कारण मेरे आस-पड़ोस का हर नौजवान मम्मी की बड़ी गान्ड को चोदने का सपना देखता रहता है।
मम्मी ज्यादातर जींस या लेगिंग्स ही पहनती हैं, साड़ी और सूट-सलवार तो कभी कभी ही चलता है।
उन्होंने पापा के गुजर जाने के बाद शादी तो नहीं कि परंतु उनके संबंध 4 या 5 लोगों से ज़रूर रहे हैं। इनमें 4 मेरे से उम्र में थोड़े बड़े थे।
मम्मी की उम्र का एक आदमी जो अकादमी का मालिक भी है, उसके साथ मम्मी के संबंध अभी भी हैं। वो अंकल मम्मी को छोड़ने भी आते हैं और कभी कभी लेने भी आते हैं।
मम्मी कभी-कभी उनके साथ पार्टियों में भी जाती है। मम्मी को कई बार अंकल ने हमारे घर पर ही चोदा है और मैंने उनकी चुदाई अपनी आंखों से देखी है।
मुझे बुरा तो लगता था परंतु मम्मी की खुशी इसी में ही थी तो कुछ नहीं कर पाता था।
आज जो कहानी मैं बताने जा रहा हूं ये कहानी दो साल पहले की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में स्टेट के सिलेक्शन के लिए काफ़ी मेहनत कर रहा था। जब सिलेक्शन का वक्त आया तो मुझे मेरे कोच ने ट्रायल्स में बाहर कर दिया।
इस बात का मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर पर आकर रोने लगा। मॉम ने पूछा तो मैंने उनको सारी बात बताई। वो कहने लगी कि वो कोच से खुद बात करके सब सही कर देगी।
फिर सुबह होते ही मैंने और मम्मी ने नाश्ता किया और मम्मी ने अपनी जॉब से छुट्टी ले ली और कहा- बेटा आज मैं तेरे साथ स्कूल चलूंगी। मैंने भी हां कह दिया।
मैं स्कूल के लिए तैयार होने लगा तो मम्मी तैयार हो चुकी थीं। उस दिन मम्मी कुछ अलग रही थीं। उन्होंने लाल रंग की चमकदार साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उनका जिस्म उभर कर बाहर आ रहा था।
उनके चूचे एकदम मिसाइल की तरह तने हुए थे और गांड एकदम बम लग रही थी।
हम घर से निकले और फिर थोड़ी देर बाद हम स्कूल चल दिए। स्कूल के अंदर हम घुसे ही थे कि मेरी मम्मी को सब बड़े बच्चे और पुरुष टीचर हवस भरी निगाहों से देखने लगे।
फिर हम जैसे ही ग्राउंड में कोच के पास पहुंचे तो स्पोर्ट्स वाले बच्चों और कोच की आंखें फटी की फटी रह गईं।
कोच से मैंने मम्मी का परिचय कराया तो दोनों ने अपने नाम बताए और दोनों के बीच कुछ बातें हुईं।
मेरे कोच का नाम अभिषेक था। अभिषेक की उम्र 28 साल, रंग गोरा और हाईट पूरी 6 फिट थी।
मुझे अपनी मम्मी को देखकर ऐसा लगा जैसे मेरी मम्मी को कोच पसंद आ गया हो। फिर कोच ने कहा- चलो अनिता जी, स्पोर्ट्स रूम में जाकर बात करते हैं।
फिर हम तीनों स्पोर्ट्स रूम में चल दिए। स्पोर्ट्स रूम में घुसते ही कोच ने मम्मी को कुर्सी पर बैठाया और मैं खड़ा रहा।
मम्मी और कोच आपस में बात करने लगे।
कोच ने मम्मी से कहा- आपका बेटा स्टेट लेवल तक खेलने लायक प्लेयर नहीं है इसीलिए हम इसको नहीं ले सकते। मम्मी ने कहा– अभिषेक जी, मुझे अपने बेटे से बहुत उम्मीदें हैं, देख लो कुछ हो जाए तो!
मम्मी ने थोड़ा कुर्सी पर झुक कर कोच सर को अपनी छाती के दर्शन करवा दिए जिससे कोच के चेहरे पर एक हवस भरी मुस्कान तैर गई। फिर कोच ने कहा- अनिता जी, अब मैं कुछ नहीं कर सकता, अब लिस्ट जा चुकी है। तभी मम्मी ने कहा– मैं अपने बेटे को टीम में लाने के लिए कुछ भी कर सकती हूं, कृपया करके एक मौका तो दें?
इस बात पर कोच मेरी मॉम की क्लीवेज में घूरने लगा और मॉम थोड़ा और नीचे झुक गई। मुझे समझ आ गया कि सर के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे, जरूर मम्मी की चुदाई होने वाली है।
फिर मम्मी ने मुझसे कहा– बेटा तुम बाहर जाकर प्रैक्टिस करो, मैं इनसे अकेले में कुछ बातें करना चाहती हूं। मैं रूम से बाहर निकल गया।
कुछ देर तो मैं वहीं पर खड़ा रहा। मैंने सोचा कि अंदर झांक कर देखता हूं कि मम्मी अभी तक क्यों नहीं आई।
जब मैंने देखा तो दरवाजा अंदर से लॉक हो चुका था। अब तो मेरा शक पक्का हो गया था।
पीछे की ओर एक खिड़की थी। मैं चुपके से पीछे गया और खिड़की के नीचे बैठ गया।
फिर धीरे धीरे नजर उठाते हुए मैंने कमरे में अंदर झांक कर देखा। कोच ने मम्मी को टेबल पर बिठाया हुआ था और उनकी साड़ी कमर तक खुली हुई थी, उनका ब्लाउज उतर चुका था और वो नारंगी कलर की ब्रा में थी।
कोच मेरी मम्मी की चूचियों को दबाते हुए उनके होंठों को चूम रहा था और मम्मी भी उसके गले में बाहें डाले हुए उसका साथ दे रही थी। इतने में मम्मी ने अपनी ब्रा खोल दी।
मम्मी की चूचियां कोच के सामने हवा में आजाद हो गईं। मैं मम्मी की गोरी और मोटी रसीली चूचियों को देखकर हैरान रह गया। ऐसी ही हैरानी शायद कोच को भी हुई होगी।
उसने मम्मी को टेबल पर गिराया और बुरी तरह से उसकी चूचियों को भींच भींचकर पीने लगा।
मम्मी के चूचों को चूसते हुए कोच ने कहा– अनीता जी, जब से आपको देखा है तब से ही इन चूचों को चूसने के लिए दिल मचल रहा था। मम्मी बोली- मेरे बेटे को टीम में जगह दोगे तो मैं आपको स्वर्ग की सैर करवा सकती हूं।
कोच- तो करवाइये ना अनीता जी, मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूं। आपके बेटे की टीम में जगह पक्की करवाना मेरे हाथ में है।
इतने में ही मम्मी ने कोच की लोअर के ऊपर से उसके लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया और कोच के मुंह से कामुक बातें निकलने लगीं- आह्ह … स्स … अनीता जी … आप तो बहुत रोमांटिक हैं … ऐसी लेडी तो मुझे पहली बार मिली है।
अब कोच काफी उत्तेजित हो गया और उसने मेरी मम्मी के बदन से साड़ी को बिल्कुल अलग कर दिया। जल्दी से उसने पेटीकोट उतारा और मम्मी की पैंटी के ऊपर से चूत को रगड़ने लगा। मम्मी भी सिसकारने लगी।
फिर उसने पैंटी में हाथ देकर चूत को अच्छे से रगड़ना शुरू कर दिया। अब मम्मी भी अपनी चूचियों को दबाते हुए आह्ह … स्स … आह्ह … स्स्स … करने लगी।
कोच ने मम्मी की चूत में उंगली डाल दी और वो एकदम से उचक सी गई। वो मेरी मॉम की चूत में उंगली चलाने लगा तो मम्मी बहुत गर्म हो गई। उसने कोच की लोअर नीचे खींच दी और उसे नंगा कर लिया।
जल्दी से मॉम ने उसके लंड को मुंह में भरा और तेजी से चूसने लगी।
कोच जोर जोर से सिसकारने लगा- आह्ह … स्स्स … हाय … साली रंडी … आह्ह … क्या मस्त चूसती है तू … आह्ह … खा जा मेरे लंड को रांड … स्स … हाय … चूस जा पूरा! वो दोनों हवस में जैसे पागल हो चुके थे।
फिर कोच ने मेरी मम्मी की पैंटी को उतार दिया और खुद भी नंगा हो गया। उसने मम्मी को पलटा लिया और मॉम की मोटी गांड उसके सामने थी। उसने मॉम की गांड पर चांटे लगाने शुरू किए।
कई चांटे मारने के बाद मॉम की गांड लाल हो गई। फिर उसने मम्मी की गांड में मुंह लगा दिया और उसको चाटने लगा। मॉम भी पागल होने लगी।
टेबल पर झुकी हुई मॉम की चूचियां आगे पीछे हिल रही थीं और वो आगे पीछे होते हुए अपनी गांड को कोच के मुंह पर रगड़ रही थी।
मुझे यह सब देखकर गुस्सा तो आ रहा था लेकिन अंदर ही अंदर मज़ा भी बराबर आ रहा था। मैंने मम्मी को पहले भी नंगी देखा था लेकिन इस बार और ज़्यादा मज़ा आ रहा था।
फिर कोच ने मम्मी की चूत में थूक दिया। उसने अपने लंड पर भी थूक लगा लिया।
उसने मॉम को सीधी किया और अपना लन्ड मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी एकदम से सिहर सी गई।
फिर कोच ने मम्मी की दोनों टांग पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया। कुछ देर में मॉम को भी मजा आने लगा। मम्मी की चुदाई कोच बहुत बेरहमी से कर रहा था।
अब मॉम अपनी चूत को खुद कोच के लौड़े की तरफ धकेल रही थी।
थोड़ी देर बाद कोच ने मम्मी को टेबल पर बैठा दिया और खुद भी बैठ गया। फिर उसने मम्मी को लिटा कर मम्मी की चूचियों में लन्ड फंसा कर चूचियों को चोदना शुरू किया। मॉम की मोटी चूचियों के बीच लंड अच्छे से रगड़ खा रहा था।
लन्ड मम्मी के मुंह तक टच हो रहा था। मम्मी और कोच ने फिर एक ज़ोरदार किस की।
अब मॉम कोच को लिटा कर उनके ऊपर बैठ गई और कोच ने मम्मी की चूत के बजाय गांड में लन्ड पेल दिया।
मम्मी उचक गई और फिर आराम से लंड को धीरे धीरे करके पूरा उतरवा लिया। लंड को गांड में लेकर वो आराम से चुदने लगी।
धीरे धीरे दोनों का जोश बढ़ने लगा और कोच अब तेजी से जोर लगाते हुए नीचे से मॉम की गांड में लंड को पेलने लगा।
ये सब देखकर मेरे लंड का भी बुरा हाल हो गया था।
मैं मुठ मारना चाहता था लेकिन वहां पर खतरा था। कुछ देर चोदने के बाद कोच ने मम्मी को टेबल से नीचे उतार दिया।
मम्मी को कुर्सी पर घोड़ी बना कर कोच ने उनकी चूत में लन्ड डाल दिया। मम्मी को चूत चुदवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
15 मिनट चूत मारने के बाद फिर कोच ने फुर्ती से मम्मी को घुटनों पर बिठाया और मम्मी के मुंह में लन्ड डाल दिया और मुख चोदन करने लगा।
वो मॉम का सिर पकड़ कर मुंह को चोद रहा था। मम्मी को सांस नहीं आ रही थी तो मम्मी की आंखों में आंसू आने लगे।
कुछ देर मुंह चुदाई करने के बाद कोच ने मम्मी को उल्टा किया और मम्मी की गांड पर माल झाड़ दिया। अब दोनों थक चुके थे।
उनकी चुदाई खत्म होते ही मैं भी वहां से सरक लिया लेकिन मेरे लंड का बुरा हाल था। मैं सीधा टॉयलेट में गया और मुठ मारने लगा।
मेरे ख्यालों में मम्मी की चुदाई और सिसकारियां चल रही थीं।
फिर झड़ने के बाद मैं स्पोर्ट्स रूम के पास गया। अभी भी दरवाजा बंद ही था।
मैंने खिड़की से झांक कर देखा कि मम्मी कोच की गोदी में बैठी थी। मम्मी और कोच ने कपड़े पहन रखे थे।
फिर दूसरी तरफ जाकर मैंने रूम का गेट खटखटाया तो सर ने आ कर गेट खोला और मम्मी मुझे देखकर अपने कपड़े ठीक करने लगीं।
इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मम्मी बोली- चल कुलदीप, सर से बात हो गई है। तुझे टीम में लेने के लिए सर मान गए हैं। मॉम फिर से कोच सर के पास गई और उनसे हाथ मिलाकर धन्यवाद करने लगी।
कोच ने मॉम को मेरे सामने ही गले लगा लिया। मॉम भी अच्छी तरह से चिपक कर उनसे गले मिली।
मैंने देखा कि कोच ने धीरे से मेरी सेक्सी मॉम की गांड पर हाथ फेरते हुए कहा- दर्शन करवाते रहिएगा अनीता जी! मॉम ने भी शरारती स्माइल दी और वहां से आ गई।
फिर मम्मी ने रूम से बाहर आकर अपने पुराने यार को कॉल लगाकर कहा- मिश्रा जी, जल्दी हमको लेने के लिए कुलदीप के स्कूल आ जाओ। यह कहकर मम्मी ने फोन रख दिया।
थोड़ी देर स्कूल के बाहर इंतजार करने के बाद मिश्रा जी अपनी गाड़ी लेकर आ गए।
मम्मी मिश्रा जी के साथ आगे बैठ गईं और मैं पीछे वाली सीट पर बैठ गया। हम तीनों घर पहुंच गए तो मम्मी ने मुझे बोला– बेटा तुम घर में जाकर पढ़ाई करो, मैं मिश्रा जी के साथ दोबारा हाफ डे जॉब जा रही हूं।
मैं समझ गया कि मम्मी जॉब तो जा रहीं हैं लेकिन साथ साथ मिश्राजी ने उनको चोदने का प्लान बनाए रखा होगा इसीलिए जल्दी है। मैंने मम्मी और अंकल को बाय कहा और घर में आ गया।
तो दोस्तो, मेरी सेक्सी मॉम की स्टोरी कैसी लगी? ईमेल के ज़रिए अपनी राय मुझे ज़रूर दें। मेरा ईमेल आईडी है- rpatilemail@gmail.com